इस जज की हिम्मत ने हिला डाला है मोदी का 'सिस्टम' ?। Deepak Sharma | Politics| Modi | - instathreads

इस जज की हिम्मत ने हिला डाला है मोदी का ‘सिस्टम’ ?। Deepak Sharma | Politics| Modi |

नमस्कार
दोस्तों मोदी जी की अगर आप पिछले 9-10 साल
देखेंगे तो आप पाएंगे की मोदी जी ने सबसे
पहले पार्टी पर कब्ज़ाया इनको किनारे करके
और उन्हें किनारे की ओर पार्टी पर पूरी
तरह से अपना कपसा अपनी थक जमा लिया और

उसके बाद जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने इन
साहब को आगे की ओर देश की जो सारी मीडिया
थी अधिकतर मीडिया अपने हाथ में ले ली और
उसके बाद यह जो साहब हैं
कॉर्पोरेट पावर को भी हाथ में लेने की

कोशिश की और बहुत हद तक मोती कामयाब
बाकी संस्था
बची
जी ने कुछ लोगों को के जस्टिस को किसी को
गवर्नर बना दिया जैसे इंसाफ को इंसाफ को

उन्होंने राज्यसभा का संसद बना दिया
करते हैं वह भी उनके हाथ में कह लीजिए या
उनके माफिक फैसले दिन लगेंगे राफेल का
फैसला और भी कई फैसले आप कह सकते हैं की
सारा सिस्टम सारा का सारा सिस्टम

मोदी जी के हाथ में चंद बरसो में ए गया
मुट्ठी में ए गया पूरी इस देश की व्यवस्था
कहा जाता है निडर कहा जाता है जो किसी के
आगे झुकता नहीं एक ऐसा आदमी इसी व्यवस्था
से निकाला और मोदी जी के सामने खड़ा हो

और जिस दिन से मोदी जी के रास्ते के बीच
में आया
उसी दिन से मोदी जी का जो सिस्टम है यह जो
सिस्टम है
सरकार भले चुप है लेकिन मोदी के जो भक्त

हैं मोदी के जो फॉलोअर हैं बीजेपी की जो
इस आदमी के पीछे क्यों पद गई है
कैसा संघर्ष
एक तरफ जहां सच है और दूसरी तरफ मिथ्या है

बहुत कुछ होने वाला है और आज उसी से
पर्दा हटाऊंगा
तीसरी बार इस देश का प्रधानमंत्री बनेंगे

उसे रास्ते उसे रह में क्या सबसे बड़ा
कांता यह जज साहब हैं इनकी ईमानदारी इनकी
सच्चाई या संविधान या कानून का दायरा क्या
सबसे बड़ा कांता मोदी जी के लिए बनता जा

रहा है अगर इनके कुछ फैसले देकर
पिछले डेढ़ दो महीने के तो आपको लगेगा की
कहीं ना कहीं मोदी जी इनके फसलों से सहज
नहीं है बीजेपी सरकार इनके फसलों से मिसाल
के तौर पर

जो आग लगी गेट जो हुआ
सामने आया और दुनिया भर में चर्चा हुई और
12 लाख करोड़ लोगों के डूब गए स्टॉक
मार्केट

उसी अदानी पर कुछ बोलने को मोदी जी तैयार
नहीं द मोदी जी जेपीसी बनाने को तैयार
नहीं द जांच करने को तैयार नहीं द लेकिन
यह जो जज साहब हैं यह बीच में ए गए और
मोदी जी ने सोचा नहीं होगा की यह जो जज है

यह एक इंडिपेंडेंट जांच समिति बना देगा यह
जो जज है ये मोदी जी ने जो मोदी सरकार की
तरफ से लिफाफा गया था की जांच समिति में
उनका पैनल लो उसे लिफाफे को फाड़ दिया
अपना पैनल बना दिया इतनी हिम्मत जो पिछले

