जयंत चौधरी को NDA में शामिल करवाना मोदी का डर है!|Election 2024 - instathreads

जयंत चौधरी को NDA में शामिल करवाना मोदी का डर है!|Election 2024

नमस्ते उत्तर प्रदेश में आज एक बहुत बड़ा
दिन रहा सियासत के लिहाज
से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे
और भारत के प्रधानमंत्री रहे किसानों के

बड़े नेता चौधरी चरण सिंह को भारत सरकार
ने भारत रत्न देने का फैसला लिया है और आज
ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी खुशी को
साझा करते हुए जयंत चौधरी ने यह भी बया

दिया कि इतनी बड़ी खुशी इतना बड़ा मौका अब
अगर उनका प्रस्ताव ना मानू तो क्यों ना
मानू और किस आधार पर ना मानू संकेत साफ हो
चुके थे कि जो चवन्नी यह कह रहे थे कि
चवन्नी जो चवन्नी के लिए कह रहे थे कि

वैसा थोड़ी जो पलट जाऊ आज यह लग रहा है कि
वह पलट गए आज इस बात का विश्लेषण करेंगे
कि जयंत चौध
अब क्या बीजेपी जवाइन कर लेंगे बीजेपी के
साथ गठबंधन कर लेंगे जो कि रास्ता साफ हो

चुका है इसका उत्तर प्रदेश की राजनीति पर
क्या असर पड़ेगा 2024 की राजनीति पर क्या
असर पड़ेगा और इससे जरूरी सवाल यह भी है
कि इसका उत्तर प्रदेश के गठबंधन पर क्या

असर पड़ेगा और अखिलेश यादव अब कौन सी
रणनीति अपनाएंगे क्या वाकई अखिलेश यादव
अकेले पड़ गए किसका दोष ज्यादा है
क्या वजह रही और अब इस पूरी राजनीति का

रुख क्या होने वाला है स्वागत है आप सबका
4 पीएम न्यूज नेटवर्क पर मैं हूं डॉक्टर
लक्ष्मण
यादव आज भारत रत्न दिया गया तीन लोगों को
जिनमें से पिछले दिनों आपको याद होगा इसी

साल दो लोगों को भारत रत्न दिया गया सबसे
पहले भारत रत्न देने का फैसला किया गया
जननायक कपूरी ठाकुर को और जननायक कपूरी
ठाकुर को भारत रत्न देने के बाद नीतीश
कुमार गठबंधन तोड़ देते हैं इंडिया का और

एनडीए में शामिल हो जाते हैं वजह बताते
हैं कि हम सबको एकजुट करके बीजेपी से
लड़ना चाह रहे थे लेकिन सब लोग एकजुट हो
नहीं रहे हैं कांग्रेस गड़बड़ कर रही है

इसलिए हम बीजेपी के साथ जाकर के बीजेपी से
लड़ेंगे नहीं बीजेपी के साथ रहेंगे आज उसी
तरह से एक फैसला और आया है और व है किसान
आंदोलन के बड़े नेता उत्तर प्रदेश के
पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व

प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न
दे दिया गया और अब संकेत साफ है कि अगला
निशाना जयंत चौधरी होंगे तो इस तरह से यह
पूरी राजनीति बदल रही है आप बाकी कुछ कहे

ना कहे बीजेपी को इस बात का अंदाजा बखूबी
है बीजेपी बहुत करीने से इस तरह की
राजनीति करने की माहिर हो चुकी है कि वो
कैसे लोगों को एकजुट करके उन्हें अपने साथ
एक बड़ी एका बनाने के लिए ग्राउंड से

रिपोर्ट लेती है इंटेंशन समझती है इमोशन
समझती है और उस इमोशन को कैश करने के लिए
वह अरत बनाती है बीजेपी ने इस इमोशन के
कैश करने के लिए पिछले दिनों जब कर्पूरी
ठाकुर को भारत तंत्र दिया तो उनके निशाने

पर अति पिछड़े समुदाय के बहुत सारे लोग थे
मैं आखिर में इसकी तुलना भी करूंगा कि
भारत रत्न देना और अति पिछड़ों या पिछड़ों
को न्याय देना हक देना इन दोनों में जमीन

