कैसे आया गुजरातियों और मारवाड़ियों के पास इतना पैसा ? | Secrets of Gujarati and Marwari Success - instathreads

कैसे आया गुजरातियों और मारवाड़ियों के पास इतना पैसा ? | Secrets of Gujarati and Marwari Success

अगर आप अपने सपने पूरे नहीं करोगे तो कोई
और आपको नौकरी पर रखकर अपने सपने पूरे कर
लेगा यह बात धीरू भाई अंबानी ने बोली थी
जो मिट्टी से भी पैसा कमाना जानते थी

लेकिन ऐसा लगता है मानो उनकी यह कला बाकी
गुजरातियों के खून में भी उतर गई और यही
असर मारवाड़ यों में भी दिखा लेकिन कैसे
जरा एक नजर इस लिस्ट पर डालिए मुकेश

अंबानी गौतम अडानी अजीम प्रेम जी कर्स भाई
पटेल पंकज पटेल उदय कोटक लक्ष्मी मित्तल
दीपेंद्र गोयल और आदित्य बिरला यह वो लोग
हैं उन्होंने अपने दम पर जीरो से हीरो तक

का सफर तय किया है और बड़ी बात यह है कि
यह सारे लोग या तो गुजराती हैं या
मारवाड़ी यहां तक कि हमारे भारत के टॉप 10
बिलियनर्स में से पांच गुजराती कम्युनिटी

से ही हैं यानी देश के 50 प्र बिलियनर्स
एक स्टेट से आते हैं और बाकी 50 दूसरी
जगहों से लेकिन ये सब लोग करते कैसे हैं
आखिर भगवान ने इन्हें कौन सा गुरु मंत्र

देकर भेजा है जो पैसा इनके पास खींचा चला
आता है अब इसमें भगवान का कितना बड़ा हाथ
है यह तो समझना थोड़ा मुश्किल है लेकिन
हां इस करामात में में इनका कितना रोल है

वो हम समझ लेते हैं देखिए गुजरातियों के
बारे में एक कहावत है कि मारवाड़ी से
सामान खरीदकर और सिंधी को बेचकर भी जो
मुनाफा कमा ले वही असली गुजराती है लेकिन

इनमें यह कला आती कहां से है यह जानने से
पहले हम थोड़ा गुजरात के बारे में भी जान
लेते हैं जो वेस्टर्न भारत में समुद्र
किनारे पर बसा है गुजरात के पास 1600 किमी

का पोर्ट एरिया है जहां से बहुत बड़े लेवल
पर इंटरनेशनल ट्रेड होता है यही वजह है कि
भारत का 25 पर इंपोर्ट अकेला गुजरात ही
करता है हालांकि भारत में गुजरातियों की

आबादी महज 5 पर है लेकिन अकेले इन 5 पर के
पास देश की 50 वेल्थ है इसको थोड़ा आसान
भाषा में समझे तो भारत में कुल 169
बिलियनर्स हैं जिसमें से 86 गुजराती हैं

यानी लगभग हर दो में से एक बिलियने
गुजराती ही है 2022 में आ एक रिपोर्ट के
अकॉर्डिंग 86 रिचेस्ट गुजराती की टोटल
वेल्थ 15800 करोड़ से भी ज्यादा की है यह

नंबर इतना बड़ा है कि इससे 140 करोड़
लोगों यानी कि हर इंडियन के बैंक अकाउंट
में हम ₹1000000 ट्रांसफर कर सकते हैं
इसके बावजूद भी आपके पास
₹2500000 सिटीजन की एवरेज इनकम से अब आप

लोग सोच रहे होंगे कि यह बड़े बिजनेसमैन
है हर कॉमन मैन वहां पर ऐसा थोड़ी होगा तो
जरा इस बच्चे की क्लिप को देखिए कितने साल
का है भाई 12 साल का कुर्सी पर खड़े हो
भाई मेरा नाम तिलक सोजत रा है हां तो मेरे

पापा है ना एलआईसी के एजेंट है तो मैंने
सोचा कि तिलक मेहता कर सकता है तो तिलक
सोजित्र कै कैसे नहीं कर सकता प्रीमियम
इठका करना चालू कर दिया चार पॉलिसी बेच ली
और उसमें से ₹ लाख जितना 0000 जितना मैंने

अर्न किया है तो मैं ये क्वेश्चन है कि
अभी वो 2 लाख को मैं दो करोड़ कैसे करूं
अच्छा क्या आपको पता है कि मारवाड़ी कास्ट
अंग्रेज जब भारत आए थे उससे पहले तक नहीं

