बिल्क़ीस मामले में कोर्ट ने दिया फ़ैसला - instathreads

बिल्क़ीस मामले में कोर्ट ने दिया फ़ैसला

नमस्कार  बिलकिस बानो के
केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया
कोर्ट का यह फैसला तब आया है जब राम मंदिर
के उद्घाटन के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी को विष्णु और शिव का अवतार बताया जा

रहा है राम की मर्यादा के प्रतीक के रूप
में उन्हें स्थापित करने का प्रयास हो रहा
है मगर इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले से
यह सवाल उठता है कि वे महापुरुष और दैविक

अवतार होने के उत्तराधिकारी हैं भी या
नहीं प्रधानमंत्री के नाते छोड़िए एक
सामान्य नागरिक के नाते उन्होंने हत्यारों
और बलात्कारियों की रिहाई का विरोध नहीं
किया गुजरात चुनावों के समय हत्या और

बलात्कार के दोषियों को माला पहनाया जा
रहा था बीजेपी के विधायक सीके राहुल जी का
बयान है कि यह ब्राह्मण हैं और इनके
संस्कार अच्छे हैं प्रधानमंत्री चुप रहे
उनकी मंत्री स्मृति ईरानी चुप रही

गृहमंत्री चुप रहे जब आप इस केस का डिटेल
पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि केवल हत्यारों और
बलात्कारियों को नहीं बचाया जा रहा था उस
विचारधारा को भी बचाया जा रहा था जिसके
नाम पर 11 लोगों ने बिलकिस के साथ

बलात्कार किया उसके परिवार के सात लोगों
की हत्या की और कैदी बन गए हत्यारे बन गए
सुप्रीम कोर्ट ने आज इस विचारधारा को भी
एक तरह से रंगे हाथों धर लिया है अब सवाल
सुप्रीम कोर्ट के फैस से भी बड़ा है

गुजरात सरकार को प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी को गृहमंत्री अमित शाह को सुप्रीम
कोर्ट के इस एक फैसले से बचाने के लिए
गोदी मीडिया क्या-क्या करेगा क्या आपको

पता है क्या इस फैसले को घर-घर पहुंचाया
जाएगा या फिर गोदी मीडिया राम मंदिर का
कवरेज और बढ़ा देगा ताकि राम को घर-घर
पहुंचाने के नाम पर बीजेपी सरकार की इस
करतूत को आप तक पहुंचने से रोका जा सके

क्या यह सवाल करेगा गोदी मीडिया कि गुजरात
सरकार हत्यारों का साथ देती हुई पकड़ी गई
है क्या मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा
जाएगा किसी पर कार्रवाई होगी जिस समय

रिहाई हुई उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री
भूपेंद्र पटेल थे आज भी हैं क्या मीडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री
अमित शाह से सवाल करेगा कि इतने गंभीर
अपराधियों को रिहा करने की सिफ पारिश
केंद्र के गृह मंत्रालय ने क्योंकि खुद

गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था
कि गृह मंत्रालय के कहने पर रिहा किया गया
आप दर्शक भी ठीक से पढ़िए सुप्रीम कोर्ट
की जस्टिस नाग रत्ना और जस्टिस उज्जवल की
बेंच ने कहा है कि गुजरात सरकार हत्या और

बलात्कार के मामले में सजा पाए लोगों के
साथ मिली हुई है हमारा सवाल है क्या
प्रधानमंत्री मोदी उस गुजरात सरकार के
मुख्यमंत्री से से इस्तीफा मांगेंगे जिसके
बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह

हत्यारे और बलात्कारियों के साथ मिलकर
उसने काम किया जस्टिस नागरथ ने ऑर्डर
पढ़ते हुए कहा कि कोर्ट मानता है कि रिहाई
का ऑर्डर देने का अधिकार क्षेत्र गुजरात
सरकार का नहीं था महाराष्ट्र सरकार का था

इसलिए कोर्ट ने रिहाई के फैसले को खारिज
कर दिया अदालत ने कहा कि आरोपियों की
आजादी पर अंकुश लगाना जायज है उन्होंने
आजादी के अधिकार तभी खो दिए जब दोषी पाए
गए और जेल हुई अगर उन्हें रिहाई चाहिए तो
जेल में कानून के दायरे में रहकर अपील

