कैसे एक मज़दूर CM ने किया देश का सबसे बड़ा घोटाला? | How Did A CM Commit The Country's Biggest Scam? - instathreads

कैसे एक मज़दूर CM ने किया देश का सबसे बड़ा घोटाला? | How Did A CM Commit The Country’s Biggest Scam?

साल था 2007 झारखंड में कोल ब्लॉक की
नीलामी हुई और दबाकर घोटाला हुआ यह बात
जंगल में लगी आग की तरह फैल गई अब
इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को एक एविडेंस की
तलाश थी क्योंकि उस घोटाले के आरोप में

किसी को अरेस्ट करना था वो कोई साधारण
व्यक्ति नहीं था बल्कि वह खुद चीफ
मिनिस्टर था एविडेंस नहीं होने के कारण यह
लोग इस काम को नहीं कर पा रहे थे इनका यह
काम उस समय आसान हो गया जब रांची इनकम
टैक्स डिपार्टमेंट को एक अंजन व्यक्ति का
मेल आया लेकिन उस मेल पर किसी की भी नजर

नहीं गई और एक साल बीत गया फिर अचानक एक
दिन जब रांची इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने
मेल में मौजूद एविडेंस पर नजर डाली तो
उनके होश उड़ गए फिर क्या था राची से लेकर
दिल्ली तक टेलीफोन की घंटियां बजने लगी तो

एक से लेकर एक बड़े नेता और डिप्लोमेट्स
की सांसें फूल गई लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि
आखिर क्या था उस मेल में क्योंकि उस मेल
में शायद एक ऐसे बड़े राजनेता का नाम था

जिसकी कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से नहीं
है भैया एक ऐसे नेता जो कभी कोयले की खदान
में काम किया करते थे और फिर एमएलए बना और
फिर चीफ मिनिस्टर चीफ मिनिस्टर भी ऐसा कि
घोटाले के पैसे से साउथ अफ्रीका में गोल्ड

माइंस खरीद डाली लेकिन कैसे आईआईटी से पास
आउट एक हैकर ने घोटाले की पोल खोल दी
कहानी की शुरुआत करते हैं देखिए कहानी की
शुरुआत होती है झारखंड के जिले पश्चिम
सिंघ भूम के जगन्नाथपुर के आदिवासी बहुल
इलाके पाता हात गांव से जी हां यहां पर एक
र मजदूर के घर एक बच्चे का जन्म हुआ पिता

ने बड़े ही प्यार से इस बच्चे का नाम रखा
मधु कोड़ा पिता ने किसी तरह अपने बेटे को
पढ़ाया लिखाया सोचा कि इंस्पेक्टर तो बन
जाएगा तो जिंदगी आराम से कटेगी लेकिन उसकी
किस्मत में तो कुछ और ही लिखा था गरीबी के
कारण मधु कोडा की स्टार्टिंग लाइफ स्ट्रगल
से भरी हुई थी जिस कारण बड़े होने पर अपने

परिवार की फाइनेंशियल हेल्प करने के लिए
कोल माइंड्स में उन्होंने काम करना शुरू
कर दिया लेकिन वह जीवन भर मजदूर बनकर नहीं
रहना चाहता था एक अच्छी जिंदग जिंदगी जीना
चाहता था मन में एक नई ऊंचाई को छूने की
चाहत थी उन्होंने ना केवल अपने लिए बल्कि

अपने आसपास के लोगों के लिए भी बदलाव का
सपना देखा एक सपना जिसमें सभी ऐशो आराम हो
बदलाव की यही चाहत उसे खींच ले गई
पॉलिटिकल पार्टी एजेएसयू अर्थात ऑल झारखंड
स्टूडेंट्स यूनियन की ओर और फिर यहीं से
शुरू होती है उनकी पॉलिटिकल जर्नी

स्टूडेंट यूनियन से जुड़े मधु कोड़ा देखिए
एजेएसयू के कार्यकर्ता के रूप में काम
करते हुए मधु कोड़ा कांट्रैक्ट लेबर हो गए
और फिर कुछ समय बाद लेबर यूनियन के लीडर
बन गए काम करने के दौरान ही उनकी मुलाकात
बीजेपी के एक बड़े नेता बाबूलाल मरांडी से

होती है यहीं से कोडा को पॉलिटिकल
आइडेंटिटी मिली और फिर इन्होंने पीछे
मुड़कर कभी नहीं देखा एक्चुअली साल था
2000 का मार्च के महीने में बिहार में
असेंबली इलेक्शन हुए इस चुनाव में बीजेपी

