चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त | SC comes down on Mayoral elections - instathreads

चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त | SC comes down on Mayoral elections

नमस्कार

सुप्रीम कोर्ट ने
लोकतंत्र की हत्या का नाम लिया है जिस
हत्या की बात सिविल सोसाइटी के लोग
पत्रकार विपक्ष के नेता कई साल से किए जा
रहे हैं अब जाकर सुप्रीम कोर्ट की जुबान
पर आई है यह और बात है कि चंडीगढ़ के मेयर

के चुनाव के मामले से भी कई ऐसे बड़े
मामले सामने आकर गुजर गए पार्टियों को
तोड़ दिया गया सरकारें गिरा दी ग
सामाजिक कार्यकर्ताओं को कई साल तक जेल

में सड़ाया गया तब जाकर जमानत मिली उमर
खालिद और सर्जेल इमाम की जमानत पर सुनवाइए
स्थगित होती रही मीडिया का गला घोट दिया
गया यह सब लोकतंत्र की हत्या के वे

सिलसिले हैं जिसे लेकर कोर्ट ने कभी नहीं
कहा लोकतंत्र की हत्या हो रही है और हम
नहीं होने देंगे आज ही आम आदमी पार्टी की
आतिशी सिंह ईडी को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस

करने वाली थी 10 10 बजे का समय था तभी खबर
आती है कि आम आदमी पार्टी के कई नेताओं के
यहां ईडी ने छापे मारने शुरू कर दिए हैं
यह भी लोकतंत्र की हत्या का ही हिस्सा

होगा या फिर लोकतंत्र के गले का हार है आम
आदमी पार्टी से जुड़े 12 लोगों के घरों पर
ईडी के छापे पड़ने लगते हैं पार्टी के
सांसद और कोषाध्यक्ष एन डी गुप्ता और उनके

सचिव के यहां भी छापा पड़ा मुख्यमंत्री
केजरीवाल के सचिव विभव कुमार के यहां ईडी
पहुंच गई पिछले साल इसी फरवरी में विभव से
ईडी ने पूछताछ की थी आखिर विभव के पास ऐसा

क्या है कि एक साल बाद ईडी की टीम फिर से
उनके घर पहुंची है ईडी की कारवा होती है
यह क्या प्रयास है ईडी का यह क्या प्रयास
है भारतीय जनता पार्टी शासित केंद्र सरकार

का कि वह अपनी एजेंसीज के माध्यम से आम
आदमी पार्टी को डराने की कोशिश कर रही है
धमकाने की कोशिश कर रही है और हमारी बात
को दबाने की कोशिश कर रही है
मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को

भारतीय जनता पार्टी को और उनकी एजेंसियों
को जो ईडी और सीबीआई हैं यह बताना चाहती
हूं कि आम आदमी पार्टी आपकी धमकियों से
डरने वाली नहीं है हम इस छापे की भी बात

कर रहे हैं मगर हम अपने आज के दूसरे
वीडियो में बात कर रहे हैं आप जरूर देखिए
क्योंकि आतिशी सिंह ने अपने प्रेस
कॉन्फ्रेंस में काफी कुछ कहा उस पर अलग से

ही बात होनी चाहिए चंडीगढ़ के मेयर का
चुनाव लोकतंत्र की हत्या से जुड़ा मामला
है इस पर भी अलग से और विस्तार से बात
होनी चाहिए क्योंकि छापों के हंगामे में

चंडीगढ़ में जो हुआ उसकी खबरों को गायब
नहीं होने देना चाहिए सभी को एक बात समझनी
चाहिए भ्रष्टाचार से लड़ना और इसके नाम पर
विपक्ष को टारगेट करना दोनों अलग-अलग बात
है भ्रष्टाचार के नाम पर विपक्ष को टारगेट

करना भी लोकतंत्र की हत्या का वह सिलसिला
है जो जो कई साल से दिखाई तो दे रहा है
मगर अदालतों की जुबान पर नहीं आ रहा एक
राज्य का मुख्यमंत्री गिरफ्तार कर लिया

जाता है एक राज्य के सरकार के मंत्रियों
और जुड़े लोगों के यहां लगातार छापे पड़ते
हैं जेल में डाल दिए जाते हैं कोई सरकार

