बांग्लादेशी क्यों कर रहे हैं भारत से नफरत ? | Why Anti-India Sentiments Are Growing In Bangladesh ? - instathreads

बांग्लादेशी क्यों कर रहे हैं भारत से नफरत ? | Why Anti-India Sentiments Are Growing In Bangladesh ?

दोस्तों यह शहर मेलबर्न और सिडनी नहीं
बल्कि बांग्लादेश का ढाका है जो आईसीसी
वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया की जीत नहीं
बल्कि भारत की हार का जश्न मना रहे हैं जी

हां बिल्कुल सही सुना आपने कुछ ऐसी ही
नफरत हमें साल 2017 के एशिया कप फाइनल में
भी देखने को मिली थी जब बांग्लादेशी फैंस
ने एक मूव्ड पिक्चर शेयर की थी और इस

तस्वीर में बांग्लादेशी तेज गेंदबाज
तस्कीन अहमद अपने हाथ में भारतीय कप्तान
महेंद्र सिंह धोनी का कटा हुआ सिर लेकर
घूम रहे थे अब फैंस तो फैंस अगले दिन
बांग्लादेशी न्यूज़पेपर के पहले पेज में
भी इंडियन क्रिकेट प्लेयर्स के आधे मुंडे

हुए सर छपे हुए थे इन इंसल्टेड इमेजेस और
कमेंट से जाहिर है कि बांग्लादेशी लोगों
की क्रिकेट को लेकर एक्साइटमेंट तो नहीं
दिखती बल्कि भारत के प्रति उनके दिलों में

फैली हुई नफरत जरूर झलकती है खुद
बांग्लादेशी ऑथर तस्लीमा नसरीन यह मानती
हैं कि एंटरटेनमेंट से लेकर हेल्थ केयर
क्लोथिंग और फूड तक के लिए बांग्लादेश

भारत पर निर्भर है यहां तक कि उनकी आजादी
में भी एक अहम योगदान भारत का रहा है तो
फिर बांग्लादेशियों का यह स्टंस इतना एंटी
इंडिया क्यों है आखिर क्यों भारत के खिलाफ
बांग्लादेशी लोगों में इतनी डीप रूटेड हेट

देखने को मिलती है भारत ने ऐसा क्या किया
है जो उसकी सक्सेस का दुश्मन खुद उसका
पड़ोसी देश बन गया है क्या यह नफरत केवल
एक क्रिकेट मैच को लेकर है या फिर पर्दे

के पीछे की सच्चाई कुछ और ही है दोस्तों
साल था 2021 बांग्लादेश अपना 50th
इंडिपेंडेंस डे सेलिब्रेट कर रहा था और इस
मौके पर बांग्लादेशी सरकार ने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को इनवाइट
किया था जहां उम्मीद यह थी कि इस विजिट से
दोनों देशों की दोस्ती में मजबूती आएगी
वहीं इसके उलट बांग्लादेश में वायलेंस की

ऐसी आग धधक नहीं लगी कि कई सिविलियंस की
जान चली गई ढाका में इस वायलेंस की शुरुआत
हुई थी एक इस्लामिस्ट ग्रुप से जिसने
प्रधानमंत्री मोदी की विजिट के खिलाफ अपना

विरोध जताया लेकिन प्रोटेस्ट की यह आंधी
इतनी तेजी से बांग्लादेश में फैली कि कई
इस्लामी लोग सड़कों पर पर उतर आए मोदी जी
के खिलाफ नारे लगे रैली निकाली गई और 28

मार्च को बांग्लादेश को नेशन वाइड शर्ट
डाउन कर दिया गया यानी जो इवेंट दुनिया को
अपने देश की पावर दिखाने का था वो
इंटरनेशनल लेवल पर भारत और बांग्लादेश के

लिए एंबेरेसमेंट का सबब बन गया और यह एक
अकेली घटना नहीं है बल्कि भारत और हिंदुओं
के प्रति बांग्लादेश में बढ़ती नफरत का ही
नतीजा है कि अक्टूबर साल 2021 में दुर्गा

