क्या है राम मंदिर की असली कहानी ? : त्रैता युग से 2024 तक | The Real Story Of Ayodhya Ram Temple - instathreads

क्या है राम मंदिर की असली कहानी ? : त्रैता युग से 2024 तक | The Real Story Of Ayodhya Ram Temple

देखिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
के जीवन की कहानी से आज बच्चा-बच्चा वाकिफ
है बचपन में या फिर लॉकडाउन में आपने
रामायण तो जरूर देखी होगी रामायण के लास्ट
में हमें देखने को मिलता है कि भगवान राम

जल समाधि के बाद गरुड़ पर सवार होकर
बैकुंठ के लिए निकल जाते हैं लेकिन इसके
बाद अयोध्या और अयोध्या वासियों का क्या
हुआ यह किसी को पता हो या ना पता हो लेकिन
भैया अयोध्या में राम मंदिर बनकर तैयार हो

चुका है जिसका उद्घाटन 22 जनवरी 2024 को
होने वाला है यह आपको जरूर पता होगा
अयोध्या में बने इस मंदिर की कहानी कहीं
ना कहीं भगवान राम के बैकुंठ जाने के बाद

से ही स्टार्ट हो जाती है जी हां सही सुना
आपने जब इनके पुत्र कुश के द्वारा अयोध्या
में राम मंदिर निर्माण करवाया जाता है
अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा
को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं जिसमें

सभी दिग्गज नेताओं के साथ फिल्म इंडस्ट्री
के कलाकार भी शामिल होंगे लेकिन क्या आपको
इस मंदिर के इतिहास के बारे में पता है
अगर नहीं तो आज हम इस वीडियो में आपको

बताएंगे कि कहां से शुरू हुई यह कहानी और
इस कहानी में कब-कब क्या-क्या हुआ था अब
इस कहानी को शुरू करने से पहले हम आपको
बता दें कि इस वीडियो को स्पंस किया है
आर्टेरिया ने जी हां राम के दीवानों के

लिए आर्टेरिया लेकर आया है अयोध्या के राम
मंदिर का 3d मॉडल इसमें आपको कुल उतने ही
पिलर और गुंबद देखने को मिलेंगे जितने
अयोध्या के राम मंदिर में है अगर आप भी
अपने घर राम मंदिर को स्थापित करना चाहते

हैं तो मिस्टिका न कोड का यूज कर ने पर
अभी आपको मिलेगा 10 पर का डिस्काउंट
डिस्क्रिप्शन में इसका लिंक दिया गया है
जल्दी से जाकर देखिए राम मंदिर के अलावा
आपको यहां पर और भी बहुत कुछ देखने को मिल

जाएगा अगर कुछ पसंद आता है तो ऑर्डर करना
बिल्कुल ना भूले चलिए अब कहानी पर वापस
आते हैं देखिए भगवान राम के बैकुंठ जाने
के बाद इनकी 44 पीढ़ियों ने अयोध्या पर

राज किया जब राम के पुत्र कुश अयोध्या के
राजा थे तो इन्होंने भगवान राम की
जन्मस्थली पर एक जन्मभूमि मंदिर के
साथ-साथ कई छोटे-छोटे मंदिर बनवाए समय के
साथ-साथ इन मंदिरों की हालत जरजर होती चली
गई जिन्हें बाद में 57 ईसवी पूर्व के

आसपास उज्जैन के राजा यानी विक्रम आदित्य
जी ने रिनोवेट करवाया लेकिन अप्रैल 1526
में बाबर के भारत आने के बाद मुगल शासन की
शुरुआत होती है 1528 से 29 में बाबर

अयोध्या जाता है तो अपने सेनापति मीर बाकी
से मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनवाने का
आदेश दे देता है तो मीर बाकी मंदिरों को
तोड़कर मस्जिद बनवा देता है और हिंदुओं के

अंदर आने पर रोक लगा देता है और फिर लगभग
190 साल बाद यानी 1717 ई में आमेर के राजा
जयसिंह द्विती मस्जिद के बाहर जमीन देखकर
आंगन में एक चबूतरा बनवाते हैं जहां पर

