चीन से लड़ो, पत्रकारों से नहीं | Fight China, not Journalists - instathreads

चीन से लड़ो, पत्रकारों से नहीं | Fight China, not Journalists

नमस्कार  दिल्ली पुलिस ने आज केरला में
छापे मारे न्यूज़ क्लिक की पूर्व कर्मचारी
अनुषा पॉल का फोन और लैपटॉप जब्त कर लिया
गया अनुषा ने मीडिया से कहा कि उनसे
न्यूज़क्लिक और सीपीएम के साथ संबंधों पर

सवाल हुए उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने
नागरिकता कानून के विरोध में चले आंदोलन
और किसान आंदोलन को कवर किया था इन
आंदोलनों को दर्जनों मीडिया संस्थानों और
सैकड़ों रिपोर्टर ने कवर किया है क्या वे

सभी संदेह के दायरे में आने वाले हैं कहीं
यह किसी बड़ी कार्रवाई का छोटा सा ट्रेलर
तो नहीं है क्या पता न्यूज़ क्लिक के
बहाने पत्रकारिता पर हमले की सबसे बड़ी

कार्रवाई शुरू होने वाली हो और तमाम
पत्रकार जेल में डाल दिए जाएं अभी तक 40
से अधिक पत्रकारों के यहां छापेमारी की
खबरें आ चुकी हैं किसी-किसी रिपोर्ट में

यह संख्या 50 के पार बताई गई है इस हिसाब
से देखिए तो देश भर के पत्रकारों पर आतंकी
धारा यूएपीए और छापे का खतरा मंडरा रहा है
तेलंगाना राज्य वर्किंग पत्रकार संघ की

तरफ से पत्रकारों का यह मार्च भरोसा भी दे
रहा है कि पुलिस के दमन के खिलाफ पत्रकार
एक साथ आ रहे हैं मगर एक सवाल भी सामने से
आता दिख रहा है कि यह केवल पत्रकारों का

ही सवाल क्यों बना हुआ है क्या जनता पर इन
घटनाओं का कोई असर नहीं यह भी कड़वा सच ही
है कि जनता से जैसी प्रतिक्रिया की उम्मीद
थी वैसी नहीं आई या फिर जनता डर गई है उसे

भी जेल का दरवाजा दिखने लगा है वजह जो भी
हो पत्रकारों की लड़ाई उनके अकेले की
लड़ाई बनती जा रही है द वायर ने एक
रिपोर्ट प्रकाशित की है कि 2010 से लेकर
आज तक 16 पत्रकारों पर यूएपीए की धाराएं

लगाई गई हैं इनमें से सात अभी तक जेल में
हैं ऐसे मामले दश को चलते रहते हैं बहुत
कम लोगों को जमानत मिल पाती है न्यूज़
क्लिक पर छापे के दौरान पूछे गए सारे सवाल
किसी बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं

मुमकिन है है किसी विदेशी अखबार में किसी
के खिलाफ एक लाइन का प्लांट करवा दिया जाए
और कार्रवाई शुरू कर दी जाए अदानी के
खिलाफ भी तो विदेशी अखबारों में लगातार
छपा मगर कोई छापेमारी नहीं हुई अदानी के

पक्ष में गोदी मीडिया चुप्पी साथ गया मगर
न्यूज़ क्लिक को लेकर देशभक्त बनने लगा है
न्यूज़ क्लिक और उससे जुड़े पत्रकारों के
यहां छापेमारी को लेकर गोदी मीडिया एक

तरफा धारणा फैलाने में तमाम हदों को पार
कर चुका है जरूरी है कि मीडिया ट्रायल के
इस खेल को समझने के लिए 3 साल पहले चले एक
और मीडिया ट्रायल को आप देख लीजिए जिसने
रिया चक्रवर्ती को इंडिया का मोस्ट वांटेड

घोषित कर दिया था और देश के करोड़ों
दर्शकों को कई हफ्तों तक बेवकूफ बनाया गया
उस साल गोदी मीडिया के स्क्रीन पर
मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा आता था इंडिया