ने एक कैंडिडेट के रूप में जगन्नाथपुर
असेंबली सीट से मधु कोड़ा को टिकट दे दिया
और पहली ही बार में मधु को डा एमएलए चुने
गए और असेंबली में एंट्री की बिहार में
हुए इलेक्शन के बाद मेजॉरिटी के साथ

राबड़ी देवी फिर से चीफ मिनिस्टर बनी वैसे
आपको बता दें कि बिहार से एक अलग राज्य के
रूप में झारखंड राज्य की मांग कई सालों से
चल रही थी अब इसकी मांग काफी तेज हो गई
उनकी मांग को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी

वाजपेई जी ने स्वीकार कर लिया साल 2000
तारीख थी 15 नवंबर बिहार स्टेट से अलग
होकर झारखंड स्टेट एक नया स्टेट बन गया और
भारत के 28 वें स्टेट के रूप में
एस्टेब्लिश हुआ अब बिहार से झारखंड स्टेट
के अलग होने के बाद बीजेपी के बाबूलाल

मरांडी इस स्टेट के चीफ मिनिस्टर बन गए इस
सरकार में मधु कोडा को पंचायती राज
मिनिस्टर बना दिया गया लेकिन आपसी मतभेद
के कारण साल 2003 में बाबूलाल मरांडी ने
अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही अपने

पद से रेजिग्नेशन दे दिया अब इस स्टेट के
नए चीफ मिनिस्टर बीजेपी के अर्जुन मोंडा
बने इस सरकार में भी मधु कोड़ा पंचायती
राज मिनिस्टर ही बने रहे साल 2005 में
झारखंड राज्य के असेंबली के 5 साल का समय
पूरा हो गया फिर इलेक्शन की घोषणा कर दी

गई इस बार असेंबली इलेक्शन में भाजपा ने
मधु कोड़ा को असेंबली का टिकट नहीं देने
का फैसला किया अब जब टिकट नहीं मिला तो
उन्होंने बगावत कर जगन्नाथपुर असेंबली सीट
से ही इंडिपेंडेंट इलेक्शन लड़ने का मन

बना लिया इस इलेक्शन में भी उन्हें सफलता
मिल गई अब वे इस जीत के साथ एक बार फिर से
एमएलए बन जाते हैं जी हां दोस्तों इस
असेंबली इलेक्शन में किसी भी पार्टी को
कंप्लीट मेजॉरिटी नहीं मिली लेकिन एक बार

फिर से बीजेपी के ही अर्जुन मुंडा ने
गवर्नर के सामने गवर्नमेंट बनाने के लिए
अपना दावा पेश किया इस गवर्नमेंट को मधु
कोडा ने अपनी शर्तों पर समर्थन देने का
फैसला किया और अपने साथ-साथ अपने तीन

इंडिपेंडेंट एमएलए साथियों से भी समर्थन
दिलवाया जिसके बाद बीजेपी के अर्जुन मुडा
की अगुवाई में गवर्नमेंट बन गई और
मेजॉरिटी साबित हो गई किसी के पास मैंडेट
नहीं होने के कारण मधु कोडा बीजेपी के

नेतृत्व में बनने वाली अर्जुन मंडा की
सरकार में माइनर एंड जियोलॉजिस्ट मामलों
के मिनिस्टर बन गए अब जैसे-तैसे तो
गवर्नमेंट चल पा रही थी और इसी बीच एक
सड़क के टेंडर को लेकर अर्जुन मुडा और मधु
कोडा के बीच अनबन हो गई मधु कोडा असेंबली
के अंदर ही रो पड़े अपनी ही गवर्नमेंट पर

आरोप लगाए और भाषण खत्म करते ही सरकार से
हाथ खींच लिए इसका परिणाम यह हुआ कि
अर्जुन मडा की सरकार गिर गई अब तीन
निर्दलीयों विधायकों के साथ मिलकर बनाई
सरकार देखिए अब ऐसे में इस मौके का फायदा
उठाते हुए साहब कांग्रेस और जेएमएम

पॉलिटिकल मूड को समझते हुए मधु कोडा को
अपने पाले में मिला लेते आरजेडी सुप्रीमो
लालू यादव की पहल पर यूपीए ने मधु कोडा को
मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार कर अपनी
गवर्नमेंट बनाई यानी झारखंड की पॉलिटिक्स
में साल 2006 में ऐसा पॉलिटिकल उडल फेर

हुआ साहब कि रातों-रात एक इंडिपेंडेंट
एमएलए चीफ मिनिस्टर की कुर्सी पर विराजमान
हो गया खैर सरकार बनाने वाले में जो
पार्टी शामिल थी उनमें झामुमो राजत

