क्या किसानों के आगे झुक जाएगी मोदी सरकार ? | Why Are Indian Farmers Protesting Again? - instathreads

क्या किसानों के आगे झुक जाएगी मोदी सरकार ? | Why Are Indian Farmers Protesting Again?

दिल्ली चलो दिल्ली चलो फिर से दिल्ली चलो
यह नारा आज पंजाब हरियाणा और दिल्ली के कई
बॉर्डर्स पर चीख चीक कर लगाया जा रहा है
कोई अपने ट्रैक्टर पर खेत खलियान से निकल

पड़ा है तो कोई पैदल ही दिल्ली की तरफ
मार्च कर रहा है इनके इरादे साफ हैं मांग
साफ है और सरकार के खिलाफ विरोध की आग भी
इनके दिलों में कूट-कूट कर भरी है लेकिन

सवाल यह उठता है साहब कि आखिर यह इतने
बौखलाए हुए क्यों हैं पहले तो इनका विरोध
काले कानून को लेकर था और एक लं े इंतजार
के बाद सरकार ने इनकी मांगों को मान भी

लिया था तो फिर क्यों अब यह एक बड़े बवाल
को हवा देने का काम कर रहे हैं महज 2 साल
में ऐसा क्या ही हो गया जो उन्होंने मोदी
सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट का बिगुल बचा
दिया और ऐसे में अब सरकार इनकी तरफ क्या

एक्शन ले रही है साल था 2021 तारीख 10
दिसंबर और दिन गुरु नानक जी का जन्म दिवस
इस दिन देश के प्रधानमंत्री मोदी जी टीवी
पर आते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते
हुए उन्होंने यह कह दिया कि मैं आंदोलन कर
रहे किसानों से अपील करता हूं कि आप

अपने-अपने घर लौट जाएं कृषि कानूनों को
मैं वापस लेता हूं और अब आप अपने खेतों
में लौट जाएं अपने परिवार के पास जाएं और
आइए मिलकर एक नई शुरुआत करते हैं इसके बाद
तो जैसे किसानों में जश्न का एक अलग माहौल

था लेकिन नाउ कट टू टू इयर्स तो आज ऐसा
नहीं लग रहा कि सब कुछ फिर रिपिटेटिव मोड
पर चल रहा है लगभग 200 हज किसान एक बार
फिर से दिल्ली कूछ कर गए हैं सड़कों पर
भीड़ के वही हाल हैं एकदम उसी तरह से हैवी

पुलिस फोर्स डिप्लॉयड है और किसानों का भी
प्रोटेस्ट 2.0 चल रहा है बस फर्क सिर्फ
इतना है कि इस बार मुद्दा काला कानून नहीं
है बल्कि इस बार मुद्दा भाई यह है कि
सरकार ने अपने वायदे पूरे नहीं किए जो

उन्होंने 2 साल पहले किए थे किसान कह रहे
हैं कि हालांकि उन्होंने एमएस स्वामीनाथ
को भारत रत्न से सम्मानित तो कर दिया
लेकिन उनकी रिपोर्ट को लागू नहीं किया जो
किसानों की असल मांग है इसके अलावा

किसानों को प्रदूषण कानून से मुक्त रखने
का वादा भी किया था लेकिन कोई भी वादा
पूरा नहीं किया गया अब पहले तो वह केवल
सरकार को इस प्रोटेस्ट की धमकी दे रहे थे

और अपनी मांग मंगवाने पर उतारू थे लेकिन
ट्यूजडे को दिल्ली चलों के नारे के साथ
उन्होंने आखिर प्रोटेस्ट की शुरुआत कर ही
थी सिंघु बॉर्डर शंभू बॉर्डर और दिल्ली से
जुड़ने वाले सभी बॉर्डर से किसानों ने

दिल्ली में घुसने का अभियान शुरू कर दिया
है और ले देकर इसके खिलाफ पुलिस भी सखते
में आ गई है उन्होंने अंबाला जींद और
फतेहाबाद जैसे कई जिलों में कंक्रीट ब्लॉक
बैरिकेट्स और कटीले तारों से बॉर्डर को

