कैसे Astrologists बनाते है आपको बेवकूफ ? | How Astrologists Fool You ? - instathreads

कैसे Astrologists बनाते है आपको बेवकूफ ? | How Astrologists Fool You ?

मेष और वृश्चिक वालों पर होगी धन की वर्षा
वहीं मिथुन कर्क राशि वालों पर मंगल होगा
भारी सिंह और कन्या राशि के जातक हो जाएं
होशियार ठप पड़ सकते हैं बिजनेस और
कारोबार अ अरे भाई डरे नहीं ऐसा कुछ नहीं

होगा यह तो बस एक उस प्रेडिक्शन का एक
छोटा सा नमूना है जो एस्ट्रोलॉजर्स आपके
लिए अक्सर आजकल करते रहते हैं और आप आंख
मूंदकर विश्वास भी कर लेते हैं केवल हम
जैसे मिडिल क्लास ही इस खेल के अकेले

प्यादे नहीं हैं बॉलीवुड के सितारे भी
अपने किस्मत के सितारों पर इतना विश्वास
करते हैं कि कभी-कभी तो वह अपने करियर के
अहम फैसले तक बदल डालते हैं आज भारत की 44
पर पॉपुलेशन ऐसी है जिसका मानना है कि

ग्रहों और सितारों की स्थिति लोगों की
लाइफ में होने वाली घटनाओं को इफेक्ट करती
है सीधे-सीधे कहूं तो आपकी लाइफ को
कंट्रोल करती लेकिन क्या सच में
एस्ट्रोलॉजी इतनी पावरफुल है जो फ्यूचर को

बना और बिगाड़ सकती है या फिर यह एक बहुत
बड़ा स्कैम है आज की इस वीडियो में हम कुछ
कुछ ऐसी ही प्रेडिक्शन करेंगे आपकी
पर्सनालिटी को लेकर जिसे सुनकर आप भी दंग
रह जाएंगे आप पूछेंगे सवाल हम लाइव समाधान

बताएंगे
ग्रह और किस्मत का हाल विस्तार से
समझाएंगे दोस्तों यह है जानेमाने ज्योतिष
गुरु शिरोमणि सचिन जो ग्रहों की चाल पढ़कर

लोगों का भविष्य बताते हैं और समस्याओं के
लाइव समाधान की भी बात करते हैं अब कितना
समाधान होता है यह तो आप ही जानते होंगे
खैर यह इस इंडस्ट्री के अकेले मैनेजर नहीं

है शिरोमणि जैसे तमाम माम एस्ट्रोलॉजर्स
आपकी एटक पप पर मिल जाएंगे आखिर उन्हीं की
बदौलत तो आज एटक करोड़ों छाप रही है 2023
में एस्ट टॉक ने 2282 करोड़ का रेवेन्यू
जनरेट किया है जो पिछली साल के कंपैरिजन

में चार गुना है एक तरफ जहां स्टार्टअप
लगातार नुकसान उठा रहे हैं वहीं एटक ने
साल 2025 से 26 तक कंपनी का रेवेन्यू 000
करोड़ पर पहुंचाने का टारगेट रखा हुआ है

हालांकि यह इतना मुश्किल काम नहीं है केवल
यही तो कहना है हरी चटनी के साथ समोसा खाओ
कृपा हो जाएगी अब हरी चटनी से आप पर कृपा
कितनी बरसती है इसका तो पता नहीं लेकिन

एस्ट्रोलॉजर्स की झोली जरूर भर जाती है
एस्ट्रोलॉजर्स की यह फ्रॉड इंडस्ट्री इतनी
फल फूल रही है और इसके जिम्मेदार कहीं ना
कहीं हम जैसे लोग ही तो हैं अब हम
एस्ट्रोलॉजी को फ्रॉड क्यों बोल रहे हैं

इसे एक छोटे से एग्जांपल से समझते हैं
दरअसल बात ज्यादा पुरानी नहीं है हाल ही
में क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 खत्म हुआ है
जिसमें भारत की जीत को लेकर एस्ट्रोलॉजर्स

