इस बार Nitish लुटिया डूबो देंगे Modi की ? अपने जाल में 'फंस गई BJP' | - instathreads

इस बार Nitish लुटिया डूबो देंगे Modi की ? अपने जाल में ‘फंस गई BJP’ |

नमस्कार

बिहार में जनता का ऐतबार
जनता का भरोसा सिर्फ नितीश कुमार ने नहीं
तोड़ा जनता का ऐतबार मोदी ने भी तोड़ा है
अमित शाह ने भी तोड़ा है तीनों ने ही
यूटर्न लिया है तीनों ने ही पलटी मारी है

अब दोस्तों राजनीति में यू टर्न लेना या
पलटी मारना ये कोई नई चीज नहीं है
हिंदुस्तान की सयास में लेकिन जो बड़ा
सवाल है इस बार वो यह है कि क्या मोदी ने
मोदी ने नीतीश कुमार के साथ इस बार हाथ

मिलाकर
सौदा महंगा किया है क्या यह सौदा मोदी जी
को महंगा पड़ने वाला है और जो वह सोच रहे
हैं कि नितीश के साथ 40 में से 40 सीट फिर
जीत लेंगे पिछली बार 40 में 39 जीती थी इस
बार क्या वोह 40 में 40 सीट जीत लेंगे
जैसा कि बीजेपी दावा कर रही है या फिर
40 में आधी सीट भी मोदी के खाते में आने

वाली नहीं है और अगर ऐसा हो रहा है अगर
नितीश एक लायबिलिटी है नितीश एक महंगा
सौदा है तो उसके पीछे कारण क्या है और आज
पहली बार मैं वह कारण बताने जा रहा हूं वह
तीन कारण जो अभी तक मीडिया ने सामने नहीं
रखे तीन बोल्ड रीजन तीन बड़े कारण और बहुत
ही स्पष्ट

कारण यह
सौदा मोदी जी को महंगा क्यों पड़ने जा रहा
है नितीश एसेट की जगह लायबिलिटी क्यों है
और दोस्तों कारण नंबर एक कि नितीश क्यों
मोदी के लिए एक महंगा सौदा साबित होने जा

रहे हैं लायबिलिटी साबित होने जा रहे हैं
नफा की जगह नुकसान साबित होने जा रहे हैं
पहला कारण यह है कि नितीश की जो
क्रेडिबिलिटी थी नितीश की जो साख थी जो

बारबार उनको कहीं ना कहीं कामयाब करती थी
इस बार जैसे उन्होंने वो
पूरी तरह से गवा द है पूरी तरह से इस बार
डिस्क्रेडिट हो गए और उसका कारण यह है कि
तेजस्वी का साथ छोड़ने के लिए वह अभी तक

कोई भी वाजिब कारण नहीं दे पाए कभी राम
मंदिर की बात होती है कभी मोदी की बात
होती है कभी कांग्रेस को दोषी ठहराया जाता
है कभी इंडिया अलायंस के सीट शेयरिंग को
दोषी ठहराया जाता है और कभी वो यह कहते
हैं कि लालू उनकी पार्टी तोड़ ते तमाम

उन्होंने कारण दिए एक भी कारण स्पष्ट नहीं
और सबसे बड़ी चीज ये है कि जो नितीश कुमार
इंडिया अलायंस के सूत्रधार थे जिस नितीश
कुमार ने एक सपना दिखाया था देश की जनता
को कि वो इंडिया अलायंस को खड़ा कर रहे

हैं वोह ममता को लेकर आ रहे हैं केजरीवाल
को लेकर आ रहे हैं और वोह सूत्रधार बन रहे
थे जिसका संयोजक उनको बनाया जा रहा था बीच
मझधार में जिस तरह से उन्होंने गठबंधन को
तोड़ा है इंडिया लाइंस को तोड़ा है कहीं
ना कहीं जो लोगों की राय है आम य है कि

नितीश ने छल किया है व छलिया है निश कुमार
निहायत ुत आदमी है जो पूरे बिहार के 13
करोड़ जनता को तता से मूर्ख बनाकर उसको ठग
रहा है और इसका पूरा सूत समेत हिसाब जनता
अगले चुनाव में करेगी तो दोस्तो नीतीश

कुमार की जो साख रही है जो क्रेडिबिलिटी
रही है उनकी वोटर्स के बीच में जनता के
बीच में इस बार वो तार तार हुई और इसके
तमाम साक्ष आपको अखबारों में सोशल मीडिया
में बातचीत में तमाम वीडियोस में आपको

