इस्राइल को दक्षिण अफ़्रीका की चुनौती | South Africa takes Israel to Court - instathreads

इस्राइल को दक्षिण अफ़्रीका की चुनौती | South Africa takes Israel to Court

नमस्कार             गजा को लेकर
दक्षिण अफ्रीका ने जिस नैतिक साहस का
प्रदर्शन किया है उसकी दुनिया के एक
हिस्से में चर्चा हो रही है मगर मीडिया

में नहीं आज हम इस पर बात करेंगे कि
अफ्रीका ने ऐसा क्या कर दिया कि हर तरफ
लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं इसी संदर्भ में
भारत के बारे में कहा जा रहा है कि यहां

गांधी की पूजा ही होती रह गई मगर गांधी और
मंडेला के आदर्शों पर चल पड़ने का साहस
केवल दक्षिण अफ्रीका ने दिखाया यही नहीं
दक्षिण अफ्रीका के इस कदम से उपनिवेशवाद

के दौर की हिंसा हों का भी अतीत खुलकर
सामने आने लगा है जर्मनी ने जब इसराइल का
साथ देते हुए दक्षिण अफ्रीका को टारगेट
किया तो नामीबिया के राष्ट्रपति ने लिखित

बयान जारी कर जर्मनी के नरस घार की पोल
खोल दी दक्षिण अफ्रीका के कदम के बाद कई
लोग भारत भारत पुकार रहे हैं कि गांधी का
देश कहां है उसमें इतना नैतिक बल क्यों
नहीं है भारत के पास हजारों काम है जैसे

यह खबर देखिए हिंदू अखबार में में छपी है
कई प्रदेशों में कारीगरों और मजदूरों को
इसराइल भेजे जाने की तैयारी चल रही है इस
खबर के अनुसार ट्रेड यूनियन का कहना है कि
युद्ध क्षेत्र में लोगों को भेज तो रहे
हैं उनकी सुरक्षा की चिंता नहीं की जा रही

अगर इन्हें कुछ हो गया तो सरकार और एजेंसी
की तरफ से कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा गजा
और वेस्ट बैंक में इन मजदूरों को काम करने
के लिए भेजा जा रहा है इस कारण उन्हें
काफी खतरा है हिंदू ने लिखा है कि मजदूरों

को इसराइल जाने के लिए अपनी जेब से किराया
देना होगा यही नहीं नेशनल स्किल डेवलपमेंट
सेंटर को इस काम के लिए ₹1000000 भी देने
होंगे मजदूरों को कोई बीमा और मेडिकल बीमा
नहीं मिलेगा रोजगार की गारंटी भी नहीं दी

जाएगी यह इसलिए बता दिया ताकि पता चले कि
भारत कहां व्यस्त है और भारतीय कहां
व्यस्त हैं 1 लाख मजदूरों को आप बिना किसी
बीमा के भेज रहे हैं वो भी युद्ध के
क्षेत्र में भारत अगर इसमें व्यस्त नहीं

होता तो शायद दक्षिण अफ्रीका की तरफ फाइल
बना रहा होता वैसे हमारा फोकस है उन पर
जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय अदालत में इसराइल
को चुनौती दी और सबने चुनौती देने वालों
का साथ दिया अंतरराष्ट्रीय अदालत में इस

मुकदमे पर फैसला आने में ही कई साल गुजर
जाएंगे लेकिन पहले ही कदम में दक्षिण
अफ्रीका ने उन देशों को आईना दिखा दिया जो
हथियारों के धंधे के नाम पर एक दूसरे का

हाथ पकड़कर वैतरणी पार करने में लगे थे
दक्षिण अफ्रीका ने आपातकालीन मांग की है
कि गजा में जो नरस घार चल रहा है उस पर
रोक लगे जानकारों का कहना है कि ऐसा

मुमकिन है कि कुछ हफ्तों में इमरजेंसी
आदेश आ जाए दक्षिण अफ्रीका ने मांग की है
कि अंतरराष्ट्रीय अदालत आदेश जारी करें कि
इसराइल अपने सैनिक अभियान को तुरंत रोके

