इन 3 ईमानदार अफसरों से क्यों घबरा गई मोदी सरकार । - instathreads

इन 3 ईमानदार अफसरों से क्यों घबरा गई मोदी सरकार ।

नमस्कार

दोस्तों क्या भ्रष्टाचार को लेकर
करप्शन को लेकर रिश्वत को लेकर घूस को
लेकर मोदी जी के दो पैमाने अब इन दो
पैमानों से मेरा मतलब यह है कि जो अधिकारी
मोदी के कहने पर विपक्षी नेताओं के य छापे

डालते हैं उनको गिरफ्तार करते हैं वह मोदी
जी की निगाह में अच्छे हैं मोदी उन्हें
इनाम देते हैं और जो ऑफिसर मत करके मोदी
के मंत्रियों पर उंगली उठा दे कोई

भ्रष्टाचार का मामला पकड़ ले कोई करप्शन
उजागर कर दे वह मोदी जी को अच्छे नहीं
लगते उन्हें सजा दी जाती है यानी जो
अधिकारी चापलूस है मोदी के कदमों पर झुके
हुए हैं उन्हें इनाम दिया जाता है और जो

ईमानदार है आवाज उठाते हैं भ्रष्टाचार के
खिलाफ उन्हें सजा दी जाती है अब दोस्तों
जो बड़ी खबर बिग ब्रेकिंग न्यूज है वो यह
है कि तीन ऑफिसर ने देश के तीन ऑफिसर्स ने
बड़े ऑफिसर ने मोदी जी के दो बड़े
प्रोजेक्ट दो बड़े प्रोजेक्ट की जांच की

ऑडिट किया और ऑडिट में भ्रष्टाचार पाया और
उस भ्रष्टाचार को उजागर
किया उन तीन ऑफिसर को जी हां इनाम देने की
जगह उन्हें सजा दी गई उनका तबादला कर दिया
गया ट्रांसफर कर दिया गया और यह जो दो
बड़े प्रोजेक्ट टू बिग प्रोजेक्ट्स अरबों
खरबों रुपए के वह है प्रधानमंत्री योजना

के तहत आयुष्मान भारत जी आयुष्मान भारत और
दूसरा प्रोजेक्ट है भारत माला परियोजना
भारत माला परियोजना सड़कें बनाने का
हाईवेज बनाने का तो एक तरफ हेल्थ और दूसरी
तरफ हाईवे और जिन्होंने इन प्रोजेक्ट में
भ्रष्टाचार को जागर
किया उन्हीं का तबादला कर दिया उन्हीं को

सजा दे दी गई अब दोस्तों मोदी जी का जो
सबसे बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट था सबसे बड़ा
प्रोजेक्ट था भारत माला परियोजना अब यह जो
भारत माला है इसके तहत पूरे देश भर में
कहीं फोर लेन का हाईवे बनना था कहीं एट
लेन बनना था कहीं 16 लेन हाईवे बनना था तय

हुआ कि साहब इसका ऑडिट होगा कई कंप्लेंट्स
आ रही हैं तो जो ऑडिट किया वह इन साहिबा
ने किया यह यंग ऑफिसर हैं
अतर्ट डायरेक्टर ऑडिट है इंफ्रास्ट्रक्चर
देखती है इनकी टीम को ऑडिट करना था हिसाब

किताब देखना था कि कितने में ठेका दिया
क्या रेट था किस रेट पर काम हो रहा है और
तब यह जो द्वारका एक्सप्रेसवे यह जो
द्वारका एक्सप्रेसवे है जो दिल्ली
एयरपोर्ट के एकदम करीब

है सिन्हा की टीम ने अपूर्वा सिन्हा की
टीम ने पाया कि साहब यहां पर रेटों का कुछ
गड़बड़ है यानी
18.20 18 करोड़ आप कह सकते हैं 18 करोड़
पर किलोमीटर जो सड़क तय हुई थी रेट तय हुआ
था इन्होंने ऑडिट में पाया कि साहब उसका

