बड़ी बहस:गुप्त चुनावी चंदे पर मोदी सरकार को 'सुप्रीम' फटकार!विपक्ष को चाहिए तेजस्वी जैसी धार! - instathreads

बड़ी बहस:गुप्त चुनावी चंदे पर मोदी सरकार को ‘सुप्रीम’ फटकार!विपक्ष को चाहिए तेजस्वी जैसी धार!

आज आपके सामने तीन धमाकेदार
मुद्दे मुद्दा नंबर एक गुप्त चुनावी चंदे
पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला भाजपा
को करारा झटका मुद्दा नंबर दो एक तरफ
किसान से बातचीत करते हैं और दूसरी तरफ
आंसू गैस के गोले छोड़ते हैं और मुद्दा
नंबर तीन विधानसभा में बेशक महागठबंधन हार

गई हो मगर तेजस्वी याद ने बिहार की
राजनीति में जोरदार दस्तक दी है इन तीनों
मुद्दों की चर्चा करेंगे मगर शुरुआत हम
इलेक्टोरल बंड से करने वाले हैं दोस्तों
सीक्रेट इलेक्टोरल बंड्स पर सुप्रीम कोर्ट
का अहम फैसला आया है और मैं आपको बतलाना

चाहूंगा इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने
इसे असंवैधानिक करार दिया है और यह कहा है
कि बंद कीजिए सीक्रेट इलेक्टोरल बंड्स जो
201819 में वजूद में आए थे मैं आपको पहले
बता दूं खबर क्या है काले धन पर अंकुश
लगाने के उद्देश्य से सूचना के अधिकार का

उल्लंघन उचित नहीं है चुनावी बंड योजना
सूचना के अधिकार और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन
का उल्लंघन है राजनीतिक दलों द्वारा
फंडिंग की जानकारी उजागर ना करना उद्देश्य
के खिलाफ है चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई

चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच
न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पिछले साल
2 नवंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित
रख लिया था इसके अलावा फैसले में य भी कहा
गया है कि पॉलिटिकल कंट्रीब्यूटर्स गेट

एक्सेस दिस एक्सेस लीड्स टू पॉलिसी मेकिंग
बिकॉज ऑफ नेक्सस बिटवीन मनी एंड वोटिंग
इसका मतलब क्या हुआ कि जो व्यक्ति
राजनीतिक चंदा देता
है नीति निर्धारण में उस उद्योगपति को जगह

मिलती है और यह गठजोड़ सामने उभर कर आता
है यह भी कहा गया है कि राइट टू
इंफॉर्मेशन सूचना के अधिकार का साफ तौर पर
उल्लंघन है आगे यह भी कहा गया है कि

इलेक्टोरल बॉन्स पूरी तरह से
अनकंस्टीट्यूशनल है तो एक ऐतिहासिक फैसला
मगर कुछ लोग यह कह सकते हैं कि हुजूर
आते-आते बहुत देर कर दी क्या इस मुद्दे का
अपन शुरुआत करेंगी

भाषा एक बात बहुत साफ है अभी सार की 6 साल
लग गए मिलोट को इलेक्टोरल बंड्स पर फैसला
देने में और इस बीच जिस तरह से इसके खिलाफ
एक माहौल बना वह भी एक मुझे लगता है बहुत
इंपॉर्टेंट कारण था लेकिन अगर अभी भी

डिस्क्लोज हो कि किन लोगों ने दिए एसबीआई
से पूछा जाए कि लिस्ट कम से कम पब्लिक में
आए तो थोड़ा सा पॉलिटिकल प्रेशर और पड़ेगा
चुनाव तो अब आ ही रहे हैं तो इलेक्टोरल

बंड्स जो मिले थे जिसको वो कहां गया पैसा
कहां है पॉलिसी कहां है इस पर अगर चुनाव
होगा तो कारगर रहेगा अभिसार क्या है इस पर
आपका
पंच इस मुद्दे पर मेरा पंच यह है कि

व्यवस्था को सिस्टम को कैसे अपने सामने
नतमस्तक किया जाए सीक्रेट इलेक्टोरल बंड्स
इसकी आदर्श मिसाल है क्योंकि जब 2018-19
में यह योजना आ रही थी इसका विरोध रिजर्व
बैंक ऑफ इंडिया ने किया था चुनाव आयोग ने

किया था मगर उसे धता बताते हुए यह वजूद
में आया था सुप्रीम कोर्ट जागी मगर हुजूर
आते-आते बहुत देर कर दी मुकुल बताएं क्या
है इस मुद्दे का
पांच मैं तो कहूंगा कि थैंक यू सुप्रीम

कोर्ट देर से ही सही लेकिन एक अच्छा फैसला
दिया हालांकि इसे थोड़ा और पहले दिया जाता
तो बेहतर होता क्योंकि इस समय जब अप्रैल

मई में चुनाव होने हैं तो चंदे का खेल
पूरा हो चुका है शुक्रिया आपका मुकुल भाषा
जब यह योजना वजूद में आई थी और न्यूज़
क्लिक पर ही मुझे याद है मैंने आज से 5
साल पहले इस पर कार्यक्रम भी किया था और

उसका जिक्र मैं बार-बार भी करते रहा हूं
उस वक्त चुनाव आयोग ने कहा था कि ये
इंबैलेंस लाएगा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने
कहा था यह इंबैलेंस लाएगा और वो दिख भी

रहा है क्योंकि हम देखते हैं रहस्यमय
तरीके से किस तरह से विधायक जो हैं एक राज
से दूसरे राज प्राइवेट प्लेंस में लाए
जाते हैं अब भाई वो पैसा कहां से आ रहा है
यह सब पैसा एक काले कुएं में जा रहा था
जिसकी कोई जवाबदेही नहीं है यह एक आदर्श

