क्या वाकई गांजा, दुनियाभर में खुलेआम बिकने लगेगा? | Why the doors of the world opening for cannabis? - instathreads

क्या वाकई गांजा, दुनियाभर में खुलेआम बिकने लगेगा? | Why the doors of the world opening for cannabis?

दोस्तों गंज मारियो ने एक ऐसा शब्द है
जिसे सुनते ही सो कॉल्ड सिविल लाइंस
सोसाइटी ऐसे मुंह से उड़ती है जैसे उनकी
नाक में मक्खी बैठ गई हो और फिर गंज पीने
वाले शख्स के बाद ही पर चरसी कंजरी का

दप्पल जो है लेकिन हाल ही में अमेरिका
राष्ट्रपति जॉइडर ने कहा है की हमारे का
मैं जिन लोगों को गंज रखना और पीने के
जुर्म में जय में बैंड किया गया था उन्हें
रिया कर दिया जाए क्योंकि गंज पीना और

रखना कहानी से भी जुर्म नहीं है और इस
कानून में लाखों लोगों की जिंदगी बर्बाद
की है अब इसके बाद से ही दुनिया भर में एक
बार फिर से गंजे को लीगल करने या ना करने
की जंग छिड़ गई है क्या गंजे को लीगल हो

जाना चाहिए भारत में गंज कब होगा ईगल
जानेंगे इन सवालों के जवाब आज के इस
वीडियो में इसलिए वीडियो को आखिर तक जरूर
देखिएगा लेकिन वीडियो शुरू होने से पहले
अगर आप चैनल पर नए या आपने अभी तक चैनल को
सब्सक्राइब नहीं किया है तो चैनल को

सब्सक्राइब करना और बेल आईकॉन दबाना
बिल्कुल ना भूले ताकि हमारे चैनल की कोई
भी वीडियो आपसे ना हो जाए दोस्तों दुनिया
की कई देश में गंज लीगल है और उन देश की
सरकार की आई का बड़ा साधन भी है एक जमाना
था जब भारत में भी गण ठीक है मैं बिकता था

जैसे आज शराब और भांग दिखती है लेकिन
यूनाइटेड नेशन और अमेरिका ने पुरी दुनिया
के साथ बड़ी चालाकी के साथ एक चल चली भारत
के साथ-साथ कई देश में गंजे को सिंथेटिक
ड्रग्स बता कर इसे बन करवा दिया गया और
खुद अपने देश के राज्यों में इसलिए लीगल

कर एयरपोर्ट डॉलर की कमाई करने लगे तो ऐसा
क्या हुआ भारत में गंजे को बन करना पड़ा
या गांजो सिंथेटिक ड्रग है और दुनिया के
किन देश में गंज लीगल है आई सब जानते हैं
हम आपको इसके लीगल होने या ना होने वाली
पुरी बहस के बड़े में बताएं चलिए उससे

पहले एक नजर मैं पाएंगे के इतिहास पर भी
डालते हैं दोस्तों बात इस साल 1950 की जब
देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी हुआ करते
थे तब तक भारत में गांधी से बहुत सरदार
दवाइयां भी बंटी थी तो सबसे पहले उन मतलब

यूनाइटेड नेशन में साल 1961 में गंजे को
सिंथेटिक ड्रग्स की कैटिगरी में शामिल कर
दिया और भारत से कहा की भाई तुम इसको बन
करो लेकिन भारत ने तब उन की बात नहीं सनी
मामला सिर्फ दवाई बनाने का ही नहीं था

हिंदू आस्था की भी था जी हां हिंदू धर्म
में गंजे और भांग को लेकर लोग धार्मिक रूप
से इमोशनली अत्ता टेंशन 1985 में उन ने
बहुत दबाव बनाया और आखिर में आकर राजीव
गांधी ने इसे सिंथेटिक ड्रग्स की श्रेणी
का मां लिया और बन कर दिया अब गंज बाजार

में बेचना भारत में लीगल हो गया था ऐसा
कहते हैं की दवा बनाने वाली कंपनियां
तंबाकू और शराब कंपनियां के दबाव के करण
इसे बन किया गया क्योंकि गंज लीगल होता तो
लोग दारू पीकर गाड़ी नहीं ठोकते तंबाकू का
कंजप्शन कम होता तो सरकार को टैक्स कहां

से मिलता लोग माल फुक कर बीमारी ठीक कर
लेते तो दवाइयां क्यों ही बंटी हमें पता
है दोस्तों इसके बाद आपके मां में जरूर
सवाल ए रहा होगा की क्या गंज सच में एक
सिंथेटिक ड्रग है चलिए इसका जवाब भी आपको

