क्या भारत और चीन कभी दोस्त हो सकते हैं? | What If India And China Become Friends ? - instathreads

क्या भारत और चीन कभी दोस्त हो सकते हैं? | What If India And China Become Friends ?

सोचिए कैसा होगा वह दिन जब आप सुबह उठे और
उठते ही आपको खबर मिले कि इंडिया और चाइना
के बीच दोस्ती हो गई है यकीन मानिए सिर्फ
आपके नहीं बल्कि पूरी दुनिया के होश उड़

जाएंगे साहब क्योंकि एशिया कंटेंट के इन
दोनों देशों की दुनिया में इंडिपेंडेंटली
एक अलग ही पहचान है चीन के बारे में तो सब
जानते हैं कि आज यह देश दुनिया का सबसे
बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है लेकिन वहीं

अगर इंडिया की बात करें तो एक डेवलपिंग
कंट्री होने के बावजूद
यह देश लगातार अपने यंग माइंड्स और टेक की
दुनिया में नए-नए कारनामे करने में सबसे
आगे है तो हमें लगा कि अगर एशिया की ये दो
शक्तियां आपस में एक दूसरे से हाथ मिला ले

तो क्या हो सकता है आपको क्या लगता है
कमेंट में जरूर लिखिए बाकी हमने जब इन
दोनों देशों के बारे में जानने की कोशिश
की तो काफी कुछ सीखने को मिला और वही सब
हम आपको इस वीडियो में बताएंगे कि क्या
होगा अगर इंडिया और चीन एक हो जाए तो

देखिए हिस्ट्री अपने आप में कई ऐसे
एग्जांपल्स देती है जो बताती है कि कट्टर
से कट्टर दुश्मन भी एक दूसरे की दुश्मनी
भूलकर दोस्त बने हैं अब जापान और अमेरिका

ने 20th सेंचुरी के सबसे बड़े परमाणु हमले
किए लेकिन आज ये दोनों देशों के बीच
रिश्ते अच्छे हैं खासकर जिओ पॉलिटिक्स की
दुनिया में कब कौन दुश्मन दोस्त बन जाए यह
कहना थोड़ा मुश्किल होता है कुछ समय पहले

ब्रिटेन की वीकली मैगजीन द इकोनॉमिस्ट ने
एक आर्टिकल पब्लिश किया जिसका टाइटल था
व्हाट इफ चाइना एंड इंडिया बिकम फ्रेंड्स
यानी भारत और चीन अगर दोस्त बन गए तो क्या

होगा भले ही 1962 की लड़ाई के बाद से ही
भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर विवाद रहता
हो लेकिन दोनों देशों के बीच फाइनेंशियल
रिलेशन हमेशा मजबूत रहे हैं जी हां और
भैया दोनों देश एक दूसरे के साथ-साथ लाखों

करोड़ों रुपयों का ट्रेड भी करते हैं 2020
की डटा की बात करें तो भारत और चीन के बीच
ट्रेड बढ़कर 88 अरब डॉलर तक पहुंच गया और
आज भी भारत के लिए चीन सबसे बड़े ट्रेड
पार्टनर में से एक है यार देखो हम कितनी

भी चाइनीज प्रोडक्ट्स को अपोज कर लें या
फिर बाजार में चाइनीज प्रोडक्ट्स बैन के
नारे लगा लें लेकिन एक बात तो सच है कहीं
ना कहीं कि भारत में चीनी कंपनियों का
बोलबाला है और इसके अपने भी कई कारण हैं

और एकदम से यह इंपोर्ट बंद करना किसी भी
देश के लिए मुश्किल है और इंडिया के लिए
थोड़ा इसलिए मुश्किल हो जाता है क्योंकि
इंडिया का मैन्युफैक्चरिंग डिपार्टमेंट
अभी कई मामलों में पीछे है और यह बात हर

इकोनॉमिस्ट और एनालिस्ट कहता है कि अगर
भारत किसी तरह मैन्युफैक्चरिंग मार्केट की
प्रॉब्लम को सॉल्व कर ले तो इसका कोई देश
नहीं पकड़ सकता अब आप इस बात से अंदाजा