मिसाल है कि आप चुनाव आयोग को धता बताएं
आप रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को दरकिनार कर
दें और यह सब हरकतें और आप सब कुछ बता दें
कि ये जो लोकतंत्र है लोकतंत्र मतलब
पारदर्शी व्यवस्था जहां पर जनता को पता
होना चाहिए कि लोगों के पास और सत्ता में

जो बैठे हैं उनके पास धन और बाकी सारी
चीजें कहां से आ रही है तो आपने पूरी तरह
से इसे एक बंद दरवाजे में कर दिया सारी
डील हो रही है ग्राफ बता ही रहा है भाजपा
के पास सबसे ज्यादा पैसा गया मुझे बहुत

दुख इस बात का है अभी सार 6 साल से पिछले
6 साल से हम तमाम लोग आप बात कर रहे हैं
आरबीआई की आप बात कर रहे हैं अ चुनाव आयोग
की मैं कह रही हूं तमाम विपक्षी पार्टियां
विपक्षी पार्टियों से ही लोकतंत्र चल रहा
है सारे के सारे लोग कह रहे थे कि यह एक

इस तरह की घूस की व्यवस्था बन गई है
ब्राइब की व्यवस्था बन गई है क्योंकि जिस
तरह से प्रोजेक्ट पे प्रोजेक्ट एक ही
कंपनी के पास जा रहे थे ये सारा जो खेल चल
रहा था मिलोट को इतना समय क्यों लगा और
उन्हें 6 साल और वो भी देखिए मुझे बहुत
दुख इस बात का भी और चिंता इस बात की है

आप नवंबर में इसे रिजर्व करते हैं बिल्कुल
दिसंबर जनवरी सारा का सारा चुनाव का पीक
मौसम जब हैड फेब में आ गए हैं आप और सारा
का इलेक्टोरल बंड्स में पैसा अकूत पैसा जा
रहा है और उसके बाद आपको लगता है कि आपको
साख बचानी है तो मिल 6 साल की कोई जरूरत

नहीं है इस मुकुल मुकुल क्या आपको लगता है
कि इससे कोई असर पड़ने वाला है क्योंकि
देखिए 6 साल से चल ही आ रहा है और हमने
बाकायदा आंकड़े बताए हैं कि वो जो सीक्रेट
इलेक्टोरल बंड्स का जो पैसा था 90 फीदी
भाजपा की जेब में जाता था अब अगर हो भी

गया तो क्या क्योंकि 6 साल से आप इसका
फायदा उठा ही रहे हैं हां इसमें एक बात
बता दूं कि जनवरी 2018 में ये लागू हुआ
लेकिन 2017 में ही इसे चुनौती दे दी गई थी
और मजेदार ये है कि 2 नवंबर 2023 को

रिजर्व किया गया फैसला तो ये फैसला रिजर्व
करना उस समय आपको याद होगा याद दिला दूं
कि पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे थे
अगर उसी समय तत्काल रोक लगती तो शायद कुछ
फायदा होता अब आते-आते अब आकर ये फरवरी
में इस पर वो हो रहा है तो अब जो था
चुनावी चंदा देने का खेल या रिश्वत देने

का खेल जिस रिश्वत थी ये पूरी की पूरी वो
पूरा हो चुका है एक तो ये फिर मैं एक अपने
दर्शकों को सावधान भी कर दूं और मुझे जो
लगता है कि बीजेपी अब किसी भी बात से उसे
डर या लिहाज नहीं रहा है तो बीजेपी और
उसके चंदा दता अगर सबसे बड़ा इसमें सवाल
है कि गुप्त था अगर गुप्त हटा द वो अगर कह

दे ओपनली देंगे तो अब ना तो बीजेपी के
दानदाताओं को कोई डर है ना बीजेपी को कोई
डर है कि कौन किसे चंदा दे रहा है इसलिए
ये चंदे का खेल अभी बंद नहीं होगा हम ये
इसी तरह बढ़ेगा हो सकता है कि गुप्त की

वजय क्योंकि देखिए हो क्या रहा है यहां पर
भाषा आप एजेंसीज का इस्तेमाल करते हैं उन
उद्योग समूहों के खिलाफ जो विपक्ष को
समर्थन देते हैं सीसीडी की एक मिसाल है
उनके प्रमुख को सुसाइड करना पड़ा था

एजेंसी जिन्हो ने इतना परेशान किया था अगर
आप इस पर गौर करें जो मुद्दा यहां सुप्रीम
कोर्ट उठा रहा है कि भाई औद्योगिक समूह एक
पॉलिटिकल पार्टी को पैसा देते हैं और

पॉलिसी मेकिंग में उन्हें अनड्यू
प्रेफरेंस दिया जाता है ये अपने आप में एक
बहुत बड़ा मुद्दा है देख ये सिंपल सी बात
है अगर इसे आप हिंदी में कहिए तो जो
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है और लिखा है इसका
मतलब कि यह भ्रष्टाचार का एक सागर था

जिसका पूरा का पूरा आपने रास्ता सीलिंक
जैसे मुंबई में बना है ना कि वहां से वहां
तक जाइए आप और अ बहुत फटाफट पहुंच जाते
हैं तो यह भ्रष्टाचार का सीलिंग था

इलेक्टोरल बॉन्ड्स कि आप यहां से पैसा
दीजिए और वहां से आपको प्रोजेक्ट प हरि
झंडी मिलती है अगर कायदे से जांच हो कायदे
से जांच तो आपको पता चलेगा कि जो पैसा है
जो डिमांड अब उठ रही है कि एसबीआई को ओपन