ने कुछ ऐसा बोला था भारत को जीतना चाहिए
और इस वक्त की स्थिति को भी अगर मैं देख
लूं तो निसंदेह यह एक बहुत स्ट्रगल का
कांटे का मैच होगा मैच जीतना तो दूर टीम
इंडिया इसमें अच्छा प्रदर्शन तक नहीं कर

पाई ऐसा ही कुछ 2022 के टी-20 विश्व कप
में भी हुआ जब भारत और इंग्लैंड के बीच
हुए सेमीफाइनल मैच से पहले 11
एस्ट्रोलॉजर्स ने प्रिडिक्ट किया कि तो
6040 के चांसेस है इंडिया का जीतने का

लड़ाई तो बराबर की है गणेश जी 6040 कह रहे
हैं हम कह रहे कि 7030 का खेल ना हो जाए
संघर्ष बहुत जबरदस्त होगा बट फाइनली भारत
के पक्ष में यह मैच जाएगा कांटे के टक्कर

है लेकिन विजय के योग बन रहे हैं शत प्र
आप में से जो लोग क्रिकेट मैच नहीं देखते
उनके लिए बता दें कि ये कंपलीटली वन
साइडेड मैच था कोई कांटे की टक्कर नहीं

हुई इंडिया ने 20 ओवर में 168 रन बनाए थे
और इंग्लैंड ने एक विकेट तक नहीं खोया मह
16 ओवरों में टारगेट अचीव करके इंग्लैंड
ने जबरदस्त जीत हासिल की इनफैक्ट इस मैच

के बाद गिनीस वर्ल्ड रिकॉर्ड ने इंडिया की
फिरकी लेते हुए ट्वीट भी किया था कि क्या
यह हिस्ट्री की सबसे आसान रन चेज है जबकि
एस्ट्रोलॉजर्स के अकॉर्डिंग यहां काटे की

टक्कर के बाद टीम इंडिया 100% जीतने वाली
थी लेकिन यह कोई पहली बार नहीं है हर साल
लाखों ऐसी प्रेडिक्शन की जाती है दोस्तों
जो गलत जाती हैं लेकिन इन सब के बाद भी हम

जैसे पढ़े-लिखे लोग इनकी बातों पर यकीन कर
लेते हैं एक बार एक फेमस हिस्टोरियन
फ्रांसिस्को गेच नाई ने कहा था कि आम
लोगों के कंपैरिजन में एस्ट्रोलॉजर्स की
लाइफ काफी अच्छी होती है यह लोग 100 झूठ

के बीच एक बात ऐसी बोल देते हैं जो बात सच
निकल जाती है और लोग इन पर विश्वास करने
लग जाते हैं बट एक आम आदमी 100 में से अगर
एक बात भी झूठ बोल दे तो उसकी सारी
क्रेडिबिलिटी पर पानी फिर जाता है लेकिन

ऐसा क्यों होता है इसको भी समझेंगे लेकिन
उससे पहले कुछ और फर्जी प्रिडिक्शंस को
देखते हैं देखिए साल 1499 में जर्मन के एक

फेमस मैथमेटिशियन और एस्ट्रोलॉजर्स जॉनिस
टॉफलर ने एक प्रेडिक्शन यह की थी कि 20
फरवरी 1554 में एक भयानक बाढ़ आएगी जो सभी
को निकल लेगी यानी इस दिन पूरी दुनिया

खत्म हो जाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था
इसके बाद एक क्रिश्चियन न्यूरोलॉजिस्ट
डेविड मेड ने प्रिडिक्ट किया था कि 23
सितंबर 2017 को दुनिया खत्म हो जाएगी जब

एक हिडन प्लानेट भरती से आकर टकरा जाएगा
बट उनकी प्रेडिक्शन भी गलत साबित हुई
लेकिन अब यह कहानी यहीं नहीं रुकी उसके
बाद एक प्रेडिक्शन अमेरिकी प्रीचर रोल
कैंपिंग ने भी की कि दुनिया 21 मई 2011 को

खत्म होगी रोल को अपनी प्रेडिक्शन पर इतना
विश्वास था कि उन्होंने इस मैसेज को 5000
बिलबोर्ड्स पर चिपका डाला लेकिन जब यह चीज
नहीं हुई तो उन्होंने इस डेट को पोस्टपोन
कर दिया अक्टूबर पर बट तब भी कुछ नहीं हुआ

