ट्रैक्टर कब से टैंक हो गया, किसान कब से दुश्मन हो गए - instathreads

ट्रैक्टर कब से टैंक हो गया, किसान कब से दुश्मन हो गए

नमस्कार

किसान जब भी
ट्रैक्टर लेकर आते हैं ट्रैक्टर को लेकर
भूत खड़ा कर दिया जाता है जैसे ट्रैक्टर
नहीं टैंक हैं मीडिया रिपोर्ट में आप
ट्रैक्टर को लेकर तरह-तरह की बातें
देखेंगे किसी में लिखा होगा बुलेट प्रूफ

ट्रैक्टर लेकर आ गए किसान तो कोई मॉडिफाई
ट्रैक्टर का जिक्र इस तरह करता है जैसे
ट्रैक्टर नहीं स्टार वॉर फिल्म का कोई

अंतरिक्ष यान हो हरियाणा के मुख्यमंत्री
मनोहर लाल खट्टर ने अपने एक बयान में जोर
देकर कहा है के प्रदर्शन करना है तो
ट्रैक्टर की क्या जरूरत है ट्रैक्टर को
लेकर आम लोग भी सोशल मीडिया में अनाप शनाप
कहते सुने जा सकते

हैं और ऐसे लोगों के हिसाब से तो जर्मनी
के इन किसानों को भी ट्रैक्टर लेकर अपने
देश में नहीं निकलना चाहिए था देखने से तो
यही लगता है कि यह ट्रैक्टर भी कैथल या
फतेहगढ़ साहिब में चल रहे हैं मगर यह
वीडियो जर्मनी का है जनवरी के महीने में

जर्मनी के किसान अपनी मांगों को मनवाने के
लिए ट्रैक्टर से ही बर्लिन की तरफ निकल
पड़े लेकिन वहां की सरकार ने तो ट्रैक्टर
को टैंक समझकर सड़कों में गड्ढे नहीं खोदे
कीले नहीं गड़वा और सीमेंट की दीवारें
खड़ी नहीं की जबकि आप देख सकते हैं कि

जर्मनी की यह ट्रैक्टर कितने भीम काय हैं
जर्मनी के किसानों ने भी ट्रैक्टर से सड़क
जाम कर दिया था हॉर्न बजाकर विरोध दर्ज
कराने लगे किसानों को आशा शंका थी कि
दक्षिण पंथी सरकार सारी सब्सिडी बंद कर

देगी इस आशंका को लेकर प्रदर्शन शुरू कर
दिया जर्मनी के किसानों को टैक्स पर दो
प्रकार की छूटें मिल रही थी जिससे हर वर्ष
समग्र रूप से उन्हें करीब 1000 मिलियन

यूरो की बचत हो रही थी किसानों का कहना था
कि अगर यह छूट वापस ले ली गई तो वे खेती
के पेशे से बाहर हो जाएंगे यानी जर्मनी के
किसान अपनी सरकार से सब्सिडी मांग रहे हैं
कह रहे कि इसके बिना इस कारोबार में टिक

नहीं सकते और ट्रैक्टर लेकर निकल पड़ते
हैं फिर भारत के किसान ट्रैक्टर लेकर निकल
गए तो कौन सी बड़ी बात हो गई सरकार से
एमएसपी की गारंटी मांग दी तो कौन सी बड़ी
बात हो गई बात यही है कि ट्रैक्टर बहाना

है किसी तरह किसानों की मांग को बेकार
बताना है सारिश का हिस्सा बताना है कभी
ट्रैक्टर के बहाने तो कभी उन्हें
खालिस्तानी बताकर हालांकि जर्मनी में भी
किसानों पर आरोप लगा कि दक्षिण पंथी चरण

पंथी उनका इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन वहां
किसानों पर अतिक्रमण या अत्याचार नहीं हुआ
सरकार को किसानों से बात करनी
पड़ी ट्रैक्टर को लेकर भारत के मीडिया और
सोशल मीडिया में जिस तरह से धारणाएं फैलाई
जा रही हैं वह विचित्र है सड़कों पर कीले

