किसानों के साथ आया पूरा विपक्ष, फंस गई मोदी सरकार! - instathreads

किसानों के साथ आया पूरा विपक्ष, फंस गई मोदी सरकार!

नमस्कार
नेटवर्क प्रधानमंत्री जी अबू धाबी में
व्यस्त हैं गोदी मीडिया उनकी चरण वंदना
करने में व्यस्त है और देश के किसानों पर
लाठियां बरसाई जा रही हैं आंसू गैस के
गोले छोड़े जा रहे

हैं भक्त लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता कि
प्रधानमंत्री जी अरब के शेख को खुश करने
के लिए अ के सम्राट को खुश करने के लिए
कितनी अरबी बोल रहे हैं कितनी उर्दू बोल

रहे हैं कैसे गले लगा रहे हैं सुम स्वामी
ने एक ट्वीट किया था कि कतर में जो लोग
छोड़े गए हैं उनके पीछ शाहरुख खान की बहुत
बड़ी भूमिका है पूरी भारतीय जनता पार्टी
में हड़का मच गया हालांकि शाहरुख खान के

ऑफिस ने साफ किया कि शाहरुख खान की कोई
भूमि नहीं लेकिन बड़े आदमी ऐसी करते हैं
भूमिका होती भी है तब भी वह नहीं बताते
हैं सच्चाई क्या है मैं नहीं जानता

क्या इस देश के किसानों से अब तक एक
सार्थक बात नहीं की जानी चाहिए
थी जब किसान आंदोलन के लिए निकल रहे थे
उनको पहले से उन्होंने सूचना दे दी थी तो
क्या उनसे यह बात नहीं की जा सकती थी कि
अपना आंदोलन स्थगित कर

दे क्या देश में सरकार में कोई भी इतना
शुभ चिंतक नहीं बचा जो किसानों को समझा
सके किसानों से बात कर
सके आपने देखा होगा गोदी मीडिया के भक्तों

के कुछ ट्वीट कि ये किसान तो पाकिस पंजाब
के हैं पाकिस्तानी है खालिस्तानी
है इन किसानों में यूपी के नहीं है बिहार
के नहीं है इस तरह के अलग-अलग राज्यों में
मतलब पंजाब का किसान अलग होता है और उत्तर

प्रदेश का किसान अलग होता
है मतलब पंजाब में जो गेहूं उगता है वह
हरे रंग का होता है और जो उत्तर प्रदेश हो
है वह पीले रंग का होता

है पहले मजहब में बांटते थे फिर जातियों
में बांटते थे फिर रंगों में भी इन्होंने
भेद कर दिया और अब किसानों में भी भेद
कर यह कोई पहली बार नहीं

है जब पिछले आंदोलन में भी किसान निकले थे
धरना प्रदर्शन करने निकले थे तो गोदी
मीडिया ने यही कहा था कि यह तो खालिस्तानी
है यह तो आतंकवादी है लाठियां बरसाई

थी लेकिन किसान
वह किसान जो अपने खून और पसीने से इस धरती
को सीज हैं धरती को बोते
हैं खून मिट्टी में गिरता है पसीने की तरह

गिरता है लेकिन हमारे और आपके परिवार का
पेट भरने के लिए वह लोग दिन और रात जुटे
रहते हैं उन किसानों के ऊपर आंसू गैस के
गोले छोड़े जा रहे हैं उन पर हमले कराए जा

रहे हैं उनको बदनाम किया जा रहा है एक
किसान अच्छी गाड़ी में बैठा दिख गया तो यह
किसान अच्छी गाड़ी में कैसे बै बैठा दिख
गया किसान अच्छी गाड़ी में नहीं बैठ के

दिख सकता लेकिन विजय माल्या इस देश के
करोड़ों रुपए लेकर भाग सकता है अरबों रुपए
लेकर भाग सकता है च मोदी लेकर भाग सकता है
और तमाम साहिब के प्रधानमंत्री के दोस्त

इस देश में अरबों रुपए लेकर विदेश भाग
सकते हैं लेकिन किसान अच्छा फोन इस्तेमाल
नहीं कर सकता किसान अच्छी गाड़ी में नहीं
बैठ सकता यह है गोदी मीडिया का भक्तों का
सरकार का

चरित्र
जो किसान आपके परिवार का पेट पालने के लिए
अपनी जान लगा देता है अपनी जान दे देता
है वह अच्छा खाना नहीं खा सकता यह है इस
देश के कुछ लोगों का

चरित्र लेकिन किसान को परवाह नहीं
है आंदोलन हुआ एक साल में 700 800 किसानों
की मौत हो
गई जाड़ा गर्मी
बरसात किसान ने सड़क प गुजार

दी किसान ने कहा ये हमारे खेत हमारी मां
है हम इनको नहीं बिकने देंगे हम इनको
पूंजीपतियों को नहीं
सौंपेंगे और फिर जब साहिब को लगा कि