एक तरफ ताकतवर देशों की गोलबंदी है दूसरी
तरफ दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया जैसे देश
हैं जो उपनिवेशवादी मुल्कों और उनके
नरसंहार के साथ खड़े मुल्कों की खुलकर

आलोचना कर रहे हैं मंडेला के आदर्शों पर
चलने की हिम्मत दिखा रहे हैं
अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पूरी तैयारी के
साथ दक्षिण अफ्रीका की लीगल टीम ने इसराइल

पर नरस घार के अभियोग के पक्ष में तमाम
सबूत और तर्क पेश किए उसकी बहुत प्रशंसा
हो रही है अच्छे-अच्छे वकीलों को
शर्मिंदगी हो रही है कि व ऐसा नहीं कर सके

इससे गजा पर इसराइल का हमला तो बंद नहीं
हुआ मगर उसके हमले से पसरी हर तरह की
निराशा और बिखरी हुई हर तरह की उदारवादी
नैतिकता के मलबे को हटाकर कोई दक्षिण

अफ्रीका सही बात कहने का साहस दिखाने आ
गया नेतृत्व का मतलब यह नहीं होता कि आप
चार ताकतवर लोगों के पीछे उनकी गोलबंदी

में समा जाएं बल्कि उसका एक मतलब दक्षिण
अफ्रीका की तरह होना भी है कि आप पूरी
बहुमत के सामने जाकर सही बात कहने का
हौसला दिखा दें इसलिए इंटरनेट पर इस तरह
की तस्वीरें चल रही हैं दक्षिण अफ्रीका के

नागरिक फलस्तीन के झंडे के लिबास में हैं
और फलस्तीन के एक बच्चे की उंगली थामे जा
रहे हैं एक मुल्क जिसके पास निर्यात करने
के लिए हथियारों का जखीरा नहीं जिसके पास
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कंपनियां नहीं

वह मुल्क कम से कम इमोशनल इंटेलिजेंस की
क्षमता रखता है यह बड़ी बात है अमेरिका
में जहां बड़े-बड़े अखबार और चैनल इसराइल
के आगे झुक गए वहां दक्षिण अफ्रीका खड़ा

नजर आ रहा है सब कुछ खत्म हो जाने के दौर
में उम्मीदों के बीच की तरफ बचा हुआ इन
तस्वीरों में दिखाई दे रहा है हेग स्थित
अंतरराष्ट्रीय अदालत में दक्षिण अफ्रीका

ने इसराइल के खिलाफ जिस तरह से नर संघार
का मुकदमा किया है और अपनी दलीलें पेश की
हैं उसके प्रसारण को कई अंतरराष्ट्रीय
न्यूज़ चैनलों ने नहीं दिखाया लेकिन जब

इसराइल ने अपनी तरफ से जवाब दिया तो उसका
सभी ने सीधा प्रसारण दिखाया भारत में गोदी
मीडिया विपक्ष को लेकर यही करता है वही अब
दुनिया के स्तर पर न्यूज़ चैनल इसराइल और

अफ्रीका को लेकर कर रहे हैं यह तब है जब
गज में 100 से अधिक पत्रकार इसराइल के
हमले को कवर करते हुए मारे गए गजा पर हमले
के 100 दिन हो चुके हैं 60000 से अधिक लोग
घायल हैं 24 2 हज से अधिक लोग मारे गए हैं

और इनमें 10000 से अधिक बच्चे हैं दिन भर
यह बच्चे लाइनों में लगे हैं खुले आसमान
की तरह यह बच्चे भी जेल में बंद कैदी की

तरह जीवन जीने लगे हैं खाने-पीने का ट्रक
आते ही हजारों लोगों का हुजूम दौड़ पड़ता
है और बहुतों को खाना भी नहीं मिलता बंदूक
और भूख से एक आबादी को तड़पा करर मारा जा
रहा है इसराइल का कहना है कि वहां कोई भूख

से नहीं मर रहा खाने-पीने की चीजों की कमी
नहीं गजा शहर के मेयर ने कहा है कि उत्तर
के इलाके में महीनों से एक बूंद ईंधन भी
नहीं मिला इन दिनों गजा में रात के वक्त
तापमान 9 से 10 डिग्री सेल्सियस चला जाता

