बसपा ने शुरू कर दिया खेल : INDIA गठबंधन छोड़ कर गए नेता अभी से पछताने लगे | - instathreads

बसपा ने शुरू कर दिया खेल : INDIA गठबंधन छोड़ कर गए नेता अभी से पछताने लगे |

नमस्कार  स्वागत
है आज जो मुद्दा मैं चुन रहा हूं एक तरफ
तो जिस प्रकार से किसानों का आंदोलन चल
रहा है और जिस प्रकार से किसान आंदोलन के
खिलाफ दमन प्रक्रिया चालू है अपने ही देश

के किसान के साथ जिस प्रकार का किला बना
दिया गया है दिल्ली के चार तरफ और राजा
इतना भयभीत है कि अपने देश के किसानों से
ही डरने लगा अपने देश की जनता से ही डरने
लगा जो कि किसी भी लोकतंत्र के लिए एक शुभ

संकेत नहीं है लोकतंत्र में जनता और राजा
के बीच में अब राजा कहे या उसको शासक कहे
क्योंकि लोकतंत्र में राजा कहना अच्छी बात
नहीं
है एक ऐसा संवाद की स्थिति होती है जो
हमेशा हमने देखी है अपने 75 साल के भारत
के इतिहास में देखी है पंडित जवाहरलाल

नेहरू को भीड़ के बीच में कूदते हुए देखा
है हमने इंदिरा जी को जनता के बीच में घुस
के मिलते हुए देखा है बेलची में जब वह गई
थी हाथी में चढ़ के हमने राजीव गांधी को

भी मिलते जुलते देखा है अटल जी को भी
मिलते जुलते देखा है किस प्रकार से जनता
से अटल जी का संवाद होता था हमने उस समय
भी देखा है और आज यह समय आ गया है कि देश
का लोकतांत्रिक रूप से चुना हुआ
प्रधानमंत्री और उसका

मंत्रिमंडल जनता से डरने लगा
है जनता के जो संवैधानिक अधिकार हैं
किसानों के जो संवैधानिक अधिकार हैं उन
किसानों के जो इस देश को ना केवल उन्होंने
अपना पेट भरने में समर्थ बनाया बल्कि पूरे
विश्व का पेट भरने की क्षमता इस देश में

पैदा
की ग्रीन रिवोल्यूशन हुआ आपको याद होगा
लाल बहादुर शास्त्री जी के जमाने में समय
था हम इंपोर्ट करते देख ग हूं और लाल
बहादुर शास्त्री जी जी ने एक आवान किया था
और उसके बाद यह स्थिति इंदिरा जी ने पैदा

कर दी कि हिंदुस्तान में अन्न का उत्पादन
इतना ज्यादा होने लगा कि सरप्लस होने लगा
कभी यह सोचा नहीं जा सकता था हिंदुस्तान
में कि यह डेफिसिट स्टेट कभी दूध का फलों
का सब्जियों का अन्न का सरप्लस कंट्री बन

जाएगा कि आज हम विदेशों में गेहूं और चावल
भेज पाते
हैं उस उत्पादक उस अन्नदाता के साथ इतना
अनाचार और अत्याचार और जिस प्रकार का
प्रोपेगेंडा हो रहा है पंजाब के खिलाफ

हरियाणा वालों के खिलाफ जैसा कि मणिपुर
वालों के खिलाफ हुआ
था फिर मणिपुर वालों की सुध लेने छोड़ दी
यह पूछना भी छोड़ दिया कि 10 महीने से
मणिपुर के अंदर जो हिंसा है और प्रदेश दो
भागों में बट गया है वहां पर प्रदेश के

बीच में गर युद्ध की स्थिति है उसके बारे
में खबरें आनी बंद कर
दी आज वही स्थिति दिल्ली को किले में
तब्दील कर दिया है तो यह जो दमन चक्र चालू
है हिंदुस्तान के अंदर क्या इसका अंत