करना चाहिए नाम हम बताया जाए कि कौन लोग
थे जो पैसा दे रहे थे और ये अनड्यू
प्रेफरेंस ले रहे थे जिनको परियोजनाएं
मिली तब मुझे लगता है कि भारतीय लोकतंत्र

का सबसे बड़ा राजनीतिक घोटाला सामने आएगा
कि क्योंकि हमने देखा है पॉलिसी में कैसे
चेंज हुआ है एनवायरमेंट क्लीयरेंस को कैसे
खत्म कर दिया गया एक के बाद एक परियोजनाएं
ऐसे चुटकियों में पास हुई हैं देश के सारे
बंदरगाह किसके पास हैं एयरपोर्ट किसके पास
हैं सारी जनता जानती भाषा में कहूंगा कि

कांग्रेस और राहुल गांधी लगातार उठाते रहे
मामला और कॉरपोरेट को लेकर अडानी अंबानी
का नाम लेकर मुझे लगता है अब इस देश को
कोई फर्क पड़ेगा कि अगर उसे पता चल जाए कि
मोदी जी को अडानी ने इतना पैसा दिया

अंबानी ने इतना पैसा दिया और वो देंगे
मुझे लगता है कि अब कुछ आगे हो गया है
चीजें और इस मुद्दे से आम जनता कुछ नहीं
नहीं मैं दूसरी बात कह रही हूं मैं पैसे
की बात नहीं कह रही मैंने कहा यहां
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ पैसे की बात नहीं

की है एक भ्रष्ट आचरण की बात की है कि
आपने रिश्वत दी दूसरे को और दूसरे ने आपके
लिए काम किया ये जो लिंक सुप्रीम कोर्ट की
यह लाइन एस्टेब्लिश कर रही है यह अपने आप
में अभूतपूर्व है जहां आप बता रहे हैं कि
जो क्योंकि पॉलिटिकल सिस्टम है कि आप

पॉलिसी आपको चाहिए आपको यह परियोजना चाहिए
यह खान चाहिए और आपकी कंपनी पै वो तो भाषा
हम लगातार देख रहे हैं ना कि किस तरह से
एक एयरपोर्ट पर एक खास औद्योगिक समूह का

कब्जा होता है मगर फिर उस औद्योगिक समूह
पर एजेंसीज दबाव डालती हैं और रहस्यमय
तरीके
से वही एक औद्योगिक समूह को तमाम योजनाओं

में तरजीह दी जाती है मगर मैं इसको आगे
बढ़ाना चाहता हूं आज जब कांग्रेस ने
प्रतिक्रिया दी भाषा तो उन्होंने कहा कि
यह सही मायने में न्याय है व साथ ही जिक्र
कर रहे हैं वीवी पट का भी मैं अपने

मांग कर रहा है कि जब आप ईवीएम के जरिए
वोट देते हैं तो जो वीवीपैट यानी जो पर्चा
निकलता है उसे उसका मिलान आप अपनी वोट के
साथ करें और फिर उसे एक डब्बे में डाल दें
ताकि अगर कोई विवाद हो तो उसे मैच किया जा

सके विवाद के साथ ये सिंपल सी मांग है
चुनाव आयोग मानने को तैयार नहीं और ये
ईवीएम की जो पूरी की पूरी कल्पना है ना उस
समय से वीवीपैट है ये ऐसा नहीं है कि

अचानक आया है और ये शुरू में मैं तो उस
प्रेस कॉन्फ्रेंस को मैंने अटेंड किया था
जहां पर बताया गया था कि वीवी पैट के जरिए
हर एक वोटर के पास य अधिकार होगा पता करने
का कि बटन सही जगह दबा है कि नहीं तो

सोचिए इतना लंबा प्रक्रिया उसको हो गए अब
तो फिर चुनाव आ रहा है और अब फिर बताया जा
रहा है कि अभी विवी पैट नहीं हो सकता वो
भी तब जब ईवीएम बनाने वाली कंपनी में
भाजपा के डायरेक्टर्स हो जाते हैं आप

जानते हैं मुकुल बुनियादी मुद्दा क्या है
मेरे लिए मेरे लिए यहां पर बुनियादी
मुद्दा इस फैसले का यह है कि जिस निष्पक्ष
चुनाव की हम परिकल्पना एक लोक ंत्र में
करते हैं यह उसकी तरफ उठाया गया एक सार्थक
कदम है चाहे वह सीक्रेट इलेक्टोरल बंड्स
हो या फिर वीवीपैट को लेकर विपक्ष की
चिंता फ्री एंड फेयर इलेक्शन ट्स द बॉटम

लाइन हां यह सबसे अच्छी बात है पर लेकिन
हमें जैसे देखा हमने कि चुनाव आयोग ने
पहले चिंताएं जताई थी पर अब का चुनाव आयोग
तो चुनाव आयोग ही जब एक कब्जे में आ जाएगा
तो फिर कौन चका चुनाव आयोग तो सिर्फ
विपक्ष पर ठीक फता है तो मैं वही कह रहा

हूं निष्पक्ष चुनाव की तरफ एक कदम है
सुप्रीम कोर्ट का और य अच्छा पर और भी
लोकतंत्र में सुधार और चुनाव में सुधार की
और भी जरूरत है और उसम सुप्रीम कोर्ट को
एक निर्णय लेने चाहिए और निगाह बनाए रखनी

पड़ेगी अभ सर क्योंकि जो 6 साल का पीरियड
आपने दिया 6 साल क्योंकि आप देखिए कि आने
से पहले जब पूरी की तैयारी चल रही थी
इलेक्टोरल बंड्स की तब से लोग कह रहे थे
कि यह अलोकतांत्रिक है मतलब
अनकंस्टीट्यूशनल तो है ही लेकिन

