किस मजबूरी में Qatar ने छोडे Indian Navy Officers ? | How India Won Diplomatic War Against Qatar? - instathreads

किस मजबूरी में Qatar ने छोडे Indian Navy Officers ? | How India Won Diplomatic War Against Qatar?

अगस्त 2022 में कतर के अंदर आठ एक्स
इंडियन नेवी ऑफिसर्स को अरेस्ट कर लिया
जाता है जिनके बारे में अगले कुछ हफ्तों
तक किसी को खबर नहीं दी जाती अक्टूबर 2022
में पता चलता है कि इन सभी ऑफिसर्स पर

जासूसी का आरोप लगाएं लेकिन यह जासूसी
भारत के लिए नहीं बल्कि इजराइल के लिए कर
रहे थे और कुछ ही महीने बाद इन सभी को कतर
की लोअर कोर्ट में फांसी की सजा सुना दी

जाती है अब यहां से आता है कहानी में
ट्विस्ट जहां भारत में ऐसा डिप्लोमेटिक
पासा फेंका कि पूरा खेल ही पलट गया दिसंबर
2023 में कतर कोर्ट ने आठों सिटीजंस को
सुनाई गई मौत की सजा पर रोक लगा दी वहीं

हाल ही में खबर मिली है कि आठों एक्स
इंडियन नेवी ऑफिसर्स को रिहा कर दिया गया
है इनमें से सात ऑफिसर्स भारत लौट आए हैं
इस पूरे गेम चेंज को इंडिया की मेजर

डिप्लोमेटिक विक्ट्री माना जा रहा है एक्स
ऑफिसर्स का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी इस मामले में दखल नहीं देते
तो हम आज आपके सामने खड़े नहीं होते आखिर
उन्होंने ऐसा क्यों कहा क्या है पूरी

कहानी और सरकार कैसे इन्हें बचाने में
कामयाब रही क्या प्लानिंग रही तो आज के इस
वीडियो में हम जानेंगे ऐसे पांच फैक्टर्स
जो इन ऑफिसर्स के लिए वरदान साबित हुए
देखिए अगर इस मुद्दे की शुरुआत में जाएं
तो हमें कतर के बारे में थोड़ा बहुत जानने

की भी जरूरत पड़ेगी दरअसल कतर दुनिया के
सबसे अमीर देशों में से एक है जिसकी इनकम
का मेजर सोर्स है उनकी नेचुरल गैस जो वह
समुद्र से निकालते हैं इसी गैस फील्ड को

प्रोटेक्ट करने के लिए वह अपनी नेवल
सिक्योरिटी पर बहुत ज्यादा खर्च करते हैं
और भारत ने भी यहां पर कई सारे नेवल
ट्रेनिंग कंडक्ट की हैं कतर और भारत के
रिश्ते भी काफी अच्छे हैं भारत 90 फीदी

गैस कतर से इंपोर्ट करता है इसके अलावा
कतर की कुल 25 लाख की आबादी में 65 लाख तो
भारतीय हैं जो देश को भारी मात्रा में
फॉरेन करेंसी भेजते हैं यह पैसा भारत के
फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व्स को बढ़ाने में

इंपॉर्टेंट कंट्रीब्यूशन देता है भारत की
दोहा में एक एंबेसी है जबकि कतर की एक
एंबेसी नई दिल्ली में और दूसरी कॉमर्स
एंबेसी मुंबई में है भारत और कतर के बीच
के डिप्लोमेटिक रिलेशंस 1973 में स्टब्ड

हुए थे जो वक्त के साथ गहरे होते चले गए
मार्च 2015 में कतर के अमीर तमीम बिन हमद
अल थानी भारत आए थे तब दोनों देशों के बीच
कई सेक्टर्स में कोलैबोरेशन को लेकर
एग्रीमेंट्स पर सिग्नेचर भी हुए इसके

अलावा भारत और कतर ने कैदियों की
अदला-बदली का एग्रीमेंट भी किया था लेकिन
फिर ऐसा क्या हुआ कि यह दोस्ती दुश्मनी
में बदल गई और कतर ने भारत के एक्स इंडियन

नेवी ऑफिसर्स को अरेस्ट कर लिया अब इसे
जानने से पहले हम यह जानेंगे कि कैसे
इंडियन गवर्नमेंट ने डिप्लोमेटिक चाल खेली
और सभी को फांसी से बचा लिया देखिए इसके