पूजा के दौरान हिंदुओं की भीड़ पर अटैक
किया गया ऐसे ही घटना पिछले साल भी दुर्गा
पूजा के दौरान देखने को मिली थी जब कई
हिंदू टेंपल्स को तोड़ा गया और कम्यून

वायलेंस तेजी से फैली इस साल भी फरवरी के
महीने में 14 हिंदू टेंपल्स को वंडलाइज
किया गया मूर्तियों को तोड़ा गया और पूजा
सेलिब्रेशंस को तबाह कर दिया गया आलम यह

है कि बढ़ती मुस्लिम पॉपुलेशन के बीच
बांग्लादेश में हिंदू और बुद्धिस्ट को
थर्ड क्लास सिटीजंस की तरह देखा जा रहा है
इस घटना से ना केवल बांग्लादेश की सोसाइटी

में इंडियन गवर्नमेंट और हिंदू उस के
खिलाफ पनप रही नफरत खुलकर सामने आ रही है
बल्कि यह भी साफ हो जाता है कि भारत और
बांग्लादेश सरकार अपनी दोस्ती का चाहे

कितना भी रोना गाना क्यों ना कर ले लेकिन
पैया जमीन पर सच्चाई कुछ और ही है अब एक
बार साल 2011 में प्राइम मिनिस्टर मनमोहन
सिंह ने यह बयान दिया था कि करीब 25 प्र
बांग्लादेशी ऐसे हैं जिनके अंदर एंटी

इंडिया सेंटीमेंट पनप रहे हैं तब इस
स्टेटमेंट ने बांग्लादेशी पॉलिटिक्स में
भूचाल मचा दिया था और कई पॉलिटिकल लीडर्स
को नाखुश किया था लेकिन अब लगता है कि यह
आंकड़ा कई ज्यादा बढ़ गया है भारत के दुख

में खुशी मनाते बांग्लादेशी यूथ इस बात का
सबूत है कि उनकी जड़ों में नफरत का बीज आज
नहीं बल्कि सालों पहले बोया जा चुका है
मगर अभी भी यह सवाल है कि आखिर भारत से

इतनी नफरत क्यों जिस देश ने लिबरेशन से
लेकर फॉर्मेशन तक उनका साथ दिया है आखिर
उसके खिलाफ एंटी इंडिया स्टैंड्स क्यों
इसके रीजंस पॉलिटिकल सोसाइटल और रिलीजस
बेसिस पर काफी गहरा और पेचीदा है और अगर

बांग्लादेशी सोसाइटी को एक नजरिए से देखें
तो भारत एक हिंदू मेजॉरिटी राष्ट्र है और
बांग्लादेश खुद को इस्लामिक राष्ट्र की
तरह
आइडेंटिफिकेशन
ने भारत में रह रहे मुस्लिम्स को हाशिए पर

ढकेल दिया है उनकी पॉलिसीज एंटी मुस्लिम्स
हैं और वह भारत में मुस्लिम माइनॉरिटी के
खिलाफ हो रहे क्राइम्स पर अपनी आवाज बुलंद
नहीं करते अपने इसी विचार को सही साबित
करने के लिए वह सीएए और एनआरसी प्रोटेस्ट

का सहारा लेते जिसके विरोध में इंडियन
मुस्लिम सड़कों पर उतर आए थे और काफी समय
तक इस कानून ने भारतीय राजनीति में भी
उथल-पुथल मचा दी थी इन्हीं का साथ देते

हुए बांग्लादेशी मुस्लिम ने भी इस रूल को
काला कानून करार दिया था और यही एक कारण
भी था कि मोदी जी के बांग्लादेश विजिट से
वहां पनप रहे इस्लामिस्ट ग्रुप सड़कों पर
उतर आए थे उनका यह एंटी इंडिया और एंटी

मोदी बिलीफ तब और स्ट्रांग हो गया जब
पिछले साल नुपुर शर्मा को कंट्रोवर्सी ने
मुस्लिम लोगों की भावनाओं को आहत कर दिया
था इसे लेकर बांग्लादेश में भारत के
प्रोडक्ट्स को बैन करने की आवाज इतनी तेज
हो गई थी कि मुस्लिम मेजॉरिटी को एंटी

