पुलिस के ड्रोन पर किसानों की पतंग | Police drones vs Farmers' kites - instathreads

पुलिस के ड्रोन पर किसानों की पतंग | Police drones vs Farmers’ kites

नमस्कार  हरियाणा
की सीमा पर शंभू बॉर्डर पर किसानों को
रोकने के लिए भीषण मोर्चा बांधा गया है तो
किसानों ने भी यहां मोर्चा संभाल लिया है
ड्रोन के इस्तेमाल से किसानों पर आंसू गैस
के गोले गिराए जा रहे हैं तो किसानों ने
भी ड्रोन को फंसाने के लिए रोकने के लिए
पतंगों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है पतंग
से डोन को घेरना शुरू किया है सरकार और

किसान में यही फर्क है
सरकार टेक्नोलॉजी के सहारे अपना तरीका
बदलती है किसान अपने दिमाग और हुनर के दम
पर मुकाबला करते हैं यह वीडियो शंभू
बॉर्डर का है आप देख सकते हैं कि किसानों
ने पतंग की डोरी से ड्रोन का काट निकालने

की कोशिश की है हरियाणा की तरफ से आने
वाले ड्रोन ने पहले दिन किसानों पर खूब
आंसू गैस के गोले बरसाए लेकिन पंजाब की
तरफ से किसानों ने जल्दी ही उपाय निकाल
लिया और अब आंसू गैस के धुएं के बीच उनकी
पतंग ड्रोन को फंसाने के लिए खोज रही हैं

किसानों के इस आइडिया ने आज ड्रोन चलाने
वालों को उलझन में डाला होगा पतंगों से
किसानों को कितनी कामयाबी मिली है इसकी
आधिकारिक सूचना हमारे पास नहीं है इसके
बाद भी खबरें मिलती रही कि आसू गैस के

गोले दागे जाते रहे यही नहीं इस ट्रैक्टर
पर पानी का टैंक लगाया गया है जैसे ही
आंसू गैस के आने का अंदाजा लगता है छोड़े
जाते हैं ट्रैक्टर टैंकर लेकर चल पड़ता है
पानी का छिड़काव करता है पानी की बौछार से
आंसू गैस के गोले को बुझाने का प्रयास

करता है किसानों ने चश्मे पहन लिए हैं और
आंसू गैस का असर कम करने के लिए इनो और
नमक का भी सेवन किया जा रहा है बड़ी
संख्या में गीली बोरियां लाई गई हैं इस
तरह से आंसू गैस के असर को कम करने और
रोकने के लिए किसानों ने अपने हुनर के दम

पर सबको चौका दिया इस रचनात्मकता पर पुलिस
भी मुस्कुरा रही होगी पुलिस ने भी नहीं
सोचा होगा कि जिस ड्रोन से व किसानों पर
हमले कर रहे हैं किसानों के पास उसे रोकने
का बेहद सस्ता और कारगर उपाय निकल आएगा हम
आज के वीडियो में बात करेंगे कि किस तरह

से किसानों के खिलाफ पहली बार ड्रोन का
इस्तेमाल हो रहा है रबर की गोलियों का
इस्तेमाल हुआ है मीडिया में कई जगह
रिपोर्ट में इस बात पर हैरानी जताई जा रही
है कि पुलिस के पास ड्रोन कब से आया इस

सवाल को लेकर इंडियन एक्सप्रेस द हिंदू की
रिपोर्ट में काफी कुछ जानकारी मिलती है
इंडियन एक्सप्रेस में वरिंदर और द हिंदू
में विजेता सिंह ने रिपोर्ट फाइल की है वे
बता रहे हैं कि यह पहली बार हुआ है कि देश

में कोई सरकार नागरिकों के प्रदर्शन पर
ड्रोन से अश्रु गैस के गोले गिरा रही है
शंभू बॉर्डर पर अर्ध सैनिक बलों की टियर
स्मोक यूनिट ने इन ड्रोनो से कई गोले
किसानों के ऊपर गिराए हैं इन ड्रोन का

निर्माण ड्रोन इमेजिंग एंड इंफॉर्मेशन
सर्विस ऑफ हरियाणा लिमिटेड दृश्य ने किया
है इनका उपयोग पाकिस्तान बांग्लादेश के
अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर सुरक्षा के लिए
इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट के सर्वे के

लिए फसलों की निगरानी के लिए किया जाता है
अब पहली बार किसानों को दिल्ली में घुसने
से रोकने के लिए किया जा रहा है इन ड्रोनो
को बीएसएफ की एक बैठक में पहली बार सामने
रखा गया उसी में बताया गया कि कानून
व्यवस्था को काबू करने में यह मदद कर सकते