रामलला की मूर्ति को स्थापित किया जाता है
अब यहां होता क्या है कि मस्जिद के अंदर
तो मुस्लिम नमाज करते थे जबकि बाहर चबूतरे
पर हिंदू भगवान राम की पूजा किया करते थे

ऐसा कई सालों तक चलता रहा और फिर
कि इस मस्जिद की जगह पर राम मंदिर था
जिसको बाबर के समय में तोड़कर मस्जिद बना
दी गई थी अब हम यहां पर फिर से राम मंदिर
बनाएंगे मुसलमानों के द्वारा इसका विरोध

किया जाता है और फिर यहीं से हिंदू और
मुसलमानों के बीच में लड़ाई शुरू हो जाती
है कई जगह पर दंगे होते हैं इन दंगों को
रोकने के लिए
18590 मामला कुछ सालों के लिए तो सुलझ

जाता है अब होता क्या है कि 1885 में
निर्मा वही अखाड़ा के महंत यानी रघुवर दास
फैजाबाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में राम चबूतरे
पर छतरी बनाने के लिए अपील करते हैं लेकिन
उनकी अपील को खारिज कर दिया जाता है अपील

के खारिज होने से हिंदू कम्युनिटी में रोश
की स्थिति पैदा हो जाती है और जगह-जगह
हिंसा शुरू हो जाती है इस हिंसा में
मस्जिद और राम चबूतरे के बीच बनी फेंसिंग

के साथ-साथ मस्जिद की दीवार को तोड़ दिया
जाता है ब्रिटिश सरकार द्वारा दीवार को
फिर से बनवाने के साथ एक रूल बनता है कि
मस्जिद को केवल जुम्मे की नमाज के लिए ही

खोला जाएगा और फिर भारत देश के आजाद होने
तक यही व्यवस्था जो है चलती रही थी लेकिन
आजादी के 2 साल बाद यानी 23 दिसंबर 1949
को सुबह होते ही हिंदू समुदाय द्वारा
मस्जिद के अंदर घंटियों और शंख की आवाज के

साथ पूजा की जाती है जिससे भीड़ एकत्र हो
जाती है हिंदुओं की भीड़ पूजा करने के लिए
तो मुसलमानों की भीड़ इसका विरोध करने के
लिए एकजुट हो जाती है और फिर से एक बार

विद्रोह की सिचुएशन बन जाती है अब देखिए
इतनी भीड़ में पुलिस भी कुछ नहीं कर सकती
थी तो वहां के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट
केके नायर इसकी जानकारी प्राइम मिनिस्टर
ऑफिस को दे देते हैं जब यह मामला दिल्ली

पहुंचता है तो इस समय प्रधानमंत्री
जवाहरलाल नेहरू थे नेहरू जी पीएमओ ऑफिस से
केके नायर को एक आदेश पारित करके कहते हैं
कि जबरदस्ती करके किसी चीज को हथियाना गलत
है मूर्ति को तुरंत मस्जिद से निकालकर

बाहर किया जाना चाहिए इसके जवाब में केके
नायर पीएम को एक लेटर लिखकर कहते हैं कि
यहां की सिचुएशन को देखते हुए मूर्ति को
किसी भी हालत में बाहर नहीं निकाला जा
सकता क्योंकि यहां के पुजारियों का मानना

है कि बिना पूजा हवन किए मूर्ति को वहां
से उठाया तो पाप लगेगा अब पीएमओ की तरफ से
केके नायर के पास एक रिप्लाई आता है कि
आपको जो आदेश दिया गया है उसका पालन कीजिए
और मूर्ति को बाहर निकालिए तो इस आदेश के

जवाब में के के नायर पीएमओ को दो सुझाव
लिखकर भेजते हैं पहला तो यह कि यहां पर
सिचुएशन आउट ऑफ कंट्रोल है मस्जिद की
सुरक्षा और लोगों की भीड़ को देखते हुए
मस्जिद के बाहर एक चाली नुमा गेट लगाना