इंडिया में बदलने में देर नहीं लगी धर्म
की इस गहरी खाई ने जहां भारत और
बांग्लादेश के बीच रिश्तों को काफी हद तक

नुकसान पहुंचाया है तो वहीं केवल धर्म ही
एक एलिमेंट ऐसा नहीं है जो बांग्लादेश को
भारत से अलग करता है अगर ऐसा होता तो
अफगानिस्तान से लेकर इंडोनेशिया जैसे
देशों में भी एंटी इंडिया सेंट एमेंट काफी
चरम पर होता लेकिन बांग्लादेश में पनप रही

नफरत का एक कारण मेक्सिकन सिंड्रोम भी है
दरअसल मेक्सिकन सिंड्रोम यूएस और मेक्सिको
के बीच पनप रहे रिश्तों को कहा जाता है
जिस तरह एक बड़ा और डेवलपिंग देश होने के

बाद भी अमेरिकन कॉन्टिनेंट में यूएसए की
मौजूदगी से मेक्सिको खुद को दबा हुआ महसूस
करता है और उसे लगता है कि यूएस एक बड़े
भाई की तरह उसकी ग्रोथ में कांटा है तो
कुछ ऐसी ही सोच बांग्लादेश के लोगों की

भारत के प्रति भी है अब ऐसा इसलिए क्योंकि
साउथ एशियन कंट्रीज में भारत सबसे
डोमिनेटेड कंट्री रहा है कल्चरल मिलिट्री
और जिओ पॉलिटिकली रीजन में सबसे ज्यादा
कंट्रोल होने की वजह से बांग्लादेश के

मुकाबले भारत ज्यादा स्ट्रांग है हालांकि
ये दोनों देश कल्चुरली और हिस्टॉरिकली एक
दूसरे से जुड़े हुए हैं लेकिन जिओ
पॉलिटिकली इंडिया की एक स्ट्रांग इमेज
बांग्लादेश को छुपती है यह भावनाएं उनके

दिलों में बार-बार पनपती है कि भारत की
सक्सेस ही उनके ग्रोथ की राह का सबसे बड़ा
पत्थर है अब इसके विपरीत बात अगर भारत और
बांग्लादेश सरकार के रिश्तों की हो तो
दोनों देश ना केवल पॉलिटिकली एक स्ट्रांग

फ्रेंडली बॉन्ड शेयर करते हैं बल्कि
इकोनॉमिकली भी इनके बीच होने वाला व्यापार
बिलियन डॉलर्स का है यहां तक कि साउथ ईस्ट
एशिया में बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा
ट्रेडिंग पार्टनर है इन दोनों देशों के

बीच ना केवल जॉइंट मिलिट्री वेंचर्स होते
हैं बल्कि बांग्लादेश के प्रोजेक्ट्स
लॉन्च करने के लिए भी भारत हमेशा तैयार
रहता है बात चाहे कनेक्टिविटी की हो या
इलेक्ट्रिसिटी

भारत ने बांग्लादेश का साथ कभी नहीं छोड़ा
और इसी का नतीजा है कि कोविड पैंमिकन भी
जब दुनिया भर में हालात बद से बदतर हो गए
थी तब भारत ने कोविड वैक्सीनस की 2 मिलियन

डोजेस बांग्लादेश को गिफ्ट की थी इसके
अलावा बांग्लादेश और अमेरिका के बिगड़ते
रिश्तों के बीच जब अमेरिका ने कुछ
बांग्लादेशी ऑफिशियल पर सैंक्शंस इंपोज कर
दिए थे तब इस देश ने भारत को पुकारा था और
तब भी हमारे देश ने इस मामले को सुलझाने

में अपना पूरा का पूरा सहयोग दिया था
दोस्तों यह तो भारत का बड़प्पन है कि अपने
देश से नेपाल के रास्ते बांग्लादेश तक
बिजली पहुंचाने के लिए भी वह तैयार है बट

अन डाउट भारत और बांग्लादेश गवर्नमेंट
पॉलिटिकली फ्रेंडली रिलेशन एंजॉय करती हैं
और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक दूसरे को
सपोर्ट करने से कतराती नहीं है लेकिन
इंटरनली इनके देश की अपोजिशन पार्टीज भारत
के खिलाफ एंटी अप्रोच रखती है और यही