करें कोर्ट ने कहा कि हम मानते हैं कि
कानून का शासन माने बिना इंसाफ नहीं किया
जा सकता अगर ऐसा नहीं होगा तो कोर्ट के
आदेश मिथ्या बनकर रह जाएंगे कोर्ट को
इंसाफ करना है इंसाफ से किनारा नहीं करना
चाहिए गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के

एक और ऑर्डर का सहारा लिया और इस मामले
में रिहाई की उस ऑर्डर के अनुसार रिहाई का
अधिकार महाराष्ट्र सरकार से गुजरात सरकार
को दिया गया इस आधार पर के अपराध गुजरात
में हुआ था आज के अपने फैसले में सुप्रीम

कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट से 13
मई 2022 का वह ऑर्डर फ्रॉड के माध्यम से
प्राप्त किया गया फ्रॉड के माध्यम से
प्राप्त किया गया दोबारा पढ़ रहा हूं ताकि
आप ध्यान से सुने फ्रॉड के माध्यम से

प्राप्त किया गया इसलिए वह गैर कानूनी है
और इसी कारण रिहाई का आदेश खारिज किया
जाता है सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह एक
क्लासिक केस है क्लासिक केस जब सुप्रीम
कोर्ट के ऑर्डर का इस्तेमाल कानून को

तोड़ने के लिए किया गया ताकि दोषियों की
रिहाई हो कोर्ट ने कहा कि यह राज्य सरकार
द्वारा विवेक के दुरुपयोग और और सत्ता को
हड़पने का मामला है इस आधार पर भी इस आदेश

को खारिज किया जाना चाहिए आज राम की
मर्यादा की सारी समझ दांव पर है बीजेपी की
सरकार पर हत्या और बलात्कार के दोषियों के
साथ मिलकर काम करने का आरोप नहीं बल्कि
प्रमाण पाया गया है कोर्ट ने गुजरात सरकार

के फैसले को रद्द कर दिया कहा कि सरकार इन
हथियारों के साथ मिली हुई थी बताइए किसी
सरकार पर कब आपने सुना कि को ने कहा हो कि
वह हत्यारों और बलात्कारियों के साथ मिली
हुई
थी अब सवाल है क्या राम की मर्यादा का

पालन किया जाएगा संवैधानिक मर्यादा का तो
हमने जिक्र भी नहीं किया क्योंकि करोड़ों
रुपए झोक कर लाखों कार्यकर्ता उतार कर
दर्जनों अंकर उतार कर देश को राममय बनाया
जा रहा है तो राम की मर्यादा की ही बात

करते हैं क्या बीजेपी के कार्यकर्ता नेता
समर्थक हाउसिंग सोसाइटी के अंकिल और
आंटियां इस बात को भी हजम कर जाएंगी या वह
सवाल करेंगे कि प्रधानमंत्री के राज्य
गुजरात की बीजेपी सरकार पर हत्यारे और

बलात्कारियों के साथ मिलकर काम करने के
प्रमाण मिले हैं तो ऐसे में प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी को क्या करना चाहिए तब क्या
करना चाहिए था और अब क्या करना चाहिए क्या
घर-घर आ रहे इन कार्यकर्ताओं से देश की
नारियां पूछें कि राम की पूजा करते हैं

लेकिन हत्यारे और बलात्कारियों को चुपके
से रिहा करवाते हैं और प्रधानमंत्री बोलते
क्यों नहीं क्या यह सवाल इस देश की औरतें
पूछ पाएंगी या इस पर भी चुप रह जाएंगी इस
तरह के कार्यक्रमों से माहौल बनाया जा रहा

है लेकिन क्या महिलाएं देख सकेंगी देश की
जनता को दिखेगा कि राम के नाम पर उनसे
क्या-क्या छिपाया जा रहा
है आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने

बिल्किस बानो के
अपराधियों को जो राहत दी गई थी गैर कानूनी
राहत जो दी गई थी उसके खिलाफ ऑर्डर दिया
और उसको रद्द कर दिया हम इसका स्वागत करते
हैं स्वतंत्र भारत में बाबा साहब अंबेडकर
के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं हो

सकता जहां अपराधी का धर्म देखा जाए या
अपराध के शिकार का धर्म या मजहब देखा जाए
या जाति देखी जाए जो पार्डन इनको दी गई थी
जो राहत इन्हें दी गई थी हत्यारों को
बलात्कारियों को उसके

