कैसे आप बन सकते हैं एक Treasure Hunter? | What Will Happen If You Discover Treasure ? - instathreads

कैसे आप बन सकते हैं एक Treasure Hunter? | What Will Happen If You Discover Treasure ?

1990 में ब्लैक हिल्स इंस्टिट्यूट ऑफ
जियोलॉजिकल रिसर्च का क्रू फॉसिल्स की खोज
में था अमेरिका के साउथ डकोटा में महीनों
तक उन्हें एडमंट सोरस नाम के डायनासोर्स
के कई फॉसिल्स मिले लेकिन वापस लौटते समय

उनके ट्रक का टायर पंक्चर हो जाता है अब
जब उन्होंने अपना स्पेयर टायर निकाला तो
वो भी पंक्चर्ड था शायद उन्होंने भी उस
वक्त से सोचा होगा कि उनकी किस्मत कितनी
खराब है लेकिन उन्हें नहीं पता था कि जल्द

ही उनके हाथ करोड़ों का खजाना लगने वाला
है जी हां और ऐसे ही इन्हीं की तरह आज
मॉडर्न ट्रेजर हंटर्स की जिंदगी कई बार एक
दिन में तब्दील हो जाती है लेकिन यह
बिजनेस इतना आसान भी नहीं है जितना दिखता
है फिल्मों में दिखाए गए सीन से अलग ये

लोग एक अलग ही जिंदगी जीते हैं कभी खाली
मैदानों में कभी जंगलों में तो कभी
समुंद्र में हजारों फीट नीचे आखिर कैसे
काम करती है मॉडर्न ट्रेजर हंटिंग

इंडस्ट्री और इसमें करियर बनाने वाले किन
प्रॉब्लम्स का सामना करते हैं आइए जानने
की कोशिश करते हैं आज के इस वीडियो में
देखिए ट्रेज र हंटिंग का करियर एक रिस्की
करियर तो है इसलिए नहीं कि महीनों और

सालों की मेहनत के बाद उनके हाथ कुछ ना
लगने की आशंका बनी रहती है बल्कि इसलिए
क्योंकि खजाना मिलने के बाद उसका क्या
होगा और उस पर उनका अधिकार क्या है इस बात
को लेकर हमेशा ही एक सवाल खड़ा रहता है
ब्लैक हिल्स इंस्टिट्यूट के जिस क्रू की

हमने शुरुआत में बात की उनकी कहानी से यह
बात और भी क्लियर हो जाती है महीनों तक यह
लोग एडमंट सोरस के फॉसिल्स ढूंढते रहे जो
कि एक कॉमन डायनासोर है लेकिन जब टायर
पंक्चर होने के कारण क्रू को पास के एक
टाउन में जाना पड़ा तो पीछे वह ग्रुप की

एक मेंबर शू हेड्रिक सन को छोड़ गए थे
वक्त बिताने के लिए शू ने एक बार फिर वहां
पर खुदाई करनी शुरू कर दी जल्द ही उसे एक
और डायनासोर बोन का पीस मिला जब यह क्रू
कार के साथ वापस लौटे तो उन्होंने इस नई

फाइंडिंग को देखकर एक बार फिर काम करना
शुरू कर दिया अगले 17 दिनों तक वह लोग
यहां से इस डायनासोर को बाहर निकालते रहे
और हर गुजरते दिन के साथ उन्हें समझ आ रहा
था कि उनके हाथ खजाना लग गया है अब यह कोई
आम डायनासोर नहीं था बल्कि एक टीरेक्स था

टीरेक्स स्केलेटन कितने रेयर हैं इस बात
का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि आज भी
सिर्फ 2 32 टीरेक्स स्केलेटन ही डिस्कवर
किए गए हैं आखिरी दिन पर क्रू लीडर पीटर
लैडसन ने इस लैंड के ओनर मोनिस विलियम को

