क्या सच में भारत को मिल चुका है दुनिया का सबसे बड़ा तेल का कुआँ ? | Can India Become Oil Capital ? - instathreads

क्या सच में भारत को मिल चुका है दुनिया का सबसे बड़ा तेल का कुआँ ? | Can India Become Oil Capital ?

देखिए आज भारत दुनिया में क्रूड ऑयल
कंजप्शन में तीसरे नंबर की इकॉनमी है और
यह अपनी जरूरत का 85 पर क्रूड ऑयल दूसरे
देशों से इंपोर्ट करता है लेकिन हाल ही
में एक खबर ने खलबली मचा दी है और वह खबर

थी कि ओएनजीसी ने ऑयल निकाला है कृष्ण
गोदावरी बेसिन में मिल ऑयल का भंडार 7
जनवरी 2024 को ओएनजीसी द्वारा निकाला गया
पहली बार ऑयल भारत की बदल जाएगी तस्वीर अब

भारत बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल
प्रोड्यूसर इतना ही नहीं इंडिया में
मिलेगा अब सस्ता ऑयल ना जाने ऐसी ही कितनी
बातें 7 जनवरी के बाद तेजी से सोशल मीडिया
पर वायरल हो रही हैं लेकिन इस बात में

कितनी सच्चाई है क्या सच में इंडिया ऑयल
प्रोड्यूस करके सबसे बड़ा सप्लायर बन
जाएगा क्या सच में इस ऑयल के मिलने से देश
में डीजल पेट्रोल के रेट गिरेंगे या फिर
यह सिर्फ एक बहका है जो सोशल मीडिया पर

फैलाया जा रहा है आइए जानते हैं आज के इस
वीडियो में ऑयल एक्सट्रैक्टेड फ्रॉम
कावेरी गंगा बेसिन देखिए हाल ही में 7
जनवरी 2024 के दिन आंध्र प्रदेश के

काकीनाडा से 30 किमी दूर बे ऑफ बंगाल की
खाड़ी में मौजूद डीप कावेरी गंगा बेसिन के
98/2 ब्लॉक से पहली बार स्टेट ऑन ऑयल
कॉरपोरेशन ओजीसी ने पहली बार ऑयल को

निकाला और बता दें कि इसी बेसिन में
reliance1 ब्लॉक भी है जो बहुत लंबे समय
से ही यहां से नेचुरल गैस का एक्सट्रैक्शन
बड़ी मात्रा में कर रहे हैं जी हां लेकिन

क्या आप ये जानते हैं कि ओजीसी 2016 से इस
प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था जिसके बाद
2017 में भी इसमें डिले देखा गया और अब
जाकर फाइनली यह ऑयल एक्सट्रैक्ट किया गया

है अब कावेरी गंगा बेसिन को ऑयल एंड गैस
एक्सट्रैक्शन के लिए मेनली थ्री क्लस्टर
में डिवाइड किया गया है जो कि 300 मीटर से
लेकर 3200 मीटर तक की गहराई में काम करने
के लिए बनाए गए हैं अगर आपको इन क्लस्टर

के बारे में बताएं तो यही क्लस्टर ब्लॉक्स
में बटे हुए हैं सबसे पहला जो क्लस्टर है
वो डेवलपमेंट स्टेज पर काम करने के लिए
बनाया गया है जहां अभी एक्सप्लोरेशन चल

रहा है जी हां और भैया इसे अंदाजा लगाया
जा सकता है कि यहां कहीं ऑयल कैपिंग है
जिसको ट्रैक करने के बाद यहां हां से भी
ऑयल या गैस निकलने की उम्मीद है और यहां
एक्सप्लोरेट्री वेल लगे हुए हैं और काम चल
रहा है इसके बाद आता है दूसरा स्टेज

जिसमें कमर्शियल गैस का प्रोडक्शन 2020 से
चल रहा है और यहां कमर्शियल ऑयल का
प्रोडक्शन म 2024 से शुरू हो जाएगा अब
इसके बाद आता है क्लस्टर का सबसे डीप लेवल

इस क्लस्टर को दुनिया का दूसरा सबसे डीप
हाइड्रोकार्बन वेल बताया जाता है जिसकी
वजह से अभी तक इसको एक्सप्लोर नहीं किया
गया और बताया जाता है कि यहां 2026 से

