किसान आंदोलन का सबसे बड़ा पहलू आपको पता है? किसको अखर रही है एमएसपी की गारंटी - instathreads

किसान आंदोलन का सबसे बड़ा पहलू आपको पता है? किसको अखर रही है एमएसपी की गारंटी

नमस्कार

किसान जैसे-जैसे
दिल्ली की तरफ बढ़ रहे हैं इस देश में एक
नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है वह
नैरेटिव यह है कि दोबारा से बहुत बुरे दिन
दिल्ली के आने वाले हैं दिल्ली में

ट्रैफिक जाम लग जाएगा एक तो दिल्ली वालों
को यह समझाया जा रहा है जबकि हकीकत यह है
कि पिछली बार चौड़े चौड़े हाईवे पे आधे
हाईवे के ऊपर किसानों को किसान बैठे हुए
थे और वह इसलिए बैठे हुए थे क्योंकि अपने

ही देश की राजधानी में उनको घुसने नहीं
दिया गया था बॉर्डर पर ही रोक दिया गया था
इसलिए वहां बैठे थे और जो बाकी की आधी
सड़क थी उसको कभी भी पूरी तरह इस्तेमाल
नहीं किया गया अगर उसको पूरा इस्तेमाल
किया जाता तो दिल्ली में ट्रैफिक की

समस्याएं हल ही नहीं
होती जो बाकी की आधी सड़क थी उसको सुबह
दफ्तर जाते समय जाने के लिए और आते समय
आने के लिए खोला जा सकता था 75 प्र सड़क

को एक तरफ के ट्रैफिक के लिए किया जा सकता
था 25 प्र को उधर से आने के लिए ना जाम
लगता ना दिक्कत होती क्यों कि जिन हाईवेज
पर किसान बैठे हुए थे चाहे वह गाजीपुर
वाला हो चाहे वह आपका सघ सिंघु बॉर्डर

वाला हो कोई भी हो वहां पर आसानी से फिर
भी सात आठ
लेन ट्रैफिक के लिए बचती हैं लेकिन सरकार
का स्टाइल है लोगों को परेशानी हो और लोग
इसके खिलाफ हो जाए इसकी पूरी कोशिश की

जाती है ऐसा ही शाहीनबाग में किया था एक
तरफ की सड़क बंद करने के बजाय वो दोनों
तरफ की कर दी ट्रैफिक को कई किलोमीटर घुमा
दिया ताकि दिल्ली के लोग गाली बहरहाल इसके
अलावा पूरी तरह से किसानों को कुचलने की

कोशिश हो रही है पहली बार देखने में आ रहा
है कि किसी आंदोलन के ऊपर ड्रोन के
जरिए आंसू गैस के गोले भेजे फेंके जा रहे

हैं और किसान को भी मानना पड़ेगा कि मुंह
पर गीला कपड़ा बांध के आंख पे
ट्रांसपेरेंट चश्मा लगाकर वो अपने
ट्रैक्टर के जरिए उन सारे बैरी गड्स को

उखाड़ कर फेंक रहे हैं आपसे छिपा नहीं है
कि किसान आंदोलन को रोकने के खिलाफ हाई
कोर्ट में मामला गया और पंजाब हरियाणा हाई
कोर्ट ने फटकार लगाई और यह कहा कि भैया आप
डेमोक्रेटिक राइट क्यों छीनना चाहते हो और

वह दिल्ली में अगर प्रदर्शन करने जा रहे
हैं तो उनको हरियाणा में भी घुसने से
क्यों रोका जा रहा है अगर किसान हरियाणा
में प्रदर्शन ही नहीं करने वाले हैं तो आप
होते कौन उनको रोकने वाले हैं हरियाणा

सरकार ने सिर्फ चमच के लिए कहे या किसी और
वजह से उस पर हम बाद में आएंगे इस
प्रोग्राम में आप सब समझेंगे ये सारा
ड्रांस ड्रामा हो किस लिए रहा है विरोध का

