चुनाव से पहले किसान आंदोलन ने सरकार की बैंड बजा दी..विज्ञापन में गिड़गिड़ाई सरकार | - instathreads

चुनाव से पहले किसान आंदोलन ने सरकार की बैंड बजा दी..विज्ञापन में गिड़गिड़ाई सरकार |

नमस्कार स्वागत है

विश्लेषण वित वानखड़े एक तरफ
सरकार आंदोलनकारियों को खासकर किसान
आंदोलन की बात कर रहा हूं लगातार उनका दमन
कर रही है उन पर आंसू ग्यास ड्रोन द्वारा
दलवा जा रहे हैं पूरा बाड़ा बंदी कर दी है
दूसरी

ओर
लगातार हाई कोर्ट ने लताड़ लगाने के बाद
भी रास्ते खुले नहीं
हैं किसान इंतजार कर रहे कि और कितनी
प्रताड़ना सरकार कर सकती

है कृषि मंत्री मुंडा जी कहते हैं कि हम
स्वयं मिलने गए थे बातचीत से ही हल
निकालेगा समाधान कुछ चीजों का हो रहा है
कुछ चीजों के लिए टाइम
लगेगा आज फिर

बैठक होने की बात हो रही
है और यह सब एक तरफ चलते हुए
ट्रोल आर्मी इस आंदोलन को
खालिस्तानी और अलग-अलग नामों से बोलते हुए
फ्रॉड
वीडियो लोड कर रहे

हैं बड़े-बड़े सरकारी संत श्री श्री
रविशंकर
जैसे मुट्ठी भर किसान देश को क्यों परेशान
कर रहे इसलिए व चिंतित
है वो योगा सिखाने में या मेडिटेशन सिखाने
में क्या चार्ज लेते यदि य किसानों को पता

पड़ा तो किसान सर पर हाथ रखेगा कि क्यों
हम खेती कर रहे हैं हमें तो यही करना
चाहिए था जो बाबा कर रहा
है इसी के बीच एक विज्ञापन
आया यह भारत सरकार का

विज्ञापन देखिए फुल प्लेन विपन और यह
विज्ञापन कहता है कि अब आंदोलन क्यों
किसान
सोचे एक तरफ सरकार आंदोलन कायों से बात
करने की बात कर रही है उनके समस्याओं का

समाधान करने की बात कर रही है और जब दूसरी
तरफ विज्ञापन दे रही कि आंदोलन क्यों
किसान
सोचे किसान क्या सोचे सरकार अपना 10 साल
का लेखा जोखा दे रही है तीनों किसान कानून

 

रद्द किए गए यह सरकार ने एहसान नहीं किया
700 किसानों ने शहादत दी 13 महीने
किसान जी जान लेकर दिल्ली के बॉर्डर पर
तड़ा रहा उत्तर प्रदेश के चुनाव नहीं आते

तो ये शायद दो साल तक खींच जाता या 2024
के चुनाव तक खींच
जाता चुनाव आते से सरकार ने तीन कानून
वापस
लिए किसानों से गेहूं धान कपास को केंद्र

सरकार शत प्रतिशत पैसे देकर खरीदती है यह
दूसरा झूठ महाराष्ट्र में किसान कपास में
आग लगा रहे हैं क्योंकि एमएसपी पर खरीदी
नहीं जा रही है यही हालत धान की है बंगाल
में 000 करोड़ रुपए सरकार ने रोके जिसके
द्वारा बंगाल की सरकार किसान का धान

खरीदती कारण बताया कि राशन के दुकान पर
प्रधानमंत्री का फोटो नहीं
है यह सरकार का दूसरा झूठ है पिछले 10
वर्षों में कृषि बजट में पाच गुना वृद्धि
हुई पैसे की कीमत भी कम हुई बजट बढ़ गया

सभी जगह वृद्धि हुई बाकी जगह जितने अनुपात
में वृद्धि हुई उतने कृषि की हुई क्या यह
सवाल
है उर्वरक उत्पादन व सब्सिडी में बढ़ोतरी
कोटेड यूरिया उत्पादन बढ़े यूरिया नहीं

जाता कहीं और अब सीधा पहुंचता किसान के
पास यूरिया के लिए किसान कैसा प्रताड़ित
होता है यह किसान जानते हैं य भी भ्रामक
है पीएम किसान सन्मान निधि के तहत किसान

