दक्षिण में क्यों हार जाती है BJP? | Why BJP Is Still Failing In South India? - instathreads

दक्षिण में क्यों हार जाती है BJP? | Why BJP Is Still Failing In South India?

देखिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युग
में बीजेपी ने ऐसे कई राज्यों में जीत का
पताका लहराया है जहां पहले पार्टी सत्ता
में नहीं रही कई नए-नए रिकॉर्ड्स बनाए असम

और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बीजेपी पहली
बार अकेले अपने दम पर बहुमत के साथ सत्ता
में आई वहीं हरियाणा और झारखंड जैसे
राज्यों में भी बीजेपी का मुख्यमंत्री

गद्दी पर बैठा कुल मिलाकर उत्तर भारत से
लेकर नॉर्थ ईस्ट तक में बीजेपी भगवा लहरा
चुकी है लेकिन दक्षिण भारत की ओर
जाते-जाते बीजेपी का विजय रथ डगमगाने लगता

है बीजेपी तीन दशकों से दक्षिण के राज्यों
में पैर पसारने की कोशिश कर रही है लेकिन
उसका रथ कर्नाटक तक आकर रुक जाता है आंध्र
प्रदेश केरल पुडुचेरी तमिलनाडु और

तेलंगाना की तो बात दूर इस बार तो कर्नाटक
की जनता ने भी बीजेपी को धोखा दे दिया
लेकिन क्यों आखिर दक्षिण में ऐसा क्या है
वहां आकर क्यों हार जाती है बीजेपी क्या
सच में दक्षिण कांग्रेस पर लट्टू है और

उत्तर बीजेपी पर दक्षिण में कैसा है
बीजेपी का जनाधार जानने के लिए बने रहिए
हमारे साथ इस वीडियो के एंड देखिए दुनिया
की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करने वाली
बीजेपी के लिए मिशन साउथ इंपॉसिबल टास्क

बनता जा रहा है इस पर दुनिया की नजर तब गई
जब पिछले साल विधानसभा चुनाव के रिजल्ट्स
आए और दक्षिण भारत में बीजेपी लगातार दो
बड़े राज्य हार गई कर्नाटक और तेलंगाना

बीजेपी को सबसे बड़ा झटका कर्नाटक हार के
बाद लगा क्योंकि कर्नाटक दक्षिण भारत का
इकलौता ऐसे राज्य था जिसने बीजेपी के लिए
सबसे पहले अपने दरवाजे खोले थे इन

रिजल्ट्स के साथ बीजेपी दक्ष से साफ हो गई
हालांकि पुडडू चरी में वह सत्तारूढ़
गठबंधन का हिस्सा जरूर है दूसरी ओर
कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडियन नेशनल
डेवलपमेंट इंक्लूसिव अलायंस इंडिया ने

तमिलनाडु केरल और कर्नाटक में अपने पैर
पसार रखे वहीं इस बार तेलंगाना भी
कांग्रेस के लिए खुशखबरी लेकर आया है
केसीआर की पार्टी बीआरएस चुनाव हार गई और
वहां पहली बार कांग्रेस सत्ता में आई वहीं

इसके उलट उत्तर में कांग्रेस का सूपड़ा
साफ है जहां एक और बीजेपी ने मध्य प्रदेश
में फिर से सत्ता में वापसी की व वहीं
राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की

विदाई हो गई और वहां अब भगवा लहरा रहा है
विधानसभा चुनाव के इन परिणामों ने नॉर्थ
साउथ को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है कहीं
ना कहीं इन रिजल्ट्स का असर 2024 के
लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा

जिसके लिए बीजेपी दक्षिण में अपना
प्रदर्शन सुधारने के लिए जी जान लगा रही
है अब देखा जाए दोस्तों तो दक्षिण के इन
राज्यों में 130 लोकसभा सीटें हैं जिसमें
से अभी महज 29 सीटें बीजेपी के पास हैं