अलोकतांत्रिक है कि आपकी कंपनी को फंड कौन
कर रहा है पार्टी फंड कहां कर रही है इसके
बारे में जानकारी ना हो तो ये पूरे
भ्रष्टा प जो 6 साल पर्दा पड़ा रहा यह साफ
तौर पर भ्रष्टाचार पर पर्दा पड़ने की एक

पूरी मशीनरी तैयार की थी जिस पर इस समय
फैसला आया जब इसका कितना मायने रहेगा
कितना इस पर चेक होगा और बिल्ली की गले
में घंटी कौन बांधे विसार यह देखना बहुत
इंपोर्टेंट चलिए अब हम रुख करना चाहेंगे
अपने दूसरे बड़े मुद्दे का और वह है किसान

आंदोलन किसान जो कोशिश कर रहा है विरोध
प्रदर्शन करने की शांतिपूर्ण विरोध
प्रदर्शन करने की मगर एक तरफ तो सरकार
उससे बातचीत कर रही है और दूसरी तरफ तरफ
उसे बदनाम भी कर रही है उस पर आंसू गैस के
गोले भी छोड़ रही है और फिर प्रचार तंत्र

भी उसके खिलाफ लग रहा है क्या है इस
मुद्दे का पंच बताएंगे
मुकुल अभिसार मेरा यह कहना है कि मोदी जी
यह सोचते थे कि मंदिर की राजनीति में उलझ
करर देश की जनता सब कुछ भूल जाएगी लेकिन
किसानों और खेत मजदूरों ने एक बार फिर

साबित किया है कि पेट का सवाल और हक का
सवाल आज भी सबसे बड़ा सवाल है भाषा क्या
है इस मुद्दे का
पंच बिलकुल साफ है अभी सार जो भारतर रत्न
स्वामीनाथन की बेटी मधुरा स्वामीनाथन ने
कहा कि किसानों को आतंकवादी मत समझिए

लेकिन मोदी जी बिल्कुल दूसरे ढंग की तकनीक
इस्तेमाल कर रहे हैं देश में संभवत पहली
बार अन्न दाताओं पर द्रोण से आंसू गैस की
वर्षा की गई है तो यह बता रहा है कि शासन
किस तरफ जा रहा है अन्य दता आपकी ही

गारंटी को मांगने आए थे मोदी जी और आपने
देखिए किस तरह से उनके लिए कीलों की सेज
सजाई है यह बता रहा है कि 2024 उतना आसान
नहीं होगा अभिसार आपका क्या पंच है
अभिसार इस मुद्दे पर मेरा जो पंच है वो
बहुत ही सिंपल है वो यह कि आखिरकार विरोध

प्रदर्शन को क्रिमिनलाइज करना उसे
अपराधीकरण करना उसे गुनाह बता देना चाहे
किसान मैदान में उतरे उसे पहले से ही
बदनाम करो विद्यार्थी मैदान में उतरे उसे
बदनाम करो उसे देशद्रोह के साथ जोड़ो
कोशिश यही है संगोल युग में कि विरोध
प्रदर्शन ना हो पाए सत्याग्रह ना हो पाए

जो कि इस देश की रीड रहा है आप देखिए
कितना कितना अजीबोगरीब वो मंजर था आप
ड्रोन के जरिए मुकुल आप जो है आंसू गैस की
गोले छोड़ रहे थे भई ये एलओसी नहीं है ये
आपके अपने नागरिक हैं मगर मुझे जो दोहरे

मापदंड ये दिखाई देता है कि एक तरफ तो
आपने पूरा प्रचार चलाया हुआ है कि ये
देशद्रोही हैं खालिस्तानी हैं आप सुविधा
जनक वीडियोस उठा के उसका प्रचार कर रहे
हैं फिर आप बातचीत क्यों कर रहे उसे जी

यही विरो है यही विरोधाभास है और वो कह
रहे हैं कि हमारा सरकार के दरवाजे खुले
हैं लेकिन किसान यही पूछ रहा है कि दो जब
2021 में आंदोलन स्थगित हुआ तो तब से
कितने दरवाजे खुले थे किसान लगातार आंदोलन
कर रहा था यह कोई एकदम से अचानक से आंदोलन
नहीं हुआ है उसने अक्टूबर नवंबर दिसंबर

जनवरी 26 जनवरी पर उसने ट्रैक्टर परेड
निकाली शपथ ली उसने बताया उसने 16 तारीख
16 फरवरी ग्रामीण भारत बंद का कॉल दिया
लेकिन इस सरकार ने कोई बात नहीं की अब जब
बिल्कुल किसान 13 फरवरी को कहा दिल्ली चलो
तब सरकार के मंत्री जाग रहे हैं और मैं

अपने दर्शकों से भी कहना चाहूंगा शायद
चलिए इस बहाने आपको पता लगा होगा कि नए
कृषि मंत्री कौन है क्योंकि नरेंद्र तुमर
जा चुके हैं उनका नाम उस समय पता लगा था

और अब अर्जुन मुंडा है ये भी अब पता चला
वरना सारे मंत्री सारे संत्री सिर्फ और
सिर्फ मोदी जी हैं जो अबू धाबी में मंदिर
का उदघाटन करने अच्छा भाषा मुझे सबसे जो
अजीबो गरीब लगती है प्रचार तंत्र की बात
कि इसे विपक्ष जो है वो स्पांसर कर रहा है

विपक्ष इसके पीछे है मैं देख रहा था अडानी
के जो चैनल है वो उसने लगातार पूरा लंबा
चौड़ा लेख किया पूरा उसम प्रोपेगेंडा
चलाया विपक्ष इसके पीछे अरे तो विपक्ष है
तो क्या है जी बिल्कुल इस देश की परंपरा
रही है विरोध प्रदर्शनों को साथ विपक्ष