मतलब इसको विरोध को रोकने का
तो हरियाणा सरकार ने बैरिकेड लगा दिए सड़क
पर कीले गाड़ दी ताकि किसान दिल्ली ना जा
सके प्रदर्शन करने के लिए ऐसा कभी नहीं

हुआ इस देश में देश की संसद के सामने
बड़े-बड़े प्रदर्शन हुए हैं बहुत
बड़े-बड़े प्रदर्शन हुए हैं आरक्षण के
खिलाफ हुआ हो राम मंदिर के लिए हुआ बहुत
सारे प्रदर्शन हुए वोट क्लब

पर लेकिन लोगों को दिल्ली आने से कभी नहीं
रोका गया लेकिन अबकी सरकार थोड़ी फर्क है
खैर तो किसानों की जो मांग है उस पर जाने
से पहले हम यह समझे कि इस मोदी सरकार ने
किसानों को क्या-क्या वादा किया

था एक वादा किया था किसानों
को कि हम आपको स्वामीनाथन कमीशन की
रिपोर्ट के हिसाब से भुगतान
करेंगे एमएसपी
का स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट हमने लागू
कर दिया यह बोला था इस देश का

प्रधानमंत्री बाकायदा भाषण सुने आप उसके
बाद आगे बढ़ते हैं आप सबको भली भाति पता
है के एमएसपी के
अंदर हमने तय किया
है स्वामीनाथन कमीशन के अनुसार लागत जो

होगी इसका डेढ़ गुना एमएसपी दिया जाएगा
इसकी घोषणा हमने ऑलरेडी करके लागू कर दिया
है आज कांग्रेस
वाले मैं कहीं अगर एमएसपी की बात बोलता
हूं तो उनको जरा तकलीफ हो जाती है हम इस

वीडियो को को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से
आगे पीछे नहीं करने वाले हैं हम अंदर की
बहुत सारी बातें आपके सामने रखेंगे और
बहुत सारे ऐसे तथ्य लाएंगे जो अभी तक आपको
शायद इधर-उधर से ना मिले

हो जब आप मोदी जी का भाषण सुन रहे तो आप
गौर कर रहे होंगे कि वहां बैनर किस भाषा
में लगे हुए थे और मोदी जी किस स्थान पर
खड़े थे और उन्होंने अपने ऊपर जो हेड गियर

पहना था सर्व पली राधाकृष्णन स्टाइल का वह
देश के किस राज्य से आता है आपको समझ में
आ जाएगा कि पिछली बार दक्षिण के लोगों को
लुभाने के लिए य डॉक्टर स्वामीनाथन चूंकि

वह दक्षिण से ही आते हैं यह भाषण दिया गया
था लेकिन किसानों को स्वामीनाथन कमीशन की
रिपोर्ट के हिसाब से कुछ भी नहीं मिला है
सिर्फ मिला है तो जुमले अब आते हैं दूसरा
वादा मोदी जी ने किसानों से वादा किया कि
उनकी आय
2000 22 तक दुगनी कर दी

जाएगी यानी यह जो आए थी उनकी वो
88 के आसपास थी जिसको दुगना करने के बाद
16000 108000 यानी किसानों की जो आय 858
हुआ करती थी उस मासिक आय को बढ़ाकर मोदी
जी ने वादा किया था कि 16116 कर देंगे

लेकिन कुछ नहीं हुआ 2023 में संसद में
नरेंद्र सिंह तोमर केंद्रीय कृषि मंत्री
भाषण देते हैं और बताते हैं कि किसान की
आय 10000
हो गई है यानी केवल 16 26 पर किसान की आय

बढ़ी जिसको कि उन्हें कर देना था
दुगना इस तरह के झूठे वादे लगातार किसानों
से किए जाते रहे एमएसपी को लेकर भी वादा
किया गया था और वह पूरा नहीं हुआ अब किसान
जो आए हैं पहले यह बता दूं कि यह किसान
किसी भी पुराने जो संयुक्त किसान यूनियन

