क्यों Australian Army भी डरती थी इन पक्षियों से? | How Did Australia Lose The War Against The EMU ? - instathreads

क्यों Australian Army भी डरती थी इन पक्षियों से? | How Did Australia Lose The War Against The EMU ?

साल है 1932 ऑस्ट्रेलिया का एक छोटा सा
टाउन सैकड़ों एकड़ तक फैले हुए बस खेत ही
खेत और खेतों में छुपे अजीब से दिखने वाले
पक्षी पक्षियों से ढेरों झुंड खेत में उके
हुए वीट को चुपके से खा रहे हैं तभी दूसरी

तरफ से आती है एक डरा देने वाली आवाज मशीन
गन से निकलती ढेरों गोलियों की आवाज
गोलियों की आवाज से डरते हुए तेज रफ्तार
से भागता हुआ पक्षियों का वो झुंड इतनी

तेजी से भागता है कि ट्रक से मशीन गन चलती
हुई आर्मी को पीछे छोड़कर अचानक कहीं गुम
से हो जाते हैं 50 किमी पर आर की स्पीड से
भागते हुए 5 से 6 फीट लंबे यह पक्षी कुछ

देर बाद फिर से दूर किसी खेत में जाकर उगी
हुई फसलों को खाने लगते हैं और यह सिलसिला
यूं ही चलता जाता है कुछ घंटों तक नहीं
बल्कि कुछ हफ्तों तक और यह जन्म देता है
एक हिस्टोरिकल वॉर को जी हां इंसानों और
पक्षियों के बीच होने वाले एक वॉर को

देखिए आज से 88 साल पहले यानी कि 1932 में
फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बाद ऑस्ट्रेलिया के
मिलिट्री और वहां जमीन पर रहने वाले पक्षी
ू के बीच एक वॉर छिड़ गया था पर यह वॉर
आखिर छिड़ा क्यों था क्या है इसके पीछे की
हिस्ट्री जानेंगे इस वीडियो में पर उससे

पहले हम आपको ूज के बारे में बताते हैं
आइए देखिए ो एक खास तौर पर ऑस्ट्रेलिया
में पाए जाने वाला 5 से 6 फीट लंबा करीब
45 किलो के वजन का ऑस्ट्रिच की तरह दिखने
वाले एक तरह के बर्ड हैं और हर साल खाने

और पीने की तलाश में यह बर्ड्स एक जगह से
दूसरी जगह माइग्रेट करता रहता है कई साल
पहले अपने लिए खाना पानी तलाशने के लिए
इसी सिलसिले में ईईू अक्सर किसानों की
उगाई हुई फसलें खा जाया करता था इनसे बचने

के लिए अगर किसान खेतों के आसपास फेंसिंग
करते लेकिन यह फेंस भी तोड़ देते और फसलों
के साथ-साथ आसपास के पेड़-पौधों को भी
नुकसान पहुंचा दिया करते थे फैंस को
तोड़कर ूस खरगोश जैसे छोटे-छोटे जानवरों

को भी खेतों में घुसने का मौका दे देते थे
इतना ही नहीं इन्हीं सब वजहों से परेशान
होकर ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने इमस को
वर्मिन डिक्लेयर कर दिया था वर्मिन एक ऐसे
बर्ड या एनिमल को कहते हैं जो बीमारी

फैलाते हैं और प्लांट्स और फूड को
डिस्ट्रॉय कर देते हैं हर साल थोड़े-थोड़े
नंबर्स में ूज किसानों के खेतों की ओर
जाने लगे और तभी सरकार ने इस बढ़ते हुए

खतरे को देख वहां बाउंट सिस्टम
इंट्रोड्यूस कर दिया सरकार ने किसानों को
गंस प्रोवाइड की और यह कहा कि अगर वह कोई
भी ू शूट करके आएंगे तो उन्हें उनके काम
के लिए एक इनाम दिया जाएगा उस वक्त तो अब
ूस का नंबर इतना ज्यादा नहीं होने की वजह
से किसानों को इनसे बहुत ज्यादा खतरा नहीं

