क्यों राम मंदिर के लिए फैलाया जा रहा है ये झूठ ? | Fact Check Viral Ram Mandir Maps Images - instathreads

क्यों राम मंदिर के लिए फैलाया जा रहा है ये झूठ ? | Fact Check Viral Ram Mandir Maps Images

दोस्तों यह है अयोध्या नगरी जिसे श्रीराम
के आने की खुशी में दुल्हन की तरह सजाया
गया है जो 500 सालों बाद वापस घर लौटे हैं
सीधे-सीधे कहें तो आज राम मंदिर की प्राण
प्रतिष्ठा की गई है रामलला आज गर्भ ग्रह

में विराजमान हो गए हैं 26 जनवरी से
श्रद्धालु मंदिर के गर्भ ग्रह में अपने
भगवान के दर्शन कर सकेंगे इसी वजह से आज
राम भक्तों में अलग ही जोश है पूरे देश
में 74 दिन बाद फिर से दिवाली के जैसा
माहौल है लेकिन इसी जश्न के बीच
googleapis.com इस वीडियो में हम सच की
पड़ताल करेंगे देखिए अयोध्या में लगभग
5000 मंदिर हैं इसमें 95 फीसद मंदिर
सीताराम के ही हैं फिर भी अयोध्या में

2.77 एकड़ जमीन के लिए सैकड़ों सालों तक
संघर्ष और लंबी कानूनी लड़ाई चलती रही जब
इस तरह के सवाल उठे तो श्रीराम जन्मभूमि
ट्रस्ट ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा
था कि यह लड़ाई श्री राम मंदिर को लेकर

नहीं बल्कि श्री राम की जन्मभूमि को लेकर
थी और जन्म स्थान की अदला बदली नहीं होती
यह मंदिर जन्म स्थान का मंदिर है अन्यथा
मंदिर तो बहुत हैं सारे देश में लाखों
मंदिर होंगे यह झगड़ा जन्मस्थली को लेकर
था असल हिंदू पक्ष इस लड़ाई को अपने

सम्मान की लड़ाई मानकर लड़ता रहा 500 साल
पहले यहां की जनता ने लड़ाई लड़ी जय
राजकुमारी ने इसे लेकर तलवार उठाई
उन्होंने कहा कि रानी तो कई मंदिर बनवा
सकती थी तो लड़ाई की क्या जरूरत थी लेकिन

सवाल यह था कि यह स्थान हमारा है हमारे घर
में कोई कैसे घुस गया यह इज्जत और
स्वाभिमान की लड़ाई थी अब इसी स्वाभिमान
की लड़ाई पर सवाल खड़े हो गए कि राम मंदिर
को बाबरी मस्जिद वाली जगह पर नहीं बनाया
गया है दरअसल सोशल मीडिया पर

 

googleapis.com बाबर मस्जिद परमानेंटली
क्लोज्ड इसे शेयर करते हुए दावा किया गया
है कि जिस जगह पर बाबरी मस्जिद को ध्वस्त
किया गया था और उसी जमीन को लेकर इतने
विवाद हुए असल में मंदिर उस जगह पर नहीं

बल्कि उससे 3 किमी दूर बन रहा है देखते ही
देखते कई नेताओं ने भी इस दावे को रिएक्शन
देना शुरू कर दिया अब इस दावे में कितनी
सच्चाई है यह हम आपको बताएं उससे पहले राम
के ऐसे ही दीवानों के लिए आर्टेरिया लेकर
आया है अयोध्या के राम मंदिर का 3d मॉडल
इसमें आपको कुल उतने ही पिलर और गुंबद

देखने को मिलेंगे जितने अयोध्या के राम
मंदिर में है तो बिना देर किए हमारी
वेबसाइट
www.dumka.nic.in सेक्रेटरी विकास बंसल का
एक बयान सामने आया है उन्होंने ट्वीट करते
हुए लिखा कि भगवान राम का जन्म उस जगह पर
हुआ था जहां बाबरी मस्जिद थी और इसी वजह

से उसे गिराया गया था लेकिन मंदिर वहां से
दरअसल 3 किमी दूर बनाया जा रहा है इसके
साथ ही इस बयान में संजय राउत ने सवाल
उठाया कि अगर मंदिर 3 किमी दूर बनानी थी
तो क्या मंदिर वहीं बनाएंगे बोल-बोल कर