होगा जिससे मस्जिद को कोई नुकसान नहीं
होगा और सभी लोग बाहर से दर्शन कर पाएंगे
और दूसरा यह कि इस मामले को कोर्ट को सौंप
देना चाहिए जिससे कोर्ट का मामला आने तक
सब लोग शांत रहेंगे अब इन सुझावों के साथ
ही केके नायर ने अपना रिजाइन भी दे दिया

इनके रेजिग्नेशन को तो स्वीकार नहीं किया
गया लेकिन पीएमओ को उनके सुझाव बहुत पसंद
आए यह मामला कोर्ट में चला जाता है और इस
तरह रामलला की मूर्ति मंदिर में ही रहती
है अब भैया हिंदू पक्ष से तो निर्मोही

अखाड़ा और मुस्लिम पक्ष से सुन्नी
वकफा एक के केस फाइल किया जाता है जिसमें
निर्मोही अखाड़ा कहता है कि यहां पर
शुरुआत से ही राम मंदिर था और अब तो
मूर्ति भी निकल आई है तो इसका पूरा अधिकार

हमें दे दिया जाए ताकि हम यहां पर राम
मंदिर बना सकें वहीं सुन्नी वकफा करता है
कि यहां पर शुरुआत से ही मस्जिद रही है
इसका पूरा कंट्रोल हमें मिलना चाहिए

तकरीबन 20 से 25 साल तक यह दोनों केस
कोर्ट में रहते हैं अभी तक यहां पर
कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी 1980 में
जनसंघ से अलग होकर बीजेपी का गठन होता है
बताया जाता है कि बीजेपी के गठन के बाद
विश्व हिंदू परिषद शिवसेना बजरंग दल और

आरएसएस जैसे सभी हिंदू दल एक्टिव हो जाते
हैं और 1984 में विश्व हिंदू परिषद द्वारा
एक धर्म संसद का आवाहन किया जाता है
जिसमें बीजेपी के बड़े-बड़े नेता लाल

कृष्ण आडवाणी मुरली मनोहर जोशी यह लोग भी
शामिल होते हैं इस धर्म संसद में विश्व
हिंदू परिषद के प्रेसिडेंट अशोक सिंघल
ऐलान करते हैं कि भाई राम मंदिर बनेगा और
जरूर बनेगा अब इस मंदिर को बनाने के लिए

पूरे देश से ईटें मंगाई जाएंगी यह बात
धीरे-धीरे पूरे देश में फैल जाती है 1984
यह वही साल था जब इंदिरा गांधी की मौत हुई
थी और कांग्रेस की कमान उनके पुत्र राजीव
गांधी को सौंपी गई थी अब यहां होता क्या

है कि बीजेपी तो खुलकर राम मंदिर के
सपोर्ट में बोल रही थी जिससे सभी हिंदू
बीजेपी को सपोर्ट कर रहे थे और इसी बीच
1986 में राम मंदिर के गेट खुलवाने का एक

मामला कोर्ट में आता है तो राजीव गांधी
हिंदुओं का विश्वास जीतने के लिए एक घंटे
के अंदर मंदिर के गेट खुलवा देते हैं इस
न्यूज़ को दूरदर्शन के माध्यम से पूरे देश
में ब्रॉडकास्ट किया जाता है इससे मुस्लिम

दल कांग्रेस से नाराज हो जाते हैं और सभी
मुस्लिम नेता मिलकर कांग्रेस का विरोध
करने के लिए बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी
बनाते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि
भैया कांग्रेस 1989 का चुनाव हार जाती है

राम मंदिर के सपोर्ट में होने की वजह से
बीजेपी को इस चुनाव में फायदा मिलता है
जहां 1984 में बीजेपी को मात्र दो सीटें
मिली थी अब 1989 चुनाव में 85 सीटें मिलती
हैं नेशनल फ्रंट के नेता वीपी सिंह बीजेपी
का सपोर्ट लेकर प्राइम मिनिस्टर बनते हैं