की मोस्ट वांटेड ड्रग्स ड्रामा और डेथ #
सच की फिक्सिंग अब तेरा क्या होगा रिया
ड्रग्स के खेल में गई रिया जेल में रिया
तूने क्या-क्या किया भाई शो वक अंदर अब
आएगा रिया का नंबर केवल लिखा नहीं होता था

रिया की तस्वीरें होती थी सैकड़ों कैमरे
रिया चक्रवर्ती का घर से लेकर कोर्ट तक और
थाने तक पीछा करते थे एक
ैटिंग चक्रवर्ती के मामले में चार शट भी
दायर नहीं हुई है न्यूयॉर्क टाइम्स में

न्यूज़ क्लिक के बारे में केवल दो लाइन
छपा है उसी के आधार पर इतनी बड़ी छापेमारी
चल पड़ी और पत्रकारों के लैपटॉप मोबाइल
फोन जब्त कर लिए गए वही गोदी मीडिया जो

दिन रात रिया चक्रवर्ती को हत्यारा साबित
करता रहा आज माफी मांग रहा है रिया
चक्रवर्ती से माफी मांगने वाली पत्रकार को
देखना चाहिए था कि उनके चैनल पर रिया

चक्रवर्ती को लेकर क्या-क्या कहा गया था
आज तक के कार्यक्रम के तीन अलग-अलग दिनों
के टाइटल का यहां जिक्र कर दे रहा हूं अब
तेरा क्या होगा रिया दूसरा कब तक खैर
मनाएगी रिया और तीसरा ड्रग्स के खेल में

गई रिया जेल में यह सभी अंजना ओम कश्यप के
शो के टाइटल हैं जबकि इंडिया टुडे की
प्रीति चौधरी अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती से
कहती हैं कि मुझे उम्मीद है कि मेरा चैनल

उनमें से एक नहीं था और मीडिया कम्युनिटी
की तरफ से माफी मांगती हैं माफी मांगने
वाली प्रीति चौधरी
की बात है कि वही रिया चक्रवर्ती आज तक के
इस कार्यक्रम में जाती हैं और अपना दर्द

साझा करती हैं गोदी मीडिया से कम से कम
यही पूछ लीजिए कि 3 साल में सीबीआई ने चार
शीट तक दायर नहीं की तब इन सभी चैनलों ने
रिया चक्रवर्ती और सीबीआई की नाकामी को

लेकर कितने प्रोग्राम किए ना चार शट दायर
हुई ना केस बंद हुआ इसलिए 2020 में सुशांत
सिंह राजपूत की मौत के बाद गोदी मीडिया के
मीडिया ट्रायल को यहां याद करने की जरूरत

है है इसी तरह अब यह चैनल पत्रकारों को
आतंकवादी साबित करने में लग गए हैं इसलिए
एफआईआर को ठीक से पढ़ा जाना चाहिए इस
एफआईआर को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे
हैं इन सवालों पर आने से पहले याद रखिएगा

कि पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर यह एफआईआर
सार्वजनिक किया है इसके लिए न्यूज़क्लिक
को ही कोर्ट जाना पड़ा दिल्ली पुलिस इस
मांग का विरोध कर रही थी एफआईआर में एक

आरोप यह भी है कि न्यूज़क्लिक ने चीन की
टेलीकॉम कंपनी जा और
vi9 नहीं है तो न्यूज़ क्लिक का पैसा लेना
कैसे आतंकवाद हो गया आतंकवाद की कौन सी

कार्रवाई घटी है या साजिश हुई है पुलिस को
यह भी स्पष्ट करना चाहिए कांग्रेस महासचिव
जयराम रमेश ने कहा है कि दिल्ली पुलिस का
दावा है कि जिन चीनी कंपनियों ने पीएम

केयर फंड में पैसा दिया है उन पर भारत को
अस्थिर करने का आरोप है अगर ऐसा है तो
पीएम केयर फंड के चेयरमैन यानी
प्रधानमंत्री पर केस क्यों नहीं हुआ

