किसानों के लिए कील बिछाने और खाई खोदने वालों की खैर नहीं! Ashok Wankhede | Farmers Protest 2024 - instathreads

किसानों के लिए कील बिछाने और खाई खोदने वालों की खैर नहीं! Ashok Wankhede | Farmers Protest 2024

नमस्कार स्वागत है आपका  और लेकर आया हूं आपका
अपना कार्यक्रम द डायरेक्ट
हिट आज
फिर हरियाणा
सरकार को डायरेक्टली और इनडायरेक्टली
केंद्र सरकार को हिट किया
है पंजाब हरियाणा उच्च
न्यायालय मामला किसानों का ही

है किसानों के आंदोलन के चलते
पंजाब बॉर्डर पर मानो भारत पाकिस्तान का
बॉर्डर हो गया वहां पर भी इतनी शक्ति नहीं
होगी इतनी शक्ति कोटले
तार
बैरिकेड 18000 से ज्यादा फौज मतलब

पैरामिलिट्री
फोर्सेस उधर लाख के आसपास
किसान कई जिलों में 144 धारा हरियाणा के
कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं
बंद
किसान दिल्ली आ रहा है हरियाणा उन्हें
जाने नहीं दे रहा है क्योंकि वहां डबल
इंजन की सरकार है छोटे इंजन को एक काम
दिया बड़े इंजन ने आप इनको रोको नहीं तो
हमारा प्रॉब्लम हो जाएगा हम मुसीबत में आ

जाएंगे आज दूसरा दिन है 13 तारीख को मार्च
करेंगे यह दो महीने पहले से ऐलान किया गया
था ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर शांतिपूर्वक
तरीके से रोड से बाकी वाहनों को जगा देते
हुए किसान निकले पंजाब से हरियाणा में
सिद्धू बॉर्डर पर जैसे ही एंट्री की वहां

ये मामला पन गया और अब पूरी दिल्ली चारों
तरफ से घिरी हुई है अभी तक तो किसान
दिल्ली में नहीं पहुंचा लेकिन दिल्ली में
पूरा ट्रैफिक आउट ऑफ कंट्रोल गया है
दिल्ली के तमाम जो पॉइंट्स है जहां से
उत्तर प्रदेश

हरियाणा की बाउंड्री लगती है वहां पर
लगातार पुलिस ने इतना भयावह ब्रैकेटिंग
किया
है इतनी तैयारी के साथ बैठे हैं एक एक
गाड़ी छूटती है तो जहां 20 मिनट का रास्ता
तय करना है वहां दिल्ली में ढ़ डेढ़ घंटे

का लगता है आज बार एसोसिएशन ने भी
सर्वोच्च न्यायालय ने यह बात कही कि कई
वकील ट्रैफिक के चलते पहुंच नहीं पा रहे
हैं तो आप कृपया उन पर एक्शन ना ले वो लेट
हो रहे हैं और कहा कि किसान आंदोलन के

बारे में कुछ ना चाहिए इसको बंद करवाइए
ताकि अभी तो दिल्ली पहुंचे नहीं किसान तो
यह तकलीफ हो रही
है इसके पहले 13
महीने 2021 में किसान दिल्ली को घेरा बैठा
हुआ था 700 किसान शहीद हुए लेकिन दिल्ली
सामान्य रूप से चल रही थी किसान हिंसक
नहीं
होते वैसे ही शांतिपूर्ण तरीके से जब चल
रहे किसान तो किसानों के डर
से उन्हें वही रोक लिया गया और जब य आपद

चल रही है तो एक वकील थे उदय प्रताप सिंह
वो सीधे सधे पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट का
रुक किया उन्होंने और याचिका दायर की कि
बच्चों के स्कूल कॉलेज से एग्जाम है और
आपने इंटरनेट बैन कर

दिया किसान को क्यों रोक रहे हैं आप क्यों
पूरे रास्ते जाम कर दिए हैं क्यों आवागमन
रुका है सड़को पर इतना अवरुद्ध क्यों खड़ा
कर दिया इन सारी बातों को लेकर जब हाई
कोर्ट पहुंचे तो हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार

की तरफ से भी लोग आए
और वहां पर हरियाणा की तरफ से भी केंद्र
सरकार की तरफ से भी वकील पहुंचे तो हाई
कोर्ट का जो बेंच है कार्यवाहक मुख्य
न्यायाधीश जीएस संधवाल और दूसरे न्यायाधीश

लुपिटा बैनर्जी के बेंच ने इसकी सुनवाई की
और सर्वप्रथम उन्होंने हरियाणा सरकार को
लताड़ा कि आपने शांतिप्रिय तरीके से चाहने
वाले किसानों को रोक
वो आपके यहां तो उन्होंने कहा कि हमारे
यहां परमिशन नहीं