नेशनल फ्रंट की सरकार बनने के बाद बीजेपी
के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ऐलान करते हैं
कि राम मंदिर के सपोर्ट में गुजरात के
सोमनाथ से लेकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या
तक पूरे 10000 किमी तक रथ यात्रा निकाली

जाएगी जो 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचेगी
अब गुजरात और राम मंदिर की चर्चा हो और
नरेंद्र मोदी जी का नाम ना आए यह तो हो ही
नहीं सकता जी हां बिल्कुल इस यात्रा में
गुजरात से मोदी जी भी शामिल हुए थे इस समय

मोदी जी की उम्र महज 40 साल थी कहा जाता
है कि गुजरात में इस यात्रा के प्रबंधन
में मोदी जी का अहम योगदान रहा और फिर 25
सितंबर 1990 को सोमनाथ से यात्रा स्टार्ट
होती है जिसे कई राज्यों से होते हुए

अयोध्या पहुंचना था लेकिन इस यात्रा का
विरोध किया जाता है और जहां-जहां से भी यह
यात्रा निकलती है वहां इस यात्रा का विरोध
शुरू हो जाता है कई राज्यों में विरोध के
बाद जब 23 अक्टूबर 1990 को यह यात्रा

बिहार के समस्तीपुर में पहुंची तो बिहार
के चीफ मिनिस्टर और नेशनल फ्रंट पार्टी के
सपोर्टर लालू प्रसाद यादव समस्तीपुर के
डीआईजी को आदेश देते हैं कि इस यात्रा को
रोक दिया जाए और लाल कृष्ण आडवाणी को

अरेस्ट किया जाए होता भी कुछ ऐसे ही है कि
भैया डीआईजी के द्वारा बीजेपी के कुछ
नेताओं के साथ आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया
जाता है और 12 दिन तक इन्हें सिंचाई विभाग
के पोस्ट ऑफिस में रखा जाता है दरअसल
यात्रा शुरू होने से पहले आडवाणी ने यह

कहा था कि देखता हूं किसने माय का दूध
पिया है जो मेरी रथ यात्रा रोकेगा अब यही
वजह थी कि लालू यादव ने नहले पर देहला
मारकर आडवाणी को गिरफ्तार करवाया और कहा
कि मैंने मां और भैंस दोनों का दूध पिया

है इस गिरफ्तारी का परिणाम यह होता है कि
भैया जैसे ही यह खबर दिल्ली पहुंचती है तो
बीजेपी वीपी सिंह गवर्नमेंट ने अपना
समर्थन वापस ले लिया और जिससे वीपी सिंह
की सरकार गिर जाती है अब रथ यात्रा के बीच

में हुए दंग ंग से नाराज होकर 30 अक्टूबर
1990 को बड़ी संख्या में कार सेवक अयोध्या
पहुंचते हैं और मस्जिद के ऊपर चढ़कर अपना
झंडा लगा देते हैं जिससे हालात और खराब हो
जाते हैं इस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम

सिंह की सरकार थी तो इस दंगे को रोकने के
लिए मुलायम सिंह कार सेवकों पर गोली चलाने
का आदेश दे देते हैं इस गोलीबारी में पांच
कार सेवकों की मौत हो जाती है जिससे
अयोध्या ही नहीं बल्कि पूरे देश का माहौल

एकदम ऐसा गर्म हो जाता है उमा भारती अशोक
सिंघल स्वामी वामदेव जैसे बड़े हिंदूवादी
नेता अलग-अलग दिशाओं से 55000 कार सेवकों
के साथ गुस्से से भरे हुए हनुमान गढ़ी की
ओर बढ़ते हैं गुस्साई हुई भीड़ को देखकर

पुलिस फायरिंग शुरू कर देती है जिसमें कई
कार सेवक मारे जाते हैं और फिर इनकी लाशों
को रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाता है और
मुलायम सिंह यादव को मुल्ला मुलायम का
टाइटल दे दिया जाता है और इसी का परिणाम

