गरजे चंद्रचूड़! "ये लोकतंत्र की हत्या!" विपक्षी नेताओं पर चुप्पी क्यों? - instathreads

गरजे चंद्रचूड़! “ये लोकतंत्र की हत्या!” विपक्षी नेताओं पर चुप्पी क्यों?

तो सबसे पहले वह लमहा मैं आपको दिखाना
चाहता हूं जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाय
चंद्रचूड़ का गुस्सा फट पड़ा था मुद्दा था
चंडीगढ़ मेयर चुनावों में वहां के प्रेइंग
ऑफिसर अनिल मसीह की विवादास्पद

भूमिका गुस्सा इस कदर था चंद्रचूड़ साहब
में कि उन्होंने यह तक कह दिया ये
लोकतंत्र की हत्या है इस प्रेजाइज ऑफिसर
को
बुलाओ हम इसे सबक सिखाएंगे उस लमहे को

देखिए मगर इस लमहे को दिखाने के बाद मैं
कुछ सवाल पूछना चाहूंगा गुस्सा क्यों था
और यह गुस्सा कभी कभार ही सामने क्यों आता
है सुनिए और देखिए किस तरह से डीवाई
चंद्रचूर साहब नाराज हुए थे सिली अप हैपन

लस मे सी द एनटायर वीडियो यो लस मे सी द
बैलेट पेपर्स इफ रिक्वायर्ड न इज दिस इज
दिस बिहेवियर ऑफ अ रिटर्निंग ऑफिसर लुक्स
एट द कैमरा डिफेस द बैलेट एंड देन एंड

ओबवियसली वेर देर इज वेर देर इज अ क्रॉस
एट द बॉटम ही जस्ट कीप्स इट इन टू द ट्रे
द मोमेंट दज अ क्रॉस एट द टॉप द मैन डिफेस
द बैलेट एंड देन लुक्स एट द कैमरा टू सी
हु इज लुकिंग एट हिम इन सो फार दैट

ऑब्जर्वेशन कंसर्न प्लीज टेल योर
रिटर्निंग ऑफिसर दैट द सुप्रीम कोर्ट इज
वाचिंग ओवर हिम एंड वी विल नॉट अलाउ
डेमोक्रेसी टू बी मडर्ड लाइक

स्टेबलाइजिंग फोर्स इन दिस कंट्री इज द
प्योरिटी ऑफ़ द इलेक्टरल
प्रोसेस देर कैन नॉट बी एनी डिस्प्यूट ऑन
व्हाट है हैपेंड हियर बट म यो लर्ड शिप्स
हैव ओनली वन साइड

ऑफ दोस्तों आप में से कई लोग जानते हैं कि
मैं डी वाय चंद्रचूर साहब का बहुत बड़ा
फैन हूं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं
क्योंकि इस दौर में जब लोकतांत्रिक

मूल्यों को कुछल जा रहा कम से कम भाषण के
स्तर पर कम से कम बोलने के स्तर पर वह कई
बार चीजें बोलते हैं जो कि बाकी जजेस कहने
से डरते हैं मगर उनके आलोचक यह भी कहते
हैं कि भाई कथनी और करनी में फर्क है आज

डीवाई चंद्रचूर साहब जरूर यह कह रहे हैं
कि लोकतंत्र की हत्या हो गई है जिसकी वजह
से उनके तेवर सख्त दिखाई दे रहे हैं मगर
कई लोग यह कह रहे हैं कि इस गुस्से की वजह
क्या है कहीं गुस्से की वजह यह तो नहीं कि

जब य सब हो रहा था सुप्रीम कोर्ट में तब
दो या तीन विदेशी जज भी वहां बैठे हुए थे
वो देखना चाहते थे कि भारतीय सुप्रीम
कोर्ट किस तरह से चलता है कहीं उनका
गुस्सा उस वजह से तो नहीं था उन्हें