देता है क्या हम नहीं जानते कि अन्ना
आंदोलन के पीछे कौन सा विवेकानंद फाउंडेशन
था वो विवेकानंद फाउंडेशन कौन चलाता है
सवाल यह कि अगर विपक्ष भी है तो कोई गुनाह
नहीं है भाई अ नहीं विपक्ष पश्चिम बंगाल
में विपक्ष के तौर पर बीजेपी बातें उठा

रही है ना बिहार में भी उठा रही थी इससे
पहले तमाम बातें तो जहां व पक्ष है वो
उठाती है तो दूसरे के लिए विरोध करती क
देखिए बेसिकली पूरा का पूरा जो डिस्कोर्स
है वो ये सेट करना है कि दरअसल यह किसान

नहीं है किसान के पीछे राहुल गांधी है
किसान के पीछे कांग्रेस है किसान के पीछे
बाकी विपक्षी दल है जैसे नहीं होना चाहिए
भाई विपक्ष का काम राजनीति करना है जैसे
मोदी जी का काम राजनीति करना है उसी तरह
से

और मोदी जी कर सकते हैं किसान किसान के
साथ विपक्ष है तो पर फिर मोदी जी क्यों
नहीं है नहीं नहीं किसान के पछ तो सब खत्म
मोदी जी तो अभी आ ही रहे हैं ना मैं ये
दूसरी बात कह रही हूं कि ये पूरा जो माहौल
बना दिया गया है दरअसल देखिए इससे नैरेटिव
सेट होता है बाकायदा चुन के पुराना वीडियो

निकाला गया जिसमें दो किसान बैठे हुए हैं
संपन्न किसान है गाड़ी एक लग्जरी गाड़ी के
ऊपर बैठे हुए हैं और दिखाने के लिए कि
लग्जरी लोग हैं दरअसल यह जो गोदी मीडिया
है और इसके जो महान महान मोदी भक्त एंकर्स
हैं इनके पास जो टूल किट है उसमें किसान

प्रेमचंद वाला ही किसान है जो जब सुसाइ और
वो भी आज सुसाइड करता है तो नहीं जाते हैं
ये लोग और एमएसपी की मांग को लेकर जिस तरह
से एक नेगेटिव कैंपेन है कि एमएसपी एक गलत
डिमांड है मैं ये बहुत जानबूझ के कहना
चाहूंगी कि इसमें पूरा माहौल मिडिल क्लास

में बताया जा रहा है कि अगर एमएसपी गारंटी
दे दी जाएगी तो आपकी थाली महंगी हो जाएगी
आपको सब्जी महंगा मिलेगा आपको अनाज महंगा
मिलेगा इस तरह के अनगिनत वर्ष और मुल नहीं
उसकी वजह क्या है मैं आपको बताता हूं उसकी
वजह यह है जिसका जिक्र अभी एक चीज अभी सर

मैं भूल जाऊ हम आप देखिए कि स्वामीनाथन
रिपोर्ट भारत रत्न देते हैं आप और आप अपनी
वेबसाइट से उसको उसकी चर्चा करूंगा मैं
उसकी अलग से चर्चा करूंगा मुद्दा यह है कि
एमएसपी को लेकर जो प्रचार चलाया जा रहा है
उसकी वजह क्या यह है कि कांग्रेस ने राहुल

गांधी ने कहा कि अगर हम सत्ता में आए तो
हम एमएसपी को लीगल गारंटी बताएंगे यानी कि
कांग्रेस का जो एक बड़ा पॉलिटिकल प्लांक
है उसे पहले से ही काटना शुरू कर दो उस
प्र वो था तब भी 202021 में सबसे बड़ी
मांग तीन
जो काले कानून उने कहते उने वापस लेने के
बाद एमएसपी की थी राहुल गांधी ने इसमें

हस्तक्षेप किया गारंटी दी अपनी एक अच्छी
बात है जातीय जनगणना के बाद उनका ये दूसरी
बड़ी घोषणा है कि हम सरकार में आएंगे एमएस
एमएसपी को लेकर जो दुष्प्रचार है वो
बिल्कुल समझ के बाहर एमएसपी अब भी दी जाती

है फार्मूले का मामला है जो स्वामीनाथन जी
जी ने भारत रत्न दिया उन्होने सी2 प्लस 50
पर का फार्मूला दिया था उसी के अनुसार वो
मांग रहे हैं कोई ऐसी गलत मांग नहीं कर
रहे हैं और व कह रहे हैं कि आप कोई कह रहा
है 17 लाख करोड़ का पे आएगा कोई कह रहा 15
आएगा वो यह कह रहे हैं कि आप हमारी फस


खरीदेंगे तो उसे बेचेंगे भी तो जो अगर 17
लाख करोड़ आपने खर्च कर दिया तो उसे राशन
के जरिए कुछ पर वो उसे बेच के पैसा नहीं
आएगा तो कहां नुकसान हुआ और आपने
उद्योगपतियों को कितना राइट ऑफ किया अभी
तो ये सारे सवाल है और नहीं भाषा जो कह

रही थी वो प्रेमचंद का किसान समझ रहे हैं
उसे गोदी मीडिया वो तो एक राज्य के
मुख्यमंत्री को भी आदिवासी कहकर अपमानित
करते हैं कि आपको जंगल में जाना होगा तो
कैसे तो किसानों के लिए तो क्या कहा जाए
मैं मैं यहां पर एक और यहां मुद्दा उठाना
चाहता हू हू कि एक तरफ आप भारत रत्न देते
हैं स्वामीनाथन को उनकी बेटी मधुरा कहती
हैं कि आप किसानों का अपमान नहीं कर सकते