था पर एक वक्त ऐसा आया जब यही ूस किसानों
के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके थे और वो
वक्त आया साल 1932 में तो यह किस्सा जो है
वर्ल्ड वॉर फर्स्ट के बाद शुरू हुआ उस
वक्त ऑस्ट्रेलिया की इकोनॉमिक हालत काफी
खराब थी जिसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया को
ग्रेट डिप्रेशन जैसी प्रॉब्लम का सामना

करना पड़ा ऑस्ट्रेलिया की इकॉनमी
एग्रीकल्चरल और इंडस्ट्रियल प्रोड्यूस के
एक्सपर्ट पर डिपेंड थी इसलिए वर्ल्ड वॉर
का ऑस्ट्रेलिया पर सबसे ज्यादा असर पड़ा
था वॉर के बाद लोगों के पास ना ही खाने को
खाना था और ना ही करने को कुछ काम यह

देखकर ऑस्ट्रेलियन सरकार ने उन्हें कुछ
जमीन के टुकड़े अलॉट किए और उन्हें वीट की
खेती करने को कहा सरकार का ऑर्डर मानकर
करीब 5000 से ज्यादा सोल्जर्स वेस्टर्न
ऑस्ट्रेलिया की तरफ मूव हुए और वहां
उन्होंने खेती करना शुरू कर दिया अब उन
लोगों के सामने दिक्कत यह थी कि जो जमीन

उन्हें अलॉट की गई थी उस जमीन पर खेती
करना थोड़ा मुश्किल था और ग्रेट डिप्रेशन
की वजह से फसलों के दाम भी कुछ खास अ नहीं
थे ऐसे में ऑस्ट्रेलियन सरकार ने किसानों
की इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए उनकी
उगाई हुई फसलें खरीदने का वादा किया सरकार
की यह बात मानकर लोगों को थोड़ी तो तसल्ली

मिली और उन्होंने एक बड़ी क्वांटिटी में
वीट प्रोडक्शन शुरू कर दी देखते ही देखते
वक्त बीतने लगा किसानों ने जो फसल उगाई थी
उसके पकने का टाइम भी आ चुका था बड़ी
उम्मीद से किसान अपनी फसल का सौदा करने

सरकार के पास गए और जितनी उम्मीद के साथ
लोग वहां पर गए थे उतनी ही निराशा के साथ
उन्हें वहां से वापस भी आना पड़ा पड़ा
दरअसल तय किए गए रेट्स पर सरकार ने वीट
खरीदने से मना कर दिया था अब किसान इतनी
मेहनत करने के बाद भाई कम प्राइसेस पर
अपनी फसल बेचने को तैयार नहीं थे वीट की

प्रोडक्शन तो बहुत ज्यादा थी पर उसे
खरीदने वाला कोई नहीं था सरकार को भी वीट
की जरूरत तो थी पर शायद उन्होंने सोचा
होगा कि फार्मर्स के पास उन्हें फसल बेचने
के अलावा और कोई ऑप्शन है ही नहीं इसलिए

उन्हें एक्सप्लॉयड किया जा सकता है पर
सरकार की इस बात के आगे किसानों ने घुटने
नहीं टेके और उनकी इस हरकत पर अप ना
गुस्सा जाहिर करते हुए वहां के किसानों ने
प्रोटेस्ट शुरू कर दिया और साथ ही अपनी
फसल ना काटने का फैसला किया अब प्रोटेस्ट

चलते हुए काफी वक्त बीत गया था किसानों ने
अपनी फसल काटी तो नहीं पर उनकी फसल खत्म
जरूर हो गई थी दरअसल जिस वक्त किसान
प्रोटेस्ट कर रही थी उसी वक्त ही
ऑस्ट्रेलिया में ूज का ब्रीडिंग सीजन खत्म
हुआ था और यह साल का वही वक्त था जब ूस

