क्या है मोदी सरकार का Bullet Train को लेकर Plan? | How Bullet Trains Will Change Indian Economy ? - instathreads

क्या है मोदी सरकार का Bullet Train को लेकर Plan? | How Bullet Trains Will Change Indian Economy ?

दोस्तों अहमदाबाद से मुंबई के बीच भारत की
पहली बुलेट ट्रेन बनाई जा रही है और इसके
बनने के बाद ट्रेवल टाइम काफी हद तक
रिड्यूस हो जाएगा और साथ ही ₹ ज में लोग
फ्लाइट से भी सस्ते दामों पर दोनों शहरों
के बीच में ट्रेवल कर पाएंगे लेकिन साथ ही

प्रोजेक्ट की टोटल लागत 180000 करोड़ आकी
गई है जिसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है
कि क्या भारत को ऐसी ट्रेन की जरूरत है
क्या इस पैसे से जो करंट ट्रेंस हैं
उन्हें नहीं इंप्रूव किया जाना चाहिए था
अब इसके अलावा भी बुलेट ट्रेन को लेकर कई
कंफ्यूजन पब्लिक के बीच में और आज की इस

वीडियो में हम इस पूरे प्रोजेक्ट को डिटेल
में देखने वाले हैं तो बस बने रहिएगा अंत
तक हमारे साथ देखिए इस बुलेट ट्रेन
प्रोजेक्ट में भारत को जापान और फ्रांस
जैसे देशों का भी साथ मिल रहा है इससे

पहले कि हम भारत के कॉन्टेक्स्ट में इसे
समझना शुरू करें आइए पहले यह देखते हैं कि
इन देशों ने किस तरह से अपने यहां हाई
स्पीड रेलवे को डेवलप किया था और वहां पर
इससे क्या चेंजेज आए थे हाई स्पीड ट्रेंस

की जब बात आ जाती है तो उसमें जापान का
नाम सबसे पहले आता है जापान को इस फील्ड
में एक पायनियर की तरह देखा जाता है
क्योंकि जब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को शुरू
किया था तब ज्यादातर दुनिया को उनके इस

प्रोजेक्ट पर भरोसा नहीं था जापान में
शिंका सेन नाम से इस प्रोजेक्ट की शुरुआत
हुई थी जिसे 1964 में शुरू किया गया था इस
प्रोजेक्ट को सबसे पहले जापान की राजधानी
टोक्यो से लेकर ओसाका तक बिछाया गया था ये
दोनों शहर दो बड़े इकोनॉमिक हब्स थे जिनके

बीच में ट्रेवल टाइम 7 घंटे से कम होकर
केवल 4 घंटे हो गया था इस समय ये ट्रेंस
210 किमी पर आर की स्पीड से चला करती थी
शिंका सेन के आने से पहले जापान का एक
ट्रेडिशनल रेल सिस्टम था उसमें भीड़ के

के दशक में सबसे पहले कुछ प्राइवेट कंपनीज
ने यहां हाई स्पीड रेल्स चलानी शुरू की थी
जो कि 150 किमी पर आर की स्पीड से चलती थी
जब वहां की सरकार ने इन ट्रेंस में पब्लिक
का इंटरेस्ट देखा तो जापान नेशनल हाईवेज

ने डिसाइड किया कि भाई वो इससे भी तेज
ट्रेंस बनाकर दिखाएंगे अब इस तर तरह से
1959 में इसकी कंस्ट्रक्शन शुरू कर दी गई
और 5 साल बाद ही यानी 1964 में पहला रूट
ऑपरेशनल भी हो गया इसका इनिशियल बजट उस
समय की करेंसी के हिसाब से तकरीबन 144000

करोड़ रखा गया था लेकिन जब तक यह
प्रोजेक्ट खत्म हुआ तब तक यह कॉस्ट डबल हो
चुकी थी लेकिन बजट से दुगना खर्च होने के
बाद भी यह ट्रेंस काफी सक्सेसफुल रही हैं