सील कर दिया है और इसके तहत 15 जिलों में
तो धारा 144 भी लगा दी गई है ताकि किसी भी
कीमत पर किसान आगे ना बढ़ सके यहां तक कि
अब तो पांच या उससे ज्यादा लोगों के एक
साथ इकट्ठा होने पर भी रोक है और अगर कोई

ट्रैक्टर ट्रोलियस प्रदर्शन करने निकलता
है वह एक्सेप्टेबल नहीं है इस पर भी बैन
लगाया गया है किसानों को रोकने के लिए
चंडीगढ़ प्रशासन ने तो यहां तक ऐलान कर

दिया है कि शहर में 60 दिनों की अवधि के
लिए धारा 144 लागू रहेगी वैसे ऐसे इंतजाम
केवल पड़ोसी राज्यों तक सीमित नहीं है
बल्कि दिल्ली पुलिस ने भी इस प्रदर्शन को

रोकने के लिए तैयारी कर रखी है सबसे पहले
तो पुलिस द्वारा टीकरी बॉर्डर पर ड्रोन के
जरिए निगरानी रखी जा रही है साथ ही सिंघु
बॉर्डर पर तीन लेयर की सिक्योरिटी का
प्लान बनाया गया है बैरिकेडिंग भी की गई

है इसके साथ-साथ पूरे सिंघु बॉर्डर से
लेकर मुकरबा चौक तक 16 किमी के रास्ते को
आठ जोन में बांट दिया गया है कुल मिलाकर
दिल्ली बॉर्डर के पास किलेबंदी जैसा माहौल
है पैरा फोर्सेस कटीले तार और कंक्रीट

मिक्सर की भी पूरी प्लानिंग है लेकिन केवल
एक ही पॉइंट को लेकर इतना प्रदर्शन क्या
थोड़ा ज्यादा नहीं लगता वेल इसका जवाब
जानने से पहले आपको बता दें कि आर्टेरिया

के साथ कोलैबोरेट करके हम आपके लिए लाए
हैं रामलला की हूबहू छवि जो अयोध्या के
राम मंदिर में विराजित रामलला की मूर्ति
का ही प्रतिरूप है वही दिव्य रूप सौम्य
मुस्कान और मनमोहक छवि आपको श्रीराम के इस

बाल स्वरूप में भी मिलेगी जो आर्टेरिया ने
बखूबी बनाया है तो अभी ऑर्डर करने के लिए
मिस्टिका 10 कूपन कोड का इस्तेमाल करना ना
भूलें इस पर आपको 10 पर का डिस्काउंट भी
मिल जाएगा और इसका लिंक आपको डिस्क्रिप्शन
में मिलेगा आइए अब अपनी कहानी पे वापस से

आगे बढ़ते हैं तो देखिए किसान आज इसलिए
बौखलाए हुए हैं क्योंकि सरकार ने जब तीन
काले कानूनों को वापस लिया था तब उन्होंने
बहुत से वादे किए थे उन्होंने ये विश्वास
दिलाया था कि आंदोलन से जुड़े और पराली

जलाने पर दर्ज सभी मामलों को वापस लिया
जाएगा साथ ही तब सरकार ने यह भी आश्वासन
दिया था कि एमएसपी के एक नए ढांचे पर काम
करने के लिए एक नई कमेटी बनाई जाएगी इस
कमेटी में राज्य सेंटर और कृषि विशेषक के
अलावा किसान नेताओं को भी शामिल किया

जाएगा और इसमें सबसे बड़ा वायदा तो यह था
कि पंजाब की तर्ज पर हरियाणा और उत्तर
प्रदेश राज्य सरकारें भी मृतक किसानों के
परिजनों को 5 लाख का मुआवजा और नौकरी भी
देंगी लेकिन इन सभी वादों को कहीं ना कहीं
सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया पिछले
सालों तक इस पर कई बार सरकार और किसान के
बीच बातचीत भी होती रही और यहां तक कि

पिछले सोमवार भी इस पर सरकार और किसानों
के बीच में बैठक हुई थी लेकिन इस बैठक का
कोई भी हल नहीं निकला कमा कल की बात तो यह
थी साहब कि सरकार और किसान के बीच यह बैठक
लगभग 5 घंटे तक चली लेकिन आखिर में
किसानों ने यही फैसला किया कि वह 13 फरवरी
को 10 बजे दिल्ली कूज करेंगे और अब उनकी
मांगे बिल्कुल साफ होंगी दरअसल अब किसान