फिर तो वह थक हारकर अपना मुंह बंद कर गही
बैठ गए दिक्कत यह थी कि लोग इन चीजों पर
आंख मूंद कर ट्रस्ट कर लेते हैं 2010 के
आसपास जब यह प्रेडिक्शन की गई थी कि 21

दिसंबर 2012 को 5125 सालों से चला आ रहा
मायानगर खत्म हो जाएगा तो एस्ट्रोलॉजर्स
ने कहा था कि इस दिन दुनिया खत्म हो जाएगी
इस प्रेडिक्शन का इफेक्ट जानने के लिए
रिटर्स ने 20 अलग-अलग देशों के करीब 16000

लोगों का ओपिनियन दिया जिसमें पता चला कि
सात में से हर एक इंसान इस पर यकीन करने
लगा था और हम ज्यादा पीछे की बात भी क्यों
कर रहे हैं 2020 में कोविड-19 का ही

एग्जांपल ले लीजिए जब इंडिया के फेमस
एस्ट्रोलॉजर बीजन दारू वालो ने कहा था कि
मई 2020 के बाद या तो कोरोना खत्म हो
जाएगा या स्लो डाउन हो जाएगा 15 की आसपास
यह सब ये डिजीज है कोरोना कहो कुछ भी कहो
ये बहुत कम हो जाएगा नहीं तो खत्म हो

जाएगा सिर्फ पचन ही नहीं कई और
एस्ट्रोलॉजर्स ने भी कोरोना को लेकर
सिमिलर प्रेडिक्शन की थी अगर सच में
एस्ट्रोलॉजर्स इतने पावरफुल हैं कि वो

पास्ट प्रेजेंट और फ्यूचर सब जानते हैं
अगर है भी ऐसा तो यह लोग शेयर मार्केट में
क्यों नहीं इन्वेस्ट करते इन्हें तो पता
होना चाहिए भैया कि कब प्रॉफिट होगा और कब
लॉस कब मंगल भारी होगा और कब बुध नहीं जरा

सोचिए ये क्रिकेट मैच के रिजल्ट तो बताते
हैं यह बताते हैं कि नौकरी लगेगी या नहीं
ये कौन सी फिल्म जो है हिट होगी कौन सी
फ्लॉप होगी बिजनेसमैन को कब बिजनेस करना

चाहिए अगर भैया इतना ही पता है तो स्टॉक
मार्केट की प्रेडिक्शन करो ना और जीत जाओ
करोड़ों मांगन की ही क्या जरूरत रह जाएगी
फिर लेकिन यहां पर एक सवाल ये भी है कि

इतना सब होने के बाद भी लोग इन पर विश्वास
क्यों कर लेते हैं जबकि देखा जाए तो इन
एस्ट्रोलॉजिकल प्रेडिक्शन का % भी
साइंटिफिक बेसिस नहीं है केमिस्ट्री में

नोबल प्राइज डॉ वेंकटे रमन रामकृष्ण ने भी
यह बात कही थी कि स्टार और प्लानेट चाहे
जैसे मर्जी मूव करें इनसे इंसानों की
जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सिर्फ

डॉक्टर वेंकटे रामन की ही नहीं बल्कि
दुनिया भर के साइंटिस्ट का ही यही मानना
है इनफैक्ट जिन्होंने थोड़ी बहुत साइंस
पढ़ी भी है वो यह जानते होंगे कि सन और

प्लेनेट धरती पर ग्रेविटेशनल फोर्स लगाते
हैं एक्चुअली ग्रेविटेशनल फोर्स एक सिंपली
अट्रैक्टिव फोर्स है जो ऑब्जेक्ट्स के मास
और उनके बीच के डिस्टेंस पर डिपेंड करता

है अगर किसी ऑब्जेक्ट का मास ज्यादा और
डिस्टेंस कम है तो वह धरती की तरफ ज्यादा
फोर्स लगाएगा तो फिर कैसे ग्रेविटेशनल
फोर्स किसी का फ्यूचर बता सकता है कि जॉब
लगेगी या फिर नहीं वहीं खुद से भी थोड़ा