यूनाइटेड गो ंस डेमोक्रेटिक पार्टी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी फॉरवर्ड
ब्लॉक तीन इंडिपेंडेंट एमएलए तो वहीं
कांग्रेस बाहर से समर्थन कर रही थी अब
झारखंड के पांचवें चीफ मिनिस्टर के रूप
में मधु कोडा ने 18 सितंबर 2006 को शपथ ली

उनका कार्यकाल 27 अगस्त 2008 तक रहा इस
तरह मधु कोटा ने चीफ मिनिस्टर के रूप में
23 महीने यानी कुल 709 दिन तक इस पद पर
बने रहे देश में मधु कोटा से पहले कोई भी
इंडिपेंडेंट एमएलए इतने लंबे समय तक चीफ
मिनिस्टर के पद पर नहीं रहा था अब इस

उपलब्धि के लिए इनका नाम गिनीज बुक ऑफ
रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है भारत में मधु
कोडा ऐसे तीसरे इंडिपेंडेंट एमएलए हैं जो
चीफ मिनिस्टर की कुर्सी तक पहुंचे कोटा से
पहले 1971 में ओड़ीशा में विश्वनाथ उ दास

और साल 2006 में मेघालय के क्लाइंडर
एंडरसन खोंगलम के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज है
इंडिपेंडेंट चीफ मिनिस्टर मधु कोडा देखिए
मधु कोडा की गवर्नमेंट में ज्यादातर
मिनिस्टर्स इंडिपेंडेंट एमएलए को ही बनाया

गया था इस गवर्नमेंट ने ऐसे-ऐसे फैसले लिए
भाई जो पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं थे जी
हां एमएलए अपने सैलरीज और अलाउंस बढ़ाते
रहे और असेंबली को बेवजह डिस्ट्रक्टेड कर
ठेस पहुंचाते रहे लेकिन यह सिलसिला ज्यादा

दिन तक नहीं चल पाया सा व कहते हैं ना कि
पाप का घड़ा जितनी तेजी से भरता है उतनी
तेजी से फूट भी जाता है इनके साथ भी कुछ
ऐसा ही हुआ जब मधु कोड़ा के दामन में लगा
ताक अब देखिए साल 2007 से 8 में चीफ
मिनिस्टर रहते हुए मधु कोड़ा पर राजहरा

नॉर्थ कोल ब्लॉक को कोलकाता की एक कंपनी
बनी आयरन एंड स्टील इंडस्ट्रीज लिमिटेड को
गलत तरीके से अलॉट करने का आरोप लगा कहा
जाता है कि इस अलॉट में अरबों रुपयों की
रिश्वतखोरी और हेराफेरी हुई है इसके साथ

ही इन पर आरोप लगा कि इन्होंने चीफ
मिनिस्टर रहने के दौरान ही अवैध तरीके से
000 करोड़ की संपत्ति अर्जित की कोल ब्लॉक
का अलॉटमेंट की फाइल पकड़ी गई देखिए जब
कोल ब्लॉक का अलॉट किया गया तब एक दिन
झारखंड माइंस डिपार्टमेंट के एक ऑफिसर

सतपति ने माइंस अलॉटमेंट की वो सारी
फाइलें अपने पास मंगवाई जिन पर मधु कोर्डा
ने सिग्नेचर किए थे सतपति ने एक-एक फाइल
को को गौर से देखा और उन्हें समझते देर ना
लगी कि अलॉटमेंट में जबरदस्त खेल हुआ है
भाई उन्होंने तुरंत उन कंपनियों को बुलाया

जिन्हें सीएम मधु कोडा की मेहरबानी से
माइंस अलॉट की गई थी इन कंपनियों को 2
मार्च 2008 को सतपति के सामने पेश होना था
लेकिन जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के
मुताबिक 26 फरवरी 2008 की शाम को ही सतपति
को ट्रांसफर लेटर थमा दिया गया यानी
इन्हें यहां से चलता किया अब इस बात की

शिकायत कई इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट तक
पहुंच चुकी थी लेकिन
अभी नहीं था आईआईटी से पास आउट हैकर ने
खोले इनके राज मधु कोड़ा पर करप्शन का शक
तो पहले से था लेकिन एविडेंस नहीं था इस
कारण ऑफिशियल के हाथ बंधे हुए थे वहीं

कहानी में एक ट्विस्ट आता है और एक हीरो
के रूप में एक हैकर की एंट्री होती है यह
हैकर आईआईटी से पास आउट था उसने हैकिंग
करके मधु कोडा के सभी डाटा को चुरा लिया
इस हैकर ने करीब एक साल पहले ही रांची