गाड़ देना भी बता रहा है कि ट्रैक्टर को
लेकर प्रशासन में कितना भय
है दैनिक जागरण की रिपोर्ट की कुछ लाइने
पढ़ रहा हूं जिससे पता चलेगा कि ट्रैक्टर
को लेकर मीडिया और प्रशासन क्या लिख रहा

है कह रहा है हरियाणा के गृह सचिव टीवी
एसएन प्रसाद ने पंजाब के किसान संगठनों के
दिल्ली कूछ के मद्देनजर हाई कोर्ट में
दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में बेहद चौकाने
वाली जानकारी दी है चौकाने वाली जानकारी

जागरण लिखता है आगे कहता है कि हरियाणा
सरकार ने कोर्ट को बताया कि उनके पास ऐसे
इनपुट हैं कि हजारों की संख्या में
आंदोलनकारी मॉडिफाई ट्रैक्टर ट्रॉली में
हथियारों के साथ दिल्ली में डेरा डालने की

व्यवस्था के साथ चल रहे हैं यह संगठन संसद
का घेराव कर सकते
हैं थोड़ा करीब से आप भी भारतीय किसानों
के ट्रैक्टर को देख लीजिए झांक लीजिए उनका
जीवन इसी ट्रैक्टर में इसी ट्रैक्टर की
ट्रॉली में गुजरता है तो जाहिर है

उन्होंने इसकी सजावट और बनावट अपने हिसाब
से की है और काफी बदलाव किए हैं बड़ी-बड़ी
ट्रॉली यां बनाई गई हैं और उन
ट्रोलियस को आप भीतर से देखिए खुला है
बड़ा भी लग रहा है लेकिन क्या यह किसी

अमीर या करोड़पति किसान का ऐगा है बिल्कुल
नहीं है इनमें बैठे इन किसानों की हालत भी
देखिए इनके चेहरे देखिए कपड़े देखिए जज्बा
भी देख लीजिए क्या यह कहीं से खतरनाक नजर
आते हैं किसानों को अनुभव से यह सब पता है

कि ट्रैक्टर का इस्तेमाल कैसे करना है
जैसे इस ट्रैक्टर में आप देखिए हफ्तों का
सामान लादा गया है खाने पीने की चीजें हैं
रसोई गैस का सिलेंडर है बर्तन है और
ट्रॉली के भीतर सोने के गद्दे लगाए गए हैं
जिन्हें धरना प्रदर्शन के दौरान सर्दी की

रात खुले में गुजारनी है वे अपने लिए कुछ
तो इंतजाम करेंगे मगर ट्रैक्टर के इनके
इस्तेमाल को इस तरह से पेश किया जा रहा है
जैसे किसान कभी ट्रैक्टर से रैली करने

निकले ही ना हो कि इतने ही किसान आंदोलनों
में किसान ट्रैक्टर लेकर जाते रहे हैं
लेकिन कभी इस तरह से ट्रैक्टर को लेकर भूत
खड़ा नहीं किया गया है किसानों को भी
ट्रैक्टर समझ लिया गया है उन्हें ट्रैक्टर

के बिना देखने का फिर से अभ्यास किया जाना
चाहिए ट्रैक्टर किसान का साथी है उसका
टैंक नहीं है इसे लेकर वे राज्य से अपना
हक मांगने सड़क पर आए हैं राज्य पर हमला

करने नहीं निकले हैं उन्हें भी पता है कि
इस ट्रैक्टर की ताकत एक सीमा तक ही है तभी
तो जहां पर बैरिकेड लगे हैं उसके पास
किसान अपना ट्रैक्टर अपनी ट्रॉली का डेरा
डालकर शांति से जम गए
हैं स