है इतनी ठंड में 85 प्र आबादी विस्थापित
है और खुले आसमान के नीचे रात गुजारती है
ठंड के साथ-साथ इस समय वहां बारिश भी बहुत
होती है जनवरी की इस कड़कड़ाती ठंड में
खाली पेट कांप रहे लोगों के जिस्म का

हवाला देकर हम आप पर यह बोझ नहीं डालना
चाहते कि आप इसकी कल्पना करें हमें पता है
कि आप इस लायक नहीं रहे अलशिफा मेडिकल
लाख की आबादी पर सिर्फ छह एंबुलेंस बच गई
हैं अस्पताल के लिए जरूरी हर चीज की घोर

कमी है डॉक्टरों का कहना है कि ना तो वहां
एंटीबायोटिक है ना एनेस्थीसिया और ना ही
आईवी फ्लूइड अस्पताल 60000 घायलों का इलाज
करने में सक्षम नहीं नॉर्वे के डॉक्टर
मैट्स गिलबर्ट ने अलजजीरा से कहा है कि एक

व्यवस्थित मानव निर्मित त्रासदी है इसराइल
की सरकार ने इसकी प्लानिंग और क्रियान्वयन
अमेरिका के सहयोग से किया है यह आधुनिक
इतिहास की सबसे भयानक मानव निर्मित मेडिकल
त्रास दी है ऐसा नहीं है कि किसी को फर्क

नहीं पड़ रहा लंदन और वाशिंगटन में लाखों
लोग सड़क पर आए और जुल्म के खिलाफ
उन्होंने आवाज उठाई यहूदी समाज के लोग भी
विरोध कर रहे हैं आयरलैंड के डबलिन और
ब्रिटेन के ग्लासगो में भी प्रदर्शन हुए

हैं वाशिंगटन में लाखों लोगों का प्रदर्शन
काफी बड़ा था मगर वह मीडिया संस्थानों के
पन्नों पर प्रमुखता से नहीं आया भले ही
अखबार और सरकार हिंसा के आगे अपनी नैतिकता

हों पर नमक रगड़ रहे हैं लेकिन लोग हैं जो
इनके खतरों का सामना करते हुए अपनी बात कह
रहे
हैं दुनिया के तमाम ताकतवर देश आज इसराइल
के साथ हैं लेकिन इसी दौर में एक दक्षिण
अफ्रीका भी है जो इन सभी से अलग हटकर अपनी

लाइन ले रहा है और अंतरराष्ट्रीय अदालत
में इसराइल के खिलाफ नरसंहार का मुकदमा कर
चुका है बांग्लादेश मलेशिया बोलीविया
टर्की नामीबिया यमन ने दक्षिण अफ्रीका का
का साथ दिया है बड़े-बड़े सुपर पावर देशों

के सामने कम राजनीतिक दबदबे वाले देशों ने
कहीं अधिक साहस दिखाया इनमें कई ऐसे देश
भी शामिल हैं जो यूरोपीय मुल्कों के
उपनिवेश रहे हैं और जिन्होंने नरस घार

झेले अर्जेंटीना चिले पेरू स्पेन आयरलैंड
जैसे देश काफी समय से खुले रूप से इसराइल
की निंदा कर रहे हैं कोलंबिया के
राष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा है कि आज की

तारीख में अगर कोई शांति के नोबेल
पुरस्कार का हकदार है तो वह दक्षिण
अफ्रीका की लीगल टीम है जिसने
फलस्तीनियंस याहू के खिलाफ नरसंहार का
मुकदमा दायर किया है चीन ने भी फलस्तीन के

पक्ष में अपना मत रखा है और युद्ध विराम
की मांग की है अंतरराष्ट्रीय अदालत में
रूस और भारत ने अभी तक कोई पक्ष नहीं रखा
है 11 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय अदालत में
दक्षिण अफ्रीका की लीगल टीम ने मोर्चा