मिलेंगे जहां नितीश कुमार को लोग अब उस
नजर से नहीं देख रहे जिस तरह से देखते थे
और कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि नितीश
कुमार अब अपनी छाया के बराबर नहीं अब अपने
शैडो के बराबर भी नितीश कुमार नहीं है ऐसा
उनका कंडक्ट होता चला जा रहा है ऐसी उनकी

क्रेडिबिलिटी हो गई है वह पूरी तरह से
डिस्क्रेडिट हो
गए और कारण नंबर दो कारण नंबर दो और भी
कहीं ज्यादा गंभीर है और मैं इस कारण को
बताने में बहुत इंटरेस्टेड नहीं था
क्योंकि किसी की पर्सनल लाइफ को सोशल
प्लेटफार्म पर डिस्कस नहीं करना चाहिए

लेकिन क्योंकि जरूरी है आप एक एक लीडर को
एनालाइज कर रहे हैं और इसलिए मैं कारण
बताना चाह रहा हूं और यह कारण है नितीश
कुमार की मनोदशा इस बढ़ती उम्र में उनकी
जो मनोदशा है व ठीक नहीं है और इसके कई

प्रमाण मिले जिस तरह से वह कुछ भी बोल
देते हैं कभी भी बोल देते हैं किसी पर भी
बिफर जाते हैं और यह नहीं देखते कि वह
क्या बात किस महफिल में कह रहे जैसे
विधानसभा में उन्होंने परिवार नियोजन को

लेकर जो अश्लील बातें कही दोनों सदन में
कल्पना से परे और जिस तरह से दलित नेता
जीतन राम मांझी को उन्होंने पब्लिकली जिस
तरह से उन पर व बरस पड़े और ना जाने क्याक
कहा उन्होंने वो भी कल्पना के परे था लोग

ऐसा कहते हैं कि नितीश कुमार क्या करने जा
रहे हैं क्या करेंगे बहुत ज्यादा
अनप्रिडिक्टेबल हो गए और य मैं नहीं कह
रहा हूं उनके जो बड़े पुराने साथी सुशील
मोदी वर्षों तक जिन्होंने नितीश कुमार के

साथ काम किया सुशील मोदी की आप यह बात
सुनिए कुछ महीने पहले की दो महीने पहले की
सुशील मोदी ने खुलकर कहा जो मैं आपसे नहीं
कह सकता लगता है कि नीतीश कुमार किसी
गंभीर बीमारी से ग्रसित है मैं उनको 40

साल से जानता हूं न कभी मैंने उन यह रौद्र
रूप नहीं देखा इस तरह से गुस्से में नहीं
देखा दो दिन पहले महिलाओं के बारे में जो
टिप्पणी किया उन्होंने और कल जो माझी जी
के बारे में जो उन्होंने कहा यह उनके

स्वभाव में नहीं है और अकारण खड़े हो गए
और ऐसी ऐसी बातें बोल रहे हैं गुस्से के
अंदर और तुम तम शब्द का प्रयोग कर रहे हैं
अब दोस्तों अगर पार्टी के तौर पर देखें तो
नितीश कुमार की जो पार्टी है पहले से कहीं

ज्यादा कमजोर ई उनकी जो एक तरह का कंडक्ट
रहा है उनकी जो एक तरह की सोच रही रही है
नितीश कुमार की जो अस्थिरता देखने में
मिली है उनकी मनोदशा में उसके कारण चाहे
वो विचारधारा हो चाहे नितीश कुमार का
पर्सनल कंडक्ट हो पार्टी कहीं ना कहीं दो

फाड़ में होती चली जा रही है ललन सिंह जो
उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष थे उनको जिस तरह
से हटाया गया या जिस तरह से बीजेपी के कुछ
लोग पार्टी में हावी हैं जैसे संजय झा है
या एक अशोक चौधरी जो बीजेपी से जिनके तार

कई सवाल उठ रहे हैं पार्टी उस तरह से नहीं
खड़ी है जमीन पर जैसे पहले खड़ी थी काडर
कमजोर हुआ है कार्यकर्ता कमजोर हुए पार्टी
के अंदर तरह तरह के मनभेद और मतभेद है और
कुल मिलाकर जो स्ट्रेंथ थी नितीश कुमार
में अब नहीं और मांझी के साथ जो उनका

बर्ताव था जो दलित है उनसे नाराज है और
मोदी से इस नाजुक मौके पर हाथ मिलाने से
बिहार का
मुसलमान अब नितीश कुमार को माफ नहीं करने
जा रहा बिहार की जनता 2024 के चुनाव के
समय बिहार की जनता नीतीश कुमार जी और जो

