क्या ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडिया की आजादी छीन सकती है? | Truth Behind Indian Indpendence Act 1947 - instathreads

क्या ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडिया की आजादी छीन सकती है? | Truth Behind Indian Indpendence Act 1947

1947 से लेकर अब तक हर बार 15 अगस्त के
दिन देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर और
26 जनवरी के दिन राष्ट्रपति कर्तव्य पद पर
झंडा फहरा करर भारत देश को मिली आजादी और
संविधान के लागू होने की याद दिलाते आ रहे
हैं लेकिन यहां पर कुछ सवाल हैं जो

बार-बार सामने आते हैं जैसे कोई कहता है
कि भारत को आजादी 15 अगस्त को नहीं मिली
क्योंकि 1950 तक तो हम ब्रिटेन के
डोमिनियन में थे क्योंकि अगर सच में हमें

आजादी मिली होती तो हमने सभी अंग्रेजों को
मारकर क्यों नहीं भगाया क्यों आजादी के
बाद भी अंग्रेज ऑफिसर लॉर्ड माउंट बेटन को
गवर्नमेंट जनरल बनाया गया तो वहीं पर कोई
कहता है कि आजादी मिली ही नहीं लीज पर ली

गई है और 999 साल के बाद हम फिर से गुलाम
हो जाएंगे और यहां हमारे मन में भी एक
सवाल आता है कि जब ब्रिटिश संसद ने इंडिया
इंडिपेंडेंस एक्ट पास करके पावर का

ट्रांसफर किया या कहे कि भारत को आजाद
किया तो क्या ब्रिटिश सरकार फिर से इस
एक्ट को वापस लेकर भारत की आजादी को छीन
सकती है क्योंकि संसद द्वारा बनाए गई एक्ट
को तो संसद द्वारा वापस भी लिया जा सकता

है अगर आपके माइंड में भी ऐसा कोई सवाल है
तो बने रहे हमारे साथ वीडियो के अंत तक
दोस्तों आज हम इस बारे में चर्चा इसलिए कर
रहे हैं क्योंकि कुछ समय पहले बीजेपी की
फीमेल स्पोक्स पर्सन रूचि पाठक का एक

वीडियो वायरल हुआ था जिसमें रूचि ने कहा
था कि भारत कंपलीटली आजाद नहीं है बल्कि
नेहरू ने लिखित समझौता करके ब्रिटिश
क्राउन से 99 साल के पट्टे पर भारत को
आजादी दिलाई है इस बयान को लेकर कांग्रेस

के स्पोक्स पर्सन गौरव जैन ने तंज कसते
हुए कहा था कि बीजेपी के प्रवक्ता
whatsapp2 4 में वापस जाना होगा 1 जनवरी
1947 यानी कि नए साल के दिन एक काले रंग
की ऑस्टिन प्रिंसेस कार ब्रिटिश प्राइम

मिनिस्टर इटली के निवास 10 डाउनिंग
स्ट्रीट पर आकर रुकती है इस कार में बैठे
थे लुई माउं बेटन जो कि उस समय ब्रिटेन के
राजा जॉर्ज सिक्स के चचेरे भाई और 1939 से

1945 तक पूरे 6 साल चले सेकंड वर्ल्ड वॉर
के आर्मी चीफ ऑफिसर थे प्राइम मिनिस्टर
इटली चाहती थी कि माउंट बेटन को भारत का
नया वाइस रॉय बनाकर भेजा जाए जिससे कि
भारत में चल रहे ट्रांसफर ऑफ पावर के

मुद्दे को सॉल्व किया जा सके इटली ने
माउंट बेटन को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें
पता था कि भारत की आजादी यानी ट्रांसफर ऑफ
पावर के मुद्दे को सुलझाने का काम माउंट
बेटन के अलावा और कोई नहीं कर सकता
ट्रांसफर ऑफ पावर का मतलब भारत में भारत

का खुद का एक स्टेबल डेमोक्रेटिक सिस्टम
तैयार करना था और फिर एक लंबे डिस्कशन के
बाद इटली ने घोषणा करवा दी कि ब्रिटेन
गवर्नमेंट जून 1948 से पहले भारत को पूर्ण
स्वराज्य का अधिकार दे देगी लेकिन माउंट