यह स्केलेटन दिखाया और इसके बदले $55000
पे करने की पेशकश की खैर मॉरिस ने ऑफर
एक्सेप्ट कर लिया और क्रू इसे लेकर वापस
लौट गया इस डायनासोर का नाम भी उन्होंने
सू रख दिया इसे लेकर उन्होंने हिल सिटी
म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में डिस्प्ले

के लिए लगा दिया था और अगले 2 सालों तक
लोग इसे देखने के लिए म्यूजियम में आते
रहे लेकिन एक दिन अचानक एक अनचाहे मेहमान
ने दस्तक दी इस टीरेक्स की खबर सुनकर
म्यूजियम में एफबीआई एजेंट्स और नेशनल

गार्ड भी पहुंच गए उन्होंने क्रू को बताया
कि जिस जगह से उन्होंने यह फॉसिल निकाला
है वह जमीन शायन रिवर इंडियन रिजर्वेशन का
पार्ट है यह एरिया एक प्रिजर्व लैंड का
हिस्सा था जो कि नेटिव अमेरिकन जिन्हें

वहां पर इंडियंस भी कहा जाता है उनकी
ट्राइब्स के लिए रिजर्व खी गई थी मॉरिस
विलियम भी इसी ट्राइब का मेंबर था लेकिन
टेक्निकली वह इस जमीन का मालिक नहीं था यह
जमीन फेडरल गवर्नमेंट की थी इसलिए उन्हें
यह फॉसिल बेचने से पहले मॉरिस विलियम को

अपनी ट्राइब के अलावा ब्यूरो ऑफ इंडियन
अफेयर से भी परमिशन लेनी थी जो नहीं ली गई
खैर एफबीआई ने फॉसिल उनसे ले लिए और इसके
बाद कोर्ट में चली एक लंबे केस के बाद जज
ने यह फॉसिल सरकार को दे दिया यह पूरा
स्केलेटन आखिरकार सरकार ने ऑक्शन कर दिया

जिसमें 7.6 मिलियन डॉलर्स के बिड सबसे
हाईएस्ट थी यही ट्रेजर हंटर्स के लिए सबसे
बड़ी प्रॉब्लम है कि यह कैसे डिटरमाइंड
किया जाए कि भाई आखिर जो उन्हें मिला है
वह किसे बिलोंग करता है अमेरिका जैसे देश
में तो फिर भी इसे लेकर लॉज काफी क्लियर

हैं लेकिन दुनिया के बाकी देशों में इसकी
लीगलिटी और भी ज्यादा क्वेश्चनेबल है
लेकिन मॉडर्न ट्रेजर हंटर्स जमीन के ऊपर
नहीं बल्कि समुद्र के नीचे इन खजानो को
ढूंढते हैं सदियों से कई सारी खजाने से

भरी हुई शिप्स पानी के नीचे दफन हैं कोई
नहीं जानता कि इनका का टोटल नंबर क्या है
लेकिन यूनेस्को के अनुमान के हिसाब से ऐसी
करीब 30 लाख शिप्स समुद्र के नीचे दफन है

इन डूबे हुए शिप रेक्स के अंदर से कई तरह
से वैल्युएबल चीजें खोजी जा सकती हैं सबसे
पहले तो शिप से निकलने वाला स्क्रैप बेचा
जा सकता है इसके अलावा शिप के अंदर कई
हिस्टोरिकल आइटम्स हो सकते हैं जैसे कि

कोई कंपास या फिर किसी तरह का कोई टूल जो
म्यूजियम्स और एंटीक कलेक्टर्स के लिए
वैल्युएबल हो सकता है और आखिर में शिप के
साथ डूबा हुआ सोना भी कभी-कभी मिल जाता है
यही वजह दोस्तों कि मॉडर्न ट्रेजर हंटर्स

