कैसे दारू बेचकर बना उत्तर प्रदेश अमीर ? | How Alcohol Made Uttar Pradesh Rich ? | Yogi Adityanath - instathreads

कैसे दारू बेचकर बना उत्तर प्रदेश अमीर ? | How Alcohol Made Uttar Pradesh Rich ? | Yogi Adityanath

साल 2021 उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर
योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में भाषण देते
हुए कहा सभी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार
का मध्य मांस आदि का सेवन ना हो और
अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा के

समय भी मांस मछली और शराब की बिक्री पर
रोक लगा दी थी वहीं अगर हम इसके दूसरे
पहलू पर नजर डालें तो पता चलता है कि भैया
उत्तर प्रदेश दारू की सेल के हिसाब से देश
की कैपिटल बना हुआ है 2022 से 23 में यूपी
सरकार को एक्साइज इस ड्यूटी से मिलने वाला

रेवेन्यू तकरीबन
42250 करोड़ था और अगले फाइनेंशियल ईयर
2023 से 24 में यह 8000 करोड़ होने का
अनुमान है जब से यूपी में योगी जी की
सरकार आई है यूपी का दारू से मिलने वाला
रेवेन्यू तीन गुना तक बढ़ गया है और आज

यूपी में दारू से मिलने वाला रेवेन्यू
पूरे देश में सबसे ज्यादा है इतना ही नहीं
यह आंकड़े हर साल लगभग बढ़ते ही जा रहे
हैं इन सब से तो यही समझ में आता है कि
भाई एक और जहां योगी जी को दारू बिल्कुल

पसंद नहीं है वहीं दूसरी तरफ दारू से
मिलने वाला रेवेन्यू बहुत पसंद है लेकिन
देखना तो यह है कि आखिर योगी जी की पॉलिसी
में ऐसा क्या स्पेशल है कि उनके खुद दारू
के खिलाफ बोलने के बाद भी इसका रेवेन्यू

साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है इसे समझने
के लिए थोड़ा पास्ट में चलते हैं यह वह
समय था जब दिल्ली में आलीशान स्टोर थे और
हर प्रकार की दारू बेची जाती थी जबकि
उत्तर प्रदेश में दारू की छोटी-छोटी
दुकानें थी जिनमें देसी दारू मिलती थी
लेकिन अगर आज हम उत्तर प्रदेश की दारू की

सेल्स के मामले में कंडीशन देखें तो उत्तर
प्रदेश दारू का हब बन चुका है 2012 तक
उत्तर प्रदेश में लिकर पॉलिसी कुछ इस तरह
की थी कि दारू के बिजनेस में पूरे उत्तर
प्रदेश में अकेले एक व्यक्ति की मोनोपोली

चलती थी और उसका नाम था पंटी चड्ढा दरअसल
जब यहां मायावती की सरकार थी तो मायावती
ने पूरे उत्तर प्रदेश में इस नई पॉलिसी के
अकॉर्डिंग ही कई एक्साइज जोन क्रिएट किए
जिनका जिम्मा दिया पंटी चड्ढा को मतलब

वेस्टर्न उत्तर प्रदेश में दारू पर पूरा
कंट्रोल पंटी चड्डा के पास ही था जिसके
बाद वेस्टर्न यूपी में इसकी मनमानी चलने
लगी लेकिन यह यहां तक नहीं रुका इसके बाद
इसने ईस्टर्न यूपी में जो बड़े-बड़े

मैन्युफैक्चरर और डिस्ट्रीब्यूटर थे उनके
साथ डील करके पूरे उत्तर प्रदेश में दारू
के धंधे का कंट्रोल अपने हाथों में ही ले
लिया अब पूरे उत्तर प्रदेश में पंटी चड्ढा
की परमिशन के बिना एक बोतल दारू भी नहीं

बिकती थी पूरे उत्तर प्रदेश में ही इसके
दारू के 57 गोडाउंस थे जिनसे लगभग 5000
रिटेल शॉप्स पर दारू सप्लाई की जाती थी और
इतना ही नहीं दारू की सप्लाई केवल उत्तर
प्रदेश और भारत तक की सीमित नहीं थी बल्कि