दिखाने के लिए कि लोकतंत्र को बचाने वाले
अभी जिंदा
हैं मगर माफ कीजिएगा चंद्रचूड़ साहब अक्सर
मैंने देखा है कि सुप्रीम कोर्ट की कथनी

और करनी में फर्क होता है जहां तक
लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने वाली बात
होती है मगर सबसे पहले दोस्तों मैं आपको
वो वीडियो दिखाना चाहता हूं प्रेइंग ऑफिसर
अनिल मसीह का वो वीडियो अपने स्क्रीन पर

देखिए इसी वीडियो से नाराज हुए थे डी वाई
चंद्रचूड़ साहब इस वीडियो में आप देख सकते
हैं यह व्यक्ति जो है वह बैलेट पेपर्स के
साथ कुछ हेराफेरी कर रहा है कथित तौर पर
हेराफेरी कर रहा है फिर वह कैमरे की तरफ
देखना शुरू करता है भाव ऐसा है मानो चोरी

पकड़ी गई हो यह वीडियो अपने आप में बहुत
कुछ बतलाता है दोस्तों सबसे शॉकिंग बात इस
सरकार के भारतीय जनता पार्टी के पालतू
पत्रकार इसमें भी निर्वाण ढूंढने की कोशिश
कर रहे थे कहने का अर्थ यह है कि इसे भी

वह जायज ठहराने की कोशिश कर रहे
थे मुद्दा यह नहीं कि अनिल मसीह प्रेजाइज
ऑफिसर था मुद्दा यह कि अनिल मसीह भारतीय
जनता पार्टी का सदस्य है ऐसे में हम यह
कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि यह व्यक्ति

निष्पक्ष होकर काम करेगा क्योंकि इस अमृत
काल में इस संगोल युग में ऐसे कई मौके आए
हैं जब लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला और

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ के आचरण
पर सवाल उठाए गए हैं जहां यह कहा गया है
कि जहां तक सत्ताधारी भाजपा की बात होती
है यह लोग कोई एक्शन नहीं लेते मगर विपक्ष

को लेकर इनके तेवर तम तमाई रहते
हैं इसीलिए आज की तारीख में हर नौकरशाह पर
या तो दबाव है कि वो सत्ता के हिसाब से
काम करे भाज के हिसाब से काम करें या फिर
नौकर शाह खुद ही भाजपाई है अनिल मसीह कहने

को एक प्रोसाइट ऑफिसर कायदे से व्यक्ति
निष्पक्ष होना चाहिए था मगर यह आचरण जो है
शर्मिंदगी की एक मिसाल पेश कर रहा है किय
व्यक्ति कथित तौर पर हेराफेरी कर रहा है

और फिर कैमरे की तरफ देखता है आज ढेरों
सवाल है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या
कहा मैं आपको पढ़ के सुनाना चाहता हूं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने
रिटर्निंग ऑफिसर को कड़ी फटकार लगाई चीफ

जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूर ने कहा
कि रिटर्निंग ऑफिसर ने जो किया है वह
लोकतंत्र की हत्या जैसा है वीडियो में साफ
दिख रहा है कि वह कैमरे में देख रहा है और

बैलेट पेपर को खराब कर रहा है इस अवसर पर
कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए कोर्ट ने कहा
चुनाव की पवित्रता बरकरार रखने के लिए
चंडीगढ़ मेयर चुनाव की डिटेल पंजाब
हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास

जमा होंगे हम लोकतंत्र की हत्या नहीं होने
देंगे मैं आपको बतला दूं दोस्तों अभिषेक
मनु सिंघवी जो हैं वो नुमाइंदगी कर रहे थे
दूसरे पक्ष की और यह जो याचिका सुप्रीम

कोर्ट में आई है वह आम आदमी पार्टी के एक
पार्षद की याचिका है और वकील थे अभिषेक
मनु सिंह भी आप में से कई लोग जानते हैं
कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने साझा