खाने और पानी की तलाश में अपनी जगह से
माइग्रेट होकर दूसरी जगह जाते हैं और उस
साल जब ूस आईलैंड एरिया से कोस्टल एरियाज
की तरफ माइग्रेट कर रही थी तब उनके रास्ते
में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया आ गया अब भाई
जहां किसानों के खेत पके हुए वीट से भरे
पड़े थे वैसे तो थोड़े नंबर्स में ईज हर

साल ही माइग्रेट करते थे पर उस साल
माइग्रेट करने वाले ूस का नंबर थोड़ा
ज्यादा था करीब 20000 ईस उस वक्त वेस्टर्न
ऑस्ट्रेलिया पहुंचे और रातों-रात किसानों
के इतने महीनों की मेहनत पर पानी फेर गए

ूस किसानों की सारी फसल को या तो खा गए या
फिर कु चलती है अपनी तरफ से किसानों ने ूस
को भगाने की पूरी कोशिश की खेतों के चारों
तरफ फेंसिंग की गई शोर मचाकर ूस को डराना

चाहा पर किसानों की हर एक कोशिश नाकाम रही
और देखते ही देखते वीट से भरे हुए वह सारे
खेत खाली होने लगे सोल्जर्स बने किसानों
के पास ू को शूट करने के ऑर्डर तो थे ही
तो उन्हें प्रोवाइड की हुई गन से ूस को
शूट करने की कोशिश की पर ूस की तेज रफ्तार

हर बार उन्हें किसानों के निशानों से बचा
लेती लोगों ने सोचा कि उनके पास जो जो गंस
हैं उससे तो उन्हें कोई फायदा होगा नहीं
इसलिए ूस को शूट करने के लिए उन्हें मशीन
गंस की जरूरत पड़ेगी उन किसानों में से
कुछ लोगों ने अपना एक ग्रुप बनाया और
ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस मिनिस्टर जॉर्ज

पियर्सी के पास उन्हें मशीन गंस प्रोवाइड
करवाने की अपील लेकर गए डिफेंस मिनिस्टर
फार्मर्स की ये अपील सुनकर काफी कंफ्यूज
थे काफी सोच विचार करके उन्होंने फार्मर्स
की प्रॉब्लम को समझा और उनकी बात पर राजी

तो हो गए पर पूरी तरह से नहीं ूस को मारने
के लिए मशीन गंस यूज करने का ऑर्डर तो दे
दिया गया था पर उन मशीन गंस को यूज करने
की परमिशन फार्मर्स को नहीं बल्कि रॉयल
ऑस्ट्रेलियन आर्टिलरी के सोल्जर्स को ही
दी गई थी जी हां अब सरकार और फार्मर्स के

बीच यह तय हुआ कि भाई सरकार फार्मर्स की
मदद के लिए सोल्जर्स और मशीन गंस प्रोवाइड
करेगी और फार्मर्स को उन सोल्जर्स के रहने
का इंतजाम करना ही होगा ऑस्ट्रेलियन सरकार
ने अपने इस डिसीजन से ूस के खिलाफ एक
ऑफिशियल मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया दुनिया

भर की अखबारों में यह न्यूज़ छप गई कि
ऑस्ट्रेलिया ूज के खिलाफ जंग छेड़ चुका है
ऑस्ट्रेलियन आर्मी के मेजर ग्विनेट
मेरेडिथ की कमांड में सोल्जर्स को दो मशीन
गंस के साथ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के
कैंपेन और वैगल के एरियाज में भेजा गया ूस