उनको नचा रहे हैं दिल्ली में बैठकर उनको
सही जवाब देगी अब दोस्तों सच्चाई यह है कि
ये जो जमीनी हकीकत है य जो जमीनी सच्चाई
है जेडीयू की या नितीश कुमार की इस सच्चाई

से यह साहब भी वाकिफ थे मोदी जी के चरण के
और ऐसा लोग कहते हैं कि अमित शाह अमित शाह
नहीं चाहते थे कि अलायंस हो इसीलिए
उन्होंने बार-बार कहा कि दरवाजे अब नितीश
कुमार के लिए हमेशा के लिए बंद हो चुके

हैं और वो बार-बार कह रहे थे कि खुद अपनी
पार्टी को खड़ा किया जाए और इसीलिए अमित
शाह बार-बार रैली कर रहे थे बिहार में
लेकिन फिर उन्होंने बिहार जाना बंद किया
दरअसल मोदी जो है उन्होंने बिहार अफेयर्स
अपने हाथ में ले लिए थे और अमित शाह को

थोड़ा सा किनारे करके मोदी ने ही तय किया
मोदी ने ही वीटो किया कि उन्हें नितीश
कुमार के साथ जाना चाहिए क्योंकि नितीश
कुमार को लेकर व एक कांग्रेस को मैसेज
देना चाह रहे थे वो इंडिया अलायंस के जो

गुब्बारा है उसकी हवा निकालना चाह रहे थे
मोदी सबक सिखाना चाहते थे राहुल गांधी
खड़गे इंडिया लाइंस अपोजिशन को कि आपका
सूत्रधार अब हमारे साथ यह जो एक मोदी का
स्टेंस था व अपनी जगह सही था लेकिन बिहार

में यह लायबिलिटी हो सकता है य नुकसान कर
सकता है क्योंकि नितीश कुमार की ना वो
क्रेडिबिलिटी है ना वो स्ट्रेंथ है ना वो
मनोदशा है ना वो आचरण है ना वो ऊर्जा है
उम्र उन पर हावी है क्या होता आगे क्या
वाकई यह सौदा महंगा होगा क्या टे का सौदा

है और मोदी जी को जब मशीनें खुलेगी बिहार
की तब पता लगेगा एहसास होगा मुझे लगता है
कि इस पूरे बड़े सवाल की तह में जाना
चाहिए दो खास मेहमान हैं अभिषेक कुमार

डेटा जर्नलिस्ट हैं बिहार के वोह हमारे
साथ हैं हथेली की तरह बिहार को जानते हैं
और प्रोफेसर रविकांत बिहार के दौरे से
लौटे हैं जातीय समीकरण समझते हैं चलते हैं
प्रोफेसर रविकांत और अभिषेक कुमार के साथ

इस सवाल को तह तक जानने समझने परखने की
कोशिश करते हैं पहला सवाल मेरा अभिषेक से
अभिषेक सीधा सधा जो सवाल आखिर में मुझे
पूछना था और मैं वह सवाल पहले ही पूछ रहा
हूं और बिना
किसी पेश बंदी सीधा सधा पूछ रहा हूं कि

क्या नितिश कुमार लायबिलिटी हो सकते
क्योंकि लोग कह रहे कि नितीश कुमार बहुत
अनप्रिडिक्टेबल हो क्या कहेंगे क्या
बोलेंगे किसी को कुछ पता नहीं हमने
विधानसभा में उनके बहुत ही अश्लील भाषण

देखे जो उनसे उम्मीद नहीं की जा सकती जीतन
राम मांझी के साथ जिस तरह से वो बड़े जिस
भाषा का प्रयोग किया तो सुशील मोदी ने कहा
कि ऐसा लगता है कि मानसिक रूप से कहीं ना
कहीं असंतुलित हो गए नितिश और उन पर उम्र

हावी है उनके सेहत को लेकर भी विपक्ष ने
यही जो भाजपा के लोग हैं आज उनके साथ है
बहुत से सवाल उठाए आपको क्या लगता है कि
नितिश जो यह अंतिम पारी खेल रहे हैं क्या
नितिश वही नितिश है या ये नितिश महंगे
पड़ेंगे नरेंद्र मोदी

देखिए दीपक जी आज के घटनाक्रम के बाद आप
कह सकते हैं कि पुराने नीतीश कुमार की आज
के नीतीश कुमार छाया मात्र भी नहीं है
परछाई भी नहीं बचे है और राजनीति में सबसे
बड़ी चीज होती है क्रेडिबिलिटी और इस बात