संभाला ढ़ घंटे तक धारा प्रवाह दक्षिण
अफ्रीका की लीगल टीम अपना पक्ष रखती रही
इस टीम का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय कानून के
अधता और बैरिस्टर जॉन
डुगडुग जेनोसाइड कन्वेंशन के अनुसार वह

इसराइल की कुछ करतूतों पर एक्शन ले सकता
है और हस्तक्षेप कर सकता है इसराइल हर
हफ्ते 6000 बम गिरा रहा है कोई भी नहीं बच
रहा यहां तक कि नवजात भी मारे जा रहे हैं
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने गजा को

बच्चों का कब्रिस्तान कहा है वहां तो
अत्याचार हो रहा है उसे केवल कोर्ट का
आदेश ही रोक सकता है दक्षिण अफ्रीका की
लीगल टीम ने 1948 के जेनोसाइड कन्वेंशन का
हवाला देते हुए कहा कि 7 अक्टूबर से गज्जा

में 23000 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें
10000 बच्चे हैं दक्षिण अफ्रीका के
राष्ट्रपति श्रील राम फोसा ने कहा है कि
गजा के लोगों का जो कत्लेआम चल रहा है उसे

रोकने के लिए यह मुकदमा किया है आदिला
हासिम ने इसराइल के नर संघार को पांच
प्रमुख वर्गों में बांटा है पहला एक्ट यह
है कि गज्जा में सभी फलस्तीनियंस जा रहा

है कब्रिस्तान की तस्वीरें पेश की गई 1800
से अधिक परिवार बताए गए जिनके कई सदस्य
मारे जा चुके हैं कई परिवारों में तो कोई
भी नहीं बचा बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया
दूसरी कार्रवाई नर संघार की यह है कि वहां
के लोगों के जिस्म और जहन पर गहरा जख्म

दिया जा रहा है 60000 से अधिक लोग घायल
हैं बच्चे और औरतें भी हैं इनकी इस तबाही
से इंकार नहीं किया जा सकता तीसरी
कार्रवाई नरस घार की यह है कि इसराइल ने
जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि

जीना मुश्किल हो जाए हजारों परिवारों को
कई बार विस्थापित होना पड़ा है लाखों लोग
घर नहीं लौट सकते लीगल टीम ने बताया कि
कैसे इस्राइल ने 24 घंटे के भीतर

अस्पतालों को खाली करने के आदेश दिए
घायलों को ले जाने के लिए कोई सहायता नहीं
दी उत्तरी गजा के 10 लाख लोगों से भी

तुरंत खाली करने के लिए कह दिया इस तरह के
आदेश ही नर संघार के आरोपों की पुष्टि
करते हैं इसराइल ने खाने-पीने की आपूर्ति
रोक दी भूखमरी बढ़ गई वहां पीने के लिए
साफ पानी नहीं लोग बीमार हो रहे हैं हो
सकता है कि भूख और बीमारी से भी

फलस्तीनियंस हुई हो फिर भी उनकी घेराबंदी
जारी है नरसंगा की चौथी कारवाई यह है कि
इजराइल ने गाज के हेल्थ केयर सिस्टम को
तबाह कर दिया पांचवी कारवाई यह है कि
गर्भवती महिलाओं के प्रसव से जुड़ी दवाओं

और मशीनों को उपलब्ध कराने से रोका जा रहा
है बच्चे जन्म नहीं ले पा रहे हैं यह भी
एक तरह के नरसंहार की कार्रवाई है दक्षिण
अफ्रीका की लीगल टीम की दलीलों से नरसंहार
के प्रति आप की समझ बेहतर होती है कई बार

जेनोसाइड या नरस घार का इस्तेमाल होता है
मगर लोग समझ नहीं पाते कि यह क्यों
बर्बरता का चरम है और क्यों इसे रोका जाना
चाहिए वकील आदिला हाशिम ने कहा कि नरसंहार
पहले से बताकर नहीं किया जाता है कि हम कर