रेट जो है कहां 18 करोड़ पर किलोमीटर उसका
रेट 250 करोड़ पर किलोमीटर अब यह जो
इन्होंने गड़बड़ पाई और भी इन्होंने कहीं
भारत माला प्रोजेक्ट में पकड़ी जैसे
दिल्ली वडोदरा दिल्ली बड़ौदा एक्सप्रेसवे
भी जो तकरीबन 32000 करोड़ का उसमें भी

गड़बड़ी पकड़ी अब ये जब गड़बड़ियां सामने
आई सीएजी की रिपोर्ट में ऑडिट की रिपोर्ट
में तो साब हंगामा मच गया मोदी जी की
किरकिरी हुई कहीं ना कहीं नितिन गडकरी पर

सवाल उठाए गए कैबिनेट ने कैसे इसको अप्रूव
कर दिया तमाम हंगामा
हु और जिसने भ्रष्टाचार उजागर किया था जी
हा मिसेस

सिन्हा प्रिंसिपल डायरेक्टर
ऑडिट 12 सितंबर को इनका तबादला कर दिया
गया यानी जो अतु वा सिन्हा जिनको पिछले ही
साल पिछले साल जिनको यह जिम्मेदारी सौंपी
गई थी साल भर के अंदर ही बुरिया बिस्तर
पैक कर दिया सरकारने आपकी जरूरत नहीं तोय

जो अतु सिन्हा थी जो भारत माला प्रोजेक्ट
देख रही थी जिसमें उन्होने गड़बड़ी उजागर
कर दी इनका ट्रांसफर कर दिया रातो रात
ट्रांसफर किया गया और ट्रांसफर भी कहां

किया गया दिल्ली में पोस्टेड थी सजा के
तौर पर केरल भेज दी गई जी हा सुदूर केरल
ट्रांसफर किया गया इका एक और साब को देखिए
इनका नाम है दत्ता प्रसाद सूर्यकांत शिर

सस्त अभी जो दत्ता प्रसाद साहब थे ये
आयुष्मान भारत देख रहे थे आयुष्मान भारत
में मेडिकल इंश्योरेंस दी जाती है यह भी
मोदी जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है अब इसमें
यह पाया गया यह जब इसका ऑडिट शुरू हुआ कि
साब बड़ी शिकायतें आनी इसका ऑडिट होना

चाहिए आयुष्मान भारत का तो साहब दत्ता
प्रसाद साहब की टीम ने तकरीबन ऐसा कहा
जाता है कि 964 अस्पताल जो बीमा दे रहे थे
आयुष्मान भारत तत 964 964 हॉस्पिटल 161
जिले पूरे हिंदुस्तान के जहां मोदी जी की
स्कीम चल रही थी उनका ऑडिट करना शुरू किया

और सारे आंकड़े देखे और उस आंकड़ों में
बहुत ही हैरत अंगेज बातें सामने आ जैसे
डेटाबेस जब देखा गया तो पता लगा कि साहब
ऐसे ऐसे लोगों को ऐसे ऐसे लोगों को मेडिकल
क्लेम दिया गया इंश्योरेंस दिया गया है जो

है ही नहीं एजिस्ट नहीं करते जो जिंदा ही
नहीं जिनका पता ही नहीं है और कई मामलों
में सैकड़ों मामलों में पता चला मरीज की
जो सर्जरी है वह बाद में हुई व डिस्चार्ज
पहले हो गया आप सोचिए कि मरीज जो रिकॉर्ड

में डिस्चार्ज है उसकी सर्जरी बाद में हो
रही और इसका भी भुगतान किया गया यह मामला
पकड़ा दत्ता प्रसाद सूर्यकांत जी की टीम
ने कायद से इनाम देना चाहिए था कि इतना
बड़ा गपला पकड़ा देश भर में चल रहा था और

इनका साथ दिया एक और अधिकारी है अशोक
सिन्हा यह डायरेक्टर जनरल नॉर्थ सेंट्रल
रीजन के अशोक सिन्हा साहब भी थे इन्होंने
भी करप्शन का मामला खोला और इन्होंने कहा
कि साहब मरे हुए लोगों को कैसे भुगतान