कुछ सालों में किसी जज ने नहीं की एक बड़ा
कारण था और जो इंडिपेंडेंट जांच हो रही है
इसने कहीं ना कहीं गुजरात लौकी की नींद
उदा दी है एक और मामला देख लीजिए सारे
आरोप चुनाव आयोग पर विपक्ष लगता चला रहा

था
है और के जस्टिस साहब ने चुनाव आयोग की
खटिया खड़ी कर दी उन्होंने कहा की भाई जिस
तरह से यह कमिश्नर अप्वॉइंट हो रहा है यह
तरीका ठीक नहीं है पैनल बनाया और वह ऐसा

ही पैनल हो जिसमें नेता विपक्ष भी हो के
जस्टिस भी हो प्रधानमंत्री
होगी
प्रधानमंत्री की मर्जी से नहीं होगी अब ये
भी फैसला मुझे लगता है कहीं ना कहीं मोदी
जी को उसने डिस्टर्ब जरूर किया अब एक और

फैसला देखिए महाराष्ट्र सरकार का वह मारा
सरकार जिसको एड और सीबीआई की मदद से
गिराया गया था शिवसेना को तोड़ दिया गया
था उसी मामले की सनी अब के जस्टिस कर रहा

है और उनके रुख से ऐसा लगता है की सरकार
घबरा रही हो की मोदी सरकार की पूरी पोल
खोल रही है जनता के बीच महाराष्ट्र में और
कहीं ना कहीं सहानुभूति उधर ठाकरे के साथ
हो रही तो सरकार को दर लग रहा है की कहीं

ऐसा फैसला ना ए जाए की बीजेपी के दा पर
दाग लग जाए महाराष्ट्र में क्योंकि वहां
चुनाव भी होना है और 2014
यह जहाज से कांग्रेस के अधिवेशन अटेंड
करने रायपुर जा रहे द जहाज के अंदर से
इनको असम पुलिस ने पकड़ लिया उनका

जुर्मिया था की कोई आतंकवादी जैसा कोई
इनका जुर्म नहीं इनका जुर्म सिर्फ यह था
की उन्होंने मोदी जी का पिता जी के नाम
में दामोदरदास की जगह गौतम दास लगा दिया

अब यह मामला जब के जस्टिस के पास आया भाई
क्या हुआ अगर स्लिप ऑफ तंग है जुबान फिसल
गई या जंबूज की क्या जो भी कहा असम की
पुलिस को इतनी दूर से नहीं आना चाहिए
उन्होंने कहा की बेल दी जाए

जमाना दी जाए
पवन खेड़ा को कांग्रेस को मैसेज देना चाह
रहे द लेकिन जज साहब
अब दोस्तों यह सारे ही फैसले जो जस्टिस
चंद्रचूर ने दिए हाल फिलहाल इस सब के सब

कानून के दायरे के भीतर ही द सिर्फ इतना
था की
जस्टिस ने एक हिम्मत दिखाई की भाई सरकार
के मुखालिफ भी फैसले सुनाई जा सकते हैं
लेकिन हकीकत यह है की मोदी सरकार को एक भी
फैसला रास नहीं आया सरकार खुश नहीं थी

लेकिन अब करे तो क्या करें के जस्टिस हैं
सुप्रीम कोर्ट के ट्रांसफर किया नहीं जा
सकता हटाया जा नहीं सकता कार्यकाल फिक्स्ड
है नवंबर 2024 तक तो फिर हुआ क्या की मोदी
जी भले ही कुछ नहीं बोलते अमित शाह कुछ
नहीं बोलने लेकिन उनके जो भक्त हैं जो चोर

आर्मी है उन्होंने फिर जस्टिस चंद्रचूर को
टारगेट करना
और टारगेट भी ऐसा वैसा नहीं उनके बेटे पर
लांछन किसी ने उनकी शादी का जिक्र कर दिया
पहली शादी दूसरी शादी किसी ने उनके तमाम