इसमें 25 अकेले कर्नाटक से ही हैं जबकि
2019 में चार सीट तेलंगाना में जीती थी
इससे आप समझ सकते हैं कि बाकी के राज्यों
में बीजेपी के कैसे हालात होंगे दक्षिण को
प्रमुखता से लेने की एक वजह और भी है

दरअसल नॉर्थ इंडिया के मेन स्टेट्स में
पिछले दो लोकसभा चुनावों में बीजेपी को
बंपर सीटें मिली हैं उत्तर प्रदेश से लेकर
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक बीजेपी की

सरकार है पूर्वोत्तर में भी कमल खिल चुका
है उत्तर भारत के जिन राज्यों में अभी वह
सत्ता में नहीं है वहां भी वह प्रमुख
विपक्षी दल हैं पश्चिम बंगाल में भी ऐसा
ही है अब ऐसे में बीजेपी इस बात का ध्यान
भी रख रही है कि अगर यहां पर सीटें कम हो

तो इसकी भरपाई साउथ से की जा सके दक्षिण
में जमीन मजबूत करने में जुटी बीजेपी के
लिए आंध्र प्रदेश तमिलनाडु और केरल जैसे
राज्य सबसे बड़ा चैलेंज है क्योंकि

तमिलनाडु आंध्र प्रदेश और केरल में बीजेपी
के पास एक भी लोकसभा सीट नहीं है वहीं
आंध्र प्रदेश और केरल में तो पार्टी का एक
एमपी तक नहीं है जी हां 2019 के लोकसभा
चुनाव में आंध्र प्रदेश में बीजेपी को महज

1 फीसद वोट मिले थे आंध्र प्रदेश की तरह
ही बीजेपी के सामने तमिलनाडु में भी
चुनौती बड़ी है दरअसल दक्षिण भारत में
बीजेपी का कोई खास जनाधार नहीं है बीजेपी
की छवि हिंदूवादी पार्टी की है और

तमिलनाडु द्रविड आंदोलन की जमीन रही है
इसके साथ ही बीजेपी पर लगा हिंदू पार्टी
का टैक ज्यादा मुश्किल पैदा करता है इसके
अलावा वहां की प्रमुख पार्टी ऑल इंडिया
अन्ना द्रविड मुनेत्र कड़गम यानी कि एआई
एडी एमके से उसका गठबंधन था लेकिन 25

सितंबर 2023 को उसने भी बीजेपी से दूरी
बना ली एआई एडीएमके के इस फैसले के पीछे
की वजह बीजेपी की राजनीति का तरीका है जी
हां तमिलनाडु में बीजेपी के नेता जिस तरह
से लगातार बयानबाजी कर रहे थे उससे एआई

एडीएम के काफी दिनों से नाराज चल रही थी
पार्टी के उप महासचिव केपी मुनु स्वामी का
कहना है कि भाई बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष
के अन्ना मलाई समेत अन्य नेता एआई एडी
एमके के आदर्शों पर तो लगातार हमला बोल ही

रहे थे साथ ही जे जय ललिता और राज्य के
पहले मुख्यमंत्री सीएन अन्ना दोराई जैसे
नेताओं को लेकर भी टिप्पणी कर रहे थे इससे
एआई एडी एमके के नेता और कार्यकर्ता खुद
को अपमानित महसूस कर रहे थे इसके अलावा

तमिलनाडु की राजनीति में पार्टी का घटता
कद और घटता जा रहा था 2024 लोकसभा चुनाव
होने वाले हैं और उसके साथ ही अप्रैल 2026
में प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी होना है

पार्टी के ज्यादातर नेताओं का मानना है कि
भाई तमिलनाडु की राजनीति कुछ अलग तरह की
है वहां की जनता बारी-बारी से डीएमके और
एआई एडीएमके को मौका देती रहती है बीजेपी
की राजनीति में जिस तरह से हिंदुत्व का

मुद्दा फोकस पॉइंट है बीजेपी से गठजोड़
रखने से एआईएडी एमके को 2024 के लोकसभा और
2026 के विधानसभा चुनावों में नुकसान
उठाना पड़ सकता है वहीं बीजेपी की वजह से
कंपीटीटर डीएमके को हमलावर होने का ज्यादा