अप्रैल 2022 में ईडी ने
मोहित तृणमूल सांसद ने कहा था कि वही
कंपनी है जिसने पीएम केयर फंड में 10
करोड़ का दान दिया
x और के क्रम में एफआईआर में गौतम भाटिया
का भी नाम आ गया मीडिया ने लिखा है कि

संविधान पर लिखने वाले वकील गौतम भाटिया
ही हैं या कोई और हैं पता नहीं हिंदू
अखबार ने गौतम भाटिया से संपर्क करने का
प्रयास किया मगर उनकी प्रतिक्रिया नहीं
मिली इस पत्रकार एमके वेणु ने ट्वीट किया

है कि x और का नाम आतंक के मामले में
साजिशकर्ता के रूप में आया है जबकि यह
कंपनियां भारत में सालाना 6000 करोड़ के
फोन बेचती हैं और इनका मार्केटिंग और

विज्ञापन का बजट 2000 करोड़ रपए का है
वेणु का सवाल है कि दोनों कैसे हो सकता है
उस करोड़ के आसपास है और यह दो
कंपनियां बहुत जानी मानी कंपनियां है और

पूरी तरह हिंदुस्तान में रजिस्टर्ड है और
हिंदुस्तान में कई सालों से काम कर रही है
और और बहुत बड़े स्केल में य यह क यह दो
कंपनियां इनकी एडवरटाइजिंग बजट और

मार्केटिंग बजट आप देखेंगे तो पिछले पाच
सालों में इन्होंने कम से कम 100 हज करोड़
इनका एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग का खर्चा
है और ज्यादातर इनकी एडवरटाइजिंग मेन

स्ट्रीम मीडिया में जाती है जिसे आप कुछ
इस मेन स्ट्रीम मीडिया के तहत आप गोदी
मीडिया भी कह सकते हैं और और
इनके इनको फंडिंग ज्यादातर एडवरटाइजिंग के

जरिए मेन स्ट्रीम मीडिया में इनकी ज्यादा
फंडिंग जाती है मगर दिल्ली पुलिस ने केस
यह बनाया है कि ये ये न्यूज क्लिक की मदद
कर रहे थे और किसी तरह न्यूज़ क्लिक को

चाइनीज मनी और और देश
विरोधी हिंदुस्तान के
विरोध प्रोपेगेंडा में मदद कर रहे हैं और
इस इस पर कोई अभी तथ्य सामने नहीं आई है
और केवल एफआईआर में यह बात कही गई है तो
तो यह आश्चर्यजनक बात यह है कि अभी तक

दिल्ली पुलिस ने इन दो कंपनियों में
एग्जीक्यूटिव एंप्लॉई को अभी तक अरेस्ट
नहीं किया है या पूछताछ नहीं करी है और
दूसरा आईपीएल जो सीजन जो शुरू हुआ कोविड
के बाद उसमें सबसे ज्यादा पैसा व ने लगाया

2022 और 23 में और इसकी खबरें भी छपी
अखबारों में और इस इस बात को जो बीसीसीआई
के आला जो अफसर है उन्होंने इस इस बात
इसको बड़ा वेलकम भी करा है कि किस तरह
हजार करोड़ से ज्यादा स्पनर शिप आई थी

2022 और 23 में और इसमें टाटा ग्रुप के
अलावा व का सबसे बड़ा योगदान है तो तो
यह बात बिल्कुल जो कांट्रडिक्शन जो आपके
सामने हमारे सामने यह दिख रहा है कि एक
तरफ दिल्ली पुलिस एफआईआर में इनका नाम दे

रही है कि ये देश विरोधी काम कर रहे हैं
चाइना के पक्ष में और दूसरी तरफ इनका पूरा
एक हिंदुस्तान के जो जो मीडिया सिस्टम में
एड में आईपीएल जो क्रिकेट के सिस्टम में

