घड़ी का आविष्कार कैसे हुआ !! जानिए पुर जानकारी के सात #ghadi - instathreads

घड़ी का आविष्कार कैसे हुआ !! जानिए पुर जानकारी के सात #ghadi

हाथ की कलाई में बंधी हुई घड़ी हो या फिर
घर या ऑफिस के दीवार पर टंगी हुई घड़ी काम
तो सबका एक ही है और वह है समय बताना इस
बात में कोई डाउट नहीं है कि आज अगर हमारे
पास घड़ी ना होती तो शायद ही हम कभी खुद

को इतना विकसित कर पाते क्योंकि यह घड़ी
ही तो है जो हमें समय के इंपॉर्टेंस को
बखूबी बताती है जैसे एक सेकंड की देरी से
आपकी बस मिस हो जाती है और सही समय पर
हॉस्पिटल ना पहुंचने पर लोगों की जान चली

जाती है कुल मिलाकर कहने का मतलब यह कि
अगर यह घड़ी ना होती तो शायद आज हम और आप
यहां ना होते और हमारा मॉडर्नाइजेशन भी ना
होता पर क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश
की है कि समय को बताने वाले इतने
महत्त्वपूर्ण इक्विपमेंट घड़ी का आविष्कार

कब हुआ था और आज से सालों पहले जब घड़ी
नहीं हुआ करती थी तब लोग समय कैसे देखा
करते थे घड़ी का इतिहास क्या है दोस्तों
अगर आप भी प्राचीन काल से लेकर आधुनिक
घड़ी के दिलचस्प इतिहास को जानना चाहते

हैं तो हमारे साथ इस वीडियो में एंड तक
बने रहिएगा दो दोस्तों जब घड़ी का
आविष्कार नहीं हुआ था उस समय लोग सूरज की
रोशनी को देखकर समय का पता लगाते थे सूर्य

की अलग-अलग अवस्थाएं देखकर लोग सुबह दोपहर
और शाम का अनुमान लगाते थे यही नहीं धूप
के कारण पड़ने वाले किसी पेड़ या कोई
स्थिर वस्तु की छाया से भी समय का अंदाजा
लगाया जाता था और रात के समय का पता उस

समय तारों व नक्षत्रों से किया जाता था पर
यहां समस्या तो तब होती है जब आसमान में
बादल छा जाते हैं या फिर किसी दिन बारिश
हो जाती है ऐसे में सूर्य देवता की चमक
आसमान में फीकी पड़ जाती है और लोग समय का

सही सही अनुमान नहीं लगा पाते थे इस
परेशानी से बचने के लिए लोगों ने जल घड़ी
का आविष्कार किया जिसे पानी वाली घड़ी भी
कहा जाता है वैसे इस घड़ी को बनाने का
श्रेय चीन के सुसंग नाम के व्यक्ति को

जाता है लेकिन इस घड़ी से भी स्पष्ट समय
का पता नहीं चलता था बीबीसी की एक रिपोर्ट
के मुताबिक आज से करीब 2500 साल पहले
प्राचीन यूनान के लोग पानी से चलने वाली
अलाम वाली घड़ी का इस्तेमाल किया करते थे

जिसमें वो लोग एक बर्तन में पानी भर देते
थे और उस बर्तन के पेंदे में एक छोटा सा
छेद कर देते थे और फिर उस छेद के ठीक नीचे
एक खाली बर्तन रख देते थे जिसके बाद उस
नीचे रखे बर्तन में बूंद-बूंद करके पानी
इकट्ठा होता रहता था और बाद में इकट्ठा

हुए पानी को नाप करर समय की गणना की जाती
थी लेकिन इस घड़ी में सबसे बड़ी समस्या यह
थी कि इसे एक जगह से दूसरी जगह नहीं लेकर
जाया जा सकता था ऐसे में इन्वेंटर्स को
पोर्टेबल वॉच बनाने का विचार आने लगा जिसे
लोग अपने साथ एक जगह से दूसरी जगह ले जा