दिमाग लगाकर देखिए एक अनिमेश और दूसरा
पियूष अनिमेश जनवरी में पैदा हुआ और पियूष
जुलाई में तो ऐसा तो नहीं है कि भैया सन
अनिमेश पर ज्यादा ग्रेविटेशनल फोर्स

लगाएगा क्योंकि वो जनवरी में पैदा हुआ है
या यह बोलेगा सारे जनवरी वाले एक साइड आ
जाओ आज तुम्हारे ऊपर एक्स्ट्रा
ग्रेविटेशनल फोर्स लगाऊंगा जो तुम्हारे

लिए गुड लक लेकर आएगा या दूर बैठे शनि
ग्रह मार्च में पैदा होने वालों पर ज्यादा
फोर्स लगाएगा जिससे उनका बैड लक शुरू हो
जाएगा मतलब हद है चलो इसे छोड़ो अब

जिन्हें साइन समझ नहीं आती उन्हें एक
दूसरे तरीके से समझाते हैं दरअसल ये जो
एरी जोडियक साइन है ये उन लोगों के लिए
होते हैं जिनका जन्म 21 मार्च से 19
अप्रैल के बीच होता है इसके बाद आता है

टोरस जो 20 अप्रैल से शुरू होता है और 20
मई तक रहता है अब यहां पर तीन लोगों के
बारे में सोच कर देखिए जिनका नाम ए बी और

c से है ए का जन्मदिन आता है 21 मार्च को
20 का जन्मदिन आता है 18 अप्रैल को और सी
का 19 अप्रैल को अब ए और बी का बर्थडे एक

दूसरे से काफी दूर है लेकिन इसके बाद भी
दोनों का होरोस्कोप सेम है वहीं बी और सी
का बर्थडे एक दिन के गैप में है फिर भी
दोनों के होरोस्कोप बिल्कुल अलग है दैट

मींस जिनका बर्थडे पास में है उनकी किस्मत
बिल्कुल अलग वहीं जिनका बर्थडे इतनी दूर
है उनको सेम गुड लक और बैड लक मिलेगा हमें
नहीं लगता कि इस बात का कोई सेंस बनता

होगा देखिए भैया यह भी कहा जाता है कि
एस्ट्रोलॉजी डेट के साथ-साथ हमारे जन्म के
टाइम से भी रिलेट करती है यानी गुड लक और
बैड लक मिलने में टाइम का भी उतना ही रोल

है जितना डेट का है इसका मतलब है कि जो
ट्विंस हैं एक साथ या एक दो मिनट के गैप
में पैदा होते हैं उनकी लाइफ तो एकदम सेम
होनी चाहिए इसी को लेकर साल 1958 में लंदन

में एक स्टडी की गई जिसमें एक साथ पैदा
होने वाले 2000 बच्चों को इंक्लूड किया
गया अगले कई दर्शकों तक उनको मॉनिटर किया
गया उनकी मेंटल और फिजिकल डेवलपमेंट के

अलावा रिसर्चस ने 100 अलग-अलग
कैरेक्टरिस्टिक को देखा कि उन बच्चों ने
बड़े होकर कौन सी नौकरी की इन्होंने शादी

की या नहीं इनकी पर्सनालिटी और आईक्यू
लेवल कैसा था और इसके बाद साल 2003 में
रिसर्चस ने इस स्टडी को जर्नल ऑफ कॉन्शियस

स्टडीज में पब्लिश किया जिससे पता चला कि
इन सब में कोई भी सिमिलरिटी नहीं थी इससे
आप समझ सकते हैं कि जिनका जन्म एक साथ हुआ
है उनमें कोई सिमिलरिटीज नहीं है तो जिनके

बीच एक महीने का गैप है उनका होरोस्कोप
सेम कैसे हो सकता है इसे आप किसी ट्रेजेडी
या डिजास्टर से भी समझ सकते हैं जैसे कहीं
पर कोई पुल टूट गया कोई भूकंप आ गया या
कोई बाढ़ आ गई जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए

