अफीम की खेती से किसान बने लखपति, 2,00,000 ₹ में बिकता है | feem farming In India | Opium Farming - instathreads

अफीम की खेती से किसान बने लखपति, 2,00,000 ₹ में बिकता है | feem farming In India | Opium Farming

दोस्तों अफीम एक ऐसी फसल है जिसकी खेती
भारत का हर किसान करना चाहेगा क्योंकि इस
फसल में मुनाफा बहुत होता है आम फसलों की
खेती की तरह इसकी खेती इतनी आसान नहीं है
इसके लिए सरकार से लाइसेंस लेना जरूरी
होता है और इसके लिए बहुत सारी सरकारी

प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है इसकी
खेती सरकार की बिना इजाजत के करना गैर
कानूनी है वैसे आपको बता दें की इसकी खेती
काफी अलग तरीके से की जाती है तो दोस्तों
आज हम इस वीडियो में आपको बताएंगे की अफीम
की खेती कैसे की जाती है तो बने रहिएगा
वीडियो में अंत तक हमारे साथ दोस्तों अफीम

की खेती के बारे में जानने से पहले यह
जानते हैं की आखिर अफीम है क्या ज्यादातर
लोग अफीम को एक नशीला पदार्थ समझते हैं
लोगों को लगता है की अफीम नशा करने के कम
आती है लोग इसे हीरोइन का सोर्स भी समझते
हैं लेकिन हमारे देश में अफीम का इस्तेमाल
वेलेट ड्रग बिजनेस के लिए किया जाता है

अफीम को वैसे दोस्तों कला सोना भी कहा
जाता है और फिल्म का पौधा चलिए पहले हम को
बताते हैं की अफीम का पौधा दिखता कैसा है
अफीम का पौधा लगभग 1 मीटर की ऊंचाई का
होता है इस पौधे में सफेद रंग के फूल

खिलते हैं अफीम के फूल झड़ने के बाद ही
अफीम के फलते हैं ये फल देखने में अनार के
जैसे होते हैं इसके फल को आम बोलचाल में
डोडा वहीं इसके छिलके को पोशाक कहा जाता
है अफीम की खेती दोस्तों अगर अफीम की खेती
की बात करें तो सबसे पहले लिए जानते हैं

की अफीम के लिए कौन सा मौसम सबसे सही है
तो दोस्तों अफीम की खेती सर्दी के मौसम
में की जाती है इसकी खेती के लिए ठंडी
जलवायु की जरूरत होती है इसके बीजों की
बुवाई सितंबर की आखिरी में या फिर अक्टूबर
के शुरू से लेकर नवंबर तक हो जाती है उगने

का तरीका दोस्तों इनको गाने के लिए सबसे
पहले खेत को बहुत अच्छे से जोतना पड़ता है
अफीम की खेती के लिए खेत की जुटा गहरी की
जाती है इसलिए इसको उगने से पहले खेत को
तीन से चार बार जोतना जरूरी होता है जुटा
के बाद खेत में पानी डालकर छोड़ दिया जाता

है की खेत की जो मिट्टी है वो अच्छे से
गीली हो जाए खेत का पानी सुख जाने के बाद
उसमें कल्टीवेटर लगाकर दो-तीन बार तिरछी
जुटा की जाती है ताकि खेत की मिट्टी थोड़ी
धुरी हो जाए इसके बाद इस

उड़ी मिट्टी को पता लगाकर समतल कर जाता है
इसके बाद खेत में अच्छे से गोबर की खाद
वर्मी कंपोस्ट या फिर अर्थ वॉर्म मनोर
यानी की कछु की खाद डाली जाती है अफीम का
जो पौधा है वो खेत से काफी कुछ अब्जॉर्ब
कर लेता है इसलिए अच्छे से ज्यादा

क्वांटिटी में खेत में काट डाली जाती है
ताकि मिट्टी में किसी भी तरह के
इंग्रेडिएंट्स की कोई कमी ना रहे खेत
तैयार हो जाने के बाद इसमें बी डेल जाते
हैं जिन किसने को लाइसेंस मिल जाता है

उनको बी भी आसानी से मिल जाते हैं वैसे
आपको बता दें की नारकोटिक्स डिपार्टमेंट
के कई सारे इंस्टिट्यूट भी अफीम के बीच
प्रोवाइड करता है बीच को खेत में अच्छे से
डालना होता है और खेत को वापस से एक बार