था कि भैया 1991 के चुनाव में मुलायम सिंह
को हार का सामना करना पड़ता है और उत्तर
प्रदेश में बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री
बनते हैं कल्याण सिंह लेकिन 1991 में
राजीव गांधी की मौत होने की वजह से लोगों

की सहानुभूति कांग्रेस को मिलती है जिससे
सेंटर में कांग्रेस की सरकार बनती है और
प्राइम मिनिस्टर बनते हैं पीवी नरसिंहा
राव यूपी में बीजेपी की सरकार बनने के बाद

10 जनवरी 1991 को अयोध्या के पुजारियों की
सहमति से 2.77 एकड़ भूमि जन्मभूमि न्याय
ट्रस्ट को दे दी जाती है यह ट्रस्ट राम
मंदिर के लिए जगह बनाने के लिए
कंस्ट्रक्शन चालू कर देता है लेकिन इसका
मामला पहले से ही कोर्ट में चल रहा था जिस

वजह से कोर्ट द्वारा कंस्ट्रक्शन पर बैन
लगा दिया जाता है बैन लगने के बावजूद
मंदिर बनाने के लिए 1992 में फिर से कार
सेवकों का आवाहन किया जाता है इस समय यूपी
में तो बीजेपी की सरकार थी लेकिन केंद्र

में कांग्रेस की सरकार थी केंद्र और राज्य
सरकारों को यह डर था कि फिर से पहले जैसी
सिचुएशन ना बन जाए इसलिए 30 अक्टूबर 1992
में प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहा विश्व
हिंदू परिषद और सिया सुन्नी बोर्ट दोनों
के लीडर्स को मीटिंग के लिए दिल्ली बुलाते

हैं लेकिन इस मीटिंग में कोई खास निष्कर्ष
नहीं निकलता और विश्व हिंदू परिषद के नेता
आपस में ही एक प्राइवेट मीटिंग करके 6
दिसंबर को फिर से कार सेवकों को बुलाने का
ऐलान कर देते हैं तो कांग्रेस के प्राइम

मिनिस्टर यानी पीवी नरसिंहा यूपी के चीफ
मिनिस्टर कल्याण सिंह को प्रेसिडेंशियल
रूल लागू करने के लिए बोलते हैं लेकिन
कल्याण सिंह आश्वासन देकर मना कर देते हैं
और कोर्ट में हलफनामा देते हैं कि यहां पर

कोई हिंसा नहीं होगी और इसकी जिम्मेदारी
राज्य सरकार की होगी और और किसी भी
सिचुएशन में कार सेवकों पर गोलियां नहीं
चलाई जाएंगी अब देखिए 6 दिसंबर 1992 को 2
लाख से ज्यादा कार सेवक अयोध्या पहुंचे थे

इस समय बीजेपी के कुछ नेताओं पर अयोध्या
आने पर रोक लगा दी जाती है और यही वजह है
कि उमा भारती सिर मुंडवा करर वहां पहुंचती
हैं ताकि कोई उन्हें पहचान ना पाए उमा
भारती के अलावा अटल बिहारी वाजपेई जी अशोक

सिंगल लाल कृष्ण आडवाणी जैसे सभी बड़े
नेता अयोध्या पहुंच जाते हैं और फिर यह
भीड़ 5:00 बजे तक म मस्जिद के तीनों गुंबद

को तोड़कर मेन गुंबद की जगह पर एक छोटा सा
मंदिर बनाकर रामलला की मूर्ति वहां पर रख
देती है जिस वजह से हिंदू और मुस्लिम
लोगों के बीच दंगे होने शुरू हो जाते हैं

और राज्य सरकार द्वारा की गई सारी
व्यवस्थाएं फेल हो जाती हैं हजारों की
संख्या में लोगों की मौत होती है और
सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा यूपी में
प्रेसिडेंशियल रूल लागू कर दिया जाता है
जिसके बाद कल्याण सिंह मुख्यमंत्री पद से

अपना इस्तीफा देते हैं यह मुद्दा इंडिया
तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि इस के विरोध
में पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं
की दुकानें जलाई जाती हैं उन्हें लाठियों
से मारा जाता है और कई हिंदू मंदिर तोड़