अप्रोच वहां की मेजॉरिटी मुस्लिम सेक्शन
में भी इस साफ झलकती है दरअसल बांग्लादेश
में लंबे समय से दो बड़ी पॉलिटिकल पार्टीज
एक्जिस्टेंस में हैं पहली आवामी लीग जो

साल 2009 से लगातार सत्ता की कमान संभाले
हुए हैं इनके प्रधानमंत्री शेख हसीना है
जो हमेशा से प्रो इंडिया रही हैं लेकिन
बांग्लादेश की दूसरी पॉलिटिकल पार्टी यानी
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का अप्रोच

भारत को लेकर काफी नेगेटिव रहा है इनकी
लीडर खालिदा जिया और रहमान ना केवल
बांग्लादेश में भारत का विरोध करती हैं
बल्कि अपना स्टंस प्रो चाइना रखती हैं
इनका मानना है कि बांग्लादेश गवर्नमेंट को

इंडिया से मिलने वाली पॉलिटिकल बैक निंग
शेख हसीना को इतने लंबे समय से सत्ता में
बनाए हुए हैं इनका इल्जाम यह भी है कि
भारत का बांग्लादेश की पॉलिटिक्स में
इन्फ्लुएंस कहीं सादा है शुरुआत से ही

भारत सरकार ने बांग्लादेश में आवामी लीग
जैसी अथॉरिटेरियन गवर्नमेंट को सपोर्ट
किया और इसलिए वो इलेक्शंस को मैनिपुलेट
करके इतने सालों से बांग्लादेश की सत्ता
संभाल पाए देखिए भारत को लेकर कहीं ना

कहीं यही थॉट प्रोसेस वहां की मेजॉरिटी
मुस्लिम पॉपुलेशन में भी देखने को मिलता
है और यह आज से नहीं है बल्कि सालों से
चला रहा है दरअसल फॉर्मेशन के समय से ही
बांग्लादेश में दो तरह की आइडल काम करती

है एक वो जो यह मानती है कि भारत की वजह
से ही बांग्लादेश इंडिपेंडेंट हुआ और
दूसरी वो इस बात में बिलीव करती है कि
भारत ने एक साजिश के तहत पाकिस्तान से

बांग्लादेश को अलग किया कई आवाम का यहां
तक भी मानना है कि अगर आज पाकिस्तान और
बांग्लादेश एक होता तो यह साउथ ईस्ट एशिया
की सबसे बड़ी शक्ति होते लेकिन इस आइडल से

परे रियलिटी यह है मेरे भाई कि पाकिस्तान
की इकॉनमी आज कर्जे से चल रही है यह देश
दिवालिया घोषित होने के कागार पर है और आज
यहां इंफ्लेशन इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि
लोगों को रोटी कपड़ा मकान के लाले पड़े

हुए हैं मतलब जिस पाकिस्तान के साथ मिलकर
वह ग्लोबल पावर बनने का सपना देखते हैं
1960 में वही पाकिस्तान बांग्लादेश का
दुश्मन बना हुआ था और उन्हें निचली नजरों

से देखता था जी हां आज के बांग्लादेशी
यूथस में कई लोग ऐसे हैं जो इतिहास के असल
बैकग्राउंड से वाकिफ ही नहीं हैं और जो
वाकिफ भी हैं बस यही वह जानते हैं कि भारत
ने बांग्लादेश के लिए केवल 13 दिन की

लिबरेशन वॉर में हिस्सा लिया था दरअसल
बांग्लादेशी टेक्स्ट बुक में उनकी आजादी
की जंग को बांग्लादेश लिबरेशन वॉर कहकर
बुलाया गया है और उसमें भारत के रोल का
केवल एक छोटा सा ही रेफरेंस मिलता है जबकि

इसके विपरीत इतिहास के पन्नों को दोबारा
से पलटे तो बांग्लादेश के अस्तित्व को
नक्शे पर लाने का काम भारत ने किया था वो
भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ही थी