किया जा रहा है सवाल इस बात का है कि यह
दोनों ऑफिसर जिन्होंने आयुष्मान भारत में
हो रहे कपलों को उजागर किया आंखें खोल दी
देश की सरकार
की इनका भी तबादला किया गया इनको भी सजा
दी गई और जो दत्ता प्रसाद साहब हैं इनको

रातों रात हटाया गया और डायरेक्टर लीगल
जैसी कुर्सी पर बैठा दिया जहा कोई अधिकारी
जाना नहीं चाहता है और अशोक सिन्हा साहब
से कहा कि नहीं अब आप ऑडिट ना करिए अब आप

राजभाषा डिपार्टमेंट में जाइए राज भाषा
विभाग में जाइए कहने का मतलब यह है एक
मैसेज दिया गया सीएजी को एक मैसेज दिया
गया ऑडिट करने वालों को कि मोदी के

मंत्रालयों का जब ऑडिट करना सोच समझ के
करना अब दोस्तों ये जो तीन ऑडिट ऑफिसर है
सीनियर ऑडिट ऑफिसर देश के इन्होंने हिम्मत
करके जिस तरह से करप्शन की तार छेड़ी जिस
तरह से गड़बड़ी को उजागर किया इनको इनाम

देने की जगह इनको सजा क्यों दी गई इनको
बचाने वाला कोई क्यों नहीं था इनका जो
डिपार्टमेंट था उस डिपार्टमेंट का जो चीफ
था उस चीफ ने इन अफसरों की पैरवी क्यों
नहीं की मोदी जी से या अमित शाह से इनका

पैरोकार कोई क्यों नहीं था इनके
डिपार्टमेंट में तो पहले जान लेते हैं कि
भाई ऑडिट का डिपार्टमेंट कौन सा है इस
डिपार्टमेंट का नाम है कंट्रोलर एंड ऑडिटर
जनरल ऑफ इंडिया जी हां यह सबसे शीर्षस्थ
सुप्रीम बॉडी है ऑडिट की और इसका काम है
कि सरकार केंद्र सरकार के जितने भी

मंत्रालय हैं उसका लेखा जोखा हिसाब किताब
ऑडिट करना कहां-कहां पैसा देने में लेने
में गड़बड़ हुई है यह काम है हिंदी में
कहते हैं भारत के नियंत्रक एवं महालेखा
परीक्षक और आपको याद आ रहा होगा 2जी स्कैम
कोयला स्कैम तमाम स्कैम जो आए थे वह सीएजी

कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल नेही उसका भेद
खोला था उसको उजागर किया था अब कहानी सुन
लीजिए आप कहानी यह है किन अधिकारियों को
कोई बचाता तो बचाता कैसे क्योंकि सीएजी इस
डिपार्टमेंट का जो मुखिया है वह यह साब

है गिरीश चंद्र मुरम जी सी मुरम आईएस
ऑफिसर थे गुजरात कार्डर के थे जहां के मु
मुख्यमंत्री मोदी जी थे मोदी जी और मुरमू
साहब के बड़े क्लोज रिलेशन है मुरमू साहब

ने मोदी जी के साथ बरसों बरस काम किया है
और मोदी जी ने इनको जम्मू कश्मीर का
लेफ्टिनेंट गवर्नर बना दिया और जब रिटायर
होने लगे तो मोदी जी ने इनको इनाम दिया और

इनाम में इन्होंने
इनको सीएजी बना दिया यानी ऑडिट का सुप्रीम
बॉस इस देश में ऑडिट करने वाला जो सुप्रीम
बॉस है मुरमू साहब ये मोदी जी के आत्मी है
सबसे करीबी आदमी अब सवाल है कि जहां मुरमू

जी होंगे मोदी जी के सबसे करीबी आदमी
होंगे वहां बेचारे यह तीन ऑफिसर इनको कौन
बचाएगा दोस्तों आज का जो बड़ा सवाल है जो
बिग क्वेश्चन है वो यह है कि क्या
भ्रष्टाचार के ऑडिट पर करप्शन के ऑडिट पर