बाद एक पार्टी से जुड़े हुए लोगों ने उनका
माल्यार्पण किया उनका स्वागत किया यह
देखकर रोंगटे खड़े हो जाते थे कि इस देश
में आजादी के 75 साल बाद जब हम अमृत

महोत्सव मना रहे हैं तब भी ऐसा संभव है आज
सुप्रीम कोर्ट ने हमारी आस्था भारत के
संविधान पर भारत के कानून पर न्यायपालिका
पर फिर से स्थापित कर दी है उसके लिए हमें
हम सुप्रीम कोर्ट का कोटि-कोटि धन्यवाद

देते हैं सुप्रीम कोर्ट ने बिल्किस बानों
के साथ बलात्कार करने वाले उसकी बच्ची को
मार देने वाले और अन्य रिश्तेदारों की
हत्या जैसे आरोप में सजा पाए उन सभी 11

लोगों को जेल भेजने के आदेश दिए हैं
जिन्हें गुजरात चुनाव के समय रिहा किया
गया था उनकी स्वतंत्रता 15 अगस्त के दिन
की गई उस दिन आजादी का अमृत महोत्सव मनाया

जा रहा था और अमृत और आजादी दी जा रही थी
हथियारों को दो सब के भीतर इन् 11 दोषियों
को आत्मसमर्पण करना पड़ेगा कोर्ट ने कहा
कि गुजरात सरकार का फैसला शक्तियों का
दुरुपयोग था आप सोचिए यह दुरुपयोग किसके

लिए किया गया जिन्हें हत्या के मामले में
सजा सुनाई जा चुकी थी क्या यह मामला
राजनीतिक नहीं है क्या बिना इनकी राजनीतिक
जरूरत के कोई भी सरकार यह फैसला ले सकती
थी कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार के पास

ऐसा करने का कोई अधिकार ही नहीं था आप
किसी बलात्कारी और हत्यारे को रिहा कर रहे
हैं तब कर रहे हैं जब कोई अधिकार नहीं साफ
है गुजरात विधानसभा चुनाव में माहौल बनाने

के लिए या किसी अन्य अज्ञात राजनीतिक मकसद
से किया गया होगा यह लड़ाई मीडिया ने नहीं
लड़ी महुआ मोइत्रा ने लड़ी जिन्हें संसद
से निकाल दिया गया जिनके खिलाफ गोदी

मीडिया ने अभियान चलाया जिनका चरित्र हनन
किया गया महुआ संसद में हार गई मीडिया के
सामने हार गई मगर उनकी इस एक याचिका ने उस
सच को सामने ला दिया

जो दिख तो सबको रहा था मगर बोल कोई नहीं
पा रहा था बिलकिस बानो बेशक मुख्य याचिका
करता थी मगर उनके साथ तृणमूल नेता महुआ
मोइत्रा पूर्व सांसद सुभाषिनी अली
प्रोफेसर रूपरेखा वर्मा पत्रकार रेवती लॉल

ने भी 2022 में दोषियों की रिहाई के बाद
कोर्ट के सामने अपनी याचिका दायर की
बिलकिस का साथ दिया एक बार फिर से इस
लड़ाई में वकील कपिल सि वकील शोभा गुप्ता
वकील वृंदा ग्रोवर और वकील अभिषेक मनु

सिंघवी ने पैरवी की यह लड़ाई लड़ी
सुभाषिनी अली ने अपनी याचिका में कहा था
यह अन्याय है द वायर को उन्होंने एक
इंटरव्यू दिया और कहा कि क्या नए भारत में
इंसाफ अपराधी का धर्म और जाति देखकर होगा

आखिर गुजरात की सरकार बलात कायों को और
हथियारों को क्यों बचा रही है क्या उसकी
मजबूरी है कि वह किसी हद तक जाने के लिए
तैयार थी इन अपराधियों को बचाने के लिए
सिर्फ उनको छोड़ा ही नहीं इनको बचाने के

लिए पूरी अपनी ताकत गुजरात की सरकार और
केंद्र की सरकार ने झोक दिया आखिर क्यों
क्या भी बीजेपी की जो सरकारें हैं वह
बलात्कारियों और अपराधियों को संरक्षण

देने वाली सरकारें हैं क्या वो यह दे रही
हैं संदेश कि जो लोग उनके जैसे सोचने वाले
हैं
उनके साथ जुड़े हुए हैं वह चाहे बलात्कार
करें चाहे हत्या करें उनका बाल बांका नहीं

