अगर ये देश ना हो तो दुनिया में फैल सकती है भुखमरी | Most Advance Agriculture Country - instathreads

अगर ये देश ना हो तो दुनिया में फैल सकती है भुखमरी | Most Advance Agriculture Country

दोस्तों भारत एक कृषि प्रदान देश है और
भारत में ज्यादातर लोग खेती करते हैं
ज्यादातर लोगों को लगता है की भारत दुनिया
में लोगों का पेट भरने के लिए बहुत बड़ा
योगदान देता है और दोस्तों एक देश ऐसा भी

है जो भारत से बहुत ज्यादा छोटा है पर इस
दुनिया की करोड़ लोगों का पेट भर रहा है
अगर यह देश ना हो तो दुनिया में भुखमरी
बढ़ जाएगी दोस्तों ये देश भारत से लगभग 50

गुना छोटा है पर फिर भी यह भारत से लगभग 3
गुना ज्यादा अनाज की पैदावार करता है
दोस्तों आज हम जिस देश की बात कर रहे हैं
वो है उत्तरी पूर्वी यूरोप में बसा नहीं

डालें जो बाकी देशों के मुकाबला बहुत छोटा
है पर फिर भी आज दुनिया का दूसरा सबसे
बड़ा फूड एक्सपोर्टर है तो चलिए दोस्तों
आपको बताते हैं की आखिर कैसे इतना छोटा
दें दुनिया के करोड़ लोगों का पेट भर रहा

है दोस्तों आपको हम यह बताएं की इतना छोटा
सा देश आखिर कैसे दुनिया के इतने सारे
लोगों की भूख मिटा रहा है चलिए उससे पहले
हम आपको बताते हैं थोड़ा सा नीदरलैंड के
बारे में उत्तरी पूर्व यूरोप में बेस नहीं
द लैंड का कुल क्षेत्रफल लगभग 41 543

स्क्वायर किलोमीटर है यहां पापुलेशन लगभग
1.74 करोड़ यहां पर 1300 से ज्यादा पर
स्क्वायर किलोमीटर की दूरी पर रहे द आपको
जानकर हैरानी होगी पर अमेरिका नीदरलैंड्स
लगभग 270 गुना बड़ा है वहीं रूह स्नेहा

लैंड्स लगभग 412 गुना बड़ा है वहां ये
भारत से लगभग 50 गुना छोटा है दोस्तों
पिछले कई सालों से दुनिया के सबसे अमीर
देशों की गिनती में क्षमा है और इसकी सबसे
बड़ी वजह है यहां पर की जाने वाली खेती

इतना छोटा होने के बावजूद भी ये दुनिया के
कई देशों के फूड आइटम्स प्रोवाइड कर रहा
है नीदरलैंड दुनिया में बढ़ती हुई फूड की
डिमांड को अपने कंधे पर उठा हुए हैं

दोस्तों आपको ज्वाइन करता आज जो भोग गया
पर साल 2022 के अंदर पुरी दुनिया की
पापुलेशन लगभग 800 करोड़ हो जाएगी और आने
वाले समय में और तेजी से बढ़ेगी ऐसे में
अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा डिमांड होगी
तो वह खाना जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती

जाएगी फूड की डिमांड भी बढ़ती चली जाएगी
ऐसे में अगर नीदरलैंड नहीं होगा तो दुनिया
में भुखमरी हालत पैदा हो जाएंगे साल 1980
से साल 22 तक फूड कंजप्शन लगभग 2 गुना बढ़
गया है और आगे आने वाले सालों में और

ज्यादा पड़ेगा ऐसे में नहीं तो लैंड का
दुनिया से भुखमरी मिटाने में और बड़ा
योगदान होगा नींद ए लैंड में कोई भूखा
नहीं सोता वर्ल्ड वॉर फर्स्ट के टाइम पर

जो पुरी दुनिया में aaluon का गल पद रहा
था अब तब भी नींद ए लैंड में aaluon की
कोई कमी नहीं है पर सेकंड वर्ल्ड वॉर के
टाइम पर यहां भुखमरी की हालत पैदा हुए द
और हजारों लोग भुखमरी का शिकार हुए तब

यहां की सरकार ने फैसला किया की इस बार
जैसे हालत वहां पर से यहां पर कभी पैदा ना
हो इसलिए यहां की सरकार ने यहां की फूड
प्रोडक्शन की टेक्नोलॉजी को ज्यादा से

ज्यादा डिवेलप करने का डिसीजन लिया उसके
बाद से आज तक यहां पर कोई भी भूखा नहीं
सोया है यहां आगे किसान लगातार खेती के
लिए नई-नई टेक्नोलॉजी को डिवेलप करने वाला
की आप इनके खेती की टेक्नोलॉजी की अंदाजा

ऐसी बात से लगा सकते हैं की साल 1980 में
यहां लगभग 180 टर्न आल उगाए जाते द वहीं
अभी यहां पर लगभग 507000 आलू गए जाते हैं
कुछ सालों में इधर लैंड ने अपनी फूड