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को उसके मेल आईडी
पर कुछ डॉक्यूमेंट भेजे थे अब पहले तो
डिपार्टमेंट ने इसे कूड़ा समझा लेकिन एक
दिन एक कर्मचारी बेकार पड़े मेल को ओपन
करके पढ़ने के बाद डिलीट कर दे रहा था ऐसा

अंदर मौजूद डॉक्यूमेंट को भी पढ़ा तो
हैरान रह गया इस बात की खबर इसने तुरंत
बड़े ऑफिशियल को दी अब इस जांच के लिए
राची से लेकर दिल्ली तक ऑफिशल्स के अंदर
बेचैनी पड़ गई यह ऑफिशल्स जिस घोटाले की

जांच करने की सोच रहे थे उस हैकर ने इसी
घोटाले के डॉक्यूमेंट इनकम टैक्स
डिपार्टमेंट को दिए थे कहें तो मधु कोडा
एंड कंपनी के सभी फर्जी डॉक्यूमेंट इसी
हैकर ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को उपलब्ध

कराए थे यह डॉक्यूमेंट इतने कीमती थे कि
भाई इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस हैकर को
इस काम के लिए एक मोटी रकम अदा की थी खैर
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑफिशल्स के
अनुसार आईआईटी से पास आउट इस हैकर ने सबसे
पहले उन 37 फर्जी कंपनियों का डाटा दिया

जो मधु कोडा सिंडिकेट ने झारखंड को लूटने
के लिए बनाए इसने अपना नाम बदलकर ना सिर्फ
ऑफिशियल से फोन फोन पर बात की बल्कि ईमेल
के जरिए इस लूट का हर सुराग दिया बाद में
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑफिशल्स ने

अनुमान लगाया कि यह हैकर उन कंपनियों के
लिए काम कर रहा था जिन्होंने माइन के लिए
मधु कोडा एंड कंपनी को भूस के रूप में एक
बड़ी रकम अदा की थी लेकिन उन्हें ना तो
माइन मिली और ना ही रिश्वत की रकम वापस
मिल पाई इस खुलासे ने देश के कई शहरों

समेत दक्षिण अफ्रीका तक फैले इस करप्शन का
कच्चा चिट्ठा सामने ला दिया कोडा एंड
कंपनी ने झारखंड की खदान इलीगल तरीके से
बेची थी और उससे जो घोटाले का पैसा आया
भैया उस पैसे को साउथ अफ्रीका की माइंस
में लगा दिया गया यहां इन्होंने गोल्ड और

यूरेनियम की कई माइंस खरीदी यह माइंस
बकायदा साउथ अफ्रीका की सरकार से कानूनी
तौर पर हासिल की गई थी यानी खरीदने में
फ्रॉड नहीं किया गया इन्वेस्टिगेशन
एजेंसीज को इस बात के भी पक्के सबूत मिले
कि माइंस के लिए हजारों करोड़ रुपयों के

हवाले के जरिए रांची से मुंबई मुंबई से
दुबई और फिर यहां से साउथ अफ्रीका पहुंचाए
गए गोल्ड और यूरेनियम की माइंस की खरी के
लिए दुबई की एक फर्जी ज्वेलरी कंपनी का
इस्तेमाल किया गया इन्वेस्टिगेटर के पास
पक्के सबूत है कि यह कंपनी फर्जी थी और

सिर्फ कागजों पर काम कर रही थी हवाले के
जरिए पैसा भेजने के लिए द ग्रेट झारखंड
रॉबर्स ने एक या दो नहीं बल्कि 35 फर्जी
कंपनियां खोल रखी थी भाई खुद

इन्वेस्टिगेटर इस बात से हैरान थे कि इतने
कम वक्त में मधु कोडा एंड कंपनी ने काली
कमाई का इतना जबरदस्त नेटवर्क कैसे तैयार
कर लिया और तो और मधु कोटा के खिलाफ जांच
एजेंसियों को ये भी सबूत मिले कि कोडा एंड
कंपनी का पैसा दुबई साउथ अफ्रीका

लाइबेरिया थाईलैंड जर्मनी चीन और जापान
में भी इन्वेस्ट किया गया है जांच में
इन्वेस्टिगेशन एजेंसीज को एक शख्स की
जानकारी मिलती है और इसकी तलाश अभी जारी
है कहते हैं कि यह वही शख्स है जिन्होंने
मधु कोड़ा एंड कंपनी को काली कमाई करने का