ली हरियाणा से आंदोलन की उन्होने बोला
हरियाणा में आंदोलन कौन कर रहा
है आंदोलन तो उनको दिल्ली में करना है
लेकिन पंजाब से दिल्ली जाएंगे तो रास्ते
में हरियाणा पड़ता है उनको रोकने का

अधिकार आपने किसने दिया लोकतंत्र
में
अपने विरोध प्रदर्शन के लिए या आंदोलन के
लिए हाईवे पर चलना गुना कब से हो गया
यह उनका अधिकार है संवैधानिक अधिकार

है प्रजातंत्र में लोकतंत्र में विरोध
करने का अधिकार है आंदोलन करने का अधिकार
है तो आपने किस बिना पर रखा तो उन्होने
कहा कि वह हथियार लेकर जा रहे थे किसान
आरोप लगाया तो पंजाब के वकील ने कहा पंजाब
सरकार के कि माय लॉर्ड ये तो पंजाब से

निकले हैं हमने भी चेक किया ये तो बिना
शस्त्र के सिर्फ अपना खाने पीने का सामान
लेकर जा रहे हैं ट्रॉली में इसलिए हमने
उनको शांतिप्रिय तरीके से जा रहे थे तो
हमने रास्ता दे दिया अब हरियाणा ने उनको
रोका उनको पूछो तो हाई कोर्ट ने हरियाणा

को असंवैधानिक काम करने के लिए कड़ी फटकार
लगाई और यह
कहा कि किसानों को आप रोक नहीं सकते हाईवे
पर कोई चल रहा है उसको रोकने का अधिकार

आपको नहीं है
यह कहकर आज सरकार की किरकिरी
की इसके पहले भी जब शाहीन बाग में दिल्ली
में एक लंबा प्रोटेस्ट
चला तब उस प्रोटेस्ट को पाकिस्तानी से
लेकर बिरयानी बांट रहे हैं और 00 रुप मिल

रहा है क्या क्या नहीं कहा गया सर्वोच्च
न्यायालय को कहा गया कि इनको उठा दीजिए
सर्वोच्च न्यायालय तब भी कहा था कि
प्रजातंत्र में आंदोलन करना विरोध करना यह
हर नागरिक का अधिकार है यदि सरकार की बात

से वह सहमत नहीं तो अपना विरोध भी प्रकट
कर सकता है ये तानाशाही सरकार शायद
सर्वोच्च न्यायालय की उस टिप्पणी को नहीं
समझ पाए हाई कोर्ट ने इनको नोटिसेज दिए
हैं और आज या जब आप ये सुन रहे हैं

क्योंकि ये जो मैं बता रहा हूं ये कल का
वाक्य हुआ आज जब आप इस स्टोरी सुन रहे
होंगे तब उन्होंने किसानों को भी अपना
पक्ष रखने के लिए कहा और हरियाणा हाई
कोर्ट हरियाणा सरकार को फिर अपना ये जो

लताड़ पड़ी इस पर पक्ष रखने के लिए बोला
है अब हरियाणा सरकार कल क्या प्रूफ लेकर
आती है क्योंकि जिस बर्बरता से हरियाणा
सरकार और हरियाणा पुलिस ने इन किसानों के
ऊपर अन्याय किया अभी तो हाई कोर्ट ने हिट

किया जो हरियाणा सरकार हिट होती हुई दिखाई
दे रही है लेकिन 2014 से लेकर 204 तक हमने
यह लगातार देखा कि कई सर्वोच्च न्यायालय
की टिप्पणियां कई निर्णय हाई कोर्ट की
टिप्पणियां इन मोटी चमड़ी वाली नेताओं को

कोई फर्क नहीं पड़ता उस समय चला गया कि एक
टिप्पणी पर नेता इस्तीफा देता था आज
टिप्पणी नहीं निर्णय भी उनके खिलाफ गया तो
फिर कानून नया लाक उस निर्णय को घुमा के
अपने मनमानी करने वाली जब सरका इस देश में
हो तो फिर प्रजातंत्र और लोकतंत्र रहता

कहां है हम जब चार स्तंभ की बात करते हैं
अब संविधान के तीन स्तंभ तो मुख्य हैं एक
स्तंभ तो जबरन मीडिया अपने आप को कहता है
अब वो भी इतना दिम चाट गई उसको इतना गोदी
हो गया स्तंभ नहीं अब वो झाड़ू हो गया जो

सत्ता पक्ष के दरबार में लगता रहता है और
विरोध करने वालों को हमेशा बाहर करता रहता
है लेकिन न्यायपालिका विधायिका और
कार्यपालिका तीन स्तंभ है जब कोई भी एक
काम नहीं करता तो बाकी दो उस पर अंकुश
रखते हैं लेकिन यहां सत्ता इतनी