होगा क्या वह कह रहे हैं कि महिलाओं के
साथ जघन्य अपराध करने वालों को भी पूरी
तरह से सरकार की तरफ से संरक्षण दिया जा
रहा है अगर ऐसी बात है तो यह हमारे देश के

लिए बहुत खतरनाक है अभी बीएचयू का मामला
भी सामने आया है जिसमें तीन नौजवान जो
भाजपा से संबंधित हैं उन्होंने एक छात्रा
के साथ जो वहां बदतमीजी की बदसलूकी की अभी
वह बात सामने आई है और दो महीने तक पुलिस

ने उनके खिलाफ कोई कारवाई नहीं की बृजभूषण
सरण सिंह का भी मामला सामने है तो आखिर
क्या हो रहा है हमारे देश में क्या न्याय
की जो प्रक्रिया है वह संविधान से दूर हट

रही है वह रूल ऑफ लॉ से दूर हट रही है
क्या हमारे देश में अब मनुस्मृति के आधार
पर न्याय प्रक्रिया चलेगी के जो अपराधी है

उसका धर्म देखा जाएगा उसकी जात को देखा
जाएगा और जिसके साथ अपराध हुआ है उसकी जात
को देखा जाएगा उसके धर्म को देखा जाएगा
उसके बाद दंड सुनाया जाएगा यह बहुत बड़े
सवाल है बहुत गंभीर सवाल है जिन पर लोगों

को अब सोचना पड़ेगा अब कोर्ट ने यह भी कह
दिया है कि यह लोग महाराष्ट्र जा सकते हैं
वहां पर दरवाजा कोर्ट का खटखटा सकते हैं
अब महाराष्ट्र में भी बीजेपी की सरकार है

तो वहां क्या होगा तो यह बहुत बड़े सवाल
है और जो लोग भी इस देश में न्याय पसंद है
जो लोग भी चाहते हैं कि महिलाओं की

सुरक्षा हो जो कमजोर हैं जो पीड़ित हैं
उनकी सुरक्षा हो उनको इन सवालों के बारे
में बहुत गंभीरता पूर्वक सोचना पड़ेगा
मोदी सरकार नारी वंदना मातृ शक्ति का जाप
करवाती रही बीजेपी के कार्यकर्ता और
समर्थक भी यही करते रहे मगर बिल्किस के

जरिए भारत की महिलाओं के साथ खड़े हो होने
का मौका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चूक गए
चुप्पी उनकी थी मिली भगत गुजरात सरकार की
थी उनकी मंत्री स्मृति रानी भी चूक गई
बेहद गंभीर मामला है हत्या और बलात्कार के
जघन्य मामले में इन 11 लोगों को सजा सुनाई

गई थी जसवंत नाई गोविंद नाई शैलेश भट्ट
राधेश्याम शाह विपिन चंद्र जोशी केशर भाई
बहानिया प्रदीप मुड़ हडिया बाका भाई
बहानिया राजू भाई सोनी मितेश भट्ट और रमेश

चांदना यह सब इनके नाम हैं रिहाई के बाद
स्थानीय लोग माला और मिठाई लेकर पहुंच गए
स्वागत करने जब यह लोग बाहर आए तब इनके
पैर छुए गए मालाएं पहनाई गई महिलाओं ने

टीका लगाया ऐसी खबरें भी छपी कि विश्व
हिंदू परिषद के नेताओं ने अपने दफ्तर में
इनका स्वागत किया इस पूरे मामले से प्रधान
मंत्री को अलग करने और उन्हें महान दिखाने
के लिए बीजेपी की प्रवक्ता शाजिया इल्मी

ने इंडियन एक्सप्रेस में लेख लिखा बताया
कि विश्व हिंदू परिषद ने किया इसका
प्रधानमंत्री मोदी से कोई लेना देना नहीं
इस पर विश्व हिंदू परिषद के नेता नाराज हो

गए बीजेपी से सवाल कर दिया क्या यह पार्टी
लाइन है या शाजिया इल्मी की राय है तो इस
तरह से इस मामले में बीजेपी गेंद को इस
पाले में तो कभी उस पाले में फेंक रही

ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आंच ना
आए क्या प्रधानमंत्री इस जवाबदेही से बच
सकते हैं उन्होंने तो कुछ कुछ नहीं कहा
अटल बिहारी वाजपेई की तरह बोल सकते थे कि