होगा दो साल पहले जो अन्नदाता से एक
आश्वासन दिया गया था कि आप वापस लौट जाइए
हम आपके केसेस वापस कर लेंगे लखीमपुर में
जो पीड़ित किसान हैं उनके बारे में उनको
उचित मुआवजा दिया

जाएगा एमएसपी की कमेटी बनाई जाएगी कमेटी
यथा शीघ्र उसम निर्णय लेगी किसी चीज में
कुछ नहीं हुआ मिश्रा जी जो लखीमपुर वाले
थे आज भी मंत्री बने हुए

हैं जो पीड़ित हैं वो केसेस झेल रहे हैं
किसान केसेस झेल रहे हैं एमएसपी के बारे
में कोई चीज नहीं हुई और बार-बार निवेदन
करने के बावजूद अगर अन्नदाता की बात नहीं
सुनी गई और वह दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री
से मिलना चाहता है उनसे निवास पर जाकर

मिलना चाहता है तो इसमें इतना डरना क्यों
है यह वही लोग हैं जिन्होंने आपको जिताया
है यह पाकिस्तान से और चीन से आए हुए लोग
तो है नहीं यह तो हिंदुस्तानी लोग हैं
देशभक्त लोग हैं राष्ट्रभक्त लोग हैं तो

देश को क्या इस स्थिति में पहुंचा दिया जो
75 साल में कभी नहीं
हुआ कि कर्नाटका के चीफ डिप्टी चीफ
मिनिस्टर चीफ मिनिस्टर आक जंतर मंतर में
बैठते हैं कि हमारा पैसा नहीं दे रही है
दिल्ली

सरकार यही बात केरला के चीफ मिनिस्टर कहते
हैं यही बात दीदी कहती है ममता दीदी तो यह
जो देश के अंदर स्थिति बन गई है कि या तो
हमको दोनों जगह पर केंद्र और राज्य में
ताओ वरना हम पैसा देना बंद कर देंगे यह तो

लोकतंत्र में बिल्कुल अनुचित है और जिस
प्रकार से वहां पर किसानों के ऊपर गोलियां
दागी जा रही है प्लास्टिक की बलेट दागी जा
रही है और द्रोण के माध्यम से

एक्सपायर्ड अश्रु गैस के बौछार हो रही है
लोगों की आंखें जल रही है कुछ लोगों को
चोटें लगी हुई हैं एक जवान जिसने 161 साल
सेना में काम किया है उसकी चोट लगी है आंख
में भी चोट लगी है बाह में भी दो चोट लगी

है राहुल गांधी जी ने उनसे बात
की तो क्या देश की इतनी निराशा जनक स्थिति
हो गई है कि देश में अब लोकतंत्र खत्म
होकर एक तंत्र तानाशाही आ गई है या हम
लोगों को अब नॉर्थ कोरिया और चीन की तरह

जीना
पड़ेगा और यहां पर जो राजा चाहेगा वह सब
करेंगे किसी की धार्मिक स्वतंत्रता नहीं
होगी और उसके बाद जो कहेंगे कि इस भगवान
की पूजा करनी है यह कपड़े पहनने हैं जो हम
कहेंगे वह करना है शंकराचार्य का भी अपमान

होगा वहां पर किसानों का भी अपमान होगा
वहां पर विपक्षियों को भी ऐसा मान लिया
जाएगा कि राष्ट्र विरोधी है जो कि आज
हिंदुस्तान के 75 साल के इतिहास में कभी
नहीं

हुआ
तो लेकिन दूसरी तरफ एक और घटना घट रही है
बड़े विपक्षी दल के नेता जो है वह बीजेपी
जवाइन कर रहे हैं अशोक चौहान जी ने जवाइन
कर ली आज विभाकर शास्त्री जी जो उत्तर
प्रदेश के हैं उन्होंने शायद कांग्रेस

छोड़ दी पहले आरपीएन सिंह चले गए थे
शुभेंदु अधिकारी चले गए थे बहुत साल पहले
टीएमसी
से और आसाम के मुख्यमंत्री महोदय चले गए
थे अजीत पवार चले गए थे अशोक चौहान जी चले

