कौन है जो मालदीव को भारत के खिलाफ भड़का रहा है ? | Who Is Instigating Maldives Against India ? - instathreads

कौन है जो मालदीव को भारत के खिलाफ भड़का रहा है ? | Who Is Instigating Maldives Against India ?

9 सितंबर साल 2023 को मोहम्मद मोइज मालदीव
के राष्ट्रपति चुने गए इसी के साथ इस पूरे
सबकॉन्टिनेंट की पॉलिटिक्स 360 डिग्री
टर्न होती हुई दिखाई दी उन्होंने अपने
पहले बयान में ही मालदीव से भारतीय सेना
को हटाने का वादा दोहराया साथ ही दोनों

देशों के बीच वाटर सर्वे को लेकर हुए
समझौते को भी रद्द कर दिया गया यह इशारा
था दोस्तों इस बात का कि नई सरकार में
दोनों देशों के बीच के रिश्ते ठीक नहीं
हैं और चार महीने बाद भी यह आशंका सच

मोजू बतौर राष्ट्रपति पहली बार चीन के
आधिकारिक तौर पर रवाना हो गए जबकि अब से
पहले मालदीव का कोई भी नया राष्ट्रपति
सबसे पहले भारत आता था वहीं उनके पीछे से
उन्हीं के पार्टी के मिनिस्टर्स ने पीएम

मोदी की इंसल्ट भी की तो दूसरी तरफ वह
लक्ष्यदीप के बहाने से चीन को खुश करने की
कोशिश करते दिखे जिसने आग में घी का काम
किया अब आखिर इन सब का मतलब क्या है क्या
नई सरकार चीन से नजदीकी क्या बढ़ाने के

फिराक में है अगर हां तो भारत के साथ
रिश्तों का क्या होगा भैया चीन से नजदीकी
और भारत से दूरी मालदीव पर कितनी भारी पड़
सकती है क्या श्रीलंका और पाकिस्तान की
तरह मालदीव भी चीन के हाथों की कठपुतली

बनते जा र है या फिर भारत के खिलाफ चीन की
यह कोई नई चाल है मामला थोड़ा पेचीदा है
इसलिए डिटेल में समझेंगे आइए देखिए यही
कुछ छ महीने पहले की बात है उस वक्त
मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर

कैंपेनिंग चल रही थी एक तरफ मालदीव सरकार
टूरिज्म और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने
के लिए भारत की जी हजूरी कर रही थी तो
वहीं दूसरी तरफ इसी सियासी रण में खड़ा एक

शख्स इंडिया आउट के नारे लगा रहा था उसका
कहना था कि एक दिन राष्ट्रपति इब्राहिम
सालेह मालदीव को सरकार के हाथों बेच देंगे
अब इन्हीं बयानों के दम पर वह शख्स जनता
का दिल जीतने में कामयाब रहा है और 9

सितंबर 2023 को मालदीव का राष्ट्रपति बना
अब तक आप समझ चुके होंगे कि हम मोहम्मद
मोजू की बात कर रहे हैं जिन्होंने अपनी
पार्टी के तीन मंत्रियों को प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के खिलाफ लाफ टिप्पणी करने
की वजह से सस्पेंड कर दिया अब इसके बाद वह

खुद भी अपनी कही गई बातों पर लीपापोती
करते दिखे यहां पर यह सवाल खड़ा होता है
कि भैया आखिर मालदीव के लोगों में भारत के
खिलाफ इतना जहर भर कौन रहा है जवाब साफ है
चीन अब इसके कई कारण हैं एक तो मालदीव के
राष्ट्रपति मोहम्मद मोजू चीन के सपोर्टर

रहे हैं और जिसके चलते वहां चीन की अच्छी
खासी दखल अंदाजी दिखाई पड़ती है और दूसरी
वजह है मालदीव में लगातार बढ़ती चाइनीज
इन्वेस्टमेंट अब देखिए भारत की खादी चीन
ने भी मालदीव में ज्यादा से ज्यादा निवेश

करना शुरू कर दिया है उसने यहां अरबों
डॉलर की इन्वेस्टमेंट की है ताकि वह भारत
को पीछे छोड़ सके मालदीव की राजधानी माले
में 83 करोड़ डॉलर की लागत से बना
एयरपोर्ट असल में चीन के पैसों से ही

बनाया गया है जी हां वहीं पहले मालदीव के
एयरपोर्ट की देखभाल की जिम्मेदारी भारतीय
कंपनी के पास थी लेकिन अब यह कमान चीनी
कंपनी के हाथ में सौंप दी गई यही नहीं