जो हुआ गलत हुआ लेकिन वे चुप रह गए गुजरात
से आते हैं वहां कि सरकार ने ऐसा किया
बलात्कारी और हथियारों के साथ सरकार खड़ी
रही और प्रधानमंत्री की कोई जवाबदेही नहीं

बनती एक बयान तक नहीं आता है क्या इसके
लिए भी प्रधानमंत्री की कोई जवाबदेही नहीं
बनेगी आप ठीक से पढ़िए बीजेपी के विधायक
हैं सीके राहुल जी इन्होंने रिहा हुए
दोषियों को संस्कारी ब्राह्मण कहा था

भाजपा विधायक जेल की उस कमेटी के सदस्य थे
जिसने इनकी रिहाई का प्रस्ताव किया सोचिए
ब्राह्मण होने के नाते हत्यारे और
बलात्कारियों को रिहा किया गया क्या आईटी
सेल हिंदुस्तान टाइम्स में छपी इस खबर को
जनजन तक पहुंचाएगा कि भारत के

प्रधानमंत्री की नाक के नीचे इस देश में
क्या हो रहा है देश के एक हिस्से को बदल
दिया गया है बाकी हिस्से को चुप रहने के
लिए डरा दिया गया है या किसी और दौर का
भारत होता तो प्रधानमंत्री तमाम राजनीतिक

दबावों की आशंका में रहते सोचते कि जनता
में क्या संदेश जा रहा है जनता कितनी
नाराज होगी मगर अब सबको भरोसा हो गया है
राम के नाम पर जनता ने सोचना बंद कर दिया

है इसलिए इस सवाल को गायब करने के लिए राम
के नाम की गाड़ी गली-गली में तेज गति से
घुमा दी जाएगी लोग भूल जाएंगे कि सरकार ने
क्या किया काम कुछ और भाषण कुछ और जिस 15
अगस्त को बिलकिस बानों के साथ बलात्कार

करने और उसके परिवार के सात लोगों की
हत्या करने वालों को रिहा किया जा रहा था
उसी 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी लाल किले से देश के लिए अपील कर रहे
थे देश से अपील कर रहे थे कि किसी ना किसी

कारण से हमारे अंदर एक ऐसी विकृति आई है
हमारी बोलचाल में हमारे व्यवहार में हमारे
कुछ शब्दों में हम नारी का अपमान करते हैं
क्या हम स्वभाव से संस्कार से रोजमर्रा की
जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर

बात से मुक्ति का संकल्प ले सक सकते हैं
जनता से अपील कर रहे हैं खुद जो करना
चाहिए नहीं कर रहे हैं महिला विकास मंत्री
स्मृति रानी याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट तो
नहीं गई उन्हें जाना चाहिए था यह उनका काम

था कौन इस देश में हथियारों के साथ खड़ा
होता है किस मजबूरी में खड़ा होता है और
चुप हो जाता है गुजरात सरकार से पूछा जाना
चाहिए किसके कहने पर हथियारों के साथ यह

सरकार मिलकर काम कर रही थी गुजरात दंगों
पर द एनोटोमी ऑफ हेट नाम से शानदार किताब
लिखने वाली पत्रकार रेवती लॉल भी
याचिकाकर्ताओं में से एक थी आपने यह किताब
नहीं पढ़ी है अपने बच्चों को पढ़ाइए बताइए
कि सांप्रदायिकता आपके बच्चों को गुंडा और

दंगाई बना देगी आज हमारे सुप्रीम कोर्ट ने
दिखा ही दिया कि न्याय के आगे जीत है बहुत
लोग कह रहे थे कि कुछ नहीं होगा और हम
इससे एक चीज तो जरूर सीख सकते हैं कि हमें
हार नहीं माननी है किसी भी कीमत पर हार

नहीं माननी है लेकिन यह जीत हम लोग
जिन्होंने कोर्ट में केस लेकर गए वो नहीं
है यह बिलकिस बानों की जीत है और बिलकिस
बानों से देश के बाकी सारी औरतें खासकर
मुस्लिम औरतों को यह जान लेना चाहिए कि

न्याय अभी भी मरी नहीं है लोग हमारा हौसला
तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं राजनीतिक तौर
पर सामाजिक तौर पर बड़ी जातें और बड़े
पार्टियां और सरकारें हमारा हौसला कम करने
की कोशिश कर रहे हैं लेकिन आज हम लोगों को