किसानों की यह बगावत उनकी सत्ता हिला सकती
है जब साहिब को लगा कि किसानों की यह
चेतना उनको बर्बाद कर सकती
है तो फिर एक बार नाटक वाले अंदाज में

साहिब सामने आए और कहा मेरी तपस्या में
कोई कमी रह गई होगी मैं यह तीनों बिल वापस
लेता जो साहिब अपने घमंड के मारे अपने
अहंकार के मारे किसी के आगे झुकते नहीं थे
वह किसानों के आगे

झुके क्योंकि माहौल चुनाव का था और फिर
साहेब को गलतफहमी हुई कि राम मंदिर का
शिलान्यास हो गया राम मंदिर का निर्माण हो
गया तो पूरा देश मेरा है घमंड में नारा

लगा दिया अबकी बार 400 पार
और किसानों ने कहा 400 पार तो जा रहे हो
हजूर पहले हमारी बात तो सुनते जाओ आ रहे
हैं हम दिल्ली बात

करने राजा अपने अहंकार में था 400 पार का
नारा लगा रहा था किसान कह रहे थे रुको तो
हमसे बात तो कर लो हमसे गुफ्तगू तो कर लो
और किसानों की यह बात राजा को छुप गई ये
दो कोड़ी के किसान य मुझसे बात

करेंगे इनकी हैसियत मुझसे बात करने की
मरते हैं मरे मेरी सेना मेरी फौज मेरी
पुलिस किस दिन काम आएगी
तो राजा ने कहा बिछा दो रास्ते में

कीले लगा दो बड़े-बड़े पत्थरों के
बोल्डर खड़ी कर दो
दीवारें और जो आगे बढ़े उस परे दाग दो
आंसू गैस के गोले तुम्हारी लाठियां कब
आएंगी तोड़ दो किसानों के

सिर राजा जब ऐसा अहंकारी हो
जाए भक्त दब दरबारी हो
जाए तो फिर इस देश में बचता क्या है इस
देश में बचती है

बगावत गांधी के मूल्यों के साथ गांधी के
सिद्धांतों के साथ अहिंसात्मक
बगावत किसानों ने कहा कि तुम चलाओ गोलियां
हम खाएंगे

गोलियां एक गिरेगा दूसरा आगे आएगा दूसरा
गिरेगा रा आगे आएगा तुम्हारी बंदूकों में
गोलिया कम पड़ जाएंगी हमारे सीने कम नहीं
पड़ेंगे वो नपुंसक और नाकारा लोग जो इन

किसानों को खालिस्तानी और आतंकी कह रहे
हैं वो नपुंसक और नाकारा लोग जो इन पंजाबी
और सिख समुदाय के किसानों को आतंकवादी कह
रहे हैं यह वह कौम है जिन्होंने अपने पांच
पांच बेटों को दीवारों में चुनवा

दिया सवा लाख ते एक लड़ाऊ मैं गुरु गोविंद
सिंह कहला ह यह वह कौम है जो मर जाती है
गला कट जाता है सिर कट जाता है तो धर से
भी लड़ती

है लेकिन अपने हक अपने अधिकार अपने
स्वाभिमान से पीछे नहीं
जाती साहेब और उनकी सेना इस अधिकार को इन
लोगों को इन जज बातों को पहचानने में भूल
कर

गई नतीजा यह है कि यह सेना बढ़ती जा रही
है हम दिल्ली जाए
हम दिल्ली जाकर बात करेंगे हुकूमत में
जितना दम हो उतना दम लगा लो देखना है जोर
कितना इन बाजुए कातिल

में लेकिन देश को क्या हो रहा
है देश इन गोदी मीडिया चैनलों को क्यों
नहीं दिका रहा है अबू धाबी में एक मंदिर
बन गया तो गोदी मीडिया के एंकर वहां जाकर

चरणों में बिच जा रहे हैं कभी बात करी कि
राजा तीसरी इकोनॉमी बनाने वाले राजा इस
देश के 80 करोड़ लोगों को राशन नहीं मिल

रहा है और जो राशन देते हैं वह बात करने आ
रहे हैं तो राजा बात तो करो बात करने में
क्या समस्या है दिल्ली में खादी के लिबास
में हत्यारे आते हैं डकैत आते हैं

बलात्कारी आते हैं यह तो किसान है यह
अन्नदाता है जब दिल्ली में संसद में
हत्यारे आ जाते हैं बलात्कारी आ जाते हैं
डकेट आ जाते हैं तो यह किसान तो

शांतिपूर्ण तरीके से वार्ता करने आ रहे
क्या यह देश ऐसे ही चलेगा बड़ा सवाल आपके
सामने है जवाब भी आपके और सवाल भी आपके

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