गए तो दूसरी तरफ ऐसी स्थिति पैदा हो रही
है कि क्या पोजीशन के अंदर इतनी जो लड़ने
वाली शक्तियां थी या विरोध करने वाली
शक्तियां थी उन्होंने घुटने टेक दिए हैं
और रेंगने

लगे तो अगर यह स्थिति है तो देश में
लोकतंत्र बचाने की लड़ाई कौन लड़ेगा और
देश में क्या यह जितने लोग हैं
जिनके

अ कमर इतनी कमजोर हो गई है कि सीधे खड़े
होने में असमर्थ है और घुटने टेक रहे हैं
और बिक रहे हैं और अपनी राज्यसभा सीट के
लिए चौधरी साहब है छोटे चौधरी वो भी
पिटते हुए देख रहे हैं किसानों को अन

दाताओं को लेकिन उन्हें माननीय मोदी जी
में अपने बाबा चौधरी चरण सिंह की छवि
दिखाई पड़ रही है चौधरी चरण सिंह तो ऐसे
नहीं थे उन्होंने तो कभी किसानों के पर
अत्याचार नहीं होने दिया ना किया वो तो

किसानों के हमदर थे किसानों के साथ लड़ने
वाले थे किसानों के रूरल इकॉनमी के बारे
में उनको बहुत वृहद ज्ञान था एक राजस सीट
के लिए आपने उनके चौधरी चरण सिंह के सपनों
को धूल धूसर कर दिया उनको बदनाम कर दिया

उनको अपमानित कर
दिया तो यह घटनाएं घट रही है लेकिन कुछ
घटनाएं बड़ी अच्छी घट रही है जिसकी तरफ
सबको निगाह देने की आवश्यकता है एक आपने
खबर सुनी होगी आज जो
है कि बीएसपी ने पंजाब के अंदर अकाली दल

से अपना समझौता तोड़
दिया क्योंकि यह खबरें आ रही थी कि अकाली
दल जो है बीजेपी से गलब या करने के लिए
तैयारी कर रहा है तो बीएसपी का अकाली दल

से गठबंधन तो ने का मतलब यह है कि बीएसपी
कुछ निर्णय ले रही
है और वह निर्णय जो होगा वह देश के लिए भी
हितकारी होगा लोकतंत्र के लिए भी हितकारी

होगा ऐसा संकेत मिल रहा
है दूसरी घटना य मिल रही है कि राहुल
गांधी की जो अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा
थी उसको छोड़कर वह दिल्ली आ रहे
हैं और तीसरी खबर यह मिल रही है कि शरद
पवार जी ने संभवत यह निर्णय ले लिया है कि

उनका वाला पक्ष कांग्रेस में अपनी पार्टी
को मर्ज कर
देगा अब जरा इसका विश्लेषण
कीजिए मुझे ऐसा लग रहा है कि इंडिया
एलाइंस जो लोग छोड़कर चले गए बिहार के

अंदर भी तीन विधायक आरजेडी के एक ठाकुर
साहब हैं एक भूमिया साहब हैं और एक यादव
जी हैं यह तीनों ने आरजेडी को जिनकी वजह
से वह जीते थे और जिनके चुनाव चिन्ह पर

जीते थे और जिनकी दृष्टि जी जीते थे
उन्होंने दलबदल कर लि खर उनकी अपनी
मजबूरियां थी वो एक अलग मुद्दा
है इससे संकेत मिल रहा है कि जो लोग
इंडिया गठबंधन को छोड़ के जा रहे हैं वह
पछताएंगे मुझे ऐसा लग रहा
है कि शरद पवार इंडिया एलायंस के साथ

मजबूती से इंडिया एलायस क्या कांग्रेस के
साथ मजबूती से जुटे हुए
हैं मुझे ऐसा लग रहा है कि जो लोग यह
संकेत दे रहे हैं कि दिल्ली में केवल एक
सीट देंगे गुजरात में सात सीटें लड़ेंगे

