कैसे दुनिया की सबसे सुरक्षित जेल को 4 बार तोड़कर भाग ये अपराधी ? | Insane Japanese Prison Break Saga - instathreads

कैसे दुनिया की सबसे सुरक्षित जेल को 4 बार तोड़कर भाग ये अपराधी ? | Insane Japanese Prison Break Saga

1936 जापान सुबह के 5:30 बज रहे हैं और
आमोरी जेल की सलाखों के पीछे योशी शिराटकी
तैयारी पूरी कर चुका है वह जानता है कि
कार्ड्स अगले 15 मिनट नहीं आएंगे और उसे
इन्हीं 15 मिनटों में उसे बाहर आना है

लेकिन यह उसका आखिरी प्रिजन ब्रेक अटेंप्ट
नहीं था बल्कि योशी ने अपने करियर में
करीब चार बार जेल से भागने की कोशिश की और
वह चारों में कामयाब भी रहा वह एक ऐसे

क्राइम की सजा काट रहा था जो उसने कभी
किया ही नहीं योशी एक चोर जरूर था लेकिन
उसे हत्या के इल्जाम में जेल में डाला गया
था और उसे टॉर्चर करके उसे जुर्म भी कबूल
करवा लिया गया जेल से भागकर योशी के साथ

क्या हुआ उसे दोबारा कैसे पकड़ा जाता है
और क्यों कोई भी जेल उसे कैद नहीं कर पाई
आइए जानने की कोशिश करते हैं आज की इस
वीडियो में जैसा कि हमने बताया आपको पहले
ही कि जेल में रहना योशी को बिल्कुल रास

नहीं आ रहा था क्योंकि यह यूएन ह्यूमन
राइट्स कमीशन से पहले का समय था जहां
गार्ड्स जब चाहे जैसे चाहे किसी भी
प्रिजनर को टॉर्चर कर सकते थे और रोज-रोज
मार खाकर योशी परेशान हो चुका था इसी से

परेशान होकर उसने जेल से भागने का प्लान
बनाया सबसे पहले तो उसने गार्ड्स की
मूवमेंट को स्टडी करना शुरू कर दिया और
उसने यह देखा कि सुबह होने से पहले के समय
में गार्ड्स की पहरेदारी ना के बराबर हो

जाती है जो उसे करीब 15 मिनट के विंडो
देती है जिसमें वह भाग सकता था लेकिन
परेशानी यह थी कि व भाग कैसे योशी जेल
जाने से पहले एक चोर हुआ करता था जो कि

जेल तोड़ने में माहिर था उसे यह नर जेल
में भी दिखाना था और उसके पास इसके लिए यह
परफेक्ट मौका था उसके बाथरूम के अंदर एक
वुडन बकेट था जिसकी हैंडल एक मेटल वायर से
बनी थी उसने यह मेटल बायर बकेट में से

निकाल ली और सुबह के 5:30 बजे वो अपने काम
पर लग जाता है सबसे पहले तो उसने बायर से
अपनी सेल का दरवाजा खोला और फिर धीरे-धीरे
करके वो दूसरे दरवाजे को भी खोलता गया
ध्यान में रखने वाली बात यह है कि 1936

में प्रिजन सिक्योरिटी बहुत एडवांस नहीं
थी इसलिए उनके लॉक्स को भी आसा आनी से इस
तरह की वायर्स का इस्तेमाल करके खोला जा
सकता था सभी लॉक्स को खोलकर जब वह बाहर
आता है तो उसके सामने बस एक ती बार थी

जिसे फांद करर वो बाहर निकल गया जब अगली
सुबह गार्ड्स उसके सेल से उसे बाहर बुलाने
लगे तब वो नोटिस करते हैं कि योशी अभी भी
सो रहा है जब कई बार बुलाने पर भी व बाहर
नहीं आता तो गार्ड्स उसके सेल में दाखिल

होते हैं और उसका ब्लैंकेट हटाकर देखते
हैं कि योशी तो गायब है और उसके बेड पर
लकड़ी के कुछ तख्ते हैं जो कि उसने अपने
वुडन फ्लो बेड से निकाले थे इसके बाद योशी

की खोज शुरू हो जाती है योशी को ढूंढना
हालांकि उनके लिए बहुत मुश्किल नहीं था
क्योंकि भागने के दौरान उसे काफी गंभीर
चोट भी आई थी जिस वजह से उसे ट्रीटमेंट की

सख्त जरूरत थी वो जानता था कि व किसी
डॉक्टर के पास तो नहीं जा सकता है इसलिए
वो एक हॉस्पिटल में चोरी छिपे दाखिल होता
है और कुछ मेडिकल सप्लाईज चुराने की कोशिश
करता है इस दौरान हॉस्पिटल स्टाफ की नजर