फंडिंग में इनका पूरा योगदान है अगर कोई
कंपनी वह भी चीन की आतंक के मामले में
साजिश करती हुई पकड़ी जाए तो उसके साथ
क्या करना चाहिए कायदे से अभी तक तो उन

कंपनियों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए था
अभी तक इनकी फैक्ट्रियों पर ताला लग जाना
चाहिए था मगर ऐसा नहीं हुआ है इसकी जगह पर
कार्टून बनाने वाले और न्यूज क्लिक की
वेबसाइट के लिए एक या दो लेख लिखने वाले

पत्रकारों के यहां पुलिस भेज दी गई इस
पैमाने से तो दिल्ली पुलिस को
हुई प्रधानमंत्री मोदी को बताना चाहिए कि
क्या उन्होंने आतंक फैलाने की साजिश को

लेकर चीन के राष्ट्रपति से कुछ कहा था
क्या भारत चीन के साथ वही करने जा रहा है
जो पाकिस्तान के साथ कर चुका है दुनिया के
मंच पर क्या भारत कहेगा कि चीन आतंक फैला
रहा है एक आतंकवादी देश है यह जुलाई 2022

की खबर है जो कई जगह छपी है
मजबूत करने के लिए भारत में 475 करोड़ का
निवेश करेगी इसी अप्रैल 2023 की खबर है कि
vi5 100 करोड़ है इसमें ग्रेटर नोएडा में
1100 करोड़ की एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट

भी शामिल है जो 2024 से काम करना शुरू कर
देगी जिन कंपनियों से पैसा लेने पर
पत्रकारों के खिलाफ आतंक और देश के खिलाफ
साजिश का संदेह किया जा रहा है उन कंपनी
यो को भारत में उत्पादन से लेकर विज्ञापन

तक की इजाजत कैसे दी जा सकती है एफआईआर
में यह भी आरोप लगाया गया है कि अप्रैल
2018 से न्यूज़ क्लिक को अवैध रास्तों से
करोड़ों रुपए दिए गए कितने करोड़ मिले हैं

इसका सही ब्योरा हमें किसी भी रिपोर्ट में
नहीं मिला है एफआईआर में यह भी लिखा है कि
इन पैसों के बदले न्यूज़क्लिक ने पेड
न्यूज़ छापा पुलिस को उदाहरण देना चाहिए
कि वह पेड न्यूज़ कौन सा है किस तरह से

चीन के पक्ष में खबरें लिखी गई थी थी
एफआईआर में लिखा है कि शंगाई के निवासी
नेविल रॉय सिंघम कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ
चाइना के सक्रिय सदस्य हैं उसने कई तरह की

कंपनियों के जरिए यह पैसा दिया है
न्यूज़क्लिक ने जवाब दिया है कि सारे ही
आरोप बोगस हैं ईडी दिल्ली पुलिस की आर्थिक
अपराध शाखा और आयकर विभाग ने पहले भी यही

सब आरोप लगाए हैं पिछले तीन वर्षों में
इनमें से कोई भी जांच चार्जशीट का चेहरा
नहीं देख सकी बल्कि इन मामलों में सुप्रीम
कोर्ट ने गिरफ्तार करने पर रोक लगा दी इसी

का काट निकालने के लिए नया मामला दर्ज
किया गया है यह न्यूज़ क्लिक की सफाई है
आगे न्यूज़ क्लिक ने कहा है कि उसने चीन
की किसी भी कंपनी से पैसा नहीं लिया और ना

ही चीन से निर्देश मिला है कभी भी हिंसा
को बढ़ावा देने का काम नहीं किया और किसी
भी तरह से कोई अवैध काम नहीं किया
न्यूज़क्लिक के खिलाफ 3 साल से छापेमारी
और जांच चल रही है अभी तक पुलिस या किसी

भी जांच एजेंसी के पास ठोस सबूत आ जाने
चाहिए थे
बब साइट को पैसा देने के लिए कई सारी शेल