पर्दा डाला जा रहा है और क्या कोई मोदी
सरकार के किसी मंत्रालय का भ्रष्टाचार अगर
उजागर करेगा ऑडिट के जरिए जांच के जरिए तो
उसका वही हश होगा उसके साथ वही सलूक होगा
जो इन तीन अधिकारियों के साथ हुआ ऑडिट के
तीन बड़े अफसरों के साथ हुआ तबादला कर

दिया गया सजा दी गई और क्या यह जो तीनों
ऑफिसर है इनका जो तबादला किया गया इनका जो
ट्रांसफर किया गया इस सरकार की तरफ से
मैसेज क्या दिया गया नौकरशाही को अफसरशाही

को क्या मैसेज देने की कोशिश की गई है
हमें लगता है इस मैसेज को हमें समझना होगा
क्यों क्योंकि 2000 14 में शपथ लेने से

पहले मोदी जी ने कहा था कि ना खाऊंगा ना
खाने दूंगा मेरी आंख के नीचे भ्रष्टाचार
नहीं होगा तिनका भर नहीं होगा यह मोदी जी
ने कहा था तो आज क्यों जो भ्रष्टाचार
उजागर कर रहे हैं

लोग उनको कहीं ना कहीं सजा दी जा रही है
इसको जानने के लिए आज एक बेहद ईमानदार
बेहद बहादुर ऑफिसर है आईपीएस ऑफिसर है
यशोवर्धन जाद यह वो अधिकारी हैं आपको खुद
पता लगेगा अगर आप पूरा इंटरव्यू उनके साथ

सुनेंगे
कि अगर मुख्यमंत्री का फोन भी अगर गया
आजाद साहब के पास और गलत काम करने के लिए
कहा तो इस अधिकारी ने सीधे कहा नो सर यह
नहीं हो पाएगा ऐसे अधिकारी को आज मैं आपके
सामने लाया हूं और उनसे खंगालने की कोशिश

करेंगे कि क्या आज की तारीख में मोदी
सरकार में ईमानदार ऑफिसर नहीं
है क्या आज की तारीख में मोदी जी के सरकार
के तले कोई ऐसा ऑफिसर नहीं है आईएस ऑफिसर
या आईपीएस ऑफिसर जिसके पीठ में रीड की

हड्डी हो जो सामना कर सके या अधिकारी
हैं उनको मौका नहीं दिया जा रहा है दूध का
दूध पानी का पानी करते हैं चलते हैं
सीनियर आईपीएस ऑफिसर रहे यशोवर्धन आजाद जी
के पास मेरी गुजारिश है आखिर तक सुनिए

बहुत सी बात में आंखें खोलेंगे मेरा सवाल
यह है कि क्या किसी अधिकारी को उसके अच्छे
काम के लिए जहां इनाम देना चाए कि कम से
कम किसी ने हिम्मत दिखाई कि कहीं गड़बड़ी
हो रही है और उसको इनाम देने की जगह अच्छी
पोस्टिंग देने की जगह किसी का ट्रांसफर जो

है केरल कर दिया गया किसी को अच्छे चार्ज
इंपॉर्टेंट चार्ज से हटाकर उसका जो है
कहीं ना कहीं राज भाषा में कर दिया लीगल
में कर दिया गया यह जो आपको क्या लगता है
जिस तरह का जिन जगहों पर इनको भेजा गया है
आपको लगता है यह एक मैसेज है यह एक मैसेज
है कि आइंदा से जब जांच करिएगा तो सोच समझ

के करिएगा कि प्रधानमंत्री मोदी के अंडर
में जो मंत्रालय हैं उनको जरा सोच समझ के
ऑडिट करिए क्या यह मैसेज जा रहा है
ब्यूरोक्रेसी
को देखिए मैं तो समझता हूं कि इन

अधिकारियों को बधाई देनी चाहिए और
इन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की
है और मैं समझता हूं कि यह सरकार ने
भ्रष्टाचार के खिलाफ जो अपना नारा बुलंद
किया था प्रधानमंत्री ने बराबर भ के