आम ड्राइवर्स नहीं होते जो कि बस इस खजाने
को ढूंढने निकल पड़ते हैं बल्कि खजाना
ढूंढने के लिए इन्वेस्टमेंट्स रेज की जाती
हैं क्रू और मशीन हायर की जाती हैं और
उसके बाद भी कोई गारंटी नहीं है कि भाई

आपको वह खजाना रखने का अधिकार मिल ही
जाएगा 1986 में ऐसा ही एक इंसीडेंट हुआ था
जब टॉमी थॉमसन नाम के एक इंजीनियर ने एसएस
सेंट्रल अमेरिका नाम की एक शिप को खोज
निकाला था समुद्र तल से 7000 फीट नीचे दबी

इस शिप के अंदर अंदर करोड़ों का सोना और
चांदी दबा हुआ था इसे ढूंढने और बाहर
निकालने के लिए टॉमी ने 160 इन्वेस्टर से
करीब 12 मिलियन डॉलर्स रेज किए और आखिर
में जब वह कामयाब हो गया था तो उसके ऊपर

39 अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनीज ने केस कर
दिया शिप के अंदर 3 टन सोना पाया गया था
130 साल पहले डूबी इस शिप को लेकर अगले 10
साल तक एक ओनरशिप बैटल चली थी जिसमें
आखिरकार कोर्ट ने टॉमी को 92 पर हिस्सा

देने का फैसला सुनाया अब अपनी
इन्वेस्टमेंट को वापस पाने के लिए इन
इन्वेस्टर्स ने 12 साल वेट किया था लेकिन
इसके बाद टॉमी यह पैसा लेकर फरार हो गया
ट्रेजर हंटिंग में और भी कई तरह के केसेस

सामने आते हैं 2007 में ओडिसी मरीन
एक्सप्लोरेशन नाम की ट्रेजर हंटिंग कंपनी
ने पोर्तु के पास 500 मिलियन डॉलर्स के
खजाने से भरी एक शिप खोज निकाली थी इस
खजाने को लेकर वह वहां से वापस अमेरिका

चले गए जहां उन्होंने इसे फ्लोरिडा के एक
वेयर हाउस में रख दिया इसका पता चलते ही
स्पेनिश गवर्नमेंट ने उनके ऊपर केस कर
दिया स्प स्पेनिश गवर्नमेंट का यह क्लेम
था कि भाई जिस शिप से उन्हें ट्रेजर मिला

था वो एक स्पेनिश शिप थी जिसे अंग्रेजों
ने 1804 में डुबा दिया था इसके बाद यह केस
यूएस के फेडरल कोर्ट में चला जहां पर आखिर
में स्पेनिश गवर्नमेंट की जीत हुई और यह
पूरा का पूरा खजाना स्पेन भेज दिया गया यह
सब तब था जब सालों की मेहनत और लाखों

डॉलर्स लगाने के बाद ओडेसी ने किसी तरह इस
शिप को पहले ढूंढा और फिर खजाने को हजारों
फीट की गहराई से वापस बाहर निकाला सिर्फ
इतना ही नहीं यह खजाना खो देने के बाद
उन्हें स्पेनिश गवर्नमेंट को $ लाख डॉलर
फाइन भी देना पड़ा इसलिए ट्रेजर हंटिंग के

अराउंड लॉज डिफाइन होने के बावजूद भी बहुत
कंफ्यूजन रहती है जैसे कि इंटरनेशनल लॉ की
बात की जाए तो अगर ऐसी कोई शिप किसी को
मिलती है तो वो खजाना ढूंढने वाले का ही
होता है लेकिन अगर उस शिप पर कोई सरकार
अपना क्लेम कर दे तब फैसला उन्हीं के हक

में जाता है अगर किसी डूबी हुई शिप में
वेपंस मिलते हैं जैसे कि कोई बड़ी तोप तो
फिर तो वो वहां तो लॉ और भी ज्यादा क्लियर
है कि यह पूरी शिप उस देश को ही बिलोंग
करती है यही वजह है दोस्तों कि चीन