बता रहे हैं जोर से अपने मुट्ठी ऊपर करके
कि सच के आगे आखिर जीत है कोर्ट का फैसला
ने समाज समाज की बातें सुनी बिलकिस बानू
की पीड़ा सुनी और कोर्ट ने आखिर कहा कि
ऐसा नहीं हो सकता है कि न्याय एकदम दबाया

जाए और दबी रहे और इससे सबको सतर्क रहना
चाहिए
जो लोग न्याय का अपमान करते हैं और सोचते
हैं कि न्याय उनकी मुट्ठी में है यह लड़ाई
बीजेपी की महिला नेता क्यों नहीं लड़ रही

थी उनके पास सरकार थी ताकत थी मीडिया था
अपने ही सरकार से पूछ सकती थी क्या बीजेपी
की महिला नेताओं को इसमें कुछ भी गलत नहीं
लगा वो कैसे चुप रह गई तब फिर वे किस बात
की नारी शक्ति नारी वंदना के नाम पर
धार्मिक रैलियों में जाती है अगर बिलकिस

के मजहब से दिक्कत थी तो इससे क्यों नहीं
दिक्कत हुई कि बीजेपी के ही पुरुष विधायक
हत्या करने वालों को ब्राह्मण और अच्छे
संस्कार का बता रहे थे क्या बीजेपी महिला
नेताओं के हिंदू राष्ट्र की कल्पना में इन

बातों को बर्दाश्त करना होगा सुप्रीम
कोर्ट ने आज उन सभी नेताओं को सजा सुनाई
है जो राष्ट्रवाद और नारी वंदना के नाम पर
पगड़ी बांधकर वीर रस में प्रधानमंत्री
मोदी का बखान करती हैं मगर बलात्कारी और
हत्यारे की रिहाई पर एक शब्द बोलने की

वीरता नहीं दिखा पाती यही धर्म की राजनीति
की कायरता है धर्म की राजनीति सामान्य
विवेक की जगह कीचड़ भर देती है
2019 अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था
बिलकिस को 50 लाख का मुआवजा घर नौकरी मिले

क्योंकि बिलकिस ने 17 साल बंजारों की
जिंदगी गुजारी है बिलकिस ने 15 साल में 20
घर बदले लेकिन मुआवजा देने में गुजरात
सरकार ने 5 महीने की देरी की जब वह वापस
कोर्ट गई तो सरकार की तरफ से वकील तुषार

मेहता ने कहा कोर्ट स्पष्ट करें कि यह
सिर्फ इस इसलिए हुआ है क्योंकि इस मामले
में विशेष परिस्थिति है कहने का मतलब है
कि अपवाद के तौर पर निर्देश दिया जा रहा
है तब कोर्ट ने कहा कि ठीक है हम स्पष्ट
ही कर देते हैं उसके बाद तुषार मेहता ने

कहा कि हम दो हफ्तों में पैसा दे देंगे उस
पर भी कोर्ट को कहना पड़ा आपको इतनी देर
नहीं लगनी चाहिए हर कदम पर स्टेट यानी
सत्ता बिलकिस का विरोध कर रही थी हर कदम
पर बिलकिस लड़ती जा रही थी बिलकिस बानों

की यह जीत भारत की उन महिलाओं और मर्दों
को शर्मिंदा करती है जो इस केस पर इसलिए
चुप हो गए क्योंकि उन्हें प्रधानमंत्री
मोदी से सवाल करना पड़ता उन्हें बीजेपी से
सवाल करना पड़ता आप अपनी इस हार को राम

मंदिर की आड़ में नहीं छिपा सकते उनके
सामने भी जवाब देना पड़ेगा जब आपने किसी
प्रकार की मर्यादा ही नहीं बचने दी तो राम
की मर्यादा कहां से खड़ी कर पाएंगे वरना
राम के नाम पर इतनी शक्ति तो आ ही जाती कि

गलत के खिलाफ बोलते अन्याय के खिलाफ बोलते
और न्याय की मांग करते गुजरात पर
डॉक्यूमेंट्री क्या बनी बीबीसी पर छापे
पड़ गए बैन लग गया बिल्किस बानों के इस
फैसले से आज गुजरात दंगों के दौर की खबरें

फिर से लौट रही हैं देश की जनता हर गलत पर
छुप रही क्योंकि उसे राम मंदिर का सपना
दिखाया जा रहा था एक बार फिर से उसे मौका
मिला है गलत को गलत कहने का राम की
मर्यादा स्थापित करने का हमने यह उदाहरण