और इन सारी चीजों से जुड़े हुए नहीं है
जिसमें सिंह टिकट की यूनियन भी शामिल थी
भारतीय किसान यूनियन भी शामिल थी बहुत
सारे देश भर के संगठन उसमें शामिल थे वह
नेता अभी इस आंदोलन में नहीं है उन्होंने

ना तो इस आंदोलन का समर्थन दिया ना इसके
साथ आए हैं उसके बावजूद
इतनी बड़ी संख्या में किसान सड़क पर है
आश्चर्य की बात है कि बीजेपी में जा चुका

है एक आदमी किसानों की बात करने वाला
चौधरी अजीत सिंह का बेटा चौधरी चरण सिंह
का पोता राकेश सिंह टिकट बहुत सारे
संदिग्ध फैसलों के लिए वो जाने जाते हैं

उन्होंने बहुत सारे ऐसे ऐलान किए जिनका कि
किसी भी तरह से उस वक्त संयुक्त किसान
मोर्चा के फैसलों से लेना देना नहीं था
जिनमें से एक ऐलान संसद में घुस जाने का
था जबकि इस पर कोई सहमति नहीं हुई थी तो

जानबूझकर इस आंदोलन को उखाड़ने के लिए ऐसे
आरोप लगते रहे हैं उन्होंने बीजेपी की
सरकार को मौके दिए लेकिन आज विषय दूसरा है
तो किसान मांग रहे हैं एमएसपी की
गारंटी किसान कह रहे हैं भैया आप जितनी भी

एमएसपी देते
उसकी गारंटी दो वो मिलेगी ही
मिलेगी अभी क्या हो रहा है किसान की उपज 6
पर उपज एमएसपी पर जाती है अलग अलग आकलन है
लेकिन एक आकलन है 6 पर ही उपज एमएसपी पर
जाती है तो ऐसी हालत में किसान को आप
एमएसपी तो डिक्लेयर कर देते हैं लेकिन

सपोर्ट प्राइस का मतलब क्या जिस सपोर्ट
प्राइस पर माल ही ना बेचा जा सके या सरकार
जिस पर माल बिकवा नहीं
उसका नतीजा यह हुआ है कि किसान परेशान है
और वह यह कह रहा है कि साहब हम जाएं तो

जाएं कहां क्योंकि हमारा अपना सामान बिक
नहीं रहा है किसान की शिकायत कहां क्या है
किसान की शिकायत यह है कि जो किसा 1971 से
लेकर 2015 के बीच का एक अध्ययन हुआ था वह

अध्ययन कहता है कि स्कूल टीचर की आय 71 से
2014 के बीच में 280 से लेकर 320 गुना हो
गई थी प्रोफेसर की आय 1 से 170 गुना हो
चुकी थी इन सालों में सरकारी कर्मचारी की
आय 120 से 150 गुना हो चुकी थी 71 से 2015

के बीच में वहीं किसान की आमदनी सिर्फ 21
गुना बढ़ी थी इससे आप अंदाजा लगा ले किसान
की आमदनी के और भी आंकड़े हैं वह बताते
हैं कि 2003 में उसकी आय 21 थी जो 201819
आते

आते 10218 ही हुई यानी उसकी आय बड़ी ही
नहीं है इस बीच में किसानों का गुस्सा इस
बात को लेकर भी है अभी हम एमएसपी के
कैलकुलेशन पर भी आएंगे और सबसे बड़ी बात

इसमें मोदी जी क्यों समझौता करना नहीं
चाहते हैं क्यों किसान को उपज दिलाना नहीं
चाहते हैं और किसान को अगर अच्छा पैसा
मिलेगा तो उसे देश की प्रगति में क्या लाभ

होगा इसको भी हम समझेंगे बहुत गंभीर जहीन
आर्थिक बातें हम करने वाले
हैं तो मोदी जी ने आश्वासन दिया था गुरु

पर्व के दिन जब पिछले किसान आंदोलन के बाद
में यूपी में इलेक्शन आ गए थे और हालत ये
थे कि यूपी की सत्ता से बाहर होने वाली थी
बीजेपी अब उनका कह रहे ये कि पिछले किसान
आंदोलन में जो मुकदमे दर्ज हुए थे आपने