जिसने सुप्रीम पावर अमेरिका से भी दुश्मनी
मोल लेकर पाकिस्तान से बांग्लादेश को
आजादी दिलवाई थी दोस्तों साल 1947 में
भारत से अलग होकर ईस्ट और वेस्ट पाकिस्तान
का जन्म हुआ था लेकिन अपनी भाषा और कल्चरल
डिफरेंस के चलते ईस्ट और वेस्ट पाकिस्तान

कभी एक नहीं हो पाया एक राष्ट्र होने के
बाद भी जमीन के इन टुकड़ों में पाया जाने
वाला डिफरेंस ही इनके डिवीजन का कारण बना
साल 1971 में वेस्ट पाकिस्तान की पॉलिसी
से परेशान आकर ईस्ट पाकिस्तान ने आजादी की

मांग को बुलंद कर दिया शेख मुजपुर रहमान
के नेतृत्व में लाखों बंगाली लोग
प्रोटेस्ट करने सड़कों पर उतर आए लेकिन
पाकिस्तानी गवर्नमेंट को जब ईस्ट
पाकिस्तान की ये बगावत रास नहीं आई तो

उन्होंने बंगाली लोगों को अपनी ताकत की
नोक के नीचे दबाने के लिए खून की नतिया
पहा दी 25 मार्च 1971 वो काला दिन था जब
पाकिस्तानी प्रेसिडेंट यया खान ने ईस्ट
पाकिस्तान में ऑपरेशन सर्च लाइट को अंजाम

दिया और इसके तहत अपने ही देश के लोगों को
जानवरों की तरह कत्लेआम करवा दिया यह
जेनोसाइड इतना ब्रूटल था कि लाखों की भीड़
में लोग रातों-रात बांग्लादेश छोड़ने के
लिए मजबूर थे वह तेजी से भारत के नॉर्थ

ईस्ट स्टेट्स में माइग्रेट हुए तो इतनी
बड़ी बर्बरता और ह्यूमन राइट्स वायलेशन पर
भी जब दुनिया का हर एक देश तमाशा देख रहा
था तब भारत ही था जिसने खुले दिल से
बांग्लादेशी लोगों का अपने देश में स्वागत

किया हमने ना केवल लाखों की संख्या में
भारत आए रिफ्यूजीस को घर खाना पानी और
सहारा दिया बल्कि बांग्लादेश की
इंडिपेंडेंट आर्मी मुक्ति वाहिनी को भी
पाकिस्तानी आर्मी के खिलाफ जंग के लिए

ट्रेन किया बांग्लादेश की हक की लड़ाई के
लिए भारत पाकिस्तान के खिलाफ भी जंग में
उतर गया और उसे घुटने टेकने पर मजबूर किया
उधर अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब अमेरिका यूके
और पाकिस्तान मिलकर बांग्लादेश को आंख
दिखा रहे थे और भारत पर जंग से पीछे हटने

के लिए प्रेशर बना रहे थे तब वह भारत की
जाबाज सेना ही थी जिसने ना केवल जमीन पर
बल्कि समंदर में भी पाकिस्तानी सेना को
धूल चटाई थी वह भारत ही था जिसने
बांग्लादेश के रिवोल्यूशन लीडर शेख

मुजीबुर रहमान को बचाने के लिए पाकिस्तान
के 93000 प्रिजनर ऑफ वॉर को भी रिहा किया
था और उन्हें बांग्लादेश का पहला
प्रेसिडेंट एक्सेप्ट किया था उस वक्त भारत
चाहता तो अपनी मर्जी से बांग्लादेश को

भारत से मिला सकता था लेकिन इस के विपरीत
भारत वह पहला देश था जिसने अंतरराष्ट्रीय
मंच पर बांग्लादेश को सबसे पहले एक
इंडिपेंडेंट नेशन एक्सेप्ट किया था और

पाकिस्तान को भी बांग्लादेश की सोवन मानने
के लिए मजबूर किया था इस युद्ध में भारत
ने अपने कई हजार सैनिकों को भी खोया था
लेकिन कमाल की बात यह है कि इस बलिदान को