और सिर्फ 10 साल के अंदर ही इस प्रोजेक्ट
ने नाना सिर्फ अपनी कॉस्ट रिकवर कर ली थी
बल्कि यह उसकी ऑपरेशनल कॉस्ट भी कवर करने
लगी थी खैर 2024 की बात करें तो आज तक यह
ट्रेंस करीब 1000 करोड़ पैसेंजर्स को सर्व
कर चुकी हैं सबसे इंटरेस्टिंग बात यह है

कि भाई ये ट्रेंस जो हैं करीब 250 से 300
किमी पर आर की स्पीड से चलती हैं लेकिन आज
तक इन ट्रेंस के कारण एक भी एक्सीडेंट या
मौत नहीं हुई है जो उसे दुनिया की सबसे
सेफेस्ट ट्रेन में से एक बना देती है अब
ये ट्रेंस इतनी पंक्चुअल है कि भाई यहां

पर इन ट्रेंस का एवरेज डिले टाइम सिर्फ 36
सेकंड्स है इस ट्रेन का पहला एम यह था कि
लोगों को उनकी कैपिटल सिटी तक लाया जाए
इसकी वजह से इस पूरे रूट पर आने वाली कई
शहरों में भी इकोनॉमिक डेवलपमेंट देखी गई
थी जिसमें से कुछ तो टूरिस्ट डेस्टिनेशंस

भी बन गए और यह सब पॉसिबल हो पाया केवल इन
ट्रेंस के कारण अब बुलेट ट्रेंस के कारण
जपान के रोड और एयर ट्रैफिक पर पड़ने वाला
बोझ जो है वह भी कम हो गया और फ्लाइट
टिकट्स भी सस्ती हो गई इस समय उनका रेल
नेटवर्क करीब 2700 किमी ल और वेस्ट में

युशु आइलैंड से लेकर ऊपर नॉर्थ के होका
इडोप फैला हुआ है जापान आज के समय में एक
स्टेप आगे बढ़ चुका है और अब वो बुलेट
ट्रेंस की जगह मैगलेव ट्रेंस बना रहा है
मैगलेव ट्रेंस मैग्नेटिक लेविन पर बेस्ड
होती हैं जहां एक ट्रेडिशनल बुलेट ट्रेन

एक नॉर्मल ट्रेन की तरह व्हील्स पर ही
ऑपरेट करती हैं तो वहीं एक मैग्नेट ट्रेंस
ट्रैक्स को नहीं छूती हैं बल्कि ट्रैक्स
और ट्रेंस पर मैग्नेट्स लगे होते हैं

जिससे वोह हवा में ही तैरती हैं उन्होंने
इस समय टोक्यो से नागोया के बीच में अपने
पहले मैगलेव रूट की कंस्ट्रक्शन शुरू भी
कर दी है और 2027 तक भाई यह प्रोजेक्ट भी
कंप्लीट बनकर तैयार हो जाएगा जहां उनकी
करंट बुलेट ट्रेंस 320 किमी पर आर की

स्पीड से चलती हैं वहीं मैगले ट्रेंस
तकरीबन 505 किमी पर आर की स्पीड से चला
करेंगी टोक्यो और नागोया के बीच में 286
किमी का डिस्टेंस है जो मैगले ट्रेंस
सिर्फ 40 मिनट में पूरा कर पाएंगी इस

प्रोजेक्ट की टोटल कॉस्ट 47 बिलियन डॉलर्स
या यह कहे कि ₹ हज करोड़ रुप आंकी गई है
दूसरी ओर अगर फ्रांस की बात करें अब तो
उन्होंने यूरोप की पहली हाई स्पीड रेलवे

की शुरुआत की थी जिसे टीजीवी कहते हैं यह
लाइन 1981 में बनाई गई थी और जब यह लॉन्च
की गई थी तब इसकी टॉप स्पीड 270 किमी पर
आर थी जो इसे दुनिया की फास्टेस्ट ट्रेन
बना देती है इस ट्रेन लाइन को पेरिस से
डेजॉन के बीच बनाया गया था इसे बनाने का

रीजन भी ट्रैफिक और कंजेशन ही था आज
फ्रांस का हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क करीब
2800 किमी का है साथ ही ये ट्रेंस बाकी
यूरोपियन हाई स्पीड रेल नेटवर्क से भी
जुड़ी हुई हैं जिससे कि फ्रांस में ट्रेन