सकते थे और कभी भी समय देख सकते थे इसी
विचार को हकीकत में बदलने के लिए कुछ समय
बाद पानी की जगह रेत का इस्तेमाल करके
घड़ी बनाई जाने लगी इसमें कांच के जार को
दो भागों में पार्टीशन करके उसके दोनों
हिस्से में रेत भर दी जाती थी और फिर जब
एक हिस्से से दूसरे हिस्से में आहिस्ता

आहिस्ता करके रेत गिरता था तो उससे समय का
अनुमान लगाया जाता था इन इक्विपमेंट्स को
हॉर ग्लास के नाम से जाना जाता था जिसका
सबसे बड़ा एडवांटेज ये यह था कि इसे आसानी
से एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाया जा सकता

था 15वीं शताब्दी में हॉर ग्लास का
इस्तेमाल मुख्य रूप से समुद्री जहाजों में
किया जाता था दोस्तों आज घड़ी डिजिटल हो
गई है लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए घड़ी
को सैकड़ों साल लग गए हैं आज आप जो भी वॉच

देखते हैं वह शुरुआत में ऐसी नहीं थी इसे
काफी बदलावों के बाद ऐसा बनाया गया है
दरअसल जो सबसे पहली मॉडर्न वॉच थी उसमें
सिर्फ घंटे वाली सुई हुआ करती थी फिर कुछ
समय बाद मिनट वाली सुई और फिर सेकंड वाली
सुई को लगाकर इसे पूरा किया गया यही वजह

है कि आधुनिक घड़ी के आविष्कार को लेकर आज
भी कई तरह के विवाद है ऐसा कहा जाता है कि
घड़ी का आविष्कार सबसे पहले 996 ईसवी में
रोम में पोप सिल्वेस्टर सेकंड ने किया था
जिसके बाद यूरोप में 13वीं शताब्दी के
आसपास घड़ियों का इस्तेमाल शुरू हो गया

साल 1288 का समय था जब इंग्लैंड के
वेस्टमिंस्टर में सड़कों पर बड़ी-बड़ी
घड़ियां लगाई गई पर उस समय पर बनी यह घड़ी
भी आज आज की तरह की कंप्लीट घड़ी नहीं थी
क्योंकि इस घड़ी में मिनट की सुई नहीं

होती थी मिनट वाली घड़ी 1577 में बनकर
तैयार हुई थी पर इससे बहुत पहले ही 1505
में जर्मनी के पीटर हेलियन ने क्लॉक वॉच
का आविष्कार कर लिया था यह एक ऐसी वॉच थी
जिसे लोग अपने साथ लेकर चल सकते थे साथ ही

यह घड़ी आज की तरह बिल्कुल सटीक समय बताती
थी और आपको यह जानकर खुशी होगी कि आज भी
इस घड़ी को काफी अच्छी तरीके से संभाल कर
रखा गया है दोस्तों रिसर्चस इस घड़ी को ही
दुनिया की सबसे पहली आधुनिक घड़ी मानते

हैं इस घड़ी को पोम एंडर वॉच ऑफ 1505 के
नाम से भी जाना जाता है वैसे जितनी पुरानी
यह घड़ी है इसकी कहानी उतनी ही ज्यादा
इंटरेस्टिंग है साल 1987 में घड़ी बनाने
वाले एक लड़के ने लंडन स्टेट कबाड़
मार्केट से 10 पाउंड में पोमंडर वॉच खरीदी

थी हालांकि यह लड़का यह नहीं जानता था कि
जो घड़ी उसने खरीदी है वह दुनिया की सबसे
पहली घड़ी है उस लड़के ने उस घड़ी को कई
सालों तक अपने पास रखा था जिसके बाद साल
2002 में उसने इसे बेच दिया इस घड़ी का जो