जोत ना होता है ताकि मिट्टी जो है वो बीच
के ऊपर ए जाए बी डालने के बाद 7-10 उनके
अंतर में खेत में पानी डाला जाता है इसके
बाद बी अंकुरण के समय पर 12 से 15 दिन के
अंतर में खेत में पानी डाला जाता है इसके
पौधों को भी काफी सिंचाई की जरूरत होती है
इसलिए अफीम के पौधों की सिंचाई लगातार की

जाती है हार्वेस्टिंग खेत में बी डालने के
लगभग 95 से 115 दिन बाद पौधों पर फूल आना
स्टार्ट हो जाते हैं फूल आने के कुछ टाइम
बढ़िया झरना भी स्टार्ट हो जाते हैं
इन्हीं पौधों पर 15 से 20 दिन बाद
छोटी-छोटी बॉल्स निकलना स्टार्ट हो जाती

है जिन्हें नॉर्मली डोडे कहते हैं जब ये
डोडे टाइट हो जाते हैं यानी की पाक जाते
हैं तब इन दोनों पर एक स्पेशल औजार से या
फिर ब्लेड से चिरा यानी की कट लगाया जाता
है ये चिरा फरवरी के दूसरे हफ्ते से लेकर
मार्च के पहले हफ्ते तक लगाए जाता है यह

चिरा दोपहर के 12:00 बजे से शाम के चार के
20 लगाया जाता है रेडों पर चिरा लगाने के
बाद इन डोडो में से एक लिक्विड निकलने
लगता है इसे लेटेस्ट कहा जाता है इस
लिक्विड को पुरी रात निकलने के लिए छोड़
दिया जाता है सुबह तक

डेढ़ ग्राम लिक्विड जमा हो जाता है जब ये
लिक्विड जाम जाता है तो अगले दिन किसान
सुबह जल्दी 5-6:00 बजे ही खेत पर चले जाते
हैं उसके बाद किसान उन डोडो से उसे
लिक्विड को एक स्पेशल औजार से हटा लेते
हैं धूप आने से पहले किसने को ये लिक्विड

इकट्ठा करना होता है दोस्तों आपको बता दें
की जो लिक्विड जमा होता है वही अफीम होती
है जो की इकट्ठा कर नारकोटिक्स विभाग से
tulwai जाती है और उसी हिसाब से किसने को
पैसा दिया जाता है दोस्तों आपको जानकर

हैरानी होगी पर ये बात सच है की किसान
अपनी अफीम के खेत में नंगे पैर ही जाते
हैं इसके अलावा अफीम उगने से लेकर उसकी
कटाई तक उसको नजर से बचाने के लिए अलग-अलग
तरह की पूजा किसान द्वारा की जाती है अब
बात करते हैं अफीम के लाइसेंस के बारे में

लाइसेंस अफीम की खेती करने का लाइसेंस
फाइनेंस मिनिस्टर यानी वित्त मंत्री
द्वारा दिया जाता है जो किसान पहले से
अफीम की खेती कर रहे हैं या फिर उनके पास
पहले से ही अफीम की खेती के लाइसेंस है
उनको ही वापस से लाइसेंस रिन्यू करके दिया
जाता है सरकार अपनी तरफ से एक राजपत्र

जारी करती है इसमें अफीम की खेती को लेकर
काफी सारी कंडीशंस लिखी जाती है और जो
किसान इन कंडीशंस को पूरा कर पाते हैं
सिर्फ उन्हें का ही लाइसेंस रिन्यू किया
जाता है और जो किसान ऐसा नहीं कर पाते
उनको इस लिस्ट से बाहर कर दिया जाता है

वैसे आपको बता दें की सरकार ने अफीम की
खेती के लिए लगभग 15 से 20 साल पहले
तीन-चार साल तक लगातार अफीम की खेती के
लिए लाइसेंस जारी किए द इन लाइसेंस को
जारी करते वक्त थी कितनी ज़मीन पर इसकी
खेती की जाएगी यह डिसाइड कर लिया जाता है

मतलब अगर सरकार किसान को एक हेक्टर जमीन
पर खेती करने की परमिशन देती है तो किसान
उससे ज्यादा जमीन पर खेती नहीं कर सकता
अगर किसान ऐसा करता है तो किसान पर कानूनी
करवाई हो सकती है या फिर उसका लाइसेंस भी
रद्द हो सकता है इसके अलावा किसान से यकीन
की क्वांटिटी भी पहले ही डिसाइड कर ली

जाती है अगर सरकार ने किसान से एक
हेक्टेयर ज़मीन की खेती से 5.9 किग्रा
अफीम मांगी है तो ये किसान को देनी ही
पड़ेगी उदाहरण के तौर पर किसान ने 5.9
किग्रा मॉर्फिन से कम मॉर्फिन सरकार को
दिया है तो अगली बार किसान का लाइसेंस

