क्यों ख़ास है अबू धाबी में बनाकर तैयार हुआ ये हिंदू मंदिर ? | BAPS Hindu Mandir | Abu Dhabi - instathreads

क्यों ख़ास है अबू धाबी में बनाकर तैयार हुआ ये हिंदू मंदिर ? | BAPS Hindu Mandir | Abu Dhabi

देखिए शायद ही किसी ने कभी यह इमेजिन किया
होगा कि किसी मुस्लिम कंट्री में टेंपल
बनेगा दरअसल दुनिया में 57 मुस्लिम
कंट्रीज हैं जिनमें से कुछ में ही मंदिर
हैं वह भी हजारों सालों पुराने अब हमारे

दो मुस्लिम पड़ोसी देशों का ही एग्जांपल
ले लीजिए पाकिस्तान और बांग्लादेश जिनमें
कई मंदिर को तो डिमोलिश किया जा चुका है
जी हां जबकि कई जरजर कंडीशंस में है लेकिन
एशिया के मुस्लिम मेजॉरिटी रीजन मिडिल
ईस्ट में एक ऐसी कंट्री भी है जो इनकी

बातों को दरकिनार करते हुए अपने यहां पर
एक टेंपल बना र है जिसे यहां की गवर्नमेंट
और बीएपीएस नाम की संस्था मिलकर बना रही
है लगभग 5 साल बाद यह मंदिर अब बनकर पूरा
हो चुका है जिसका इनॉगरेशन भारत के प्राइम
मिनिस्टर नरेंद्र मोदी 14 फरवरी 2024 को

है कि भाई बीएपीएस है क्या यह मंदर किस
मुस्लिम देश में बन रहा है इससे भारत और
इस देश के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा
इसके अलावा दुनिया के दूसरे देशों पर इसका
क्या असर होगा और यह मंदिर कितना भव्य है

यह सारी बातें आप आज की इस वीडियो में
जानेंगे साल 1997 में पहली बार बीएपीएस
याने के बोचा सवासी अक्षर पुरुषोत्तम
स्वामी नारायण संस्था इसके प्रमुख स्वामी
महाराज एशिया के मुस्लिम मेजॉरिटी रीजन
मिडिल ईस्ट में स्थित कंट्री यूनाइटेड अरब
एमिरेट्स की यात्रा पर गए इन्हें यहां

रहने वाले हिंदुओं ने बुलाया था यहां बड़ी
संख्या में हिंदुओं की आबादी रहती थी जो
आज भी है लेकिन यहां कोई भी हिंदू मंदिर
नहीं था यह इस कंट्री के शहर शाहजहां के
रेगिस्तान के बीच में रहते हुए अबू दबी

में एक मंदिर बनाने की एक्सपेक्टेशन करते
हैं उन्होंने लोगों से प्रेयर करने को कहा
कि आप लोग प्रेयर करिए कि एक दिन यहां
भगवान का मंदिर जरूर बने इसके बाद स्वामी
जी यहां से भारत वापस चले आते हैं फिर साल

2014 में भारत के पीएम बनते हैं नरेंद्र
मोदी पीएम मोदी वेलफेयर सोसाइटी के साथ
फॉरेन कंट्रीज में भारत को एक नई पहचान
दिलाने का डिटरमिनेशन लेते हैं खास करके

भारतीय कल्चर और मंदिरों को इसी के साथ वो
देश की कई जगहों में स्थित मंदिरों में
दर्शन करने भी जाते हैं इससे मंदिरों को
अब एक नई पहचान मिलनी शुरू हो जाती है
भारत के साथ-साथ फॉरेन कंट्रीज में भी अब

इसके अगले साल अगस्त 2015 में पीएम मोदी
यूएई की यात्रा पर जाते हैं यहां अबू दबी
के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल
नयन से मुलाकात करते हैं मुलाकात के बाद
क्राउन प्रिंस ने अबू दबी में एक हिंदू