पीछे पांच फैक्टर्स हैं फैक्टर नंबर वन नो
रिटोरिक फॉरेन मिनिस्टर एस जयशंकर ने 8
दिसंबर 2022 को संसद में कहा था कि कतर से
सभी आठों इंडियंस को वापस लाया जाएगा अगर
सरकार इन एक्स ऑफिसर्स को नहीं ला पाई तो

वह मिलिट्री मेंबर्स और एक्स सोल्जर्स में
फेथ कैसे पैदा करेगी अब अपनी इस बात को
पूरा करने ने के लिए फॉरेन मिनिस्टर ने
जबरदस्त डिप्लोमेसी का यूज किया उन्होंने
फॉरेन मिनिस्टर से कोई भी ऐसा बयान जारी
नहीं होने दिया जिससे बात और बिगड़े

उन्होंने अपने आईएफएस ऑफिसर वाला तजुर्बा
लगाया और सारी प्लानिंग की और प्लानिंग के
अकॉर्डिंग 1 अक्टूबर 2023 को कतर में भारत
के एंबेसडर श्री विपुल ने आठों ऑफिसर से
मुलाकात की जो दोहा जेल में बंद थे विदेशी

मंत्री एस जयशंकर अभी इस मामले को सुलझाने
की कोशिश कर ही रहे थे कि इस बीच 26
अक्टूबर को इंडियन नेवी के एक्स ऑफिसर्स
को सजाए मौत सुना दी गई सभी चौक गए लेकिन

उस इंडियन की एक्सटर्नल अफेयर्स
मिनिस्ट्री ने इस पर कोई खास रिएक्शन नहीं
दिया बाद में एक्स ऑफिसर्स के रिलेटिव्स
के जरिए से कतर में पिटिश लगाई गई 23 और

30 नवंबर को पिटीशन पर सक्सेसफुली दो
सुनवाई भी हुई इसके बाद 3 दिसंबर को जेल
में बंद ऑफिसर्स को काउंसलर एक्सेस दिया
गया विदेश मंत्रालय ने भले ही इस मामले

में कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की लेकिन
वह लगातार लगे रहे इसमें वक्त लगा लेकिन
रिजल्ट आज सबके सामने है फैक्टर नंबर टू
पीएम मोदी अपॉइंटेड हिज स्पेशल ऑफिसर

देखिए जब एक्स नेवी ऑफिसर्स को मौत की सजा
सुनाई गई तो फॉरेन मिनिस्टर एस जे शंकर ने
दीपक मित्तल को
अपॉइंट्स हैं और भरोसेमंद भी दीपक मित्तल
कतर में रहकर कानूनी दांव पेज खेलते हैं

एक्चुअल में इंडिया ने मित्तल की हेल्प से
टू साइडेड स्ट्रेटेजी अपनाई एक तरफ दीपक
ने कतर की अपर कोर्ट्स में अपील की और
दूसरी लीगल प्रोसीडिंग्स में हिस्सा भी
लिया तो दूसरी तरफ उन्होंने कतर के शे एक
अमीर से लगातार कांटेक्ट बनाए रखा दरअसल

कतर के अमीर के पास किसी सजा को माफ करने
या कम कराने का राइट्स होता है वो इस पावर
का यूज हर साल 18 दिसंबर को कतर के नेशनल
डे पर करते हैं कैदियों को रिहा करने के

लिए इसलिए दीपक का फोकस अमीर पर था कि वह
किस तरह से जेल में बंद आठों इंडियंस की
मौत की सजा माफ कर द वही कतर के हालात
कैसे हैं इसके अकॉर्डिंग भारत सरकार को

क्या करना है यह सलाह भी दीपक ही दे रहे
थे दीपक को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के
पी रीजन है दरअसल 1998 बैच के इंडियन
फॉरेन सर्विस ऑफिसर दीपक मित्तल प्रेजेंट

में प्राइम मिनिस्टर्स ऑफिस में ऑफिसर ऑन
स्पेशल ड्यूटी यानी ओएसडी हैं दीपक 2 साल
तक कतर में भारत के एंबेसडर रह चुके हैं
और जब हमारे एक्स नेवी ऑफिसर्स को अरेस्ट

