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ऑस्ट्रेलिया क्यों है 90% खाली ? | Why Is 90% of Australia Empty?

साल था 1779 यह वह साल था जब सूर्य और
पृथ्वी के बीच से वीनस प्लानेट गुजरने
वाला था यह एक बहुत अनयूजुअल बात थी और
उससे भी ज्यादा खास बात यह थी कि यह घटना
सिर्फ साउदर्न हेमिस्फीयर से ही दिखाई

देती जब ब्रिटिश सरकार को इस बात की
जानकारी हुई तो इन्होंने इससे रिलेटेड
इंफॉर्मेशन जुटाने के लिए कैप्टन जेम्स
कुक की लीडरशिप में एक कैंपेन भेजकर
साउदर्न हेमिस्फीयर में एक जगह खोजने के

बारे में सोचा समुद्र में खोज करते-करते
अब कई महीने बीत गए जेम्स कुक को कोई भी
धरती मिल नहीं रही थी लेकिन हार ना मानते
हुए उन्होंने अपनी खोज जारी रखी और समुद्र
में आगे बढ़ते रहे इसके बाद साल 1770 में

यह एक ऐसे टापू पर पहुंचे जहां दूर-दूर तक
सिर्फ बंचर था और रहती थी तो बस कुछ
जनजातियां एक तरफ समुद्र तो दूसरी तरफ
दूर-दूर तक फैली वीरान जमीन इसके बाद
उन्होंने यहां पर कब्जा कर लिया अंग्रेजों

को कब्जा करने में कोई परेशानी नहीं हुई
क्योंकि इस जगह की जनसंख्या बहुत कम थी और
आज भी इस आइलैंड की स्थिति ऐसी ही है इस
देश की खोज हुए 250 साल से ज्यादा बीत गए
हैं लेकिन आज भी इसकी पॉपुलेशन इसके एरिया
के हिसाब से बहुत कम है ऐसा क्यों है मतलब

यह समझ लो कि यहां 1 किलोमीटर पर सिर्फ
तीन लोग रहते हैं अब तक तो आप समझ ही गए
होंगे कि हम किस देश की बात कर रहे हैं जी
हां हम बात कर रहे हैं ऑस्ट्रेलिया की
ऑस्ट्रेलिया बिल्कुल खाली क्यों है यह एक

ऐसा देश है जिसका कुल एरिया तो भारत के
एरिया से दुगना है लेकिन इस देश का कुल प
लेशन मात्र 2.57 करोड़ ही है जो भारत की
राजधानी दिल्ली के पॉपुलेशन के लगभग बराबर

है जबकि यह देश आकार में दिल्ली से 5183
गुना बड़ा है आपको यह जानकर आश्चर्य होगा
कि ऑस्ट्रेलिया की 90 पर आबादी सिर्फ इसके
0.23 पर एरिया पर ही रहती है जिसमें इसके
पांच शहरों कैनबरा सिडनी मेलबर्न

ब्रिस्बेन और एडिलेड शामिल है और खास बात
यह है कि यह सभी शहर ऑस्ट्रेलिया के साउथ
ईस्टर्न कोस्ट के किनारे बसे हुए हैं जबकि
ऑस्ट्रेलिया चारों ओर से समुद्र से घिरा
हुआ है और इसका कुल सी कॉस्ट 3673 5 किमी
लंबा है अब ऐसे में सरकार ने इस देश के

खाली पड़े हुए ज्यादातर एरिया को ग्रामीण
या जंगल का क्षेत्र मान लिया है इतना ही
नहीं ऑस्ट्रेलिया की पॉपुलेशन डेंसिटी भी
अजीब है साल 2003 में इस देश की पॉपुलेशन
डेंसिटी 3.3 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर

था अब इसके पीछे की वजह को जानने के लिए
हम एक बार ऑस्ट्रेलिया की ज्योग्राफी को ढ
से समझना होगा लेकिन उससे पहले यह जान
लीजिए कि किसी भी जगह पर लोग तब रहते हैं
जब उस जगह की ज्योग्राफिकल सिचुएशन उनके

रहने के लिए सूटेबल हो यानी वहां का मौसम
कैसा है वहां कितनी गर्मी है या कितनी ठंड
है इसके बाद वहां रिसोर्सेस हैं या फिर
नहीं है कितनी कल्ट वेबल लैंड है नदी है
या नहीं है क्योंकि नदी ही मीठे पानी का

सबसे बड़ा सोर्स होती है इसके बाद किसी भी
देश की पॉपुलेशन बढ़ने में एक
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि उस देश के लोग
अपने घर में कितने बच्चे पैदा करना चाहते
हैं एक दो या फिर इससे ज्यादा वहां के लोग