शकाल लगे जत मुगे
बाप जान
निक जान दे
जा बोट प्रप बोट प्रूफ य वाटर प्रूफ बल्ट
प्रूफ लग तो नहीं र हैय यही हा यही है
बोल्ट प्रूफ गोली नहीं लगी

इसके ना के साी खट्टर नाला बाकी हाईवे य
सरकार नहीं बंद करनी चाहि दी य सान पंजाब
देने बर्डर लाके एक कराता पाकिस्तान द
बर्डर ल होया इ खटर िया ने लाता य सान

पंजाब न पीछे छटना चा पर असी नहीं दबा दबा
के छे दिल्ली सरकार न अगे भी असी बैगन के
तोड़ केला जा रहे भी जा
कुछ टाइम दे बै ब असी हरियाण दे विच कुच

कर जांगे असी बिलकुल नहीं डर दे ना ही सा
कौम शेरा द डरने वाली खट्टर वास्ते बहुत
माड़ी गल सा तो लड़ाई दिल्ली दे नाल
ट्रैक्टर को दुश्मन और दुश्मन के टैंक की
तरह पेश कर सड़कों पर कीले गाड़ी जा रही

हैं उन्हें नुकसान पहुंचाने का प्रयास हो
रहा है जबकि सबको पता है कि किसानों के
पास जो ट्रैक्टर हैं पुराने हो चुके हैं
नए भी हैं उनके लोन की क्या हकीकत है आप
जानते हैं मगर कीले गाड़ करर उनके

ट्रैक्टर को नुकसान पहुंचाने का इंतजाम
किया गया है ताकि 20 से 000 के टायर फट
जाएं और उन पर कर्जा और बढ़ जाए पुराने
जंग खाए इन ट्रैक्टरों को आप अपनी खुली
आंखों से देखने का प्रयास कीजिए इन
ट्रैक्टरों को दिखाकर बताया जा रहा है

जैसे करोड़पति हों की कारें यहां लगी हो
कि आपको यहां खिन्न बॉर्डर पर जमा किसानों
के कपड़े देखकर लगता है कि यह करोड़पति
लोग हैं 5500 एकड़ जोतने वाले किसान हैं
इसका आंकड़ा तो सरकार के पास होगा वह बता
दे कि कितने किसानों के पास 500 एकड़ की

जमीनें हैं और कितने किसान करोड़पति हैं
करोड़पति किसान इस तरह खड़े होकर छोटे से
दोने में अपने लिए खाने का इंतजार नहीं
करते दो रोटी मिल जाने पर ईश्वर का
शुक्रिया अदा नहीं करते इन किसानों के

कपड़े किसी डिजाइनर बुटीक से बनकर नहीं आए
हैं बल्कि जमीन में काम करते-करते मैले
हुए हैं इनके कपड़ों पर मेहनत दिखती है
किसी अरबपति या करोड़पति का आराम नजर नहीं

आता 202021 में भी यही हुआ था जब किसान
दिल्ली आए तो कहा जाने लगा कि करोड़पति
किसान हैं इनके पास सैकड़ों एकड़ जमीन है
यह इसलिए किया गया ताकि लोगों की
सहानुभूति और खासकर यह जो हाउसिंग सोसाइटी
वाले हैं और उनके गेट पर बैठने वाले फुल

टाइम अंकिल और आंटियां हैं उनके बीच
किसानों के प्रति सहानुभूति ना बने इसका
प्रयास पिछली बार भी किया गया था किसानों
पर इस बार भी उन्हीं बातों को लेकर हमले
हो रहे हैं तो समझना चाहिए कि जब किसानों

के साथ ऐसा हो सकता है तो बाकियों के साथ
भी ऐसा होगा बिल्कुल होगा आपके साथ भी
होगा गरीब और साधारण किसानों को करोड़पति
अरबपति बताना एक तरह से उनके साथ दोहरा
मजाक है क्रूर मजाक

है किसान आंदोलन के पहले चरण में 700 से
अधिक किसानों की जाने गई थी निश्चित रूप
से वे सैकड़ों एक जमीन के मालिक नहीं थे
और शौक से साल भर के लिए खुले आसमान के
नीचे सर्दी में गर्मी में बरसात में