मौका मिल रहा था आगामी दोनों चुनावों में
पार्टी के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर
एआईएडी एमके ने बीजेपी से अलग होने का
फैसला किया दक्षिण के एक और इंपॉर्टेंट
राज्य केरल में बीजेपी पूरा जोर लगा रही

है बावजूद इसके बीजेपी का यहां पर कोई
विधायक नहीं ऐसा तब है जब उसके लोकल
ऑर्गेनाइजेशन आरएसएस की यहां पर 4500 से
ज्यादा शाखाएं होने का दावा किया जाता है

राज्य में एक बड़ी आबादी ईसाई समुदाय की
है दोस्तों और बीजेपी की नजर इसी पर है
लेकिन यहां भी हिंदूवादी पार्टी होने का
तमगा बीजेपी के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा
है हाल ही में कांग्रेस नेता ए के एंटोनी

के बेटे अनिल एंटनी के पार्टी में शामिल
होने ने से बीजेपी को उम्मीद है कि वो इस
समुदाय को अपने पाले में खींचने में सफल
होगी कुल मिलाकर कर्नाटक और तेलंगाना को
छोड़ दिया जाए तो दक्षिण के राज्यों में

बीजेपी के पास कोई बड़े कद का नेता नहीं
है ना ही किसी लोकल और बड़ी पार्टी का
सपोर्ट जिसकी कमी हर राज्य में देखने को
मिली है यही सवाल है जिसके बारे में

बीजेपी सोच रही है जिससे कि ना सिर्फ
पार्टी का आधार मजबूत हो सके बल्कि लोकसभा
चुनाव 2024 में ठीक-ठाक सीटें भी जीत सके
तो क्या ऐसे में बीजेपी 2024 में दक्षिणी
राज्यों को रिझा पाएगी इस वीडियो में हमने
दक्षिण के वैसे छह राज्यों आंध्र प्रदेश

कर्नाटक केरल पुडुचेरी तमिलनाडु और
तेलंगाना में बीजेपी के जनाधार का एनालास
किया है इस एनालास के लिए हमने दो बिंदुओं

पर फोकस किया है पहला इन राज्यों में
बीजेपी का वोट शेयर और दूसरा इन राज्यों
की जिन सीटों पर बीजेपी ने चुनाव लड़ा है
वहां पर पार्टी का वोट प्रतिशत हम सबसे
पहले शुरुआत तमिलनाडु से करेंगे तमिलनाडु
देखिए तमिलनाडु दक्षिण भारत के सबसे बड़े

राज्यों में से आता है यहां कुल 234
विधानसभा और 39 लोकसभा सीटें हैं 2021 में
हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी का
एआईएडीएमके के साथ गठबंधन था एआईएडीएमके

के सहयोग की वजह से 20 सीटों पर चुनाव
लड़कर बीजेपी चार सीटों पर जीत हासिल करने
में कामयाब रही थी इस चुनाव में बीजेपी का
वोट शेयर 2.62 पर रहा था वहीं 2016 के
विधानसभा चुनाव में बीजेपी ना तो एआईएडी

एमके के साथ थी और ना ही डीएमके के साथ उस
चुनाव में बीजेपी 128 सीटों पर चुनाव लड़ी
थी लेकिन किसी सीट पर जीत नहीं मिली थी
यहां तक कि उसके 180 उम्मीदवारों की जमानत
जब्त भी हो गई थी 188 सीटों पर लड़कर भी

बीजेपी का वोट शेयर 2.84 रहा था ऐसे ही
कुछ 2011 और 2006 के विधानसभा चुनाव में
भी हुआ है तमिलनाडु की लोकसभा सीटों पर
बीजेपी का प्रदर्शन तो और भी खराब रहा है