प्रोडक्शन की टेक्नोलॉजी को इतना डिवेलप
कर लिया है नीदरलैंड दुनिया में दूसरा
सबसे बड़ा फूड एक्सपोर्टर है जबकि पहले
नंबर पर अमेरिका सबसे बड़ा फूड एक्सपोर्टर

है ये देश सब्जियां और फूलों का सबसे बड़ा
एक्सपर्ट है दुनिया में आलू और प्याज सबसे
ज्यादा ऐसी देश में एक्सपोर्ट होते हैं
दुनिया में लगभग एक तिहाई सब्जियों के बीच

नीदरलैंड में उगते हैं शायद आप लोगों से
कुछ लोगों को लग रहा होगा की नीदरलैंड की
मिट्टी उपजाऊ होगी तभी इतना छोटा सा देश
आज दुनिया का सबसे बड़ा फूड एक्सपोर्टर है

तो दोस्तों आपको बता दें की नीदरलैंड ना
सिर्फ साइज में 1200 छोटा है बल्कि भारत
की जमीन नीदरलैंड की जमीन से लगभग 95%
ज्यादा फॉर डायल है यानी की भारत की
मिट्टी जितनी उपजाऊ है उतनी नीदरलैंड की

मिट्टी उपजाऊ नहीं है फिर भी ये भारत से
लगभग तीन गुना ज्यादा खेती करता है जहां
भारत की एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट वेल लगभग 45
बिलियन डॉलर्स है वहीं नीदरलैंड की
एक्सपोर्ट वैल्यू लगभग 105 बिलियन डॉलर्स

है दोस्तों नीदरलैंड में खेती की इतनी
ज्यादा तकनीक विकसित होने से या
एग्रीकल्चर एजुकेशन का बड़ा हाथ है यहां
की तकनीक कुछ डिवेलप करने में यहां की
एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी वैगन इंडियन

यूनिवर्सिटी और रिसर्च सेंटर वर का बहुत
बड़ा योगदान है ये यूनिवर्सिटी विश्व की
सबसे बड़ी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी बन चुकी
है दुनिया भर से स्टूडेंट एग्रीकल्चर की
पढ़ करने आते हैं और साथ ही दुनिया के

बड़े-बड़े साइंटिस्ट्स यहां एग्रीकल्चर की
नई नई तकनीक सीखने आते हैंi इधर लैंड की
न्यू वर्सिटी एजुकेशन का ही नतीजा है की
देश दुनिया में इतने बड़े फूड एक्सपोर्टर
के रूप में उभरा है चलिए दोस्तों आपको

बताते हैं की ऐसी क्या खास बात है चीन से
नीदरलैंड की जो एग्रीकल्चर तकनीक है वो
इतनी डिवेलप है और क्या वो ऐसी तकनीक उसे
करते हैं जिनसे छोटा सा देश आज इतने बड़े
लेवल पर उभर के सामने आया है नीदरलैंड में

खेती छोटे-छोटे टुकड़ों में की जाती है इस
देश की आधी ज्यादा जमीन का इस्तेमाल खेती
करने के लिए किया जाता है नीदरलैंड की
जमीन भी कम है और यहां की मिट्टी की उपजाऊ
शक्ति भी बहुत कम है फिर भी यहां खेती की
तकनीक बहुत लाजवाब है यहां भारत की तरह

खेती नहीं की जाती है यहां किसने को
दिन-रात धूप में खड़े रह कर अपना पसीना
नहीं माना पड़ता है यहां की फूड प्रोडक्शन
के टेक्नोलॉजी काफी मॉडर्न है और यही वजह

है की भारत देश से इतना छोटा होने के बाद
भी ये देश फूड प्रोडक्शन में इतना आगे है
दोस्तों आपको जानकर हैरानी होगी पर
यूरोपियन यूनियन से एग्रीकल्चर के लिए
नीदरलैंड को फंड भी सबसे कम दिया जाता है
अगर नीदरलैंड में कोई किसान यूरोपियन

एग्रीकल्चर सब्सिडी के लिए अप्लाई करता है
तो पहले सरकार और वेगन आर यूनिवर्सिटी
उसके साथ ग्रंथि को एग्जामिन करती है वह
है की एंड गण यूनिवर्सिटी नीडल एंड की
एग्रीकल्चर लैंड पर हमेशा नजर रखती है

ताकि जो सोर्सेस वहां पर अवेलेबल है उनका
बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया जा सके और
जो लिमिटेड सोर्सेस है वो बिल्कुल भी
वेस्ट ना हो दोस्तों आपको पता है की यहां

की किसने को हमेशा अपने खेत में ड्रोन
कैमरा लगा कर रखना पड़ता है और अपना डाटा
यूनिवर्सिटी के रिसचर्स को देना पड़ता है
ओह स्लाइड या फॉर्म की रिसर्च के बाद
रिसर्च फॉर्म हाउस को उनके लैंड के लिए
सजेशन देते हैं रिसचर्स ही कीटाणु को