गोवा में एक सीट ल लड़ेंगे उनको भी अपने
निर्णय पर पुनर्विचार करना होगा वरना वह
भी आइसोलेशन में चले जाएंगे थर्ड फोर्स के
लिए अब कोई स्पेस नहीं है और दिल्ली जैसी
जगह जहां विधानसभा के अंदर आम आदमी पार्टी
की बिल्कुल

स्वीपिंग विक्ट्री हुई और एमसीडी में भी
स्वीपिंग विक्ट्री हुई उसके म अगर एमपी के
इलेक्शन में देखें पार्लियामेंट के
इलेक्शन में देखें तो कांग्रेस से बहुत कम
वोट आए थे इसका माने असेंबली में आम आदमी

पार्टी जरूर एक मजबूत शक्ति है लेकिन
लोकसभा अर वहां पर बहुत बड़ी शक्ति है और
अगर सातों सीटों पर या छह सीट पर आम आदमी
पार्टी लड़ने की कोशिश करती है इसका माने
उसका भी कुछ मामला अब डावा डोल हो रहा है

मनीष सिसौदिया जी को बेल
मिलना और आम आदमी पार्टी का दिल्ली में छह
या सातों सीटों पर लड़ना पंजाब में तो
लड़ना समझ में आता है पंजाब में तो वहां
पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को आपस में

संघर्ष करना पड़ेगा लेकिन कुछ संकेतक मिल
रहा है लेकिन एक संकेत जो मुझे मिल रहा है
जिसकी पुष्टि एक दो दिन में हो जाएगी मैं
सच हूं या गलत हूं

व यह कि बहन जी अब कांग्रेस के साथ मिलकर
पूरे हिंदुस्तान में संघर्ष करने के लिए
तैयार हो
गई जिसका संकेत मिलता है जब उन्होंने
पंजाब के अंदर अकाली दल से अपने गठबंधन को

खत्म कर दिया और आप जानते हैं कि बहन जी
का एक बहुत बड़ा सपोर्ट बेस है आज की
तारीख
में और राहुल गांधी का भी एक बहुत बड़ा
सपोर्ट बेस है हिंदुस्तान में जो ने जनता

से मिलकर उनके पास जाकर यह सिद्ध कर दिया
है कि वह एक मानवीय संवेदनाओं वाला
व्यक्ति है और अर्थशास्त्र पर रूरल इकॉनमी
पर उसका ज्ञान है जनता से संवाद करता है
द्विपक्षीय संवाद करता है मन की बात नहीं

करता बात करता है तो मुझे ऐसा संकेत मिल
रहा
है कि कांग्रेस और बहन जी का समझौता शायद
होने वाला है और पूरे हिंदुस्तान के स्तर
पर होने वाला

और शायद
संभवतः बहन जी को एस ए प्राइम
मिनिस्ट्रियल कैंडिडेट भी कांग्रेस और यह
गठबंधन प्रोजेक्ट करने वाला
है उसके बाद जो लोग कांग्रेस छोड़कर गए
हैं जिन लोगों ने कांग्रेस गठबंधन से अपनी
दूरियां दिखाने का प्रयास किया है दबाव

में किया है पैसे के दबाव में किया है एडी
सीबीआई के दबाव में किया है लेकिन मुझे
ऐसा लगता है कि अब बहन जी ने शायद निर्णय
ने ले लिया है और इसीलिए राहुल गांधी अपनी

भारत जोड़ो न्याय यात्रा को छोड़कर दिल्ली
वापस और अगर
मेरी जो मेरा विश्लेषण है वह सही होता है
तो भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बहुत अच्छी

सूचना का इंतजार हम कर रहे हैं जो शरद
पवार जी ने एक प्रकार का संकेतक दे दिया
है कि शरद पवार का जो चुनाव चिन्ह भी छीन