और जिस चीज का जिक्र आप अभी कर रही थी
बताइए आपने अपने वेबसाइट से स्वामीनाथन
रिपोर्ट गायब कर दी ये क्या डिस्टोपिया है
ये क्या कल्पना से विचित्र है कि आपने एक
मिनट कि आपने रिपोर्ट को ही गायब कर दिया
और देखिए ना मुझे ल भारत रत्न दे रहे और
देखिए सबसे दिलचस्प है क्योंकि उनको लगा
सारा का सारा डिस्कशन सारा का सारा

डिस्कोर्स इस रिपोर्ट पर आ रहा है उनको
लगा कि बस स्वामीनाथन को दे दिया लेकिन जब
उनकी बेटी बोलना शुरू करती हैं और कहती
हैं कि आप अपराधी नहीं बना सकते यह अपराधी
नहीं है यह अन्य दता है तो आप देखिए मैं
मुझे लगता है हम सब उनकी हिम्मत को सलाम
देते हैं कि उन्होने जिस तरह से बात कर

शायद जयंत भी ऐसे ही बोल देते लगता च चरण
सिंह की इज्जत बढ़ जाती नहीं नहीं मैं मैं
वही जैंत पे आऊंगा आपसे पहले आप बात पूरा
कर मैं कह रही हूं कि ये जो पूरा का पूरा
सिनेरियो आप देखिए शायद जिस तरह से मदुरा
ने बोला अगर वो और वो भी सरकारी
प्लेटफॉर्म पे बोलती हैं हमेलन चल रहा है

जहां बोलती जहां फैसिलिटेशन का पूरा का
प्रोग्राम है भारत रत्न देने का जलसा बन
रहा है मैं कहती हूं कि यह कह के वो आहवान
भी कर रही है तमाम सामने बैठे वैज्ञानिकों
को कि तुम सब किसानों के पक्ष में बोलो तो
एक माहौल बनता है तो डर के मारे उनकी
रिपोर्ट ही गायब कर दी जाती कि ना रहेगी

रिपोर्ट ना इस पर चर्चा होगी और इस बहाने
सारे के सारे माहौल को क्योंकि अब सारा
बिल्ड अप एमएसपी के खिलाफ है और किसानों
को जिस तरह से आपने जो जिक्र किया आपने प
में कहा था क्रिमिनलाइज करने का जो पूरा
का पूरा काम कर रहा है और यह बता रहा है
कि यह लोग मिडिल क्लास के खिलाफ हैं है

दिल्ली में जाम जानबूझ के लगाया गया मैं
तो रोज झेल रही हूं इस जाम को और बनाया एक
मिनट एक व्यापारी को एमआरपी दी जाती है वो
एमआरपी पे अपना सामान बेचता है लेकिन
किसान को एमएसपी नहीं दी जा रही हम हम ये
जो जैम का आपने जिक्र किया हम साफ तौर पर
देख रहे हैं कि जो जैम्स लग रहे हैं
दिल्ली मेरट हाईवे पर पुलिस यानी नोएडा

पुलिस दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई
हुई है मैं नहीं जानता हूं वह गाड़ियों
में कैसे किसान ढूंढ रही है क्या शीशे
उतार कर आप उनके कपड़े सूंघ रहे हैं क्या
उनको आपको लग रहा है उनके हाथ में गाजर
मूली होगी मतलब क्या वाहियात चीज है और
उसके लिए फिर किसान को दोष मड़ना मगर मैं
यहां पर सवाल उठाना चाहता हूं उस महानुभव
का जिसका आपने जिक्र किया था जयंत चौधरी

दिल जीत लिया गजब की जिसे कहते हैं ना
यहां पर शर्मनाक राजनीति हो रही है अब
आपके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा ये
वही जयंत चौधरी हैं जिन्होंने खून से लखपत
एक किसान की तस्वीर दिखाई थी और यह कहा था
कि खून खोल जाता है भाजपा के किसान छोड़े
पार्टी और आ जाए और बताइए सिर्फ दो सीटों

भी लालच रहा हो इस व्यक्ति ने मोर्चा छोड़
के मैं वही क मैं बताऊ कि जयंत फस गए हैं
उन्हें ये उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी
ये सब मतलब इधर उधर भारतर रत्न इधर उनकी
डील हुई और इधर नहीं मुझे नहीं लगता फस गए
मुझे लगता है ये एक किस्म की राजनीतिक उसे
कहा नहीं जा रहा है वो क्या क्या बोलेंगे

सतान नेव में भी आंदोलन उठे जिस तरह की
चीज हो रही तो उन्हे यह डर है कि अब कैसे
होगा एक तरफ उनका
अपना मतदाता है और एक तरफ यह राजनीति है
और देखिए उनके मतदाताओं में अभिसार
क्योंकि मैंने बहुत एरिया कवर किया है
वहां पर उनको भरोसा है कि इतना ज्यादा कमल
कलर कर चुके हैं क्योंकि पिछले चुनाव में

भी हमने देखा था किसान आंदोलन के बाद जो
चुनाव हुआ वहां पर उसमें भाजपा को बढ़त
हासिल हुई थी जैन चौधरी जबक उनके साथ नहीं
थे लेकिन अंदर-अंदर पूरा उनका बेस बीजेपी
को सपोर्ट कर रहा था चलिए अब हम रुख करना

चाहेंगे तीसरी बड़ी खबर का बिहार विधानसभा
में नीतीश कुमार बच गए हैं विश्वास मत में
उन्हें जीत मिली है मगर विधानसभा में
तेजस्वी यादव ने जिस अंदाज में अपनी बात
रखी बिहार की जनता का दिल जीत लिया जिस
सहज अंदाज में उन्होंने नितीश कुमार को