चाहते हैं कि सरकार डॉक स्वामीनाथ रिपोर्ट
की सिफारिशों के अकॉर्डिंग ही सभी फसलों
के लिए एमएसपी यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस
कानून बनाए अब अगर आप सोच रहे हैं कि
स्वामीनाथ रिपोर्ट क्या है तो बता दें कि

18 नवंबर 2000 चा को प्रोफेसर एमएस
स्वामीनाथ की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई
गई थी जिसमें देश के किसानों की हालत
सुधारने के रास्ते खोजे गए थे इस रिपोर्ट
में बताया गया था कि सरकार किसानों की

फसलों को लागत मूल्य से सीधे-सीधे डेढ़
गुना कीमत पर खरीदे और आगे अपने हिसाब से
बेच इसके अलावा कमेटी ने स्पेशली किसानों
के लिए लैंड रिफॉर्म्स सिंचाई प्रोडक्शन
क्रेडिट और बीमा फूड सिक्योरिटी से

संबंधित सिफारिशें भी की थी लेकिन अभी तक
इस रिपोर्ट के अकॉर्डिंग सरकार और किसान
के बीच कोई सहमति बन नहीं पाई है और इसे
लेकर ही वह लंबे समय तक सड़कों पर रहने के
लिए तैयार भी हैं अब उनकी मांग है कि भाई

किसानों और मजदूरों के लिए गए कर्ज को माफ
कर दिया जाए इसके साथ ही एक ऋण राहत
कार्यक्रम भी लागू किया जाना चाहिए इसके
अलावा नेशनल लेवल पर लैंड एक्विजिशन लॉ
2013 को भी लगाया जाना चाहिए जिसमें

किसानों से लिखित सहमति ली जाती है और
कलेक्टर रेट से चार गुना मुआवजा दिया जाता
है अब किसानों का यह भी कहना है कि 58 साल
से ज्यादा उम्र के खेती हर मजदूरों के लिए
प्रतिमाह पेंशन देने की योजना लागू की जाए

और दिल्ली आंदोलन के दौरान जान गवाने वाले
किसानों के परिवारों को भी मुआवजा दिया
जाए किसानों के पास एक मुद्दा यह भी है कि
लखीमपुर हिंसा के पीड़ितों को न्याय मिले
अक्टूबर 2021 में घटी इस घटना में आठ

लोगों की जान चली गई थी 12 फरवरी को
सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में केंद्रीय
मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष
मिश्रा को दी गई अंतरिम जमानत और बढ़ी भी

थी इसे लेकर भी किसान थोड़ा नाराज है इसके
अलावा उनके कुछ मुद्दे यह भी हैं कि
एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स डेरी प्रोडक्ट्स फल
सब्जियों और मांस पर इंपोर्ट प्राइस कम

करने के लिए अलाउंस बढ़ाया जाए दूसरा
मनरेगा के तहत रोजाना दिहाड़ी को ₹ 7700
किया जाए और सालाना कम से कम 200 दिन का
रोजगार मिले खास तौर पर इसे एग्रीकल्चर
एक्टिविटीज के साथ तो जोड़ा ही जाए अब
एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स अच्छी क्वालिटी के

हो यह सुनिश्चित करने के लिए नकली बीज
कीटनाशकों और फर्टिलाइजर बेचने बनाने वाली
कंपनियों पर स्ट्रिक्ट एक्शन लिए जाएं
इसके अलावा बिजली हर किसी को बरा ब
क्वांटिटी में मिले यह सुनिश्चित करने के

लिए इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल को रद्द
किया जाए दरअसल सेंट्रल गवर्नमेंट यह बिल
2020 में लाई थी ताकि बिजली क्षेत्र की जो
कमर्शियल एंड इन्वेस्टमेंट एक्टिविटीज को
वह बेहतर कर सके मगर इस बिल को कई मोर्चों

पर क्रिटिसाइज भी किया गया इसलिए किसान
चाहते हैं कि भाई यह बिल जो है किसी भी
तरह से रद्द हो जाए और इसी के चलते सरकार
भी इस बिल को 17वीं लोकसभा में रद्द कर
देगी यहां किसान के लीडर राघवेंद्र तिवारी