मंदिर के निर्माण के लिए 27 एकड़ लैंड
डोनेट करने की अनाउंसमेंट कर दी इस लैंड
के बारे में एक विशेष बात यह है कि यह
लैंड डोनेट करते समय उन्होंने लिखा है कि
जब तक इस ब्रह्मांड में सूरज रहेगा तब तक

यह धरती इस हिंदू मंदिर के नाम पर ही
रहेगी चाहे यहां किसी की भी हुकूमत रहे
हालांकि जब इस बात की अनाउंसमेंट की गई तो
कई फंडामेंटलिस्ट ऑर्गेनाइजेशंस ने इसका
काफी विरोध भी किया इन सभी का कहना था कि

भाई एक मुस्लिम देश में मंदिर बनाना गलत
है फिर इसके 3 साल बाद यानी 10 फरवरी 2018
को अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद
बिन जयद अल नयन भारत आते हैं और बीएपीएस
के प्रतिनिधियों के साथ प्रेसिडेंट हाउस

में शेख मोहम्मद और भारतीय प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते हैं यहां
सभी की मौजूदगी में यूएई में ट्रेडिशनल
हिंदू मंदिर के लिए एक एमओयू पर सिग्नेचर

किए जाते हैं सिग्नेचर के बाद प्राइम
मिनिस्टर ने कहा कि यह मंदिर एक पवित्र
स्थान होगा जहां ह्यूमैनिटी और हार्मनी
यूनाइटेड होंगे यह मंदिर प्रतीक होगा कि

हिंदू धर्म के फेथ का कल्चर का गुडविल का
और इंडियन सिविलाइजेशन का आगे उन्होंने यह
भी कहा कि यह मंदिर महात्मा गांधी और शेख
जायद से इंस्पायर्ड कामने और टॉलरेंस का
सिंबल होगा इसके अगले दिन यानी 11 फरवरी

2018 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उस
लैंड पर पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर की
नीव रखी और इस मंदिर को बनाने देने के लिए
125 करोड़ भारतीयों की ओर से क्राउन

प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नायन को
थैंक्स भी दिया जब इस मंदिर की नीव रखी गई
तो भाई 50000 से अधिक लोगों ने मंदिर के
निर्माण में ईंट रखी जिनमें भारत के फॉरेन
मिनिस्टर एस जयशंकर एक्टर संजय दत्त और

अक्षय कुमार भी शामिल थे इसका निर्माण
कार्य अगले ही साल दिसंबर 2019 19 में
शुरू हो गया अबू धाबी में अब करीब 5 साल
बाद 2024 में यह मंदिर लगभग बनकर तैयार हो

गया है इसे बनाने वाली संस्था बीएपीएस की
ओर से 14 फरवरी 2024 को मंदिर के प्राण
प्रतिष्ठा महोत्सव और इनॉगरेशन भी किया जा
रहा है इसका इनॉगरेशन करने के लिए संस्था
की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को

निमंत्रण देने एक प्रतिनिधि मंडल आया था
इन्विटेशन दिए जाने के पिक्चर सोशल मीडिया
पर वायरल हुई थी इनॉगरेशन के बाद 18 फरवरी
से यह मंदिर आम लोगों के लिए खोल दिया
जाएगा अब यह भी एक सहयोगी है दोस्तों कि

एक तरफ लंबे इंतजार के बाद भारत में राम
मंदिर आम जनता के लिए खुलेगा दूसरी ओर एक
मुस्लिम देश में जहां लाखों की संख्या में
हिंदू रहते हैं वहां आस्था के सबसे बड़े
मंदिर के दरवाजे भारतीयों के लिए खोलेंगे

यह भारतीयों के लिए दोहरी खुशी है खैर आगे
की कहानी पर आने से पहले आपको बता दें कि
रामलला अपने घर पधार चुके हैं तो इसे खुशी
में चार चांद लगाने के लिए आर्टेरिया लाया
है अयोध्या मंदिर का ही हूबहू नक्काशी
वाला प्रतिरूप अगर अभी तक अयोध्या आप नहीं
जा सके हैं तो आप इसे अपने घर जरूर ला