खिलाफ बहुत जोर एक आहवान किया है पूरे देश
में तो मैं समझता हूं कि यह तो सिस्टम की
विडंबना है कि जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ
कार्रवाई की हो उसे केरला और राजभाषा ऐसे

मंत्री में भेजा जाए इन अधिकारियों के साथ
जो हो रहा है मैं समझता हूं ये अन
मंत्रालयों की फिर यही दिशा होगी और अवश्य
यह तो बिल्कुल ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है
कि ऐसा होना चाहिए और इससे बहुत ही बड़ा
गलत मैसेज जाएगा जी अा साबसे मिसाल दे रहा

हूं दत्ता प्रसाद सूर्यकांत शीर सस्त अब
ये जो दत्ता प्रसाद साहब है यह डायरेक्टर
डीजी ऑडिट थे सेंट्रल एक्सपेंडिचर नई
दिल्ली में थे और आयुष्मान भारत पर
इन्होंने कई आंखें खोल देने वाली रिपोर्ट

उसी के इंचार्ज थे और आंखें खुली उस पर
चर्चा भी हुई कि भाई य आयुष्मान भारत जो
फ्लैगशिप यो ना है मोदी सरकार की उसमें
गड़बड़ियां है और गड़बड़ियां
दरअसल इसलिए बताई जाती है कि आगे से उनको
दुरुस्त किया जाए अगर कोई कमिया है अगर
कोई प्रोसीजर गलत है पैसा सही तरह से सही

खाते में नहीं जा रहा है उनको ठीक किया
जाए दुरुस्त किया जाए अब यह जो इन्होने
आवाज उठाई इनको जो है डायरेक्टर लीगल बना
दिया गया आपको लगता है कि यह जो डायरेक्टर

लीगल की पोस्ट होती है या राज भाषा की
पोस्ट होती है क्या यह सजा के तौर पर दी
जाती है या इनाम के के तौर पर दी जाती मैं
ये चाह रहा था कि आपसे पूछूं कि आपने भी
बर्सों बरस सरकारी महकमों में नौकरी करी
है मंत्रालयों में नौकरी की तो ये जो

राजभाषा भेज दिया लीगल भेज दिया यह एक सजा
के तौर पर इनको पनिशमेंट पोस्टिंग मानेंगे
हम देखिए ऐसा
है जितनी भी मिनिस्ट्री है दिल्ली में
करीब 90 या 80 होनी तो चाहिए 20

मिनिस्ट्री लेकिन 90 बना दिया गया है
एंप्लॉयमेंट देने के लिए मंत्रियों को और
ब्यूरोक्रेट्स को इसमें से सिर्फ 10 या 12
मंत्रालय ऐसे हैं जिनमें जाने की रोड़ लगी
रहती है सारे बाबू और जाहिर है 80 प्र
जैसे कि राजभाषा या लीगल ये ऐसे मंत्रालय

या विभाग है या ऐसे पद है जहां कोई नहीं
जाना चाहता इसम कोई शक नहीं तो उस हिसाब
से अगर इनका ट्रांसफर वहां से यहां हुआ है
जबक क्योंकि कैग जो है बहुत ही पावरफुल
विभाग और कैग में इंडियन ऑडिट अकाउट

सर्विस के सारे शीर्ष अधिकारी रहते ही है
बल्कि मैं तो यह कहूंगा कि कैग को हेड
करना चाहिए एक इंडियन ऑडिट अकाउंट सर्विस
दरा लेकिन अभी अदा साब आपको टोक रहा हूं
अभी जो साहब है वो मुरमू साहब है और यह जो

मुरमू साहब हैं यह लेफ्टनंट गवर्नर थे
मोदी जी के गुजरात में बहुत ही करीबी
अफसरों में से एक थे और मोदी जी के साथ ये
साय की तरह रहे और मोदी जी ने इनको सीएजी
इसलिए भेजा ऐसा लोग कहते हैं अपोजिशन कहता