विचारधारा पर सवाल उठा दिए और ज्यादातर
लोग वो द जो बीजेपी का पक्ष लेते हैं
ज्यादातर लोग वो द जो जिनको बीजेपी के
मंत्री कैबिनेट मिनिस्टर इस देश के वो
फॉलो करते हैं मिसाल के तौर पर यह साहब

देखिए इनका नाम है अभिजीत मित्र
मित्र साहब जो हैं यह सुबह-शाम बीजेपी की
तरफदारी करते हैं कांग्रेस पर हमला करते
हैं आप कह सकते हैं की बीजेपी की जो

विचारधारा है उसके बड़े इनफ्लुएंसर अब
इन्होंने क्या लिखा इन्होंने अपनी ट्वीट
में लिखा है जिक्र किया है की साहब ये जो
जुबेर जैसे लोग हैं उनकी तरफदारी करते हैं
के जस्टिस और उन्होंने कहा की इस तरह का

के जस्टिस विद अन के जस्टिस लाइक दिस
पाकिस्तान के इसी को क्या जरूरत है जब देश
में इस तरह के के जस्टिस है ये बोल रहे
हैं इसी पाकिस्तान की इसी बता रहे हैं
सिन्हा साहब को भी भाजपा सरकार में कई

मंत्री फॉलो करते और बीच-बीच में यह
बीजेपी की तरफ से एजेंडा सेट करते रहते
हैं
अब इन्होंने लिखा की साहब होली मिलन कराया
गया जब बार काउंसिल में तो के गेस्ट जो है
इनको बुलाया गया था चंद्रचूर साहब क्यों

लेकिन क्योंकि मामला ईद का नहीं होली का
था होली का था तो होली में पहुंचे नहीं
स्किप कर गए गए नहीं होली में अब इस तरह
से दिखाया गया जैसे की जस्टिस चंद्रचूर है

हिंदू विरोधी कोई जज हो ऐसा है नहीं
दोस्तों यह वीडियो देखिए आप समझ जाएंगे की
जस्टिस चादर जोड़ के संस्कार किया है
अब मोदी भक्त हैं उनका ये भी कहना है की

साहब ये जो चंद्रचूर साहब हैं ये लेफ्ट
टेस्ट हैं वामपंथी हैं यह जेएनयू टाइप के
हालांकि वो जेएनयू के पड़े नहीं है
उसके बाद हार्वर्ड के पड़े हुए हैं और
जहां तक विचारधारा की बात है तो उनका यह

मानना है जस्टिस चंद्रचूर ने कैमरे के
सामने कहा है की विचारधारा मेरी हो सकती
कोई भी हो लेकिन जब मैं कला को पहनता हूं
गाउन पहनता हूं और जब मैं एक जज के होली

में अदालत में आके बैठता हूं या कोई भी जज
जब वो कला को पहनता है तो विचारधारा जो है
मिट जाती है
एक्टिव ऑफ व्हाट सी प्रीफेस और बिलीव यू
आर ऑल इन वर्ल्ड इन वैन कॉमन मिशन विच इस

डी मिशन तू डू जस्टिस
अब उधर जो बीजेपी की जो सी है ट्रॉल सी जो
है जो मोदी भक्त हैं वो कोशिश कर रहा है
की किसी तरह से लांछन लगा के आरोप लगाकर
जस्टिस चंद्रचूड़ पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव

बनाया जाए उनको अपनी ताकत दिखाई जाए
लेकिन जस्टिस तू जस्ट
सेंस ऑफ हर
नोबडी टॉक्स अबाउट बिटवीन मस्ट कंसर्न्ड
अब दोस्तों मोदी जी की जो सबसे बड़ी
दिक्कत है वो ये है की जस्टिस चंद्रचूड़

तीन-चार महीने में रिटायर होने वाले नहीं
मैंने पहले भी कहा था की इनका कार्यकाल
बहुत लंबा है यानी पिछले 15-20 साल में
सबसे लंबा कार्यकाल वाले ये के जस्टिस है