के जरिए आप यूके स्पेन बेल्जियम
नीदरलैंड्स लक्जमबर्ग जर्मनी स्विटजरलैंड
और इटली तक जा सकते हैं यूरोपियन कमीशन के
मुताबिक कोई भी हाई स्पीड प्रोजेक्ट तभी
सक्सेसफुल हो सकता है जब उसे कम से कम 90
लाख पैसेंजर्स इस्तेमाल करते हो टीजीवी ने

अपने पहले ही साल में ही 4 करोड़
पैसेंजर्स को सर्व किया था इस तरह से अगले
3 साल में उनका एयर ट्रैवल टोटल ट्रेवल के
31 पर से गिरकर सिर्फ 7 पर ही रह गया जबकि
रेलवे से जहां पहले 40 पर लोग ट्रेवल करते

थे वो बढ़कर 72 पर हो गए अब उसके बाद से
फ्लाइट्स के रेट्स भी काफी गिरे हैं लेकिन
आज भी यह लाइन प्रॉफिटेबल है इस समय हम
बाकी दुनिया की तरफ देखें तो दुनिया में
सबसे बड़ा हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क चीन

में है जो कि 59000 किमी का है खैर अब बात
करते हैं अहमदाबाद और मुंबई के बीच बनाई
जा रही बुलेट ट्रेन की देखिए इन दोनों
शहरों के बीच में रेलवे की हिस्ट्री
सदियों पुरानी है पहली बार 20 जनवरी

18631 घाट के इलाके से होकर गुजरती थी इसी
समय भरूच ब्रिज भी बनाया गया था जो कि
नर्मदा नदी के ऊपर था अब इसने दोनों ही
शहरों की इकोनॉमिक डेवलपमेंट में काफी मदद
की थी तेजी से बॉम्बे का भी अर्बनाइजेशन

होने लगा और बॉम्बे पोर्ट जहां से विदेश
जाया जा सकता था वहां भी लोगों के लिए आना
जो है आसान हो गया आजादी के बाद 19 1987
में यह पूरा रूट पूरी तरह से इलेक्ट्रिफाई
कर दिया गया था और नए ट्रैक्स भी बनाए गए

थे इस रूट पर पहली बार बुलेट ट्रेन बनाने
का प्रोजेक्ट 2009 से 10 में प्लान किया
गया था उस समय एक स्टडी भी की गई थी जिससे
यह देखा जा सके कि क्या यह रूट बुलेट
ट्रेन के लिए फीजिबल होगा इस समय प्लान यह
था कि अहमदाबाद से मुंबई होते हुए यह

ट्रेन पुणे तक जाए इस प्रोजेक्ट में
फ्रेंच नेशनल रेलवेज एसएनसीएफ ने भी
पार्टिसिपेट किया था जो उसमें टेक्निकल
कॉपरेशन प्रोवाइड कर रहे थे लेकिन 2013

में रेलवे बोर्ट ने डिसाइड किया कि भाई
फाइनेंशियल कंस्ट्रेंट्स के कारण पुणे तक
इसे ले जाना पॉसिबल नहीं होगा इसके पीछे
मेजर रीजन यह था कि बीच में कई पहाड़ी

इलाके थे जिससे कि ये कंस्ट्रक्शन बहुत
महंगी हो जाती इसलिए सितंबर 2013 में भारत
और जापान ने बस अहमदाबाद से मुंबई के रूट
को स्टडी करना शुरू कर दिया अब इस स्टडी
में ट्रैफिक फोरकास्टिंग अलाइन मेंट

सर्विसेस लैंड एक्यूजन एनवायरमेंटल चैलेंज
और टनल्स और ब्रजेस बनाने को लेकर अलग-अलग
स्टडीज कंडक्ट की गई थी जापान इंटरनेशनल
कॉपरेशन एजेंसी यानी जेआईसीए और फ्रांस की