हैं विजेता सिंह लिखती हैं कि अभी तक किसी
राज्य की पुलिस को इन्हें नहीं दिया गया
है अधिकारियों ने बताया है कि मुमकिन है
कि हरियाणा ने किसी निजी विक्रेता से
स्मोक लॉन्चर हासिल कर लिया हो एक्सप्रेस

के वरिंदर भाटिया से हरियाणा पुलिस के
सूत्रों ने कहा है कि ड्रोन को अर्ध सैनिक
बलों ने चलाया है किसानों ने कहा है कि
ड्रोन बार-बार उड़कर आते रहे और देर शाम
तक आंसू गैस के हमले करते रहे पंप गन के
उलट यह ड्रोन एक बार में कई ग्रेनेट गिरा

सकते हैं लॉन्च को रिमोट से कंट्रोल किया
जा सकता है शंभू बॉर्डर पर अर्ध सैनिक बल
पहली पंक्ति में है उसके बाद हरियाणा
पुलिस की तैनाती है ताकि अगर किसान पहली
पंक्ति पा कर भी गए तो पुलिस उन्हें रोक

सके पत्रकार विजेता सिंह ने यह सवाल उठाया
है कि अभी तक किसी भी राज्य की पुलिस को
ड्रोन नहीं दिया गया है तो क्या हरियाणा
की तरफ से ड्रोन का इस्तेमाल आधिकारिक है
या नहीं है ड्रोन के जरिए किसानों को
किसान नेताओं को या उनके ट्रैक्टर ट्रॉली

को खास तरीके से टारगेट किया जा सकता है
13 फरवरी को शंभू बॉर्डर पर 100 से अधिक
किसानों के घायल होने का दावा किया जा रहा
है पुलिस ने भी कहा है कि उसके भी दो
दर्जन से अधिक जवान और अधिकारी घायल हुए
हैं किसान नेताओं का कहना है कि 13 फरवरी

को गोलियां चली हैं और एक्सपायर हो चुके
आंसू गैस के गोले दागे गए हैं यह भी आरोप
लगाया गया है कि बड़ी संख्या में किसानों
को हरियाणा से उठाया गया है जिस तरह से
आपने देखा है कि जिस तरह से केंद्र की

सरकार हमारे ऊपर जबर कर रही है यह बुलेट
एसएलआर की बुलेट चलाई गई हमारे ऊपर इस तरह
से हंजू गैस जो हमारे ऊपर नहीं चलाना
चाहिए यह प्लास्टिक की गोलियां उन्होंने
इस्तेमाल की और यह रबड़ की गोलियां यह

हमारे ऊपर हो रहा 13 फरवरी को बीजेपी पूरे
दिन अपने
twittersignin.com छोड़े जा रहे हैं चारों
तरफ जब ड्रोन के इस्तेमाल की खबर फैलने

लगी तो बीजेपी की तरफ से एक पोस्टर जारी
किया जाता है और बीजेपी के इस पोस्टर पर
लिखा है किसान ड्रोन नया मेल परंपरा और
तकनीक का किसान ड्रोनो ने बदला खेती का
तरीका जिस समय किसानों पर ड्रोन से आंसू

गैस के गोले गिर रहे हो उसी समय बीजेपी का
यह पोस्टर किसान ड्रोन की खुशखबरी सुना
रहा था कि किसान ड्रोन ने खेती का तरीका
बदल दिया है क्या आपको नहीं दिखा कि किसान
ड्रोन के मुकाबले एक और ड्रोन है जिसने
बता दिया है कि किसानों के प्रति सरकार का

नजरिया अब कितना बदल गया है तो आपने देखा
कि एक तरफ किसानों पर ड्रोन से आंसू गैस
के गोले गिराए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ
बीजेपी किसान ड्रोन का पोस्टर जारी करती
है इससे किसानों की तरक्की हो रही है बता

रही है संयुक्त किसान मोर्चा इस बार इस
आंदोलन के साथ नहीं है मगर उनका बयान आया
है कि शंभू बॉर्डर पर किसानों का जिस तरह
से दमन हो रहा है उसकी निंदा करते हैं
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि किसान

आंदोलन एकजुट होकर लोकतांत्रिक अधिकारों
पर किसी भी हमले का प्रतिरोध करेगा अपने
बयान में संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान
संगठनों को रोकने के लिए राज्य शक्ति के
अति प्रयोग और लाठी चार्ज रबर बुलेट आंसू