वादा किया था कि आप वापस लेंगे नहीं ले
रहे हैं जो ट्रैक्टर जप्त किए थे उनको
वापस नहीं लौटा रहे हैं वो किसान वो
खड़े-खड़े पुलिस थानों में कबाड़ बन चुके

हैं तो यह बात ऐसी मांगे हैं जिनको आपको
पूरा कर देना चाहिए था आपने नहीं किया
आपने एमएसपी की गारंटी की बात की आय दुगनी
करने की बात की और यहां तक कहा कि हम
स्वामीनाथन आयोग के हिसाब से आपको

एमएसपी देंगे लेकिन सिर्फ जुमले जुमले
जुमले और देश के किसानों को मूर्ख बनाया
गया जिसके बाद में किसान जानते हैं कि अगर
यह चुनाव का टाइम इस वक्त अगर दबाव

बनाएंगे तो य सरकार हार से डरती है हमारी
मांगे पूरी करेगी जैसा इसने पिछले किसान
आंदोलन में 700 मौतों के
बाद
किया हालांकि इस बारे में एक बड़ा दुखदाई
बयान आया था कि मोदी जी ने कहा कि मेरी
वजह से मरे हैं क्या 700 किसान वह सुनके

ही अपने आप में बहुत दुखद था खैर अब हम आप
समझते हैं कि यह जो स्वामीनाथन कमेटी की
रिपोर्ट क्या है उसके बाद हम समझेंगे कि
यह पूरा जो कहानी है इसके पीछे किसकी अपने

इंटरेस्ट है कौन सी अंतरराष्ट्रीय ताकतें
हैं कौन से उद्योगपति लोग हैं कौन सा
वर्ल्ड ऑर्डर इसके पीछे लागू हो रहा है जो
किसानों की आमदनी को नहीं बढ़ने दे रहा है
दरअसल क्या है स्वामीनाथन ने कहा कि जो
किसान

है वह अपना कारोबार कर रहा है तो उसको
कारोबार करने के लिए जैसे दूसरे बिजनेस
में एक मुनाफे का गणित होता है तो किसान
के बिजनेस में भी एक मुनाफे का गणित होना

चाहिए तो क्या होना चाहिए तो उन्होंने कहा
देखिए एक तो किसान ने अपनी खेती में लागत
लगाई उसको जोड़ लीजिए जिसको उन्होंने कहा
कि ए टू कॉस्ट है ए टू कॉस्ट में एफएल भी
जोड़ लीजिए यानी फैमिली लेबर यानी आपके

परिवार ने भी काम किया तो उसका मेहनताना
भीत होगा जब बड़े-बड़े टाटा बिल्ला अंबानी
अपनी कंपनी से वेतन लेते हैं तो किसान
अपने कारोबार में जो मेहनत कर रहा है उसके
बच्चे उसकी फैमिली लगी रहती है दिन रात

सर्दी गर्मी में रात को जा रहे हैं जाड़े
में पानी दे रहा है खेतों में तो ऐसी हालत
में उसकी मेहनत का भी पैसा होना चाहिए
दूसरी बात यह कही गई कि इसके अलावा एक
सीटू कॉस्ट भी इसमें शामिल होनी चाहिए सी

टू कॉस्ट क्या है सी टू कॉस्ट क्या है कि
सी टू कॉस्ट ये है कि भाई जो पैसा किसान
ने उसमें लगाया
वह पैसा वो या तो कर्ज लेकर आ रहा
है या अगर वह पैसा अपने कारोबार में नहीं

लगा के बैंक में रखता तो वहां से उसको
ब्याज मिलता उसको भी आप जोड़िए तो यह कहा
गया कि यह जो पूरी एमएसपी का जो गणित है
उसमें आप यह सब मिला लीजिए और मिलाने के