सकते हैं इस हाई क्वालिटी मंदिर को बहुत
ही बारीकी से तराशा गया है यह दो साइज में
है इसे द रिम कॉ पर जाकर आप ले सकते हैं
और मिस्का 10 कोड का यूज करेंगे तो आपको

10 पर का डिस्काउंट भी मिलेगा चलिए स्टोरी
पर वापस आते हैं देखिए हाल ही में इस
मंदिर की पिक्चर सामने भी आई है जो काफी
ब्यूटीफुल है मंदिर के फ्रंट में बलुआ

पत्थर और संगे मरमर की अमेजिंग कार्विंग
है अबू धाबी में बन रहे इस मंदिर का
स्ट्रक्चर और डिजाइन लगभग दिल्ली और
दुनिया के अन्य देशों में बने अक्षरधाम

इस मंदिर को बाकी अक्षरधाम मंदिरों से अलग
बनाती है वह यह है कि यह अबू दबी का पहला
हिंदू मंदिर है जी हां इसका निर्माण 27
एकड़ क्षेत्र में किया जा रहा है जिसमें
से 13 एकड़ क्षेत्र में केवल मंदर ही हैं
भारत से करीब 2000 किमी दूर अबू धाबी में

बन रहा यह मंदिर अब अपने अंतिम चरण पर है
फिलहाल जिसे अल वाकफ साइट पर बनाया गया है
इस मंदिर का निर्माण 00 करोड़ की कॉस्ट से
किया जा रहा है एक अनुमान के मुताबिक इस
मंदिर के निर्माण में करीब 18 लाख ईटों का
इस्तेमाल किया गया है यह मंदिर ना केवल

भारत की स्पिरिचुअल और इटरनल ट्रेडीशन का
एक मेजर सेंटर होगा बल्कि इस मंदिर के
निर्माण से दोनों देशों के बीच कल्चरल
एक्सचेंज के साथ-साथ इनके रिश्ते और भी
स्ट्रांग हो जाएंगे यह एक ऐसा सेंटर जो

भारत के वसुदेव कुटुंबकम और वर्ल्ड में
ह्यूमैनिटी के आइडिया को स्ट्रांग करेगा
देखिए मंदर में लगाई जा रही पत्थर पर जो
नक्काशी की गई है वह अपने आप में बहुत
खूबसूरत है अगर आप इन्हें देखोगे तो हैरान

रह जाओगे यहां जो मूर्तियां लगाई जा रही
है भैया वह भी भारत से ही बनकर आ रही हैं
अब आप ऐसा कह सकते हैं कि इस मंदिर में
लगाए जा रहे पत्थरों पर भारतीय कारीगरों
का हुनर चमक रहा है भारतीय कारीगरों ने
जिस तरह से मंदिर की दीवारों और खंभों को

अपने हाथों से उकेरा है वह देखने लायक है
यह नकाशी आपको हर अलग-अलग मुद्रा में
दिखेगी कार्विंग के रूप में ही यहां की
दीवारों पर पवित्र हिंदू स्क्रिप्चर की
स्टोरी बनाई गई है व राजस्थान और गुजरात

के आर्टिजन ने किया है मंदिर के निर्माण
में सफेद संगे मरब और गुलाबी बलुआ पत्थर
का उपयोग किया गया है जिसे राजस्थान के
मकराना से अबू धाबी भेजा गया था यह हमारे
देश के कल्चर हमारे हिस्ट्री और हमारे लिए

एक गर्व की बात है वैसे आपको बता दें कि
इस मंदिर की लंबाई 262 फीट विड्थ 180 फीट
और हाइट 108 फीट है मंदिर में 410 स्तंभ
हैं और 12 पैरामेडिकल शिखर हैं इस पर सात
तीव्रता तक के अर्थक्वेक का कोई भी असर

नहीं होगा साथ ही संयुक्त अरब अमीरात के
सात अमीरा तों का रिप्रेजेंटेशन करने वाले
सात पिनेकल भी हैं मंदिर के इंटीरियर
पार्ट के निर्माण में 40000 क्यूबिक फीट
मार्बल और 180000 क्यूबिक फीट सैंड स्टोन
का यूज किया गया है मंदिर में दो ग्रैंड