ट्रैक्टर की ट्रॉली में इस तरह रहने नहीं
आए थे एक अध्ययन से बात सामने आई थी कि
मरने वाले ज्यादातर किसान पंजाब के थे और
छोटे व सीमांत किसान थे भूमिहीन किसान थे
10 नवंबर 2021 के दिन द हिंदू में विकास

वासुदेव की रिपोर्ट है आपको मिल जाएगी
इंटरनेट पर इसमें विकास ने दिखाया है जो
किसान आंदोलन के पहले एक साल में जिन
किसानों की मौत हुई उनमें से ज्यादातर के

पास तीन एकड़ से कम जमीने थी जो भूमिहीन
किसान मरे थे या किराए पर लेकर खेती करते
थे उनके पास भी ढाई एकड़ की ही जमीन थी
उससे भी
कम आखिर इन लोगों में किसानों को लेकर

हाउसिंग सोसाइटी के लोगों में महानगरों के
लोगों में किसानों को लेकर इतनी नफरत
क्यों है इन्हें किसने बता दिया क्या
इन्हे याद नहीं कि इनके बाप दादा भी कभी

किसानी खेती किया करते थे इन्हें कब यह
बात समझ में आ गई कि भारत के किसान मेहनत
नहीं करते हैं क्या ट्रैक्टर चलाना और कार
चलाना दोनों एक समान है कभी ट्रैक्टर
चलाकर देखिएगा अस्थि पंजर हिल जाएगा हफ्ता

भर शरीर में दर्द रहता है इतनी मेहनत लगती
है खेती के हर काम में मगर अब दौर अलग है
लोगों का लोगों से नफरत करना उनका मुख्य
काम हो गया है जिन जिलों में इंटरनेट बंद
किया गया है वहां क्या किसान ही रहते हैं

 

किसानों के अलावा कोई नहीं रहता मगर उनके
जीवन में किस तरह की तकलीफें हैं वह भी तो
जनता के हिस्से हैं लेकिन इस पर भी
रिपोर्टिंग नहीं
है इंटरनेट बंद होने से राशन की दुकानों

पर दिक्कतें आ रही हैं हम नहीं जानते कि
इसकी वजह से कितने लोगों को समय पर राशन
नहीं मिला यूपीआई नहीं चल रही है ऑनलाइन
क्लास नहीं हो रहे हैं मीडिया रिपोर्ट है
कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल

खट्टर के 9 साल के कार्य काल में
2751 बार धारा 144 और 5वीं बार मोबाइल
इंटरनेट सेवा ठप की गई है यह दैनिक भास्कर
में छपा है अब तो केंद्र सरकार ने पंजाब
के तीन जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया यह

काम राज्य सरकार का होना चाहिए था मगर
वहां विपक्षी दल की सरकार है तो पुराने
कानून का हवाला देकर केंद्र की तरफ से
इंटरनेट बंद कर दिया गया क्या आपने सोचा
है कि हजारों की संख्या में अर्ध सैनिक बल

लाए गए हैं क्या वे किसी फाइव स्टार होटल
में रुक रहे हैं बिल्कुल नहीं इस तरह के
स्कूलों में उन्हें ठहराया गया है इसकी
वजह से स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर
क्या असर पड़ रहा है इसकी भी कहीं
रिपोर्टिंग नहीं

है बाजी तो है गले
हमारे पजी खत्म हो
गया पड़े
का ये निकाल रहे
पाछ दिन के बा ब प सुप्रीम कोर्ट के बार

एसोसिएशन ने तो कोर्ट को लिख दिया कि
किसानों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लीजिए
कार्रवाई कीजिए बार एसोसिएशन के कई सदस्य
इस फैसले का विरोध करने लगे हैं इस बीच
खबर है कि किसान आंदोलन में आए किसान की