कितने शिक्षित या अशिक्षित हैं यह बात भी
किसी भी देश की पॉपुलेशन को बढ़ाने या
घटाने में इंपॉर्टेंट रोल प्ले करती है और
इसी थरी पर चलते हुए आज कई देशों ने अपनी

पॉपुलेशन अपने एरिया के हिसाब से कई गुना
तक ज्यादा बढ़ा ली है लेकिन ऑस्ट्रेलिया
के लोगों के साथ ऐसा नहीं है इन लोगों ने
ऐसा नहीं किया हम भारतीय लोग ऑस्ट्रेलिया
के क्रिकेट या फिर इस देश के राष्ट्रीय

 

पशु कंगारू की वजह से इसको जानते हैं वैसे
कंगारुओं का वर्णन करते हुए जेम्स कुक ने
भी लिखा था कि कुत्ते की तरह दौड़ते हैं
और खरगोश की तरह कूदते हैं दोस्तों
ऑस्ट्रेलिया सात महाद्वीपों में सबसे छोटा
महाद्वीप है लेकिन क्षेत्रफल में यह देश

विश्व का छठा सबसे बड़ा देश है इससे बड़ा
केवल रूस कनाडा चीन यूएसए और ब्राजील ही
है लेकिन अगर यहां पर पॉपुलेशन की बात
करें तो इन देशों का पॉपुलेशन इससे कहीं
ज्यादा है आज ऑस्ट्रेलिया को लोग एक

महाद्वीप एक देश और एक द्वीप के रूप में
जानते हैं आज ऐसे कई कारण मौजूद हैं जिनकी
वजह से हम कह सकते हैं कि ऑस्ट्रेलिया का
ज्यादातर हिस्सा खाली पड़ा हुआ है इसमें
एक बहुत मेन कारण है देश की हार्श और बहुत

ही अजीब क्लाइमेटिक कंडीशंस ऑस्ट्रेलियन
कॉन्टिनेंट अपनी यूनिक वेजिटेशन और जीवों
के साथ-साथ अपने वेरियस लैंडस्केप के लिए
जाना जाता है जिसमें डेजर्ट ट्रॉपिकल रेन

फॉरेस्ट और अल्पाइन एरिया भी शामिल है अब
जैसा कि यहां पर इतने डिफिकल्ट तरह की
जियोलॉजिकल कंडीशन है तो जाहिर सी बात है
कि इन एरियाज में किसी भी तरह की इंसानी
बस्ती को बसाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है

इसके अलावा अगर हम इसके ग्लोबल सी लोकेशन
देखें तो वह भी काफी कुछ कहती हैं जैसे कि
इसकी एक तरफ इंडियन ओशियन है तो दूसरी तरफ
पैसिफिक ओशियन लेकिन इसके बाद भी इसके एक
बहुत बड़े हिस्से में बारिश नहीं हो पाती

और जो भी थोड़ी सी बारिश होती है वह इसके
साउथ ईस्टर्न सी कोस्ट के किनारे कई शहरों
में होती है जिसकी वजह से भी लोग उन बारिश
वाले इलाकों में ही रहते हैं अब यहां पर

एक बात ध्यान देने वाली है कि ज्यादातर
बारिश का मेन कारण होता है समुद्र से
उड़ने वाली गर्म हवाएं जो आगे चलकर किसी
की लैंड पर बारिश करती हैं जबकि

ऑस्ट्रेलिया के केस में यह बिल्कुल अलग है
क्योंकि इसके वेस्टर्न कोस्ट पर जो हवाएं
चलती हैं वो ठंडी होती हैं जिसकी वजह से

समुद्र से पानी का इवेपरेशन नहीं हो पाता
अब जाहिर सी बात है कि अगर समुद्र से पानी
इवेपरेट नहीं होगा तो बारिश करवाने वाले
बादल नहीं बनेंगे और बारिश होने का तो फिर
सवाल ही नहीं उठ पाता तो अब ऐसे में हुआ

क्या कि ऑस्ट्रे इंडिया का वेस्ट एरिया
पूरी तरह से डेजर्ट में बदल गया अब इसके
वेस्ट में वर्षा नहीं होने के कारण सी
कॉस्ट से अंदर की ओर जाने पर गर्मी बढ़

जाती है और मौसम सूख जाता है और ऐसे में
तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक
पहुंच जाता है इतने अधिक तापमान में लोग

वहां कैसे रह पाएंगे इसलिए यह एरिया खाली
रह जाता है इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की
सरकार के लिए भी अपने देश के वेस्ट
इंटीरियर एरिया में इंसानों के रहने के
लिए बस्तियों को बनाना और उन्हें वहां

रखना मुश्किल हो जाता है यहां की जमीन भी
काफी ऊप खाबड़ है कई बड़े-बड़े रेगिस्तान
और झाड़ियां हैं पानी की कमी भी एक बड़ी
समस्या है और कई प्रकार के डेंजरस जीव
जंतु के रहने के कारण लोग यहां रहना भी