कंपनियां बनाई जा रही थी तब तो पुलिस को
बताना चाहिए कि कितना पैसा आया न्यूज
क्लिक के कार्यक्रमों में ऐसा क्या था
जिससे पुलिस को इतना गहरा संदेह हो रहा है
जाहिर है इन सवालों को लेकर दिल्ली पुलिस

को और विस्तार से जवाब देना चाहिए इंडियन
एक्सप्रेस की रिपोर्ट में
थन में कितने वीडियो बनाए अब यह सवाल
संपादक से क्या पूछे पुलिस ही बता दे वही
आजकल संपादक बन गई है द वायर के ही

सिद्धार्थ वर्धराजन ने कुछ सवाल और उठाए
हैं सवाल नेविल रॉय सिंघम को लेकर है
जिनके फंड को लेकर न्यूज क्लिप पर गंभीर
आरोप लगे हैं सिद्धार्थ ने पूछा है कि

क्या भारत सरकार का यह आधिकारिक मत है कि
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना और चीनी सरकार
भारत में आतंकी कार्रवाइयों को पैसे दे
रही हैं क्या भारत सरकार ने अमेरिकी सरकार

से नेविल रॉय सिंघम पर कारवाई करने या
भारत लाने की मांग की है सिंघम अमेरिका के
नागरिक हैं क्या भारत सरकार ने फाइनेंशियल
एक्शन टास्क फोर्स को इत्तला दी है कि

नेविल रॉय सिंघम और उनकी कंपनियां आतंक की
फंडिंग में शामिल हैं ताकि सभी देश इसके
खिलाफ कार्रवाई करें सतर्क हो जाएं क्या
भारत सरकार इंटरपोल से सिंघम के खिलाफ रेड

कॉर्नर नोटिस जारी करने की मांग करने का
इरादा रखती है फाइनेंशियल एक्शन टास्क
फोर्स फाटा का मुख्यालय पेरिस में है अगर
कोई व्यक्ति या संस्था आतंकी गतिविधियों

में शामिल है तो उसके बारे में यहां सूचना
देनी होती है फिर इसके सदस्य देशों को
जानकारी मिल जाती है और इस पर बैन लग जाता
है सिद्धार्थ वर्धराजन के सवाल यह भी है
कि अगर न्यूज क्लिक ने चीन से पैसा लिया

है और उसके खिलाफ जांच हो रही है तो क्या
उन सभी कंपनियों के खिलाफ जांच होगी
जिनमें चीन की कंपनियों ने या चीन की
संस्थाओं ने पिछले 10 वर्षों में निवेश
किया है हमने पहले भी केंद्रीय मंत्री

राजीव चंद्रशेखर का यह बयान आपको दिखाया
है केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर का
जुलाई 2023 का यह बयान है कि भारत चीन से
आने वाले निवेश का स्वागत करता है जब तक
कानूनों का पालन होता है सीमा तनाव के

बावजूद चीन से आयात बढ़ रहा है निवेश का
मंत्री स्वागत कर रहे हैं क्या न्यूज़
क्लिक की घटना के बाद राजीव चंद्रशेखर
अपनी राय बदलना चाहेंगे कि चीन से निवेश

का भारत अब स्वागत नहीं करेगा क्योंकि चीन
भारत में आतंकी गतिविधियों को प्रायोजित
कर रहा है राजीव चंद्रशेखर ने इसी जुलाई
महीने में राज्यसभा में यह भी बताया कि
चीनी मोबाइल कंपनियां

से लेकर क्रिकेट मैच को प्रायोजित भी कर
रही हैं उस पर कोई रोक नहीं और पत्रकारों
से पूछा जा रहा है कि आपने किसान आंदोलन
कवर किया दिल्ली दंगों को कवर किया है
सिद्धार्थ वर्धराजन के सवाल काफी

महत्त्वपूर्ण है सारा विवाद इस बात को
लेकर है कि नेविल रॉय सिंघम को अमेरिकी
नागरिक कहा जाता है तो क्या अमेरिका को
लिखा गया है कि उसे आतंकी घोषित कर दे