लिया पार्टी भी छीन ली तो अपनी पार्टी को
अगर कांग्रेस के अंदर मर्ज कर देते
जैसे उन्होंने रामटेक के अंदर अपने
पार्लियामेंट में एक कैंडिडेट का

अनाउंसमेंट कर दिया था और बड़ी वहां पर
बात उठी कि बिना महा
आघाड़ा लेकिन अगर यह तय हो चुका है कि
कांग्रेस में मर्ज करने वाले
हैं तो आपसी संघर्ष कोई नहीं है फिर तो एक

कैंडिडेट होगा और जो तीसरी शक्ति
के रूप में लड़ने का प्रयास करेगा वो
चुनाव से बाहर हो जाएगा अच्छा यह किसानों
का मसला अब किसानों के मसले में असल में

जो मेरे को है सत्ता की मुश्किल है जो
सत्ता की समस्या है वरना कोई भी एक नॉर्मल
सोचने वाला आदमी कि एमएसपी को गारंटी बना
देने

से जनता पर कोई बोझ नहीं पड़ता क्योंकि
चीजें महंगी नहीं
होती किसान केवल यह कह रहा है कि अगर 1700
में में गेहूं बेचू और 00 एमएसपी आप
स्थापित करें तो 400 का भावांतर मुझे दे

दे और इस पर करीब भार पड़ता है ढाई तीन
लाख करोड़ का जो कि बहुत कम है क्योंकि
पूंजीपतियों के तो आप जानते ही है हर साल
लाखों करोड़ माफ कर दिए जाते हैं और व

विदेश भी पैसा देश का लूट के भाग जाते हैं
उनको भागने में मदद भी हो जाती
है तो देश की संपदा अगर गरीबों में बटेगी
तो उनकी परचेसिंग पावर बढ़ेगी
और परचेसिंग पावर बढ़ेगी तो डिमांड बढ़ेगी
डिमांड बढ़ेगी तो इंडस्ट्री को फायदा होगा

क्योंकि अमीर आदमी की आमदनी 10 गुनी हो
जाए वो ज्यादा खरीद नहीं सकता क्योंकि
उसकी सारी जो कंजमेट्स है वो क्रॉस हो
चुकी है जो गरीब आदमी है अल्प मध्यम वर्ग
है या मध्यम वर्ग है उसकी एस्पिरेशंस है

और उसके पास परचेसिंग पावर नहीं है तो उसे
अगर पैसा मिलेगा तो चीज खरीदेगा और
इंडस्ट्री को फायदा होगा जो हमारी
कंजंपुरावैम

नहीं खरीदेंगे कपड़े नहीं खरीदेंगे बच्चों
को नहीं पढ़ाएंगे तो जैसे भारतवर्ष की हम
कल्पना करते हैं व भारतवर्ष तो नहीं
बनेगा लेकिन इस प्रकार का
दमन करना अन्य दता पर किसानों पर और

दिल्ली में उनको ना घुसने देने का प्रण
लेना भाई दिल्ली तो देश भर की राजधानी है
तमिलनाडु कर्नाटका पंजाब हरियाणा वेस्ट

बंगाल सबका अधिकार है दिल्ली आए दिल्ली
कोई यूनियन वो तो है नहीं कि साब वो
बीजेपी का मुख्यालय है इसलिए उस कोई जा ही
नहीं सकता
तो अगर कर्नाटका से किसान चलते हैं ट्रेन
से तो उनको भोपाल में आप अरेस्ट कर लेते

हैं हजारों लोगों को गुजन भेज देते हैं
उनको जेल में ट्रेन में जो बसों में आते
हैं उनको आप अरेस्ट कर लेते हैं लोगों को
गांवों में रेस्ट कर लेते हैं उनको जो आते
हैं उनको झूठे मुकदमों में फंसाते हैं और

अशु गैस ऐसे चला रहे हैं जैसे कि आई डोंट
नो पहले भी हमारे बचपन में भी हमारी जवानी
में भी हमने देखा पुलिस अशु गैस चलाती थी
एक दो गोले फेंक देती थी और भीड़ चितर बतर
हो जाती थी अब तो तो लगातार हर पाच मिनट