उम्मीदवार उतारने का मन बना लिया था और
दोनों के वोट मिलाकर 20 हो रहे थे मगर
अनिल मसीह जो कि रिटर्निंग ऑफिसर है और
साथ-साथ भाजपा का एक कार्यकर्ता भी है वो

रहस्यम तरीके से आठ वोट्स को अवैध करार दे
देता है नतीजा भाजपा चुनाव जीत जाती है
सुप्रीम कोर्ट अब यह कह रहा है कि अगर
जरूरत पड़ी तो हम चुनाव दोबारा करवाएंगे

और अनिल मसीह से कहा गया है कि आपको हाजिर
होना होगा सुप्रीम कोर्ट के
सामने मगर अनिल मसीह तो एक बकरा है प्यादा
है आपको यह सवाल पूछना पड़ेगा कि करवा कौन
रहा है जाहिर सी बात है दोस्तों यह सवाल

का जवाब इतना कठिन नहीं है जवाब बहुत आसान
है सवाल भाजपा करवा रही है और ऐसी ढेरों
मिसाले हैं जहां लोकतांत्रिक मूल्यों की
धज्जियां उड़ाई जाती हैं क्योंकि भारतीय
जनता पार्टी का सिर्फ एक मकसद है जो भी

मुकाबला हो उसमें हम जीते साम दाम दंड भेद
से पैसे की मदद से एजेंसीज की मदद से
प्रचार तंत्र के जरिए और वही हमें चंडीगढ़
मेयर चुनावों में दिखाई दिया पहले जो
तस्वीर लोकतंत्र को शर्मिंदा करती रही और

उसके बाद आपने देखा होगा प्रचार तंत्र से
जुड़े जो गुर्गे थे वो इस तस्वीर में भी
भाजपा को जायज ठहराने की कोशिश कर रहे मगर
आज सुप्रीम कोर्ट से मेरे कुछ

सवाल मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि यही
अभिषेक मनु सिंह भी थे आपके सामने आए थे
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाय चंद्रचूड़ के
सामने आए थे कि जांच एजेंसीज जो हैं वो

लगातार विपक्ष के नेताओं पर निशाना साथ
रही है आपसे हमें संरक्षण चाहिए तब आपने
क्या कहा था तब आपने कहा था कि भाई हम कोई
ब्लैकेट ऑर्डर जारी नहीं कर सकते मगर आप

हमारे सामने इंडिविजुअल केसेस लेकर आइए
व्यक्तिगत मामले लेकर आइए हम उस पर
निष्पक्षता से काम
करेंगे हुआ क्या मनीष सिसोदिया संजय सिंह
और अब हेमंत सुरेन इन सभी मामलों में जांच
एजेंसीज का जो काम है वो बहुत लचर था

उनके सबूत बहुत कमजोर थे मगर उनके पास
प्रचार तंत्र था जिसके चलते यह लोग जेल
में बने हुए हैं शॉकिंग बात यह कि मनी
सिसोदिया के मामले में तो खुद सुप्रीम
कोर्ट ने कहा था कि जो इस वक्त जांच

एजेंसीज का केस है वह एक मिनट अदालत में
जरह के दौरान नहीं टिक पाएगा यह मेरे शब्द
नहीं है यह सुप्रीम कोर्ट के शब्द हैं और
होता क्या है यह आप जानते हैं मनीष
सिसोदिया अब भी जेल में है उनकी बेल

रिजेक्ट हो चुकी है हेमंत सोरेन ढ़ एकड़
जमीन के आधार पर उन्हें जेल में डाल दिया
गया है वह लगातार कह रहे हैं कल ही
उन्होंने आपको याद
होगा विधानसभा में विश्वास मत के दौरान
कहा था कि मैं चुनौती देता हूं कि उस ढ़

एकड़ की जमीन से मेरा कोई लिंक आप साबित
कर
दीजिए क्या जांच एजेंसीज के पास कोई लिंक
है कोई माण है मैं दावे के साथ कह सकता
हूं दोस्तों कि मेरी य भविष्यवाणी भी सही