ये रिटायर होंगे 10 नवंबर 2024 को यानी
मोदी जी का जो फाइनल है लोकसभा का जो
चुनाव है 202 का वो पहले हो जाएगा आप यूं
कह सकते हैं की जो मोदी जी का जो चुनाव

होगा या इस देश का जो लोकसभा का चुनाव
होगा जहां सपना देख रहे हैं मोदी जी
प्रधानमंत्री का तीसरी बार पर
उसे चुनाव के भी जो सबसे बड़े अंपायर
होंगे तो यही होंगे और यही सरकार का थोड़ा

सा आप कह सकते हैं दर कह सकते हैं या मोदी
जी की घबराहट कह सकते की कहीं कोई और
मामला धनी जैसा ना जाए कहीं कोई और राज ना
खुल जाए कहीं कोई पेगासस जैसी चीज राफेल

जैसी कोई डील सामने ना ना जाए तब क्या
होगा चुनाव के बरस में फिर क्या होगा जब
ये जस्टिस चंद्रचूर सामने खड़े होंगे जब
इनकी अदालत में मामला जाएगा यह एक दर है
और इसकी काट गुजरात लॉबी के पास नहीं है

मोदी जी के पास नहीं है हमेशा के पास नहीं
चाणक के पास नहीं एक और बड़ी चीज यह है की
अदानी पर फैसला आना है
तमाम राष्ट्राध्यक्ष चीन के भी राष्ट्रपति

होंगे अमेरिका के भी राष्ट्रपति होंगे हर
विकसित देश का राष्ट्रपति प्रधानमंत्री
हमारे देश में होगा और तब कहीं इस तरह का
फैसला
बहुत ही आप कह सकते हैं सरकार के लिए
चिंता का सफर है क्योंकि यहां मोदी सरकार

सीधे-सीधे फाइलों में फस सकती है और मामला
पार्लियामेंट उठ सकता है यह भी एक संकट
संकट महाराष्ट्र
से पहले ऐसे बहुत से चैलेंज ऐसे बहुत से

सवाल हैं जहां जस्टिस चंद्रचूड़ मोती के
रास्ते में तुम सामने खड़े हुए हैं
दोस्तों इस देश का इतिहास जो है 75 75 साल
का वो साक्षी इस बात का की जब-जब इस देश
में कोई ईमानदार आदमी है कोई आदमी जो

उसूलों वाला है प्रिंसिपल्स वाला है वो जब
सामने आके खड़ा हो जाता है तो व्यवस्था
कहीं ना कहीं व्यवस्था की जो कुरीतियां
हैं व्यवस्था की जो खामियां है वो पूरी
व्यवस्था कहीं ना कहीं फिर झुकने लगती और

मोदी जी को दर यह है की कहीं उनका ये जो
व्यवस्था है जिनको उन्होंने मुट्ठी मिली
है वो मुट्ठी खोल ना जाए 2024 से पहले ये
एक दर है
अपडेट करते रहेंगे और देखते हैं आगे आगे

क्या होता है लड़ाई सिर्फ संसद में ही
नहीं लड़ाई किसी और क्षेत्र में भी
दिलचस्प हो गई है तो ये मेरा आज वीडियो था
और मैं इस पर अपडेट करता रहूंगा और मैं
चाहूंगा की आप अपने कमेंट जरूर करिए
जस्टिस चंद्रचूड़ के बारे में आप क्या

सोचते हैं कम से कम कोई तो है जो हिम्मत
कर रहा है थोड़ी बहुत ही वर्ण सब का सब
पूरी की पूरी व्यवस्था कहीं ना कहीं
समर्पण कर
अपने कमेंट भेजिए और जो आपके मां में कोई

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गोदी मीडिया ऐसी चीज हमेशा चपाती चली आई
है छुपाने कही कम है इस तरह के सच कोछुपाने का कम है

नमस्कार

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