रहे हैं इसराइल ने जो भी किया है इसे
साबित करने के लिए काफी है एक और वकील
टेंबे का उनका टोबी ने इसराइल के आधिकारिक
बयानों का हवाला देकर समझाया कि उनका
इरादा नर संघार का ही था इसके अलावा
संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन और
रेड क्रॉस के अधिकारियों के बयानों का भी

जिक्र किया गया कि किस तरह गजा के नागरिक
खतरे का सामना कर रहे हैं अस्पताल के
अस्पताल ध्वस्त हो चुके हैं वहां कोई भी
सुरक्षित जगह नहीं बची है दक्षिण अफ्रीका
ने जेनोसाइड कन्वेंशन के तहत फलस्तीन
लोगों के लिए कोर्ट के सामने अपनी मांग

रखी है द स्टेट ऑफ इजराल शल इमीडिएट
सस्पेंड इट्स मिलिटरी ऑपरेशन इन एंड अग
द स्ट ऑ इराल शल एर द एनी मिलि और रेगल आ
यूनिट बी डायरेक्टेड सपोर्टेड और इफल बाट
ए वेल एनी र्ग एंड प बी सब्जेक्ट टू इट
कंट्रोल रेक्शन और

इलस टेक नो स्प्स इन फदर ऑफ मिरी रे रिफ
टू इन प अब
ी द रिपब्लिक ऑ साथका एंड स्ट ऑफल शल इन
अडस वि ् अंडर द कन्वेंशन न प्रवें एमेंट
ऑ द क्रम
नइड इन लेशन ू द पले पपल टेक ल नबल मेज
विन पा प्रेंट
जन

फ द स्टेट ऑफ इराल शल इन अकॉर्डेंस विद
इटस ऑब्लिगेशन अंडर द कन्वेंशन ऑन द
प्रवें एंड पनिशमेंट ऑफ द क्राइम ऑफ
जेनोसाइड सिस्ट फ्रॉम द कमि ऑफ एनी एंड ल
एक्ट्स विथ इन द स्कोप ऑफ आर्टिकल ू ऑफ द
कन्वेंशन इन पर्टिकुलर
ए किलिंग मेंबर्स ऑफ द ग्रुप बी कसिंग
सीरिस बॉली और मेंटल हार्म टू द मेंबर्स

ऑफ द ग्रुप सी लिटली इन्फ्लिक्टिंग ऑन द
ग्रुप कंश ऑफ ऑफ लाइफ कैलकुलेटेड टू
ब्रिंग अबाउट इट्स फिजिकल डिस्ट्रक्शन इन
होल और इन पार्ट एंड डी इंपोजिंग मेजर्स
इंटेंड टू प्रिवेंट बर्थस विदन द ग्रूप

फाइव द रिसंग ऑफ लेवेंट ऑर्डर्स ऑफ
रिस्ट्रिक्शन एंड और प्रोहिबिशन टू
प्रिवेंट ए द एक्स पल्सन एंड फॉर्स
डिस्प्लेसमेंट फम देयर
होम्स बी दप
ऑ एक्सेस टू एट फूड एंड

वाटर एक्सेस ू यें इंक्लूडिंग एक्सेस ट
फ्य शेल्टर क्लो न
एंड मेडिकल
एंडस्ट एंड
सीस्ट ऑ लाफ इन गा इसरा ने भी जवाब दिया
है दक्ष अका के को ठुकराते हुए कहा कि वह

जो भी कर रहा है कह रहा है आत्मरक्षा में
कर रहा है गजा के लोगों के साथ जो भी हो
रहा है उसके लिए हमास जिम्मेदार है दक्षिण
अफ्रीका हमास के दिए हुए आंकड़ों पर भरोसा

कर रहा है इसलिए उसने गलत तस्वीर पेश की
है इसराइल के नेताओं के बयानों को सरकार
की नीति मान लेना सही नहीं इसराइल का सारा
तर्क आत्मरक्षा पर आधारित है कि वह हमेशा

के लिए हमास के खतरे को मिटा देना चाहता
उसने यह युद्ध शुरू नहीं किया हमास ने
किया प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि
दक्षिण अफ्रीका का दोहरा पन है कोर्ट में
झूठ बोला जा रहा है हम आतंकवादियों से लड़