2019 के लोकसभा चुनाव में एआईएडी एमके के
साथ होने के बावजूद बीजेपी को किसी सीट पर
जीत नहीं मिली थी 2009 और 2004 के आम
चुनाव में भी बीजेपी खाता नहीं खोल पाई
हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी
को डीएमडी के एमडीएम के और पटली मक्कल

काची से गठबंधन का लाभ जरूर मिला वहीं
बीजेपी सात सीटों पर चुनाव लड़ी थी जिसमें
से उसे एक सीट पर जीत मिल भी गई बीजेपी का
वोट शेयर 5.5 पर रहा तमिलनाडु में
विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बीजेपी के

अब तक के प्रदर्शन पर नजर डालने से पता
चलता है कि भाई वह खुद की बदौलत एक भी सीट
जीतने में सक्सेसफुल नहीं हो पाई अब
कर्नाटक देखिए सीटों के लिहाज से तमिलनाडु
के बाद कर्नाटक दक्षिण भारत का सबसे बड़ा
राज्य है यहां विधानसभा में 224 सीटें और

लोकसभा की 28 सीटें हैं दक्षिण भारत में
यही एक राज्य है जिसको लेकर बीजेपी दावा
कर सकती है कि उसकी सियासी जमीन कुछ हद तक
मजबूत है हालांकि मई में प्रदेश की सत्ता
खोने के बाद यह कहा जा सकता है कि भाई

कर्नाटक में भी बीजेपी की राह आसान नहीं
रही ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि
कर्नाटक में बीजेपी का सियासी जमीन जिस एक
शख्सियत की वजह से इतनी मजबूत हुई थी वो
नेता अब राजनीति से अलग हो चुके हैं हम
बात कर रहे हैं 80 साल के बीएस येदु

यूरोपा की बीएस यदु यूरोपा का ही कमाल था
कि 2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के
कर्नाटक में शानदार प्रदर्शन कर 110 सीटें
जीतकर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और
पहली बार अपने दम पर दक्षिण भारत के सी
राज्य में सरकार बनाने में भी कामयाब हुई

छह विधानसभा चुनावों में बीजेपी का
कर्नाटक में जो भी प्रदर्शन रहा था उसमें
फॉर्मर चीफ मिनिस्टर बीएस येदु यूरोपा का
काफी इंपॉर्टेंट रोल रहा क्योंकि 2013 में
येदु यूरोपा बीजेपी से अलग हो गए थे जिसके
बाद पार्टी चुनाव में बहुत बुरी तरह हारी

बीजेपी का वोट प्रतिशत सीधा गिर करर जो है
20 फीदी हो गया था इस आधार पर यह कहना गलत
नहीं होगा कि कर्नाटक में अब तक बीजेपी की
जो राजनीतिक हैसियत बनी उसमें सबसे बड़ा
हाथ बीएस यद यूरोपा का रहा है अब बीएस यद

यूरोपा के एक्टिवली पार्टी का चेहरा नहीं
रहने के बाद बीजेपी के लिए कर्नाटक की डगर
भी मुश्किल हो गई है आगामी लोकसभा चुनाव
को देखते हुए बीजेपी एचडी कुमार स्वामी की

रीजनल पार्टी जेडीएस को अपने पाले में
लाने में कामयाब हो गई है लेकिन इसका
बीजेपी को कितना फायदा होगा यह 2024 के
चुनाव नतीजे ही बताएंगे आंध्र प्रदेश
देखिए तमिलनाडु और कर्नाटक के बाद आंध्र
प्रदेश सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य

है आंध्र प्रदेश में 175 विधानसभा सीटें
हैं वहीं लोकसभा सीटों की संख्या 25 आंध्र
प्रदेश में बीजेपी का कभी भी कोई खास
जनाधार नहीं रहा है हालांकि 1990 में जब
तेलंगाना अलग राज्य नहीं बना था तब रीजनल
पॉलिटिकल पार्टी टीडीपी के साथ गठबंधन की