बांग्लादेशी यूथ पाकिस्तान के खिलाफ एक
साजिश का रूप देते हैं और इस नैरेटिव को
सेट करने की जिम्मेदार कहीं ना कहीं वहां
की अपोजिशन पॉलिटिकल पार्टीज हैं दरअसल

आजादी के बाद से ही बीएनपी और आवामी लीग
पार्टीज के बीच पॉलिटिकल आइडल जीज का
डिफरेंस परप में लगा था हालांकि भारत का
समर्थन आवामी लीग को था लेकिन 1971 की
आजादी के बाद शेख मुजीबुर रहमान भी

बांग्लादेश में डेमोक्रेसी लाने की बजाय
डिक्टेटरशिप से राष्ट्र को चलाने लगे इसी
का नतीजा यह हुआ कि 1975 में बांग्लादेश
में बड़ा तख्ता पलट हुआ और शेख मुजीबुर

रहमान को उनके ही घर में घुसकर गोलियों से
भूंड डाला उनके पूरे परिवार का ही एक दिन
में कतले आम हो गया लेकिन इस एसिनेट से
शेख मुजीबुर रहमान की बेटी शेख हसीना बचने

में सफल रही जो कि उस वक्त जर्मनी में थी
इस घटना से वह अपने देश तो नहीं जा सकी
लेकिन उन्होंने भारत में शरण ली और हमारे
देश ने भी खुले दिल से शेख हसीना का
स्वागत किया इस दौरान बांग्लादेश में
बीएनपी का राज रहा और उनके लीडर जियाउर

रहमान देश के प्रेसिडेंट बने रहे लेकिन
उनके मरने के बाद यानी 1990 में उनकी
विधवा खलीला जिया ने बीएनपी की कमान
संभाली और 1991 से 1996 तक बांग्लादेश की
प्राइम मिनिस्टर के पद पर आसीन रही इस

दौरान उनकी नीतियां काफी प्रो चाइना रही
और भारत के खिलाफ उनका अप्रोच काफी एंटी
इंडिया रहा क्योंकि उनका विश्वास था कि
भारत का सपोर्ट आवामी लीग की तरफ ज्यादा
है फिर 1996 में बांग्लादेश में एक बार

फिर आवामी लीग का आगमन हुआ और शेख हसीना
पावर में आई इसी के साथ भारत ने फर शेख
हसीना का साथ नहीं छोड़ा फॉरेन ट्रेड से
लेकर मिलिट्री जॉइंट वेंचर्स फूड
इलेक्ट्रिसिटी और इकोनॉमिक प्रोजेक्ट्स तक

भारत हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा
लेकिन हमारे इसी सपोर्ट को बांग्लादेशी
अपोजिशन पार्टीज केवल आवामी लीग के सपोर्ट
की तरह देखती है पिछले 15 साल से भले ही
शेख हसीना भारत के साथ एक सच्ची दोस्ती
मेंटेन करने में सफल रही हैं लेकिन भैया
बांग्लादेशियों के दिल से भारतीयों के लिए

दोस्ती कब की जा चुकी है ऐसे में अगर 2024
के बांग्लादेश इलेक्शन में बीएनपी की
पार्टी पावर में आती है तो इस फ्रेंडशिप
का गोल्डन फेज हमेशा के लिए खत्म हो सकता
है बांग्लादेश की जो आवाम आज हिंदू कल्चर

और हिंदू रिलीजन के लिए नफरत पाल के बैठी
है वो वक्त के साथ तेजी से बढ़ सकती है और
आलम यह है कि पाकिस्तान की आवाम से ज्यादा
एंटी अप्रोच आज बांग्लादेश यूथ का है
इसलिए भारत को जरूरत है कि वह अपने

डिप्लोमेटिक अप्रोच को बदले और एक नई
स्ट्रेटेजी के साथ बांग्लादेश में काम
करें वरना वो दिन दूर नहीं है जब चाइना का
बांग्लादेश में बढ़ता इन्फ्लुएंस भारत के
लिए सर दर्द बन सकता है दोस्तों

बांग्लादेशियों के इस एंटी इंडिया
सेंटीमेंट पर आपका क्या कहना है हमें
कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं फिलहाल
इसी के साथ लेते हैं आपसे विदा

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