पहले लिए कुछ होना लगभग इंपॉसिबल है और
अगर नेचुरल रिसोर्सेस के एक्सट्रैक्शन की
बात करें तो यह भी अभी काफी वक्त ले सकता
है जिसके बारे में अभी कोई स्टेटमेंट देना

बेवकूफी होगी इसलिए इन तीन क्लस्टर्स को
भी अभी एक्सप्लोर ही नहीं किया गया है
लेकिन बताया यह जा रहा है कि इससे सेकंड
क्लस्टर के 2a ब्लॉक से ऑयल एक्सट्रैक्ट
किया जा रहा है और इसी साल के मई जून तक

हर दिन 45000 बैरल पर डे ऑयल यहां से
निकालने का टारगेट है जो कि कमर्शियल
पर्पस के लिए होगा और यहां से देश के 7 पर
प्रोडक्शन ऑफ टोटल ऑयल प्रोडक्शन का

सपोर्ट भी मिलेगा अब इसके बाद इसी क्लस्टर
के ब्लॉक 2 बी से गैस का एक्सट्रैक्शन
होगा और वो भी देश की प्रोडक्शन में 7 पर
की हिस्सेदारी निभाएगा जिससे भारत को

लार्ज स्केल पर हेल्प मिल सकती है और जैसे
ही इस बात की खबर मोदी जी को मिली तो भैया
उन्होंने ओएनजीसी को बधाई दी और उन्होंने
कहा कि ये आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देगा

और देश को ताकत भी देगा लेकिन अब आपको
थोड़ा आईना दिखाते हैं क्योंकि सच्चाई
जानना आपका हक है तो देखिए आज के समय में
जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत ऑयल एंड
गैस कंज्यूम करने वाला दुनिया का तीसरा

सबसे बड़ा देश है और 2022 से 23 के
आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर दिन लगभग
160 मिलियन स्टैंडर्ड मीटर्स पर डे यूसेज
है और अगर कावेरी गंगा बेसिन से निकलने
वाले ऑयल की बात करें तो यह ा मिलियन

मेट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर्स पर डे
और गैस 9 मिलियन मेट्रिक स्टैंडर्ड
क्यूबिक मीटर्स पर डे निकाला जाएगा यानी
कुल मिलाकर 11 मिलियन मेट्रिक स्ट ड
क्यूबिक मीटर्स पर डे समझ रहे हैं आप
हकीकत में आत्मनिर्भरता में अभी बहुत दूरी

है जनाब लेकिन हां अगर भारत की तरफ इस देश
में प्राइवेट होल्डर्स आगे आते हैं और
इसमें अपना इनपुट देते हैं तो शायद बात बन
सकती है जो भारत को कई एस्पेक्ट्स में

सेल्फ रिलायंट बना सकता है लेकिन अभी
दिल्ली दूर है क्योंकि देश की खपत हर दिन
160 और एक्सट्रैक्शन सिर्फ 11 थोड़ा
मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं क्योंकि

भारत हर नामुमकिन को मुमकिन बनाने की
कोशिश से कभी पीछे नहीं रहता और शायद सी
बात का नतीजा है कि भैया जो भारत आजादी के
बाद अनाज के लिए अमेरिका के आगे हाथ फैला

रहा था आज वहीं अमेरिका भारत को अपना
कॉम्पीर भी मानता है हमें कम समझने की
गलती करने वाले आज हमसे मुकाबला करने के
लिए किसी देश से भीख मांग रहे हैं खैर आगे
बढ़ते हैं और बताते हैं आपको एक और

गलतफहमी कि जो ठीक इसी तरह के रिसोर्सेस
को लेकर है और यह अंडमान और निकोबार से
जुड़ी हुई है अंडमान एंड निकोबार ऑयल
कैपिटल और अलाय इसी के साथ ही एक न्यूज़
और भी तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गई कि

भाई अंडमान एंड निकोबार भारत की ऑयल
कैपिटल बनेगा और इसके लिए ऑयल इंडिया 2025
में अंडमान एंड निकोबार में ड्रिलिंग करने
वाला है और ऑफिशल्स का कहना है कि वहां