एसएनसीएफ इसमें साथ में काम कर रहे थे इस
स्टडी में 12 स्टेशंस को
आइडेंटिफिकेशन
खुला रहे इसके बाद 2016 में इस प्रोजेक्ट
को अप्रूवल मिल गया इस प्रोजेक्ट के लिए
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड

एनएचएस आरसीएल नाम नाम से एक स्पेशल पर्पस
व्हीकल बनाया गया जो कि इस पूरे प्रोजेक्ट
को देखने वाला था अब यह एक जॉइंट वेंचर था
जिसमें महाराष्ट्र और गुजरात सरकार को भी
55000 करोड़ इन्वेस्ट करने थे और 00 करोड़

केंद्र सरकार की तरफ से दिए जाने थे यह
ट्रेन अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन
से शुरू होगी जहां पर प्लेटफार्म नंबर 10
11 और 12 को इसके लिए रिजर्व किया गया है

इसके बाद इसके अगले स्टॉप अनंत नादिया में
एक ग्रीन फील्ड रेलवे स्टेशन भी डेवलप
किया जा रहा है जी हां इसके बाद यहां से
वह भरूच ब्रिज को क्रॉस करती हुई जाएगी

इसके पास ही दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे और
एक डेडिकेटेड फ्राइड कॉरिडोर भी पहले से
मौजूद है इसके साथ-साथ 25 किमी लंबी टनल्स
भी इस रूट का हिस्सा होंगी अब इस रूट को
मेजर्ली वाया डक्ट्स के ऊपर ही बनाया जा

रहा है वाया डक्स वो पिलर्स होते हैं
जिनके ऊपर आपने मेट्रोस या कुछ रोड्स को
भी बनते हुए देखा होगा इसका एक बड़ा कारण
यह था कि इससे लैंड एक्विजिशन का काम आसान
हो जाता है अगर इसे ट्रेडिशनल इ बैक
मेंट्स के थ्रू बनाया जाए तो तीन गुना

ज्यादा लैंड एक्वायर करनी पड़ती जो कि
प्रोजेक्ट की कॉस्ट को और ज्यादा बढ़ा
देती इसके साथ-साथ तो शहरों के बीच में
लैंड एक्वायर करने का प्रोसेस भी काफी
लंबा हो सकता था जिससे प्रोजेक्ट में

डिलेज आने लाजमी थे अब इसके साथ-साथ बुलेट
ट्रेंस में हम ज्यादा कर्व्स ऐड नहीं कर
सकते और इनका रूट ज्यादातर एक स्ट्रेट
लाइन में ही होता है अगर इबैंक मेंट्स के
थ्रू इन्हें बनाया जाए तो रास्ते में
पड़ने वाले शहरों के कई इलाके भी खाली

करवाने पड़ते हैं इस तरह की डिस्प्लेसमेंट
हम हमेशा ही कंट्रोवर्शियल होती है
कोर्ट्स में केस लड़ने से बेहतर है कि
यहां बाया डक्ट्स का ही इस्तेमाल किया जाए
क्योंकि अब बाया डक्टस पर इन्हें बनाया जा
रहा है तो इसमें फेंसिंग बनाने का खर्च और

उस पर लगने वाला समय भी बच जाएगा इसके
साथ-साथ एक 21 किमी लंबी टनल पुणे से
मुंबई के बीच में भी बनाई जा रही है
जिसमें 7 किमी की अंडर सी टनल भी शामिल है
पहले इस पूरे प्रोजेक्ट की कॉस्ट तकरीबन
80000 करोड़ आंकी गई थी जी हां जो बढ़कर
अब

180000 करोड़ हो गई है इस कॉस्ट में से
0000 करोड़ जेआईसीए द्वारा लोन के तौर पर
दिए जाएंगे और इतना ही नहीं लोन एसएनसीएफ
भी दे इस लोन को % के इंटरेस्ट रेट पर 50
सालों के लिए दिया गया है प्रोजेक्ट के
लिए 20 कंपोनेंट्स जापान से सप्लाई किए