बताते हैं की उनकी लैंड के लिए कौन सी फसल
सबसे ज्यादा सही रहेगी और फसल को कितना
पानी चाहिए होगा किस तरह से अपनी फसल की
देखभाल करनी है कितनी सूरज रोशनी फसल को
चाहिए साथ में कौन से मौसम में किस तरह की
खेती करनी है ये सब किसने को बताया जाता

है इसीलिए किसान रिसोर्सेस की बातों को
मैन करें खेती करते हैं और इससे किसने
काफी फायदा होता है इसके साथ ही खेती के
लिए मॉडर्न इक्विपमेंट्स का उसे किया जाता
है जैसे खेती में रोबोट और ड्रोन कस्टमर

किया जाता है इसके अलावा यहां के ट्रैक्टर
भी काफी ज्यादा एडवांस टेक्निक्स होते हैं
दोस्तों यहां के ट्रैक्टर फसल लगाने से
लेकर जुटा मोबाइल और खेत दोनों सब कम करने
माहिर होते हैं किसने को बस मशीनों को

ट्रैक करना होता है इन मशीनों में रूट
पहले से ही सेट कर दिया जाता है उसी
रास्ते पर ट्रैक्टर और मशीन अपना कम करते
जाते हैं अगर बीच में कोई प्रॉब्लम आती है
तो फॉर्म हाउस जो उनको ऑपरेट करते हैं

उनके मोबाइल पर मैसेज पहुंच जाता है यानी
यहां पर खेती करने में इंसानों से ज्यादा
मशीनों की भूमिका होती है इसके अलावा यहां
इरीगेशन तकनीक भी भारत से काफी अलग है
जिसमें के लिए सेंसर रोबोट का इस्तेमाल

किया जाता है जब भी फसलों को पाने की
जरूरत होती है तो खेत में लगे सेंसर रोबोट
हो तो ही फसल आल डी पानी पहुंचा इसके
अलावा नीदरलैंड में फसलों को एलईडी लाइट

की मदद से भी गया जाता है जो की काफी
सस्ता भी पड़ता है अब आप सोच रहे होंगे
एलईडी लाइट की मदद से की थी क्या है भाई
तो दोस्तों आपको बता देंगे एलईडी लाइट की
तकनीक से जो की थी की जाती है ना उसमें 23

पीले और गुलाबी रंग के एलईडी बल्ब की मदद
से फसलों को ईंट दी जाती है यानी उनके
जरिए फर्स्ट लुक पर टेंपरेचर की व्यवस्था
कर दी जाती है नीदरलैंड्स में एलईडी लाइट
की मदद से खेती करने की वजह से यार लगभग

₹90000 की बचत होती है जिनकी वैल्यू
इंडियन करेंसी बता भाई लगभग 70 लाख रुपए
यहां पर ग्रीन हाउस एग्रीकल्चर में काफी
फेमस है ये यहां पर ज्यादातर सर्दियों में
किया जाता है यहां के ग्रीन हाउस इफेक्ट

मैं केमिकल पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल कम
किया जाता है यहां पर केमिकल पेस्टिसाइड्स
का बिल्कुल इस्तेमाल ना हो इसके लिए भी
रिसर्च चल रही है इस तरह से यहां की खेती
के लिए बेस्ट तकनीक अपना अगर यहां की

सरकार और यहां के रिसर्च ने आज नीदरलैंड
को इतना आगे पहुंचा है इसके अलावा यहां का
ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भी बहुत
अच्छा है यहां से फूड प्रोडक्ट और
एग्रीकल्चर मशीनों को वोट करने में रॉटरडम

पोर्ट और शिफाॅल एयरपोर्ट का सबसे बड़ा
हाथ है यहां से रोजाना फ्रेश फूड प्रोडक्ट
दुनिया भर में पहुंचा जाते हैं इसके अलावा
नीदरलैंड एनिमल हसबेंडरी यानी की पशुपालन
में भी बहुत आगे है यहां के देरी

प्रोडक्ट्स भी तो नहीं है जगह-जगह
स्पोर्ट्स होते हैं दोस्तों चीन में
नीदरलैंड्स की देरी प्रोडक्ट की मांग सबसे
ज्यादा है भारत भी नहीं था लैंड से
एग्रीकल्चर के डिपार्टमेंट कर रही है ताकि

नीदरलैंड के एडवांस टेक्निक्स से भारत के
अभी एग्रीकल्चर डिवेलप हो सके दोस्तों ये
थी नीदरलैंड की तकनीक जो सिर्फ दुनिया का
दूसरा सबसे बड़ा फूड एक्सपोर्टर बनाती है

आपकी इस वीडियो को लेकर क्या ए रहा है
क्या कभी इंडिया में भी ये तकनीक ए पाएगी
दोस्तों हमें हमारे कमेंट सेक्शन में जरूर
बताएं अगर आपको ये वीडियो पसंद आई हो तो
लाइक और

Leave a Comment