साबित होगी कोई लिंक नहीं ढूंढ पाएंगे
क्योंकि हमने जांच एजेंसीज का रिकॉर्ड
देखा

है मगर होता क्या है दोस्तों जब विपक्ष के
नेताओं की बारी आती है तब सुप्रीम कोर्ट
का रवैया थोड़ा कड़ा हो जाता है मगर जब
सत्ता के चाटुकार की बारी आती है तब
सुप्रीम कोर्ट जो है नरमी से उन्हें राहत

दे देता है यह सवाल उठ रहे हैं और क्यों
मैं आपको बताता
हूं कुछ चेहरों पर गौर कीजिए अर्णव
गोस्वामी इनका मामला आया था सुप्रीम कोर्ट
के सामने त्वरित राहत मिल गई थी
का यह

पत्रकार इसका मामला आया था सुप्रीम कोर्ट
के सामने उन्हें भी राहत मिल गई थी ईडी
खुद गई थी आर्टिकल 32 के अंतर्गत उन्हें
राहत मिल गई
थी सवाल यह कि आखिर विपक्ष को राहत क्यों
नहीं मिलती और यह मुद्दा कल मैं अपने
कार्यक्रम में उठा चुका

हूं सुप्रीम कोर्ट आज कह रहा है कि
लोकतंत्र की हत्या हो रही है मगर जब
विपक्ष के नेताओं की बारी आती है तब आपके
तेवर बदल जाते हैं दोस्तों आर्टिकल 14 के
सौरव दास ने एक बहुत ही शानदार रिपोर्ट की
थी आप जानते हैं कौन सा केस किस जज के पास

जाएगा यह कौन फैसला करता है मास्टर ऑफ
रोस्टर
और मास्टर ऑफ रोस्टर कौन है चीफ जस्टिस ऑफ
इंडिया डी वाय
चंद्रचूड़ दोस्तों आर्टिकल 14 की इस खबर
के
मुताबिक तमाम जो राजनीतिक संवेदनशील मामले
हैं पॉलिटिकली सेंसिटिव मामले हैं जो कि

भाजपा के लिए बहुत जरूरी है वह एक ही जज
के पास जाते हैं बेला
त्रिवेदी अब आप कहेंगे जस्टिस बेला
त्रिवेदी का बैकग्राउंड क्या है जस्टिस
बेला त्रिवेदी जब नरेंद्र मोदी गुजरात के

मुख्यमंत्री हुआ करते थे उस वक्त लॉ
सेक्रेटरी थे यह गुजरात हाई कोर्ट से भी
आई हैं तमाम जो पॉलिटिकली सेंसिटिव केसेस
हैं सिर्फ इन्हीं के पास जाते हैं और जो
तमाम नियम कानून है उसकी धज्जिया उड़ाई जा

रही है अब मैं आपको बताता हूं कि सुप्रीम
कोर्ट का वह कौन सा नियम है जिसकी
धज्जियां उड़ाई जा रही है जिसके तहत तमाम
जो राजनीतिक तौर पर संवेदनशील केसेस हैं
सिर्फ जस्टिस बेला त्रिवेदी के पास जाते

हैं आपकी स्क्रीन पर रूल नंबर छ अंडर
केसेस कोरम एंड लिस्टिंग ऑफ द सुप्रीम
कोर्ट हैंडबुक ऑन प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर
एंड ऑफिस प्रोसीजर मैंडेट्स इफ फर्स्ट
कोरम द प्रिजाइंड जज इज नॉट अवेलेबल ऑन अ
पर्टिकुलर डे ऑन अकाउंट ऑफ रिटायरमेंट द
केस शाल बी लिस्टेड बिफोर द जज