ऐसे कैसे काम करेगी और लोकतंत्र कैसे काम
करेगा इसलिए हत्या के कई बड़े मामले आंखों
के सामने से गुजर जाने के बाद चंडीगढ़ के
मेयर के सिलसिले में हत्या की बात नजर आई

है तो बात होनी चाहिए बल्कि कई लेखों में
कई बहसों में अदालतों के ही कई फैसलों और
चुप्प हों को भी लोकतंत्र की हत्या के रूप
में देखा गया बताया गया अदालतों के फैसलों

से हताश हो रहे इस लोकतंत्र के प्रहरी हों
को क्या कोई अमृत वचन सुनाई दे गया कि
चंडीगढ़ के मेयर के चुनाव में लोकतंत्र की
हत्या हुई है जिस लोकतंत्र को बनाने और

बचाए रखने में न जाने कितने लाखों लोगों
ने कुर्बानियां दी अब जब सब हो चुका है सब
नहीं तो बहुत हद तक सब कुछ हो चुका है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम लोकतंत्र
की हत्या नहीं होने देंगे आज की रात या आज

की शाम आराम या चैन से सो जाने का नहीं है
बल्कि नींद को झटक कर जाग जाने का है कि
लोकतंत्र की यह हत्या कहां हुई है किसने
की है हत्यारा किस पार्टी का है उस पार्टी

ने हत्या के वक्त क्यों जश्न मनाया क्या
सजा उसे भी मिलेगी या अनिल मसीह है जो इस
वीडियो में बैलेट पेपर से कथित रूप से
छेड़छाड़ करता हुआ देखा जा रहा है यही है
वह अनिल मसीह जिसके वीडियो को देखकर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह लोकतंत्र की
हत्या है और हम यह हत्या नहीं होने देंगे
आज के भारत में अनिल मसीह का यह दुस्साहस
अब इतिहास का हिस्सा है उसके परिवार को
उसके दोस्तों को और जिस पार्टी का सदस्य

है यानी बीजेपी को उसे इस दाग के साथ जीना
पड़ेगा कि उनका एक सदस्य भारत के लोकतंत्र
की हत्या करता हुआ कैमरे पर पकड़ा गया
अनिल मसीह का यह वीडियो एटीएम लूटने वाले
गिरोहों के वीडियो की तरह लगता है

सीसीटीवी में मशीन से डकैती कर भागने
वालों का चेहरा साफ नहीं दिखता मगर दिख तो
जाता है कि कोई डाका डाल रहा है लेकिन
यहां पर अनिल मसीह का चेहरा साफ-साफ दिख
जाता है और साफ-साफ दिख जाता है हत्या के

बाद कुर्सी पर आकर बैठते हुए बीजेपी के
पार्षदों का चेहरा कोर्ट ने इनके बारे में
नहीं कहा लेकिन आप तो देख सकते हैं
चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में लोकतंत्र की

हत्या के बाद कुर्सी पर बीजेपी के लोग किस
तरह आकर बिठाए जाते हैं बैठते हैं और
कब्जा करते हैं एक-एक करके आम आदमी पार्टी
और कांग्रेस के आठ पार्षदों की वोट खराब
कर दी ताकि बीजेपी के उम्मीदवार को जिताया
जा

सके बीजेपी को जिताने के लिए पीठासीन
अधिकारी इतना जल्दी में थे कि बीजेपी के
उम्मीदवार को वहीं बराबर में ही खड़ा किया
हुआ था और तुरंत उन को बुलाकर कुर्सी पर
बिठा

दिया लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों का
खुलेआम चीर हरण किया
गया क्या मोदी जी इस तरह चुनाव जीतते हैं
चंडीगढ़ में तो कैमरे पर पकड़े गए पर देश

भर में ना जाने अभी तक यह लोग कितने चुनाव
ऐसे धोखाधड़ी करके जीते
हैं सुप्रीम कोर्ट ने पीठासीन अधिकारी
अनिल मसीह को अपने आचरण पर स्पष्टीकरण
देने के लिए 19 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से