देते हैं दोस्तों देखिए सिंथेटिक ड्रग उसे
कहते हैं जो लैब में केमिकल का इस्तेमाल
करके सिर्फ नसे के लिए बनाया जाता है गंज
किसी लैब में नहीं बंता ये तो एक पौधा है
जो बीच डालने पर मिट्टी और पानी से उगता
है इस तरह तो आम अमरूद लीची और वो हर चीज

जो मिट्टी में बी डालने से बंटी है उसे
सिंथेटिक हो गई क्या लेकिन उन ने गांधी को
सिंथेटिक व्रत कार कर दिया ऐसा लगता है की
वन में बैठे लोगों ने खुद ही 5 काश करने
के बाद इसे सिंथेटिक ड्रग की श्रेणी में
डाला था लेकिन दोस्तों यही से आता है इस

कहानी में ट्वीट जी हां अमेरिका ने हमारे
साथ एक ऐसी चल चली जैसे हम रॉक रहे थे समझ
नहीं पे चलिए अब जानते हैं इस चल के बड़े
में क्या मारेगा मैं गंज लीगल है उसको यही
तो असली खेल हुआ भारत के साथ उना तो बयान
करने को बोल दिया लेकिन खुद हमारी केन बाद

में इसे लीगल कर दिया वहां के 27 राज्यों
में गंजे से कैंसर जैसी बीमारी की दवाई
बनाई जाति है हां भाई कैंसर की दवाई
इस्तेमाल होता है और वही महंगी दवाई या
भारत खरीद तभी है अमेरिका छोड़ो दुनिया के
40 देश में गांजो लीगल है हमारी कमी गंज

छुपा-छुपा कर नहीं बेचा जाता वहां तो
वेंडिंग मशीन में भी गंजे की बिक्री होती
है और ज्यादा ना सरकार को अर्बन रुपए का
मुनाफा होता है कोरोना की वैक्सीन लगवाने
के लिए हमारे का राज्यों ने कहानी कहानी

तो वैक्सीन लगवाने पर लोगों को मुफ्त में
गंज भी बंता है की लो भाई घर में पड़े
पड़े गांजो को लेकिन वैक्सीन जरूर लगता लो
अब गंजे की बैग स्टोरी जन के बाद चलिए
वापस से इस सवाल पर आते हैं की क्या गंज

सच में अब खुला हजारों में बिकेगा जीते एक
दशक में अमेरिका के 17 राज्यों ने मनोरंजन
के लिए और 36 राज्यों ने ढाबा के तोर पर
गंजे के इस्तेमाल को मंजरी दी है मतलब यही
की इन राज्यों में रहने वाले लोग अब आसानी

से गंज खरीद सकते हैं दोस्तों अमेरिका में
गंज बाजार के उदारीकरण की कोशिशें के
मामले में टेलीफोन या सबसे आगे है 1996
में यहां गंजे के मेडिकल इस्तेमाल को और
फिर 2016 में मनोरंजन के लिए इसके
इस्तेमाल को हरि झंडी मिली इसका मतलब ये

हुआ की अगर आप 21 साल से ज्यादा के हैं और
कैलिफोर्निया में रहते हैं तो आप कानून घर
में ले सकते हैं हालांकि सार्वजनिक जगह पर
एक इस्तेमाल पर बन है रही बात उसके
प्रोडक्शन और बिक्री की तो इसके लिए राज्य

प्रशासन से परमिट लेना जरूरी है लेकिन
फॉर्मेट मिलन आसन नहीं है अगर राज्य का
कोई शहर नहीं चाहता की गंज वहां खुलेआम
विकेट तो वो परमिट देने और अपने इलाके में
गंजे की बिक्री पर रॉक लगा सकते हैं यानी

 

कहानी पर गंज आसानी से मिलता है तो कहानी
जगह पर इसकी बिक्री माना है ऐसी स्थिति
में लोग गंज कैसे खरीदने हैं और गैर
कानूनी ये बजे कानूनी तोर पर गंज खरीदने
से क्या फायदा है तो देखिए दोस्तों
लाइसेंस दुकान से लाइसेंस प्राप्त गंज

खरीदने का मतलब है की इसकी खेती में उच्च
मानवों का ध्यान रखा गया है शुद्धता और
गुणवत्ता के लिए इसकी टेस्टिंग हुई है और
इसमें टॉक्सिक मेटल और पेस्टिसाइड्स के
कान मौजूद नहीं है कस्टमर के लिए मामला

आसन दिखता है लेकिन उत्पादकों के लिए ये
पेचीदा मामला है जी हां क्योंकि पूरे देश
में गंजे को लीगल अप्रूवल नहीं मिल रहा है
एसएमएस के बिजनेस के लिए बैंक लोन देने से
करती भी है व्यापार बढ़ाना भी कंपनियां के
लिए भी मुश्किल का शबाब है उनके लिए राज्य