रहे हैं हम झूठ से लड़ रहे हैं इसराइल पर
नरसंहार के आरोप लग रहे हैं लेकिन इसराइल
भी खुद नरस घार के खिलाफ लड़ रहा है
नेतनयाहू ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका को
साबित करना होगा कि वाकई में नर संघार
किया जा रहा है इसराइल का आरोप है कि

दक्षिण अफ्रीका हमास के आंकड़ों के सहारे
सब कह रहा है आपको याद होगा उसने 7
अक्टूबर के हमले में मारे गए लोगों की
संख्या 1400 बताई थी बाद में इसराइल ने
इसमें सुधार कर 1200 कर दिया नेतनयाहू इस

युद्ध को कब तक जारी रखेंगे किसी को पता
नहीं खबरें आती हैं कि अमेरिका के
राष्ट्रपति का धीरज जवाब दे रहा है मगर यह
भी खबर आ जाती है कि अमेरिका मदद भी कर
रहा है इसलिए अमेरिका क्या सोच रहा है अब
इस स्तर पर कुछ भी मायने नहीं रखता

हालांकि अमेरिका में भी भारी विरोध
प्रदर्शन हो रहे हैं चीन जैसा ताकतवर देश
भी इसराइल की आलोचना ही कर रहा है कि गजा
को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी
जाए मगर इन बातों का इसराइल पर कोई असर
नहीं पड़ता नेतन्याहू ने फिर से कहा है कि

यह रोशनी और अंधेरे की संतानों के बीच का
संघर्ष है इस पंक्ति का संबंध बाइबल के एक
प्रसंग से है नेतनयाहू इसे धार्मिक
मान्यता का जामा पहनाना चाहते हैं आपको
याद होगा कि गज के अहली अरब अस्पताल पर जब
हमला हुआ तब नेतनयाहू ने यही ट्वीट किया

लेकिन लोगों की नाराजगी के बाद हटा लिया
इस बार नेतनयाहू ने बुलंदी से टीवी पर आकर
यही बात दोहरा दी यानी इसराइल को समझ आ
गया है कि उसे रोकने वाला अब कोई देश नहीं
बचा द कोर्ट लक्स प्रिम फ जूरिडिक्शन ए द

एप्लिकेंट ज नॉट शन एनी डिस्प्यूट बिटवीन
इट सेल्फ एंड द रिपेंट एट द टाइम द
अप्लीकेशन वाज
सबमिटेड इड ट्रा टू मिसली द कोर्ट इनटू
बिलीविंग द वन हड एक्जिस्टेड द सिंपल

रियलिटी इज द द इवेंट्स च द सब्जेक्ट ऑफ
प्रोसीडिंग आ अरिंग इन द फ्रेमवर्क ऑ वर
इंटेड बा हमस गवर्न बा द लीगल फ्रेमवर्क
ऑफ इंटरनेशनल रियन ल देड नट फल विन द रिमि

ऑ द जेनोसाइड कन्वेंशन दर्ड ऑ इपल हार्म
एंड ें इ नट मेट इर इराल इ कसली टेकिंग
ककट स्प्स टुगेदर वि अर् ड्रेस द ट इन गाज
फाइनली वी हैव श द द प्रोल मेज स आ
अनवंटेड एंड प्रजल द कन्फ विमास पोस रेशनल

एंड लीगल
चलेस इन कंडक्टिंग क्लोर र्न कट वाल मिटगे
हार्म ट सराउंडिंग इ सीकिंग टूट स्टॉप ू
हमस मिलि य हॉस्पिटल्स

वासप ऑफ मेडिकल
सर्वि इन हेल्पिंग सिवि लीव एरिया ऑ मस्ट
इंटेंस फाइटिंग लमास फोर्सेस देम टू स् इन
द लाइन ऑफ फायर इन फिलि द प्रोविज ऑफ एड न
द एड इ कली स्टोन बा हमस ूस्टन इट्स