पेटन यह जानते थे कि ट्रांसफर ऑफ पावर का
मामला बहुत पेचीदा है इसको सुलझाना लोहे
के चने चबाने जैसा होगा इसलिए वोह इस
मुसीबत में फंसना चाहते नहीं थे और फिर इस

मुसीबत से बचने के लिए वोह अपने चचेरे भाई
जॉर्ज सिख से मिलने गए जो माउंट बेटन को
डिकी कहकर बुलाते थे जॉर्ज ने इस समस्या
से बचने में उनकी कोई मदद तो नहीं की

लेकिन माउंट बेटन से कहा कि टकी अभी भारत
में इस तरह का माहौल बना हुआ है कि
कांग्रेस का कोई भी लीडर नहीं चाहता कि
भारत कॉमनवेल्थ का हिस्सा बना रहे इसलिए
तुम्हें यह कोशिश करनी है कि भारत एकजुट

रहे या फिर उसका बंटवारा करना पड़े लेकिन
भारत कॉमनवेल्थ का हिस्सा बना रहना चाहिए
यानी कि अब ट्रांसफर ऑफ पावर और भारत के
बंटवारे की जिम्मेदारी लुई माउंट बेटन पर
थी ब्रिटेन से भारत आते वक्त विमान में

 

बैठे हुए माउंट बेटन के माइंड में बहुत से
सवाल गूंज रहे थे जैसे कि क्या भारत की
रियासत सत एक होने के लिए मान जाएंगी या
फिर भारत का बंटवारा होगा और अगर बंटवारा
हुआ तो भारत की शासन व्यवस्था कैसी होगी

इत्यादि भारत पहुंचकर माउंट बेटन ने सबसे
पहले नेहरू जी से मुलाकात की नेहरू जी और
माउंट बेटन दोनों ही पॉलिटिक्स में एक्टिव
रहने की वजह से एक दूसरे को बहुत अच्छे से
जानते थे नेहरू जी भी चाहते थे कि माउंट

बेटन उनके साथ मिलकर काम करें क्योंकि
भारत की सभी रियासतों के दावेदार ब्रिटिश
शासन के करीब थे लेकिन जब माउंट पेटन ने
भारत के बंटवारे की बात की तो नेहरू जी ने

इस संबंध में गांधी जी से बात करने की
सलाह दी और फिर नेहरू जी की सलाह पर माउं
पेटन ने गांधी जी से मुलाकात की गांधी जी
शुरुआत से ही बंटवारे के विरोधी रहे हैं
और फिर माउंट पेटन के मुंह से बटवारे की

बात सुनकर आग बबूला हो गए उन्होंने गुस्से
में कहा था आप हमें हमारे हाल पर छोड़ दो
और जितना जल्दी हो सके पतली गली से निकल
लो कैसे क्या करना है हम सब कर लेंगे हमें
आपकी कोई जरूरत नहीं है गांधी जी के पास

इतनी ताकत तो नहीं थी कि वह अकेले बंटवारे
को रोक सके लेकिन माउंट बेट इस बात को
अच्छी तरह से जानता था कि यह बूढ़ा अकेले
तो कुछ कर नहीं सकता लेकिन अगर इसने हमारे
प्लान का विरोध किया तो हिंदुस्तान की

पूरी जनता रोड पर उत आएगी इसी बीच माउंट
बेटन को कांग्रेस के सबसे बड़े नेता सरदार
वल्लभ भाई पटेल का सख्त भाषा में लिखा हुआ
एक खत मिला जिसमें उन्होंने किसी
अपॉइंटमेंट के बारे में लिखा था इस खत में

लिखी हुई सख्त भाषा माउंट बेटन को पसंद
नहीं आई तो उन्होंने पटेल से यह खत वापस
लेने को कहा लेकिन पटेल नहीं माने तो
माउंट बेटन ने धमकी देते हुए उनसे कहा था

कि आप मुझे समझते क्या हैं अगर आपको सब
कुछ अपने हिसाब से ही करना है तो फिर आप
ही कर लो मैं भी अपना विमान बुलाकर वापस
चला जाता हूं माउंट बेटन की इस बात को

सुनकर पटेल ने अपना खत वापस लिया और फाड़
दिया अब यहां अकड़ दोनों में बराबर थी
लेकिन अच्छी बात यह थी कि दोनों समझदार थे
तो दोनों ने आपस में सुलह करके बीच का
रास्ता निकाला मतलब सांप भी मर जाए और