किया गया तब वही एंबेसडर थे इस वजह से
दीपक के कतर के सभी बड़े ऑफिसर्स और लीडर
से अच्छे रिलेशंस हैं व वहां की पॉलिसीज
को अच्छे से जानते हैं इसलिए इंडियन

गवर्नमेंट को काफी मदद भी मिली अगले
फैक्टर्स पर जाने से से पहले अब आपको बता
दें कि आर्टेरिया खास आपके लिए लेकर आया
है श्रीराम का बालरूप जो हूबहू अयोध्या के

रामलला जैसा ही है इसे खरीदने के लिए आप
हमारे कूपन कोड मिस्टिका 10 यूज कर सकते
हैं जिस पर आपको 10 पर का डिस्काउंट भी
मिल जाएगा लिंक डिस्क्रिप्शन में है खैर

अब अपनी कहानी पर वापस आते हैं और जानते
हैं फैक्टर नंबर थ्री सीक्रेट विजिट्स ऑफ
एनएसए अजीत डवाल देखिए हिंदुस्तान टाइम्स

की रिपोर्ट के अकॉर्डिंग नेशनल सिक्योरिटी
एडवाइजर अजीत डोवा ने इसके केस में पर्दे
के पीछे से रोल प्ले किया है वह लगातार

सीक्रेट विजिट्स कर रहे थे डोभाल कतर को
यह समझाने में कामयाब रहे कि कतर भारत की
दोस्ती के लिए इस मामले का हल निकालना
जरूरी है और कतर इसके लिए अगरी भी हो गया

उसने पहले मौत की सजा को जनरल पनिशमेंट
में बदला फिर कुछ महीने बाद बाकी सजा भी
माफ कर दी कतर ने आठ भारतीयों के अलावा एक
अमेरिकन और एक रशियन सिटीजन की सजा भी माफ

की है अब फैक्टर नंबर फोर पीएम मोदी मीट्स
अमीर ऑफ कतर देखिए पीएम नरेंद्र मोदी ने
एक दिसंबर को दुबई में हुए सीओपी 28 समिट

में पार्ट लिया था तब पीएम मोदी ने
कॉन्फ्रेंस के बाद कतर के अमीर शेख तमीम
बिन हमद अल थानी से अलग से मीटिंग भी की
थी इस दौरान उन्होंने कतर में रह रहे
इंडियंस की सेफ्टी और भलाई को लेकर बात की
और पूछा कि वहां हमारे सिटीजंस कैसे हैं

माना यह जा रहा है कि इसी बैठक में दोनों
के बीच एक्स नेवी ऑफिसर्स की सजा को लेकर
बात हुई थी इसके बाद ही कतर का रुख बदला
दरअसल भारत और कतर के बीच अच्छे दोस्ताना
रिलेशन तो हैं ही इसके अलावा भारत कतर का

टॉप ट्रेडिंग पार्टनर भी है फैक्टर नंबर
फाइव डील वर्थ र
6474 करोड़ विद कतर एक्चुअली एक्स नेवी
ऑफिसर्स की रिहाई के पीछे कतर और भारत के
बीच हुई 8 अरब डॉलर यानी ₹ 47400 करोड़ की
डील काभी इंपॉर्टेंट रोल हो सकता है जो

पिछले हफ्ते गोवा में ही हुई थी यह डील
लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी गैस की
खरीद को लेकर है दरअसल कतर की एलएनजी
खरीदने वाला भारत बड़ा क्लाइंट है यदि कतर
एक्स नेवी ऑफिसर्स की सजा पर अड़ा रहता तो

इस डील पर असर भी पड़ सकता था कतर ने ऐसा
नहीं किया और ऑफिसर्स को छोड़ने में भलाई
समझी गोवा एनर्जी वीक में हुए एग्रीमेंट
के अकॉर्डिंग भारत कतर से 208 तक
लिक्विफाइड नेचुरल गैस एलएनजी खरीदेगा यह

एग्रीमेंट देश की सबसे बड़ी एलएनजी
इंपोर्ट करने वाली कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी
लिमिटेड यानी पीएलएल ने कतर की सरकारी
कंपनी से की है फिलहाल भारत में 35 पर
एलएनजी कतर से ही आती है लेकिन नए