इसका नेटवर्क नेपाल भूटान यूनाइटेड
स्टेट्स यूके और कई अरेबियन और एशियन
कंट्रीज तक फैला हुआ था तो इस तरह साहब
उत्तर प्रदेश के दारू के धंधे पर पंटी
चड्ढा का अकेले ही अधिकार था लेकिन परिवार
में हुए एक आपसी विवाद में पंटी चड्डा और

उसके भाई की जो है मौत हो जाती है इसके
बाद भी इस पॉलिसी को चेंज नहीं किया गया
बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में यही अटकले चल
रही थी कि अब कौन है जो नया पंटी चड्डा
बनेगा और फिर पंटी की मौत के बाद भी यह

पॉलिसी चलती रही लेकिन इस लिकर पॉलिसी को
उस समय चेंज किया गया जब 2017 में योगी
आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर
बनते हैं इनके चीफ मिनिस्टर बनने के बाद
2018 में आईएएस कल्पनी अवस्थी ने पुरानी

लिकर पॉलिसी को हटाकर नई लिकर पॉलिसी बना
दी इसमें 36 नए होलसेलर को लाइसेंस देकर
पंटी चड्ढा की मोनोपोली को तोड़ दिया गया
इस पॉलिसी में ओपन ऑक्शन सिस्टम को हटाकर
ई लॉटरी सिस्टम को शुरू किया गया अब आपके

माइंड में यह क्वेश्चन होगा कि ओपन ऑक्शन
सिस्टम और ई लॉटरी सिस्टम होता क्या है
देखिए ओपन ऑक्शन सिस्टम में सरकार लाइसेंस
बेचकर पैसा कमाती है अब इसको दिल्ली की
पॉलिसी से समझते हैं देखिए दिल्ली में आधी

से ज्यादा रिटेल शॉप्स सरकार खुद ऑपरेट
करती है लेकिन फिर सरकार ने दिल्ली में
ओपन ऑक्शन सिस्टम शुरू कर दिया और सरकार
ने कहा कि अब सरकार कोई भी शॉप नहीं
चलाएगी बल्कि दिल्ली में 849 दुकानें

खोलने के लिए लाइसेंस दिए जाएंगे और इसके
लिए सरकार ने दिल्ली को 32 जोन में डिवाइड
कर दिया और सभी को लाइसेंस बेचे गए और साथ
ही साथ यह भी तय किया गया कि एक जोन में
लिमिटेड दुकानें ही हो सकती हैं इससे

सरकार को यह प्रॉफिट होने वाला था कि जहां
सरकार ₹ 77000 करोड़ कमाती थी अब लाइसेंस
बेचकर सरकार को पूरे 9000 करोड़ का
प्रॉफिट होता है दरअसल ओपन ऑक्शन सिस्टम
एक बिडिंग सिस्टम होता है जिसमें सरकार इन

लाइसेंस की नीलामी करती है सभी बिजनेसमैन
जो दारू बेचना चाहते हैं सभी अपनी-अपनी
कीमत लगाते हैं और जो सबसे ज्यादा दाम
देता है वो इन लाइसेंस को ले जाता है
लेकिन भाई इस सिस्टम में एक खराबी थी और व

यह थी कि ऐसे में जो छोटे व्यापारी थे
उन्हें कुछ नहीं मिल पाता था क्योंकि उनके
पास तो इतना पैसा ही नहीं था सभी लाइसेंस
बड़े व्यापारी ले जाते थे इसके अलावा
उसमें एक और रूल भी था जो कि कोई भी
लाइसेंस खरीदता है तो उसे यह दिखाना होता

था कि पिछले 3 साल में उनका इस बिजनेस में
टर्न ओवर 150 करोड़ से ज्यादा हो इसलिए
सरकार पर आरोप लगाया गया कि इस बिजनेस में
सरकार ने करप्शन किया है और अपने जानने
पहचानने वाले लोगों को ही लाइसेंस दिए हैं
इसके अलावा इस पॉलिसी का एक रूल यह भी था