लाठी भी ना टूटे और फिर यहां से इनके
संबंध बिगड़ने की जगह अच्छे होते चले गए
लेकिन बंटवारे को लेकर तो पटेल भी सहमत
नहीं हुए जब यह तीनों बड़े नेता बटवारे को

लेकर सहमत नहीं थे तो माउंट बेटन जिन्ना
के पास गए और उन्हें बताया कि कांग्रेस का
कोई भी लीडर बंटवारे को लेकर सहमत नहीं है
लगता है भारत में बंटवारा किए बिना ही
इंडियन गवर्नमेंट की सत्ता को एस्टेब्लिश

करना पड़ेगा इस बात पर भड़क कर जिन्ना ने
कहा कि मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा मुझे
बस एक चीज चाहिए और वह है पाकिस्तान और
हिंदुस्तान का बंटवारा जिन्ना के ऐसे लफ्ज
सुनकर माउंट बेटन को समझ में आ गया था कि

भारत में रहने वाले करोड़ हिंदू और 10
करोड़ मुसलमानों का साथ में रहना मुश्किल
तो है लेकिन फिर भी हिंदू और मुसलमानों के
बीच चल रहे इस मनमुटाव को अच्छे से समझने
के लिए माउंट बेटन ने पंजाब का दौरा किया

पंजाब पहुंचकर उन्होंने देखा कि लोग एक
दूसरे को मारने पर उतारू हैं हर दूसरे दिन
दंगे की खबर आ रही है और फिर उन्हें खबर
मिलती है कि बंगाल में भी यही हाल बना हुआ
है पंजाब और बंगाल की कंडीशन को देखकर

माउंट बेटन को यह समझ आ चुका था कि जल्द
से जल्द कोई फैसला लेना पड़ेगा क्योंकि
अगर गृह युद्ध छिड़ गया तो हम कुछ कर नहीं
पाएंगे और फिर वह पंजाब से सीधा शिमला चले
गए और शिमला पहुंचकर ब्रिटिश सरकार द्वारा

तैयार किया हुआ प्लान जिसको वह दिल्ली में
जाकर सभी के सामने बताने वाले थे उसे
उन्होंने शिमला में ही नेहरू जी को दिखाया
नेहरू जी इस प्लान को रात भर में अच्छी

तरह स्टडी कर रहे थी इस प्लान में लिखी
हुई एक लाइन नेहरू को बिल्कुल पसंद नहीं
आई और उसमें लिखा था कि हिंदू और मुसलमान
चाहे तो दोनों मिलकर इस प्रांत के किसी भी
क्षेत्र में अपना अलग एक देश बना सकते हैं
और फिर सुबह माउंट बेटन के सामने इस प्लान

को बेड पर फेंकते हुए नेहरू जी ने बोला कि
अगर ऐसा हुआ तो सब बर्बाद हो जाएगा
कांग्रेस इसके लिए कभी राजी नहीं होगा
क्योंकि ऐसा करने से देश कई टुकड़ों में
बट सकता है नेहरू जी की बात को सुनकर

माउंट बेटन को भी यह प्लान उचित नहीं लगा
और फिर उन्होंने 6 महीने में तैयार किए
अपने इस प्लान को रद्द कर दिया अब माउंट
बेटन की 6 महीने की मेहनत पानी में चली गई

थी और अब उनके पास ट्रांसफर ऑफ पावर को
लेकर ना तो कोई प्लान था और ना ही ज्यादा
समय क्योंकि गृह युद्ध की संभावना बनी हुई
थी तो इस समस्या से निपटने के लिए माउंट

बेटन को अपने राजनीतिक गुरु वीपी मेनन की
याद आती है और वह वीपी मेनन के पास जाते
हैं और बताते हैं कि गुरुजी इस तरह की
समस्या है बताओ क्या करें तब वीपी मेनन

इन्हें डोमिनियन स्टेटस की सलाह देते हैं
डोमिनियन स्टेटस से मतलब भारत और
पाकिस्तान दो देश बना दिए जाएंगे और सभी
रियासतों को यह हक होगा कि जिस देश को