रद्द हो जाएगा लेकिन कुछ conditionss जैसे
2 4 ग्राम सरकार को कम और फिर मिलता है तो
लाइसेंस रद्द नहीं होगा पर अगर डिसाइड
क्वांटिटी या फिर mqay मिनिमम क्वालीफाइंग
यील्ड से बहुत कम और फैन सरकार को मिलता
है तो किसान का लाइसेंस रद्द कर दिया

जाएगा ऐसा सरकार इसलिए करती है क्योंकि
बहुत बार किसान सरकार को झूठ बोल देते हैं
की इतनी पैदावार हुई ही नहीं और अफीम को
ब्लैक में भेज देते हैं कालाबाजारी को बंद
करने के लिए ही सरकार ऐसा करती है इसके
अलावा अगर किसी कारण से अफीम की खेती खराब

हो जाए तब ऐसे में किसान को अपनी सारी फसल
जैसे ढूंढा भूसा पत्ते वगैरा सब कुछ सरकार
को जमा करना होता है अफीम की पैदावार ना
होने पर भी इसके बचे हुए मल को आग लगाकर
बर्बाद करना पड़ता है उसके बाद ही किसान
को क्लेम दिया जाता है कमाई और खर्चा अफीम

उगने के लिए एक ज़मीन में लगभग 7 से 8
किलो बीच की जरूरत होती है अफीम का 1 किलो
बीच करीब 150 से 200 रुपए में ए जाता है
इसके अलावा एक हेक्टेयर के खेत में लगभग
50 से 60 किग्रा लेटेक्स मिल जाता है इस
लेटेक्स को सरकार लगभग 1800 पर ग्राम के
हिसाब से खरीद लेती है वहीं अगर इसे

कालाबाजारी पर बेचा जाए तो 7000 रुपए से
लेकर 1.5 लाख कमाई हो जाती है इसके अलावा
अफीम के पौधों पर ग रहे डोडो को तोड़ने पर
उसमें से एक बी जैसा पदार्थ निकलता है
जिसे खसखस कहा जाता है ये खसखस बहुत कम
आता है रसोई के मसाले में भी इसका
इस्तेमाल किया जाता है ये खसखस बाजार में

डेढ़ लाख कुंतल के हिसाब से बिक जाता है
इसी तरह किसने को अफीम की खेती से भारी
मुनाफा होता है अफीम की खेती कहां-कहां की
जाती है दोस्तों आपको यह जानकर हैरानी तो
होगी पर ये सच है की पुरी दुनिया में बस
कुछ ही देश ऐसे हैं जहां पर अफीम की खेती
की जाती है सबसे ज्यादा अफीम

अफ़ग़ानिस्तान में उगाई जाती है पुरी
दुनिया की 85% अफीम सिर्फ अफ़ग़ानिस्तान
उगाई जाती है भारत में इसकी खेती हर कोई
नहीं कर सकता दोस्तों आपको बता दें की
भारत में सिर्फ उत्तर प्रदेश राजस्थान और
मध्य प्रदेश के कुछ ही जगह पर अफीम की

खेती की जाती है राजस्थान के झालावाड़
भीलवाड़ा उदयपुर कोटा चित्तौड़गढ़
प्रतापगढ़ जैसी जगह पर अफीम की खेती की
जाती है उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले
में अफीम की खेती की जाती है वहीं मध्य
प्रदेश में राजस्थान के बॉर्डर से सेट हुए
नीमच मंदसौर जैसी जगह पर अफीम उगाया जाता

है अब लिए अंत में जानते हैं की आखिर अफीम
का इस्तेमाल किन चीजों में किया जाता है
अफीम के यूजर्स अफीम के पौधे में ऐसी बहुत
सारी केमिकल प्रॉपर्टीज होती है जो इसे
मेडिकल पर्पस से काफी यूजफुल बनाती हैं
यूनान के डॉक्टर्स के मुताबिक अफीम कमर

दर्द घुटनो के दर्द जैसे बीमारियों के लिए
काफी अच्छी दावा है बहुत पुराने सर दर्द
को मिटाने के लिए भी अफीम का इस्तेमाल
किया जाता है सर्दी लग जाने पर खांसी
जुखाम में अफीम बहुत फायदेमंद होती है
अफीम डैंड्रफ जैसी प्रॉब्लम्स में भी काफीयूजफुल होती है तो दोस्तों ये थी अफीम की
खेती और उससे होने वाली कमाई की जानकारी

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