वजह से बीजेपी को कुछ सीटों पर जीत मिली
चंद्रबाबू नायडू वो नेता थे जिन्होंने
1990 के दशक में खुलकर बीजेपी का समर्थन
किया था टीडीपी अटल सरकार के दौरान एनडीए
का हिस्सा थी टीडीपी मोदी सरकार के पहले

कार्यकाल में भी एनडीए का हिस्सा रही है
बीते कुछ सालों में आंध्र प्रदेश विधानसभा
चुनाव आम चुनावों के साथ ही हुए हैं
बीजेपी का जनाधार कम रहा है लेकिन टीडीपी

के गठबंधन की वजह से बीजेपी ने 2014 में
चार विधानसभा सीटें और दो संसदीय सीटें
जीतने में कामयाब रही 2014 विधानसभा चुनाव
में बीजेपी का वोट शेयर 2 फीदी और लोकसभा
चुनाव में 7 फीदी रहा लेकिन 2019 के

विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में
बीजेपी ने आंध्र प्रदेश में अकेले सभी
सीटों पर चुनाव लड़ा है और दोनों ही
चुनावों में पार्टी का वोट प्रतिशत 1 फीदी
से भी कम रहा इन दोनों चुनावों में बीजेपी

अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी दिखाए गए
चार्ट से आप समझ सकते हैं कि लंबे समय से
टीडीपी का साझेदार रहने के बावजूद बीजेपी
राज्य में अपना जनाधार मजबूत करने में
कामयाब नहीं हो पाई है वो टीडीपी की

छत्रछाया के बाहर नहीं निकल सकी 2024 के
लोकसभा चुनाव में अब यह देखना दिलचस्प
होगा दोस्तों कि क्या बीजेपी एक बार फिर
आंध्र प्रदेश में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी

या फिर अपनी सीटें बढ़ाने के लिए किसी
साझेदार को ढूंढे कीी केरला देखिए केरल की
राजनीति में बीजेपी एक कमजोर खिलाड़ी रहा
है हालांकि आरएसएस के कार्यकर्ताओं का बेस
केरल में मजबूत है 2014 से राज्य में बीते

चार चुनावों में बीजेपी का वोट प्रतिशत 10
से 13 फीदी के आसपास रहा वहीं 2019 के
लोकसभा चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत
सबसे ज्यादा 13 फीसद रहा पार्टी ने 2021

के विधानसभा चुनाव में मेट्रो मैन ई श्री
धरण को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया
था हालांकि इस चुनाव में भी पार्टी का
परफॉर्मेंस 2016 विधानसभा चुनाव की तरह ही
रहा बीजेपी के पास केरल में ऐसे नेताओं की

भारी कमी है जिनके नाम पर वहां के लोग
चुनाव में समर्थन दें इस कमी को मिटाने के
लिए बीजेपी प्रयास में जुटी हुई है
कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व
केंद्रीय मंत्री ए के एंटनी के बेटे अनिल
एंटोनी इस साल अप्रैल में बीजेपी में

शामिल हुए थे यह उसी रणनीति का हिस्सा है
केरल की राजनीति में शुरू से कांग्रेस और
सीपीएम का आदित्य रहा है जो अभी तक कायम
है केरल के लोग जिस तरह से राजनीति को
लेकर विचार रखते हैं उसे देखते हुए फ्यूचर
में कांग्रेस सीपीएम के आधित्य को चुनौती

देना बीजेपी के लिए पॉसिबल नहीं लगता
तेलंगाना देखिए पुडडू चैरी छोड़ दें तो
दक्षिण भारत में तेलंगाना में सबसे कम
सीटें हैं तेलंगाना में 119 विधानसभा
सीटें हैं वहीं लोकसभा सीटों की संख्या 17

है आंध्र प्रदेश से अलग होकर राज्य बनने
के बाद से ही तेलंगाना की राजनीति पर
बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव का एक
छत्र राज जारी है तेलंगाना में 2018 के

विधानसभा चुनाव में बीजेपी 7 फीदी वोट के
साथ महज एक सीट ही जीत पाई है लेकिन 2019
में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी चार
सीटों पर अपना परचम लहराने में कामयाब रही