अब ऐसा तो नहीं है कि मरने वाले सारे एक
साथ पैदा हुए होंगे या उनका होरोस्कोप सेम
होगा वहीं एक पॉइंट ये भी है कि अगर हमारा
फ्यूचर लिखा जा चुका है हमारे जन्म या
हमारे होरोस्कोप के अकॉर्डिंग तो कोई बाबा

या एस्ट्रोलॉजर उसे चेंज कैसे कर सकते हैं
वो लोग उसको लेकर सॉल्यूशन भी देते हैं
कोई कहता है कि अपने नाम में एक्स्ट्रा आर
या फिर एस ऐड कर लो तो तुम गुड लक मिल

जाएगा निर्मल बाबा कहते हैं कि समोसे के
साथ हरी चटनी खाओ और यह बाबा तो मानते ही
नहीं है कि हमारा फ्यूचर पहले से लिखा जा
चुका है ऊपर वाले ने तुमको कठपुतली बना के

नहीं भेजा है कि सब पहले से ही तय है एक
हमारे देश में शादी के मौके पर भी
एस्ट्रोलॉजर को काफी इंपॉर्टेंस दी जाती
है चाहे डेट फिक्स करने की बात हो लड़का

लड़की की कुंडली मिल पानी हो हर चीज
एस्ट्रोलॉजर के हिसाब से की जाती है लोगों
का मानना है कि कुंडली नहीं मिली तो मैरिड
लाइफ अच्छी नहीं जाएगी लेकिन जरा सोच के

देखिए भैया जिनकी कुंडली मिल जाती है क्या
उनका कभी डिवोर्स नहीं होता और जिन देशों
में कुंडली नहीं मिलवा जाती क्या वहां
डिवोर्स ही डिवोर्स होते रहते हैं मामला
काफी कॉम्प्लिकेटेड बना रखा है इतने सारे

लॉजिकल और साइंटिफिक पॉइंट्स बताने के बाद
भी करोड़ों आज भी एस्ट्रोलॉजी में विश्वास
करते हैं क्या यह सही है मॉडर्न एज के लोग
हैं पढ़े लिखे लोग हैं क्या हमको

एस्ट्रोलॉजी में विश्वास करना चाहिए लोगों
के एस्ट्रोलॉजी पर विश्वास करने के मेनली
तीन रीजन है पहला वीक माइंड यानी वर्ल्ड

वाइड यह पैटर्न देखा गया है कि लोग अक्सर
अपनी प्रॉब्लम्स का सॉल्यूशंस स्पिरिचुअल
लीडर्स में देखते हैं और उन पर विश्वास
जताते हैं थॉमसन रिटर्स फाउंडेशन की माने

तो इसमें सबसे बड़ा खेल दिमागी आइसोलेशन
और कंट्रोल का होता है अगर बाबा कंट्रोल
कर ले कि रीडर क्या देखते सुनते और समझते
हैं तो यह फॉलोअर्स के माइंड को मैनिपुलेट

कर सकते हैं और इसी का सहारा मैच्योरिटी
ऑफ स्पिरिचुअल लीडर्स लेते हैं लोगों का
ट्रस्ट गेन करने के लिए यह अपने बिजनेस की
नीव होप पर रखते हैं और इनके टारगेट
ऑडियंस वो लोग होते हैं ज्यादातर जो सोसा

सोसाइटी के निचले या फिर मिडिल कैटेगरी
में लायक करते हैं अपने कल्चर रिलीजन से
ज्यादा जुड़ाव होने के नाते आम लोग अपनी

प्रॉब्लम्स के सॉल्यूशन की आज भगवान से
लगाते हैं और इन्हें भगवान के करीब ले
जाने की जिम्मेदारी यह स्पिरिचुअल गुरु
उठाते हैं जो क्लेम करते हैं कि लोगों की

समस्या का समाधान उनके पास है हालांकि
लोगों को इस झांसे में फंसाना आसान नहीं
होता इसलिए मोस्टली सभी स्पिरिचुअल गुरुस
की टारगेट ऑडियंस अलग होती है और यह एक
यूनिक टेक्नीक से लोगों के दिलों में जगह