उस पर पड़ जाती है जो तुरंत ही पुलिस को
फोन कर देते हैं और उसे अपनी एस्केप के
सिर्फ तीन दिन बाद ही दोबारा गिरफ्तार कर
लिया जाता है इस बार जब उसे दोबारा जेल

भेजा गया तो उसे आओमोरी जेल की जगह अकिता
प्रिजन में भेज दिया गया जो कि ज्यादा
सिक्योर मानी जाती थी इस बार उसे जेल से
भागने के लिए उम्र कैद की सजा मिली थी और
क्योंकि जब गार्ड्स भी जानते थे कि वो
पहली भी एक बार जेल से भागने की कोशिश कर

चुका है इसलिए वो गार्ड्स का फेवरेट
टारगेट बन गया इस नए प्रिजन में उसे और भी
ज्यादा टॉर्चर से गुजरना पड़ा इन सब चीजों
के अलावा उसे घंटों तक जेल में मजदूरी
करवाई जाती और फिर कई बार रात में उसका

गद्दा भी उससे छीन लिया जाता और उसे ठंडे
कंक्रीट के फ्लोर पर ही सोना पड़ता इस जेल
में सिर्फ कोबायाशी नाम का एक ही गार्ड था
जो उसे टॉर्चर नहीं करता था और उस पर दया
दिखाता था लेकिन वो भी बाकी कार्स को नहीं
रोक सकता था इसलिए योशी के लिए इस ट्रेल

से भागना भी अब एक चॉइस नहीं थी बल्कि
जिंदा रहने की स्ट्रेटेजी थी उसकी पिछली
एस्केप के बाद से उसे एक ऐसे सेल में रखा
गया था जिसकी सीलिंग बहुत ऊपर थी सीलिंग
पर एक विंडो थी लेकिन उसमें कॉपर बार्स
लगे थे जो कि इतने आसपास थी कि किसी आदमी

का उनके बीच से निकल पाना नामुमकिन था
सिर्फ इतना ही नहीं जब वो अपने सेल के
अंदर होता था तब वो एक हथकड़ी से बंधा
होता था जो नीचे एक रोड के साथ अटैच थी
जिससे उसकी मूवमेंट बहुत ही लिमिटेड हो
जाती लेकिन 15 जुलाई 1942 के दिन प्रिजन

गार्ड्स को एक बड़ा शौक लगता है जब
उन्होंने उसका सेल खाली देखा वो जब सेल के
अंदर गया तो उसने देखा कि हथकड़ी तो बेड
पर पड़ी है और ऊपर सीलिंग से पूरी खिड़की
ही का

तो हुआ यूं था कि उसने पिछली बार की तरह
इस बार भी कहीं से एक मेटल वायर ढूंढ
निकाली थी जिससे कि वो खुद को अनलॉक कर
सकता था इसके बाद गार्ड्स ये भी नहीं
जानते थे कि वो वॉल क्लाइमिंग में भी एक

एक्सपर्ट रह चुका है जिससे वो आसानी से
सीलिंग के पास पहुंच सकता था उसने जब
सीलिंग विंडो को ध्यान से नोटिस करना शुरू
कर दिया तो देखा कि जो मेटल बार्स उसमें

लगे हुए हैं वो चारों तरफ से एक वुडन
फ्रेम से अटैच है इसलिए अगर वो उस वुडन
फ्रेम को ही निकाल दे तो वो आसानी से जेल
की छत पर चढ़ सकता है इसके बाद हर रात वो
खुद को अनलॉक करके धीरे-धीरे उस वुडन

फ्रेम को कमजोर करता रहा और फिर सुबह बाद
में वह दोबारा खुद को हथ खड़ी से बांध
देता एक वक्त वो भी आया जब वो पूरी तरह
कॉन्फिडेंट था कि अब वो भाग सकता है लेकिन
सिर्फ एक प्रॉब्लम थी और वो यह थी कि हो

सकता है कि छत पर चढ़ने के बाद उसके कदमों
की आवाज नीचे गार्ड्स तक भी पहुंच जाए यही
वजह थी कि उसने सही मौके का इंतजार किया
सही मौका तब आया जब तूफान और बारिश के

कारण फडी बाहर काफी शोर था और इस तरह के
मौसम में बहुत ही कम चांसेस थे कि कोई उसे
छत पर नोटिस भी करता जिस वजह से वो उसी
रात जेल से बाहर निकला लेकिन कहानी यहां
खत्म नहीं हुई दरअसल अगले तीन महीने तक