को सालाना मिल रहे हैं
6000 दो द आ लाख करोड़ की सन्मान निधि
आवंटित यह ढाई एकड़ से नीचे की जमीन जिसको
है उसको उसके लिए है लेकिन य सन्मान निधि
नहीं य भीक है 00 महीने में तो परिवार चाय
भी नहीं पी सकता प्रधानमंत्री चाय बेचते

थे व जानते चाय की कीमत क्या
है प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना को
किसानों को वृद्धावस्था में मिल रही
सामाजिक

सुरक्षा बाकी जगह वृद्धावस्था की सुरक्षा
एं रेलवे में मिलने वाली सारी हटा के प्र
आप इधर दे रहे हैं प्रधानमंत्री फसल बीमा
योजना से फसल नुकसान का कवर का दायरा बढ़ा
एक दश 54 लाख करोड़ की बीमा राशि

टेक्नोलॉजी के उपयोग से त्वरित पास होने
लगे बीमे यह भी कोसला है महाराष्ट्र में
बीम के सेटलमेंट के लिए लगातार राज्य
सरकार बिना कंपनियों की लिख रही है और जब
भीमा सेटलमेंट नहीं होता और कहीं होता भी

है तो ढ़ ढ़ रुपए के भी चेक आए है यह भी
वस्तु स्थिति है देर में देश भर में
1389 मंडिया ई नाम पर रजिस्टर जिससे
करोड़ों किसान अपनी फसल मन पसंद मंडी में
ऑनलाइन बेचने लगे हैं भाई साहब

इलेक्ट्रिसिटी हो और नेट अवेलेबिलिटी हो
नेट का स्पीड ठीक हो तो धंधा करें या
शहरों में नेट का स्पीड नहीं आ रहा है तो
गांव में क्या आता
होगा 22 फसलों के एमएसपी में ऐतिहासिक

वृद्धि आजादी के पहली बार लागत मूल्यों पर
कम से कम 50 प्र रिटर्न की गारंटी
सुनिश्चित करते हुए 22 फसलों की एमएससी ब
एमएसपी बढ़ाई सारा मसला एमएसपी पर है इस
पर विस्तार से बात करूंगा और नमो ड्रोन

दीदी योजना से ड्रोन की खरीददारी पर 80
प्र राहत
य जो ड्रोन है इसका उपयोग वाकई खेती के
लिए किया जाता है कि किसानों को दमन के
लिए यह समझने के परे हैं महिलाओं को

स्थानिक कृषि आपूर्ति श्रंखला में
साझेदारी और भारत पुत्र को भारत रत्न
अन्नदाता का सम्मान करते हुए किसान पुत्र
चौधरी चरण सिंह और हरित क्रांति के पेर
डॉक्टर स्वामीनाथन को भारतर रत्न देखिए

जिन स्वामीनाथन को भारत रत्न दिया जा गया
उन स्वामीनाथन की रिपोर्ट ही सुना ऐसी
चर्चा है कि कृषि मंत्रालय ने अपने
वेबसाइट से हटा दी दूसरी
और
हरित किसान पुत्र जिसको आप कहते
हैं चौधरी चरण सिंह को

आपने भारत रत्न इसलिए दिया क्योंकि आपके
आपको उसके पोते का साथ चाहिए था 2024 के
चुनाव के लिए जयन चौधरी जो आप साथ ले आए
इंडिया गठबंधन छोड़ के वो आपके साथ गए
उन्होंने कहा कि भाई भारत रत्न देने के
पास तो मेरे पास कोई शब्द नहीं है 22 फच

लो कि एमएसपी सारा मसला एमएसपी प फसा हुआ
है जब आप एमएसपी दे रहे हैं तो फिर एमएसपी
की गारंटी देने में क्या प्रॉब्लम है जब
सारी चीजों की गारंटी आप देते हैं तो
गारंटी देने में आपको क्या प्रॉब्लम है

सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही है कि आप गारंटी
नहीं देते एमएसपी है लेकिन क्या एमएसपी पे
किसान बेच पाएगा अक्सर नहीं एमएसपी को यदि
कानून बनाया जाए तो फिर एमएसपी से नीचे जो
भी किसान का उपज खरीदेगा वो गुना होगा गैर