कॉन्स्टिट्यूशन
कोरम दस नेक्स्ट सीनियर मोस्ट जज एंड इफ द
सेकंड कोरम इज नॉट अवेलेबल द केस शैल नॉट
बी लिस्टेड ऑन दैट डे रूल नंबर छह यह कह
रहा है कि एक मामले की सुनवाई उस अदालत का
जो सबसे सीनियर जज है वो करेगा और जब वो

मौजूद नहीं है तो उसकी जगह जो दूसरे
सीनियर जज हैं वो करेंगे और अगर दोनों में
से कोई भी मौजूद नहीं है तो मामला लिस्ट
ही नहीं
होगा सौरव दास की इस रिपोर्ट के मुताबिक
तमाम जो सुप्रीम कोर्ट के अपने हैंडबुक है

सुप्रीम कोर्ट के जो अपने नियम कानून है
उनकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं सबसे बड़ी
बात तमाम पॉलिटिकली सेंसिटिव केसेस जस्टिस
बेला त्रिवेदी के पास क्यों जाते हैं यह
देखिए इस तारीख पर गौर कीजिए 5 दिसंबर

जस्टिस संजय किशन कौल की कोर्ट नंबर टू
में सुनवाई हो रही थी किस मामले की सुनवाई
हो रही थी जजेस के ट्रांसफर के मामले में
केंद्र सरकार की भूमिका पर मगर होता क्या
है दोस्तों रहस्यमय तरीके से यह मामला एक
दूसरी अदालत में भेज दिया जाता है रहस
तरीके से खुद जस्टिस संजय किशन कॉल हैरत
में पड़ जाते हैं और वह क्या बोलते हैं

मैं आपको पढ़ के सुनाना चाहता हूं आई विल
जस्ट से वन थिंग आई हैव नॉट डिलीटेड द
मैटर यानी कि इस मामले को मैंने दूसरी
अदालत में नहीं भेजा मैंने इस मामले को
नहीं हटाया आगे जस्टिस कॉल सेड इन द कोर्ट

आई एम शोर द चीफ जस्टिस नोज अबाउट इट सम
थिंग्स आर बेस्ट लेफ्ट अन सेड उन्होंने
कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई
चंद्रचूड़ को इस मामले के बारे में पता
होगा कुछ मामलों में चुप्पी साधे रहना ही

बेहतर होता है ये कोई और नहीं सुप्रीम
कोर्ट के जज कह रहे
थे कुछ मामले जो मोदी सरकार के हिसाब से
बहुत सेंसिटिव हैं उन मामलों को अचानक

दूसरी अदालतों में भेज दिया जाता है खुद
जज इस बात को लेकर हैरत में है बहुत अच्छा
लगा चीफ जस्टिस ऑ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़
कि आपने चंडीगढ़ मेयर चुनावों में अपने
तेवर दिखाए आपने बतलाया कि टाइगर अभी
जिंदा है मगर मैंने आपके सामने ढेरों
मिसाले बताई कि किस तरह से नियम कानूनों
की धज्जियां उड़ाई जा रही है सुप्रीम

कोर्ट के अंदर किस तरह से जब विपक्ष के
नेताओं की बारी आती है तो हमें साफ तौर पर
विपक्ष के नेताओं और सत्ता के चाटुकार के
बीच में दोहरे मापदंड दिखाई देते हैं मैं
समझना चाहता हूं तब ये आक्रोश कहां जाता
है तब
लोकतंत्र की हत्या क्यों नहीं होती मैं
उम्मीद करता हूं इन मुद्दों पर ध्यान दिया
जाएगा अभिसार शर्मा को दीजिए इजाजत
नमस्कार स्वतंत्र और आजाद पत्रकारिता का
समर्थन कीजिए सच में मेरा साथी बनिए बहुत

आसान है दोस्तों इस जॉइन बटन को दबाइए और
आपके सामने आएंगे ये तीन विकल्प इनमें से
एक चुनिए और सच के इस सफर में मेरा साथी
बनिए

Leave a Comment