न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश
दिया है 19 फरवरी का दिन काफी अहम होगा
लोकतंत्र के हत्या करने वाला एक आरोपी
अदालत के सामने अपनी बात रखेगा अनिल मसीह
10 साल से बीजेपी से जुड़ा है इसकी उम्र

53 साल है बीजेपी के तमाम कार्यक्रमों में
दिखाई देता है पार्टी ने इसे 2022 में
पार्षद के रूप में मनोनीत किया उससे पहले
2021 में बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा का

महासचिव बनाया गया चर्चों और ईसाई धर्म के
खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल के कारण
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ने चर्च में इसके
प्रवेश पर रोक लगा दी थी 2 साल बाद रोक

हटी है 18 जनवरी को चुनाव होने वाले थे
लेकिन अनिल मसी ने कहा वह बीमार है और
चुनाव नहीं हुए तब आम आदमी पार्टी की ओर
से चुनौती दी गई जिसके बाद पंजाब एंड
हरियाणा हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और

मेयर के चुनाव को 30 जनवरी के दिन करवाने
का ऐलान किया कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को
आदेश दिया कि वह चुनाव व्यवस्थित तरीके से
करवाए यह आदेश भी दिया कि नगरपालिका के

दफ्तर में या उसके पास चुनाव के दौरान या
उसके आसपास कोई हंगामा ना हो उस दिन भी
चुनाव एक घंटे की देरी से शुरू हुए या
चुनाव क्यों नहीं हो रहे थे क्या इसलिए कि
हार तय थी संख्या साफ-साफ आम आदमी पार्टी

और कांग्रेस के साथ थी मगर उनके आठ वोट को
रद्द कर दिया गया और सारे वोट विपक्ष के
ही रद्द हुए यह पोस्टर 30 जनवरी को जारी
हुआ 5 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

के बाद अब आप इस पोस्टर को देखकर आपके मन
में क्या-क्या सवाल पैदा होंगे खुद से
पूछिए
उन संस्थाओं के ध्वस्त कर दिए जाने से
नहीं जुड़ जाता है आप ही बताइए धूल में
किसे मिलाया गया गठबंधन को या लोकतंत्र को

झांकी किस चीज की है लोकतंत्र मिटाने की
या मेयर के चुनाव में जीत जाने की जिस दिन
इस चुनाव को लेकर सवाल उठ रहे थे भारतीय
जनता पार्टी जीत का जश्न मनाने लगी इसी

चुनाव को लेकर सुनवाई हो रही थी जब
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई
चंद्रचूड़ ने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या
है आप देख सकते हैं यह बीजेपी का पोस्टर

है 16 वोटों से बीजेपी जीत गई मगर क्या
बीजेपी के लिए यह सवाल महत्त्वपूर्ण नहीं
था कि वह कैसे जीती कोर्ट ने नाम नहीं
लिया मगर लोकतंत्र की हत्या का लाभार्थी

कौन है आप तो जानते हैं जिसने लोकतंत्र की
हत्या की वह तो बीजेपी का ही सदस्य है और
जिस पार्टी ने लोकतंत्र की हत्या पर जश्न
मनाया वो भी बीजेपी है आखिर एक छत्र राज
करने वाली बीजेपी के लिए मेयर का चुनाव
प्रधानमंत्री का चुनाव क्यों बन गया क्या

बीजेपी भारत के लोकतंत्र की हत्या को
रोकने के लिए मेयर का पद दांव पर नहीं लगा
सकती थी बीजेपी इस मामले में फेल हो गई
यही नहीं जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने
लोकतंत्र की हत्या कहा उस मामले में पंजाब

एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने रोक लगाने से
इंकार कर दिया तो क्या हाई कोर्ट को इस
मामले में हत्या नजर नहीं आई सीजेआई डीवाई
चंद्रचूड़ ने हाई कोर्ट के दृष्टिकोण की

आलोचना करते हुए कहा उचित अंतरिम आदेश की
आवश्यकता है जिसे करने में हाई कोर्ट विफल
रहा सुप्रीम कोर्ट की नजर में हाई कोर्ट
भी विफल रहा यह कोई मामूली आलोचना नहीं है