सभी कोशिशों के बावजूद पुलिस उसे ढूंढने
में नाकामयाब रही लेकिन फिर एक रात अचानक
प्रिजन गार्ड कोबायाशी के घर पर कोई दस्तक
देता है दरवाजा खोलने पर पता चलता है कि
यह तो योशी ही है योशी उससे कहता है कि वह

सिर्फ बात करने के लिए आया है जिसके बाद
बाद वो दोनों घर के अंदर बैठकर बात करते
हैं योशी उसे बताता है कि उसे जेल से
भागने में कोई इंटरेस्ट नहीं है और वोह
अपनी सजा काटने के लिए भी तैयार है लेकिन
वो गार्ड्स के टॉर्चर की वजह से बहुत

मजबूर है वो चाहता था कि कोबायाशी उसकी
मदद करें और उसकी आवाज को हायर जुडिशियस
तक पहुंचाएं जिससे कि उन्हें उसकी कंडीशन
का पता चल सके कोबायाशी के इवॉल्वमेंट से
उसके दावों का वजन बढ़ता और उन्हें ज्यादा

सीरियसली लिया जाता सारी बातें सुनने के
बाद कोबायाशी ने उससे नहाने के लिए कहा
जिस बीच वो खाने की तैयारी कर रहा था योशी
ने वैसा ही किया लेकिन जब वोह बाथरूम से
बाहर आता है तो उसने देखा कि उसे हर तरफ

से पुलिस ने घेरा हुआ है इस समय उसे अपने
ऊपर काफी गुस्सा आया क्योंकि उसने
कोबायाशी पर भरोसा कर लिया था जबकि उसे
बाहर ही रहकर अपनी जिंदगी गुजारनी चाहिए

के सामने लाया जाता है तो उसने सिर्फ यह
दरख्वास्त की कि उसे नॉर्दर्न जापान की
जगह टोक्यो की किसी जेल में भेज दिया जाए
जहां पर इतनी एक्सट्रीम ठंड नहीं नहीं
होती और वहां पर गार्ड्स भी इस तरह के

नहीं है लेकिन जज ने उसकी बात नहीं सुनी
और सर्दियों के मौसम में उन्होंने उसे
जापान के सबसे ठंडे इलाके में भेज दिया
उसे नॉर्दर्न होका दो के अबाश प्रिजन में
भेजा गया था जेल में आते ही इस ठंड के बीच
उसे काफी क कपड़े दिए गए और सेल में डालने
से पहले भी गार्ड्स ने उसे टॉर्चर किया इस

टॉर्चर के बाद जब उसे उसके सेल में फेंका
जाता है तो उसने जेल गार्ड्स के सामने
गुस्से में ही यह घोषणा कर दी कि वोह
दोबारा जेल से भाग कर दिखाएगा और सिर्फ
इतना ही नहीं उसके हाथ में ये जो ह
कड़ियां लगी थी वो भी उसने सिर्फ एक झटका

देकर तोड़ दी इस तरह के सीनस हम सिर्फ
फिल्मों में देखते हैं लेकिन यह पूरा केस
वेल डॉक्युमेंटेड था और सचमुच उसने

गार्ड्स के सामने ही हथकड़ी तोड़ दी थी
लेकिन शायद वो गार्ड्स के सामने कुछ
ज्यादा ही कर गया था क्योंकि अब गार्ड्स
ने उसे नॉर्मल हथकड़ियों में नहीं रखा
बल्कि वो उसे एक 20 किलो के जंजीर नुमा

बेड़ियों से बांधने लगी यह बेड़ियां जब
बांधी गई तो उसके हाथ भी पीछे की तरफ
बांधे गए और इनमें कोई लॉक नहीं था यह
बेड़ियां दो हफ्तों में सिर्फ एक बार खोली
जाती थी ताकि वो नहा सके और उसके लिए भी

किसी वेल्डर की मदद से इन्हें अलग करवाना
पड़ता था सिर्फ इतना ही नहीं जिस जेल सेल
में वो था वो खास इसी तरह के लोगों के लिए
बनाया गया था जिस वजह से उसके अंदर जो
खिड़कियां थी वो इसके साइज से भी छोटी थी

और व अगर उन बेड़ियों को खोल भी लेता है
तो तब भी उसके लिए बाहर आ पाना नामुमकिन
था अगर वो बाहर आ भी जाता तो यह पूरा
इलाका दूर-दूर से बर्फ से घिरा हुआ था
जहां आसपास कोई शहर नहीं था बाहर ज ली
जानवर थे और कभी भी किसी पर हमला कर सकते