भारत ही कब नेविल रॉय सिंघम को आतंकी
घोषित करेगा यही नहीं एफआईआर में सिंघम को
शंघाई का निवासी लिखा गया है तब फिर क्या
चीन की सरकार को लिखा जाएगा कि इसके खिलाफ
कार्रवाई हो जिस तरह से कनाडा से कहा गया

है क्या
छपी है इसके पूर्व संपादक एन राम ने इस
खबर को ट्वीट भी किया है रिपोर्ट थोड़ी
जटिल है लेकिन जो हमें समझ में आया उसे
बता रहे हैं आप भी इसे ध्यान से सुनिए

अमेरिका में रहने वाले एक वकील जेसन फेचर
ने हिंदू को वर्ल्ड वाइड मीडिया
होल्डिंग्स की तरफ से पीपीके न्यूज़ क्लिक

लेकर सफाई दी है जेसन फेचर ने नेविल रॉय
सिंघम की कंपनी थॉट वर्क्स में कई साल काम
किया और जब यह कंपनी बिग गई तब वहां से

इस्तीफा दे दिया जेसन फेचर और सिंघम मिलकर
इस पैसे को निवेश करने की योजना बनाने लगे
इसके लिए इन्होंने पीपल सपोर्ट फाउंडेशन

लिमिटेड पीएसएफ नाम की एक संस्था बनाई
पीएसएफ को मिलने वाला सारा पैसा थॉट
वर्क्स नाम की कंपनी की बिक्री से आया था
पीएसएफ में किसी सरकार का पैसा शामिल नहीं

है यह वह सब लिखते हैं यही पीएसएफ वर्ल्ड
वाइड मीडिया होल्डिंग्स की मालिक है फेचर
ने आगे अपने पत्र में लिखा है कि
डब्ल्यूएमएच ने दुनिया भर में ऐसे मीडिया

संस्थानों में निवेश किया है जो जना
आधारित पत्रकारिता करते हैं यह संस्थान
पीएसएफ के मिशन से मेल खाते हैं और पीएसएफ
अपने निवेश पर इनसे रिटर्न मांगता है 2017
के आखिर में डब्ल्यूएमएच ने तय किया कि वे

न्यूज़ क्लिक में निवेश करना चाहते हैं
मार्च 2018 में निवेश की प्रक्रिया पूरी
होती है फेचर लिखते हैं कि उन्होंने
न्यूज़क्लिक की कई शेयर होल्डर मीटिंग में
हिस्सा भी लिया मगर उन्होंने या उनकी

कंपनी ने कभी भी न्यूज़क्लिक की
पत्रकारिता पर किसी भी तरक का प्रभाव
डालने की कोशिश नहीं की फेचर ने यह भी
बताया कि वे प्रबीर पुरकायस्था
प्रबीर थॉट वर्क्स में काम कर चुके थे

जहां पर फेचर भी कई साल से काम करते रहे
अब आप बताइए अगर डब्ल्यूएमएच ने दुनिया के
अन्य मीडिया संस्थानों में निवेश किया है
तो उन संस्थानों के नाम क्या हैं क्या वे
संस्थान भी अपनी रिपोर्ट में अपने-अपने
देश में आतंकी कार्रवाई को बढ़ावा दे रहे

थे चीन का प्रोपेगेंडा चला रहे थे या इन
सभी में अकेला ऐसा काम केवल कथित रूप से
न्यूज क्लिक ही कर रहा था निवेश के
संबंधों की बात तो स्थापित होती है इस

पत्र से मगर इस निवेश का संबंध किसी
प्रकार की आतंकी गतिविधि या साजिश से है
इस वक्त स्थापित नहीं हो रहा यह काम पुलिस
को करना है लेकिन ऐसा होता तो यह कंपनी
इतना खुलकर निवेश को स्वीकार नहीं करती