बाबरी मस्जिद गिराई गई मस्जिद गिराकर
हिंदू मुस्लिम में इतनी नफरत क्यों क्यों
फैलाई अब यह साफ हो गया है कि इसके पीछे
सिर्फ और सिर्फ राजनीति है यही वजह है कि
इस बात को कोई न्यूज़ चैनल नहीं बता रहा
हम हिंदुओं को देश हित में धर्म के नाम पर

की जा रही इस राजनीति का विरोध करना ही
चाहिए वहीं इस पर संजय रावत का भी कुछ ऐसा
ही बयान आया है कि अगर 3 किलोमीटर ही
मंदिर बनना था तो मस्जिद किराई क्यों इसके
अलावा कथित मुस्लिम स्कॉलर फजील अहमद ने
भी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में यह कहा

कि अयोध्या में बन रहा राम मंदिर उस जगह
से दूर बन रहा है जहां बाबरी मस्जिद को
ध्वस्त किया गया था लेकिन क्या सच में ऐसा
है देखिए जब इस फैक्ट को चेक करने के लिए
हमने उसी वायरल स्क्रीनशॉट को उठाया
जिसमें एक जगह अयोध्या में बन रहा श्रीराम

जन्मभूमि मंदिर है जो साफ तौर पर दिखाई दे
रहा है लेकिन जब हमने दूसरी जगह के बारे
में जानने के लिए उसे
googleapis.com वायरल स्क्रीनशॉट को

कंपेयर किया अब गौर करने वाली बात यह है
कि
googleapis.com चलता है कि यह गलत
मार्किंग थी जो सीताराम बिरला मंदिर पर ही
की गई थी मस्जिद के रिव्यू दिखाने के लिए

बापी मस्जिद की तस्वीर अपलोड की गई थी
इसके बाद हमने
google3 में ली गई लेटेस्ट सैटेलाइट इमेज
में इस जगह पर मंदिर जैसा एक स्ट्रक्चर
बना है इसके बाद हमने google2 एप्लीकेशन

की मदद से इसी जगह पर पुराना सैटेलाइट
इमेज देखा तो हमें पुरानी तस्वीरों में
सबसे साफ तस्वीर 2011 की मिली जिसमें देखा
जा सकता है कि उस वक्त राम मंदिर का
निर्माण शुरू नहीं हुआ था इस लोकेशन के

कोऑर्डिनेट्स ये हैं देखिए इंटरनेट पर
सर्च करने पर हमें बाबरी मस्जिद की कई
तस्वीरें मिली हालांकि उन तस्वीरों में से
किसी भी स्ट्रक्चर का मिलान करना मुश्किल
है इसी क्रम में हमें दो ऐसी तस्वीर मिली

जो मस्जिद के दो अपोजिट डायरेक्शन से ली
गई थी इन फोटोस में आप दोनों का कंपैरिजन
कर सकते हैं इन दोनों तस्वीरों में बाबरी
मस्जिद दिखाई दे रही है इसके साथ ही एक
तस्वीर में पास की बिल्डिंग और दोनों

तस्वीरों में मस्जिद के पास कुछ
स्ट्रक्चर्स दिखाई दे रहे हैं क्योंकि
2011 में राम मंदिर का निर्माण नहीं हुआ
था और कोई भी बड़ा कंस्ट्रक्शन जैसा बदलाव
नहीं हुआ था इसलिए उस लोकेशन की पुरानी

बिल्डिंग्स और स्ट्रक्चर पहले की तरह ही
है जिससे इसे 2011 में ली गई सैटेलाइट
इमेज से मिलान करना आसान है जिस हिस्से को
एक के रूप में मार्क किया गया है वो बाबरी
मस्जिद है जिसकी तस्वीर दो तरफ से इमेज वन
और इमेज टू में दिखाई दे रही है और 2023

की सैटेलाइट इमेज में उसी जगह पर राम
मंदिर बन रहा है वहीं जिस स्ट्रक्चर को दो
के रूप में मार्क किया गया है वह बाबरी
मस्जिद के बगल की एक बिल्डिंग से सटे
कंक्रीट प्लेन बीम जैसा एक स्ट्रक्चर है

जो तीनों तस्वीरों में दिखाई दे रहा है
जिस बिल्डिंग को तीन मार्क किया गया है वह
इमेज टू और 2011 के सैटेलाइट इमेज में भी
देखा जा रहा है इस तरह हमने 2011 के सेटे
लाइट इमेज से इन तस्वीरों में मौजूद
स्ट्रक्चर्स का मिलान किया तो पता चला कि