का ध्यान रखिए कि नीतीश कुमार का वोट बैंक
कोई जाति आधारित वोट बैंक नहीं है वो लालू
यादव और मुलायम सिंह यादव की तरह के नेता
नहीं है नीतीश कुमार का वोट बैंक एक
सामाजिक समीकरण उनके काम के आधार पर
चाहे वह महादलित समीकरण बना चाहे वह अति

पिछड़ा समीकरण बना या लौक समीकरण जिसे
कहते थे कुर्मी कुशवाहा उसके बूते बना हुआ
सीकरण नीतीश कुमार के बारे में जो आप कह
रहे हैं नीतीश कुमार यदि इंडिया गठबंधन के
साथ बने रहते तो उनकी क्रेडिबिलिटी बची

रहती उनकी पूरी पॉलिटिकल यूएसपी उनकी
क्रेडिबिलिटी पर चलती है और पिछले दो
बार दीपक जी एक बात कहना चाहता हूं पिछली
दो बार का जो घटनाक्रम हुआ 1 और 22 में

उनके पास अलायंस बदलने के वैलिड रीजन थे
वाजिब कारण थे इस बार वो कोई कारण बता
पाने की स्थिति में नहीं है आज जो प्रेस
कान्फ्रेंस उन्होंने प्रेस से जो बात की
है उसमें भी कहा कि दोनों तरफ दिक्कतें हो
रही थी लेकिन कुछ सफाई वो दे नहीं पाए तो

कहीं ना कहीं लायबिलिटी की संभावना ज्यादा
बताई जा रही है मुझे लग रहा है जी एक छोटा
सा सवाल उसके बाद मैं प्रोफेसर साहब के
पास जाऊंगा आपकी लगातार आप नितिश कैंप के
संपर्क में रहते हैं ज्यादातर प्रोमिन
नेता आपको जानते हैं और मुझे लगता है कि

सवाल थोड़ा सा असहज हो सकता है आपके लिए
और हो सकता है कि आप सीधे तौर पर जवाब ना
द लेकिन मैं अपेक्षा करूंगा अपने दोस्तों
के लिए कि आप सही जो बात है वो बताए क्या
नितीश कुमार वाकई बीमार है जिस तरह के

आरोप उन पर लगे क्या बहुत अनप्रिडिक्टेबल
उनके डिसीजन है लोगों को पता नहीं कि
नितीश कुमार कब क्या बोल जाएंगे इस तरह की
स्थिति है
क्या देखिए दो चीजें सामने आ रही है आपने
कहा कि जेडीयू के लोग दरअसल हम पत्रकारों

के लिए क्या जेडीयू क्या आडी क्या बीजेपी
सब लोग संपर्क में रहते हैं कांग्रेस के
लोग भी रहते हैं लेकिन हम सबका सबकी
आलोचनात्मक समीक्षा ही करते हैं यहां भी
वही करेंगे बड़ी चीज यह है कि नीतीश कुमार

के सारे लक्षण तब दिखने शुरू हुए जब नीतीश
कुमार विधानसभा में तीसरे नंबर की पार्टी
हो गए और एक असहज तरीके से किसी भी गठबंधन
को चाहे वह यूपीए हो मतलब महागठबंधन हो जो
आज का इंडिया है चाहे वह पुराना एनडीए हो
विधानसभा स्पीकर के साथ जो उनकी उनका हॉट

एक्सचेंज हुआ आपको याद होगा न के इतिहास
में प्राइंग ऑफिसर के साथ स्पीकर के साथ
आपने नहीं सुना होगा कि हाउस का कोई मेंबर
चाहे व फ्लोर लीडर या मुख्यमंत्री
प्रधानमंत्री क्यों ना हो इस तरह से पेश

आए जो हुआ उस दिन उसके पहले तेजस्वी यादव
को उन्होंने क्या बात बोली थी विधानसभा के
अंदर बहुत ही गुस्से में थे कि भाई समान
दोस्त का बेटा है इसलिए हम चुप रहकर इसकी
सारी अनर्गल बातों को सुनते रहते हैं जी

और गुस्सा उनका बारबार भड़कना तब शुरू हुआ
और गुस्से में कुछ भी बोल जाते थे तेजस्वी
को जो बातें बोली चलिए अनर्गल नहीं था
तेजस्वी चक उनके सामने बच्चे हैं डांट
दिया जीतन माझी को जो बात बोली वो निश्चित