ने कहा था कि आज की महंगाई को देखते हुए
किसानों की आय ब बेहद कम हो गई है सरकार
कई एरिया को बढ़ावा देने के लिए विशेष
पैकेज देती है लेकिन कृषि को बचाने की
बजाय उद्योगपतियों को किसानों की जमीन

लेने की योजनाएं बनाई जा रही हैं उन्होंने
कहा कि यदि हर हाथ को रोजगार देना है और
गांव से पलायन को रोकना है तो कृषि को
प्रॉफिटेबल इंडस्ट्री में बदलना ही होगा
वैसे आपको यहां पर बता दें कि किसानों की

कई मांगों को मानने के लिए सरकार ने भी
सहमति जताई है और वो इस क्षेत्र में काम
करने के लिए भी तैयार है लेकिन मामला जो
है ले देकर एमएसपी गारंटी पर अटक ही जाता

है ऐसे में एक सोचने वाली बात यह भी है कि
आखिर किसानों की यह मांग कहां तक जायज है
क्या सच में ऐसा हो सकता है कि सरकार
एमएसपी को स्वीकार कर ले देखिए इस पर
सरकार का कहना है कि बार-बार नई मांगे
जोड़ते रहने से किसी बात का सॉल्यूशन नहीं

मिल सकता है इस बात का सॉल्यूशन बात करने
से ही निकल सकता है अभी सरकार ने किसानों
की कई मांगों को एक्सेप्ट करने का आश्वासन
भी दिया है जिसमें एमएसपी कर्ज माफी और
जमीन का किराया शामिल है इसके अलावा सरकार

की तरफ से किसान सम्मान निधि के तहत 75 हज
करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं 5 साल में 35
लाख करोड़ से ज्यादा दिया जा चुका है
लेकिन एमएसपी की गारंटी देने पर सरकार ने
बातचीत करने का सुझाव दिया है और एक तरफ

से देखा जाए तो इस मांग को मानने से भी
सरकार को भी कई परेशानियों का सामना करना
पड़ सकता है जाहिर है भाई कि एक मास लेवल
पर फसलों को खरीदना उसे सुरक्षित रखना और
इसकी मिनिमम गारंटी को मानना सरकार के लिए

पॉसिबल नहीं हो सकता इसके अलावा ग्लोबल
प्राइसेस और एक्सपोर्ट कंपट वने भी एक
बड़ी प्रॉब्लम है जिससे सरकार को निपट ना
है इसी भाषा में समझाएं तो अगर सरकार सभी
क्रॉप्स को मिनिमम सपोर्ट प्राइसेस पर
खरीदेगी तो उसे इस रेट पर बाहर बेचना आसान

नहीं होगा क्योंकि खुद प्राइवेट ट्रेडर
इसे सरकार से एमएसपी पर खरीदने के लिए
राजी नहीं होंगे ले देकर अगर यह मिनिमम
गारंटी सपोर्ट प्राइसेस लॉ लागू हो भी
जाता है तो सरकार के सामने सबसे बड़ा डर

यह होगा कि भाई देश का एग्रीकल्चर
एक्सपोर्ट इंटरनेशनल मार्केट में नॉन कंपट
ना हो जाए दरअसल ज्यादातर फसलों के लिए
एमएसपी अक्सर डोमेस्टिक और इंटरनेशन
बाजारों में जो रेट होता है उससे ज्यादा

होता है ऐसे में यह सारे माल की खरीद का
बोझ पूरी तरह से सरकार पर होगा और फिर
सरकार इतनी फसल का करेगी क्या यह उसे कैसे
बचाएगी और इतनी फसल का भंडारण कैसे करेगी
यानी बात सिर्फ इतनी सी है कि इस समस्या
का समाधान बैठकर ही निकाला जा सकता है ना

तो पूरी तरह किसानों की मांग को जायज
ठहराया जा सकता है और ना ही सरकार पर
एमएसपी का बोझ लादा जा सकता है वैसे
दोस्तों आपका इसके बारे में क्या कहना है
आप फार्मर्स प्रोटेस्ट किस तरह से देखते

हैं और इसके क्या जरूरी समाधान हो सकते
हैं हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं
वीडियो अच्छी लगी हो तो इसे लाइक और शेयर
कर दें

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