के बाहर गंज बेचना गैरकानूनी है साथ ही
इसे एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना भी
अपराध है भले ही दूसरे राज्य में एडल्ट्स
के लिए इस्तेमाल की अनुमति हो इन सब बटन
के बाद चलिए आखिर में एक बार यह भी जान

लेते हैं की इंटरनेशनल मार्केट में अभी
क्या हाल है दोस्तों 2018 में जो कनाडा ने
गंजे के इस्तेमाल को कानूनी मान्यता देने
का फैसला किया तो प्रोड्यूसर्स और
इन्वेस्टर्स दोनों में खाजा उत्साह देखने
को मिला और गंज कंपनियां के शेर तेजी से

उछाल लेकिन जल्द ही मुश्किल है सामने आने
लगी इसलिए सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती
ये भी है एक नई देश गंजे को लेकर नियमों
में डील नहीं देना चाहते 2020 में
यूनाइटेड नेशंस कमीशन ऑन नारकोटिक ड्रग्स
ने गंजे को खतरनाक और अत्यधिक नसे की लट

वाली सूची से निकाल दिया लेकिन इसके नॉन
मेडिकल और नॉन साइंटिफिक इस्तेमाल को अवैध
कैटिगरी में रखा है ऐसे में अंतरराष्ट्रीय
कानून के तहत सदस्य देश राज्य के इस्तेमाल
को कानूनी मान्यता नहीं दे सकते इसमें
एक्सपट्र्स का कहना है की जिन सदस्य देश

ने मनोरंजन के लिए गंजे को कानूनी तोर पर
इजाजत दी है वो एक तरह से अंतरराष्ट्रीय
कानून का उलझन कर रहे हैं जी हां उनके लिए
एक तरह का संकट पैदा हो गया है और उन्हें
संगठन से अपनी सदस्यता वापस लेनी पे पद
शक्ति है उत्तर और दक्षिण अमेरिका इस

मुद्दे का समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे
हैं लेकिन यूरोप में फिलहाल इसे लेकर बहुत
कुछ नहीं किया जा रहा है तंबाकू और शराब
की कंपनियां गंज के व्यापार में भी हाथ
आसमान चाहती हैं उन्हें सरकारी नियमों के

डेयर और ऐसे बाजरो में कम करने का अनुभव
है जो बेहद नियंत्रित है लेकिन ऐसा नहीं
है की उनके लिए यह रहा आसन होगी काफी कुछ
इस पर भी निर्भर करता है की कानूनी गंज
बाजार इस गैरकानूनी बाजार के उपभोक्ताओं
को खुद तक ले और नए उपभोक्ताओं तक पहुंचे

उदाहरण के तोर पर आप कनाडा के कंदरा बाजार
को देख सकते हैं ब्लैक मार्केट के मुकाबला
यहां का कानूनी बाजार उपभोक्ताओं के लिए
कई नए उत्पाद लेकर आया है उत्पादक गांजो
की गुणवत्ता का ध्यान रखते हैं और इसकी
कीमत सस्ती रखते हैं इस करण यहां ब्लैक

मार्केट पर निर्भर करने वाले भी कानूनी
बाजार की तरफ आकर्षित हुए हैं खैर दोस्तों
यह तो वही कनाडा के बाद लेकिन क्या पुरी
दुनिया गंजे के कानूनी बाजार के लिए तैयार
है इस दिशा में कई देश कम कर रहे हैं

नीदरलैंड्स में सरकार कुछ गंज उत्पादकों
के साथ मिलकर ये जन की कोशिश कर रही है की
क्या गंजे का नियंत्रित कानूनी व्यापार
संभव है लक्जमबर्ग इसे जल्द कानूनी
मान्यता देने के करीब है स्वीटजरलैंड और
इजरायल भी इसे लेकर पायलट योजनाओं पर कम

कर रहे हैं वहीं दक्षिण कोरिया और थाईलैंड
जैसे देश केवल गंजे के मेडिकल इस्तेमाल को
अनुमति देते हैं कई देश इसकी खेती और
मेडिकल इस्तेमाल को इजाजत देते हैं लेकिन
मनोरंजन के लिए इसके इस्तेमाल पर पाबंदी

लगाते हैं ये देश समझा युगा कर इसे कानूनी
तोर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचे के
रास्ते तलाश रहे हैं अमेरिका के कई राज्य
मेक्सिको अरब पे और यूरोप के जिन चुने देश
इसे कानूनी मान्यता देते हैं कई देश में
इस व्यापार में निवेश भी बाढ़ रहा है गंजे
का विरोध करने वाले कहते हैं की ये नेचुरल

उपलब्ध है इसलिए इसका व्यापार दीर्घकालिक
हो सकता है उनके चिंता है की कहानी ऐसा ना
हो की शराब की तरह गंज नसे की मटका करण भी
बन जाए…..

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