बड़ी मात्रा में ऑयल मिल सकता है लेकिन
इसकी सच्चाई कुछ और ही है दरअसल बताया यह
है कि आज अंडमान एंड निकोबार की अंडमान
बेसिन में कुल 72 मेट्रिक मिलियन टंस ऑफ
ऑयल हाइड्रोकार्बन इन प्लेस मौजूद है
लेकिन सच्चाई यह है कि भैया इसमें से केवल

दो मेट्रिक मिलियन टंस ऑफ ऑयल
हाइड्रोकार्बन प्लेस मौजूद हैं और यह
नंबर्स डायरेक्टर जनरल हाइड्रोकार्बन की
एक रिपोर्ट इंडिया हाइड्रोकार्बन आउटलुक
2022 से 23 में देखने को मिलते हैं

हालांकि ये स्टैट्स काफी लुभावने हैं
लेकिन यह अभी सच्चाई से बिल्कुल परे हैं
और हम ऐसा क्यों कह रहे हैं चलिए अब आपको
वह सच्चाई भी बताते हैं दरअसल
हाइड्रोकार्बंस इन प्लेस का मतलब है कि
वहां अभी सिर्फ ऑर्गेनिक कंटेंट की रिसर्च

की गई है देखा गया है कि वहां क्या मिल
सकता है यह हाइड्रो हार्बन रिजर्व से
बिल्कुल अलग है क्योंकि जब तक यह
हाइड्रोकार्बन रिजर्व में हाइड्रो कार्बन
इन प्लेस ना बदल जाए तब तक वहां के बारे

में सिर्फ और सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा
सकता है और अभी यही किया भी जा रहा है
क्योंकि अभी तक अंडमान एंड निकोबार में
एक्सप्लोरेट्री वेल तक नहीं लगाए गए हैं

तो यह कैसे कहा जा सकता है कि भैया आने
वाले समय में अंडमान एंड निकोबार ऑयल
कैपिटल बन जाएगा ऑयल इंडिया अभी 2025 में
पहले अंडमान एंड निकोबार जाएगा और वहां
एक्सप्लोरेशन करेगा जिसके बाद वहां से यह

तो पता चलेगा कि वहां हाइड्रोकार्बन के
रेजर्स हैं भी या नहीं जिसके बाद यह बात
साफ हो जाएगी कि वह ऑयल कैपिटल बनेगा या
नहीं आइए अब इसके बाद आपको बताते हैं इससे
जुड़े दूसरे पहलू के बारे में वो यह है कि

नॉर्मली ऐसा देखा जाता है कि जहां ऐसे
रिसोर्सेस के भंडार होते हैं वहां से
अवेलेबल रिसोर्सेस का सिर्फ ज्यादा से
ज्यादा 30 से 35 पर तक ही एक्सट्रैक्ट
किया जा सकता है अब एक नॉर्मल से मैथ से

आपको समझाते हैं कि अगर यह अंडमान एंड
निकोबार में ऑयल एक्सट्रैक्शन होता भी है
तो कितना ऑयल होगा भारत की खपत के लिए
देखिए आज भारत हर दिन लगभग 5 बिलियन
बैरल्स पर डे की खपत करता है और 1 टन इज
इक्वल टू 7.44 बैरल और रिजर्व के

अकॉर्डिंग 537 मिलियन बैरल्स यानी इस
उभरते ऑयल कैपिटल का सारा का सारा ऑयल
भारत सिर्फ 110 से 115 दिनों में खाकर
खत्म कर सकता है तो अब आप ही बताइए कि यह
ऑयल कैपिटल क्या सिर्फ नाम की हुई या नहीं
लेकिन हां यह बात भी सच है कि कुछ ना होने

से कुछ होना हमेशा बेहतर है लेकिन इसके
पीछे पूरे सोशल मीडिया पर बवाल मचाना कहां
की समझदारी है तो एक बात तो यहां से निकल
कर आती है कि भाई भारत के लिए ऑयल कैपिटल
बनना मुश्किल है और सच में मुश्किल है और

हमें इस बात को एक्सेप्ट करना भी चाहिए
भले ही भारत ग्लोबल ऑयल कैपिटल ना बने
लेकिन हां यह भारत 21वीं सदी का भारत है
दोस्त जो बड़े-बड़े बदलावों के साथ 204 7
तक एनर्जी इंडिपेंडेंस देश तो बन जाएगा और