डोम भी बनाए गए हैं जिन्हें डोम ऑफ
हार्मनी और डोम ऑफ पीस कहा गया है इस
मंदिर के निर्माण में किसी भी स्टील या
कंक्रीट का यूज नहीं किया गया है इस कारण
इस मंदिर की एज लगभग 1000 वर्ष बताई जा

रही है इसे बहुत ही मॉडर्न स्टाइल में
डिजाइन किया गया है लेकिन इसका निर्माण
एंसेट हिंदू आर्ट और वेदिक आर्किटेक्चर के
अनुसार ही किया गया है एंसटिटाइट
में 96 घंटियां लगाई गई हैं मंदिर के

साथ-साथ एक ब्यूटीफुल गार्डन और पॉन्ड का
भी निर्माण किया जा रहा है टेंपल
कॉम्प्लेक्शन सेंटर लाइब्रेरी प्रेयर रूम
कम्युनिटी सेंटर बच्चों के लिए
प्लेग्राउंड गिफ्ट शॉप्स और साथ ही एक फूड

कोर्ट भी है यहां 5000 लोगों की क्षमता
वाले दो कम्युनिटी हॉल्स भी हैं कहा यह जा
रहा है दोस्तों कि यहां जो तालाब बनाया
गया है उसकी सीढ़ियां इस तरह से बनाई गई
हैं कि जैसे काशी की हैं मंदिर के साथ-साथ

एक बहुत ही आकर्षक नहर भी बनाई गई है जो
पवित्र भारतीय नदियों गंगा यमुना और
सरस्वती की तरह ही है इसमें इन्हीं तीन
नदियों का जल डाला भी गया है अब देखिए इस
देश में पूरे साल गर्मी रहती है इसलिए इस
मंदिर के फर्श का कंस्ट्रक्शन मॉडर्न

टेक्नोलॉजी से किया गया है ताकि लोगों को
फ्लोर पर नंगे पैर चलने में कोई प्रॉब्लम
ना हो इस मंदिर में स्वामी नारायण राम
सीता कृष्ण के अलावा लगभग सभी हिंदू देवी
देवताओं की मूर्तियों को लगाया जाएगा

इसमें जो सात शिखर बनाए गए हैं उसी के
नीचे देवताओं को रखा जाएगा इस मंदिर का
निर्माण बोचासन निवासी श्री अक्षर
पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संस्था ने
करवाया है मंदिर निर्माण के लिए 2000 से

अधिक कारगर दिन रात काम में लगे हुए हैं
ताकि मंदिर को अंतिम स्वरूप दिया जा सके
इसके बाद हर किसी को इंतजार है 14 फरवरी
2024 का जब प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी
के द्वारा इस गॉर्जियस और डिवाइन मंदिर का
इनॉगरेशन किया जाएगा भारतीय दूतावास के

स्टेटिस्टिक्स के मुताबिक यूएई में करीब
26 लाख भारतीय रहते हैं जो यहां की आबादी
का करीब 30 पर है यहां रहे रहने वाले
ज्यादातर भारतीय लंबे समय से हिंदू मंदिर
की मांग कर रहे थे इस हिंदू मंदिर के

खुलने के बाद यहां रहने वाले भारतीयों को
अपनी जड़ों से जुड़े रहने का मौका भी
मिलेगा बोचा सवासी अक्षर पुरुषोत्तम
स्वामीनारायण संस्था स्वामीनारायण
संप्रदाय के अंतर्गत एक हिंदू संप्रदाय है

जिनके अनुयाई भगवान स्वामीनारायण को
परब्रह्म मानकर उनकी पूजा करते हैं इसकी
स्थापना 1905 में यज्ञ पुरुष दास ने की थी
इस विश्वास के बाद के भगवान स्वामीनारायण
गुरुओं की एक वंशावली के माध्यम से पृथ्वी

पर मौजूद रहे जिसकी शुरुआत गुणात आनंद
स्वामी से हुई थी फिलहाल आज का यह वीडियो
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