मालदीप के मंत्री जिन आइलैंड्स के दम पर
भारत को चुनौती दे रहे हैं असल में उनमें
से से कई द्वीप तो चीन के कब्जे में हैं
जहां पर अगले 50 साल तक चीन अपनी रणनीति
के मुताबिक काम कर सकेगा दरअसल 20166 में

मालदीव ने चीन से इंप्रेस होकर अपने 16
आइलैंड्स वहां की कंपनियों को लीज पर दे
दिए थे जहां अब चीनी कंपनियां कंस्ट्रक्शन
कर रही हैं इन आइलैंड्स पर मालदीव
डायरेक्टली कोई भी इंटरफेरेंस नहीं कर

सकता यानी हम कह सकते हैं कि मालदीव के
मंत्री चीन के लिए अपना सीना ढोंक रहे हैं
अब विदेशी मामलों की जानकारों की माने तो
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2014 में

मालदीव में दौरा किया था इसके बाद से ही
मालदीव की पूरी इकॉनमी एक तरह से चीन के
कब्जे में आ गई वह बताते हैं कि चीन ने इस
दौरान मालदीव के भीतर ही भीतर अपना

नेटवर्क फैलाने की कोशिश की जिसका रिजल्ट
2018 आते-आते सबके सामने था वह भी तकरीबन
2 मिलियन डॉलर के कर्ज के रूप में चीन ने
इसके लिए फुल प्रूफ प्लानिंग की थी पहले

उसने मालदीव में अलग-अलग तरह की डेवलपमेंट
के बहाने जाल बिछाया फिर उसमें कर्ज के
टुकड़े फेंकने शुरू कर दिए जिसमें मालदीव
फंसता चला गया और इसकी शुरुआत हुई थी
मैरिटाइम सिल्क रोड प्रोजेक्ट को लेकर हुए

दोनों देशों के बीच समझौते से देखिए इसके
बाद तो चीन ने जैसे मालदीव में
इन्वेस्टमेंट की भरमार ही कर दी क्या
हेल्थ क्या टूरिज्म उन्होंने क्लाइमेट
चेंज और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बैंकिंग
जैसे सेक्टर्स को भी नहीं छोड़ा 2015 में

मालदीव के पर्यटन मंत्री मसा जकरी जब चीन
के दौरे पर गए थे तो उन्होंने वहां की
एजिम बैंक से 400 मिलियन डॉलर का क्रेडिट
लोन ले लिया था अब इसी दौरान चीन ने भी
मालदीव के भीतर बनाए जाने वाले 11000

अलग-अलग अपार्टमेंट्स के लिए तकरीबन 00
मिलियन डॉलर का कर्ज दिया इसके अलावा
मालदीव के नए द्वीपों पर बिजली ग्रिड के
लिए 200 मिलियन डॉलर का कर्ज भी चीन से ही
लिया गया यही नहीं यहां बनने वाले
इब्राहिम नसीर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए

500 मिलियन डॉलर का लोन भी चीन ने ही
मालदीव को दिया है और आंकड़े बताते हैं कि
माले चाइना फ्रेंडशिप ब्रिज के लिए भी चीन
ने ही तकरीबन 300 मिलियन डॉलर का कर्ज
दिया है अब मालदीव को डर इस बात का है कि
अगर उनकी अर्थव्यवस्था गड़बड़ हुई तो कहीं
मालदीप का हश्र भी पाकिस्तान और श्रीलंका

की तरह ना हो जाए क्योंकि इससे पहले भी
ऐसा हो चुका है दरअसल डेढ़ दशक पहले चीन
ने एंटी पायरेसी अभियान के नाम पर इंडियन
ओशन में नेवल शिप को भेजना शुरू कर दिया
था तब मालदीव की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी
और ह्यूमन राइट्स हनन के आरोपों के कारण

भारत और पश्चिमी देशों में से कोई भी उसकी
मदद करने को तैयार नहीं था ऐसे में यामीन
सरकार ने चीन से दोस्ती बढ़ाना शुरू की
आखिरकार चीन ने बड़ी ही चालाकी से उसकी

मदद की तब य की सरकार ने चीन से भारी भरकम
कर्ज लिया एक वक्त पर तो यह तक कहा जाने
लगा था कि भैया जैसे राज पक्षे ने
श्रीलंका के साथ किया था वैसा ही यामीन ने
मालदीव के साथ किया है 2018 के आखिर तक

मालदीव के कुल बहारी कर्ज में से 70 फीदी
से ज्यादा अकेले चीन का था जी हां इसी वजह
से वहां के मंत्री बौखलाए हुए हैं और भारत
के खिलाफ तरह-तरह की बयानबाजी करके चीन को
खुश करने की कोशिश में लगे हैं जिसका