के खिलाफ यह लड़ाई ऑस्ट्रेलियन सरकार को
एक मजाक की बात लग रही थी और उन्हें यकीन
था कि वर्ल्ड वॉर में बेहतरीन प्रदर्शन
करने वाली उनकी ऑस्ट्रेलियन आर्मी भाई इन
बर्ड्स को तो आराम से खत्म कर देगी इसलिए
डिफेंस मिनिस्टर ने अपने डिसीजन की सक्सेस

को रिकॉर्ड करने के लिए आर्मी के साथ एक
कैमरामैन भी भेजा बताया जाता है कि आर्मी
भी अब ने डिसीजन पर इतना कॉन्फिडेंट थी कि
उन्होंने मिशन शुरू होने से पहले ही वॉर
के बाद ूस की डेड बॉडीज कलेक्ट करने के

ऑर्डर्स भी भेज दिए उन्होंने सोचा था कि
ूस को मारकर उनकी स्किन कलेक्ट करके आर्मी
के लोगों के लिए सुंदर सी हैड बनाई जा
सकती है अब यही सब खयाली पुलाव पकाते हुए
भैया ऑस्ट्रेलियन आर्मी ने ूज पर अटैक
करना शुरू कर दिया ऑफिशियल ू वॉर का पहला
दिन था मेजर मेरेडिथ ने स्ट्रेटजी बनाई कि

वह ूस के झुंड को पहले तो स्पॉट करेंगे
फिर अपनी पावर फुल मशीन गन से ूस पर झट से
अटैक करते पर जितना आसान उन्हें ूस पर
अटैक करना लग रहा था उतना आसान यह असल में
था नहीं जैसे ही मेजर ने ूस का झुंड देखा
उन्होंने आर्मी को उन पर गोलियां चलाने को
कहा आर्मी ने मेजर का ऑर्डर मानकर ूस पर

गोलियां चलाई पर इसका अंजाम उनकी सोच से
बिल्कुल अलग था गोलियों की आवाज सुनकर ूस
का झुंड एक दूसरे से अलग होकर जगह-जगह बट
गया अब इ मूज एक नहीं बल्कि कई सारे छोटे
छोटे झुंड में बट गए थे ूस लगभग 50 किमी

पर आर की स्पीड से भागते हुए आर्मी से
काफी दूर चले गए और ऐसे ही ूस पर
ऑस्ट्रेलियन आर्मी की यह पहली कोशिश नाकाम
हो गई ूस के खिलाफ इस लड़ाई के पहले दिन
ऑस्ट्रेलियन आर्मी के लिए ूज पर महज
निशाना लगाना ही मुश्किल हो रहा था तो
उनकी स्किन से बनी हैट पहनने के बारे में

सोचना तो अब बड़े दूर की बात थी भाई एक या
दो दिन तक सोल्जर्स की यह कोशिश चलती रही
और इन दिनों में वह 20000 की गिनती में से
सिर्फ कुछ ही ूस को अपना निशाना बना पाए
अगली बार आर्मी ने ूस के खिलाफ एक और
प्लान बनाया और सोचा कि जब ूस पानी पीने

के लिए एक साथ अपने वाटरिंग होल के पास
आएंगे उस वक्त छुपकर उन पर अटैक किया
जाएगा पर इस बार भी किस्मत ने आर्मी का
साथ नहीं दिया जैसे ही आर्मी ूस पर अटैक
करने लगी उसी वक्त उनकी मशीन गंस जाम हो

गई और फायर करने में नाकाम रही अब जब तक
आर्मी अपनी मशीन गन को चला पाती तब तक तो
आधे से ज्यादा ूस वहां से बचक निकल गए और
आर्मी सिर्फ 12 के करीब ूस को ही शूट कर
पाई अपनी और अपनी आर्मी की यह परफॉर्मेंस

देखकर मेरेडिथ काफी डिसपे थे ूस लगातार
फार्मर्स की फसलों को खराब करते रहे और
उनसे पीछा छुड़ाने के लिए वहां के लोग भी
ऑस्ट्रेलियन आर्मी के तरीकों पर भरोसा
करते रहे पर इस बार फार्मर्स ने आर्मी को