मंगोलिया अर्जेंटीना और कैनेडा की धरती भी
डायनासोर से भरी हुई है लेकिन सबसे ज्यादा
डायनासोर फॉसिल्स अमेरिका में ही पाए जाते
हैं क्योंकि अमेरिका में लॉ क्लियर है कि
जो उस प्रॉपर्टी को ओन करता है भैया उसे

उन फॉसिल्स को बेचने का पूरा अधिकार है
इसी वजह से वहां एक ट्रेजर हंटिंग
इंडस्ट्री है जबकि बाकी देशों में ऐसा
नहीं है यहीं से अब एक डिबेट भी शुरू हो
जाती है जो लोग अकडम से बिलंग करते हैं वो

चाहते हैं कि इस तरह की किसी भी डिस्कवरी
को बिकने से पूरी तरह बैन कर दिया जाए
ताकि यह म्यूजियम्स में रखे जा सके और
उन्हें स्टडी किया जा सके दूसरी तरफ
ट्रेजर हंटर्स का यह आर्गुमेंट भी है कि

अगर ऐसा कर दिया गया तो कोई भी इन
ट्रेजर्स को ढूंढने में अपना समय क्यों
बर्बाद करेगा भाई जहां एक वक्त के लिए
डायनासोर बोनस के लिए हम फिर भी यह
आर्गुमेंट देख सकते हैं कि वो तो
एक्सीडेंटली भी मिल सकती है लेकिन समुंद्र

के नीचे दबी हुई शिप्स एक्सीडेंटली
डिस्कवर नहीं की जा सकती इसके लिए हंटर को
पहले से पता होना चाहिए कि वह किस शिप को
ढूंढने निकले हैं उसकी हिस्ट्री है क्या
और वह किस रीजन में डुबाए गई थी इसके बाद
उसकी एक्सट्रैक्शन में भी लाखों डॉलर्स
खर्च होते हैं कोई भी यूनिवर्सिटी किसी

रिसर्च स्टूडेंट या क्रू को इतना पैसा कभी
नहीं देगी कि वो रिस्क लेकर इस तरह की
किसी शिप को ढूंढने निकले इसके साथ-साथ
किसी भी देश की सरकार भी एक्टिवली ऐसे
ट्रेजर्स को अपने समंदर के नीचे नहीं
ढूंढती है अगर इन्हें डिस्कवर किया जाना

है तो उसके लिए ढूंढने वाले को पर्याप्त
ना देना भी जरूरी है ट्रेजर हंटिंग को
लेकर धीरे-धीरे हाल के सालों में
एक्सेप्टेंस भी बढी है कुछ सरकारों ने यह
माना है कि ट्रेजर हंटर्स के साथ लीगल
बैटल लड़ने से अच्छा है कि उन्हें इनकरेज

किया जाए और एक डील कर ली जाए जिस समय
ओडिसी और स्पेनिश गवर्नमेंट आपस में उस
स्पैनिश शिप के लिए कोर्ट में लड़ रहे थे
उसी समय ओडिसी ब्रिटिश सरकार के साथ एक
ऑफिशियल प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही थी

यूके की एक शिप दूसरे विश्व युद्ध के
दौरान 1941 में एक जर्मन यू बोर्ट ने डुबो
दी थी इस शिप के अंदर करीब 100 टन से
ज्यादा चांदी दबी हुई थी गियर सोपा नाम की
इस शिप को ढूंढने के लिए यूके गवर्नमेंट

ने एक ऑफिशियल टेंडर निकाला था जो कि
ओडेसी ने जीत लिया इसके बाद यूके
गवर्नमेंट और ओडिसी के बीच में एक समझौता
हो गया जिसमें उन्होंने 80 पर प्रेशर रखने
की परमिशन दे दी गई अब ओडेसी ने अब
ऑफिशियल सरकार की परमिशन लेकर इस शिप को
ढूंढना शुरू कर दिया इसके लिए उन्होंने