कि रिटेलर होलसेलर और मैन्युफैक्चरर एक ही
व्यक्ति नहीं हो सकता क्योंकि अगर ऐसा
होगा तो दारू के प्राइस को इनके द्वारा
अपने हिसाब से कितना भी रखा जा सकता है
लेकिन अब इस पॉलिसी का एग्जीक्यूशन हुआ तो
एक ही व्यक्ति को एक से अधिक रोल में पाया

गया और फिर जब इस केस की छानबीन की गई तो
इसमें आप पार्टी के कई लीडर्स को गिरफ्तार
किया जाता है जिसके बाद दिल्ली गवर्नमेंट
ने अपनी पॉलिसी चेंज करके फिर से पहले की
तरहा ही कर दी मतलब फिर से सरकार दिल्ली
में अपनी खुद की शराब की दुकानें चलाने

लगी जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की पॉलिसी
में मेन फोकस मैन्युफैक्चरर से एक्साइज
ड्यूटी और वैल्यू एडेड टैक्स के जरिए पैसा
कमाना है मतलब यूपी में जितनी ज्यादा बोतल
की सेल होगी सरकार को उतना ही ज्यादा

प्रॉफिट मिलेगा इसमें होता क्या है कि
सीधा वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन बस करना
होता है और लाइसेंस जो है मिल जाता है
जिसकी वजह से अब उत्तर प्रदेश में
छोटी-छोटी बहुत ज्यादा दुकानें खुल गई हैं

इसमें एक और रूल है कि एक व्यक्ति दो से
ज्यादा दुकानें नहीं खोल सकता यह पूरा का
पूरा सिस्टम अब ऑनलाइन है कुछ इस तरह का
सिस्टम कि उत्तर प्रदेश में राजनाथ सिंह
की सरकार के टाइम पर 1999 में जो चलता था
यूपी को केवल इस पॉलिसी से ही फायदा नहीं

हुआ है दोस्तों बल्कि बिहार सरकार की
पॉलिसी का फायदा भी यूपी गवर्नमेंट को
मिला है दरअसल हुआ क्या है कि बिहार ने
अपनी जो एक पॉलिसी बनाई जिसमें बिहार
सरकार ने बिहार में अल्कोहल को टोटली बैन

कर दिया जिसके बाद उत्तर प्रदेश से बिहार
में दारू की स्मगलिंग शुरू हो गई देखिए
कोई भी सरकार तीन तरीकों से पैसा कमाती है
पहले मैन्युफैक्चरर पर एक्साइज ड्यूटी
लगाकर अब इसमें होता क्या है कि जहां पर
भी दारू बनती है तो कोई भी बोतल एक्साइज

ड्यूटी लगने के बाद मार्केट में आती है
दूसरा तरीका है होलसेलर और रिटेलर को
लाइसेंस बेचकर और तीसरा है वैल्यू एडेड
टैक्स से यह टैक्स राज्य सरकार लगाती है
और वही कलेक्ट भी करती है जितनी भी बोतल

बेची जाती हैं यही सभी पर वैल्यू एडेड
टैक्स सरकार को देना पड़ता है दारू पर
जीएसटी नहीं लगता यह टैक्स राज्य सरकार
खुद लगाती है और अलग-अलग स्टेट में यह
वैल्यू एडेड टैक्स अलग-अलग होता है जैसे

अगर आप गोवा घूमने जाएं तो वहां पर दारू
बहुत सस्ती मिलती है उसकी वजह यही है कि
भाई वहां की सरकार बहुत कम वैट लगाती है
लेकिन सबसे महंगी दारू कर्नाटक में है
क्योंकि वहां पर वैल्यू एडेड टैक्स सबसे
ज्यादा है उत्तर प्रदेश की इस पॉलिसी को

