अब होगी Modi के सबसे बड़े दुश्मन की एंट्री 5 राज्यों के बाद उलट जायेंगे हाल | - instathreads

अब होगी Modi के सबसे बड़े दुश्मन की एंट्री 5 राज्यों के बाद उलट जायेंगे हाल |

दोस्तों नमस्कार मैं हूं विनीता यादव आज
हम बात कर रहे हैं मोदी के सबसे बड़े
दुश्मन की एंट्री होने वाली है पांच
राज्यों के चुनाव के बाद सारे हाल पूरी

तरह से उलट जाएंगे किस तरह से मोदी का यह
दुश्मन वापस पिक्चर में आ जाएगा
मोदी के इस दुश्मन को सब भूलकर बैठे हैं
लेकिन वह कुछ भी नहीं भूला है वो मौके की

तलाश कर रहा है गुजरात के जब मुख्य मंत्री
हुआ करते थे नरेंद्र मोदी तब संजय जोशी को
भाजपा से किनारे लगवाने में मोदी जी का
बड़ा हाथ रहा था हालांकि इन दोनों की बहुत

अच्छी बनती थी लेकिन दोनों के बीच में
काफी ज्यादा मनमुटाव भी था दोनों के बीच
तकरार की नींद तकरीबन 20 22 साल पहले पड़
गई थी और यह सबने देखा था कि किस तरह से

नरेंद्र मोदी अपने ही एक दोस्त के दुश्मन
बनते चले गए बात थी 1990 की संजय जोशी को
आरएसएस ने गुजरात भेजा था संगठन को मजबूत
करने के लिए उन्हें संगठन मंत्री के पद से

नवाजा गया मोदी संगठन के महामंत्री के पद
पर दो साल काम कर रहे थे दोनों ने मिलकर
पार्टी को खूब मजबूत करने में कोई सर नहीं
छोड़ी दोनों काम करते थे नतीजा रहा कि
भाजपा ने 1995 में गुजरात में पहली बार

सरकार बनाई इन दोनों के साथ आने की वजह से
लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों एक दूसरे
के दुश्मन बन गए लेकिन जब मुख्यमंत्री पद
की दावेदारी की बात सामने आई तो दो दूसरे

ही नेताओं ने अपने नाम सामने किए एक भाजपा
के राज्य में तब के सबसे वरिष्ठ नेता केशु
भाई पटेल और दूसरा नाम शंकर सिंह वाघेला
का था मोदी और जोशी ने मिलकर केशु भाई का

साथ दिया तो वाघेला नाराज हो गए इसके बाद
वाघेला की बगावत हुई और समझौते के तौर पर
केशु भाई की जगह सुरेश मेहता को
मुख्यमंत्री बनाया
गया जबकि नरेंद्र मोदी को दिल्ली भेज दिया

गया मोदी के जाने का सबसे अधिक फायदा जोशी
को मिला अब संगठन महामंत्री के पद पर जोशी
की ताजपोशी हो चुकी थी साल 1998 में भाजपा
एक बार फिर से सत्ता में आ गई मोदी अब

गुजरात आना चाहते थे लेकिन जोशी इसके लिए
बिल्कुल तैयार नहीं थे एक बार फिर केशु
भाई मुख्यमंत्री पद पर बैठे लेकिन साल
2001 में समीकरण बदल गया और उपचुनाव में

भाजपा को हार का सामना करना पड़ा नतीजा
केशु भाई को हटाकर नरेंद्र मोदी को गुजरात
का मुख्यमंत्री बना दिया
गया इसके बाद मोदी ने जोशी को दिल्ली की

ओर रवाना कर दिया यहां से शुरुआत होती है
तब से दोनों की अदावतें बढ़ गई ये दोस्त
दुश्मन हो गए और आज बहुत ज्यादा बड़े
दुश्मन है 2005 में जब शिवराज सिंह चौहान

पहली बार एमपी के मुख्यमंत्री बने थे तब
उनकी ताजपोशी में संजय जोशी ने एक बड़ा
रोल प्ले किया था वो उस समय एमपी के
बीजेपी के संगठन के महामंत्री थे मध्य