एडवांस सोनर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया
था और फाइनली 2011 में उन्हें सफलता भी
मिली इस शिप के अंदर उन्हें फाइनली 110 टन
सोना मिला जिसका शेयर सरकार और ओडिसी ने
आपस में बांट लिया इतना ही नहीं इस शिप
में 717 लेटर्स का एक कलेक्शन भी मिला था

जो कि इतने सालों बाद भी सही सलामत थी इन
लेटर्स को भी उन्होंने यूके के पोस्टल
म्यूजियम को दे दिया जहां यह आज भी
डिस्प्ले पर है अब यह स्टोरी दिखाती है कि
किस तरह हिस्ट्री और कैपिट ज्म साथ मिलकर

भी काम कर सकता है दोस्तों ओडिसी ने इसके
बाद कई सरकारों के साथ मिलकर ऐसे ही कई
ट्रेजर रिकवर किए हैं 2014 में उन्हें
एसएस सेंट्रल अमेरिका नाम की एक ऐसी ही
शिप मिली जिसका ओरिजिनल नेम एसएस जॉर्ज लॉ
था यहां से उन्होंने 15500 गोल्ड और
सिल्वर कॉइंस के अलावा 45 गोल्ड इट्स और

सैकड़ों गोल्ड नगेट्स भी रिकवर किए लेकिन
कुछ सरकारें हैं जो अभी भी इस तरह की
डील्स के सख्त खिलाफ है कई बार यह भी
प्रॉब्लम रहती है कि एक ही शिप को कई सारे
देश क्लेम करने लगते हैं जिसकी वजह से

डायरेक्टली एक सरकार के साथ डील करना भी
मुश्किल हो जाता है ऐसा ही एक केस
कोलंबिया सरकार का है 2015 से ही कोलंबिया
सरकार पर अगले कदम पर मॉडर्न ट्रेजर
हंटर्स की नजर है क्योंकि यहां पर एसएस सन
जोस नाम की एक स्पेनिश शिप पाई गई है जो

कि एक ब्रिटिश शिप द्वारा डुबा दी गई थी
कुछ एस्टिमेशन के मुताबिक इस शिप के अंदर
20 बिलियन डॉलर का खजाना छिपा हुआ है
जिसमें गोल्ड और सिल्वर के अलावा कई सारे
प्रेशियस स्टोंस भी मौजूद हैं कोलंबिया
सरकार इस ट्रेजर को बाहर निकालना चाहती है

लेकिन उनके पास इतनी एक्सपर्टीज नहीं है
कि वो इसे डैमेज किए बगैर निकाल सके
उन्होंने एक बार ये डिसाइड भी किया था कि
वो किसी कंपनी को हायर करके उनके साथ
प्रॉफिट शेयरिंग के डील कर लेंगे लेकिन इस
शिप पर एक बार फिर स्पेन और साथ ही

सेंट्रल अमेरिका की कुछ दूसरी कंट्रीज ने
भी अपना दावा ठोक दिया अब ना तो इनमें से
कोई भी सरकार खुद इस शिप रेक को रिकवर कर
रही है और ना ही किसी ट्रेजर हंटिंग कंपनी
को इसकी परमिशन मिल पा रही है इसी बीच में
यूनेस्को ने भी धीरे-धीरे इस तरह के

मैटर्स में टांग गड़नी शुरू कर दी है
यूनेस्को में बैठे लोग चाहते हैं कि भाई
डूबी गई कि शिप को ना छोड़ा जाए ताकि
उन्हें उनकी हिस्टोरिकल वैल्यू के लिए
प्रिजर्व करके रखा जा सके लेकिन प्रॉब्लम
यहां पर यह है साहब कि अगर ये शिप्स