गैस के गोले और सामूहिक गिरफ्तारी का
सहारा लेने के लिए मोदी सरकार का कड़ा
विरोध और निंदा की है कहा है कि आश्चर्य
की बात है कि प्रशासन द्वारा किसानों के
ऊपर आंसू गैस के गोले गिराने के लिए ड्रोन

का इस्तेमाल किया गया एसकेएम ने मोदी
सरकार को चेतावनी दी है कि अपने वाजिब
मांगों को लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर
लोगों के साथ सरकार या देश के दुश्मन जैसा

व्यवहार ना करें संयुक्त किसान मोर्चा ने
16 फरवरी को अपने पाले के तमाम संगठनों के
साथ पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन करने का
आह्वान किया है कहा है कि सभी समा
विचारधारा वाले किसान संगठन सामान्य

मुद्दों के आधार पर संघर्ष की तैयारी में
आगे
आए हमारा सरकार से कहना है कि सरकार संयम
बरते इस तरह से किसानों के ऊपर ज्याती ना
करे यह कोई विदेशी किसान नहीं है कोई यह

सीमा का बॉर्डर नहीं है जहां पर इस तरह का
व्यवहार किसानों से किया जा रहा है तो
हमारा सरकार से कहना है कि सरकार संयम
बरते और सरकार इस तरह से
ना उए कि फिर कोई अगला कोई कदम ऐसा हो जो
फर सरकार को संभालना मुश्किल हो जाए

और यह जो मैटर है यह बातचीत से सुलना
चाहिए क्योंकि जो मांगे हैं वह मांगे पूरे
देश के किसानों की है और सही है कोई मांगे
गलत नहीं है कोई वो ऐसा नहीं मांग रहे कि
जिससे कोई देश उजड़ रहा हो या कोई अपने
स्वार्थ में मांग रहे

हो किसानों की मांगे हैं किसानों की
मांगों पर के ऊपर सरकार को सुहारत पूर्ण
व्यवहार से बातचीत करके बातचीत के माध्यम
से निपटाना चाहिए और यह मांगे माननी चाहिए
सारी सही है और इस तरह से व्यवहार जैसे

कोई विदेशी हो जैसे कोई हम सीमा पे खड़े
हो इस तरफ फोर्स खड़ी है दूसरी तरफ किसान
खड़ी है गोले प गोले दाग रहे हैं यह
व्यवहार जो है ये बिल्कुल गलत है और हम जो

है वो किसानों के साथ में है तो सरकार इस
तरह का व्यवहार ना करे और सही तरीके से
बात करें सही तरीके से निपटाए सही तरीके
से मांगे मानने जो पीछे भी सरकार ने वादे

किए थे उनसे ही मुकरी है जो बिल्कुल गलत
है और हम पूरी तरह से देश के किसानों के
साथ में हैं शंभू बॉर्डर पर क्या चल रहा
है खनौरी नाका पर क्या हुआ इसे लेकर खबरें
कम आने लगी हैं इंटरनेट इस तरह से बंद

किया गया है कि बहुत मुश्किल से वीडियो आप
आ रहे हैं सामान्य कॉल करना भी मुश्किल
होता जा रहा है वीडियो भेज ने के लिए
पत्रकारों को 20-20 किलोमीटर भागना पड़
रहा है आज भी सरकार की तरफ से

सरकारों को इस तरह से रोका जा रहा है इसका
मतलब है कि सरकार तेजी से
जीविका बंद होगी उसे भूखा रखा जा रहा है
ताकि आपको भी सूचनाओं को लेकर भूखा रखा जा
सके अगर इस तरह से पत्रकारों को रोकने की
कोशिश होगी तब खबरों के आने की बची खुची

उम्मीदें भी समाप्त हो जाएंगी क्या इस देश
में गोदी मीडिया ही बचा रह जाएगा अब
मीडिया भी इस पर चुप रह जाता है रिपोर्ट
करने वाले पत्रकारों के अकाउंट बंद किए जा
रहे हैं तो उसी

इस तरह के ट्वीट्स में लिखा जा रहा है कि
खालिस्तानिस दिल्ली की ओर आ रहे हैं इन
एंटी नेशनल तत्त्वों के खिलाफ सरकार को
सख्त कदम उठाने चाहिए खालिस्तानिस का कोई
समर्थन नहीं मिलना चाहिए किसानों की