बीजेपी का वोट शेयर भी 19.45 पर तक पहुंच
गया ऐसा कर बीजेपी ने केसीआर को फ्यूचर
में चुनौती देने की हुंकार भर दी थी थी
लेकिन पिछले डेढ़ दो साल में केसीआर ने
फिर से जनता की नब्स को पकड़कर पार्टी को

मजबूत कर लिया है केसीआर की लोकप्रियता
तेलंगाना में अभी भी इतनी ज्यादा है
दोस्तों कि किसी भी पार्टी के लिए चाहे
बीजेपी हो या कांग्रेस उसके आगे सब फेल है
वहीं बीजेपी बंदी संजय कुमार की पिछले तीन

से चार साल में कड़ी मेहनत की वजह से ही
तेलंगाना में थोड़ा बहुत पॉपुलर पाने में
कामयाब रही थी लेकिन फिर चुनाव से कुछ
महीने पहले बंदे संजय कुमार को प्रदेश
अध्यक्ष पद से हटाकर उसने अपने पैर पर

कुल्हाड़ी ही मार लिए खुद प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी बंदी संजय कुमार के
ऑर्गेनाइजेशनल स्किल्स की तारीफ कर चुके
हैं अब यूनियन टेरिटरी पुडुचेरी देखिए

पुडुचेरी एक छोटा सा केंद्र शासित प्रदेश
है दोस्तों जहां 30 विधानसभा सीटें हैं
यहां की राजनीति में दूर-दूर तक बीजेपी
दिखाई नहीं देती लेकिन 2021 के विधानसभा
चुनाव में प्रदेश में बीजेपी का वोट

प्रतिशत 14 फीदी रहा था तब बीजेपी ने एनआर
कांग्रेस और एआईएडी एमके के साथ मिलकर
चुनाव लड़ा था बीजेपी ने ने यहां जिन नौ
सीटों पर चुनाव लड़ा था और इनमें से छह

सीटों पर जीत दर्ज की थी दक्षिण भारत के
इन राज्यों को पॉलिटिकल सिचुएशन और
इलेक्शन एनालाइज से कुछ कंक्लूजन जरूर
निकाले जा सकते हैं देखिए प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी 2014
से केंद्र में सत्ता में है उस वक्त से
पार्टी का देशव्यापी जनाधार भी काफी बढा
है दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का भी

तमगा बीजेपी के साथ इस दौरान मिला लेकिन
बीजेपी को इस बात की कसक जरूर होगी कि वह
देश के दक्षिण राज में अपनी पकड़ नहीं
पढ़ा पाए बीजेपी 2014 से केंद्र की
राजनीति में छाई हुई है प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी की छवि और अपने विशाल संगठन
की वजह से बीजेपी उत्तर भारत के कई
राज्यों में जीत का परचम लहराती आई है
लेकिन जैसे ही दक्षिण भारतीय राज्यों के

बात आती है बीजेपी का यह असर गुम सा होता
दिखाई देता है इसकी वजह है कर्नाटक और
तेलंगाना को छोड़ दिया जाए तो दक्षिण के
राज्यों में बीजेपी के पास कोई बड़े कद का

नेता नहीं है ना ही किसी लोकल और बड़ी
पार्टी का सपोर्ट जिस की कमी हर राज्य में
देखने को मिली है बीजेपी ने जब भी एकाद
सीटें जीती हैं उसके पीछे किसी लोकल
पार्टी के सपोर्ट होता है या कोई बड़ा

लोकल चेहरा हालांकि बीजेपी कोशिश कर रही
है कि फिर से धीरे-धीरे दक्षिण भारत के हर
राज्य में सियासी जमीन मजबूत करें अब
देखने वाली बात होगी कि 2024 के लिए

बीजेपी क्या रणनीति लेकर आएगी आज की
वीडियो में फिलहाल बस इतना ही वीडियो अगर
आपको पसंद आया है तो वीडियो को लाइक शेयर
और

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