तौर पर बहुत ही गलत बात थी जित
वि
जी जी दूसरी चीज जो विधानसभा में उन्होंने
जो परिवार नियोजन को लेकर जो बयान दिया और
विधानसभा से भी ज्यादा विधान परिषद में जब
वो अगले दिन गए तो उस बात की व्याख्या ही
करने लगे जो बात गलती से उन्होंने क दी थी

और फिर उसके अगले दिन आकर के सदन में यह
कह रहे
हैं सदन में अगले दिन आकर के वह यह कह रहे
हैं कि खुद की कड़ी निंदा मैं करता हूं अब
आप सोच सकते हैं कि वो खुद की कड़ी निंदा
इस बात का एहसास करके कर रहे है सवाल है

कि कहीं ना कहीं लोगों के मन में डाउट
होना स्वाभाविक है कि कुछ चीज है नहीं
नहीं सही आप एक बात आपने कही नितीश कुमार
अब अपनी शैडो भी नहीं है अपनी छाया भी
नहीं है और यह जो नितीश कुमार है इनके साथ

जिस तरह से गल भैया की है नरेंद्र मोदी ने
महंगा पड़ सकता है एक चीज मैं डॉक्टर साहब
आपसे पूछना चाहूंगा आप अभी बिहार के दौरे
से लौटे हैं बिहार जाते रहते हैं जमीनी
पॉलिटिकल एनालिस्ट है जमीनी नेताओं के

संपर्क में रहते हैं एक चीज मैं यहां आपसे
पूछूंगा कि क्या जो य बात कही जा रही है
कि नितीश के आने के बाद अब 40 में 40
सीटें मिलेंगी क्या यह जो नितीश जो पूरी
तरह से डिस्क्रेडिट हो चुके गली गली में
जिनकी आज बदनामी है मीम्स बन रहे हैं

जिनके बारे में जितने कार्टून पिछले 48
घंटे में बने शायद किसी नेता के
हिंदुस्तान में बने हो टर भरा पड़ा है
सोशल मीडिया भरा हुआ है यहां तक कि जो
भाजपा के लोग है वो भी हस रहे हैं कहीं ना

कहीं क्या 40 में 40 ले आएंगे इस जग हसाई
के बीच में आपका क्या फीडबैक है बिहार
से कतई नहीं नंबर एक और उसकी वजह है उसकी
वजह यह है कि एक तो नीतीश कुमार ने पिछले
अपने कार्यकाल में जो किया है जिसकी कुछ

बात तो अभिषेक जी ने
बताई लेकिन अब जो इस समय उन्होंने किया है
वह सिर्फ बिहार में उसकी आलोचना नहीं हो
रही समूचे देश में हो रही है एक तो
अल्पसंख्यकों में वह पूरी तरीके से

डिस्क्रेडिट हो गए तो जो वोट अभी नीतीश
कुमार को मिलता रहा है इस बार किसी भी
कीमत पर वो नहीं मिलने वाला है दूसरा जो
बात उन्होंने परिवार नियोजन को लेकर के

कही थी वो अगर सार्वजनिक जीवन में गई और
लोगों ने सुना है तो कौन महिला उनको वोट
कर सकती एक महिला कांसटेसी उन्होंने बनाई
थी नरेंद्र मोदी के
पहले जो उनको बड़ा एक तरह से वोट बैंक रहा

उनका इसके बाद तीसरी बात दलित जीतन राम
मांझी के लिए आप जिन शब्दों का इस्तेमाल
करते हैं और अभी बीजेपी यही कह रही थी
बीजेपी के तमाम समर्थक यही कह रहे थे कि
एक दलित का सरेआम विधानसभा के भीतर इस तरह
का अपमान कर

करना ये तो मूर्ख है बड़ी घटना है इसको तो
कुछ आता ही नहीं है इन शब्दों को अगर
विपक्ष ने पकड़ा और जमीन पर वो ले जाए गए
तो नितीश कुमार का क्या हो इसके अलावा आप
देखिए उपेंद्र कुशवाहा है चिराग पासवान है
और उनके चाचा है इनका क्या करेंगे इनको

कैसे संभालेंगे
जीतन राम माझी ये सार तो नरेंद्र मोदी के
सामने खड़े हुए थे अब आप उनको कैसे एडजस्ट
करेंगे तो अभी तो सीटों के तालमेल में ही
पैच फसना है और यह जो नीतीश कुमार मिले
हैं बीजेपी को यह चुके हुए नीतीश कुमार है

उनके पास अब वो ना तो पुरानी क्रेडिबिलिटी
है ना वो धैर्य है और ना ही वो सलाहियत है
आपके पास रणनीति इतनी रणनीति नीतीश कुमार
के पास बची है कि कब पलटी मारना है और
कैसे मुख्यमंत्री बने रहना है यही उनके