अपने मध्य में जूर हो गई है कि उसे किसी
अंकुश का कोई फर्क नहीं पड़ता सर्वोच्च
न्यायालय ने ऐसे कई निर्णय दिए जिनको
इन्होने पलटा है लेकिन हाई कोर्ट यदि
तारता है और हाई कोर्ट य कहता है कि

उन्हें रोकने का अधिकार आपको नहीं तो फिर
हरियाणा सरकार क्या करेगी क्या उनको जाने
देगी या हरियाणा सरकार ने उनको जाने दिया
तो क्या हरियाणा सरकार सर्वोच्च न्यायालय
जाएगी हाई कोर्ट के

खिलाफ और सर्वोच्च न्यायालय क्या हरियाणा
सरकार को वही रोकने देगी या दिल्ली आने
देगी आने वाले चंद दिनों में बहुत सारे
फैसले होंगे लेकिन कल हरियाणा सरकार क्या
पक्ष रखती है यह देखना है पंजाब सरकार ने

तो इतना जरूर कह दिया कि यह आंदोलनकारी जा
रहे हैं ये शांतिप्रिय तरीके से आंदोलन
करने जा रहे हैं इनके पास कोई हथियार नहीं
इन्हें आतंकी जैसा व्यवहार नहीं करना

चाहिए हरियाणा सरकार ने कहा हमसे परमिशन
ली तो कोर्ट ने कहा तोव आंदोलन हरियाणा
में कर भी नहीं रहे वो तो दिल्ली में
आंदोलन करने जा रहे हैं रस्ता हरियाणा से
पड़ता है इसलिए हरियाणा सरकार उनको रोक
नहीं सकती लेकिन फिर खट्टर साहब भी क्या

करें जब दिल्ली से आदेश आया उन्हें मानना
होगा वहां थोड़ी नैतिकता विचार
अविचारथम भीड़ थी अब वो लाख में तबलीग हो
गई है न्यूज लंचर की टीम वही फील्ड पर है
जीरो ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग कर रही
है उनके अनुसार वहां पर करीब करीब डेढ़
लाख किसान और मजदूर इकट्ठा हुए हैं डेढ़

लाख और किसान मजदूर आने वाले समय में क्या
शकल लेती है यह आंदोलन क्या हरियाणा में
कानूनन उनको प्रवेश मिलता है या फिर
उन्हें जबरदस्ती करनी पड़ती है और
जबरदस्ती करनी पड़ेगी तो नुकसान दोनों तरफ
से होगा बेचारे पुलिस कर्मी वो भी नौकरी

करते हैं क्या करें कई पुलिस के पुलिस
कर्मी होंगे जिनके जो किसानों के बच्चे
होंगे उन्हें भी नौकरी के नाम पर य सब
करना पड़ रहा है वह भी उनको भी नुकसान
होगा किसानों का तो नुकसान हो ही रहा है

कईयों की गोलिया लगी आज कुछ यह भी रिपोर्ट
आई कि जो रबड़ की गोलिया है व असली गोलिया
थी कुछ लोग जखमी हो गए लेकिन हम उसको अभी
पक्का मतलब उसकी शाह निशा नहीं कर पाए एक
चर्चा जो थी वो लेकिन हम मानते हैं कि

पुलिस ने रबल बुलेट फाइल की होगी किसी को
कुछ ज्यादा लग गया तो शायद उसको लगा कि यह
ओरिजिनल बुलेट की चोट है लेकिन क्या जो
700 किसान 13 महीने में शहीद हुए क्या यह

700
किसान पहले सप्ताह में ही शहादत 700
किसानों की मांग रहे जिस तरह के से
प्रशासन किसानों पर टूट पड़ा उन्हें
खालिस्तानी उन्हें अर्बन नक्सल उन्हें
राजनीतिक दलों के हाथ में खेलने वाले

खिलोने उन्हें नरेंद्र मोदी को बदनाम करने
वाले उन्हें केंद्र सरकार को अस्थिर करने
वाले कहा जाता है वह बिचारे तो सिर्फ एक
मांग रहे हमें एमएसपी का कानून दीजिए जो
सरकार ने कहा था जो नरेंद्र मोदी जी ने
मुख्यमंत्री होते हुए तत्कालीन

प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को लिखा
था कि किसानों के लिए एमएसपी का कानून
बनाइए आज वो स्वयं उस जगह पर है व क्यों
नहीं बना पा रहे हैं डॉक्टर मनमोहन सिंह
की क्या मजबूरी थी वो तो वो जाने इनकी

मजबूरी कम से कम एक खुल के देश के सामने
बता सकते हैं आज इतना ही कल फिर आऊंगा इसी
विषय के साथ तब तक के लिए नमस्कार

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