थी यानी 6 अगस्त 1608 तक मारवाड़ यों का
नामो निशान तक नहीं था या यूं कहे कि उस
वक्त उन्हें कोई नहीं जानता था मारवाड़ी

उन व्यापारियों को बोला जाता था जो लोकल
कम्युनिटीज को ढकते थे और जो पुराने वर्ना
सिस्टम यानी कास्ट सिस्टम था उसके
अकॉर्डिंग व्यापारी वैश्य वर्णा में आते

थे क्योंकि तब जात उनके नाम से नहीं बल्कि
काम से जानी जाती थी बड़ी बात यह थी कि
मारवाड़ीस के वैश्य होने के बावजूद भी ये
177th सेंचुरी में मुगलों के बैंकर्स और

फाइनेंसर्स बन के रहे और 19th सेंचुरी
आते-आते यह लोग हुंडी सिस्टम का यूज़ करने
लगे जो एक तरह का बिल ऑफ एक्सचेंज था यानी
यह लोग जिस किसी के भी साथ खरीदी बिक्री

करते थे यह उसे पैसे देने की बजाय एक
पर्ची लिखकर थमा देते हैं जिसे उस इंसान
को पर्ची में लिखे व्यक्ति तक लेकर जाना

होता था और व इंसान उसे पैसे दे देता था
सेम ऐसे ही जैसे आज हम बैंक में किसी और
का चेक डालते हैं और बैंक हमें चेक लिखा
हुआ अमाउंट दे देता है इस सिस्टम के जरिए

कानपुर का व्यापारी कोलकाता के व्यापारी
से व्यापार करता था बिना किसी कैश और बिना
डर और बिना गड़बड़ के हालांकि ये लोग
वर्ल्ड वॉर व तक इंडिया का ज्यादातर वो

ट्रेड संभाल रहे थे जो इंग्लैंड से होता
था लेकिन वॉर के बाद उन्होंने अपना ध्यान
इंडस्ट्रीज की तरफ मोड़ लिया वहीं 1970 तक
इंडिया के ज्यादातर प्राइवेट इंडस्ट्रियल

एसेट्स को कंट्रोल करने लगे और साथ 2011
में इंडियन फॉबस लिस्ट के बिलियनर्स में
से 14/4 मारवाड़ी ही थे लेकिन इनके असली
हुनर की पहचान तो आपको यह जानकार होगी कि

गुजराती और मारवाड़ी आज से नहीं बल्कि एंस
टाइम से ही धंधे के मामले में सबसे आगे
हैं और इस बात का पता दुनिया को 1954 से
1963 के बीच एसआर राव की डिस्कवरी से चला
जिन्होंने गुजरात में इंडस वैली

सिविलाइजेशन के लोथल पोर्ट को ढूंढ निकाला
था यह इंडस वैली सिविलाइजेशन का इकलौता
पोर्ट वाला शहर था यानी यहां लोग के
सिविलाइजेशन के बसने के बाद से ही व्यापार

कर रहे थे इनके इसी पुराने इतिहास का
रिजल्ट है कि आज बिजनेस गुजराती और
मारवाड़ यों के खून में बस चुका है लेकिन
अगर आप गुजराती और मारवाड़ी नहीं है तो भी
चिंता करने की बात नहीं है आज की वीडियो

इस टॉपिक पर भी है कि गुजराती और मारवाड़ी
में ऐसा क्या है जो बाकियों में नहीं है
अगर आप भी उनके सीक्रेट टूल्स के जरिए
बिलियनर्स या मिलियनर्स बनना चाहते हैं तो

चलिए जानते हैं देखिए इनका पहला सीक्रेट
है नो जॉब ओनली बिजनेस चाहे छोटे से छोटा
ही क्यों ना हो उनका यह मानना है कि किसी
की जॉब करने से अच्छा है अपना बिजनेस कर

लो उन्हें एक छोटी चाय की टपरी डालना भी
एक मिड लेवल जॉब से बेटर लगती है क्योंकि
उनके लिए जीवन का असल सच धीरू भाई अंबानी
के द्वारा बोली गई वह बात ही है कि आप

अपने सपनों को पूरा नहीं करोगे तो कोई
अपने सपने पूरे करने के लिए आपको नौकरी पर
रख लेगा और इसका सबसे बेहतरीन एग्जांपल
हमारे देश के प्रधानमंत्री ही हैं
जिन्होंने शुरुआत चाय की टपरी से ही की थी

लेकिन आज पूरे इंडिया की बागडोर उनके हाथ
में है धीरूभाई अंबानी खुद भी अपनी बात को
फॉलो करते थे तभी तो महज ₹5000000
ये यूं ही बिजनेस के पीछे नहीं भागते थे