जीवन का हासिल है ऐसा चुका हुआ व्यक्ति
जिसके बारे में यह क्रेडिट हो जाए कि साहब
केवल मुख्यमंत्री रहने के लिए वो आदमी
कहीं भी पलटी मार सकता तो कितना वोट

दिलाएगा वो जी चलिए एक बड़ा ब्राइट करियर
है बड़ी ईमानदारी से गुजारा हुआ एक
राजनीतिक करियर की एक ऐसी शाम हो रही है
जहां सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा दिख रहा है
और इस अंधेरे में मोदी जी क्या उठाते मुझे
नहीं दिख रहा है मैं नितीश कुमार की जो

बात बात पर जिद है बात बात पर गुस्सा है
नितीश कुमार कुछ बोलते हैं कुछ करते हैं
और उनके जितने भी किचन कैबिनेट है उनको
लेकर कंफ्यूज है मैं नितीश कुमार की
मनोदशा पर बहुत नहीं जाना चाहता मेरे

दोस्त समझ रहे हैं कि मैं क्या कहना चाह र
हूं ठीक है जो हुआ सो हुआ लेकिन एक चीज है
घाटे का सौदा हो सकता है अभिषेक मेरा सवाल
बड़ा सीधा है और संक्षिप्त मुझे जवाब

चाहिए कि आपको लगता है
कि नरेंद्र मोदी ने इंडिया अलायंस की हवा
निकालने के लिए उसके सूत्रधार को तोड़
लिया व दरअसल कांग्रेस को और ममता बनर्जी
को सबको एक आईना दिखाने की कोशिश कर रहे
थे कि उसको मैंने इस गुब्बारे को पंचर कर
दिया हवा निकाल दी इसकी इस चक्कर में

उन्होंने नीतीश कुमार को सिर्फ दो महीने
के लिए लिया है यह दो महीने का ब्याह है
उसके बाद इसमें तलाक होना है क्या 2024 के
चुनाव के बाद नितीश कुमार की जो पारी है
खत्म हो जाएगी जैसा कि प्रशांत किशोर कह
रहे य आपको लगता है कि नितीश कुमार के साथ

यह साझेदारी मोदी जी की बहुत लंबी होने जा
रही है देखिए दीपक जी नीतीश कुमार की
राजनीतिक पारी कम से कम इस गठबंधन में तो
बहुत लंबी मुझे भी नहीं दिखती इसलिए नहीं
दिखती क्योंकि भारतीय जनता पार्टी का जो

मिजाज है गठबंधन सहयोगियों को सब जूम कर
जाने का उनको अपनी पार्टी में उसके बड़े
खेमे को अपने साथ ले लेने का वो सभी जानते
हैं और नीतीश कुमार की पार्टी विधानसभा

में जब तीसरे नंबर की पार्टी है और बीजे
बीजेपी के साथ जब वो गए तो ध्यान रखिए दो
तिहाई बहुमत के साथ वहां वो सरकार चला रहे
थे अब केवल वो पांच विधायकों के बहुमत पर
सरकार चलाने के लिए गए हैं केवल पांच

विधायक 122 पर बहुमत का आंकड़ा है 127 या
128 एमएलए उनके पास
है उनके बूते हो गए हैं और उन 127 28 में
चार एमएलए उन जीतन राम माझी के हैं जिसे
जिन्ह कभी उन्होंने मुख्यमंत्री बनाया और
बाद में विधानसभा में ऐसी बातें कई गुस्से

में उनके
तो ध्यान रखिए इस सरकार की स्टेबिलिटी पर
हमेशा सवाल रहेगा और उस दौर में सवाल
ज्यादा महत्त्वपूर्ण है जब विधायकों के
अंदर सांसद बनने की महत्वाकांक्षा है कई

सारे विधायक विधानसभा से इस्तीफा देकर
दूसरी पार्टियों के टिकट पर लोकसभा का
चुनाव लड़ सकते हैं और यह होता रहा है हर
राज्य में हर दल में अगर इनके पांच सात
विधायक इंडिया गठबंधन के टिकट पर लोकसभा

लड़ने चले गए तो क्या होगा विधानसभा में
आप अंदाजा लगा सकते हैं कि क्या स्थिति है
जी और भारतीय जनता पार्टी के एक चीज मैं
कहना चाहूंगा दीपक जी एक बड़े वामपंथी
नेता मैं नाम नहीं लूंगा उनसे मेरी
मुलाकात हुई एक बात उन्होंने बताई कि