प्रदेश में संगठन महामंत्री उन्होंने उमा
भारती को विधायक दल की बैठक से धक्का देकर
बाहर निकाला था लेकिन तभी एक
रहस्यमय सीडी उनके राजनीतिक करियर पर आई

और कलंक लगा
गई एक रहस्य में सीडी एक सीडी जिसने संजय
जोशी को बर्बाद कर दिया कहां से आई थी
उससे पहले संजय जोशी के बारे में थोड़ी सी
और जानकारी समझ लीजिए फिर आप इस पूरे

समीकरण को समझ जाएंगे कि कैसे इस दुश्मन
की एंट्री मोदी के लिए भारी है संघ के
प्रचारक संजय जोशी 80 के दशक में नितिन
गडकरी के साथ नागपुर में संघ के माध्यम से
देश की सेवा करते

थे उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की
पढ़ाई की थी और राजनीति में आने से पहले
कुछ समय तक व इंजीनियरिंग पढ़ाते भी थे
नागपुर के रहने वाले संजय जोशी की भाजपा

में बड़ी शुरुआत गुजरात से ही हुई थी
राज्य में 13 वरस तक उन्होंने पार्टी को
मजबूत करने में एक बहुत इंपॉर्टेंट रोल
प्ले किया गुजरात से उनका करीबी रिश्ता

रहा उनके परिवार के कई सदस्य भी गुजरात
में ही रहते हैं संजय जोशी की शादी नहीं
हुई अविवाहित संजय जोशी उस वक्त सबसे अधिक
चर्चा में आए कब 2005 में जब उनकी एक
फर्जी सीढ़ यह सीडी बाजार में आ गई य सीडी

उन्हें कथित तौर पर एक महिला के साथ
आपत्ति जनक हालत में दिखा रही थी इसके बाद
उनको पार्टी से बाहर कर दिया गया हालांकि
यह सीडी फर्जी साबित हुई संजय जोशी को

क्लीन चीट मिल गई और उनकी पार्टी में
वापसी भी हुई लेकिन संजय जोशी के समर्थक
यह मानते हैं कि इस सीडी के पीछे मोदी
समर्थकों का रहा है नरेंद्र मोदी की लॉबी

के लोगों ने संजय जोशी को इसमें ट्रैप
किया था ताकि संजय जोशी का करियर खत्म हो
सके और नरेंद्र मोदी पूरी लाइमलाइट और
पूरी जगह पर अपना वर्चस्व कर सके खैर इस

सीडी कांड के बाद क्लीन चट मिलने के बाद
भी उनकी पार्टी में वापसी हुई कई नेता
इससे असहमत थे लेकिन फिर भी वापसी हो रही
थी पहले आपको बताती हूं कि ये सीडी कहां
से आई और किस तरह की बात सामने निकल कर

इसमें आई 2005 में मुंबई में बीजेपी के
राष्ट्रीय अधिवेशन से ठीक पहले संजय जोशी
के कथित सेक्स स्कैंडल की एक सीडी सामने
आई
थी इसके आते ही देश की राजनीति में एक
बड़ा कोहराम मच गया एक ऐसा भूचाल आया
जिसने काफी कुछ बदल कर रख दिया आजीवन

ब्रह्मचार्य का व्रत ले चुके संजय जोशी इस
सीडी में एक महिला के साथ कथित रूप से
अंतरंग क्षण बिताते हुए दिखाई दे रहे थे
काफी लंबी सीडी थी डेढ़ घंटे की य डेढ़
घंटे की लंबी सीडी ने एक बड़ा भूचाल लाकर

रख दिया
था गुजरात के एक होटल में जासूसी कैमरे
लगाए गए थे वहां इसे रिकॉर्ड किया गया
था कहा जाता है कि इसे गुजरात से एक
कुरियर कंपनी के माध्यम

से पूरे देश में भेजा गया इस पर एमपी नगर
भोपाल की कुरियर कंपनी का पता भी लिखा था
यानी कि एड्रेस कंपनी जो थी एक कोरियर
कंपनी भोपाल की थी पूरी तरह से एक ट्रैप
क्रिएट किया गया संजय जोशी के खिलाफ इसके