आसमान का फर्क है लेकिन होगा क्या कि कोई
भारत रत्न देगा तो इसका विरोध इसका तराज
इससे असहमति किसी की नहीं
होगी यह अलग एक डिस्कोर्स बन जाएगा कि जिस
भारत रत्न को कभी आप अडवाणी को दे देते
हैं कभी कपूरी ठाकुर को देते दोनों बराबर

खड़े हो गए और जो आडवाणी को दिया गया है
वह भारतर रत्न बाबा साहब को मिल चुका है
क्या वाकई दोनों ने एक तरह का भारत या
इंसानियत और इंसाफ के बनाने का रास्ता
देखा था बहुत अलग डिबेट है लेकिन य डिबेट

होनी चाहिए इस देश में भारत रत्न की
अहमियत कितनी बची है लेकिन जब इस देश के
कमेरा लोगों को भारतर रत्न मिलेगा तो हम
उसका स्वागत करेंगे चौधरी चरण सिंह इस देश
में उस राज नीति के समाजवादी राजनीति के

सामाजिक न्याय की राजनीति के एक पैरोकार
है जैसे कपूरी ठाकुर है तो बीजेपी ने इस
इंटेंशन को इस पॉलिटिक्स को बकाय दे समझ
लिया है कि अगर हम इन्हें भारत रत्न देते

हैं तो इनका एक इमोशनल अटैचमेंट बीजेपी से
बनेगा और हम इसे भुनाने में कामयाब हो
जाएंगे कि कैसे हम इसको आपका हक देने की
तरह आपको न्याय देने की तरह आपको सम्मान
देने की तरह इस चीज का इस्तेमाल करेंगे तो

बीजेपी ने य एक चाल चलती अब इस डिबेट को
पूरा समझने की जरूरत है अगर एक अकेला सपर
भारी था मैं बारबार इस बात को कहूंगा आपको
भी समझना होगा और शायद आप समझ रहे होंगे
आप बताइएगा कमेंट में अपने जवाब को अगर

अकेले नरेंद्र मोदी की लहर इतनी ज्यादा थी
कि वह अकेले चुनाव लड़ सकते थे अगर राम
मंदिर का मुद्दा अकेले इतना बड़ा है कि
बीजेपी एक तरफ से 400 ले आ रही भा तो
तेजस्वी यादव को ईडी की बेल ईडी का जांच

हेमंत सोरेन को जेल अरविंद केजरीवाल को
जेल की धमकी और उसके
बाद नितीश कुमार का गठबंधन तोड़ कर के
अपनी तरफ ले आना और जयंत चौधरी को उनकी

शर्तों पर उनको अपने में मिलाने के लिए
सारे हक्त कंडे अपना लेना उनके ग्राउंड के
नेताओं को भड़काना उनको लालच देना कि वहां
तो तुम सीटें हार जाओगे यहां तो तुम सीटें
जीत जाओगे पिछली वीडियो में मैंने कल आपके
इसी चैनल पर विश्लेषण किया था कि

पॉलिटिक्स में इसका विश्लेषण आप कर सकते
हैं आपको लगेगा कि दोष अखिलेश यादव का है
क्योंकि उन्होंने सात सीट देने के बाद कहा
केवल तीन पर आपके कैंडिडेट रहेंगे चार पर
हमारे रहेंगे और सपा की तरफ से जो अंदर

अंदर सूत्रों से खबर आ रही है कि नहीं तीन
हमारे थे चार जयंत के थे यानी चार उनके थे
तीन हमारे थे मिलकर लड़ते एक साजा पन से
लड़ते इस बात से बहुत आहत थे जयंत चौधरी

इस बात से बहुत आहत आरएलडी के नेता इस बात
से बहुत बेचैन थे कि फिर हमारा वजूद क्या
बचेगा बीजेपी आज की तारीख में केवल दो सीट
कन्फर्म की हुई है तीसरी ये चाहते
मुजफ्फरनगर ये एक मथुरा

और ये बाराबंकी ये बिजनौर की सीट अभी तो
कोई और सीट कंफर्म हुई नहीं है बीजेपी की
तरफ से यह चाहते मुजफ्फरनगर सीट मिल जाए
लेकिन मान लीजिए अखिलेश यादव नहीं माने तो
लड़ गए क्या जाकर मांगे वहां पर अब उनको