फेचर ने लिखा है कि 2021 में न्यूज़ क्लिक
पर रेड पड़ने के बाद भारतीय जांच
एजेंसियों को डब्ल्यूएमएच के निवेश के
स्त्रोत की जानकारी दे दी गई इसके बाद भी

अफवाहें फैलाई जा रही हैं प्रबीर और अमित
चक्रवर्ती के गिरफ्तार हो जाने के बाद और
इस भ्रामक जानकारी को दूर करने के लिए
उन्होंने हिंदू में यह लेख लिखा है जेसन
फेचर ने न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख के बारे

में लिखा है कि बदनाम करने की मंशा से
आर्टिकल लिखा गया उन्होंने अखबार के
रिपोर्टर को जवाब भी दिया कि पीएसएफ को
कभी किसी दूसरे देश से फंड नहीं मिला ना
किसी व्यक्ति से ना किसी राजनीतिक दल से

ना सरकार से वे लिखते हैं कि न्यूयॉर्क
टाइम्स ने उनके जवाब को अपनी रिपोर्ट में
शामिल नहीं किया फेचर ने कहा कि अखबार ने
यह पाठकों पर छोड़ दिया कि वे अनुमान

लगाते रहे कि पीएसएफ और रॉय सिंघम को चीन
से पैसा मिला है जबकि यह पैसा सिंघम की
पुरानी कंपनी थॉट वर्क्स का है उन्होंने
न्यूयॉर्क टाइम्स पर आरोप लगाया है कि
उनकी भ्रामक रिपोर्टिंग से निर्दोष

पत्रकारों की गिरफ्तारी हुई है दिल्ली
पुलिस अपने एफआईआर में कहती है कि सिंघम
ने शेल कंपनी बनाकर न्यूज क्लिक में निवेश
किया जबकि निवेश करने वाली कंपनी कहती है

कि उसने अपने पैसे से निवेश किया है और
जांच एजेंसियों को पूरी जानकारी दी गई है
यह भी कहा कि उनकी कंपनी में किसी सरकार
राजनीतिक दल या व्यक्ति का पैसा नहीं है

वे जहां निवेश करते हैं वहां के कानून का
पालन करते हैं मगर आज जो दमन हो रहा है
उससे यह सवाल उठता है कि भारतीय कानून का
पालन करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए
क्या भारत एक सुरक्षित जगह है इस नए पत्र

पर दिल्ली पुलिस के जवाब का इंतजार है
सरकार आतंक के नाम पर इन कंपनियों के
खिलाफ क्या कदम उठाती है यह देखना होगा
क्या गोदी मीडिया चीन की

काता के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है जिसके
लिए मुंबई प्रेस क्लब के पत्रकार मार्च कर
रहे हैं कैंडल लाइट मार्च निकाल रहे हैं
यह सवाल केवल आज की पत्रकारिता को बचाने
का नहीं है बल्कि आने वाले कल के लिए

तैयार किए जा रहे पत्रकारों के भविष्य को
बचाने का भी है दिल्ली पुलिस की एफआईआर और
पूछताछ के दौरान सवालों को देखकर लगता है
पत्रकारिता के तमाम संस्थानों में जो

छात्र पढ़ रहे हैं वे भविष्य के कैदी बनने
वाले हैं किस बात के लिए उन्हें जेल में
डाल दिया जाएगा किसी को पता नहीं करीब 50
पत्रकारों के घर छापे पड़े मोबाइल से लेकर

लैपटॉप की जब्ती हो गई अखबार से लेकर टीवी
में काम कर रहे हजारों पत्रकारों को तो
डरा ही दिया गया पत्रकारिता की पढ़ाई करने
वाले हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर

असुरक्षित महसूस करने लग गए होंगे
पत्रकारिता में आकर पार्टी के लिए काम
करने से अच्छा है उन सभी को पार्टी में
जाकर काम करना चाहिए कम से कम पढ़ाई के
नाम पर उनके 3 साल और फीस बर्बाद होने से