अलावा भी एक ऑडियो सीडी आई सेक्स सीडी को
लेकर गरमाई माहौल के बीच एक ऑडियो सीडी
उसी वक्त आई इसमें एक महिला के साथ संजय
जोशी की कथित बातचीत भी रिकॉर्ड की गई थी

कहा जाता है कि वह महिला बड़ौदा की रहने
वाली थी संजय जोशी एमपी से पहले गुजरात
में बीजेपी के पदाधिकारी थे इस महिला के
साथ जोशी के कथित संबंधों के बारे में
गुजरात के स्थानीय बीजेपी नेताओं को पहले

से पता था पार्टी में जोशी की बढ़ती
हैसियत से नाराज थे ये कई नेता जाहिर सी
बात है उन्होंने यह सीडी बनवाई इस तरह की
बातें खूब चर्चा में आई कई सालों के बाद
विश्व हिंदू परिषद के ताकतवर नेता रहे

प्रवीण तोगड़िया ने यह खुलासा भी किया था
कि संजय जोशी की सीडी गुजरात में ही
बनी तब जब गुजरात में ये सीडी बनी थी उस
वक्त संजय जोशी पर पूरी तरह से एक जाल

बिछाया जा रहा था ये जाल किसने बिछाया था
जिसकी नींद आज संजय जोशी खराब कर सकते हैं
इन चुनावी नतीजों के बाद पार्टी में संजय
जोशी की वापसी की बात हुई गडकरी उनके साथ

लगातार खड़े रहे और दुश्मनों की जो संघ
में मौजूदगी थी वो कुछ भी नहीं बिगाड़ पाई
क्योंकि संघ और गडकरी ऑलमोस्ट एक साथ इनके
फेवर में खड़े हो गए और इस वजह से 2012
में जोशी को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव

का इंचार्ज बनाया गया उन्हें एक बड़ी
जिम्मेदारी सौंपी गई संघ की तरफ से और
मोदी को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया और वह
एक भी दिन चुनाव प्रचार में नहीं गए

जानकार मानते हैं कि नरेंद्र मोदी को
अच्छी तरह से पता था कि 2013 में होने
वाले विधानसभा चुनाव में उनकी राह में कई
रोड़े हैं जिनमें केशुभाई पटेल और जोशी

प्रमुख है यदि मोदी इस चुनाव को हारते हैं
तो प्रधानमंत्री की कुर्सी से और ज्यादा
दूर हो जाएंगे संघ ने इस बात के पहले ही
संकेत दे दिए थे इस चुनाव में जोशी को एक
बार फिर से गुजरात भेजा जा सकता है ऐसे

में चुनाव मोदी के लिए करो या मरो की
स्थिति लेकर आ रहा था ऐसे में मोदी अपने
सभी दुश्मनों को एक के बाद एक करके
निपटाने की नीति पर चल रहे थे और उनकी के

दुश्मनों ने उन्हें निपटाने की एक नई
कहानी लिख ली थी तो अब इस स्टोरी के अहम
किरदारों से मिलिए जो आगे होने वाला है
नरेंद्र मोदी बीएल संतोष और जेपी नड्डा
दूसरी तरफ है संजय जोशी योगी आदित्यनाथ और

नितिन गडकरी जी सबसे पहले यह समझिए कि
दोनों तरफ जो यह नेता है एक तरफ नरेंद्र
मोदी और जेपी नट्टा और बीएल संतोष और एक
तरफ योगी आदित्यनाथ संजय जोशी और नितिन

गडकरी यह कैसे एक दूसरे को रिप्लेस करने
जा रहे हैं नरेंद्र मोदी को रिप्लेस
करेंगे योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व का चेहरा
है और प्रधानमंत्री की दावेदारी मोदी के
बाद सबसे ज्यादा हुंकार भरने की तैयारी

वही कर रहे हैं हाल ही में उन्होंने अमित
शाह का गृह मंत्रालय का ऑफर भी ठुकरा दिया
था यानी कि उससे बड़ी की चाहत वो लेकर चल
रहे हैं ऐसे में नरेंद्र मोदी की