मौत हो गई किसान मजदूर मोर्चा ने इन्हें
शहीद कहा है इनका नाम सरदार ज्ञान सिंह
बताया जा रहा है ज्ञान सिंह पंजाब के
गुरदासपुर के रहने वाले थे इंडियन

एक्सप्रेस की रिपोर्ट है कि पैलेट गन की
गोली से तीन किसानों की आंखों की रोशनी
चली गई
है किसान मजदूर मोर्चा का कहना है कि
प्राइवेट अस्पतालों में 400 से अधिक किसान
घायल पड़े हैं और उनका इलाज चल रहा है

सरकारी अस्पतालों में 70 किसान गंभीर रूप
से घायल हैं इलाज करा रहे हैं कई मीडिया
रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि
किसानों के शरीर पर कई दर्जन छर्रे धंस गए
हैं इन्हें निकाला जा रहा है इसकी वजह से

कुछ गंभीर रूप से यल भी हुए हैं कहा जा
रहा है कि इससे पहले कि और लोगों की जान
जाने की नौबत आए सरकार बातचीत को समाधान
की तरफ ले जाए ठोस फैसला करें सरकार
किसानों पर अर्ध सैनिक बलों का इस्तेमाल

ना करें किसानों पर आंसू गैस के गोले ना
छोड़े किसानों को उकसाने का काम ना
हो किसान मजदूर मोर्चा ने कहा है कि सरकार
से बातचीत के दौरान यह बात सामने रखी गई
कि किसानों की आवाज बंद की जा रही है 70

के करीब यूटर के चैनल बंद किए गए हैं जो
किसान आंदोलन को कवर कर रहे थे किसान
नेताओं के भी
वह भारत सरकार का कानून मानने के लिए
बाध्य है मगर श्याम मीरा सिंह का यह

अकाउंट दुनिया के बाकी देशों में देखा जा
सकेगा रिकॉर्डिंग करते वक्त तक श्याम मीरा
सिंह का अकाउंट भारत में भी दिख रहा था
जबकि
लगातार शेयर कर रहे हैं और जानकारियां भी

किसान मजदूर मोर्चा ने यह भी कहा है कि यह
अहं का सवाल बनाकर हम बातचीत करने नहीं जा
रहे हर हाल में हम दिल्ली जाना चाहते हैं
मगर बातचीत का इंतजार करना चाहते हैं सरवन
सिंह पंधे ने कहा कि सुखद माहौल में
वार्ता हुई है मगर निर्णय नहीं हो रहा है

हम निर्णय का इंतजार करना चाहते हैं जो
वार्ता कल हुई है बड़े सुहात पूर्ण माहौल
में हुई है हमने बहुत जोर से जैसे शेलिंग
कर रहे हैं और यह अर्ध सैनिक फोर्स जो

 

एमिशन इस्तेमाल करती है उनकी जो दुर्व तो
हो रही हमारे पास ताकत का इस्तेमाल हो रहा
उसको बहुत तेजी से रखा दूसरा हमने इंटरनेट
बंद करने का बहुत तेजी से रखा है इंटरनेट
अब हमारा बंद कर रहे हैं हमारे पेज बंद कर
रहे हैं सभी यूनियन को अकेले मेरा ही नहीं

मेरा पेज लेवाल साहब का पेज हमारा
अकेले हमारे नहीं जो आप जैसे यूटर हैं जो
हमारे पक्ष में काम कर रहे हैं लगभग मुझे
पता चला 70 इस तरह के काउंट बंद कर दिए गए
हम सरकार के समक्ष 70 के करीब जो हमारे
पक्ष में बोल रहे हैं पत्रकारों के जो

ट्यूबर हैं उनके 70 अकाउंट पूरी तरह बंद
कर दिए तो सरकार की जो मछा नजर आ रही है
कि हमारी आवाज को बंद करना चाहती है कि एक
घेरे से अधिक दूर तक हमारी आवाज ना पहुंचे
और जो सरकार के पक्ष में प्रोपेगेंडा
करेंगे उनके तो चैनल चल ही रहे हैं हम