एग्रीमेंट के अकॉर्डिंग भारत अब हर साल 75
लाख टन गैस इंपोर्ट करेगा इससे पहले भी
गैस के इंपोर्ट को लेकर भारत और कतर में
31 जुलाई 1999 को समझौता हुआ था जो 2028
तक के लिए था नया एग्रीमेंट 208 से ही

शुरू होगा इस सौदे से भारत हर साल 6 अरब
डॉलर यानी 498 अरब रप बचाएगा खैर अब सवाल
यह है कि भाई जब भारत से इतने अच्छे
रिश्ते थे तो कतर ने नेवी ऑफिसर्स को
फांसी की सजा क्यों दी बात दरअसल 2014 की

है जब कतर के पड़ोसी देश ओमान की रॉयल
ओमान एयरफोर्स से रिटायर्ड हुए ऑफिसर खामस
अल अजमी ने अपनी एक डिफेंस कंसल्टेंसी
कंपनी खोली जिसका नाम था बहरा ग्लोबल
टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेस

कंपनी का ऑफिस ओमान में ही था लेकिन इसकी
एक ब्रांच कतर की राजधानी दोहा में भी
खोली गई जिसका काम डिफेंस सर्विसेस
प्रोवाइड करना मिलिट्री इक्विपमेंट के लिए

ट्रेनिंग देना मेंटेनेंस सर्विसेस
प्रोवाइड करना था इस बीच क कंपनी ने कतर
के मेजर जनरल तारी खालिद अली को एक
प्रपोजल भेजा जिसके मुताबिक वह कतर की
अमीरी नेवल फोर्स की मेंटेनेंस और

ट्रेनिंग सर्विसेस का कांट्रैक्ट चाहते थे
और उनका यह प्रपोजल एक्सेप्ट भी कर लिया
गया इस कांट्रैक्ट के मिलने के बाद
उन्होंने 2015 से 16 में तेजी से हायरिंग

शुरू कर दी जिसके लिए दुनिया भर के
रिटायर्ड नेवल ऑफिसर्स को अप्रोच किया
जाने लगा इसी साल इन्होंने 75 इंडियन
ओरिजन ऑफिसर्स को भी हायर किया और इन 75

में से आठ ऑफिसर्स कंपनी में सी लेवल
पोजीशन पर थे अब इन आठ ऑफिसर्स में सबसे
सीनियर लेवल पर कमांडो पुर्ण दू तिवारी थे
जो कि कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे
इसके अलावा नवतेज सिंह गिल कमांडर सुगुन

अगर पका और कैप्टन बी के वर्मा कंपनी के
अंदर नेवल डायरेक्टर्स के पद पर थे आखिरी
के चार ऑफिसर्स में से तीन कमांडर अमित
नागपाल कमांडर एस के गुप्ता और कैप्टन

सौरभ वशिष्ठ एग्जीक्यूटिव रोल पर थे और एक
ऑफिसर को सेलर के तौर पर हायर किया गया था
इसके बाद 2016 में कतर ने अपनी नेवी को
इंप्रूव करने के लिए इटली से सबमरींस

खरीदने का फैसला किया इटली दुनिया के सबसे
बड़े सबमरीन मैन्युफैक्चरर्स में से एक है
और जिस इटालियन कंपनी से ये लोग डील कर
रहे थे उसका नाम था फिन कंटरी एसए इस डील
में डेरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज ने भी अपने

इनपुट्स दिए 2016 में फिर फिन कंटरी और
कतर गवर्नमेंट के बीच इस डील को लेकर एक
एमओयू साइन कर लिया गया इस एमओयू के
मुताबिक कतर इनसे चार स्मॉल साइज बॉर
शिप्स दो पेट्रोल वेसल्स और एक एमपीबी

वेसल खरीदने वाला था यह डील काफी रूटीन
डील थी जिसकी जानकारी पब्लिक डोमेन में भी
अवेलेबल थी इसलिए यहां पर तो कोई खास
परेशानी नहीं आई लेकिन असली मुद्दा 2020
में जाकर खड़ा होता है पर्जन गल्फ के इस

एरिया में सिर्फ ईरान ही अकेला ऐसा देश है
जिसके पास स्टेल्थ सबमरींस हैं स्टेल्थ
सबमरींस वो सबमरींस होती हैं जो बिना किसी
रडार या दूसरे इक्विपमेंट पर डिटेक्ट हुए