कटघरे में रखा भाजपा को कटघरे में खड़ा
किया अपनी बात रखते गए उनकी पार्टी को
छोड़ने वाले विधायकों पर जिस तरह से
उन्होंने टिप्पणी की यकीनन बिहार की
राजनीति में उन्होंने अपना खास मुकाम बना
लिया है क्या इस मुद्दे का पंच शुरुआत
करेंगी
भाषा अभिसार तेजस्वी ने मौके पर चौका मारा

है और जिस तरह से उन्होंने जिस भाषा का
इस्तेमाल किया है मैं उसका जरूर जिक्र
करना चाहूंगी वह भाषा लालू की जो भाषा है
जो सीधे-सीधे जनता से जुड़ती है उससे आगे
बढ़ी हुई मझी हुई भाषा है बहुत म मर्यादित
भाषा है और जिस तरह से इतने बड़े सबोटाज

के बाद भी वह नीतीश को चाचा कहते हैं और
कहते हैं कि भतीजा रोकेगा भाजपा को
क्योंकि वादा चाचा ने किया था आप देखिए कि
यह जो तस्वीर है बिहार की उसमें तेजस्वी
आज की तारीख में बहुत बड़े प्रबल नेता के
तौर पर सामने आए हैं अभिसार क्या है इस पर
आपका

पंच तेजस्वी यादव ने कहीं ना कहीं विपक्ष
को राह दिखाई है राजनीति कैसे करनी चाहिए
और मुझे ऐसा लगता है कि जब भी हम लालू
प्रसाद यादव की बात करते थे और कहते थे कि
भाई उनका जो पॉलिटिकल बेस है वह एमवाय है

मुस्लिम और यादव है मुझे ऐसा लग रहा है कि
तेजस्वी हो सकता है जल्दबाजी में मैं यह
बात कह रहा हूं तेजस्वी उससे आगे बढ़ते
दिखाई दे रहे हैं वो उस विरासत को आगे ले
जा रहे हैं क्योंकि तेजस्वी की अपील और
खासकर वो जिस तरह से अपनी बात रखते हैं

उनकी बातों में वो एक समग्रता जो है झलकती
है एक कंप्रिहेंसिव राजनीति झलकती है जो
उन्हें आगे ले जा सकती है मुकुल क्या है
इस मुद्दे का
पंच मेरा मानना यह है कि नीतीश ने बहुमत
जरूर जीता है लेकिन मत और जन किसके साथ

रहता है य आने वाला समय बताएगा लेकिन
तेजस्वी ने बिहार में एक लंबी लकीर एक
बड़ी लकीर खींच दी है और मेरा यह मानना है
कि आने वाले चुनाव चाहे लोकसभा के हैं
चाहे विधानसभा के हैं सबसे ज्यादा घाटा
अगर होना है तो एक अकेले आदमी नीतीश कुमार
को होना है भाषा मुझे उनके भाषण में दो
बड़ी दिलचस्प चीजें लगी उन्होंने देखिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद मोदी को नीतीश

के सहारे कैसे घेरा पहले वो कहते हैं कि
भै मोदी की गारंटी मोदी की गारंटी क्या
तुम गारंटी ले सकते हो कि नीतीश फिर भी
तुम्हारे साथ रहेंगे और यही नहीं जिस
अंदाज में उन्होंने कहा कि आपका भतीजा
मोदी को यहां बिहार में रोकेगा मुझे लगता
है ये जो है उसने वो बड़ी जबरदस्त

राजनीतिक अपील की क्य देखिए ये पूरा समय
है अभी सार कि देखिए 91 से जो रथ शुरू हुआ
था उसे रोका था लालू प्रसाद यादव ने बिहार
की धरती में और अब आगे बढ़कर
24 में जब राम मंदिर का पूरा चक्र पूरा हो
रहा है तब तेजस्वी एक ऐसे नेता हैं जो

सीधे-सीधे कह रहे हैं कि मैं मोदी जी का
जो पूरा अश्वमेघ यज्ञ की तरह चल रहा है
घोड़ा दौड़ा जा रहा है उसे रोकूंगा बिहार
की धरती में तो ये क्लेम एक पूरे के पूरे
सर्कल को भी पूरा करते हुए दिखाई दे रहा
है और साथ देखिए जिस तरह से वो हंसते
बोलते इंगेज करते हुए भाषण दे रहे हैं
मुझे लगा कि हेमंत सोरेन ने जिस तरह से एक
बहुत स्टेटमेंट शिप दी और वहां भाषण दिया

उसके बाद झारखंड और बिहार की धरती जिस तरह
से चैलेंज दे रही है और आइडल जिकल चैलेंज
है ये हेमंत सोरेन का भाषण आडलज कल चैलेंज
और उससे आगे बढ़ा हुआ ज्यादा विस्तृत
ज्यादा इंक्लूसिव चैलेंज तेजस्वी का दिखाई
देता है और मेरे ख्याल से मुकुल जनता के

सामने जो तस्वीर सामने उभर कर आई कि एक
तरफ एक आत्मविश्वास से सराबोर युवा जो
बहुत साफ गोही से अपनी बात रख रहा है उसकी
बात में कोई विरोधा बास नहीं है मुझे याद
है जब उन्होंने कहा जब वो कह रहे थे कि
भाई किस मुंह से ये विधायक जाएंगे जनता के

साथ सामने जिनके मुख्यमंत्री बार-बार
पलटते रहते हैं तो किसी ने चिल्लाया कि आप
किस मुंह से जाएंगे आप क्या कहेंगे कहते
हैं हम कहेंगे नौकरी दी है मतलब हाजिर
जवाबी बिलकुल जनता के सामने एक तरफ एक ये
युवा है और दूसरी तरफ एक भाजपा और नीतीश
कुमार हैं जो अवसरवादी राजनीति के चलते
कुछ भी करने को तैयार हैं हां तो उसमें
वही है कि तेजस्वी तो आए हैं और नीतीश को