लालच दिया गया कि कि भाई आपको दिया जाएगा
कोई भी पार्टी ऐसे ही थोड़ी जाती है अजीत
पवार ऐसे ही थोड़ी चले गए अजीत पवार को
बाकायदा समझ में आया कि डिप्टी सीम बनेंगे

मुकदमे माफ हो जाएंगे नारायण राण को पथ
समझ में आया कि केंद्र में मंत्री बनेंगे
और मुकदमे ईडी से बच जाएंगे अब ये यही चीज
जो नीतीश कुमार को समझ में आई कि मिनिस्टर
बने रहेंगे मुख्यमंत्री पद बना रहेगा और

हमारे लोग चुनाव भी जीत जाएंगे और ईडी से
बचे रहेंगे यह बात मैं बार-बार कहूंगा कि
हेमंत सोरेन यह बात नहीं समझ रहे तो इसका
मतलब हेमंत सोरेन खुद्दारी की राजनीति और
जमीर की राजनीति कर रहे हैं तेजस्वी यादव

अगर यह बात नहीं समझ रहे और उस लालच में
नहीं पड़ रहे तो इसका मतलब तेजस्वी यादव
खुद्दारी की राजनीति कर रहे हैं एक ही समय
में एक ही देशकाल परिस्थिति में एक जैसी

परिस्थिति में कोई तेजस्वी हो रहा है तो
कोई नीतीश हो रहा है ये दो चेहरे हैं
विपक्ष के ठीक एक ही समय में एक तरफ कोई
हेमंत सोरेन हो रहा है तो कोई जयंत चौधरी
हो रहा है सामने है एक ओबीसी एक आदिवासी

यह पॉलिटिक्स का नैरेटिव है और य यह तब है
जब राम मंदिर वहीं बन गया और बीजेपी को
लगता है कि मंदिर बनने के बाद तो हम एक
तरफा चुनाव जीत रहे हैं फिर यह राजनीति का

माहौल क्यों बना हुआ है और यह विश्लेषण
आपको करना है गांव गांव भगवा और राम जो
राम को लाए उनको लाएंगे तो फिर इनको क्यों
ला रहे हो फिर नितीश को क्यों लाएंगे
हेमंत सोरेन को क्यों लाने की कोशिश

करेंगे जयन चौधरी क्यों लाएंगे यह
पॉलिटिकल नैरेटिव है और इसके लिए अगर कोई
आरएलडी की तरफ सेय आरोप लगाए कि अखिलेश
यादव के हट धर्मिता के चलते यह हुआ तो
सवाल तो यह बनेगा कि फिर आप अखिलेश यादव
से लड़ते क्योंकि आप और अखिलेश और

कांग्रेस सब मिलकर के संविधान विरोधी से
लड़ना चाहते थे अब आपके सुर बदल गए कल आप
किसान आंदोलन में चौधरी चरण सिंह को याद
करते थे आज चौधरी चरण सिंह को भारत त्

मिलल गया इतने मात्र से चौधरी चरन सिंह के
सपनों का भारत बन गया हम उस भारत रत्न का
सम्मान करते हैं चौधरी साहब आप आज मैं फिर
से कह रहा हूं मान्यवर कांशीराम
को जगदेव बाबू को महामना रामसर वर्मा को

और डॉक्टर राम मन लोहिया को इन सारे लोगों
को भारत मिलना चाहि क्यों नहीं भारत
मिलेगा बीपी मंडल को इनसे उनका सम्मान
बढ़ेगा इसलिए चौधरी साहब को जो सम्मान
मिला है इससे इनका सम्मान बढ़ेगा लेकिन

चौधरी साहब के सपनों का भारत कैसे बनेगा
टाटा बिरला की जागीर नहीं यह हिंदुस्तान
हमारा है और अंबानी अडानी की जागीर बना
देने वाले कि हिंदुस्तान अंबानी अडानी का
जागीर बन जाएगा चौधरी चरण सिंह के पोते

वहां खड़े होकर अगर यह कहे कि मेरे मेरे
दादाजी का सम्मान बढ़ा है एक बार सोचना
चाहिए मेरे हिसाब से एक बार इस पर ठहर कर
सोचना