थे लेकिन योशी के लिए जेल में रहना ज्यादा
बड़ी प्रॉब्लम थी क्योंकि वो यहां पर रोज
टॉर्चर हो रहा था और अब क्योंकि वो इन
जंजीरों में भी बंधा हुआ था इसलिए उससे
उसके लिए बाकी सभी काम मुश्किल हो गए उसके

 

हाथ पीछे बंदे होने के कारण जब भी उसके
लिए खाना आता था तो उसे रेंग कर उसके पास
जाना पड़ता और एक जानवर की तरह वो यह खाना
खाता लेकिन इसी से उसे एक आईडिया भी आया
उसने देखा कि उसकी बेड़ियां लोहे की बनी
हुई हैं जेल में उसे ज्यादातर मीसो सूप
दिया जाता है जिसके अंदर नमक की मात्रा

काफी ज्यादा होती है व जानता था कि अगर व
सूप को अपनी बेड़ियों पर लगाना शुरू कर दे
तो जल्द ही जंग लगने के कारण वो कमजोर हो
जाएंगी सिर्फ इतना ही नहीं उसके सेल में
खिड़की लगी थी उसकी रोड्स भी लोहे की ही

बनी हुई थी अब उसने धीरे-धीरे अपनी
बेड़ियों और खिड़की की उन रोड्स पर मीसो
सूप लगाना शुरू कर दिया और इसमें महीनों
का वक्त लगा इस बीच जब उसके नहाने के लिए

उसकी बेड़ियां अलग की जाती थी तब भी किसी
को यह बदलाव नजर नहीं आता था क्योंकि उसने
खास जॉइंट्स पर ही सूप को लगाया था 26
अगस्त 1944 की रात को फाइनली उसके महीनों

की मेहनत रंग लाई और मौका देखकर उसने अपनी
बेड़ियां तोड़ दी इसके बाद उसने खिड़की की
उन रोड्स को भी तोड़ दिया लेकिन खिड़की का
साइज अभी भी उससे छोटा था इस प्रॉब्लम का

सॉल्यूशन काफी दर्दनाक था पर योशी इसके
लिए तैयार था उसने अपने शोल्डर जॉइंट को
जानबूझकर डिसलोकेट कर दिया जिससे कि अब वो
आसानी से उस जगह से निकल पाने में कामयाब
हुआ यहां से भागने के बाद जब महीनों तक

उसकी कोई खबर नहीं आई तो अथॉरिटीज को लगा
कि शायद वो बाहर ठंड के कारण या किसी
जंगली जानवर के अटैक के कारण मारा गया
लेकिन योशी जिंदा था उसने बाहर निकलकर एक

माइनिंग साइट ढूंढ ली थी जहां वो उस माइन
को एक घर की तरह इस्तेमाल करने लगा इसके
अंदर रहकर वो गर्म रह सकता था और खाने
पीने के लिए उसने फिशिंग सीख ली और दूसरे
जानवरों को भी मारकर खाने लगा अगले दो साल
उसने इसी तरह गुफा में गुजारे और जब उसे

लगा कि शायद अब उसका बाहर निकलना ठीक होगा
तो वो चलते हुए पास के एक शहर में गया
जहां उसने एक अमेरिकन टैंक नोटिस किया
इसके बाद उसने देखा कि आसपास सभी साइन
बोर्ड्स जपनीज और इंग्लिश दोनों में मौजूद
है उसे समझ नहीं आया कि यह चल क्या रहा है

 

वह 1944 में जेल से भागा था और जब दूसरा
विश्व युद्ध चल रहा था लेकिन वह 1946 में
उस गुफा से बाहर आया था जब जापान सरेंडर
कर चुका था जब उसे यह बात पता चली तो उसने
सोचा कि अब तो वो प्रिजन गार्ड्स बिल्कुल
भी उसकी तलाश में नहीं होंगे इसलिए उसने
ने डिसाइड किया कि वो अब जाकर अपनी बीवी

और बेटी से मिलेगा उसने पैदल ही एक लंबी
यात्रा शुरू कर दी जिसमें उसे 50 दिन लगे
जब चलते हुए एक दिन उसे भूख लग रही थी तब
उसने एक फार्म देखा जहां पर टमाटर लगे हुए

थे उसने उस फार्म में घुसकर टमाटर खाने
शुरू कर दिए और तभी फार्म का मालिक वहां
पर आ पहुंचा फार्म के मालिक को लगा कि
योशी भी उन्हीं चोरों में से एक है जो
अक्सर आकर उसकी फसल चुरा लेते हैं और वो
उससे झगड़ने लगा इस झगड़े में योशी ने खुद