चुनना चाहे अपने हिसाब से चुन सकती हैं
माउंट बेटन को यह प्लान बहुत पसंद आया और
इसीलिए एक प्रोफार्मा तैयार किया जिसे
माउंट बेटन प्लान कहा जाता है और फिर इस
प्लान को सभी के सामने रखा गया तो

कांग्रेस मुस्लिम लीग और सिख नेता सभी
इसके लिए राजी हो गए सभी की सहमति के बाद
इस प्लान को ब्रिटिश सांसद में अप्रूव
होने के लिए भेज दिया गया लेकिन यहां पर
एक सवाल आता है कि जब कांग्रेस के सभी
लीडर बंटवारे के विरोध में थे तो फिर ये

इस प्लान को लेकर सहमत कैसे हो गए इसकी
वजह थी कि देश में लगातार गृह युद्ध के
हालात बने हुए थे और अगर गृह युद्ध छड़
जाता तो किसको सत्ता मिलती कुछ कहा नहीं

जा सकता हो सकता था कि देश और भी कई
टुकड़ों में बट जाता इस गृह युद्ध को
टालने के लिए तो कांग्रेस चाहती थी कि
कैसे भी करके ट्रांसफर ऑफ पावर का मुद्दा

जल्द से जल्द कंप्लीट हो जाए तो उनके पास
एक ही ऑप्शन था और वह था डोमिनियन स्टेटस
क्योंकि इसके लिए ब्रिटिश सांसद को केवल
एक कानून पास करना था बस भारत को इसके कई

फायदे भी थे जैसे अभी तक भारत का अपना कोई
संविधान नहीं था और संविधान बनने तक भारत
को सिविल सर्वेंट्स और मिलिट्री ऑफिसर्स
की जरूरत थी और डोमिनियन स्टेटस के तहत

भारत ब्रिटेन के सभी सर्विसेस को इस्तेमाल
कर सकता था इसको आप इस तरह से समझ सकते
हैं कि जब तक आपके पास अपनी कार नहीं है
तब तक किसी और की कार रेंट पर लेकर यूज
करना और फिर जब अपनी खुद की कार खरीद लो

तो दूसरे की कार को हमेशा के लिए वापस दे
देना दूसरा कारण यह था कि 565 छोटी बड़ी
रियासतों का फैसला होना अभी बाकी था अगर
ब्रिटिश सरकार इसमें हस्तक्षेप ना करती तो
यह रियासतें अपने-अपने क्षेत्र में बहुत

सी चीजें जैसे कम्युनिकेशन चैनल्स
टेलीग्राफ
18 जुलाई को ब्रिटिश गवर्नमेंट द्वारा
शाही मोहर लगा दी जाती है मोहर लगने के
साथ ही 15 अगस्त 1947 को इंडिया में

इंडिपेंडेंस एक्ट इंप्लीमेंट हो जाता है
इसी एक्ट के तहत संविधान सभा आजाद भारत की
पहली विधायिका बनी और जवाहरलाल नेहरू भारत
सरकार के पहले प्रधानमंत्री बने 2 राय के
पद को भंग करके लोई माउन बेटन को गवर्नर

जनरल बनाया गया लेकिन सवाल यह है कि जब 15
अगस्त 1947 को हम आजाद हो गए तो लॉर्ड
पेटन को गवर्नर जनरल क्यों बनाया गया इसकी
वजह था डोमिनियन स्टेटस इंडिया
इंडिपेंडेंस एक्ट के तहत पावर का ट्रांसफर

तो जल्द ही हो गया लेकिन डोमिनियन स्टेटस
अभी भी कायम था डोमिनियन स्टेटस के
अकॉर्डिंग ब्रिटेन के राजा का एक
प्रतिनिधि यानी कि गवर्नर जनरल वह सारी
जिम्मेदारियां संभालने वाला था जो आज के

समय में इंडिया के प्रेसिडेंट संभालते हैं
यह पद माउंट पेटन को इसलिए दिया गया
क्योंकि नेहरू जी और सरदार वल्लभ भाई पटेल
चाहते थे कि रियासतों के विलय में माउंट
बेटन उनकी मदद करें क्योंकि रजवाड़ों को

भारतीय संघ में शामिल करना इतना आसान नहीं
था तभी माउंट बेटन ने पटेल को सलाह दी कि
अगर वह रजवाड़ों के कुछ अधिकार कायम रखें
तो वे भारतीय संघ में शामिल हो सकती हैं
और फिर इन सभी 565 रियासतों की सहमति के
लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कठोर नीति का