किसी चैनल का विरोध नहीं करते लेकिन सभी
को चाहिए वह यहां की असल तस्वीर दिखाए हम
आज भी कह रहे हैं बैरी गुड तोड़ना दिल्ली
जाना अनक का सवाल नहीं है हां लेकिन
दिल्ली मोर्चा लगाएंगे अभी यह फैसले पर हम

कायम है और हम इसलिए रुके हैं वार्ता से
कोई ना कोई हल निकल जाए मांगे मनाना अन का
सवाल तो बना सकते हैं भाई हमारी मांग है
पिछले 75 सालों से किसी सरकार ने नहीं
मानी है उसको मान लीजिए रविवार शाम को

चौथे दौर की बातचीत होगी किसानों को भरोसा
नहीं चाहिए निर्णय चाहिए आज देश के कई
हिस्से में संयुक्त किसान मोर्चा और मजदूर
संगठनों ने भारत बंद का आयोजन किया और

किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाया
अलग-अलग संगठनों का समर्थन किसान आंदोलन
को मिलता जा रहा है राजस्थान में मजदूर
किसान शक्ति संगठन भी किसान आंदोलन के
समर्थन में आगे आया है भारत बंद के दौरान

कहां लाठी चार्ज हुआ कहां झड़प हुई इन सब
खबरों की समग्र जानकारी हमारे पास नहीं है
लेकिन आज शंभू बॉर्डर से खबर है कि
किसानों पर आंसू गैस के गोले धुआधार छोड़े
गए

हैं यह वीडियो 14 फरवरी का है शंभू बॉर्डर
के अलावा खनौरी बॉर्डर पर भी किसानों का
जमावड़ा है यहां आप देख सकते हैं कि
ट्रैक्टर की ट्रॉली पर भीगी बोरियां रखी
है इन्हें उठाकर किसान कंधे पर लादे घूम

रहे हैं जैसे ही आंसू गैस के गोले आएंगे
उन पर इन बोरियों को फेंक दिया जाएगा ताकि
बुज जाए और नुकसान कम हो किसानों ने आंसू
गैस से लड़ने के कई तरीके निकाले हैं अभी
तक उनकी तरफ से सारे उपाय बचाव में ही किए

जा रहे हैं किसानों ने अपनी तरफ से हमला
करने या आक्रमक होने का कोई प्रयास नहीं
किया बेशक ड्रोन के जरिए जब आंसू गैस
गिराए जाने लगे तब किसानों ने पतंग उड़ानी
शुरू कर दी उनके इस हौसले की दाद देनी

पड़ेगी कि उन्होंने ड्रोन को रोकने का ऐसा
अहिंसक और रचनात्मक रास्ता निकाला है जिस
तरह एक तरफा ड्रोन ने बमबारी की है हमने
उसको रखा देखिए कुछ छुटपुट इधर से भी हो
सकता है लेकिन हमारे सारे किसान लोग अढ़ाई

घंटे तक मुझे पता है कोई एक तरफ से बमबारी
हुई है तो हमें भड़का है ना हमें उसका ना
इस तरह का कार्य मत करें और हम पूरी देश
दुनिया के तने बुद्धिजीवी हैं जितने हमारे
सभी सहयोगी भाई हैं उनका सहयोग मांग रहे

हैं और सहयोग बड़े पैमाने पर हमें मिल भी
रहा है और लोग बढ़ चढ़कर आप देखेंगे यह
मोर्चा रोज के रोज बढ़ता जा रहा बढ़ता जा
रहा तो यह लाखों लोग चाहे शंभू बॉर्डर हो
चाहे खनौरी बर्डर हो वहां पर इकट्ठे और