लगाइए कि गलवान घाटी में हुए इंसिडेंट के
बाद 2021 में दोनों देशों के बीच ट्रेड 43
फीसद और पिछले साल 8.6 पर तक बढ़ा है चीन
की कंपनियों पर भारत ने शिकंजा कसा है मगर
भारत फिर भी मशीनरी दवाओं जैसी प्रमुख

चीजों के लिए कहीं ना कहीं चीन पर निर्भर
तो है अब ऐसा भी नहीं है कि भारत और चीन
कभी दोस्त नहीं थे जी हां 1962 से पहले
हिंदी चीनी भाई भाई का नारा दिया जाता था
लेकिन चीन ने भारत को धोखा दे दिया ऐसे

में आप समझते हैं कि अगर भारत और चीन की
दोस्ती हो जाए तो भैया फिर क्या होगा
देखिए भारत और चीन का साथ आना दोनों ही
देशों के लिए बहुत ही फायदेमंद है अगर
दोनों ही देशों की दोस्ती हो जाती है तो

आपस में ट्रेड और इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा
इकॉनमी एक्सपेंड करेगी जिसका फायदा इंडियन
और चाइनीज को नए जॉब्स की तरह मिलेगा इन
दोनों देशों की ज्योग्राफिकल कंडीशन की
बदौलत इन दोनों को ट्रेड करने में और भी

आसानी होती है जिसकी वजह से यह देश एक
दूसरे से काफी हद तक ताकत दे सकते हैं
दोनों ही देशों के बीच दोस्ती होने से आपस
में इंफ्रास्ट्रक्चर के फील्ड में भी
अनबिलीवर्स
बन सकते हैं क्रॉस बॉर्डर रेलवेज और

एनर्जी कॉरिडोर्स जैसे प्रोजेक्ट पर दोनों
ही देश मिलकर काम कर सकते हैं भारत और चीन
टेक्नोलॉजी की फील्ड में तेजी से आगे बढ़
रहे हैं अगर यह दोनों देश यहां भी मिलकर
काम करते हैं तो पूरी दुनिया के लिए यह
वरदान साबित हो सकता है जहां भारत

सॉफ्टवेयर बनाने में माहिर है तो वहीं
चाइना चाइना को हार्डवेयर बनाने में
एक्सपर्टीज हासिल है दोनों देशों की
दोस्ती होने से एआई और इनोवेशन के फील्ड
में भी रिवोल्यूशन देखने को मिल सकती है

और यह रिवोल्यूशन अमेरिका और रशिया जैसे
देशों को पीछे छोड़ सकती है भारत और चाइना
की दोस्ती ना सिर्फ इन दो देशों के लिए

बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी फायदेमंद है
देखिए भारत और चीन की दोस्ती का मतलब है
कि एशिया की दो पावर हाउस एक दूसरे से
भिड़ना छोड़कर अपने-अपने डेवलपमेंट पर
ध्यान देंगे इससे एशिया कॉन्टिनेंट में ना

केवल ग्राउंड लेवल पर पीस को बढ़ावा
मिलेगा बल्कि जिओ पॉलिटी भी एक नया मुकाम
हासिल करेगी और यह दोनों ही देश डिफेंस
सेक्टर पर एक बड़ा अमाउंट आज खर्च कर रहे
हैं तो ऐसे में ये दोनों देश हथियारों के

बजाय दूसरे डेवलपमेंट्स पर ध्यान दे
सकेंगे और यह जो आज हथियार खरीदने की होड़
लगी हुई है उस पर रोक भी लगेगी भारत और
चीन की दोस्ती से अमेरिका का दबदबा भी
खत्म होगा इससे दुनिया में कोई भी देश

सुपर पावर नहीं बचेगा और दुनिया मल्टीपोलर
बन जाएगी जहां ताकत किसी एक देश के पास
नहीं रहेगी बल्कि सभी के पास रहेगी भारत
और चीन के बीच जैसे ही आपसी टकराव खत्म
होगा दोनों ही देशों के बीच आपस में