इन्हीं सब वजहों से लोगों को 100 बातें
कहने का मौका मिल जाता है अच्छा हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने न्याय व्यवस्था की
नाकामी खुद ही उजागर कर दी अदालत में
वीडियो देखा गया याचिकाकर्ता की ओर से पेश

सीनियर एडवोकेट डॉ अभिषेक मनु सिंघवी ने
कहा कि बीजेपी उम्मीदवार को पीठासीन
अधिकारी के रूप में चुना गया और उन्होंने
कांग्रेस आप पार्षदों के आठ मतपत्रों को
जानबूझकर नष्ट करके और जानबूझकर उनके

वोटों को अवैध करके पक्षपात पूर्ण तरीके
से काम किया सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
सरकार की तरफ से वकालत कर रहे थे उन्होंने
कहा कि वीडियो में केवल एक तरफा तस्वीर
दिखाई गई है उन्होंने आग्रह किया कि
न्यायालय को पूरे रिकॉर्ड देखने के बाद

व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए चंडीगढ़ के
मेयर के चुनाव को लेकर चीफ जस्टिस डी वाई
चंद्रचूड़ जस्टिस जेबी पारदी वाला जस्टिस
मनोज मिश्रा की पीठ सुनवाई कर रही थी
याचिका आम आदमी पार्टी के मेयर पद के हारे

हुए उम्मीदवार कुलदीप कुमार ने दायर की इस
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट
ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव कराने वाले पीठासीन
अधिकारी को यह कहते हुए कड़ी फटकार लगाई
कि स्पष्ट है कि उन्होंने मतपत्रों को

विकृत किया है चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने
कहा कि क्या वह इस तरह से चुनाव आयोजित
करते हैं यह लोकतंत्र का मजाक है यह

लोकतंत्र की हत्या है इस आदमी पर मुकदमा
चलाया जाना चाहिए वीडियो देखते ही कोर्ट
के जज साहिबान भी खुद को रोक नहीं सके
कोर्ट ने कहा कि पीठासीन अधिकारी के

व्यवहार को देखकर आश्चर्य चकित है चीफ
जस्टिस ने वीडियो देखने के बाद कहा कि
पीठासीन अधिकारी को बताया जाए कि सुप्रीम
कोर्ट उन पर नजर रख रहा है वह कैमरे की ओर

क्यों देख रहे हैं और भगोड़े की तरह क्यों
भाग रहे हैं कोर्ट ने आदेश दिया कि मेयर
चुनाव का पूरा रिकॉर्ड जब्त कर लिया जाए
और उसे पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के

रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करा दिया जाए
मतपत्र और वीडियोग्राफी को चंडीगढ़ यूटी
के उपायुक्त के पास सुरक्षित रखा जाए
जिसके पास वर्तमान में रिकॉर्ड है इतना सब

देखने और कहने के बाद सुप्रीम कोर्ट को
तत्काल चुनाव रद्द कर देना चाहिए था मगर
यह लोगों की इच्छा हो सकती है अदालती
प्रक्रिया शायद इस तरह नहीं चलती होगी
लेकिन कोर्ट ने कई कड़े आदेश जारी किए और

यह भी कहा कि 7 फरवरी को होने वाली
चंडीगढ़ नगर निगम की आगामी बैठक स्थगित कर
दी जाए चंडीगढ़ के मेयर के मामले में लोग
तो यह भी लिख रहे हैं बोल रहे हैं कि अगर

कैमरे पर इस तरह की डकैती हो रही है तो
कैमरे के पीछे क्या-क्या होता होगा अंतरिम
आदेश देने में केवल हाई कोर्ट ही फेल नहीं
रहा बल्कि गोदी मीडिया बन चुका भारत का

मीडिया भी फेल रहा अखबार की हेडलाइन में
साफ-साफ सवाल मुखर नहीं हो रहे थे यह
चुनाव कैसे जीता गया है अखबार इसके बारे
में बड़ा-बड़ा तो लिख रहे हैं कि इंडिया

गठबंधन के लिए धक्का है उतने ही बड़े फंट
में यह नहीं लिख रहे कि वोटों की गिनती शक
के घेरे में है ज्यादा बड़ी खबर यह बनाई
गई कि बीजेपी ने जीत लिया विपक्ष ने
रिगिंग का आरोप लगाया है केवल यही लिखा