है क्योंकि पिछली जो सरकार थी मनमोहन
सरकार उसमें कैग में ऑडिट रिपोर्ट ने बहुत
ज्यादा बदनामी कर दी थी मनमोहन सरकार की
चाहे वो कोयला का घोटाला हो चाहे वो
स्पेक्ट्रम घोटाला हो बड़ी बदनामी हुई थी

तो ऐसा लोग कहते हैं कि मोदी जी ने कैग
में अपने सबसे विश्वसनीय ऑफिसर को वहां
बैठा दिया मुरमू जी और मुरमू जी ने ही इन
तीनों लोगों का ट्रांसफर किया आपको लगता
है कि जान पहचान के लोगों को करीबी लोगों

को और ऑडिट के काम में नहीं रखना चाहिए
ऑडिट के काम में निष्पक्ष लोगों को रखना
चाहिए जी हा लेकिन कहां रखा जा रहा है
पहले भी जो कार्यक्रम जिसके बारे में आपने
बात किया जो पहले कै के अधिकारी थे वो भी

बड़े एमिस थे मैं तो यही कहना चाहता हूं
आपको कि जो स्पेशलिस्ट जिस विभाग के हैं
जहां उन्हें रहना चाहिए उनको नहीं रहके
अपने चुने हुए विश्वस्त अधिकारियों को
लगाया जाता है यह तो स्पष्ट है और सारी

सरकारें यह कर रही है जी आज साब मैं थोड़ा
सा एक आजादी आपकी रहा हूं आजादी से सवाल
पूछना चाह रहा
हूं आपको लगता है कि ये तो मैंने सीएजी की
बात करी जैसे ईडी है या सीबीआई है या ईडी
में संजय मिश्रा साहब थे और संजय मिश्रा

साहब आईआरएस सेवा से थे आप जरूर उनको
जानते होंगे संजय मिश्रा का जो एक तरह का
आचरण था विपक्ष के नेताओं के य छापे डालना
विपक्ष के नेताओं पर मुकदमे दर्ज करना जिन
लोगों को ईडी ने जेल भेजा संजय मिश्रा के
नेतृत्व में बहुत से लोग छोड़ दिए गए

महाराष्ट्र हाई कोर्ट ने कहा कि साहब इन
पर तो मुकदमा ही नहीं बनता किसी पर कहा कि
साहब इनके यहां से तो पैसे की रिकवरी नहीं
है संजय राउत के मामले में कहा गया कि भाई

इनको कैसे आपने जेल भेज दिया बाकी लोग
छोड़ दिए आपने संजय मिश्रा जैसे लोग आज की
तारीख में ये हीरो माने जाते हैं आपको
क्या लगता है कि जो ब्यूरोक्रेसी है 2014
के बाद उसकी रीढ की हड्डी टूटी है
यशोवर्धन आजाद जैसे स्टील फ्रेम के

अधिकारी अब नहीं बचे केपीएस गिल जैसे लोग
नहीं बचे रिबे जैसे लोग नहीं बचे
क्या अकाल पड़ गया है ईमानदार अफसरों का
सरकार में ईमानदार अफसर तो अभी भी है और
वह ईमानदारी से कार्य कर लेकिन हां प्रेशर

में काम करते हैं लेकिन एक बात मैं आपको
बताऊं शर्मा जी कि यह जो 30 प्र का रेशो
रहा है यह बराबर से चला आ रहा है कि
ईमानदार और नहीं दबने वाले जो व्यक्तित्व
वाले धनी जो होते हैं वो हर रेजीम में

रहते हैं अब सवाल यह है कि कहां तक वो
मुड़ जाए अब अगर अगर रिटायर्ड
ब्यूरोक्रेट्स
और जो जो काम कर रहे हैं व वो
ब्यूरोक्रेट्स अगर एक ही दिशा में चलने

लगे तो ये दुर्भाग्य है सिस्टम का और
देखिए आज इस देश ने ब्यूरोक्रेट्स को
पुलिस वालों आईपीएस को इतना पैसा दिया है
इतना सब कुछ तजी दी है फैसिलिटी दी है कि
मैं समझता हूं अगर जरा भी भ्रष्टाचार की