कानूनी होगा और उसे सजा
होग किसान यह चाहता है कि उसको एमएसपी की
गारंटी मिले आप एमएसपी अनाउंस करते हैं और
महाराष्ट्र में मैंने कहा एमएसपी प जब

कपास नहीं खरीदा जा रहा है तो लोग कपास
में आग लगा रहे हैं सवाल ये है एमएसपी 50
प्र ज्यादा य आपने किसने तय
किया सीटू प्लस 50 पर
यह स्वामीनाथन जी की रिकमेंडेशन

थी क्या इनपुट कॉस्ट आप पुराने रेट से ले
रहे कि वर्तमान रेट से ले रहे वर्तमान रेट
से किसान का खाद महंगा हो गया क्योंकि
ट्रांसपोर्ट चार्जेस महंगे हो गए बीज
महंगा हो गया इलेक्ट्रिसिटी के रेट महंगे

हो गए क्योंकि अडानी जी कोयला इंपोर्ट
महंगा करते हैं कई जगह अनी जी का ही बिजली
चल रही
है तो बिजली महंगी हो जाती है पा मिलता
नहीं पानी महंगा हो गया
है ऐसे

में इनपुट कॉस्ट त कन
करेगा दूसरी बात जब आप बेरोजगारी का
आंकड़ा देते हैं तो खेतों में काम करने
वाले लोगों को भी आप रोजगार मानते हैं
किसान जो अपने खेत में काम करता है रोजगार
मानते हैं क्योंकि वह किसान अपनी उपज बेच

के कमाता है तो रोजगार
है तो फिर क्या वो किसान की मेहनत और उसका
रोजगार
आप उस कॉस्टिंग में जोड़ते

हैं यह भी अहम है और जोड़ते हैं तो क्या
मंद्र का के रेट से जोड़ते हैं यह भी
देखना है कुल मिलाकर एमएसपी आज भी घाटे का
सौदा है लेकिन घाटा कम होता है यही एक
किसान की किस्मत में एक रोशनी है कि घाटा

कम हुआ सरकार ने हमारा घाटा कम करवाया
घाटे में तो
किसान अब स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने
में सभी राजनीतिक दलों को नानी क्यों याद
आ जाती है

क्योंकि स्वामीनाथन जी ने जो रिपोर्ट बनाई
थी नेशनल कमीशन फॉर फार्मर्स एन सीएफ 18
नवंबर 2014 चर में बना था जिसकी अध्यक्षता
एम एस स्वामीनाथन ने की
थी अक्टूबर 4 2006 को दो साल के बाद

उन्होंने फाइनल ड्राफ्ट अपना सबमिट
किया उसके मोटे मोटे तौर पर यदि मैं बात
करूं कि किसानों का जमीन पे पानी पे बायो
रिवर रिसोर्सेस
पे क्रेडिट यानी कर्ज

उसको पैसा मिले फाइनेंस की व्यवस्था हो
उसका इंश्योरेंस हो टेक्नोलॉजी में
अपग्रेड हो मार्केट के नए जो टूल्स है वह
उसके साथ हो यह स्वामीनाथन जी का एक सपना
था उन्होंने कहा कि सीलिंग में जो लैंड
सरकार के पास आई है जो वेस्टलैंड है उसका

डिस्ट्रीब्यूशन करके जो अनइवन लैंड
होल्डिंग है उसको ठीक किया जा सकता
है उन्होंने दूसरी बात कही थी
कि प्रोटेक्शन टू द
लैंड जो खेती योग्य जमीन है

उसको कार्पोरेट सेक्टर या नॉन एग्रीकल्चर
यूज के लिए उपयोग में ना लाया जाए उसको
रोका जाए ताकि एग्रीकल्चर के तहत जमीन बनी
रहे खेती की जमीन बनी
रहे उन्होंने कहा कि नेशनल लैंड यूज

एडवाइजरी सर्विसेस एस्टेब्लिश
करिए यदि कोई जमीन किसी कार्पोरेट सेक्टर
या किसी जरूरी काम को देनी ही
पड़ी तो फिर उसमें वो
जो डिपार्टमेंट है नेशनल लैंड यूज

एडवर्सरी सर्विसेस वो वहां के इकोलॉजी को
देखेगा मेट्रोलॉजी को
देखेगा वहां के मार्केट और फूड को देखेगा
लोकेशन देखेगा सीजन स्पेसिफिक व क्या खेती
होती है यह देखेगा और यह सारा अवलोकन करके