यह उस जगह की तस्वीर है जहां हाल ही में
राम मंदिर बन रहा है यानी जिस जगह पर
बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ उसी जगह पर
राम मंदिर बन रहा है कुल मिलाकर शिवसेना
नेता संजय राउत समेत कई सोशल मीडिया
यूजर्स ने सीताराम बिरला मंदिर के बारे
में झूठा दावा किया कि वह बाबरी मस्जिद है

और राम मंदिर उससे 3 किमी की दूरी पर बन
रहा है जबकि असल में तो राम मंदिर उसी जगह
पर बन रहा है जहां बाबरी मस्जिद को ध्वस्त
किया गया था दरअसल अयोध्या में श्रीराम के
जिस जन्मस्थली की बात हो रही है दोस्तों

वहां पहले तीन गुंबद की ऐसी इमारत थी जो
देखने में किसी तरह मस्जिद लगती थी इसी
इमारत को हिंदू समाज श्रीराम का जन्म स्थल
बताता है जबकि मुस्लिम समाज उसे मस्जिद
कहता था हिंदू समाज का दावा है कि यहां
पहले राम मंदिर था जिसे तोड़कर विवादित

ढांचा बनाया गया जबकि मुस्लिम समाज का
दावा था कि यहां कुछ नहीं था और ना कुछ
तोड़ा गया इस विवाद के चलते 1992 में
विश्व हिंदू परिषद जैसे कई दक्षिण पंथी
संगठनों से जुड़े हिंदू कार्यकर्ताओं ने
बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया जिससे

पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए
विवादित ढांचा गिरने और लंबे संघर्षों के
बाद कानूनी जंग छिड़ गई दोनों पक्षों में
समझौता वार्ता कराई गई यह समझौता वार्ता

विश्वविद्यालय मीटिंग हॉल और लखनऊ से लेकर
हनुमानगढ़ी समेत कई मंदिर मंदिरों में हुई
साढ़े महीने तक चली समझौता वार्ता में जब
सहमति नहीं बन सकी तो कोर्ट ने भी यह मान
लिया कि भाई दोनों पक्षों के बीच समझौता
होना पॉसिबल नहीं है ऐसे में इस बातचीत का
कोई रिजल्ट नहीं निकल सकता समझौते के लिए

जो टीमें बनाई गई थी उसने भी मान लिया कि
कुछ नहीं हो सकता और लिख कर दिया कि
समझौता पॉसिबल नहीं है तब अदालत ने अपना
प्रोसेस शुरू किया अब 6 अगस्त 2019 को
कोर्ट में मैराथन बहस चलने के बाद कोर्ट

ने दोनों पक्षों की बहस को खत्म मान लिया
और 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों
की बेंच ने अपना आखिरी निर्णय सुनाया इस
फैसले के अनुसार तीन गुंबद वाली इमारत की

भूमि हिंदू समाज को दे दी गई और सरकार को
दो महीने के भीतर एक नया ट्रस्ट बनाने का
आदेश भी दिया इसी के बाद केंद्र सरकार ने
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का
गठन किया था इसके बाद से जोरों शोरों से
राम मंदिर का निर्माण शुरू किया गया

हालांकि अभी राम मंदिर का निर्माण पू पूरा
नहीं हो पाया है इसी अर्ध निर्मित मंदिर
में 22 जनवरी 2024 को यानी आज मंदिर के
गर्भ ग्रह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा
की गई है जिसको लेकर भी कई सवाल उठ रहे
हैं एक और जहां अर्ध निर्मित मंदिर में

प्राण प्रतिष्ठा को लेकर चार पीठों के
शंकराचार्य ने नाराजगी व्यक्त की है तो
वहीं दूसरी तरफ विपक्ष भी इस मुद्दे को
लेकर प्रधानमंत्री और बीजेपी पर निशाना

साथ रही है भगवान श्रीराम के मंदिर का
निर्माण यात्रा जितनी रोमांचक रही है
दोस्तों उतनी ही दिलचस्प घटनाएं उनके
मूर्ति निर्माण से भी जुड़ी हुई है जिसे
अरुण योगीराज ने बनाया है अरुण को रामलला
की प्रतिमा बनाने का काम मिला तो उन्होंने
बच्चों की 2000 से ज्यादा फोटो देखी