यह अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है और यह
हम नहीं बल्कि यूएस की सबसे बड़ी
लेबोरेटरी यानी लॉरेंस बर्कले नेशनल
लेबोरेटरी ने अपनी रिपोर्ट पाथवेज टू
आत्मनिर्भर भारत में कहा है और उनका कहना

है कि यह भारत की सेल्फ रिलायंट इकॉनमी का
जबरदस्त बूस्ट होगा आइए अब जरा जान लेते
हैं कि यह कौन से पाथवेज हैं जिन पर चलकर

भारत 204 7 तक एनर्जी इंडिपेंडेंस के गोल
को अचीव कर लेगा देखिए इस दिशा में सबसे
पहले भारत 500 गगा वाट पावर वो भी नॉन
फॉसिल इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करने वाला है
जिसका पहला स्टेज यह है कि भारत 2030 तक

इतनी पावर जनरेट करने में काबिल होगा इसके
बाद 2040 तक वो 80 पर तक क्लीन ग्रेड और
फिर 204 7 तक लगभग 90 से 92 पर तक इस
टारगेट को अचीव करेगा जो अपने आप में एक

बहुत बड़ी बात है लेकिन यहां आपके लिए जान
लेना जरूरी है कि आखिर यह नॉन फॉसिल
इलेक्ट्रिसिटी और यह क्लीन ग्रिड क्या है
अ ये बात तो हम सब जानते हैं कि आज पूरी

दुनिया में गैस और ऑयल आज फॉसिल फ्यूल्स
के सबसे बड़े एग्जांपल्स हैं जिसके चलते
आज लोगों की डिपेंडेंसी कुछ देशों पर

ज्यादा है जैसे कि रशिया गल्फ कंट्रीज
अमेरिका और भारत इस ईंधन के लिए ज्यादातर
दूसरे देशों पर डिपेंड करता है जो फ्यूचर

में इसकी कमजोरी बन सकती है क्योंकि आज
नहीं तो कल यह रिसोर्सेस जरूर खत्म हो
जाएंगे और उस सिचुएशन में किसी भी देश के
लिए सरवाइव करना बेहद मुश्किल हो जाएगा

इसलिए आज हम नॉन फॉसिल फ्यूल्स की तरफ बढ़
रहे हैं जो कि बेसिकली सोलर एनर्जी विंड
एनर्जी और क्रॉप की मदद से पैदा होने वाले
इथेनॉल से मिलने वाली एनर्जी के रूप में

मौजूद है और यही आने वाले समय में भारत की
डिपेंडेंसी को कम करेंगे और उसे सेल्फ
रिलायंट बनाएंगे इसके बाद भारत ने जिस
दिशा में एनर्जी इंडिपेंडेंट होने के लिए
कदम बढ़ाया है वो है इलेक्ट्रिक व्हीकल की

तरफ मूव करना हाल ही में भारत सरकार ने
2027 तक डीजल से चलने वाले वाहनों को बंद
करने का नोटिस जारी करके एक बात तो साफ कर
दी है कि भाई भारत तरक्की के साथ-साथ

एनवायरनमेंट का भी ध्यान रखेगा क्योंकि
अगर एनवायरमेंट को इग्नोर किया गया तो
मतलब जिंदगी को इग्नोर किया गया इतना ही
नहीं यह बात तो हम सब जानते हैं कि आज
भारत दुनिया में व्हीकल का तीसरा सबसे

बड़ा मार्केट है और इंडिया अब 2030 तक
मार्केट में 70 पर इलेक्ट्रिक व्हीकल
बाजार में उतारने के टारगेट से आगे बढ़
रहा है वहीं इसके बाद उसका गोल 2035 तक इस

टारगेट को 90 पर तक पहुंचाने का है और जिस
स्पीड से भारत इस दिशा में काम कर रहा है
भारत शायद यह गोल अचीव भी कर ले तो यह भी
एक बड़ा कदम साबित होगा देश को एनर्जी
इंडिपेंडेंट बनाने की दिशा में अब आपको