जाएंगे जिन्हें भारत में ही मैन्युफैक्चर
किया जाएगा इसके अलावा 24 रेड e5 सीरीज
शंका सेन ट्रेन सेट्स भी खरीदे जाएंगे
जिनमें से छह ट्रेंस भारत में असेंबल की
जाएंगी भारत के क्लाइमेट को देखते हुए इन

ट्रेंस में से कुछ मॉडिफिकेशन भी किए गए
हैं इस प्रोजेक्ट के लिए अभी तक 1434
हेक्टेयर जमीन एक्वायर की गई है और 2017
से ही इसका कंस्ट्रक्शन चालू है अभी तक 91

किमी वाया डक्ट्स बनाए जा चुके हैं और 263
किमी की फाउंडेशन तैयार है इसका 50 किमी
का स्ट्रेच बनकर तैयार है और अगस्त 2026
में इसे ओपन कर दिया जाएगा सूरत से बमोरा
के बीच का पूरा रूट भी 2027 तक ओपन हो

जाएगा लेकिन पूरा प्रोजेक्ट कंप्लीट होने
में 2031 का समय तो लगेगा इन ट्रेंस की
मैक्सिमम स्पीड 320 किमी बताई जा रही है
और इनकी एवरेज स्पीड भी 260 किमी के आसपास
रहेगी इंडियन रेलवेज ने इस रूट पर दो तरह
की सर्विसेस शुरू करने की बात कही है पहली

सर्विस तो एक्सप्रेस सर्विस होगी जो इस
रूट में सूरत और डोरा के दो स्टॉप्स पर ही
रुकेगी और दूसरी थोड़ी स्लो सर्विस है जो
सभी स्टेशन से होते हुए जाएगी हर स्टॉप पर
यह ट्रेन सिर्फ 3 मिनट के लिए ही रुकेगी
इसलिए जहां एक्सप्रेस ट्रेन ये डिस्टेंस 2

घंटे 7 मिनट में कवर कर वहीं स्लोअर
ट्रेंस को भी तकरीबन 3 घंटे से ज्यादा का
समय नहीं लगेगा इस समय अहमदाबाद और मुंबई
के बीच की जर्नी में 6 से 7 घंटे का समय
लगता है इसलिए यह एक काफी बड़ी

इंप्रूवमेंट है इसके साथ ही 70 ट्रेंस
चलाने की बात की गई है जिसमें पर साइड 35
ट्रेंस चलेंगी पी कार्स के समय में हर
घंटे तीन ट्रेंस चलाई जाएंगी और नॉर्मली
दो ट्रेंस हर घंटे चलेंगी यह ट्रेंस सुबह

ऑपरेशनल रहेंगी इंडियन रेलवेज का
एस्टिमेटर दोस्तों कि हर दिन इस ट्रेन को
36000 से ज्यादा लोग इस्तेमाल करेंगे इस
ट्रेन में 10 कोचेस होंगे और हर ट्रेन की
कैपेसिटी करीब 700 पैसेंजर्स की होगी

कंप्लीशन के बाद यह ट्रेन फ्लाइट्स बसेस
और रेगुलर ट्रेन से बेहतर विकल्प के तौर
पर उभर गगी क्योंकि जहां एयरपोर्ट्स शहर
से दूर होते हैं वहीं यह ट्रेन स्टेशंस
शहर के बीच होंगे जो कि लोगों का शहर के
अंदर ट्रेवल करने का समय भी बचाएगी अब इस

रूट के अलावा देखिए रेल मंत्रालय ने ऐसे
छह कॉरिडोर्स प्लान किए हैं इसमें दिल्ली
से अहमदाबाद दिल्ली से ही वाराणसी मुंबई
से नागपुर मुंबई से हैदराबाद चेन्नई से
मैसूर और दिल्ली से अमृतसर जैसे रूट्स भी

शामिल है दिल्ली और मुंबई के बीच का रूट
भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बिजय
रूट्स में से एक है और इस तरह से दिल्ली
से अहमदाबाद और फिर अहमदाबाद से मुंबई के
रूट्स जब आपस में कनेक्ट होंगे ना तो