बाद में आप इसमें 50 पर मुनाफा डाल दीजिए
अब आप क % का मार्जिन होता है क्या हम तो
कोल गट लाते हैं 0 का 10 पर का मार्जिन
होता है लेकिन यह 50 पर साल भर का मार्जिन
है कोई जो सामान आप दुकान वाले से

एफएमसीजी के सामान लेकर आते हैं वह अपनी
दुकान में साल भर नहीं सकता वह सामान अगर
वह कोलगेट को अपने पास साल भर रख के
बेचेगा तो वो भी 50 पर ही मांगेगा तो यह
नाजायज नहीं था तो स्वामीनाथन को जब

इन्होंने
भारत रत्न
दिया तो उनकी पुत्री की जो प्रतिक्रिया आई
थी वह यही आई थी कि डॉक्टर स्वामीनाथन को
अगर सचमुच सम्मान देना चाहते हैं तो उनकी
सिफारिश को लागू किया

जाए अब स्वामीनाथन की सिफारिशें लागू ना
होने में अगर आप सीधे-सीधे गणित लगाते हैं
तो आज के हिसाब से स्वामीनाथन के हिसाब से
जो एमएसपी बनती है
2478 क्विंटल बनती है जबकि अभी एमएसपी 225

है यानी बहुत ज्यादा अंतर नहीं है करीब 50
का अंतर आप मान लीजिए अगर 50 एमएसपी और
बढ़ा दी जाती है तो उसके बाद में किसान को
स्वामीनाथन से मिलने लगेगी लेकिन 50

क्विंटल भी दाम बढ़ाने को सरकार तैयार
नहीं है बहुत सारे लोगों के दिमाग में यह
आ रहा होगा कि किसान की अगर आय है और उसको
बढ़ाने से देश में महंगाई बढ़ जाएगी
हाहाकार मचेगा चूड़िया तोड़ेंगे लोग

भक्तों की भाषा में क्योंकि अब किसान को
जब आप महंगा कगा तो आप क रोगे महंगाई हो
गई महंगाई हो गई गेहूं महंगा हो गया आटा
महंगा हो
गया तो इसको आप इस तरीके से

समझिए कि दुनिया भर की सारी चीजें महंगी
हो रही है सिलेंडर का दाम आपने कहां
पहुंचा दिया तब आपके दिमाग में नहीं आया

कि लोग रोएंगे आपने किसान को मिलने वाली
खाद को महंगा कर दिया तब आपके दिमाग में
नहीं आया फर्टिलाइजर और कीटनाशकों का दाम
कहां पहुंच गया तब आपके दिमाग में नहीं

आया किसान जो इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट
इस्तेमाल करता है उनमें से भले ही
ट्रैक्टर देख लीजिए उसके दाम में कितना
अंतर आ गया किसान बाजार से जो भी चीजें

खरीदने जाता है उसके दाम में कितना अंतर आ
गया तो इन सारी चीजों को अगर आप देखेंगे
तो अगर किसान के गेहूं में भी ऐसा मैंने
आपको ऊपर बताया अभी कि सबसे कम रफ्तार से

किसान की इनकम बढ़ रही
है तो उससे फायदा क्या होगा अब आप समझिए
फायदा अर्थव्यवस्था को क्या होगा राहुल
गांधी ने पिछले लोकसभा चुनाव में 000
सालाना मिनिमम इनकम की गारंटी दी थी भारत

के नागरिकों को आपको याद
होगा और यह कहा गया कि मिनिमम इनकम जो है
भारत के लोगों की
हम सीधे-सीधे
72000 करेंगे यानी 72000 एक परिवार को तो

मिलेंगे ही
मिलेंगे उसके पीछे आईडिया क्या था उसके
पीछे आईडिया यह था कि 72 हज रप अगर
हिंदुस्तान का हर आदमी खर्च
करेगा तो इस देश
में बाजार लहला

उठेंगे आज जो एफएमसीजी कंपनियां रो रही है
बाजार में जो ग्रामीण डिमांड है वो बढ़
नहीं रही है चाहे वो हिंदुस्तान लिवर हो
या कुछ हो तरह-तरह के इंसेंटिव दे रहे हैं