चाहिए हिंदुस्तान की तरक्की का रास्ता
भारत हिंदुस्तान की तरक्की का रास्ता
खेतों खलियान से होकर गुजरता है यह किसके
सपनों का वाक्य है यह सपन न का वाक्य है
इस देश में चौधरी चरण सिंह का और चौधरी

चरण सिंह के सपनों का भारत अगर यह है तो
इसको विचार करिए कि वहां जाकर के किसान
आंदोलन में यह कहना कि एक ही बार में सब
कुछ थोड़ी मिल जाता है थोड़ा-थोड़ा करके
सरकार देती है आंदोलन वाले आंदोलन करते

रहेंगे लेकिन इस सरकार ने बहुत कुछ दिया
है सुर बदल गए कि अब हम मना कर दो कैसे
मना करें क्यों साहब इतने पर बिक गए या
झुक गए या डर गए या लालच में चले गए
हम उस जैन चौधरी को इतने समय से देख रहे

थे जो डर डर के नहीं अड़ के लड़ रहा था 14
में भी वो अड़े 19 में भी वो अड़े 22 में
भी वो अड़े अचानक 24 में जबक इतना क्रुशल
इलेक्शन आपके सामने अब तो एक तरफा लड़ाई
होगी साहब पश्चिम उत्तर प्रदेश के जाट

वोटर अधिकांशत हिंदू बन के वोट देंगे
चौधरी चरण सिंह को सम्मान भी मिल गया तो
वो भी उधर चले जाएंगे और आप साहब उधर चले
गए लेकिन किसान आंदोलन शुरू कर रहे हैं 13

फरवरी से सुन रहे हैं कि दिल्ली जाने का
वादा किया है उन किसानों को आप क्या
कहेंगे जिनको आज भी एमएसपी नहीं
मिली जिनका आज भी किसान आंदोलन में गन्ना
का भुगतान नहीं हो रहा है और जो सरकार ने

वादा किया वह सरकार का वादा पूरा नहीं हो
रहा तो अब उत्तर प्रदेश में एक अलग
सिनेरियो बनता जा रहा है अब आप लाख इसमें
आप कमियां दिखाएं कि ओम प्रकाश राजभर भी

संज और संजय निषद तो सीधे बहुत पहले चले
गए तो संजय निषद ओम प्रकाश राजभर
अनुप्रिया पटेल तो खैर गठबंधन में नहीं
रही इसलिए उनको छोड़ देते हैं जयं चौधरी

अब सारे लोग एक साथ एनडीए के साथ बैठ कर
के क्या करेंगे पता है अखिलेश को टारगेट
करेंगे कि अखिलेश यादव की हट दर में
ता तमाम तरह के शब्द आएंगे मेरे पास तो व

है भी नहीं शब्द इसके चलते गठबंधन टूटा
जैसे नीतीश कुमार ने कहा कि कांग्रेस की
गलती के चलते गठबंधन काम नहीं कर रहा था
इसलिए हम बीजेपी में चले गए और यही काम
होगा जैन चौधरी की तरफ से लेकिन एक बात

सोचिए कि अखिलेश यादव क्या कर सकते थे
अखिलेश यादव से आप लड़ सकते थे वह लड़ाई
का मौका आपने नहीं दिया अब आप संविधान
विरोधियों के साथ खड़े हो गए एक तो यह

पक्ष इसका जवाब नीतीश कुमार की तरह आपको
भी देना होगा व भी तब जब एक चुना हुआ
मुख्यमंत्री राज भवन से जेल में जा रहा है
झारखंड
में ठीक एक ही टाइम फ्रेम है एक ही भारत

है और इसी उत्तर भारत में दो तरह की
राजनीति दिख रही है एक तरफ जैंत चौधरी एक
तरफ तेजस्वी यादव एक तरफ हेमंत सोरेन एक
तरफ नीतीश कुमार केजरीवाल भी उसी में है
ये इस पॉलिटिक्स में अब इससे पॉलिटिक्स