मेयर का चुनाव एक साल के लिए होता है आखिर
बीजेपी ने इतना बड़ा व क्यों खेला गोदी
मीडिया ने सवालों को बड़ा क्यों नहीं किया
शायद ऐसा कर भाजपा दिखा देना चाहती थी कि
उसे किसी की परवाह नहीं या मीडिया कभी

सवाल नहीं करेगा जनता को पता नहीं चलेगा
बीजेपी को मालूम है कि यह चैनल नहीं
दिखाएंगे दिखाएंगे भी तो वोटों की लूट हुई
है इस पर जोर-जोर से नहीं चिल्लाए पिछले
10 वर्षों में कितनी सारी सरकारें गिरा दी

गई पार्टियां तोड़ दी गई बिहार महाराष्ट्र
मध्य प्रदेश कर्नाटका गोवा मणिपुर सिक्किम
अरुणाचल प्रदेश राजस्थान की सरकार पर
भाजपा के बादल मंडराने लग गए कश्मीर में

तो सरकार नाम का ढांचा ही खत्म हो गया नजर
नहीं आ रहा जनमत का उपहास अब किसी को
विचलित नहीं करता करीब 150 सांसद लोकसभा
और राज्यसभा से निलंबित कर दिए गए तब भी

विपक्ष को अच्छे बर्ताव के बारे में
लेक्चर दिया जा रहा है आम आदमी पार्टी ने
चंडीगढ़ के मेयर के चुनाव में हुई कथित
धांधली को बड़े मुद्दे में बदल तो दिया
पार्टी ने दिल्ली में बीजेपी के दफ्तर के

सामने प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई और
जगह-जगह प्रदर्शन भी किए इस तरह के
पोस्टरों से साफ हो गया कि आम आदमी पार्टी
से लेकर अदालत से लेकर सड़क पर लड़ने के
लिए तैयार है इस लड़ाई को उपहास की नजर से

देखा गया मगर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने
आम आदमी पार्टी को नैतिक बल दे दिया है
कोर्ट ने भी कहा है कि लोकतंत्र की हत्या

हो रही है आम आदमी पार्टी के पोस्टर भी
यही कह रहे हैं वोट की चोरी हुई है वोट
चोर बीजेपी नाम से ट्रेंड कराया गया
पोस्टर बनाए गए आम आदमी पार्टी के
कार्यकर्ता रोके भी गए हिरासत में भी लिए

गए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पंजाब में
एक दूसरे के प्रतिद्वंदी हैं मगर मेयर के
चुनाव ने दोनों को एक कर दिया कांग्रेस भी
चुनाव में धांधली के सवाल को लेकर पीछे

नहीं रही और प्रदर्शन किया आम आदमी पार्टी
ने जनता को समझाने के लिए एक वीडियो भी
बनाया यानी पार्टी हर स्तर पर इस लड़ाई को
ले जा चुकी
है चंडीगढ़ मेयर चुनाव में सारे नियम

कायदे कानून और लोकतंत्र की धज्जिया
उड़ाते हुए कैसे बीजेपी ने वोटों की चोरी
करते हुए हेराफेरी से मेयर का चुनाव जीता
वह आपको इस वीडियो में दिखाते

हैं सबसे पहले आपको बताते हैं कि इस चुनाव
में केंद्र की बीजेपी सरकार ने जिस
व्यक्ति को चुनाव का पीठासीन अधिकारी
बनाया था उनका परिचय क्या है नाम है अनिल

मसीह जो भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे का
पदाधिकारी रह चुका है सवाल यह है कि भाजपा
का पदाधिकारी कैसे एक निष्पक्ष चुनाव करा
सकता

है अब आइए आंकड़ों पर चंडीगढ़ मेयर चुनाव
में बीजेपी के पास है 14 पार्षद एक अकाली
दल का और एक चंडीगढ़ से भाजपा की सांसद
भाजपा के कुल वोट थे सिर्फ
16 अब दूसरा पक्ष दूसरी तरफ आम आदमी

पार्टी के 13 पार्षद कांग्रेस के साथ कुल
संख्या हो जाती है
इस हिसाब से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस
यानी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार का जीतना
तय