अपना एक सुझाव दिया फार्मर्स का मानना था
कि अगर ूज को सिर के पीछे से शूट किया जाए
तो शायद मूस को भागने का वक्त नहीं मिलेगा
और उन्हें शूट करना इजी भी होगा अब इस
प्लान को काम काब बनाने के लिए मेजर
मेरेडिथ को कुछ ऐसा चाहिए था जिससे वह ूस

को जल्दी से जल्दी शूट कर पाए इसलिए इस
बार मशीन गन को एक ट्रक के ऊपर लगाया गया
और ट्रक पर चढ़कर ूस पर हमला किया गया पर
शायद ूस को आर्मी से जीतने की आदत हो गई
थी भाई आर्मी चाहे कितनी भी कोशिश कर लेती
हर बार किसी ना किसी वजह से तो उनकी कोशिश

मिट्टी में मिल जाती इस बार भी ट्रक उबड़
खाबड़ रास्ता होने के कारण तेजी से नहीं
चल पाया पर ूस के भागने की स्पीड तो
काबिले तारीफ थी मूज इस बार भी
ऑस्ट्रेलियन आर्मी को पीछे छोड़ तेजी से

वहां से भाग निकले अब इमज ऑस्ट्रेलियन
आर्मी की सभी चालों को समझ चुके थे अब
उन्होंने भी खुद को बचाने के लिए
स्ट्रेटेजी बनाना शुरू कर दिया और शायद
उनकी प्लानिंग ऑस्ट्रेलियन आर्मी की

प्लानिंग से कहीं ज्यादा अच्छी थी जी हां
ूस ने एक बार फिर से खुद को छोटे-छोटे
झुंड में बांट लिया और हर एक झुंड बड़ी
चालाकी से अपने खाने पीने का इंतजाम करता
हर एक झुंड में एक इमू को उस ग्रुप का
लीडर चुना गया जिसका काम दुश्मन पर नजर
रखना था जब बा कि ूस खेतों में फसलें खा

रहे होते थे उस वक्त यह लीडर अपनी आंख और
कान खुले रखकर आर्मी पर नजर रखते थे जहां
एक तरफ आर्मी ईस को मारने के सभी
अटेम्प्ट्स में लगभग फेल हो रही थी उस
वक्त पूरे देश में लोग ऑस्ट्रेलियन सरकार

का उनके ई वॉर के इस डिसीजन के लिए मजाक
बना रहे थे लोग ऑस्ट्रेलियन सरकार से इस
प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए एक बेटर
सॉल्यूशन की एक्सपेक्टेशन कर रहे थे देश
भर में लोगों का ऐसा रिस्पांस देखकर
डिफेंस मिनिस्टर जॉर्ज पियर्स ने उसी वक्त
ईईू वॉर को रोकने का ऑर्डर दिया और इस तरह

कई दिनों तक चले इस ू वॉर में ऑस्ट्रेलियन
आर्मी लगभग 300 ूज ही मार पाई थी सरकार के
ऑर्डर्स मानते हुए आर्मी को वहां से जाना
तो पड़ा पर किसानों की प्रॉब्लम अभी भी
वहीं की वहीं थी ूस किसानों की फसलों को
फिर से खराब करने लगे और किसान फिर से
अपने खेतों के चारों ओर फेंस लगाने लगे पर

यह फेंस उनके किसी काम के थे ही नहीं अब
अपने ऊपर यह खतरा बढ़ता हुआ देखकर एक बार
फिर से किसानों ने ऑस्ट्रेलियन गवर्नमेंट
से रिक्वेस्ट की उन्हें
भेजे और अपनी प्रॉब्लम्स एक बार फिर से

