क्यों तोड़ी मस्जिद-मदरसा ? धामी सरकार को नोटिस जारी, हाईकोर्ट में सलमान ख़ुर्शीद ने सँभाला मोर्चा - instathreads

क्यों तोड़ी मस्जिद-मदरसा ? धामी सरकार को नोटिस जारी, हाईकोर्ट में सलमान ख़ुर्शीद ने सँभाला मोर्चा

दोस्तों हलद्वानी मामले पर बड़ी अपडेट जो
है वह सामने आ रही है और उस फैक्ट को मैं
चैनल के माध्यम से आप लोगों के सामने रख
रहा हूं जिस फैक्ट पर कोई बात करने को
तैयार नहीं है एक तरफ है गोदी मीडिया

जिसने मुसलमानों को पूरी तरीके से
हल्द्वानी मामले में विलन बना कर के पेश
कर दिया है तो वही हमारे जो मुस्लिम यूटर
पत्रकार हैं वो भी इस फैक्ट पर बात करने
को तैयार नहीं है और ना ही
वो सत्ता में बैठी हुकूमत से सवाल पूछने

को तैयार हैं और ना ही वह विपक्षी
पार्टियों से पूछने को तैयार हैं कि
आखिरकार आप न्याय यात्रा तो निकाल रहे हैं
पर देश में मुसलमानों के साथ हल्द्वानी
में जो अन्याय हुआ है उसके ऊपर कब बोलेंगे

और इसी को लेकर के हाई कोर्ट में बड़ा
झटका उत्तराखंड सरकार को लगा है जहां खास
तौर पर सलमान खुर्शीद ने हाई कोर्ट में
अपनी दलीलों को रखा जहां साफ तौर पर हाई
कोर्ट में कहा गया कि यह सीधे-सीधे कोर्ट

का अपमान किया गया संविधान का अपमान किया
गया जहां समय दिया गया था उस समय से पहले
ही मस्जिद और मदरसे को जमींदोज करने का
काम किया गया है जहां एक बड़ी बहस जो है
वह खासतौर पर हाई कोर्ट के अंदर देखने को

मिली और हल्द वानी के पूरे मामले पर सॉलिड
तरीके से सलमान खुर्शीद ने अपनी दलीलों को
रखा और कहा कि अगर मस्जिद मदरसे को जमीन
दोस्त करने के लिए आपने नोटिस जारी कर
दिया था तो नोटिस के भी नियम है कि नोटिस

जब आपको दिया गया तो 15 दिन के अंदर जो है
आपको मोहलत दी जाती है आगे बढ़ने की पर
आपने नोटिस के अगले दिन ही इस काम को
अंजाम दे दिया और वह भी ऐसे समय पर जब 14
तारीख को इसकी सुनवाई हाई कोर्ट में होनी

थी जिसके बाद एक बड़ा झटका लगा जो दलीलें
सरकार की तरफ से रखी गई उन दलीलों पर
कोर्ट ने तवज्जो ना देते हुए सलमान
खुर्शीद ने जो दलीलें रखी उसके ऊपर ध्यान
देने की जरूरत है जहां कई बड़ी बातें जो
हैं वह सलमान खुर्शीद की तरफ से रखी गई
जहां हाई कोर्ट में पेश हुए सलमान खुर्शीद

ने दलील दी और ध्वस्त करण की कारवाई की जा
चुकी है और ऐसे में याचिकाकर्ता को कोई
राहत नहीं दी गई ऐसा क्यों किया गया जो कि
कोर्ट का और संविधान का मजाक बनाया गया
उत्तराखंड में और यह बताया कि उचित कानूनी
प्रक्रिया का पालन करते हुए ऐसा नहीं किया

गया उन्होंने दावा किया कि याचिकाकर्ता को
नोटिस दिए जाने के 4 दिन बाद उसे जमींदोज
कर दिया गया जबकि कानूनी प्रक्रिया यह
कहती है कि अगर किसी को नोटिस दिया गया है

तो आपको जवाब 15 दिन के अंदर देना होता है
वह हाई कोर्ट का रुख कर सकता है पर आपने
इतनी भी मोहलत जो है वह नहीं दी और