नीतीश कुमार से उनकी जो दो तीन मुलाकातें
हुई है उसमें नीतीश कुमार बारबार एक ही
चीज दोहरा रहे थे वो कह रहे थे देखिए
बिहार में कुछ था हमने इतना किया यह किया
सब कुछ अपनी उपलब्धियां बताते थे अंत में
उन नेता जी ने थोड़ा नीतीश कुमार को तंज

भरे अंदाज में ही कहा कि मैं बिहार के
मुख्यमंत्री और इंडिया गठबंधन के
आर्किटेक्ट नीतीश कुमार से मिलने आया हूं
मैं सूचना जन संपर्क मंत्री बिहार के जो
नीतीश कुमार के सूचना जनसंपर्क मंत्री से

मिलने नहीं आया हूं मैं उनके आईपीआरडी के
लोगों से मिलने नहीं आया हूं तब जाकर
नीतीश कुमार को उनके शब्दों को मैं उधार
लेकर कह रहा हूं तब जाकर नीतीश कुमार को
इस बात का एहसास हुआ कि नहीं हम गलत कर
रहे हैं एक चीज तो एक चीज तो मैं जरूर

कहना चाहूंगा कि नरेंद्र मोदी अभी तक जो
है जो नेता एकदम चढ़ाव प होते थे उन्हीं
पर दांव खेलते थे इस बार उन्होंने नितीश
पर दांव क्यों खेला है इसका जवाब तो
नरेंद्र मोदी को खुद मिलेगा एक सवाल और

बड़ा इंपोर्टेंट सवाल आपसे करना चाह रहा
हूं कि नितीश कुमार के करियर की तो हमें
शाम दिख रही है अंधेरा दिख रहा है क्या
आपको लगता है कि अब नितीश कुमार के इंडिया
अलायंस के से हटने से खड़गे की मलिक

अर्जुन खड़गे के लिए एक प्लेटफार्म तैयार
हो गया है और मलिक अर्जुन खड़गे जो दलित
नेता है इनको अगर डॉक्टर साहब आगे किया
जाता तो क्या उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड
जैसे राज्यों में क्या खेल अभी भी कहीं ना

कहीं बदल सकता है कहीं ना कहीं अभी भी
खड़गे को अगर आगे किया जाए एक दलित फेस के
तौर पर तो क्या एक कांटे की टक्कर आपको
दिखती है अगर ऐसा डिसीजन होता है अगर
नितीश को वाकई अब हम इंडिया एलायस खड़गे

से रिप्लेस करती है तो आपको क्या दिखता है
देखिए अब मुझे लगता है कि इंडिया एलाइंस
को मल्लिकार्जुन खड़गे को एज ए पीएम फेस
आगे करने में अब कोई दिक्कत नहीं होगी
क्योंकि दो दो ही नाम ये आगे थे तो उसमें

वो सीधे तौर पर ऐलान नहीं कर सकते थे ममता
बनर्जी राजी है अरविंद केजरीवाल समर्थन कर
चुके हैं उद्धव ठाकरे से लेकर के शरद पवार
होते हुए अखिलेश यादव तक को किसी को कोई
दिक्कत होगी नहीं नंबर एक नंबर दो

मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम का ऐलान करने
से वो दलित सेंटीमेंट और जो वंचित तबका है
खास कर के जो हिंदुत्व का जो अटैक हो रहा
है ये सारी ताकतें एकजुट होकर के
मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम पर इंडिया

एयरलाइंस के साथ जा सकती है और नई
उम्मीदें इससे पैदा होंगी जो अभी डैमेज
हुआ है इसमें एक ही यह तुप का इका उम्मीद
है पैदा कर सकता है और मलिकार्जुन खड़गे
दक्षिण से आते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश का

भी वह दलित यह चाहता है कि अगर खड़गे जी
का नाम आगे आता है पीएम के लिए तो फिर हम
मायावती को भी छोड़ सकते हैं अगर मायावती
नहीं आती है लास्ट जी जी जी जी लास्ट
क्वेश्चन अभिषेक आपको लगता है कि जो

तेजस्वी ने कहा कि खेला तो अब शुरू हुआ द
गेम बिगस नाउ खेल अब शुरू हो रहा है क्या
आपको लगता है कि तेजस्वी अगर सामने आते
हैं पुराने बल्लेबाज भी है क्या तेजस्वी

आज की तारीख में उनके साथ विक्टिम कार्ड
उनके साथ है सहानुभूति उनके साथ है
क्योंकि अभी तक नितिश यह बता नहीं पाए
नितीश ये जता नहीं पाए कि भाई असली रीजन
क्या था लोग लोग ने नितीश पर तबार नहीं