भी दिए जाते हैं अब जब 2001 में बीजेपी
पार्टी से अटल बिहारी वाजपेई की सरकार
बनती है तो विश्व हिंदू परिषद द्वारा
सेंट्रल गवर्नमेंट को बोला जाता है कि

अयोध्या में राम मंदिर बनाने का काम शुरू
करवाओ और अगर सरकार से नहीं हो रहा है तो
हमें बता दो फिर हम मंदिर बनवाए गे अब जब
सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं
मिलती तो भैया 15 अक्टूबर 2002 में विश्व

हिंदू परिषद सैकड़ों कार्यकर्ताओं को
बुलाकर मंदिर का निर्माण शुरू कर देती है
जब यह कार्यकर्ता अयोध्या से लौटकर जा रहे
थे तो जैसे ही इनकी ट्रेन गोदरा पहुंचती

है तो भड़के हुए लोगों द्वारा ट्रेन में
आग लगा दी जाती है जिसमें 58 लोगों की मौत
हो जाती है और इसके बाद एक बार फिर से देश
का माहौल गर्म हो जाता है जिससे कोर्ट इस
मामले में तेजी करने की कोशिश करती है और

फिर एएसआई यानी आर्कियोलॉजी जर्नी ऑफ
इंडिया को इस मंदिर के आसपास खुदाई करके
रिलेटेड साक्षी निकालने के लिए बोला जाता
है तकरीबन 6 महीने की खुदाई के बाद एएसआई
की रिपोर्ट आती है जिसमें 10वीं और 12वीं

सेंचुरी के हिंदू मंदिरों के अवशेष मिलते
हैं जिसके आधार पर 30 सितंबर 2010 को
कोर्ट का फैसला आता है जिसमें कोर्ट पहली
बार यह मानती है कि यहां पर राम जन्म भूमि
थी और इस भूमि को तीन भागों में बांट दिया

जाता है सीता रसोई और चबूतरा निर्मोही
अखाड़ा को दिया जाता है सेंटर एरिया राम
भूमि न्यास को दिया जाता है और बाकी का
एरिया सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया जाता
है लेकिन कोई भी पक्ष इस फैसले पर अग्री

नहीं करता है और 2011 में यह मामला
सुप्रीम कोर्ट के पास चला जाता है और लगभग
फिर से 6 साल तक सुप्रीम कोर्ट में
पेंडिंग रहने के बाद 2017 में इस केस की
सुनवाई शुरू होती है और लगभग 2 साल के बाद
यानी 9 नवंबर 2019 को पांच जजेस की एक

बेंच के द्वारा एएसआई के रिपोर्ट के आधार
पर तकरीबन 2.77 एकड़ जमीन राम जन्मभूमि
ट्रस्ट को दे दी जाती है लेकिन इसका
मालिकाना हक केंद्र सरकार के पास ही रहेगा
और उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया जाता
है कि मुस्लिम पक्ष को इस जमीन से दूर

किसी और जगह पाच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ
बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए दी जाए इस
तरह सबसे लंबे चलने वाले इस मामले का
फैसला किया जाता है तो यह हमारे संविधान
की खूबसूरती है भैया कि जब इस मामले का

फैसला आया तो किसी भी पक्ष द्वारा ना तो
कोई हिंसा की गई और ना ही किसी पक्ष ने इस
फैसले का विरोध किया और फिर 5 अगस्त 2020
को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या
पहुंचकर मंदिर का शिलान्यास करते हैं

जिसके बाद मंदिर बनना शुरू हो जाता है खैर
अब वह समय आ गया है कि जब अयोध्या में
रामलला विराजमान होंगे और इसके लिए 22
जनवरी 2024 का समय निर्धारित किया गया है

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने
के लिए प्रधानमंत्री मोदी सहित अरुण गोविल
अमिताभ बच्चन अक्षय कुमार अनुपम खेर
माधुरी दीक्षित रजनी का जैसे कई कलाकारों को इन्विटेशन भेजा गया है

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