नहीं चाहते द ग्रेट विक्टोरिया द ग्रेट
सडी सिंपसन तनामी जैसे कई छोटे-बड़े
डेजर्ट यहां पर मौजूद हैं और सिर्फ इन
रेगिस्तान की ही बात करें तो यह लगभग 27
लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है यह

पूरा इलाका डेजर्ट ही बन गया है इतना ही
नहीं ऑस्ट्रेलिया के डेजर्ट लगभग एक तिही
हिस्सा आज ट्राइबल लैंड घोषित है साथ ही
यह रीजन यहां की ट्राइब्स के द्वारा ही
नेचर रिजर्व के रूप में मैनेज किया जाता

है ट्राइब्स के पास ही डेजर्ट एरियाज में
लैंड यूज करने के राइट्स भी हैं आज भी कई
ट्राइबल पीपल डेजर्ट में ही बस्तियों में
ही रहते हैं लेकिन इनकी आबादी बहुत ही कम
है कई वर्ग किलोमीटर के दायरे में एक

व्यक्ति ही आता है और आपको जानकर हैरानी
होगी कि यही ट्राइबल लोग जो इन जंगलों में
रहते हैं यही ऑस्ट्रेलिया के नेटिव लोग
हैं जबकि जो गोरे आज आप इनकी क्रिकेट टीम
या दूसरी जगहों पर देखते हैं तो वो तो असल
में यूरोपियन हैं जो अंग्रेजों के समय
यहां पर बस गए हैं और ऑस्ट्रेलिया और

सुमानिया के मूल निवासी इन्हीं एबोरिजिनल
ऑस्ट्रेलियन ट्राइब्स को माना जाता है आज
ये कई ट्राइब्स में क्लासिफाइड हैं और
इनकी अपनी कई नेटिव लैंग्वेजेस भी हैं
ब्रिटेन द्वारा कॉलोनाइज होने से पहले

इनकी संख्या यूरोपियन से ज्यादा थी लेकिन
आज इनकी संख्या इनसे बहुत कम हो गई है
इतना ही नहीं ऐसा माना जाता है कि
ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के पूर्वज
शायद 40000 से 70000 वर्षों पूर्व

ऑस्ट्रेलिया में आए थे आपको यह जानकर
आश्चर्य और गर्व होगा कि आज भी भारतीय
डीएनए ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों में
पाया जाता है जो हजारों वर्षों से
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं खैर टॉपिक पर

 

समस्या यहां के बाकी एरियाज में होने वाली
बारिश की कमी है देश के 2 तिहाई से अधिक
हिस्से में सालाना 500 मिलीमीटर से कम
बारिश होती है जिससे ज्यादातर समय यहां पर
सूखा रहता है पानी की कमी ने उस क्षेत्र
को रहने के लिए अनसूटेबल बना दिया है इस

क्षेत्र को लोग द आउट बैक कह के पुकारते
हैं ऑस्ट्रेलिया का कुल 70 प्र क्षेत्र
सेमी एरिड ड्राई और डेजर्ट क्षेत्र है इसी
वजह से यहां केवल 3 प्र पॉपुलेशन ही रहती
है इसके अलावा जो भाग खाली है तो ऐसे में
वहां कई प्रकार के विषैले सांप और
मकड़ियों ने अपना घर बना लिया है जिसके डर

से इन क्षेत्रों में लोग बसने को तैयार
नहीं होते इसका एक उदाहरण है ऑस्ट्रेलिया
का ग्रामीण इलाका कुल्पी इसकी आबादी करीब
600 है जो पिछले कई सालों से नहीं पड़ी है
लेकिन अब कुल्पी के मेयर ने इस इलाके की

आबादी बढ़ाने के लिए लोगों को एक ऑफर भी
दिया है इन्होंने कहा है कि बसने वालों को
मुफ्त में जमीन दी जाएगी और साथ ही 12500
नगद भी दिए जाएंगे लेकिन इसके बाद भी कोई
यहां रहने को तैयार नहीं है ऑस्ट्रेलिया
एक डेवलप कंट्री है लेकिन फिर भी इसके

ग्रामीण इलाकों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर
की बहुत कमी है अब ऐसे में यहां रहने वाले
लोगों को कई प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़
पड़ता है फूड वाटर और मेडिकल जैसी
फैसिलिटी भी नहीं मिल पाती ऑस्ट्रेलिया के

एक बहुत बड़े हिस्से में जंगल है गर्म और
महीनों तक सूखा रहने के कारण कई बार इन
जंगलों में आग लग जाती है अब ऐसे में
लोगों को अपना घर छोड़कर उन क्षेत्रों में
जाकर रहना पड़ता है जहां सरकार इन्हें
विस्थापित करवाती है अब नए काम की तलाश