जरिया बताया था सूत्रों के मुताबिक यही
शख्स विदेशों में मधु कोडा के पैसे लगाता
था और उससे हुई कमाई से हिस्सा लेता था इस
शख्स के बारे में अभी तक कोई सुराग नहीं

मिल पाया फिलहाल मधु कोडा हुए गिरफ्तार अब
देखिए जांच तो पहले से ही चल रही थी लेकिन
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब विनोद सिन्हा
नाम का एक शख्स चर्चा में आता है इसके बाद
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने विनोद सिन्हा

और उससे जुड़े देश भर में 167 जगहों पर
रेड की अब इन्वेस्टिगेशन एजेंसीज एक्टिव
हुई और तब मधु कोडा का भी नाम सामने आ गया
अब इनके पास वह भी डॉक्यूमेंट थे जो उस
हैकर ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दिया
था इस घोटाले के चलते कांग्रेस और अन्य

सहयोगियों ने मधु कोड़ा से समर्थन वापस ले
लिया और मधु कोडा की गद छिन गई इसके बाद
झारखंड मुक्ति मोर्चा के शीबू सोरेन चीफ
मिनिस्टर बने गद्दी के जाते ही मधु कोडा
के समय में जितने भी कोल ब्लॉक अलॉट किए
गए थे विपक्षी पार्टी उनकी जांच की मांग

उठाने लगी अब मांग को मानते हुए शिबू
सोरेन ने जांच को सीबीआई के हवाले कर दिया
कुछ दिन जांच करने के बाद सीबीआई ने कहा
कि कंपनियों को कोल ब्लॉक देने के बदले
अरबों रुपयों की रिश्वत ली गई इस पूरे

मामले में सीबीआई ने नौ लोगों को मुख्य
आरोपी बताया इनमें मधु कोडा एचसी गुप्ता
के अलावा झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव ए के
बसू दो अन्य अधिकारी बसंत कुमार
भट्टाचार्य विपिन बिहारी सिंह बीआईएस यू

एल के निर्देशक वैभव तुलसियान कोडा के
कथित करीबी विजय जोशी और चार्टर्ड
अकाउंटेंट नवीन कुमार तुलसियान शामिल थे
मधु कोड़ा को खनन घोटाले के सिलसिले में
30 नवंबर 2009 को राज्य पुलिस की विजिलेंस
ब्रांच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सीपीआई और

ईडी ने मिलकर गिरफ्तार किया था इसके बाद 3
साल से अधिक समय तक यह जेल में ही रहे 31
जुलाई 2013 को उन्हें रांची की बिरसा
मुंडा जेल से जमानत करके रिहा कर दिया गया
मामले की गंभीरता को देखते हुए मधु कोडा
से जुड़े हुए इस केस को दिल्ली की एक

कोर्ट में लाया जाता है दिसंबर 2017 में
कोर्ट ने उन्हें कोल ब्लॉक अलॉट मामले में
फ्रॉड और करप्शन का दोषी ठहराया फिर 3 साल
की सजा सुनाई गई और ₹ लाख का जुर्माना भी
लगाया गया कोटा के साथ-साथ पूर्व कोयला
सचिव हरीश चंद्रगुप्ता और झारखंड के पूर्व

मुख्य सचिव ए के बसू को भी दोषी पाया गया
सभी को झारखंड के राज हरा में विनी आरन
स्टील उद्योग लिमिटेड को इल्लीगल मेथड से
कोल ब्लॉक अलॉट करने का दोषी पाया गया अब
सुनिए यहां पर आपको जानकर हैरानी होगी कि
इन्वेस्टिगेशन एजेंसीज को पता चला है कि
साल 2009 के असेंबली इलेक्शन में मधु कोडा

ने अपने असेंबली एरिया में एक ही दिन में
85 करोड़ रुपए बांटे हैं यह पैसे लोगों को
मोटरसाइकल खरीदने के लिए दिए गए थे भाई
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोटा ने
उस समय तक कितना पैसा कमा लिया था और उनकी
राजनीतिक नेटवर्किंग कितनी मजबूत थी लेकिन

कोल ब्लॉक की नीलामी में घोटाले के काले
हुए इनके हाथों को राजनीति ने खूब चमकाया
कुल मिलाकर जीत के साथ-साथ अपनी पॉलिटिकल
जर्नी शुरू करने वाले कोडा का नाम जितनी
तेजी से अर्श पर पहुंचा उतनी तेजी से फर्श

पर भी पहुंचा आज की कहानी जानकर आपको कैसा
लगा हमें नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर
बताएं  नमस्कार

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