महीनों तक बच्चों को ऑब्जर्व करते रहे
स्कूल समर कैंप पार्क जाने लगे वहां कई-कई
घंटे बच्चों को खेलते हुए देखा करते थे
उनके रामलला की प्रतिमा बनाने का काम काफी
चैलेंजिंग था दरअसल उन्हें ऐसी प्रतिमा
बनानी थी जिस पर सबकी नजर थी पत्थर से

मूर्ति बनाना बहुत मुश्किल काम हो जाता है
इस काम में चूक की गुंजाइश नहीं है इसलिए
प्रतिमा बनाते वक्त करेक्ट मेजरमेंट्स और
शिल्प शास्त्र ध्यान रखना पड़ता है
प्रतिमा बनाने के लिए गहरी रिसर्च और

नॉलेज की जरूरत होती है अरुण के साथ तीन
आर्टिस्ट सिलेक्ट हुए थे लेकिन गर्भ ग्रह
में रखने के लिए उसकी प्रतिमा को सिलेक्ट
किया गया है पांच पीढ़ियों से जो नॉलेज
ट्रांसफर हुई शायद उसी की वजह से अरुण को
यह अचीवमेंट मिली है रामलला की तीन-तीन

मूर्तियां भारत के अलग-अलग हिस्सों से ही
आए पत्थरों से तैयार की गई है इनमें जहां
एक मूर्ति कर्नाटक के उडुप्पी से आए पत्थर
श्याम शिला पर बनाई गई है तो वहीं दूसरी
मूर्ति राजस्थान के मकराना संग मरमर में

तराश गई है और एक तीसरी मूर्ति भी है जिसे
कर्नाटक से ही निकले सफेद भूरे ग्रेनाइट
पत्थर पर बनाई गई है यह मूर्ति पहले नेपाल
के शालिग्राम से आए तीन पत्थरों पर उकेरी
जानी थी दरअसल पिछले साल नेपाल के काली

गंडकी तट से दो शिला को राम की मूर्ति
बनाने के लिए चुना गया था अब नेपाल से
इसलिए क्योंकि माता जानकी का मायका है और
श्रीराम जी का ससुराल काली गंडकी क्षेत्र
को ही माना जाता है इसके अलावा ऐसी भी

मान्यता है कि शालिग्राम पत्थर शांति का
प्रतीक है ऐसे में इस पत्थर से ही मूर्ति
उखर पर विचार किया गया था लेकिन नेपाल से
जो पत्थर आए उनका वजन 14 और 27 टन था और
एक्सपर्ट्स ने यह साफ कर दिया था कि इन
पत्थरों पर नकाशी करना बेहद मुश्किल है
इसलिए इन पत्थरों को राम मंदिर के परिसर
में ही रखने का फैसला किया गया इसके बदले

भारत के दूसरे क्षेत्रों से अनमोल पत्थरों
को मंगवा करर उनमें मूर्ति तराशने का काम
किया गया ट्रस्ट का फैसला था कि रामलला की
तीन मूर्तियां बनवाई जाएंगी हालांकि इन
तीनों ही मूर्तियों में राम लला बाल
स्वरूप में होंगे लेकिन उसमें से केवल एक

मूर्ति को ही प्राण प्रतिष्ठा के लिए चुना
जाएगा इसी का ध्यान रखते हुए राजस्थान के
मकराना संग मरमर को अयोध्या मंगवाया गया
और इस पत्थर पर मूर्ति उखर का काम
सत्यनारायण पांडे और उनकी टीम को सौंपा

गया अब दरअसल संगे मरमर पर नकाशी करना
आसान होता है और इस पत्थर की चमक एक लंबे
समय तक बनी रहती है इसलिए एक मूर्ति को
संगे मरमर से बनवाया गया वहीं मंदिर के
लिए बाकी दो मूर्ति बनाने के लिए दो

अलग-अलग पत्थर कर्नाटक से ही मंगवाए गए
इसमें सबसे खास पत्थर श्याम शिला है
जिसमें रामलला की दिव्य मूरत उतारने का
काम किया है अरुण योगीराज ने यह श्रीमान

दक्षिण भारत के जानेमाने मूर्तिकार हैं
इसके अलावा तीसरी मूर्ति बनाने की
जिम्मेदारी सौंपी गई थी गणेश भट को
जिन्होंने बखूबी इसे निभाते हुए रामलला की
दिव्य बालक छवि को मूर्ति के रूप में
उतारा है खैर अब योगीराज द्वारा बनाई गई

मूर्ति गर्भ ग्रह में रखी जा चुकी है वहीं

Leave a Comment