को बचाने के लिए उसे धक्का दे दिया जिससे
वो नीचे गिर गया और उसका सर एक पत्थर से
टकरा जाता है उस आदमी की मौत हो गई और इसी
बीच वहां दूसरे लोग भी जमा हो गए थे
जिन्होंने उसे पुलिस के हवाले कर दिया इस

फार्मर के मर्डर के लिए योशी को सजाए मौत
दी गई और उसे अपनी सजा के इंतजार के लिए
सपोरो प्रिजन में भेज दिया गया जहां इस
बार खिड़की इतनी छोटी थी कि वोह अपना सर
भी पूरी तरह उसके पार नहीं ले जा सकता था

यहां पर भी उसके साथ टॉर्चर रुका नहीं
क्योंकि गार्ड्स उसके जरिए बाकी प्रिजनर्स
को बताना चाह रहे थे कि अगर वो जेल से से
भागने की सोचते तो उनके साथ क्या-क्या हो

सकता है एक समय वो आ गया जब उसने गार्ड्स
को जवाब देना ही बंद कर दिया उससे जवाब ना
पाकर उसके सेल में दाखिल होते और उसे
पीटते लेकिन वह फिर भी रिएक्ट नहीं करता
कभी-कभी उसे सीलिंग की तरफ देखते हुए पाया

परेशान करने से बोर हो गए थे और उन्होंने
उसे अकेला छोड़ दिया और यह फिर से उसके
लिए एक मौका था वो जानबूझकर यह सब कर रहा
था ताकि गार्ड्स उसके ऊपर ध्यान देना छोड़
दे एक दिन जब गार्ड्स उसके सेल में पहुंचे
तो उन्होंने देखा कि योशी तो अंदर है ही

नहीं सेल की जांच की गई तो उन्होंने देखा
कि सेल के फ्लोर बोर्ड्स मिसिंग हटाए गए
थे और इसके नीचे एक सुरंग बनी हुई थी योशी
इतने महीने से अपने फूट बॉल की मदद से रोज
रात को एक सुरंग खोद रहा था लेकिन मजेदार

बात तो यह है कि योशी एक बार फिर से जेल
में आया लेकिन इस बार वो अपनी मर्जी से
आया था अब जेल से भागने के एक साल बाद वो
एक दिन एक पार्क में बैठा था जब उसके पास
एक पुलिस ऑफिसर आकर बैठ जाता है वो घबराया
तो हुआ था लेकिन वो ऑफिसर उसे नहीं

पहचानता था और दोनों में बातचीत होने लगी
इसी बातचीत के बीच पुलिस वाले ने जेब से
सिग्रेट निकाली और साथ ही योशी को भी एक
सिग्रेट ऑफर की यह 1948 का जपान था जब
सिगरेट को एक लक्जरी आइटम समझा जाता था और
जब उसने देखा कि एक अनजान आदमी उसे सिगरेट

ऑफर कर सकता है तो इसका मतलब है कि दुनिया
में अभी भी अच्छे लोग बचे हुए हैं उसने
उसी वक्त उस पुलिस वाले को बताया कि वह
जेल से भागा हुआ एक क्रिमिनल है और साथ ही
उसने खुद को सरेंडर भी कर दिया अपने

ट्रायल में भी उसने सिर्फ टोक्यो के
प्रिजन में रहने की मांग और इस बीच कोर्ट
में भी यह साबित हो गया कि जिस फार्मर के
कत्ल के लिए उसे सजाए मौत हुई थी वो एक
एक्सीडेंट था योशी को जेल से भागने के लिए

14 साल की सजा हुई जो अब उसने टोक्यो के
पूजू प्रिजन में गुजारी यहां पर गार्ड्स
का बर्ताव भी काफी अच्छा रहा और बाद में
योशी ही जापान की प्रिजन रिफॉर्म मूवमेंट

का फेस बन गया और उसकी कहानी जापान में हर
किसी को सुनाई जाने लगी 1911 में अपनी सजा
काटने के बाद उसे अच्छे बर्ताव के लिए
जल्दी रिहा कर दिया गया और 1979 में 71
साल की उम्र में एक आजाद व्यक्ति के तौर
पर उसकी मौत हो गई आपको क्या लगता है अगर

योशी के साथ पहले से ही अच्छा बर्ताव किया
जाता तो क्या वह कभी जेल से भागने की
कोशिश करता और क्या भारत में भी प्रेजेंट
सिस्टम को रिफॉर्म करने की जरूरत है अपनी
राय कमेंट सेक्शन में हमें जरूर लिखें

उम्मीद है कि आपको आज के इस वीडियो से
काफी कुछ सीखने को नया मिला होगा

Leave a Comment