आखिरकार प्रशासन को इतनी जल्दी बाजी क्यों
थी मस्जिद और मदरसे को जमीन दोष करने की
जहां इसके बाद सलमान खुर्शीद ने याचिका
करता साफिया मलिक की ओर से अदा में वीडियो

कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बहस की और पुलिस के
मुताबिक साफिया मलिक के पति अब्दुल मलिक
हलद्वानी हिंसा के मुख्य आरोपी बता दिए गए
पर उन पुलिस प्रशासन के ऊपर क्यों कारवाई
नहीं की गई जिन्होंने माहौल बिगाड़ने की

कोशिश की और यह भी बताया कि निर्माण कैसे
किया जा सकता है जब विवादित संपत्ति सरकार
ने कृषि भूमि के रूप में पट्टे पर दे दी
थी यह कहा गया कि जब पट्टे पर जमीन दे दी
गई थी तो सरकार की उसमें महत्वता नहीं रह

जाती आप वसूली कर सकते थे उस जमीन की
क्योंकि आप पूरे हल्द्वानी में वसूली कर
रहे हैं पर मस्जिद मदरसे की जमीन को ही
क्यों टारगेट किया गया यह सबसे अहम सवाल
पूछा गया है सलमान खुर्शीद के जरिए और

अदालत ने यह भी कहा कि कृषि भूमि पर फ्री
होल्ड की प्रक्रिया अलग है और यदि ऐसी
भूमि पर निर्माण किया जाता है तो पट्टा ही
निलंबित हो जाता है इस सवाल पर गौर किए

बिना कि पट्टा वैद था या नहीं यह फैसला
सरकार नहीं बल्कि अदालत करती सारे सबूत
पेश करने पड़ते और जब वह सबूत सामने पेश
करने पड़ते तो उसका हलफनामा दाखिल करना
पड़ता अब हलफनामा दाखिल करने के लिए चार

सप्ताह का समय जो है वह दिया गया है
उत्तराखंड प्रशासन को जहां यह सवाल पूछा
गया कि आखिरकार इतनी जल्दी बाजी मस्जिद
मदरसे को जमीन दोष करने में आपने क्यों
दिखाई मामला कोर्ट में चल रहा था और कोर्ट

में जब मामला चल रहा था तो आपने अपनी सनक
को क्यों
दिखाया और इसी के तुरंत बाद 8 तारीख को ही
सुनवाई हुई दो तारीख को आपने कहा कि जवाब
तलब करेंगे एक हफ्ते का समय मांगा था और
उसके बाद जमीन दोष जाकर के 4 बजे का कर

दिया गया यह तमाम पॉइंट्स को हाई कोर्ट
में रखा गया
है जिस पर यह तस्वीर क्लियर है कि अदालत
में कानूनी तरीके से लड़ाई लड़ी जा रही है
कानून पर जिस तरीके से तमाम दलीलें आ रही

हैं लोगों का विश्वास मत जो है वह कम हो
रहा है पर ऐसा भी नहीं है कि बिल्कुल ही
आंख बंद कर ली जाएगी अब खबर है तो उसे
आपके सामने रखना पड़ेगा जो सॉलिड तरीके से
तमाम चीजों को रखा गया है सलमान खुर्शीद

के जरिए उन चीजों को भी देखना समझना जरूरी
है और यह भी सबूत जो है सलमान खुर्शीद के
जरिए रखे गए जो मैंने कल आप लोगों के
सामने बताया कि पहले ही इंटेलिजेंस विभाग
ने एक बार नहीं बल्कि आठ बार यह कहा कि उस

जगह पर हिंसा भड़क सकती है आपको कोई भी
जमीन दोज नहीं करना है पहले 31 तारीख को
कहा गया कि आप संवेदनशील जगह पर ज्यादा
उत्सुकता ना दिखाएं फिर 31 तारीख को

दोबारा कहा गया कि आप संभावना है विरोध की
संभावना है आप नहीं जा सकते यह नहीं कर
सकते फिर 2 तारीख को यह कहा गया कि वीडियो
कॉन्फ्रेंसिंग की जानी चाहिए और उसके बाद