समंद्र के हजारों फीट नीचे दफन रहेंगी तो
इन्हें ना ही कोई देख सकता है और ना ही
कोई स्टडी कर सकता है ऐसे में अगर इन्हें
प्रिजर्व करके रखा भी जाए तो इससे क्या
हासिल होगा क्या आपको पता है कि भारत में

ट्रेजर को लेकर क्या लॉज हैं देखिए भारत
में अगर ₹10 से ऊपर की कोई भी वैल्यू आइटम
या पैसा आपको मिलता है तो उसे इंडियन
ट्रेजर ट्रोव एक्ट
[संगीत]
उन्हें सिविल कोर्ट में यह मैटर सॉल्व
करने का मौका दिया जाता है अगर कोई भी इसे

क्लेम नहीं करता है तो इसे ओनर लेस
डिक्लेयर कर दिया जाता है जिस केस में यह
ट्रेजर ढूंढने वाले का ही हो जाता है अगर
कोई पार्टी सेे क्लेम कर ले तो ढूंढने
वाले व्यक्ति और क्लेम करने वाली पार्टी

के बीच में इसे डिवाइड किया जाता है लेकिन
अगर एक से ज्यादा लोग इसे क्लेम करते हैं
तो उन्हें सिविल कोर्ट में इस क्लेम के
लिए पूरी बैटल लड़नी पड़ती है और आखिर में
जज द्वारा फैसला किए जाने के बाद ही

कलेक्टर इस प्रेशर को डिवाइड करता है
लेकिन इस केस में ढूंढने वाले को हमेशा
कुछ ना कुछ शेयर जरूर मिल जाता है अब यह
लॉ हर उस आइटम या करेंसी पर भी अप्लाई
होता है जो अभी 100 साल से पुरानी नहीं
हुई है जिसकी वैल्यू ₹10 से ज्यादा है अगर
कोई आइटम 100 साल से ज्यादा पुरानी है तो

फिर उसके लिए द एंटीक्स एंड आर् ट्रेजर
एक्ट 1972 को इस्तेमाल किया जाता है इस
आइटम को एक एंटीक डिक्लेयर कर दिया जाता
है अब कौन सी आइटम्स इस एंटीक आइटम की
कैटेगरी में आती हैं उसके लिए भी इस लॉ को

डिफाइन किया गया है इसमें कोई भी पुराने
कॉइन मूर्तियां पेंटिंग्स एपीग्राफ या फिर
आर्ट पीस को एंटीक डिफाइन किया गया है
इसके अलावा किसी बिल्डिंग या केव से
निकाली गई आइटम या फिर ऐसी कोई भी आइटम जो
हिस्टोरिकल इंटरेस्ट की हो या वैसी कोई
मैनु स्क्रिप्ट जिसमें कोई हिस्टोरिकल

रिकॉर्ड दर्ज हो वोह भी एंटीक घोषित किया
जा सकता है मैन स्क्रिप्ट के केस में कोई
भी 75 साल से पुरानी आइटम को एंटीक
डिक्लेयर किया जा सकता है अगर आपको किसी
आइटम की एज नहीं पता है तो उसे रजिस्टर

करवाने से पहले आपको एक एक्सपर्ट से उसकी
एज वेरी फाई करवाकर एक स्पेसिफिक
सर्टिफिकेट लेना होगा जिसके बाद आप उसे
रजिस्टर करवा सकते हैं अब इस तरह की आइटम
मिलने पर आपको इसे रजिस्टर करवाना होता है

जिसके बाद आप इसे बेच भी सकते हैं हालांकि
इसे किसी दूसरे देश में एक्सपोर्ट नहीं
किया जा सकता है जी हां एंटीक्स को
एक्सपोर्ट करने का राइट सिर्फ सेंट्रल
गवर्नमेंट के ही पास है खैर आपको क्या

लगता है कि क्या यह लॉ फेयर है या फिर
इसमें भी चेंजेज की जरूरत है…

Leave a Comment