वो डीलर्स को गांव में माल नहीं बिक रहा
है गांव में डिमांड ही नहीं है एफएमसीजी
का मार्केट गांव में बढ़ ही नहीं रहा
एफएमसीजी मतलब फास्ट मूविंग कंज्यूमर
गुड्स जिसमें माचिस है साबुन है तेल है और

भी तमाम चीजें हैं जो आपके पड़ोस के
किराने की दुकान में बिकती है और रोज मर्र
में आप इस्तेमाल करते हैं तो वो डिमांड
लहला उठेगी अगर गाव में किसान के पास
ज्यादा पैसे आएंगे वह खरीददारी करेगा अपनी

जरूरत की चीजें
खरीदेगा वह खेती के सामान के अलावा कुछ
दूसरी चीजें भी खरीदेगा दो जोड़ी कपड़े
ज्यादा भी सिल सकेगा अभी तो शादी ब्याह
में जाना हो होली दिवाली हो तब तो कपड़े

नए आते हैं बाकी किसान उसी पेंट शर्ट में
10 साल 15 साल भी बिता देता है यह भारत के
गांव की हकीकत
है अब आप कहेंगे कि इतने सारे बढ़िया

आ रहे हैं वो आ रहे
ठीक है किसानों में सब गरीब नहीं होते
किसी के पास में हजारों एकड़ की भी जमीन
होती है किसी के पास में लेकिन जो आदमी
पैसा लगा रहा है मेहनत लगा रहा है उसको

मुनाफा तो आपको देना पड़ेगा वह गरीब है
अमीर है आप यह तो नहीं सोचते अडानी को या
किसी और को सब्सिडी देते वक्त कि यह बहुत
अमीर लोग हैं इसलिए हम सब्सिडी नहीं देंगे
उनको तो आप एसीसी जड घोषित कर देते हो
टैक्स में छूट देते हो सब्सिडी देते हो

आपने कॉरपोरेट टैक्स भी कम कर दिया जो
हिंदुस्तान के सारे उद्योगपतियों और
बड़े-बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा
तो एक बड़ा सवाल है कि क्या किसान को बढ़ा
के नहीं मिलना चाहिए अब हम आते हैं कि
उनको बढ़ा के देने में तकलीफ क्या है

देखिए तकलीफ थोड़ी सी छोटी छोटी तकलीफ
नहीं बड़ी तकलीफ
है भारत में जो गेहूं एक्सपोर्ट होता है
वह एक्सपोर्ट करने वाले हमारे लाला अडानी
साहब हैं 30 पर के करीब एक्सपोर्ट

उन्होंने किया है हाल
में 30 पर अडानी विलम कंपनी उनकी कंपनी है
और यह कंपनी दुनिया भर में जाकर गेहूं
वगैरह बेचती है और बाहर से लाकर तेल वगैरह
यहां बेचती
है
अगर गेहूं का दाम भारत में बढ़ता है तो इन
कंपनियों के मुनाफे में कमी आ जाएगी अब आप

कहेंगे मुनाफे में कैसे कमी आ जाएगी तो
इसको गणित को आप समझिए कि इस वक्त जो रेट
है अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं का रेट
वो है
587 द 8 8 8 मतलब

$88 प्रति
बुशे वहां पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में
बुशे के हिसाब से बिकता है वो उनका
अमेरिका का एक अलग तरीका है उसमें लिक्विड
का बुशे अलग होता है गेहूं का अलग होता है

सोयाबीन का और गेहूं का सेम होता है तो 27
किलो वजन के करीब एक बुशे में गेहूं का
आता है एक क्विंटल गेहूं का दाम अगर
निकाले यानी इस एक बुशे में से अगर आप 27
उतना जो भी है 27 उसको घटाएं और उसको अगर

एक क्विंटल गेहूं का दाम उसम 100 का गुणा
करके निकाले तो करीब अंतरराष्ट्रीय
मार्केट में
8670 83 पैसे अभी आज का दाम है और व
लगातार ऊपर नीचे हो रहा है तो