वो परमिशन देगा यह कोई नहीं चाहता
कार्पोरेट सेक्टर हर जगह हावी होता है कोई
भी सरकार हो मोदी जी के यहां तो ज्यादा ही
हावी है उने कहा कि 192 मिलियन हेक्टर
2006 के आंकड़ों के हिसाब से व बता रहे
हैं 192 मिलियन हेक्टर खेती जमीन खेती जिस

पर बुआई होती है उसमें से 60
प्र यह रेनफेड है या मानसून पर बरसात के
पानी के ऊपर डिपेंड है इरिगेशन नहीं है
सिंचन की व्यवस्था नहीं है और व 60 प्र
देश का 45 प्र अनाज उगाते

हैं बाकी 40 प्र 65 प्र अनाज उगाते या 55
प्र अनाज उगाते
हैं क्योंकि उनके पास पानी की सुविधा है
उन्होंने क्या कि प्रोडक्शन बढ़ना होगा पर
हेक्टर जब स्वामीनाथन जी की रिपोर्ट आई तो
वियतनाम जैसा देश भी पर हेक्टर में कई

अनाज में हमसे ऊपर
था क्रेडिट और इंश्योरेंस इंश्योरेंस भी
होना चाहिए इंश्योरेंस कार्ड भी होने
चाहिए उसको बैंक से लोन भी मिलना चाहिए और
कम बैज पर मिलना चाहिए रिकमेंडेशन
थे यह पूरी रिपोर्ट ज्यादातर इस बात पर

बेस थी कि बढ़ती हुई किसानों की आत्महत्या
को रोकना
है ऐसे कई रिकमेंडेशन उन्होंने
किए कि सोइल चेकिंग होगी क्लॉक क्रॉप
पैटर्न बदला जाएगा ताकि सोइल का कस जमीन

का कस बना रहे ये तमाम रिकमेंडेशन थे उनके
कौन लागू करेगा
इनको स्वामीनी नाथन के
रिकमेंडेशन लागू करो यह डिमांड है किसानों

की एमएसपी य डिमांड है पहले एमएसपी का
कैलकुलेशन ही आप गलत करते और कहते कि 50
प्र
है जो किसान खेती करता है उनको लाकर बिठाए
तो बताएंगे कि उसका कॉस्ट क्या

है चार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और चार जो
कभी एक जमाने में खेत में गए होंगे उनके
रिकमेंडेशन और कागज के ऊपर
का गुना भाग करके आप एमएसपी निकालते हैं

और बोलते हैं 50 प्र द यदि 50 प्र इस
किसान को मिलती तो ये किसान आंदोलित नहीं
होता आत्महत्या नहीं करता किसान गांव में
रहता है उसके फिजूल खर्चे
नहीं किसान यदि 50 प्र मिलता तो इस देश की

आबादी 60 प्र किसान है 60 प्र आबादी यदि
खेती में लगी हुई है और यदि
उन्हें 50 प्र अपने फसल से ज्यादा प्रॉफिट
मिलता होता तो फिर वह रात को भोके नहीं

सोते और प्रधानमंत्री जी को 81 करोड़
लोगों को पा किलो अनाज नहीं दिया जाता
इतनी विसंगतियां है सरकार के दावों में
सरकार लगातार दिशा भूल कर रही है सरकार
लगातार किसानों को गुमराह कर रही है जनता
को गुमराह कर रही है

इसलिए किसान आंदोलित है किसान क्यों
आंदोलित है और किसान को बदनाम करने का जो
यह षडयंत्र चल रहा
है य बड़े-बड़े लोग जो किसान को बदनाम
करने के लिए आगे आते हैं कुल मिलाकर वह

देश का नुकसान कर रहे हैं क्योंकि यदि इस
भूमिपुत्र ने अनाज उगाना बंद नहीं किया यह
देश बर्बाद हो जाएगा 19 प्र जीडीपी में
किसानों का योगदान है और किसान निर्यात
करता है आज अनाज यदि सारा देश का अनाज
आयात करना

तो यह देश कहां जाएगा आप समझ सकते हैं आज
इतना ही कल फिर आता हूं किसी विषय के साथ
तब तक के लिए नमस्कार

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