तैयारी के वीडियो ट्वीट करके लिखा जा रहा
है कि इसके लिए कौन पैसे दे रहा है साफ है
कि खालिस्तानी काम कर रहे हैं ना कि किसान
आंदोलन के पाकिस्तान फंडिंग की बात भी की
जा रही है बे बुनियाद दावे किए जा रहे हैं

कि आंदोलन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी
द्वारा आयोजित है जबकि किसान खुद कह रहे
हैं कि वह किसी के साथ नहीं इसी तरह संसद
हमले के आरोपियों को विपक्ष और कांग्रेस
से जोड़ा जाने लगा अभी तक इसकी जांच कहां

पहुंची है कुछ जानकारी नहीं नवंबर 2020
में जब किसान दिल्ली आए तब भी यही सिलसिला
चला इस बार भी जारी है पता चल रहा है कि
सरकार की नजर में किसानों की क्या हैसियत
रह गई है और जनता के एक वर्ग में भी

किसानों के प्रति लोगों का नजरिया खराब
किया जा चुका है जिस तरह से हमारी
परसेप्शन बनाई जा रही है मीडिया में
खालिस्तान का अटैक लगाया जा रहा प्रो
लेफ्ट बोला जा रहा है प्रो कांग्रेस बोला

जा रहा है और प्रो पंजाब सरकार बोला जा
रहा है कि यह उत्साहित कर रहे हैं ऐसी कोई
बात नहीं हम जबजब हम तो यह कहते हैं कि जो
देश में नीतियां लागू है कांग्रेस लेके
आने वाली है और सीपीएम सीपी सीपीआई सीपीएम

का राज पश्चिमी बंगाल में 35 साल रहा उनका
और अन्य राज्यों का हमको अधिक फर्क नहीं
समझते हैं तो हम जैसे हम सब सरकारों की
आलोचना करते हैं आम आदमी भगवंत मान सरकार
की भी वैसी आलोचना करते हैं हमसे किसी का
कोई लेना देना नहीं हम देश के किसान हैं

खेत मजदूर हैं और अपनी मांगों के लिए
संघर्ष करते हैं इस तरह से किसानों का
दिल्ली पहुंचना अब मुमकिन नजर नहीं आता है
बातचीत के सफल होने के आसार भी नजर नहीं
आते 15 फरवरी को भारतीय किसान यूनियन

उग्रह ने पंजाब में रेल रोकों का आह्वान
किया है और उसके अगले दिन संयुक्त किसान
मोर्चा और तमाम मजदूर संगठन भी एक नए तरह
का आंदोलन करेंगे उस आंदोलन का स्वरूप
क्या होगा इसका अंदाजा अभी नहीं है सरकार

ने किसानों से बात करना बंद नहीं किया है
और इतना सब होने के बाद भी किसान सरकार से
बात कर रहे हैं इस बीच कुरुक्षेत्र के पास
शाहाबाद में कीले गाड़ी जा रही हैं यह
कीले नहीं है बल्कि सरिया की नोक है जिन

मजदूरों के हक की बात किसान और मजदूर कर
रहे हैं उन्हीं मजदूरों से सड़कों पर
कीलें और तारे बिछवाल हैं इससे पता चलता
है कि सरकार बातचीत के नाकाम होने को लेकर
कितना आश्वस्त है उसे अंदाज हो गया होगा

करने पर जोर देंगे तब यही कीले और सीमेंट
की दीवारें काम आएंगी एक तरह से सरकार
पहले से ही पोजीशन ले रही है अगर आंदोलन
शुरू होने के पहले बातचीत शुरू हो गई तब
सरकार को एमएसपी के ऊपर कुछ ठोस प्रस्ताव

देने चाहिए थे किसान आंदोलन को रोकने के
नाम पर भारत में बैरिकेड का तरीका पूरी
तरह बदल गया है बैरिकेड लगाने का अपना एक
इतिहास है यह कब और कहां से शुरू हुआ पहली
बार टाइप के सवालों का दावा हम नहीं करते

मगर 1830 के दशक में यूरोप के कई देशों
में बैरिकेडिंग काफी फैल गई थी तब पुलिस
और सेना बैरिकेड नहीं लगाती थी जिस तरह से
आज के समय में पुलिस सड़कों को खोदकर कीले
गाड़ करर और सीमेंट की दीवारें खड़ी कर

बैरिकेड लगा रही है यही तो फर्क आया है
मगर 1830 के यूरोप में जनता बैरिकेड लगाया
करती थी ताकि पुलिस और राजशाही की सेना
उसके मोहल्लों में घुस ना आए वह बैरिकेड
के सहारे आगे बढ़ा करती थी और राजशाही को