बच जाएगी इस पूरी बहस ने पत्रकारों की
तमाम रिपोर्ट को इस कसौटी पर ला दिया है
कि वे राष्ट्र हित में है या नहीं किसी
रिपोर्ट के राष्ट्र हित में होने या नहीं

होने की परिभाषा या पैमाना कौन तय करेगा
एफआईआर में लिखा गया है कि न्यूस क्लिक ने
एंटी नेशनल ताकतों के साथ काम किया एंटी
नेशनल की परिभाषा क्या है दिसंबर 2021 में

सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सवाल के जवाब
में गृह राज्य मंत्री नित्या राय ने
लोकसभा में कहा इसकी कोई कानूनी परिभाषा
नहीं है सरकार के पास परिभाषा नहीं मगर
पत्रकारों की रिपोर्ट को एंटी नेशनल बताकर

उनसे पूछा जा रहा है यह वाकई खतरनाक है
आपके किसी लेख में चीन को लेकर लिखी गई
कोई पंक्ति उसके पक्ष में नजर आए तो इसकी

व्याख्या का अधिकार पुलिस को देना खतरे से
खाली नहीं आपको सरकार के ही पक्ष के ढेरों
संपादकीय मिल जाएंगे जिसमें चीन से दोस्ती
की वकालत की गई होगी या नए सिरे से चीन को

देखने की वकालत होगी क्या यह सब भी कभी
अपराध का कारण बन सकते हैं 15 जून 2022 के
इंडियन एक्सप्रेस में बीजेपी नेता राम
माधव के बयान को पुलिस किस नजरिए से पढ़ना
चाहेगी राम माधव कहते हैं कि भारत और चीन
सीमा विवाद के मामले में यह नजरिया नहीं

काम करेगा कि मैं अपने जीवन काल में इसे
सुलझा दूंगा लंबे समय से चले आ रहे इस
विवाद के समाधान को जल्दी चीन जैसे सांकृत
राष्ट्र के मामले में काम नहीं आएगी राम

माधव ने यह भी कहा कि किसी को पता नहीं कि
इसका समाधान कौन करेगा फिर वे उदाहरण देते
हैं कि रूस और चीन के बीच सीमा विवाद को
निपटाने का श्रेय रूस के राष्ट्रपति बोरिस

लसन को जाता है जो पूरी तरह से शराबी थे
किसी ने सोचा था कि बोरिस लसन सुलझा देंगे
अब पुलिस इन पंक्तियों को इस तरह से भी

पड़ सकती है कि आपने चीन के दो टुकड़े कर
देंगे टाइप का भाषण नहीं दिया ललकारा नहीं
आप एक तरह से हार मान रहे हैं कि चीन से
विवाद अपने जीवन काल में नहीं सुलझा

सकेंगे इस तरह आप भारत की सेना का मनोबल
गिरा रहे हैं पुलिस यह भी कह सकती है कि
राम माधव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की
क्षमता पर शक कर रहे हैं क्योंकि
प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों राष्ट्र का

पर्याय बन चुके हैं इसलिए राष्ट्र की
क्षमता पर शक कर रहे हैं क्या यह सवाल
थाने में पूछा जाएगा या राम माधव के लेख
के जवाब में एक और लेख लिखकर दिया जाएगा
यही नहीं हमने कई बार बताया है कि 21

फरवरी 2023 को एनई की स्मिता प्रकाश से
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चीन
बड़ी अर्थव्यवस्था है मुझे क्या करना

चाहिए एक छोटी अर्थव्यवस्था के रूप में
क्या मैं बड़ी अर्थव्यवस्था से युद्ध मोल
ले लू यह प्रतिक्रिया या जवाब का सवाल
नहीं है यह तो कॉमन सेंस का सवाल है
जयशंकर कहते हैं क्या उनका यह बयान चीन

समर्थक माना जाएगा या एंटी इंडिया माना
जाएगा कॉमन सेंस का सवाल है इस वक्त तमाम
समस्याओं से घिरा है उन पर बात ना हो
इसलिए उनकी रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों

को ही राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल बना दिया
गया है

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