पालन किया जिससे जम्मूकश्मीर जूनागढ़ और
हैदराबाद जैसी कुछ रियासतों को छोड़कर
बाकी सभी रियासतों ने विलय पत्र पर साइन
कर दिए माउंट बेटन 21 जून 1948 तक गवर्न

गर्नर जनरल के पद पर रहे और इनके रिजाइन
देने के बाद श्री राजगोपालाचारी पहले
भारतीय थे जो गवर्नर जनरल चुने गए और इस
तरह जब तक भारत का अपना संविधान बनकर

तैयार नहीं हुआ भारत ब्रिटिश गवर्नमेंट का
डोमिनियन बना रहा और फिर 26 जनवरी 1950 को
भारत का संविधान लागू होते ही इंडिया
इंडिपेंडेंस एक्ट को रद्द कर दिया गया
जिसके साथ डोमिनियन स्टेटस का सिस्टम भी

खत्म हो गया था अब हमारा सवाल यह है कि जब
इंडिया को आजादी इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट
के तहत मिली तो क्या कभी ब्रिटिश संसद इस
एक्ट को रद्द करके भारत को मिली आजादी

वापस ले सकती है देखिए इंडिया इंडिपेंडेंस
एक्ट के सेक्शन आठ के अकॉर्डिंग जब
संविधान सभा द्वारा संविधान बनकर तैयार हो
जाएगा तो इसे लागू करने से पहले संविधान
सभा को गवर्नर जनरल की सहमति लेनी होगी

लेकिन संविधान सभा में डॉक भीमराव जैसे
पढ़े-लिखे लोग थे तो संविधान बनकर तैयार
हुआ तो संविधान सभा के द्वारा इंडियन
इंडिपेंडेंस एक्ट का उल्लंघन किया गया

जिससे कि इंडिया के संविधान का इंडियन
इंडिपेंडेंस एक्ट के साथ कोई संबंध ना रहे
और भारत का संविधान भारतीय नागरिकों के
अकॉर्डिंग चले ना कि ब्रिटिश गवर्नमेंट के

अकॉर्डिंग दरअसल संविधान के आर्टिकल 395
के तहत भारत के संविधान को कॉन्स्टिट्यूशन
ऑटोक्थोनी हासिल हुई और इंडियन
इंडिपेंडेंस एक्ट अमान्य हो गया ऑटोक्थोनी
का मतलब होता है मूल जमीन से उपजा

संवैधानिक मूल्य एक देश का ऐसा संविधान
जिसे उसी देश के लोगों द्वारा बनाया गया
हो और उस पर पूर्ण रूप से केवल उस देश के
नागरिकों का अधिकार हो बाहर के किसी भी
व्यक्ति और किसी भी शक्ति का जिस पर कोई

असर ना हो मतलब अब ब्रिटिश गवर्नमेंट
इंडिया इंडिपेंडेंस एक्ट को रद्द करें जला
दे या कुछ भी करें अब भारत पर इसका कोई भी
असर नहीं होगा इस बात को इंडियन

कॉन्स्टिट्यूशन में क्लियर लिख दिया गया
है अब आप यहां खुद देख सकते हैं कि आज के
समय में किसी एक देश के द्वारा किसी दूसरे
देश की भूमि के एक छोटे से टुकड़े पर भी
कब्जा करने के लिए कितनी लाशें गिरें इसका

अंदाजा लगा लगा पाना कितना मुश्किल है इसे
आप इस तरह से समझ सकते हैं कि चाइना एक
सुपर पावर होते हुए भी अपने द्वीपीय भूखंड
ताइवान पर कब्जा करने की हिम्मत नहीं जुटा

पा रहा है और भारत पाकिस्तान के कब्जे
वाले पीओके पर कब्जा करने के लिए अभी तक
सोच ही रहा है वहीं इजराइल गाजा पर कब्जा
करने के लिए कोशिश ही कर रहा है फिर भारत
की आजादी को छीनना तो बहुत बड़ी बात है

आशा करते हैं कि आपको यह वीडियो
इंफॉर्मेशन लगा होगा और आपको अगर कोई भी
डाउट है तो कमेंट करके जरूर बताएं वीडियो
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