मिलिटरी एफर्ट इलस रिय कसरे वि द नी टू
एक्ट फसली अग एडवर्सरी द स्ल फायर रटप इट
आवर कंट्री एंड होल्स आवर सिज हज द रूल ऑफ
ल े फल पिलर ऑफ द स्टेट ऑफ इराल द्क े
नटली इराल लीडरशिप बट इराली
सोटी मिसरे प्रेजेंट ए सेलेक्ट असमेंट ऑफ

स्टेटमेंट टू सजेस्ट जनोसाइडल इंटेंशन एंड
द अडिशन ऑफ को मोल ल्यू फर अस प्रोविजनल
मेजर्स वड लीड टू अवर्स
सिशन इफेक्टिवली अला हमस टू कंटिन्यू

अकिंग द सिजें ऑफ इराल ू
136 हज इन अनबे बल
कंश टू कीप 10 ऑ ें ऑफ डिस्प्लेस इराली फम
रिटर्निंग टू देर होम्स एंड एसें टू
प्रमोट इ प्लेन टू माक ए मेनी इराली एंड ज
ए इट कैन किसी को भी दिख सकता है कि गजा

के आम लोगों के साथ जो हो रहा है वहां के
स्कूलों और अस्पतालों के साथ जो हुआ है वह
क्या है लेकिन दुनिया की एक बड़ी आबादी इस
क्रूरता को स्वीकार ही नहीं करना चाहती है
यह भी इस दौर की सच्चाई है उन्हें हजारों

बच्चों के मार दिए जाने का कोई अफसोस नहीं
आम लोगों से क्या शिकायत मीडिया में काम
करने वाले पत्रकार गजा में मारे गए
पत्रकारों के बारे में भी नहीं लिखते हैं
अच्छे-अच्छे पत्रकार मामूली रकम पर बिक गए

उन्होंने पत्रकारिता छोड़ भजन करना शुरू
कर दिया अमेरिका से लेकर भारत के
पत्रकारों ने बिकने और झुकने की सारी
सीमाओं को तोड़ दिया उसी दौर में यह कितनी
बड़ी बात है कि फलस्तीन के पत्रकार अंत
अंत तक गज की हालत पर रिपोर्ट करते रहे

पहले उनके परिवार के सदस्य मारे गए बाद
में वे भी मार दिए गए रिपोर्टिंग करते
वक्त रोते रहे टूट गए मगर रिपोर्टिंग नहीं

तहत गज की हर आवाज को कुचला जा रहा है गजा
के 75 से अधिक पत्रकार मार दिए गए
कहीं-कहीं संख्या 100 भी बताई जाती है
इसराइल के चार पत्रकारों की मौत हुई है
मगर इन पत्रकारों को लेकर भी ग्लोबल
मीडिया खामोश है इनके योगदान को सीनाजोरी

के साथ अखबारों के पन्नों से गायब किया जा
रहा है वरना इन सभी की खबरें पहले पन्ने
पर पहली खबर के रूप में छप सकती थी
फलस्तीन के पत्रकारों के सामने आप भारत के
गोदी मीडिया के पत्रकारों को खड़ा कर एक

बार देखिए पता चलेगा कि क्यों भारत में
भजन के सहारे सब अपने पाप धोने में लगे
हैं अलजजीरा के पत्रकार वायल दादौ के बेटे
हमजा दादौ भी पत्रकार थे मार दिए गए उनके

परिवार के कई लोग मारे गए हैं हाजिम रजब
आमेर अबू अमर जैसे पत्रकारों के नाम वहीं
के वहीं दफन हो गए ग्लोबल मीडिया ने उनके
योगदान को दुनिया तक पहुंचने नहीं दिया
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने मांग की

है कि इस बात की जांच हो कि क्या इसराइल
ने इन पत्रकारों को चिन्हित कर हमला किया
और मारा कोई ऐसा शब्द नहीं बचा जो गज के
साथ हो रहे जुल्म पर दुनिया की चुप्पी को

तोड़ दे उनके जहन को पिघला दे जो बर्फ की
तरह जम चुकी है जो भी बोलता है टारगेट
होता है इसराइल के भीतर से भी आवाजें हूक
मार रही हैं मगर कुचल दिया जा रहा है
इतिहास के एक शिक्षक ने