भू आए तो उसे तत्काल निकाल देना चाहिए और
ऐसे में उन्हें अपनी स्वायत्ता पे
निर्भीकता पे बराबर एक गर्व होना चाहिए और
अगर यह नहीं है तो यह बड़ दुख की
बात एक सवाल अंतिम सवाल आपसे पूछना
चाहूंगा आपके इतना लंबा कार्यकाल रहा आप

बहुत अच्छे आईपीएस ऑफिसर माने गए अगर किसी
मंत्री का मुख्यमंत्री का फोन आ जाए कि
भाई आजाद साहब इस आदमी को छोड़ दीजिए इस
आदमी को बंद कर दीजिए और आपकी नजर में वह
आदमी अगर बेगुनाह है क्या बेगुनाह आदमी की
छापा आप डालेंगे क्या कहेंगे मुख्यमंत्री
से आप बिल्कुल नहीं डाल चाहे किसी का

प्र आपका र
गलत कार्य कभी भी नहीं करने चाहिए इससे
पाप होता है और मैं समझता हूं आपकी जो
प्रतिबद्धता है वोह कानून के प्रति होना
चाहिए किसी सरकार के खिलाफ सरकार के प्रति
नहीं होना चाहिए और इसके लिए अगर आपका
ट्रांसफर हो तो शिरोधार्य नहीं जैसे सपोज

करिए एक हाइपोथेटिकल जी एक हाइपोथेटिकल
सिचुएशन सपोज करिए आप ईडी के डायरेक्टर
होते और आपसे कहा जाता कि भाई संजय रावत
जो शिवसेना के इनको बंद करिए मिस्टर आजाद
इनको 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार करिए और
जेल भेज दीजिए और आप अगर जांच कराते और
पता लगता कि साहब करप्शन का कोई आरोप संजय

रावत पर नहीं बनता है तो आप सरकार से क्या
कहते मैं यह पूछना चाह रहा हूं आपसे
प्राइम मिनिस्टर से क्या कहते होम
मिनिस्टर से आप क्या बोलते फोन प मेरी
तहकीकात के बाद अगर मैं किसी को निर्दोष
पाता हूं और अगर मुझे निर्देश ऊपर से आते

हैं किसी व्यक्ति के खिलाफ चापा देने तो
मैं बड़ी विनम्रता पूर्व से इनकार
कर मता क्या कहा आपने इंकार कर दूंगा
इंकार कर देंगे आप हां कि गलत आदमी के ऊपर
मैं छापा नहीं मार क्या आपने अपने सर्विस
में कई मंत्रियों को इंकार किया है गलत

काम आपने कहा कि नहीं करूंगा बिल्कुल
बिल्कुल किया है और मेरा एक रात में
ट्रांसफर भी हो चुका है इसी कारण से एक
रात फाइनल क्वेश्चन फाइनल क्वेश्चन जो यंग
आईपीएस ऑफिसर्स आपको देख रहे हैं या जो नए
आईआरएस ऑफिसर ईडी में जो काम करते हैं वो

देख रहे हैं आप उनको क्या पैगाम देना
चाहेंगे जो यंग ऑफिसर थे ईडी में सीबीआई
में मैं यह बताना चाहूंगा कि भ्रष्टाचार
से कभी भी कंप्रोमाइज नहीं करना चाहिए और
गलत ऑर्डर को कभी नहीं मानना चाहिए आपका
आपकी प्रतिबद्धता सिर्फ कानून के
प्रति अा साहब बहुत-बहुत शुक्रिया और जो

आपने बात कही मुझे लगता है अगर सीबीआई और
ईडी और इनकम टैक्स के अधिकारी आपको सुन
रहे हैं एक एक सीनियर बहुत ही आप कह सकते
हैं एक नामी ग्रामी ऑफिसर अगर आपका यह
कहना कि भ्रष्टाचार पर समझौता नहीं करना
है और चाहे अमित शाह हो मोदी कोई हो

हिंदुस्तान में अगर गलत ऑर्डर दे तो इंकार
कर देना मना कर देना आजा साहब आ
नमस्कार

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