चुनौती देती थी बैरिकेड लगाने के लिए लोग
अपने घर की टूटी कुर्सियां पलंग दरवाजे ले
आया करते थे उसके पीछे हथियार लेकर पुलिस
और सेना का मुकाबला करते थे तब लोग
बैरिकेड के उस पार हमला करने के लिए तैयार

पुलिस और सेना से आह्वान करते थे कि तुम
उस तरफ क्यों हो तुम्हारी जगह तो हम जनता
के बीच हैं कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि
पुलिस और सेना के लोग बैरिकेड तोड़ करर उस
तरफ चले गए जिस तरफ जनता थी और जनता से

जाकर मिल जाते थे कई जगहों पर इस कारण
क्रांति सफल हुई 1830 के दशक में पुर्तगाल
बेल्जियम फ्रांस स्पेन जर्मनी इटली में
क्रांति हुई कहीं-कहीं असफल भी हुई विक्टर
हुगो का एक मशहूर उपन्यास ले मिजर बल है
इस पर फिल्म भी बनी है य पर आप इस फिल्म

को देख सकते हैं इस फिल्म में आपको दिखेगा
कि जनता कैसे बैरिकेड लगाती है भारत की
वामपंथी राजनीति में एक प्रचलित नारा है
प्रतिवाद प्रतिरोध के लिए कॉमरेड खड़ा करो

खड़ा करो बैरिकेड यानी बैरिकेड का मतलब
यही है कि जनता और कॉमरेड बैरिकेड खड़ी
करेंगे पुलिस और सेना नहीं अब बैरिकेड का
मतलब बदल गया है बैरिकेड पुलिस लगाती है
इसकी रणनीति और इसमें इस्तेमाल होने वाली

चीजें भी बदल गई किसानों को रोकने के लिए
सरकार ने बैरिकेडिंग के सारे मानक बदल दिए
रास्तों को खोद दिया गया कीले गाड़ दी गई
कटीली तारें लगा दी गई दीवारें खड़ी कर दी
गई 2020 में ही जब किसान दिल्ली आए तब साफ

हो गया कि यहां से किसान और सरकार के
संबंध बदल जाते हैं किसानों को अन्नदाता
तो कहा जाएगा मगर तभी तक जब तक वे चुप
रहेंगे और सब कुछ सहते रहेंगे जैसे ही
बोलेंगे

अनाज रख दिया वहीं भोजन किया नंगे बदन हो
गए 107 दिनों तक दिल्ली में उन्होंने
प्रदर्शन किया था 2018 में महाराष्ट्र में

हजारों किसानों ने लॉन्ग मार्च किया मुंबई
तक आए 2018 में देश भर के किसान दिल्ली
में जमा हुए 202021 में दिल्ली की सीमाओं
पर किसान एक साल तक बैठे रहे मार्च 2023
में किसानों ने महाराष्ट्र में फिर से

लॉन्ग मार्च किया मगर बीच से ही वापस हो
गए इन सभी में किसानों की मांगे मिलती
जुलती रही हैं मगर तब भी किसानों की
मांगों को लेकर ठोस समाधान नहीं निकाला

गया दरअसल अब वोट का इंतजाम हो चुका है
भारत की राजनीति में इस तरह के आर्थिक
मुद्दों की मौत हो चुकी है एक ही मुद्दा
बचा है धर्म इसके आगे अब जनता होना भी
मुद्दा नहीं रहा इसलिए इतनी कीलों इतने

कांटों को देखकर भी टीवी के सामने जनता
बनने का ढोंग करने वाला मिडिल क्लास अब
शांत है हाउसिंग सोसाइटी की आंटियों और
अंकिल को अब कुछ भी इसमें गलत नहीं लगता
वह अब गलत बोलने की रस्म अदायगी भी नहीं
करना चाह

किसानों की जरूरत नहीं उनके पुराने नेताओं
के सम्मान से काम चल जाएगा खेती का संकट
अभी जारी रहेगा बस अब किसानों के बीच से
खबरें पहुंचाने का काम मुश्किल हो जाएगा

धर्म की राजनीति में सहयोग किसानों का भी
रहा है जब भी राजनीति में धर्म आता है
इसको लिखिए पर्स में रखिए जब भी राजनीति
में धर्म आता है राजनीति खत्म हो जाती है

कबाड़ हो जाती है लोकतंत्र का सत्यानाश हो
जाता है और सजा सभी को बराबर मिलती है जो
उसमें शामिल हैं

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