सामने एक बड़ा मुश्किल समय मुझे लगता है
कि बीजेपी उसे बहुत आगे जाने देगी उन्हें
नहीं मैं समझ पा रहा हूं कि वह कैसे
उन्होंने यह सब किया और आप कह रहे थे कि
मोदी गारंटी लेंगे नीतीश की इस समय हालत
यह है कि नीतीश खुद अपनी गारंटी नहीं ले
सकते हम अच्छा फिर दूसरी बात मैं ये भी

बता रहा हूं हमें ये नहीं भूलना चाहिए
बिहार की राजनीति में बिहार की राजनीति
में आरजेडी तो है ही लेकिन कम्युनिस्टों
का भी एक बड़ा रोल है और माले जिस तरह
उनके साथ है और महबूब आलम ने भी जिस तरह
से विधानसभा में बोला यह भी सब जो गठजोड़
हुआ है और इतने महीनों की ट्रेनिंग हुई है

वो भी तेजस्वी में असर दिख रहा है और
चीजों का मुद्दों पर समझ और मुद्दों को
लेकर एक दबाव की राजनीति मुझे लगता और
नौकरी और रोजगार देखिए राहुल गांधी बोलते
हैं राष्ट्रीय स्तर पे और उस पर सबसे
ज्यादा अमल किसी स्टेट में अगर किसी लीडर
ने किया है तो तेजस्वी ने पिछले मेरे
ख्याल से राहुल गांधी राहुल गांधी से कहीं

ज्यादा कहीं विस्तृत तरीके से उस पर काम
करते हुए दिखाई देते मगर क्या आपको लगता
है कि आने वाले एक महीने में तेजस्वी पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एजेंसीज की
जो रहम जो इनायत नजरे इनायत है वो अब
देखिए वो तो तुरंत ही केज हो गई और मैं
यहां पे इस आपने अच्छा कि इस बात का जिक्र

किया क्योंकि नीतीश बाबू का चेहरा तो
बिल्कुल लटका हुआ था पूरी डिबेट में लेकिन
जिस तरह से क्योंकि यह भाषा उन्होंने इस
तरह से कभी इस्तेमाल नहीं की पूरी धमकाते
हुए कि आपके खिलाफ जांच होगी आपके खिलाफ
जांच होगी यानी इंडिकेशन बिल्कुल साफ व
मोदी जी की तरह ही अमित शाह जी की तरह ही

सदन में खड़े होकर धमका रहे थे विपक्ष को
कि अब आपकी बारी आ रही है तो तेजस्वी बाहर
रहेंगे तो इनके लिए मुश्किल होगी और घेरने
के लिए जैसे ही पलटूराम ने पलटी मारी वैसे
ही आप देखिए कि ईईडी की दविश मगर मुकुल
ठीक है तेजस्वी यादव हैं सब कुछ है मगर
क्या ये हकीकत नहीं है आपने वामपंथियों का

जिक्र किया वो एक अलग बात है मगर जहां तक
राजनीतिक जनाधार की बात है तो महागठबंधन
के सा पास सिर्फ तेजस्वी हैं या ठीक है
लालू यादव की विरासत है कांग्रेस जो उनकी
दूसरा बड़ा दल है उसमें ऐसे कोई नेता नहीं
है ऐसे कोई चेहरे नहीं है क्या आपको लगता

है ये वन मैन शो है महागठबंधन का जो अपने
आप में काफी नहीं रहेगा मोदी और नीतीश का
मुकाबला करने के लिए और यही वजह है कि यह
गठबंधन हुआ है नितीश और बीजेपी राहुल की
छवि भी अपने तौर पर और सुधर रही है राहुल
एक बड़े नेता हैं कांग्रेस के उधर तेजस्वी
हो गए इसी तरह अलग-अलग गजोड़ उधर सोरन
बड़े नेता हैं झारखंड में उधर राहुल है तो

ये गठजोड़ भी अपना काम करेगा ऐसा नहीं है
कुछ-कुछ दल जिनके बारे में लगभग पहले भी
डाउट था चाहे वो आरएलडी हुई चाहे वो नीतीश
हुए चाहे और हुए जैसे बहुत सारे नेता तो
डाउट था य डाउट वाले जा रहे हैं मुझे लगता
है कि एक और तलछट ये छट जाएगी तो अच्छा है
एक ठोस गठबंधन एक ठोस नेता कुछ सामने आए
जनता के तो उन्हें वोट डालने में आसानी और

देखिए क्योंकि मैं बिहार विधानसभा का जब
चुनाव हुआ 2020 में तब वहां पर थी उस समय
जिस तरह से महागठबंधन के पक्ष में माहौल
था अभी सर और उसके लिए जिस तरह से काम हुआ
था तब से लेकर अभी तक तेजस्वी ने एक लंबी

लकीर खींची है जमीन पर काम किया है और
कांग्रेस सहित जो माले है उसका आधार भी
बढ़ा है खास तौर से नौकरी को लेकर लगातार
जिस तरह से काम हुआ है विकास को लेकर सवाल
हुआ है तो अब नितीश जी तो तकरीबन गायब हो

गए हैं पूरे परिदृश्य से 45 ही उनके पास
सीटें रही है तो अब सबसे बड़ा नुकसान उनका
है और तेजस्वी इस समय एक उभरता हुआ चेहरा
है बशर्ते उन्हे बाहर रहने दिया यही डर है
कि वो बाहर रह पाए ये कई लीडर हैं चाहे
वोह अखिलेश है चाहे वो इधर अरविंद

केजरीवाल यह सब एक महागठबंधन में है वो
इंडिया गठबंधन में और यह कितने बाहर रह
पाते है

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