अगला खरीदार था उसे भी ना तो घड़ी की
हकीकत का पता था और ना ही इसकी सही कीमत
इसलिए घड़ी को उस समय तक अपने पास रखने के
बाद उसने भी घड़ी बेच दी और आखिरकार यह
घड़ी एक रिसर्चर के हाथ लगी जिसने इस घड़ी

की हकीकत को दुनिया के सामने रखा अब यहां
आप में से बहुत से लोग यह सोच रहे होंगे
कि आखिर उस रिसर्चर को कैसे पता चला कि यह
घड़ी 1505 में बनी है और उसके आविष्कारक
पीटर हेलियन ही है तो दरअसल हुआ यूं कि
पीटर हेलियन ने अपनी घड़ी को बनाने के बाद

उसके ऊपर उसे बनाने का साल और अपना
सिग्नेचर कर दिया था और जब रिसर्चर को यह
घड़ी मिली तो साफ सफाई के दौरान उनका
ध्यान घड़ी के ऊपर लिखे साल और पीटर नलिन
के सिग्नेचर पर गया दोस्तों आपकी जानकारी
के लिए बता दें कि पीटर हेलियन के द्वारा

बनाई गई घड़ी का डिजाइन एक गेंद की तरह था
घड़ी को तांबे से बनाया गया था और उसके
ऊपर सोने की परत चढ़ाई गई थी वर्तमान में
इस घड़ी की कीमत करोड़ों में आकी गई है
दोस्तों इस घड़ी के अलावा पीटर हेलियन ने
1541 में जर्मनी में मौजूद टेन्यू

फोर्ट्रेस के लिए एक टावर घड़ी भी बनाई थी
जो आज भी चल रही है पीटर हेलियन की बनाई
घड़ी की तकनीक का उपयोग करके ही आज की
हमारी एडवांस वॉच बनाई गई हैं वेल पीटर

द्वारा क्लॉक वॉच के आविष्कार के बाद ही
1577 में स्विटजरलैंड के जॉस बर्गी ने
मिनट की सुई वाली घड़ी का आविष्कार किया
था इसके बाद पॉकेट वॉच का आविष्कार हुआ
1650 के आसपास लोग अपनी जेबों में घड़ियां
लेकर घूमा करते थे और फिर साल 1988 में
स्टीव मन ने पहले

समय देखने के लिए बार-बार घड़ी को अपने
पॉकेट से निकालना पड़ता था इसी समस्या को
खत्म करने का ख्याल फ्रेंच मैथमेटिशियन और
फिजिसिस्ट ब्लेस पास्कल को आया और फिर
उन्होंने जेब में लेकर घूमने वाली घड़ी
में ही एक रस्सी बांधकर उसे हाथ में

बांधने के काबिल बना दिया दोस्तों पेंडुलम
वाली घड़ी जो एक समय में सभी रिच लोगों के
घर की शोभा बढ़ाती थी उसका आविष्कार साल
1656 में क्रिस्टियन होगनस ने किया था
पेंडुलम वाली घड़ी आ जाने के बाद इसे उस
समय दुनिया की सबसे शुद्ध समय दर्शी यंत्र

 

माना गया था वैसे आज भी म्यूजियम्स में या
फिर आपको ऐसे कई घर में देखने को मिल
जाएंगे जहां पेंडुलम घड़ी का उपयोग किया
जाता है दोस्तों अगर भारत में घड़ी केनी
की बात करें तो अंग्रेजी हुकूमत के आने से
पहले 18वीं शताब्दी की शुरुआत में जयपुर
के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने जयपुर के

साथ-साथ नई दिल्ली उज्जैन मथुरा और
वाराणसी में यानी कि टोटल पांच जंतर मंतर
का निर्माण कराया था जो आज भी सूर्य की
रोशनी से समय बताते हैं वेल दोस्तों आज से
पहले क्या आपको घड़ी के इतिहास के बारे
में पता था अपना जवाब हमें नीचे कमेंट

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