कोई कार्य करें फिर 2 तारीख को दोबारा कहा
गया 3 तारीख को यह नोटिस जारी किया गया कि
आप ऐसा कोई हथकंडा ना अपनाए जिसकी वजह से
से बवाल मचे और इंटेलिजेंस विभाग की तमाम
दलीलों को नजरअंदाज किया

गया यानी कि यह साफ है कि जानबूझ कर के
पुलिस प्रशासन द्वारा इस प्रक्रिया को
अंजाम दिया गया माहौल बिगाड़ने के लिए जो
कि दलीलें सामने रखी गई और कोर्ट में यह
भी कहा गया कि 8 तारीख को सुनवाई हुई थी

जो कि सामने है 14 तारीख को यानी कि 6 दिन
बाद एक हफ्ते का समय मांगा था कल दलील
रखनी थी कल अगर कोर्ट जो फैसला लेता उसके
बाद क्या यह हिंसा होती अगर कोर्ट मस्जिद
मदरसे के खिलाफ फैसला भी दे

देता पर प्रशासन को अपनी सनक दिखानी थी जो
लेटर भी यहां जारी किया गया और आपने साफ
तौर पर कहा है कि स्टे ऑर्डर है कोई
कारवाई नहीं की जानी चाहिए स्टे लगा रखा

था उसके बावजूद संविधान की अदालत की
धज्जियां जो है उत्तराखंड प्रशासन द्वारा
अब उतारी गई और फिर इस इसके साथ-साथ अहम
जानकारी यह भी कि बीते सात दिन से कर्फ्यू
लगा हुआ है बनभूलपुरा में और बनभूलपुरा

में आज जो है कर्फ्यू में छूट दी गई है
जहां रोजमर्रा की जिंदगी जीने के लिए जो
जो सामानों की जरूरत पड़ती है दुकानें
खुलेगी जैसे दूध भूध की समस्या बच्चों को

लेकर के आ रही है उन गाड़ियों को आने जाने
की इजाजत दी जाएगी तमाम चेकिंग के बाद ही
उन्हें अंदर बनभूलपुरा में एंटर कर ने
दिया जाएगा खाने पीने के सामान फल फ्रूट
सब्जी वगैरह की तमाम चीजों की राहत जो है

व आज से दी जा रही है जिसकी जानकारी सामने
आई है और कल इसकी जानकारी दी गई तो वही एक
हेल्पलाइन नंबर भी कमिश्नर द्वारा दीपक
रावत द्वारा यह जारी किया गया है जहां

कमिश्नर दीपक रावत ने यह कहा है कि 8
तारीख को जो हिंसा हुई है क्योंकि लोग यह
हो सकता है कि उस जगह पर ना बोले एक जगह
पर आकर के जो कि बताया गया कि नैनीताल
हलवानी शहर बनभूलपुरा में
मजिस्ट्रेट दीपक रावत को दी गई है और
आयुक्त दीपक रावत ने लोगों से अपील की है

कि किसी भी घटना से संबंधित कुछ साक्षी
बयान दर्ज कराने हैं तो व्यक्ति एक सप्ताह
के अंतर्गत कुमाऊ मंडल नैनीताल के कैंप
में जाकर के उस जानकारी दे कि क्या अहम

सबूत जुटाए जा सकते हैं जहां एक हेल्पलाइन
नंबर जारी किया गया और बताया गया कि यह
हेल्पलाइन नंबर है
059 46

22558 इस पर आप उस हिंसा की जानकारी दे
सकते हैं और ईमेल भी जारी किया गया है
id.com
जो कि आप स्क्रीन पर इस वक्त साफ तौर पर
देख सकते हैं कि आप ईमेल के जरिए भी यह

तमाम जानकारी दे सकते हैं कि क्या उस दिन
आपने देखा क्या हुआ जिससे अहम सबूत और
जुटाए जा सके पर जिस तरीके से प्रशासन की
यह कारवाई हुई है हाई कोर्ट में कहीं ना
कहीं उन सबूतों को देखा और समझा जरूर

जाएगा और सवाल यही खड़ा हो जाता है क्या
अदालतों के जरिए जो पुलिस प्रशासन की
गोलीबारी में सात लोग शहीद हुए हैं उन्हें
इंसाफ मिल पाएगा हर एक खबर को आपके साथ
साझा करता रहूंगा दीजिए that’s

Leave a Comment