गुजराती में एक कहावत काफी पॉपुलर है कि
किसी भी बिजनेस को सक्सेसफुल होने में 3
साल यानी 1000 दिन जरूर लगते हैं इसलिए ये
लोग अपने हर स्टार्टअप को 1000 दिन देते
हैं एड़ी चोटी तक का जोर लगाने के बाद भी

अगर यह फेल हो जाते तो 1000 दिनों के बाद
यह फिर धंधा चेंज करते हैं अब बारी आती है
इनके दूसरे सीक्रेट की जो है लॉन्ग टर्म
बिजनेस प्लानिंग विद फास्ट कैश ये लोग ऐसा
बिजनेस करना पसंद करते हैं जो लॉन्ग टर्म

चलने वाला हो और पैसा फटाफट इनके गल्ले
में गिरता रहे आप देख सकते हैं कि इनके
सारे बिजनेस लॉन्ग टर्म हैं जैसे डी मार्
हो गया या कोई टेलीकॉम कंपनी सीधे-सीधे
बोलें तो डेली लाइफ में यूज़ होने वाली

चीजों का धंधा पानी इनके बीच काफी पॉपुलर
होता है जैसे कपड़े चप्पल राशन पानी पाउडर
क्रीम की दुकान अब इन सब आइडिया से आपको
अंदाजा लग जाएगा कि आज पूरे भारत में यूज

होने वाला 1/4 यानी 25 पर दूध गुजरात से
ही आता है वहीं टेक्सटाइल के सेक्टर में
तो भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में
गुजरात का दबदबा है माना जाता है कि आने

वाले समय में गुजरात टेक्सटाइल के मामले
में पूरी दुनिया में सबसे आगे होगा गुजरात
की इकॉनमी मोस्ट प्रॉफिटेबल इकॉनमी है इस
बात का अंदाजा आप यहीं से लगा सकते हैं कि

अगर गुजरात एक स्टेट ना होकर एक देश होता
तो चीन और साउथ कोरिया के बाद गुजरात
दुनिया की तीसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली
इकॉनमी होती और यह सब सीखने के लिए

गुजराती किसी स्कूल या कॉलेज में नहीं
जाते बल्कि इसके लिए सीक्रेट नंबर थ्री
यूज होता है यानी अर्ली ट्रेनिंग फॉर
बिजनेस यानी गुजराती और मारवाड़ी खुद तो

सक्सेस हासिल करते ही हैं साथ ही अपने
बच्चों को भी बचपन से ही बिजनेस में लगा
देते हैं ताकि पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें

बिजनेस की ए बी सीडी भी अच्छे से याद हो
जाए उनकी यही सीख उनके बच्चों के कितने
काम आती है यह तो आप बिरला ग्रुप के हीते
बीके बिरला को ही देखकर पता लगा सकते हैं

दरअसल एक दिन डी बिरला ने अपने 13 साल के
बेटे यानी बीके बिरला को अपने पास बुलाया
और उसके हाथ में कुछ पैसे थमा दिए कहा कि
आज से तुझे अपने खर्चे का इंतजाम खुद ही

करना है हमसे कोई उम्मीद मत रखना अब उसकी
जगह कोई और बच्चा होता तो अपने पिता के
अगेंस्ट हो जाता लेकिन बीके बिरला ने ऐसा
नहीं किया उसने अपने पिता के पास काम करने
वाले स्टॉक ब्रोकर को बुलाया और फिर उसने

अपने पैसों को स्टॉक में कैसे इन्वेस्ट
करना है यह पूछा ऐसे में महज 13 साल की
उम्र में बीके बिडला ने अपनी पहली कमाई की
वो भी ₹ की यही नहीं 15 साल की उम्र में

उसने अपना खुद का बिजनेस खड़ा कर लिया 18
की एज में उसने अपनी लॉस मेकिंग कंपनी को
प्रॉफिट मेकिंग कंपनी बना दिया और पूरी
दुनिया में फेमस हो गया हालांकि यह लोग

अपने पिता के सिखाए लेसन के साथ-साथ अपनी
मेहनत स्किल्स और अपॉर्चुनिटी का भी फायदा
उठाना जानते हैं हालांकि इनकी स्किल्स को

डेवलप करने में इनके पिता यहां भी बहुत
बड़ा रोल प्ले करते हैं जो अपने बच्चे को
पैसे की सही वैल्यू कड़ी मेहनत और लग्न का
पाठ पढ़ाते हैं बिल्कुल वैसे ही जैसे
डायमंड मर्चेंट सावजी ढोलकिया अपने