केरल हरियाणा महाराष्ट्र कर्नाटक की
सरकारें भी अडॉप्ट करने के लिए आगे आ रही
हैं उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर योगी
आदित्यनाथ ने हाल ही में कैबिनेट में हुई
बैठक में लिकर पॉलिसी 2024 से 25 को
मंजूरी दे दी है और यह नई पॉलिसी 1 अप्रैल
से लागू हो जाएगी और 31 मार्च 2025 तक के

लिए रहेगी इस पॉलिसी में अंग्रेजी शराब
मॉडल शॉप और बियर शॉप की सालाना लाइसेंस
फीस को 10 पर बढ़ाया जाएगा शराब की आम
दुकानों को भी मॉडल शॉप में बदला जाएगा
रिन्यूअल और प्रोसेसिंग फी में भी बढ़ाया

जाएगा साथ ही साथ देशी शराब का कोटा भी
बढ़ाया जाएगा इन सब का इंपैक्ट दारू की
कीमत पर देखने को जरूर मिलेगा इससे शराब
महंगी हो जाएगी देशी शराब के पए में करीब
₹ की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है इतना
ही नहीं अगर किसी के पास बार का लाइसेंस

है और अगर वह आसपास कहीं पर बार काउंटर
खोलना चाहता है तो लाइसेंस का 25 पर या ₹
लाख देकर इसके लिए परमिशन मिल सकेगी बियर
शॉप के 20 मीटर के अंदर अगर 100 वर्ग मीटर
तक का खाली एरिया है तो वहां पीने के लिए
सिटिंग एरिया बनाया जा सकेगा जिसके लिए
₹5000000

दिसंबर को शराब की दुकानें रात को 11 बजे
तक खुल सकेंगी पॉलिसी में रेलवे और मेट्रो
स्टेशन के बाहर भी शराब बेचने का प्रावधान
किया गया है इस पर पूर्व मुख्यमंत्री और
समाजवादी पार्टी के मुख्य अखिलेश यादव ने
निशाना साधा है और अखिलेश ने कहा है कि

बीजेपी का मानना है कि भाई शराब पीना जो
है अच्छा है उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है
तो फिर ऑफिस में शराब को बेचने की अनुमति
दे देनी चाहिए नई शराब नीति में एक बड़ा
बदलाव बियर को लेकर भी किया गया है अब
बियर की दुकानों को मॉडल शॉप में बदला जा

सकेगा इसके अलावा दादी समारोह इवेंट या
किसी कार्यक्रम में रात 12:00 बजे तक शराब
परोसने की अनुमति होगी शराब की बिक्री को
लेकर एक और बड़ा फैसला लिया गया है 1
अप्रैल से शराब की बिक्री मेट्रो स्टेशन
रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट और क्रूज शिप पर भी

हो सकेगी योगी सरकार में एक्साइज मंत्री
नितिन अग्रवाल के मुताबिक 1961 में जो
नियमावली आई थी उसमें फलों से बनने वाली
वाइन को शामिल नहीं किया गया था लेकिन अब
इस नियमावली में संशोधन किया गया है और

तीन नई कैटेगरी को शामिल किया गया है
नियमावली में अंगूर से से बनने वाली साइडर
सेब से बनने वाली शेरी और नाशपाती से बनने
वाली पेरी वाइन को भी शामिल कर लिया गया
है जब से योगी सरकार आई है तब से शराब की

बिक्री से मिलने वाला रेवेन्यू तीन गुना
बढ़ गया है योगी सरकार की सत्ता में आने
के समय 2017 से 18 में शराब की बिक्री से
सरकार को करीब 000 करोड़ का रेवेन्यू मिला
था अब आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 2022
से 23 में यूपी सरकार को एक्साइज ड्यूटी

से
42250 करोड़ का रेवेन्यू मिला था सरकार को
2023 से 24 में एक्साइज ड्यूटी से 8000
करोड़ का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है तो
कुल मिलाकर भाई उत्तर प्रदेश सरकार की
दारू की पॉलिसी आज उनके लिए रेवेन्यू का
एक बहुत बड़ा सोर्स बन चुकी है अब आपका इस

वीडियो पर क्या कहना है हमें कमेंट सेक्शन
में जरूर बताएं,…

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