रिप्लेसमेंट की तैयारी योगी आदित्यनाथ कर
रहे हैं दूसरा चेहरा यानी कि बीएल संतोष
बीएल संतोष हाल ही में कर्नाटक और हिमाचल
में चुनाव हरवा चुके हैं ऐसा इसलिए कहा

जाएगा क्योंकि यह संगठन सचिव हैं और संगठन
सचिव की बड़ी जिम्मेदारी है कि संगठन
कहां-कहां एक्टिव तरीके से चुनाव को जिता
है अगर यह पांचों राज्यों के चुनाव में
बीजेपी नुकसान में रहती है तो ऐसी स्थिति

में बीएल संतोष की भी छुट्टी तय मानी
जाएगी और और उनकी जगह लेंगे मोदी के ये
पुराने दोस्त और सबसे बड़े दुश्मन संजय
जोशी आरएसएस की ये तैयारी अंदर खाने चल

रही है और अब तीसरी बात जेपी नड्डा जो कि
पार्टी के अध्यक्ष हैं पार्टी के अध्यक्ष
हैं पीएम मोदी की हर बात मानते हैं उनके
कहने पर चलते हैं और पार्टी को भी जहां पर

मोदी सरकार चला रहे हैं वहीं पर पार्टी को
जेपी नड्डा चला रहे हैं लेकिन मोदी के
कहने पर इसीलिए अभी तक मोदी के कोई भी
दुश्मन उनका कुछ भी गाड़ नहीं पाए हैं

क्योंकि मोदी ने अपने तमाम लोगों को इस
तरह से प्लेस किया है क्योंकि वह सब उनकी
हां में हां और ना में ना करते हैं इसीलिए
मोदी ने अपने चारों तरफ की किलेबंदी कुछ
इसी तरह से की है और यही वजह है कि संजय

जोशी का फेवर करने वाले नितिन गडकरी उनसे
दूर हैं और नितिन गडकरी को बार-बार
नरेंद्र मोदी राजनीति से बेदखल कर देना
चाहते हैं इसकी कई तस्वीरें पहले भी आ
चुकी हैं जैसे कि उनके मंत्रालय में

हस्तक्षेप कर करना जैसे कि उनको
पार्लियामेंट्री कमेटी से बाहर कर देना और
भी कई तरह की ऐसी तस्वीरें सामने आई है तो

जेपी नड्डा जो कि नितिन गडकरी कभी पार्टी
अध्यक्ष हुआ करते थे अभी जेपी नड्डा हैं
अगर यहां पर नरेंद्र मोदी और बीएल संतोष
हटते हैं तो जेपी नड्डा जिनका कार्यकाल

जनवरी में खत्म हो रहा है तो उनका भी हटना
तय माना जाएगा जाहिर सी बात है उनकी जगह
नितिन गडकरी जो पहले भी पार्टी अध्यक्ष रह
चुके हैं कोई बड़ी बात नहीं होगी बड़ी
आसानी से उन्हें ये पद मिल जाएगा यह पूरी

तरह से एक ऐसी स्थिति बन रही है जो कि
मोदी लॉबी को खत्म करके मोदी विरोधी लॉबी
को ताकत में लाने की तैयारी कर रही है
संजय जोशी जिस तरह से एक कोने में अलग थलक

पड़े हैं उनका बदला इससे पूरा हो जाएगा
लेकिन भूलना नहीं चाहिए कि संजय जोशी के
पास आज वह पैसा वह ताकत नहीं है जो कि
नरेंद्र मोदी के पास है संजय जोशी आज की

तारीख में अपने ड्राइवर को तंखा दे तक
नहीं पाते हैं
ऐसे में उनकी सबसे बड़ी लड़ाई कौन लड़ेगा
कैसे
लड़ेगा संघ के कौन लोग उनकी ताकत बनेंगे

क्योंकि संजय जोशी को सबसे ज्यादा ताकत
वही दे सकता है जो उन्हे एक बार फिर से इस
सक्रिय राजनीति में जिंदा कर सकता है यानी
जिसके पास पैसा है उसके बाद मोदी जी की

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