सड़कों और रेगुलर ट्रेंस के ऊपर भी बोझ कम
हो जाएगा जब एक बड़ा बुलेट ट्रेन नेटवर्क
भारत के शहरों के बीच में आ जाएगा तो उससे
एयरलाइन इंडस्ट्री को भी फायदा है अब
उन्हें छोटे रूट्स पर फ्लाइट्स नहीं चलानी
पड़ेगी जो कम प्रॉफिटेबल होती हैं बल्कि
वह डायरेक्टली लॉन्ग हॉल फ्लाइट्स पर फोकस

कर पाएंगे शहरों के लिए भी अच्छा है
क्योंकि फिर ज्यादा एयरपोर्ट्स बनाने की
जरूरत नहीं होगी ना सिर्फ एक रेलवे स्टेशन
को बनाना एक एयरपोर्ट बनाने से ज्यादा
आसान है बल्कि उसके लिए कम लैंड भी

एक्वायर करनी पड़ती है दोस्तों यह ट्रेन
स्टैंडर्ड व्हील ट्रेंस होंगी अभी मैगले
ट्रेंस को लेकर कोई ठोस प्लान फिलहाल भारत
के अंदर नहीं प्रपोज किया गया है इन
ट्रेंस को चलाने के लिए 25 किलोवाट एसी
पावर का इस्तेमाल होगा साथ ही इसमें

ट्रेडिशनल इंजंस नहीं है और व्हील्स में
इलेक्ट्रिक मोटर्स का इस्तेमाल किया जाएगा
अहमदाबाद और मुंबई के रूट के बाद अहमदाबाद
और दिल्ली के रूट पर काम शुरू हो जाएगा
दिल्ली में अभी के लिए यह प्रपोज किया गया
है कि यह ट्रेन द्वारका सेक्टर 21 से शुरू

होगी और इसके रास्ते में गुड़गांव मानेसर
रेवाड़ी जयपुर किशनगढ़ अजमेर भीलवाड़ा
उदयपुर और हिम्मतनगर जैसे स्टेशंस होंगे
दोनों रूड्स के बनने के बाद दिल्ली और
मुंबई के बीच 16 घंटे के सफर को सिर्फ 6

घंटे में तय किया जा सकेगा दोनों शहरों के
बीच में अगर हम एयरपोर्ट तक जाने का और
चेक इन का टाइम भी कैलकुलेट करें तो आसानी
से भैया चार से 5 घंटे लगते ही हैं इसलिए
यह ट्रेंस एक बेहतर अल्टरनेटिव के रूप में
इमर्ज करेगी रेल मंत्रालय के मुताबिक अभी

फिलहाल इस रूट के लिए लैंड एक्वायर करने
और सभी क्लीयरेंसस लेने में तकरीबन ती से
4 साल का वक्त और लगेगा जिसके बाद 3 साल
इसकी कंस्ट्रक्शन में भी लगेंगे इसलिए की
ओपनिंग डेट 2031 रखी गई है इसमें भारत के

लिए जो जापान जैसे देशों से सीखने वाली
बात है वो है सेफ्टी और पंक्चुअलिटी इन
दोनों ही मुद्दों पर उन्होंने कभी
कॉम्प्रोमाइज नहीं किया जिसका नतीजा यह
हुआ कि भाई आज तक वहां कभी कोई एक्सीडेंट
जो है नहीं हुआ है इसके अलावा हमें बुलेट

ट्रेंस के चलाए जाने से तब तक ट्रेडिशनल
ट्रेंस को भी नहीं रोकना है जब तक एक बड़ा
बुलेट ट्रेन नेटवर्क भारत में ना हो वरना
जो लोग इसे अफोर्ड नहीं कर सकते उनके पास
रेलवे से सस्ते ट्रेवल का भी ऑप्शन चला

जाएगा खैर आपको क्या लगता है कि कितने
सालों में हम देश का बुलेट ट्रेन नेटवर्क
पूरी तरह से डेवलप कर पाएंगे साथ ही चीन
और जापान जैसे देशों से हमें और क्या

सीखना चाहिए अपनी राय कमेंट सेक्शन में
लिखकर जरूर बताएं और उम्मीद करते हैं आपको
आज के इस वीडियो में काफी कुछ नया मिला
होगा

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