8670 63 पैसे यानी
4871 क्विंटल के दाम पर बाहर जो लोग अपना
गेहूं भेजते
हैं वो बेच रहे हैं भारत के किसान

से 2400 लेने में दिक्कत
है भारत के किसान को 2400 की गारंटी सरकार
देने को तैयार नहीं है जबकि वो गेहूं जब
बाहर जाता है तो
8670 प्रति क्विंटल बिकता

है अब मैं आपको कुछ पुरानी बातें याद
दिलाना
चाहूंगा जब भारत का
गेहूं दुनिया में डिमांड पे था रूस और
यूक्रेन लड़ मर रहे थे और वह मुख्य स्रोत
थे दुनिया को गेहूं देने के तो भारत से

गेहूं
लगातार निर्यात हो रहा था भारत में जो
सरप्लस भंडार होता है उसको भी करीब करीब
खाली कर दिया गया
था और ज्यादा से ज्यादा गेहूं बाहर
एक्सपोर्ट किया जा रहा था गेहूं पर तो रोग
लग गई गेहूं के उत्पाद दलिया है मैदा है

आटा है लगातार विदेश जाते रहे भारत में
गेहूं का दाम बढ़ता रहा तब महंगाई की
चिंता सरकार को नहीं
थी और यह सब जाने के बाद और दुनिया यह
समझती रही कि यह बाइड के दबाव में हो रहा

है बाइड कह रहा है कि भारत को स्वार्थी
नहीं बनना चाहिए और आखिर में भारत सरकार
ने यह जो गेहूं के उत्पाद विदेश जा रहे थे
इनको भी एक महीने या 15 दिन का नोटिस दिया
इस बीच में जो भेजना है भेज लो बाद में हम
इस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं उतनी तारीख से

प्रतिबंध लग जाएगा अंधा दुं भारत का गेहूं
और आटा गया अभी मैंने आपको बताया था कि
भारत से गेहूं आटा एक्सपोर्ट कर कौन करता
है और करीब-करीब अगर आप अंतरराष्ट्रीय दाम

और भारत के किसान से से आप जिस दाम में
खरीद रहे हो गेहूं उसका अंतर लगा निकालें
तो यह 20 गुना बैठता है 20 गुना उस एमएसपी
से जो स्वामीनाथन के हिसाब से अगर किसान
को जी जाए

तो यानी भारत में ₹ का जो गेहूं खरीदा
जाता है वो 2020 का बाहर बिकता है बेचने
वाले कौन लोग हैं यह भी मैंने आपको बता
दिया और गेहूं को भारत में कमी होने की

बात आ गई थी महंगाई बढ़ रही थी उसके
बावजूद
बाहर भेजने की परमिशन सरकार नहीं भेजती है
बाहर कंपनियां भेजती है दी जाती रही अंधा
धुंध दाम में कभी कोई निकलेगा फाइनेंशियल

टाइम्स जैसा हिंडन वर्ग जैसा तो यह भी एक
घोटाला सामने
आएगा क्योंकि पूरी दुनिया जब गेहूं को तरस
रही थी और भारत के पास में जब गेहूं था और
कम था उसकी जरूरत को कम पड़ जाता उसके

बावजूद याद कीजिए भारत ने कनकी वाला चावल
फोर्टीफाइड यह सब कर कर आ के भारत में कभी
करते रहे खुद प्रधानमंत्री ने लोगों को
कहा मिलेट्स खाओ मिलेट्स मोटा अनाज खाओ
वही दौर है आप मोटा अनाज खाओ इसको हम 20

गुना कीमत में बाहर भेज रहे हैं एक रुप का
किसान का गेहूं वो भी अगर स्वामीनाथन
कमेटी से कैलकुलेट किया
जाए जो कि दे नहीं रहे हैं और बाहर 20 में
बिक रहा था तो ऐसी हालत में अगर किसान के