कल्चरल एक्सचेंज भी देखने को मिल सकता है
दोनों ही देशों की सिविलाइजेशंस 4000
सालों से भी ज्यादा पुरानी है वर्ल्ड
ट्रेड पर भी कई हजार सालों तक इन दोनों
देशों का कब्जा था चाणक्य के अर्थशास्त्र

में सिल्क रूट से ट्रेड होने की बात कही
गई है जी हां इतिहास के पन्नों को
पलटोला भारत पढ़ने और घूमने आया करते थे
भारत से ही चीन में बुद्धिज्म और योगा का

प्रचार हुआ दोनों ही देशों के कल्चर के
बीच कई समानताएं हैं इसलिए दोनों ही देशों
के बीच दोस्ती होने से टूरिज्म के सेक्टर
में भी ग्रोथ देखने को मिलेगी नाउ हाउ विल

जिओ पॉलिटिक्स चेंज इफ इंडिया एंड चाइना
बिकम फ्रेंड्स तो चलिए ऐसे में समझते हैं
कि भारत और चीन अगर दोस्त बन गए तो इससे
दोनों ही देशों के साथ पूरी दुनिया की
पॉलिटिक्स में क्या बदलाव देखने को मिलेगा

देखिए अभी हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी
जिससे यह बात साफ हो गई थी कि पॉपुलेशन के
मामले में भारत ने चीन को भी पीछर छोड़

दिया है और अगर यह पॉपुलेशन चीन के साथ
मिल जाए तो दुनिया की आबादी का यह लगभग 40
प्र हिस्सा है और इनकी कुल पॉपुलेशन 285
करोड़ के आसपास है मॉडर्न एज में भारत और

चीन का सफर 1950 से शुरू होता है और इस
वक्त दोनों ही देशों की पर कैपिटा जीडीपी
ऑलमोस्ट इक्वल थी राइट लेकिन जहां एक तरफ
इंडिया आजादी के बाद बिखरे हुए स्टेट्स को
जोड़कर एक कर रहा था तो वहीं दूसरी तरफ

चीन अपने इकोनॉमिक रिफॉर्म्स को सुधारने
में जुट गया और एक के बाद एक उसने कई
रिफॉर्म किए भैया और उसका नतीजा यह निकला
कि 1990 के बाद चीन ने पीछे मुड़कर कभी

नहीं देखा और जल्द ही एक इकोनॉमिक सुपर
पावर बन गया बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज और
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को चीन में खोला
गया अब इसकी एक बहुत बड़ी वजा थी जिसने

चीन की मैन्युफैक्चरिंग को चार चांद लगा
दिए और वह थी चीन में मौजूद सस्ती लेबर जी
हां सही सुना बिल्कुल आपने इसी लेबर
सपोर्ट की वजह से वहां मैन्युफैक्चरिंग का

बेताज बादशाह बन गया और वहीं दूसरी तरफ
बात अगर इंडिया की करें तो इंडिपेंडेंस के
कई सालों बाद तक भारत को इंटरनल एंड
एक्सटर्नल डिस्टरबेंस का सामना करना पड़ा

और यही एक वजह है कि चीन की इकॉनमी आज
भारत से तीन गुना ज्यादा पड़ी है अब आप
सोच रहे होंगे कि भैया आखिर चीन ने इतनी
तरक्की कैसे कर ली और भारत कैसे पीछे रह

गया तो भाई इसका सीधा और सिंपल जवाब है कि
चीन में एक ही पार्टी की सरकार है और वहां
का सिस्टम पूरी तरह से तानाशाही है लेकिन
दूसरी तरफ भारत में डेमोक्रेसी है यहां

किसी भी पॉलिसी को जनता पर थोपा नहीं जा
सकता है चीन ने अपनी इकॉनमी डेवलपमेंट के
लिए लुई मॉडल का उपयोग किया इस मॉडल को
अगर आसान शब्दों में समझे तो मान लीजिए

किसी कंपनी में 10 लोगों की जगह छह लोगों
को रखा जाए और उनसे उतना ही काम लिया जाए
जितना 10 लोगों से लिया जा रहा था अब ऐसे
में चार लोगों को दी जाने वाली जो सैलरी
है वह बचेगी जिसका यूज दूसरी जगह किया जा