उनके सामने रखी एक बार फिर डिफेंस
मिनिस्टर ने किसानों की यह बात सुनी और
समझी बस पिछली बार और इस बार में फर्क
इतना था कि इस बार किसान इस लड़ाई में
अकेले नहीं थे इस बार आर्मी के मेजर ग्नेट

मेरेडिथ भी सरकार को यही मनाने में लगे थे
कि ूस पर हमला करना बिल्कुल आसान नहीं था
वह उन्हें समझा रहे थे कि उन्हें एक बार
फिर से यह हमला करके ईईू से जीतना होगा
नहीं तो ऑस्ट्रेलिया का एग्रीकल्चर और
इकॉनमी इससे बहुत ज्यादा अफेक्ट होगी मेजर

की यह बात सुनकर डिफेंस मिनिस्टर ने एक
बार फिर से सोच विचार किया और एक बार फिर
इमोस के खिलाफ वॉर डिक्लेयर कर दिया गया
मेजर मेरेडिथ और बाकी आर्मी के लोग इस बार
अपने अंदर काफी गुस्सा लिए ूस के खिलाफ इस

लड़ाई पर चल दिए इस बार आर्मी में ूस से
बदला लेने का इतना भूत सवार था कि भाई
पहले ही दिन उन्होंने कुल 40 ूस मार गिराए
धीरे-धीरे वह भी ूस की चाल को समझने लगे

थे और ऐसे ही उनकी काफी गोलियां निशाने पर
लग जाती तो काफी चूक भी जाती थी देखते
देखते एक हफ्ते में आर्मी 100 ूस को ढेर
करने लगी लगभग एक महीना बीता और फिर से
लोग डिफेंस मिनिस्टर को पार्लियामेंट में

तरीके को कंडेम करने लगे मेरेडिथ और उनके
सोल्जर्स ने अब तक 986 ूस को मार डाला था
और इसी के साथ ही सरकार ने इस मिशन को एक
बार फिर खत्म करने का फैसला लिया अब आर्मी
एक बार फिर से फार्मर्स को अपने हाल पर

छोड़कर वहां से वापस आ गई और भाई कुछ टाइम
बाद ूस फिर से किसानों को परेशान करने लगे
इस बार भी मदद की उम्मीद लेकर जब किसान
सरकार के पास एक और ईम वॉर करवाने के
रिक्वेस्ट लेकर गए तो इस बार डिफेंस

मिनिस्टर ने उनकी इस रिक्वेस्ट को रिजेक्ट
कर दिया किसानों ने काफी इंतजार किया कि
उनकी इस परेशानी से कोई तो उन्हें बाहर
निकाले पर अपनी इस प्रॉब्लम का कोई
सॉल्यूशन ना मिलते देख उन्होंने खुद ही

धीरे-धीरे कैंपियन का वो इलाका ूस के
हवाले कर उसे छोड़कर जाने का फैसला किया
और आज तक वह इलाका एक घोस टाउन की तरह
पड़ा है जहां पर कोई इंसान तो नहीं पर
कभी-कभी एक बार कोई ईईू जरूर नजर आ जाता
है ऐसे ही उस एरिया में ूज लगातार बढ़ते
गए और आज पूरे ऑस्ट्रेलिया में ूस का यह

नंबर तकरीबन 6 से 7 लाख है और यह
ऑस्ट्रेलिया में अलग-अलग जगह फैले हुए हैं
तो यह थी दोस्तों इंसानों और बर्ड्स के
बीच होने वाले इमू वॉर की कहानी जिसमें
जीत अपनी ताकत से बेजुबान पंछियों पर हमला
करने वाले इंसानों की नहीं बल्कि अपनी

चालाकी और अपनी हिम्मत से खुद को बचाने
वाले पं ियो की हुई आपको क्या लगता है
क्या ऑस्ट्रेलिया का यह इमू वॉर करवाने का
डिसीजन सही था वीडियो पर कमेंट करके अपने
व्यूज जरूर शेयर करना

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