लंबे समय तक ना सिर्फ पानी में रह सकती
हैं बल्कि बिना शोर किए हुए मूव भी कर
सकती हैं कतर भी चाता कि भाई वह भी इस तरह
की सबमरींस अपने नेवल फ्लीट में शामिल

करें जिसके लिए उन्होंने फिर से
फिनकेंटियरी एसपीएन क्ट किया लेकिन इस बार
यह डील एक सीक्रेट डील थी लेकिन ज्यादा
समय तक यह डील एक सीक्रेट नहीं रह पाई
दरअसल 17 मई 2021 में कई सारे लोकल

न्यूजपेपर्स ने एक सीक्रेट प्रेजेंटेशन का
स्क्रीनशॉट जो है अपने पेपर में पब्लिश कर
दिया यह स्क्रीनशॉट उस प्रेजेंटेशन की एक
स्लाइड का था जो कि इटली की पार्लियामेंट

में दी गई थी यह प्रेजेंटेशन भी सीक्रेट
ली दी गई थी इसलिए इसका लीक होना काफी
बड़ी बात थी डील में इटालियन 212 स्टेल्थ
सबमरींस के स्मॉल वेरिएंट को खरीदने की

बात थी और इस डील को कई वजहों से सीक्रेट
रखना जरूरी था इसमें से सबसे बड़ी वजह यह
थी कि अगर कतर के पास यह सबमरींस आ जाती
तो भाई सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि वो
इजराइल की सबमरीन सुपर मेसी को भी चैलेंज

करने लगते जिस वजह से उन्हें डर था कि
इजराइल को अगर इस डील का पता चलता है तो
वो इसे जरूर किसी तरह कैंसिल करवाने की
कोशिश करेंगे इस सीक्रेट डील के बारे में
कतर और इटली की सरकार के अलावा सिर्फ डहरा

ग्लोबल को ही पता था 30 अगस्त 2022 के दिन
कतर की स्टेट सिक्योरिटी ब्यूरो जो कि
उनकी इंटेलिजेंस एजेंसी है उन्होंने इन आठ
इंडियन ऑफिसर्स को रात में ही कांटेक्ट
किया और उनसे कहा कि कुछ अर्जेंट नेवल

एक्सरसाइजस के कारण उन्हें अभी चलना होगा
इनमें से एक ऑफिसर कुछ ही दिनों में वापस
भारत भी लौटने वाला था लेकिन जब ये

ऑफिसर्स इस कॉल को रिस्पॉन्ड करने के बाद
पहुंचे तो भाई उन्हें जो है अरेस्ट कर
लिया जाता है और सभी को एक दूसरे से अलग
लिए एक सिक्योर जेल में बंद कर दिया गया
ना ही इनकी फैमिली और ना ही इंडियन एंबेसी

को इस अरेस्ट के बारे में कोई जानकारी दी
गई अगले एक महीने तक इनके बारे में कोई
खबर नहीं आई सबसे पहले यह खबर दुनिया के
सामने तब आई जब एक पाकिस्तानी न्यूज़
एजेंसी ने यह खबर ब्रेक की कि कतर के अंदर

जासूसी के इल्जाम में आठ नेवी ऑफिसर्स को
अरेस्ट कर लिया गया है इन नेवी ऑफिसर पर
शक का एक रीजन यह भी था कि भारत का इजराइल

की तरफ हमेशा से झुकाव देख देखने को मिलता
है इस झुकाव का कतर के साथ डिप्लोमेटिक
रिलेशंस पर असर पड़ा इससे पहले नुपुर
शर्मा कंट्रोवर्सी ने भी दोनों के बीच में
दरार पैदा कर दी थी तब बाकी अरब देशों की

तरह कतर भी भारत के खिलाफ खड़ा था खैर
एक्स इंडियन नेवी ऑफिसर्स की रिहाई भारत
की बहुत मेजर डिप्लोमेटिक विक्ट्री मानी
जा रही है कतर ने ना सिर्फ ऑफिसर्स की
फांसी रोकी बल्कि उन्हें रिहा भी कर दिया

इसको लेकर आपका क्या कहना है कमेंट जरूर
करें

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