बदलेगी य कि बीजेपी ने एक तरफ से सबको साध
लिया उसे पता है कि अकेले मंदिर के नाम पर
रिस्क नहीं लेंगे अकेले मोदी के नाम पर
रिस्क नहीं लेंगे तो मंदिर और मोदी के

पर्याप्त नहीं पड़ रहे इसलिए नितीश कुमार
चाहिए इसलिए जयंत चौधरी चाहिए इसलिए ओम
प्रकाश राजभर चाहिए इसलिए निषद चाहिए
अकेला सब पर भारी कोई नहीं है एक तो यह
भ्रम तोड़ दीजिए अब जो लोग कहेंगे कि

लाभार्थी से जीत रहे हैं इससे जीत रहे हैं
अब उस सब में पूरी सच्चाई नहीं है विपक्षी
दलों के सामने अब एक मुश्किल आन पड़ी है
कि अब उनके गठबंधन में उत्तर प्रदेश में
केवल दो बड़ी पार्टियां एक साथ है

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उत्तर प्रदेश
में कांग्रेस का कोई ठोस जनाधार नहीं है
अब कांग्रेस पार्टी धीरे-धीरे मजबूती से
बढ़ेगी अपने जनाधार को जुटाए गी ये सब की
कोशिश वो कर सकती है लेकिन आज की तारीख
में कांग्रेस के पास अभी उत्तर प्रदेश में

जनाधार नहीं है और इस जनाधार ना होने के
चलते एक जो सबसे बड़ी मुश्किल आ रही है जो
सबसे बड़ी समस्या आएगी वह पश्चिमी उत्तर
प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पास अब

आधार खत्म हो गया
है कमजोर हो गया है ऐसा नहीं है कि कोई
पार्टी खत्म हो जाती है ऐसे तो बसपा भी
खत्म नहीं हुई ना बसपा भी है सपा भी रहेगी
दोनों लड़ेंगे और जयंत चौधरी की पार्टी

समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके
लड़ेगी एक ये पूरा परिदृश्य बन गया अब
इसके आगे बढ़ी दो विकल्प अभी भी उत्तर
प्रदेश की राजनीति में खुले हुए हैं पता

नहीं कितने खुले मुझे नहीं पता लेकिन
राजनीति में चकि कुछ भी असंभव नहीं होता
कोई ये सोच नहीं रहा था कि जैन चौधरी
एंडिए की तरफ जाने के लिए पूरा तैयार हो
जाएंगे लेकिन अब जैन चौधरी लगभग जा चुके

हैं लगभग जा चुके हैं अब उस परे कुछ बहुत
बचा नहीं है उन्होंने तारीफ कर दी मोदी जी
की कि दिल जीत लिया और लोग नीचे लिखने लगे
दल जीत लिया तो पूरा दल अब चला गया दलदल
में एक तो यह बात तो इसलिए कुछ भी
अनिश्चित नहीं है कुछ भी असंभव नहीं है तो

दो विकल्प है एक तरफ तो ये विकल्प है कि
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी
अलायंस कर ले मुझे नहीं पता कि कितना इसके
दरवाजे खुले क्योंकि मायावती जी का अप्रोच

एकदम क्लियर है अकेले लड़ेंगे अब अकेले
लड़के वो कितना उनका अपना कैलकुलेशन होगा
कि शायद वो बीजेपी को रोक ले अकेले लड़के
तो अखिलेश यादव भी बीजेपी को कितना रोक
पाएंगे ये भी आप जानते हैं अगर ये दोनों

एक हो जाए और कोई रास्ता बने कोई ऐसी
गुंजाइश बने
कि सपा और बसपा एक हो जाए तो क्या उत्तर
प्रदेश की राजनीति में कुछ बहुत दिलचस्प
मोड़ नहीं आ जाएगा क्योंकि वही पश्चिमी
उत्तर प्रदेश उसमें बसपा का दलित वोटर

बड़ी तादाद में आज भी है और कोई ऐसा
लोकसभा नहीं है जिसमें दलित वोटर ठीक ठाक
ढंग से नहीं है लेकिन अब जिस तरह से एकही
साल में पांच लोगों को भारतर रत्न दे दिया
गया अगर कहीं बसपा कुछ ऐसा संकेत करेगी तो