गेहूं का दाम पढ़ जाता है तो किसका मुनाफा
प्रभावित
होगा
किसका किस कंपनी मैं यह नहीं कह रहा हूं
कि वो गेहूं सीधे जाएगा उसकी शिपिंग भी

होगी उस पर बाकी खर्चे भी होंगे इस कोई
इंकार नहीं कर रहा है लेकिन 20 गुना तो उस
पूरे हालात को अगर आप देखें तो आपको समझ
में आएगा कि क्यों तोप तमंचे कीले बैरिकेड
कंक्रीट सब बिछाई जा रही है ताकि किसान
दिल्ली ना पहुंच जाए

वह अपना हक मांग रहा है और हक भी जो
न्यूनतम उसका हक है व मांग रहा है इससे कम
क्या हक दोगे आप
उसको आपने वादा किया था उसको पूरा कर

दो आपने स्वामीनाथन कमी कमीशन कहा था आपने
नहीं माना आपने कहा दुगनी आय कर दूंगा कुछ
नहीं
किया 26 पर बढ़ी
है और आप ही ने कहा था कि हम किसानों पर
मुकदमे वापस ले लेंगे उन किसानों की जान
गई जो इस देश के अच्छाई के लिए आंदोलन कर

रहे थे उनको मुआवजा तो दिया ही नहीं आपने
700 किसान से ज्यादा मर गए 750 से ऊपर
थे उनके सब नाम पते फोन नंबर सब कुछ मौजूद
है यह वाला मामला नहीं है कि राम मंदिर के
नाम पर टाइम प एक पूरा आंदोलन चलाया कि

इतने लोग कार्य सेवक मारे गए हैं बाद में
फ्रंटलाइन ने रिपोर्ट छापी एक एक आदमी के
घर जाकर उनके रिपोर्टर ने चेक किया तो सब
घर पहुंच चुके थे और विश्व हिंदू परिषद ने
उनके नाम पर बहुत सारा चंदा इकट्ठा किया

था पन्ना पन्ना भर के विज्ञापन छपे
थे उसके बाद में आज तक उसका पैसे का हिसाब
मिला नहीं है अभी मांगा गया था तो जवाब
मिला खर्चा हो
गया तो यह जो पूरी सिचुएशन आपके सामने है

इस सिचुएशन में
अब आप बताइए किसान आंदोलन ना करें तो क्या
करें और भारत में अगर मजदूर और किसान को
हक नहीं दोगे तो यह देश चलने से
रहा

आप उद्योगपतियों को देते जाओगे
उद्योगपतियों के जो कर्मचारी हैं उनके
यहां पर जो मोटी मोटी तन सिक्योरिटी गार्ड
वगैरह नहीं मजदूर लेबर नहीं मैनेजमेंट के

लोग हैं उन्हीं के पास पैसे आते रहेंगे वह
महंगी महंगी गाड़ी खरीदते जाएंगे इसीलिए
आप देख रहे हैं के शप रिकवरी आ रही है 10
लाख से ऊपर से गाड़ी बिक रही है 50 लाख से
ऊपर का मकान बिक रहा है इसके नीचे वाले को

कोई खरीदने के लिए है ही नहीं क्योंकि
इसके नीचे वाले की तो आय गिर रही है
बहरहाल सीधी सी बात यह है कि अगर इस देश
के किसान के हाथ में पैसा जाएगा तो इस देश
की आर्थिक प्रगति भी होगी यह उद्योगपति ही

तरक्की करेंगे क्योंकि इनका माल बिकेगा
मोटरसाइकिल बिकने लगेगी 50 6 हज
वाली फिर से दो लाख 3 लाख की कार की
बिक्री बढ़
जाएगी यह जो साबुन तेल टूथपेस्ट वगैरह की
बिकि हैं यह भी बेहतर हो जाएंगी छोटे-छोटे
बिस्किट वगैरह

एक बार दिल खोलकर किसान की सुन लो और उनकी
मांगे पूरी कर दो उम्मीद करता हूं पूरा
खेल आप समझ गए होंगे
नमस्कार जय हिंद

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