एंप्लॉयज को सिखाते हैं सावजी जब एंप्लॉयज
की हायरिंग करते हैं तो पहले उन्हें 5 साल
की ट्रेनिंग दी जाती है इस दौरान अगर वह
सक्सेसफुल होते हैं तो उन्हें परमानेंट कर

दिया जाता है सावजी ने भी कुछ ऐसी ही
तालीम अपने 21 साल के बेटे द्रव्य को भी
दी थी और उसे यह सबक सिखाने के लिए या यूं
कहे की रोजी रोटी कमाने के लिए कोची भेज

दिया वहां उसे पैसे कमाने थे वो भी अपने
पिता का नाम यूज किए बिना द्रव्य ने कोची
में रेस्टोरेंट जूते के शोरूम और कॉल

सेंटर तक में काम किया जहां उसे ₹ 77000
सैलरी मिलती थी साहब जी ढोलकिया का मानना
था कि लाइफ के यह लेसंस किसी स्कूल या
कॉलेज में नहीं सिखाए जा सकते शायद यही

वजह है कि वोह लोग पैसे की वैल्यू समझते
हैं और जहां भी इन्हें पैसा कमाने का मौका
मिलता है ये वहां पहुंच जाते हैं देखिए
इनका पांचवां सीक्रेट रूल है स्ट्रांग
कम्युनिटी और फैमिली सपोर्ट पहले एक माइंड

ब्लोइंग डाटा देखिए यूएसए में 53000 के
आसपास होटल्स और मोटल हैं और इनमें से
22000 यानी 42 पर गुजरातियों के हैं यानी
हम इंडियंस के हैं ये लोग वहां पर 6 लाख

लोगों को एंप्लॉयमेंट देते हैं मतलब यूएस
इकॉनमी में 40 बिलियन डॉलर कंट्रीब्यूशन
गुजरातियों का ही है यूएस में होटल और

मोटेल बिजनेस साल 1942 में शुरू हुआ था जब
कांजी भाई मंचू देसाई गुजरात से न्यूयॉर्क
शिफ्ट हो गए थे न्यू अपॉर्चुनिटी के लिए
जहां उन्हें एक बहुत ही अमेजिंग डील मिली

अब हुआ यूं था कि 7 दिसंबर 1941 को पर्ल
हार्बर पर अटैक हुआ और जापान के फाइटर शिप
ने अमेरिका के नेवल बेसस पर करीब 1 घंटा
15 मिनट तक बमों की बारिश की ऐसे में

दोनों देश दुश्मन बनते चले गए जिसके बाद
अमेरिका में रह रहे जैपनीज को नजर बंद कर
दिया गया इस दौरान कांजी भाई ने एक डील की
जिसमें उन्हें 32 रूम्स का होटल 90 पर

डिस्काउंट पर मिल रहा था और उन्होंने यह
इन्वेस्टमेंट कर दी एक लोन लेकर कांजी भाई
को लगा कि इतने सस्ते में मोटल मिल रहा है
तो क्या क्या बुराई है अगर लोग वहां पर

नहीं भी आए तो कम से कम मेरी फैमिली वहां
पर रुक सकती है उसने सारे स्टाफ को निकाल
दिया जिनकी जगह सारे घर के लोग काम करने
लगे और वर्ल्ड वॉर ट खत्म होने के बाद जब
टूरिजम बढ़ा तो काफी लोग उनके होटल में

रहने लगे ऐसे में वोह एक-एक करके होटल और
मोटल्स खरीदते चले गए और उनका बिजनेस
एक्सपेंड होता चला गया वहीं 1940 में एक
और इंटरेस्टिंग चीज हुई दरअसल युगांडा के

प्रेसिडेंट ने सारे एशियंस को अपने देश से
निकाल दिया था सब लोग अपने-अपने देश जाने
लगे तब अमेरिका के के गुजरातियों ने वहां
के पटेल्स यानी गुजरातियों को इनवाइट किया
कि आप यहां पर आओ हम तुम्हारी मदद करेंगे

ऐसे में युगांडा में जितने भी गुजराती थे
उन्होंने अपनी प्रॉपर्टीज बेची और उसे
गोल्ड में कन्वर्ट किया और अमेरिका में
शिफ्ट हो गए यानी वो खुद भी आगे बढ़ते हैं

और दूसरों को भी बढ़ाते हैं यही वजह है कि
यूएस में भी गुजरातियों का बोल पारा है
खैर आज की वीडियो में दोस्तों फिलहाल बस
इतना ही उम्मीद है आपको गुजराती एंड
मारवाड़ी की सक्सेस का सीक्रेट समझ में आ

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