था अब यहां से शुरू होती है भाजपा की असली
साजिश आपको काउंटिंग पर लगे इस कैमरे से
दिखाते हैं कि कैसे भाजपा देश के लोगों के

साथ धोखाधड़ी करती है भाजपा के पीठासीन
अधिकारी 2 36 वोटों की काउंटिंग शुरू करते
हैं और पहचान पहचान कर इंडिया गठबंधन की
वोटों को खराब कर करने के अपने प्लान को
अंजाम देते

हैं जिन वोट पर कुछ नहीं करना था उन्हें
जल्दी जल्दी साइन करके आगे बढ़ा रहे हैं
अब आई आम आदमी पार्टी के पार्षद की वोट
बेईमानी करनी थी तो थोड़ा सा रुके ऊपर
देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है और फिर

चुपके से पेन से डॉट मार के वोट को खराब
कर
दिया फिर बीजेपी की वोट आई तो आराम से आगे
बढ़ा दी उसके बाद वो वोट आई जिस पर
गड़बड़ी करनी थी तो चुपके से फिर से पेन
चला दिया और वोट को खराब कर

दिया उसके बाद विपक्ष की एक और वोट आई
यानी तीसरी वोट और उसे भी खराब कर दिया
फिर चौथी वोट खराब की फिर पांचवी वोट खराब
की उसके बाद छठी फिर सातवी और ये

आठवी एक-एक करके आम आदमी पार्टी और
कांग्रेस के आठ पार्षदों की वोट खराब कर
दी ताकि बीजेपी के उम्मीदवार को जिताया जा
सके बीजेपी को जिताने के लिए पीठासीन

अधिकारी इतना जल्दी में थे कि बीजेपी के
उम्मीदवार को वहीं बराबर में ही खड़ा किया
हुआ था और तुरंत उनको बुलाकर कुर्सी पर
बिठा
दिया लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों का

खुलेआम चीर हरण किया
गया क्या मोदी जी इस तरह चुनाव जीतते हैं
चंडीगढ़ में तो कैमरे पर पकड़े गए पर देश
भर में ना जाने अभी तक यह लोग कितने चुनाव
ऐसे धोखाधड़ी करके जीते

हैं आम आदमी पार्टी ने इस सवाल को मुखर कर
दिया है कि अगर छोटे चुनाव इस तरह से जीते
जा रहे हैं तो ना जाने कितने चुनाव में इस
तरह की धालिया होती रही होंगी यही वह सवाल

है जहां मेयर का चुनाव प्रधानमंत्री से
लेकर मुख्यमंत्री के चुनाव से जाकर जुड़
जाता है चंडीगढ़ का मेयर हमारा बनता है कि
उन का बनता है यह जरूरी नहीं
है कोई जरूरी नहीं है हम यहां पर कोई

सत्ता के लिए नहीं आए हमारा बने चुनाव आते
जाते रहते हैं चुनाव होते रहते हैं
पार्टिया आती जाती रहती हैं नेता आते जाते
रहते

हैं नेता आज ये कल यह है आज यह पार्टी कल
यह पार्टी आज इसका मेयर कल इसका
मेयर देश के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए
हमारे जनतंत्र के साथ खिलवाड़ नहीं होना
चाहिए

इन्होंने जो चुनाव के साथ खिलवाड़ करना
शुरू किया है इन्होंने जो जनतंत्र के साथ
खिलवाड़ कैमरे के अंदर पकड़े गए अगर यह
चंडीगढ़ जैसे छोटे से चुनाव में इतनी बड़ी
गड़बड़ कर सकते हैं तो जाहिर है लोकसभा के

और विधानसभा के चुनाव में तो पता नहीं
कितनी बड़ी गड़बड़ करते होंगे है कि नहीं
है पूरे देश के सामने आ गया किस तरह से
गड़बड़ करते हैं इनके लिए देश जरूरी नहीं

है इनके लिए जन तंत्र जरूरी नहीं है केवल
और केवल सत्ता के लिए यह किसी भी हद तक जा
सकते हैं सत्ता के लिए देश को भी बेच सकते
हैं सत्ता के लिए देश को भी दाम पर लगा