जी ढिमरा टाइप के संगठनों में सूट बूट
वाले नेता युद्ध की भाषा बोलते हो या
निंदा के नाम पर दो-चार बयान देकर मस्त हो
जाते हो नामीबिया के राष्ट्रपति हैगे गन
गोव इस ढांचे से अलग एक ऐसी आवाज बनकर
उभरे हैं जिसे दुनिया चुपचाप दर्ज कर रही

है नामीबिया भले ही एक कमजोर देश हो उसके
पास ताकतवर सेना ना हो मगर उसकी आवाज के
नैतिकता कहीं ज्यादा खनक रही है ग्लोबल
मीडिया का प्रचार तंत्र हैगे गन गोब जैसे
नेताओ की राय को प्रमुखता नहीं देगा लेकिन

कोई बोल तो रहा ही है नामीबिया का बयान
पढ़ने लायक है जर्मनी ने 20वीं सदी का
भयंकर नरसंहार झेला है वहां की जनता फर्जी
राष्ट्रवाद के चक्कर में सनक गई और लाखों
यहूदी और दूसरे नस्ल और मुलक के लोगों को

मार दिया और ताली बजाती रही उस जर्मनी का
इसराइल के पक्ष में खड़े होना सबको चौका
रहा है नामीबिया इस बात से हैरान था कि
नरसंहार झेलने वाला देश गजा के साथ हो रहे

नरस घार का साथ कैसे दे सकता है नामीबिया
ने याद दिलाया कि 20वीं सदी में पहला नर
संघार जर्मनी ने किया और वह भी नामीबिया
की जमीन पर 1904 से 1908 के बीच लाखों की
संख्या में नामीबिया के मूल निवासी हेरेरो
और नामा का कत्लेआम किया गया आज तक जर्मनी

ने उसका प्रायश्चित नहीं किया इसलिए
नामीबिया के राष्ट्रपति ने उस वक्त हैरानी
जताई जब जर्मनी ने दक्षिण अफ्रीका की
दलीलों को रिजेक्ट कर दिया जर्मनी तो

जेनोसाइड कन्वेंशन के प्रति नैतिक रूप से
भी प्रतिबद्ध नहीं लगता वह कैसे हो सकता
है जब गजा में हो रहे नर संघार का साथ दे
रहा है जो एक तरह से होलोकॉस्ट की तरह ही
है राष्ट्रपति ने कहा कि शांति का समर्थक

कोई भी व्यक्ति नहीं कह सकता कि गजा में
जो हो रहा है सही हो रहा है ठीक इसी समय
पर जब दुनिया के बड़े-बड़े नेता अपनी
नैतिक जवाबदेही से भाग रहे हैं फिसल रहे
हैं बयान देकर निकल रहे हैं दक्षिण

अफ्रीका और नामीबिया जैसे देश गलत को गलत
कह रहे हैं उन्हें किसी परीक्षा के बोर्ड
ने विश्व गुरु की उपाधि नहीं दी है मगर
फिर भी इस दुनिया में होने का अपना
दायित्व निभा रहे हैं दुनिया में बहुत कुछ

हो रहा है नैतिकता के नाम पर जो कुछ भी
बचा था वह अब सब खत्म हो चुका है इसका आम
लोगों के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ने
वाला है इसके बारे में विचार किया जाना
चाहिए अब सरकारें कहीं की भी हो पहले से

ज्यादा दमनकारी हो जाएंगी दूसरे देश को
लेकर भी और अपने ने देश की जनता को लेकर
भी दक्षिण अफ्रीका ने बोलकर कम से कम खतरे
की घंटी बजा दी है हिंदी के अखबारों और
चैनलों से गायब हो जाने पर खबरें या

दुनिया के सवाल खत्म नहीं हो जाते दक्षिण
अफ्रीका ने केवल कोर्ट में जाने का कदम
नहीं उठाया उसका यह कदम एक ऐसा फैसला है
हो सकता है जिसकी कीमत भी उसे चुकानी पड़े
मगर यही तो बड़ी बात है कि तब भी व गलत को
गलत बोल रहा है    नमस्कार

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