प्रूफ यूरोपीय संघ के रिपोर्ट से भी मिलता
है इसके अकॉर्डिंग मालदीव के राष्ट्रपति
मोहम्मद मोजू ने भारत के साथ चल रहे
विवादों के बीच भी शी जिनपिंग के साथ बैठक
की थी और इसके बाद दोनों देशों ने 20 मेजर
एग्रीमेंट्स पर सिग्नेचर किए असल में इन

सिग्नेचर ने एग्रीमेंट्स को पक्का नहीं
किया बल्कि भारत और मालदीव के बीच पड़ी
दरार को पक्का किया है अब भारत से

बिगाड़ना मालदीव को कितना भारी पड़ेगा
इसकी चर्चा हम बाद में करेंगे पहले हम यह
जान लेते हैं कि भैया यह भारत के लिए
कितना खतरनाक है और इसके पीछे चीन की क्या
चाल है एक्चुअली मलडी जो दिखने में भले ही
छोटा सा हो लेकिन इसकी अहमियत बहुत ज्यादा

है इसे भारत की ताकत कहा जाए तो गलत नहीं
होगा इसका रीजन है कि मालदीव और भारत के
बीच करीब 2000 किमी की दूरी तो है भारत ही
है जो मालदीव का सबसे करीबी पड़ोसी है
मालदीव को अगर कुछ चीजें खास बनाती हैं तो
वो है इंडियन ओशन में बसा होना मालदीव

हिंद महासागर में 90 हज वर्ग किलोमीटर तक
फैला हुआ है इसके 1200 से ज्यादा छोटे
बड़े द्वीप उस शिपिंग लेन के बगल में हैं
जहां से चीन जापान और भारत को एनर्जी

सप्लाई होती है इनफैक्ट भारत का करीब 97
फी इंटरनेशनल ट्रेड इंडियन ओशियन के जरिए
ही होता है अब ऐसे में इस रास्तों को सेफ
रखना भारत के लिए बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट
हो जाता है इसके अलावा मालदीप नेबरहुड
फर्स्ट पॉलिसी और ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की

हैसियत से काफी जरूरी है वहीं मालदीव
सार्क का मेंबर भी है सार्क आठ साउथ एशियन
देशों का संगठन है इस क्षेत्र में अपना
दबदबा बनाए रखने के लिए भी भारत को मालदीव
के साथ की जरूरत है 2016 में उरी हमले के

बाद जब पाकिस्तान में सार्क समिट हुई थी
तो भारत ने इसे बायकॉट करने की अपील की थी
तब मालदीव इकलौता ऐसा देश था दोस्तों
जिसने भारत का साथ दिया अब ऐसे में मालदीव
का बायकॉट करके कहीं ना कहीं हम चीन के

नापाक इरादों में उसका साथ दे रहे हैं अगर
भारत और मालदीव ने दूरी बनाई तो चीन उससे
और ज्यादा नजदीकी बढ़ाएगा और चीन और
मालदीव की बढ़ती नजदीकी भारत की नेबरहुड
फर्स्ट पॉलिसी के लिए खतरा हो सकती है
वहीं इंडियन आयन में चीन भारत को घेर लेगा

जिसका इफेक्ट भारत के इंटरनेशनल ट्रेड पर
तो पड़ेगा ही साथ ही साथ यह देश की सेफ्टी
के लिए भी खतरा है असल में चीन जानबूझकर
भारत के पड़ोसी देशों की तरफ दाना फेंकता
है ताकि भारत को घेर सके पहले बांग्लादेश
फिर श्रीलंका और अब इसकी नजर मालदीव पर है

वहीं पाकिस्तान तो पहले से ही भारत के
खिलाफ था ही और इस बात का फायदा चीन बखूबी
उठाता रहा चीन भारत से ज्यादा
इन्वेस्टमेंट उसके पड़ोसी देशों में करता
है डेवलपमेंट के नाम पर उन्हें भर भर के
कर्ज देता है जिसके नीचे दबकर उन की कमर

टूट जाती है और वह गर्दन उठाने के काबिल
तक नहीं रहते अब ऐसे में भैया चीन ने
पाकिस्तान और श्रीलंका के बाद मालदीव पर
यही चाल फेंका है और उसकी यह चाल कहीं ना
कहीं कामयाब होती भी दिखाई दे रही है खैर

जितना जरूरी भारत के लिए मालदीव है उतना
ही इंपॉर्टेंस भारत की भी मालदीव के लिए
है जी हां दरअसल मालदीव की इकॉनमी टूरिजम
पर डिपेंड करती है इसका अंदाजा आप यहीं से
लगा सकते हैं कि यहां 70 पर नौकरियां अगले