में यह लोग शहर की ओर चले जाते हैं और
जंगल का इलाका खाली हो जाता है वहीं
ऑस्ट्रेलिया की इकॉनमी में एक बड़ा हिस्सा
एग्रीकल्चर और माइनिंग का भी है और इन
दोनों को बड़े पैमाने पर मैकेनाइजेशन कर
दिया गया है इन्होंने अपने प्रोडक्ट को

दूसरे देशों को एक्सपोर्ट करने के लिए
साउथ ईस्टर्न कॉस्ट पर एक पोस्ट का
निर्माण किया था अब यहां रोजगार के कई
अवसर होने के कारण दूसरे क्षेत्र से लोग
आकर रहने लगे इस कारण से भी इस देश की

पॉपुलेशन का एक बड़ा हिस्सा सेंट्रलाइज्ड
होकर इन्हीं क्षेत्रों में आ गया और दूसरे
क्षेत्र खाली होते चले गए जहां पोर्ट्स का
निर्माण किया गया उस रीजन का क्लाइमेट

ठंडा है इस देश की कुल आबादी के 90 प्र
लोग यूरोप के रहने वाले हैं और यूरोप एक
ठंडी क्लाइमेट वाला क्षेत्र है अब ऐसे में
लोग समुद्र के किनारे ठंडी क्लाइमेट में
ही रहना पसंद करते हैं अब जैसा कि आपको

वीडियो में हमने पहले बताया था कि
ऑस्ट्रेलिया के बहुत कम ही एरियाज में
बारिश होती है तो यह जान लेना भी जरूरी है
कि आखिर उस एरिया में ही बारिश क्यों होती
है तो ऑस्ट्रेलिया के ईस्टर्न नॉर्थ
ईस्टर्न और साउथ वेस्टर्न रीजंस में

प्रशांत महासागर की ओर से जो हवाएं चलती
हैं तो वह गर्म हवाएं होती हैं और इस कारण
इवेपरेशन होता है इसके बाद ग्रेट
डिवाइडिंग रेंज नामक पर्वत इस क्षेत्र में
होने के कारण इधर आने वाली हवाओं को यह
रोक लेती है और ऑस्ट्रेलिया के इन्हीं

 

रीजंस में बारिश होती है और मौसम ठंडा
रहता है यहां नदी की बात करें तो एकमात्र
मरे डार्लिंग बेसन मरे तथा उसकी सहायक
डार्लिंग तथा मिरर बज नदियों से मिलकर
बनता है और ये यहां की सबसे बड़ी नदी

 

तंत्र है ये भी ऑस्ट्रेलिया के साउथ
ईस्टर्न भाग में ही है इस क्षेत्र में
यहां के लोगों को पानी की पूर्ति इस नदी
बेसिन से होती है इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई
सरकार ने भी अपनी लैंड पॉलिसी के तहत साउथ
ईस्टर्न कोस्ट के इलाके में ही लैंड देना

शुरू कर दिया अब ऐसे में इन्हीं क्षेत्रों
में पॉपुलेशन डेंसिटी बढ़ती चली गई और
दूसरा भाग खाली होता चला गया साथ ही अगर
हम ऑस्ट्रेलिया के इतिहास की बात करें तो
इसका इतिहास 3.8 बिलियन वर्ष से अधिक

पुराना है इतनी पुरानी भूमि होने के कारण
इस देश की मिट्टी की ऊपरी परत पूरी तरह से
नष्ट हो चुकी है और किसी भी मिट्टी की यह
ऊपरी परत उसे उपजाऊ बनाती है क्योंकि
मिट्टी की ऊपरी परत में ही पानी सोखने की

क्षमता होती है जिस कारण यहां की मिट्टी
में पानी सोखने की उतनी क्षमता नहीं है और
इसका ज्यादातर एरिया ड्राई है ड्राई होने
के कारण भी इसका ज्यादातर हिस्सा डेजर्ट
में तब्दील हो गया है इसके हार्श क्लाइमेट

 

का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं
दोस्तों कि 10 जनवरी 1939 को ऑस्ट्रेलिया
के मेन इंडी में अधिकतम तापमान 49.4
डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और न्यूनतम
तापमान -23 डिग्री से स 29 जून 1994 को

चार्ल में दर्ज हुआ था यह न्यूनतम तापमान
पूरे ऑस्ट्रेलिया में दर्ज किया गया सबसे
कम तापमान है यह भी एक कारण है कि इन
इलाकों को छोड़कर लोग ऐसी जगहों पर रहना
पसंद करते हैं जहां ना तो ज्यादा गर्मी हो
और ना ही बहुत ज्यादा ठंडी हो बहरहाल आज

की वीडियो में फिलहाल बस इतना ही साथ ही
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