अन्य बॉर्डर पर भी आपको बताकर हम कहेंगे
भी तीन
धरने हरियाणा के अंदर शुरू हो चुके शुरू
हो चुके हैं और लगातार बढ़ रहे हैं जिसकी
खबर क्योंकि इंटरनेट बंद है तो इसलिए खबर
नहीं आती आपको तो लग चके और गाजीपुर के
किसान और गाजीपुर में भी किसान दिल्ली की

ओर बढ़ते हैं हम चाहेंगे बगैर योजना के
कार्य कुछ ऐसा ना करें योजना बंद टीके से
लीडरशिप की अवाई में आप आगे बढ़े इस तरह
का कुछ ना करें जिसने सरकार को कुछ कहने
का हमें बदनाम करने का मौका मिले जब सरकार
किसानों से तीन राउंड की बातचीत कर चुकी

है तब कम से कम इसका कोई मतलब नहीं रह
जाता कि यह किसान खालिस्तान समर्थक बताए
जाएं फिर तो अफवाहों से पहले केंद्र सरकार
के मंत्रियों को यह चेक करना चाहिए था कि
जिनसे बात करने जा रहे हैं वह कौन लोग हैं

क्या वह खालिस्तान समर्थक हैं अगर हैं तो
मंत्री उनसे क्यों बात कर रहे हैं यह भी
दिख रहा है कि इस बार की बातचीत में
संयुक्त किसान मोर्चा के पुराने सदस्य और
नेता नजर नहीं आ रहे जिनके नेतृत्व में

पिछली बार आंदोलन हुआ इस बार का आंदोलन
संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक का है
हम आज के वीडियो में अलग-अलग पहलुओं पर
बात कर रहे
हैं जिस पंजाब और हरियाणा के लड़के

अमेरिका की सीमा की दीवार कूद जाते हैं
डोकर के सहारे डंकी बन जाते हैं उन्हीं
गांव के लड़कों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तक
पहुंचकर अपना काफिला रोक लिया हरियाणा तक
पहुंचाने की के लिए उन्हें कोई डोकर नहीं
मिल रहा किसानों को रोकने के लिए छह से
सात परतों की बैरिकेडिंग की गई है किसानों

का कहना है कि पंजाब के एक तरफ पाकिस्तान
का बॉर्डर है दूसरी तरफ हरियाणा के
मुख्यमंत्री ने बॉर्डर बना दिया जबकि उनकी
लड़ाई हरियाणा सरकार से तो थी ही नहीं फिर
भी हमारे रास्ते रोक दिए

 

गए पंजाब से आए किसानों के शरीर पर
हरियाणा की तरफ से हो रही जवाबी कार्रवाई
में छेद होते रहे एक किसान के शरीर पर 35
से ज्यादा छर्रे लगे हैं इस बार किसान

अपने साथ इमरजेंसी सेवाएं भी साथ लेकर आए
हैं डॉक्टर की सेवाएं दी जा रही हैं घायल
हुए किसानों को यूनियन की तरफ से छर्रे
निकालने में मदद पहुंचाई जा रही है खबरें
छप रही है कि दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के

300 गोले खरीदने के ऑर्डर दिए
हैं किसान अपने भाई जिन कोई सट लगी उन
फस्ट इलाज भी दिता जा रहा पटिया वगैरह
बाकी सीरियस कंडीशन उ अपनी एंबुलेंस खड़ी
तयार बदा छ के आया जा सारा लाम करया इस
दौर में किसानों का जब भी आंदोलन होता है

जनता के बीच से किसान नाम की फसल काटी
जाने लगती है और मिटाई जाने लगती है वे
जनता से निकालकर फेंके जा रहे हैं सरकार
के सामने तो किसानों की हार कोई नई हार
नहीं है पहली हार नहीं है मगर अपने ही देश

की जनता के सामने आतंकवादी कहे जा रहे हैं
करोड़पति अरबपति अयाश कहे जा रहे हैं राजक
कहे जा रहे हैं भारत के किसानों ने इस
कृषि प्रधान देश के कई हजार साल के इतिहास
में ऐसा दिन नहीं देखा होगा

नमस्कार

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