बना लेते हैं नाउ सेकंड इज कोल्ड रीडिंग
देखिए कुछ लोग बड़ी जनरल सी स्टेटमेंट
देते हैं कि 25 साल की उम्र में आपका
भाग्य चमकेगा आपकी किस्मत करवट लेगी अब
भागे चमकने से मतलब कुछ भी हो सकता है

क्या पता आप लोगों को एक अच्छी जॉब मिल
जाए या आपकी शादी हो जाए हो सकता है कि
आपके साथ कोई हादसा हो और आप मौत के मुंह

से बचकर निकल जाएं उस वक्त आप इस हादसे के
पीछे का बैड लक नहीं देखेंगे बस आपके
दिमाग में एक ही बात रहेगी अब आप बच गए
आपकी किस्मत ने करवट ले ली या फिर फिर

एस्ट्रोलॉजर तुमसे कहेगा कि बचपन में आपके
साथ एक हादसा हुआ था जिसका आपकी लाइफ पर
बहुत बुरा असर पड़ा है भैया यहां पर भी
हादसे का मतलब कुछ भी हो सकता है हो सकता
है कि आपकी फैमिली में किसी की डेथ हुई हो

या बचपन में आपको ज्यादा मारा पीटा गया हो
कुछ भी हो सकता है और जैसे ही आप लोग यह
सुनेंगे आपको यकीन हो जाएगा कि भैया बोल
तो सच रहे हैं आप तो त्रिकालदर्शी हैं

गुरु अब वही यहां पर एक तीसरा साइंटिफिक
निमोनिया यह होता है बनम इफेक्ट जी हां
दरअसल साल 1948 में एक साइकोलॉजिकल
एक्सपेरिमेंट किया गया था साइकोलॉजिस्ट

पेटन फरर द्वारा इन्होंने अपने 39
स्टूडेंट्स की एक क्लास को टेस्ट दिया फिल
आउट करने के लिए जिसके आंसर्स के बेसिस पर
उनका पर्सनालिटी स्केच बनाया जाएगा उन
बच्चों ने वह टेस्ट तो दे दिया इसके एक

हफ्ते के बाद उन्हें एक पेपर भी दिया गया
जिन पर उनका नाम और 13 अलग-अलग क्वालिटीज
लिखी थी जो एक इंसान के अंदर होती है तब
फौरन ने यह कहा था कि क्या यह क्वालिटीज
आपकी पर्सनालिटी को बताती हैं जीरो से
पांच के बीच में रेटिंग दे दीजिए 39

स्टूडेंट्स में से सिर्फ पांच स्टूडेंट्स
ने ही चार से कम नंबर दिए यानी ऑलमोस्ट हर
बच्चा मानता था जो क्वालिटीज उनके बारे
में लिखी गई थी वो उनकी पर्सनालिटी को

बताती हैं जबकि हर स्टूडेंट को सेम पेपर
दिया गया था यानी स्टूडेंट का पर्सनालिटी
स्केच सेम था उसके बाद भी सभी को यही लगा
कि यह उन्हीं की पर्सनालिटी को रिप्रेजेंट
करता है तब फॉरन ने कंक्लूजन निकाला कि

अगर हम ऐसी डिस्क्रिप्शन दें जो बहुत
जनरलाइज्ड हो लेकिन उसको प्रेजेंट ऐसे
करें कि जैसे वो इंडिविजुअल के लिए ही
लिखी गई है तो किसी को वो अपने से

मिलती-जुलती ही लगेगी फॉर एग्जांपल आप
बहुत यूनिक बहुत अच्छे हैं आपके अंदर बहुत
ऐसी कैपेसिटी है जो आपने यूज ही नहीं की
आपको पसंद नहीं कि कोई आप पर बंदिशें लगाए
लोगों पर जल्दी विश्वास कर लेते हैं अगर

ऐसी बातें कोई बोलेगा तो आप मान लेंगे कि
सामने वाला आपके बारे में जानता है लेकिन
यह बातें तो सब में कॉमन होती हैं लेकिन
सुनने वाला खुद को यूनिक समझता है और यकीन
कर लेता है खैर दोस्तों उम्मीद है कि आप
समझ गए होंगे और अब एस्ट्रोलॉजर्स के जाल

में नहीं फसें आज की वीडियो में फिलहाल बस
इतना ही

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