स्टैट्स भी दिखाते हैं जिस पर भारत काम भी
कर रहा है यह देखिए भारत 2022 में 49 पर
नॉन फॉसिल फ्यूल्स और 51 पर फॉसिल फू पर
डिपेंडेंट था लेकिन अब यह 2030 तक 64 पर

नॉन फॉसिल फ्यूल्स और 36 पर फॉसिल फ्यूल्स
के गोल की तरफ बढ़ रहा है जो कि अपने आप
में भारत के लिए एक नई डायमेंशन को दिखाता
है इसके बाद अगर बात करें अपने हैवी
इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन की तो वहां भी

ग्रीन एनर्जी की तरफ शिफ्ट होती हुई
इंडस्ट्रीज को देखा जा सकता है और इसके
लिए जो गोल्स बनाए गए हैं वह यह है कि 90
पर ऑफ स्टील एंड आयरन इंडस्ट्रीज 90 पर ऑफ

सीमेंट इंडस्ट्रीज एंड 100% फर्टिलाइजर्स
इंड ीज 204 7 तक ग्रीन एनर्जी पर चलेंगी
जो अपने आप में नए भारत की एक नई उड़ान को
दिखाता है अब चलते-चलते जरा यह भी बात कर
लेते हैं कि भाई इस नए रेजोल्यूशन से

हमारे भारत को क्या फायदा मिलेगा तो जो
सबसे बड़ा फायदा है व यह है कि इंडिया
काफी चीजों में सेल्फ रिलायंट बन देश के
अंदर ही पैसे लगाएगा और बनाएगा और जॉब्स

भी जनरेट होगी जिससे देश में एजुकेटेड
लेबर फोर्स बढ़ेगी इसके बाद अब जब भारत 85
पर तक क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है तो आने
वाले समय में यह 90 पर और उससे भी ज्यादा
हो सकता है जो पूरी तरह भारत काबू में कर

लेगा और अपनी डिपेंडेंसी को खत्म कर देगा
यानी पैसा ही पैसा होगा ग्रीन एनर्जी
बढ़ेगी तो साफ सुथरा एनवायरमेंट तैयार
होगा और साफ सुथरा एनवायरमेंट मतलब साफ

सुथरा लाइफस्टाइल इतना ही नहीं आज हम तेल
के घटते बढ़ते दामों से कई बार देश की
इकॉनमी में उथल-पुथल
मचतेच भारत को झटका देती भी हैं लेकिन जब
हम ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ ही रहे हैं तो

यह सिर्फ एनवायरमेंट को ही से सेफगार्ड
नहीं करेगी बल्कि ये ग्रीन एनर्जी हमारे
इकोनॉमिक सस्टेनेबिलिटी को बढ़ाकर उसे भी
सेफगार्ड करेगी इसके बाद इलेक्ट्रिक वकल

की आर्केड बढ़ने से उस फील्ड में भी जॉब्स
बढ़ेंगी और लगभग ढाई ट्रिलियन की नेट
कंज्यूमर सेविंग्स भी 204 7 तक बढ़ेंगी और
तो और ग्रीन एनर्जी के डेवलपमेंट में जो

जीरो कार्बन एमिशन का सस्टेनेबिलिटी
डेवलपमेंट गोल भारत अचीव करना चाहता है वो
भी भारत जल्दी से जल्दी अचीव कर लेगा तो
एक बात तो पक्की है कि भाई भले ही ऑयल

इंडिया के पास ना हो लेकिन भारत के पास
इतने डायमेंशन जरूर हैं जो उसे फ्यूचर में
बाकी देशों से अलग एक शक्ति बना सकते हैं
और एक बात जो पूरी तरह से सच है वो यह कि
21वीं सदी भारत की सदी है जिसमें भारत

जैसे डेवलपिंग देश को डेवलप्ड देश भी
टक्कर देने से कतराते हैं क्योंकि वो
जानते हैं जो देश चांद पर तिरंगा फहरा
सकता है वो देश किसी भी फील्ड में अपने

झंडे गाड़ सकता है और ऐसे में टीएमएल की
जिम्मेदारी है कि आप तक सटीक जानकारी
पहुंचाई जाए ताकि आप इस भारत की असली
तस्वीर देख सकें और कि किसी गलतफहमी में
ना र तो उम्मीद करते है

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