में अश्रु गैस छोड़ी जा रही है केमिकल का
यूज करके शायद सुना है पानी का यूज हो रहा
है लोगों को चोटें लग रही है अपने
देशवासियों को चोट लग रही है और अपने
देशवासियों को अपने ही देशवासियों से चोट
पहुंचाई जा रही है सेना और किसानों के बीच

में युद्ध कराया जा रहा है जबकि यह वो
भारतवर्ष है जहां लाल बहादुर शास्त्री ने
नारा दिया था जय जवान जय
किसान जवान को किसान से भिड़ा जा रहा है

पंजाब को पूरे देश से बिड़ाया जा रहा है
जैसे पहले मणिपुर में कुकीज में और मेती
को आपस में बिड़ाया गया हिंदुओं को
मुसलमानों से बिड़ाया गया हिंदुओं को
क्रिश्चन से बढ़ाया गया अब हिंदुओं को

सिखों से बढ़ाया जा रहा है अरे कितना देश
को बाटो ग भाई यह प्यारा
भारतवर्ष 75 साल क्या हजारों लाखों साल से
खड़ा रहा लोग आए यहां बसे अपना लिया तना
देश हमारा अच्छा होने लगा कि यही बस गए
इसी को अपना देश मान लिया उस देश को जाति

धर्म और सामाजिक परिवेश के आधार फिर इतना
बांट रहे हो
तुम तो इनका क्या प्लानिंग है यह क्या
करना चाहते हैं इस देश के क्या और देश की
जनता को भी सोचना है य क्या देश में

लोकतंत्र लेकिन एक चेतावनी और एक मतलब मैं
बात ही कह सकता हूं कि
अगर 2024 में सही निर्णय नहीं लिया गया तो
आप कल्पना नहीं कर सकते कोई छूटेगा नहीं
कोई बचेगा

नहीं जब यह लाखों किसान इस असहाय स्थिति
में है किसी की आंखें पट किसी के हाथ में
गोली लगी है किसी की पीठ लहु लुहान है तो
हम जो छोटे-छोटे समूह में बटे हुए लोग हैं
लेकिन इस बात पर खुश मत होइए कि अभी तो वो

पिट रहा है मैं नहीं पिट रहा अभी मुसलमान
पिट रहा है मुझे क्या मैं तो हिंदू हूं वो
सिख पिट रहा है मुझे क्या मैं हिंदू हूं

वो दलित पिट रहा है क्या हो गया मैं दलित
थोड़ी हूं वोह आदिवासी पिट रहा है मुझे
क्या वो तो मैं आदिवासी थोड़ी हूं सब पिट
एक एक करके सब
पिट देश में लोकतंत्र के अलावा कोई विकल्प
नहीं है देश को एकजुट करने के अलावा कोई

विकल्प नहीं है धार्मिक विद्वेष जातीय
विद्वेष को राजनीतिक लाभों के लिए बढ़ाना
यह हो सकता है किसी राजनीतिक कूटनीतिक चाल
हो लेकिन इससे बचने का उत्तरदायित्व
हिंदुस्तान की जनता का है और खुशी की बात

है कि अन्नदाता के साथ किसान भी आ गए हैं
मजदूर भी आ गए हैं और देश के कोने-कोने से
किसानों को समर्थन मिल रहा है जो आवश्यक
है क्योंकि वो हमारा नदाता है वो हमारा
पेट भरता है और उसके हम ऋणी है भारतवर्ष

की आर्थिक जो विकास की यात्रा है उसका में
उसका बहुत बड़ा योगदान है है इसलिए
लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को देश को एकजुट
करने में और भारत माता के प्रति अपने

कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए जो हमसे
अपेक्षाएं हैं उसको पूरा करना बहुत आवश्यक
है धन्यवाद बहुत-बहुत
धन्यवाद

Leave a Comment