सकते हैं दोस्तों हम यह कभी नहीं होने
देंगे अपने देश के साथ खिलवाड़ किसी हालत
में नहीं होने देंगे अपने जनतंत्र के साथ
खिलवाड़ किसी हालत में नहीं होने

देंगे चंडीगढ़ के मेयर का चुनाव इस बात का
प्रमाण और सबूत है कि भारतीय जनता पार्टी
सत्ता काबिज करने के लिए कुछ भी करने को
तैयार है और फिर वह दिन दहाड़े चुनाव में
धांधली ही क्यों ना हो सीधी जीत हमारी थी

लेकिन पीठा सन अधिकारी अनिल मसी जिनके
भाजपा से प्रगड़ संबंध है उन्होंने हमारे
आठ वोटों को अवैध घोषित कर दिया और वीडियो
में साफ दिख रहा है कि कैसे वो उन वोट वोट
बैलेट पर लिख रहे हैं उस पर लाइन बना रहे

हैं और कैसे उसको झपट्टा मार के वो लेकर
चले गए जिससे विपक्ष के लोग उसको देख भी
ना पाए तो ऐसी क्या मजबूरी थी क्यों जरूरी
था कि भाजपा के मेयर के कैंडिडेट को येन

तेन प्रकरण जिताया जाए और कहां है वो
मीडिया की मंडली जो लोकतंत्र खतरे में है
पर नाक मो भूस कोड़ते हैं और कहते हैं ऐसा
आप लोग क्यों कहते हैं वो क्यों आंखें तरे

रते हैं क्या आप इस पर एक शो भी करिएगा कि
दिन दहाड़े आठ आठ वोटों को अवैध घोषित
किया जाता है उस पर लिखा जाता है उसके साथ
खिलवाड़ किया जा रहा है ये कैमरे में कैद
है क्या आप इस पर एक भी शो करने को तैयार

है और मैं आशा करती हूं कि इस देश की
न्यायपालिका सुप्त नहीं रहेगी इस पर एक्शन
लेगी क्योंकि असलियत यह है कि अगर यह होने
दिया गया तो इस देश का लोकतंत्र खत्म हो
चुका है इस देश में चुनावों का कोई मतलब

नहीं है इस देश में मताधिकार का कोई मतलब
नहीं है चंडीगढ़ मेयर का चुनाव मील का
पत्थर बन गया जिन सवालों से लगातार बचते
रहे वह आखिर में उन सवालों को लेकर

चंडीगढ़ में पकड़े गए कैमरे के सामने
बैलेट पेपर से कथित रूप से छेड़छाड़ और इस
पर बीजेपी का जश्न बनाना और कोर्ट का कह
देना कि लोकतंत्र की हत्या है काफी है
समझने वालों के लिए कि चुनाव जीतने के लिए

बीजेपी किस हद तक जा सकती है वह कांग्रेस
के पुराने दिनों की याद दिलाती है मगर आज
जो हो रहा है उसकी जवाबदेही स्वीकार नहीं
करती क्या पार्टी का शीर्ष नेतृत्व
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अपनी

जवाबदेही स्वीकार करे
प्रायश्चित करेगा कि उसने लोकतंत्र की
हत्या के बाद इसका जश्न मनाया जो गलत था
प्रधानमंत्री मोदी लोकतंत्र पर एक तरफा
भाषण देते हैं मगर ऐसे सवालों का जवाब कभी
नहीं देते उन्हें विपक्ष की लूट दिखाई

देती है मगर अपनी पार्टी की यह करतूत नजर
नहीं आती मदर ऑफ डेमोक्रेसी प्रधानमंत्री
ही बार-बार इस्तेमाल करते हैं अब उन्हीं
की पार्टी पर डेमोक्रेसी की हत्या के आरोप

हैं वह भी मेयर चुनाव के लिए कोर्ट से
पहले प्रधानमंत्री को ही एक्शन ले लेना
चाहिए था मगर सभी को पता है जनता धर्म के
नशे में डूबी पड़ी है उसे लोकतंत्र की

हत्या से क्या लेना देना क्यों अंकिल लोग
ट वाले अंकिल लोग बात मेरी सही है कि नहीं
बताइए नमस्कार

Leave a Comment