कहीं छठवां भारतर रत्न इसी साल नियम कानून
सब तोड़कर राष्ट्रपति घोषणा करती है नहीं
प्रधानमंत्री करेंगे सब खत्म करके मनवर
कांशी राम को भी कहीं ना भारत रन दे दे
क्योंकि 24 का चुनाव किसी भी तरह जीतना है
भैया इसके बात सोचिए ना अगर इतना बड़ा

चुनाव ये बन गया 24 का तो इसके बाद क्या
होने वाला है बीजेपी की तरफ से कल्पना कर
सकते
हैं तो हो सकता है कि मनोर कांशी नाम को
भारत रत्न दे दे और कहे कि बसपा आप भी आ
जाओ इधर यह तो हो रही है केंद्र की

राजनीति एक तरफ ईवीएम एक तरफ ईडी एक तरफ
गठबंधन
तो एक रास्ता फिर भी मेरा मानना है कि
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक रास्ता
खुला है जो सपा और बसपा कहीं से कोई
रास्ता निकाल के अगर एक हो जाए तब चुनाव

थोड़ा दिलचस्प होगा क्योंकि पूर्वी उत्तर
प्रदेश से लेकर के पश्चिमी उत्तर प्रदेश
तक जाट बिल्ट में और मध्य भारत में मध्य
उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़ा वैक्यूम

अभी भी पॉलिटिकल सिनेरियो का बना हुआ है
और उस वैक्यूम के तहत एक गुंजाइश बनती है
दूसरा विकल्प इनके पास एक मात्र केवल ये
है ये पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर
आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी को

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी
और कांग्रेस अपने साथ लेकर के एक बड़ा
मैसेज दे दलित समाज के बीच अगर बसपा
गठबंधन में नहीं आती अंतिम हद तक तो नहीं

तो कितना अच्छा होता कि सब मिल के लड़
लेकिन अब व्यवहारिक राजनीति तो आप देख रहे
हैं ना कैसे चीजें बहुत तेजी से बदल रही
है तो एक रास्ता ये अखिलेश यादव के सामने
खुला हुआ है कि वह जयंत चौधरी के जाने की

भरपाई अब कितनी भर पाई होगी य तो रिजल्ट
बताते हैं लेकिन फिर भी एक जो एकजुटता थी
उसको निभाने के लिए आज हीय कदम उठाना
चाहिए और किसान आंदोलन का समर्थन करना
चाहिए और चंद्रशेखर आजाद को अपने साथ खड़ा

रखना चाहिए और वह अगर एकजुटता बन जाए तब
मुझे लगता है कि वहां से एक तरह का एक तरह
का संभावना पैदा होगी कि वह बीजेपी को
चैलेंज करेंगे वरना आज की तारीख में
बीजेपी

ने जीतने के लिए सब कुछ उनके पास है
कल्पना करिए और विपक्षी दलों के नेताओं को
यह बात सीखनी चाहिए और समझनी होगी उनके
पास नरेंद्र मोदी है उनके पास ईडी है उनके

पास सीबीआई है उनके पास इलेक्शन कमीशन है
उनके पास मीडिया है उनके पास गठबंधन और
फिर भी सबको लेके आ रहे हैं जो जहां जैसे
ले आओ भाई भारत दे दो इनको दे दो उनको दे

उनको भी दे दो किसी भी तरह से सबको अपने
साथ लाओ और सबको मिलाकर चुनाव जीत और
विपक्षी दल अपने साथियों को बचा नहीं पा
रहे एक बार ठहर करके आपको सोचना होगा

समाजवादी पार्टी को सोचना होगा कांग्रेस
को सोचना होगा राहुल गांधी को सोचना होगा
कि न्याय यात्रा एक तरफ और दूसरी तरफ
गठबंधन टूटता जा रहा है इसका मूल्यांकन

जनता जरूर करेगी और आपको क्या लगता है
उत्तर प्रदेश में और कौन से रास्ते बचे
हैं या जिन रास्तों पर मैं जिक्र कर रहा
था इनकी कितनी गुंजाइश बची है नीचे कमेंट

बॉक्स में जरूर बताइएगा फिर मिलेंगे किसी
और विशेषण के साथ तब तक के लिए बहुत-बहुत
धन्यवाद

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