टूरिजम सेक्टर से पैदा होती हैं और इसमें
होने वाली 14 से 20 पर इनकम का सोर्स
भारतीय टूरिस्ट ही है जब पूरी दुनिया
कोरोना महामारी की वजह से आर्थिक तंगी से
जूझ रही थी तब भारत के 63000 टूरिस्ट वहां

गए थे पहले 3 साल के आंकड़ों के मुताबिक
के कुल टूरिस्ट में भारतीयों की
हिस्सेदारी तकरीबन 15 से 25 पर रही है
मालदीव में हर साल 20 लाख लोग करीब घूमने
जाते हैं इनमें भारत से 2021 में 2.91 लाख

2022 में 2.41 लाख और 2023 में तकरीबन
2.10 लाख टूरिस्ट मालदीव गए दिल्ली में
टूरिस्ट कंपनियों की माने तो इस साल
क्रिसमस और नए साल की छुट्टी मनाने भारत
से मालदीव जाने वालों की संख्या करीब 30

से 50000 के बीच रही है यह वो सीजन होता
है जब कुल संख्या के 30 पर लोग छुट्टियां
मनाने मालदीव जाते हैं जी हां यानी मालदीव
की इकॉनमी में भारत की बहुत बड़ी

हिस्सेदारी है भैया यही नहीं मालदीव का
एजुकेशन सिस्टम भी भारत पर ही टका हुआ है
देखिए यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक
मालदीव में कुल 212 स्कूल हैं इनमें 205
सरकारी हैं इंपैक्ट एंड पॉलिसी रिसर्च

इंस्टिट्यूट के रिपोर्ट के अनुसार इनमें
पढ़ाने वाले 25 पर टीचर भारतीय ही तो हैं
यानी हर चौथा टीचर भारतीय है और यह
ज्यादातर हायर और मिडिल रैंक पर हैं यदि
मालदीव से ये टीचर हट जाएंगे तो उसका

एजुकेशन सिस्टम बिगड़ सकता है मालदीव में
टीचर की नौकरी कर चुके केरल के कोलम जिले
के निवासी वीएस अरविंद बताते हैं कि
उन्हें फाइनली प्रॉब्लम्स की वजह से वापस
भारत लौटना पड़ा लेकिन वहां आज भी सैकड़ों
टी र्स हैं जो सालों से वहां पर पढ़ा रहे

हैं हर साल वहां नए टीचर रिक्रूट होते हैं
हर साल मालदीव की सरकार टीचरों की भर्ती
के लिए भारतीयों के लिए साउथ के स्टेट्स
में टेस्ट कंडक्ट कराती है जिसका रीजन यही
है कि चीन और दूसरे देशों के मुकाबले में
भारतीय टीचर उसे बेहद सस्ते पड़ते हैं

मालदीव में काम कर चुके ऐसे ही एक और टीचर
तमिलनाडु के सेलम निवासी विजन सेलमन एस
कार्तिक बताते हैं कि मालदीव में कई
द्वीपों के बीच की दूरी 100 किलोमीटर तक
है आधा दिन वहां रहने में आने जाने में
चला जाता है और हमारे देश के कई भारतीय

शिक्षक उसी आइलैंड पर रहकर पढ़ाते हैं
इसलिए वहां के बच्चों के लिए भारतीय लोग
जाने पहचाने भी हैं इसके अलावा सेफ्टी की
नजर से भी भारत मालदीव के लिए जरूरी है
देखिए उसकी मदद के लिए वहां भारतीय सेना
तैनात की गई है वहीं इससे पहले भारत ने

मेडिकल इवेक्युएशन और इंडियन ओशियन में
निगरानी रखने के लिए मालदीव को दो
हेलीकॉप्टर और एक डॉर्नियर एयरक्राफ्ट दान
में दिया था इस समय मालदीव में तैनात 75
भारतीय सैनिकों में से ज्यादातर एयर
क्राफ्ट को ऑपरेट करते हैं और इसके रखरखाव

का ध्यान रखते हैं भारतीय सेना लंबे समय
से मालदीव में है ऑस्ट्रेलिया में नेशनल
सिक्योरिटी कॉलेज में सीनियर रिसर्च फेलो
डॉक्टर डेविड ब्रूस्टर कहते हैं कि इंडियन
सोल्जर यहां मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स के
तहत काम करते हैं उनका मेन काम
हेलीकॉप्टर्स के जरिए मरीजों को छोटे

द्वीपों से अस्पतालों तक पहुंचाने में
हेल्प करना है तो क्या ऐसे में भारत से
दूरी बनानी मालदीव के लिए सही रहेगी कमेंट
जरूर कर दें

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