सकेगा चीन ने अपनी पॉपुलेशन का इस काम में
जमकर इस्तेमाल किया इस मॉडल के जरिए
उन्होंने अपनी डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज को

बढ़ाया और लोगों को जरूरी सामान सस्ते
दामों में उपलब्ध करा दिया चीन में सस्ते
मजदूर को देखकर इन्वेस्टमेंट की बाढ़ आ गई
जिसके बाद देश में तेजी से इंडस्ट्रियल

हुआ गरीबी में कमी आई और इकॉनमी में बड़े
रूप से बदलाव देखने को मिला आज चीन अपनी
फैक्ट्रियों से पूरी दुनिया को माल सप्लाई
कर रहा है दुनिया की कई इकॉनमी आज उसी पर
निर्भर हैं लेकिन चीन में इस

इंडस्ट्राइलाइज से अनाज की कमी हो गई
नतीजा यह रहा कि भैया न में भूख से 4
करोड़ लोग मारे गए भूख से मरते लोगों को
वहां की सरकार की पॉलिसी का विरोध करने की

ताकत नहीं थी और दूसरी तरफ भारत के हालात
चीन से एकदम अलग थे यहां पर डेमोक्रेसी की
जमीन मजबूत हो रही थी किसी भी डेमोक्रेटिक
कंट्री में चीन की तरह विरोध करना सरकारों

के कंट्रोल में नहीं होता है इसलिए भारत
में लुई मॉडल को लागू करना पॉसिबल नहीं था
लेकिन आज फिर भी भारत दुनिया की सबसे तेजी
से बढ़ती इकॉनमी में से एक है जी हां नाउ

व्हाई इंडिया एंड चाइना कांट बी फ्रेंड्स
लेकिन दोस्तों भारत और चीन के बीच दोस्ती
की कल्पना करना पत्थर पर फसल उगाने जैसा
ही है और इसलिए कहा जाता है कि ऐसा कोई
सगा नहीं है जिसे चीन ने अब तक ठगा नहीं

है रूस और कनाडा के बीच चीन सबसे बड़ा देश
है इसका कुल एशिया 97
10696 वर्ग किलोमीटर का इसमें से 43 पर
जमीन दूसरों से हड़पी हुई है अब चीन की
नजर भारत के 90 हज स्क्वा किलोमीटर पर है

चीन ने पिछले साल ही अरुणाचल प्रदेश के 15
इलाकों के नाम बदल दिए थे यानी चीन की
जमीन हथियाने की पॉलिसी का अगला फोकस भारत
है चीन ने 1949 में ही ईस्ट तुर्किस्तान
पर कब्जा कर लिया था चीन इसे शिंजियांग

स्टेट बताता है इसका कुल एरिया ईरान जितने
बड़े देश के बराबर है यहां की कुल आबादी
में 45 पर उइगर मुस्लिम हैं जबकि 40 पर
हांन चीनी है चाइना का दूसरा सबसे बड़ा

स्टेट है तिब्बत जो कभी इंडिपेंडेंट देश
हुआ करता था लेकिन चीन के हजारों सैनिकों
ने भैया 23 मई 1950 को इस पर भी हमला करके

कब्जा कर लिया इसका कुल एरिया दक्षिण
अफ्रीका जैसे देशों के बराबर है यहां की
पॉपुलेशन में 78 पर बौद्ध हैं चीन ने यहां
के धर्म गुरु दलाई लामा को गिरफ्तार करने

की साजिश रची थी लेकिन वह नाकाम हो गई
दलाई लामा को तिब्बत से भागकर भारत आना
पड़ा भारत ने दलाई लामा का स्वागत किया

जिससे चीन चड़ गया और यही 1962 में भारत
और चीन के बीच लड़ाई का बड़ा कारण बना
इसके अलावा चीन ताइवान को भी अपना हिस्सा
मानता है लेकिन फिलहाल चीन की वही दाल
नहीं गल रही है क्योंकि अमेरिका जैसे सुपर

पावर आज ईवान के साथ खड़े हैं आपको बता
दें कि 1911 में चीन ने कमता की सरकार बनी
1949 में वहां सिविल वॉर छिड़ गया और माउथ
से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने

कमिंग तांग की पार्टी को हरा दिया हार के
बाद कोमिंग तांग ताइवान चले गए इसके बाद
1949 में ही चीन का नाम पीपल्स रिपब्लिक

ऑफ चाइना रखा गया और ताइवान का नाम
रिपब्लिक ऑफ चाइना अभी तक दोनों ही देश एक
दूसरे को मान्यता नहीं देते लेकिन चीन
दावा करता है कि भैया ताइवान भी उसी का
हिस्सा है 1949 में जब से चीन में

कम्युनिस्ट की सरकार बनी है उसके बाद से
ही चीन दूसरे देशों इलाकों पर कब्जा जमाता
रहा है और अब चीन का बॉर्डर 14 देशों से
लगता है लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन
23 देशों के इलाकों को अपना हिस्सा बताता

है चीन साउथ सी पर भी अपना दावा ठोकता है
यह सी 45 लाख स्क्वा किमी में फैला हुआ है
इस सी पर पहले जापान का कब्जा हुआ करता था
लेकिन सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद से वह इस

पर अपना दावा ठोकता आया है इसके अलावा भी
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भाई लद्दाख
का करीब 38000 स्क्वा कि मीटर का हिस्सा
चीन के कब्जे में है वहीं 2 मार्च 1963 को

भी चीन पाकिस्तान के बीच एक ट्रीटी हुई
जिसके जरिए पाकिस्तान ने पीओके का 5180
स्क्वा किमी का एरिया चीन को दे दिया था
अभी जितने भारतीय हिस्से पर चीन का कब्जा
है उतना एरिया स्विटजरलैंड का भी नहीं है
जी हां इसके अलावा चीन अरुणाचल प्रदेश के

90 हज स्क्वायर किलोमीटर के हिस्से पर भी
अपने दावेदारी करता है दोस्तों 20 अक्टूबर
1962 को जब चीन ने भारत पर हमला किया तो
उस वक्त वक्त भारत ने सपने में भी नहीं
सोचा था कि चीन ऐसी हरकत पर उतारू हो

जाएगा क्योंकि चीन के साथ दोस्ती को लेकर
भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल
नेहरू बेहद ही सीरियस थे 1954 में भारत और
चीन ने मिलकर काम करने के लिए पंचशील
समझौता किया उसी समय प्रधानमंत्री

जवाहरलाल नेहरू ने हिंदी चीनी भाई भाई का
नारा दिया था लेकिन चीन ने भारत की पीठ
में ूरा घोंप दिया था 1959 में जब भारत ने
दलाई लामा का स्वागत किया चीन और भारत के

रिश्ते बिगड़ने लगे 1959 से 1962 तक दोनों
ही देशों के बीच कई बार विवाद हुआ और
आखिरकार 20 अक्टूबर 1962 को चीन की पीपल्स
लिबरेशन आर्मी ने लद्दाख पर और अरुणाचल

प्रदेश के मैकमोहन लाइन के पार हमला कर
दिया युद्ध के शुरू होने तक भारत को पूरा
भरोसा था कि युद्ध शुरू नहीं होगा इस वजह
से भारत की ओर से तैयारी थी नहीं भारत ने

सैनिकों की सिर्फ दो टुकड़ियों को ही
तैनात किया था वहीं चीन की तीन रेजीमेंट्स
पहले से ही तैनात थी चीन के 80000 जवानों
का मुकाबला करने के लिए भारत सिर्फ 10 से
200 हज सैनिक ही उतार पाया युद्ध एक महीने

तक चला जब तक युद्ध खत्म हुआ तो तब तक
भारत को काफी नुकसान हो चुका था चीन ने कई
जगह भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया यह
युद्ध हमेशा भारत के लिए टीस बनकर उभरता

रहता है ऐसे में दोनों ही देशों के बीच
दोस्ती बेहद ही मुश्किल है भाई लेकिन यह
इंपॉसिबल भी नहीं है तो दोस्तों आपको क्या
लगता है कि भारत और चीन के बीच दोस्ती

होनी चाहिए अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर
रखिए वीडियो को लाइक कीजिए

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