किया उनके पास तेजस्वी का साथ छोड़ने का
कोई भी कारण नहीं था क्या
तेजस्वी विक्टिम कार्ड खेलने में सफल
होंगे क्या सहानुभूति तेजस्वी को मिल सकती
है इस युवा नेता को मिल सकती है आज की
तारीख देखिए तेजस्वी यादव अभी अपर हैंड है

उनका बिहार की पॉलिटिक्स में यह बात माननी
होगी कि पिछले तीन दिनों से जो घटना क्रम
हुआ है उसने तेजस्वी यादव को वो मनचाही
बढ़त दे दी है जिसकी वो कभी कल्पना भी
नहीं कर रहे थे कर नहीं सकते थे नीतीश

कुमार के छाया तले रहते हुए नीतीश कुमार
ने मैंने फिर कहा मैं फिर कह रहा हूं कि
नीतीश कुमार इसके पहले अलायंस जब भी स्विच
किए उनके पास एक बोनाफाइड रीजन था इस बार
वो तर्क नहीं है कि किस वजह से तोड़ा गया
और तर्क केसी त्यागी जो आज बोल रहे थे

क्या लग रहा था इंडिया गठबंधन में देरी हो
रही थी तेजस्वी यादव पर तो कोई आरोप नहीं
लगा पाए वो लोग गठबंधन में दिक्कतें हो
रही थी अब दिक्कतें कहां पर थ नीतीश कुमार
ने बिना पूछे मंत्रालय बदल दिया तीन-तीन

मंत्रियों के मंत्रालय बदल दिए विवादास्पद
शिक्षा मंत्री का मंत्रालय बदल दिया दोदो
मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया
इसके पहले सुधाकर सिंह और कार्तिक मास्टर
तो सवाल यही उठता है कि तेजस्वी यादव तो

सब कुछ सुन रहे थे मंत्रालय बदलने पर
उन्होंने पत्रकारों को साफ साफ कहा किय
मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है जि देना चा
काटे की टक्कर आपको दिखती है बिहार में

कांटे की टक्कर तो है लेकिन इस कांटे की
टक्कर में जब तक खड़ग के नाम का ऐलान नहीं
होता है पीएम कैंडिडेट के तौर पर तब तक जज
अभी भी भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में है
और जहां तक खेला वाली बात है खेला तेजस्वी

यादव अभ भी नहीं करेंगे नीतीश कुमार के
साथ य ध्यान रखिए खेला कर सकती है तो व
बीजेपी कर सकती है और बीजेपी अपनी आदत से
बाज नहीं आएगी चाहे वह मनी बिल पर बजट में
करे या लोकसभा चुनाव के बाद करे करेगी तो
जरूर चलिए एक चीज आपने कही कि कहीं ना

कहीं एज है सिंपैथी है और एक तरह का
विक्टिम खेलने का उनके पास पूरा मौका है
तो एक तरफ आप कह सकते हैं पलटू रामों की
भीड़ है जहां पर सारे नेता आज की तारीख
में उनको कहा है कि ना सिर्फ नितीश कुमार

ने बाजी पलटी है उन्होंने ना सिर्फ पलटू
राम का परिचय दिया पलटू राम का परिचय इस
बार अमित शाह ने भी दिया नरेंद्र मोदी ने
भी दिया क्यक जिस तरह से एक झगड़ा चल रहा

था द्वंद चल रहा था तलवार खींची हुई थी और
जिस तरह से तलवारें वापस मन में गई जिस
तरह से गल बहिया हो रही है ये लोगों को
वोटर को बहुत बिहार में चौका रहा है तो एक

तरफ भीड़ है पलटू रामों की और दूसरी तरफ
एक नेता खड़ा है तेजस्वी यादव जिसके साथ
कहीं ना कहीं खेल किया गया है देखना है
आगे क्या होता है अभिषेक आप आए और
प्रोफेसर रविकांत साहब आए खुलकर बातचीत आप
लोग ने की और मैं फिर कह रहा हूं ये जो
सौदा है नितीश कुमार का जो आपने कहा कि

नितीश कुमार अब नितीश कुमार की शैडो नहीं
नितीश कुमार अपनी छाया बराबर भी अब नहीं
रहे ऐसे में नरेंद्र मोदी को क्या लाभ
मिलता है इसम बहुत से सवालिया निशान है
अभिषेक आप का और प्रोफेसर रविकांत आप
दोनों का मेरे दोस्तों की तरफ से
बहुत-बहुत आभार थैंक यू सो मच

Leave a Comment