क्यों दिया बहुत जरूरी था इनकी रिहाई का
विरोध करने वाले कुछ लोग बचे हुए थे
सिस्टम के भीतर कोई था जिसका ईमान कांप
रहा था ऐसा नहीं होना चाहिए मार्च 2021
में मुंबई के ट्रायल कोर्ट के सिविल जज ने

कहा कि इन लोगों की बिलकिस या मारे गए
लोगों से कोई दुश्मनी नहीं थी कोई रिश्ता
ही नहीं था इनकी हत्या और बलात्कार केवल
इसलिए किया गया क्योंकि यह एक धर्म विशेष
के थे नाबालिगों को भी नहीं बख्शा गया यह

इंसानियत के सबसे जघन्य अपराधों में से है
यह समाज की अंतरात्मा को प्रभावित कर सकता
है इसलिए हमने राम यात्रा की तस्वीरें
दिखाई आपसे पूछने के लिए कि क्या राम की

इन तस्वीरों का इस्तेमाल आपको नैतिक रूप
से मजबूत बनाने के लिए किया जा रहा है बस
पर बनी प्रधानमंत्री की ऐसी तमाम तस्वीरों
के जरिए कई प्रकार की अनैतिक चुपी हों पर

पर्दा डालने के लिए तो नहीं किया जा रहा
इन हत्यारों की रिहाई को चुनौती नहीं दी
जाती तो कई सच बाहर नहीं आ पाते जैसे
सुनवाई के दौरान ही पता चला कि सीबीआई भी
रिहाई के लिए तैयार नहीं थी मुंबई के

ट्रायल जज भी सहमत नहीं थे सुनवाई के चलते
गुजरात सरकार को खुद यह बात सुप्रीम कोर्ट
को बतानी पड़ गई सीबीआई के अधिकारी ने
गोधरा की सब जेल में सीबीआई की स्पेशल
क्राइम ब्रांच के सुपरिटेंडेंट को मार्च
2021 में पत्र लिखकर कहा कि दोषियों का

अपराध बहुत ही जघन्य और गंभीर है इसलिए
उन्हें जल्दी रिहाई नहीं मिलनी चाहिए ना
कोई रियायत मिलनी चाहिए मुंबई के सिविल जज
ने कहा कि सुनवाई महाराष्ट्र में हुई है
तो महाराष्ट्र सरकार रिहाई के नियम लागू

कर सकती है मगर 13 मई 2022 को सुप्रीम
कोर्ट ने 11 में से एक आरोपी की याचिका पर
फैसला देते हुए कहा था यह मामला गुजरात
सरकार के पास जाना चाहिए क्योंकि अपराध
वही हुआ था इस तरह गुजरात सरकार ने आदेश

जारी कर 15 अगस्त के दिन हत्या और
बलात्कार के 11 दोषियों को समय से पहले
रिहा कर दिया इसका मतलब कोई था किसी का
हाथ रहा होगा जो इनकी रिहाई आता होगा
गुजरात सरकार ने कोर्ट को बताया है कि

केंद्रीय गृह मंत्रालय की रजामंदी से ही
यह रिहाई हुई राज्य सरकार ने बताया कि
केंद्र के पास भेजे जाने के दो हफ्तों के
भीतर ही इनकी रिहाई की मांग स्वीकार कर ली
गई इतना जल्दी फैसला तो सवाल है कि जब

इनकी रिहाई हुई उस समय सरकार ने यह बात
सामने क्यों नहीं रखी रिहाई के समय कहा जा
रहा था कि गोधरा की कमेटी ने मंजूरी दी
क्योंकि गुजरात सरकार के रिहाई के नियमों
के तहत उसकी और अन्य विभागों की रजामंदी

चाहिए थी लेकिन रिहाई के दो महीने बाद
कोर्ट के सामने रखे गए दस्तावेजों में यह
निकल कर आता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय
ने दो हफ्ते के भीतर रजामंदी दे दी अमित
शाह जी बताएं इतनी जल्दी क्या थी गुजरात

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि
आरोपियों ने 14 साल या उससे अधिक सजा काट
ली है उनका बर्ताव अच्छा है केंद्र ने भी
हामी भर दी इसलिए उन्हें रिहा किया गया जब
यह खबर आई तब बिल्किस पर मानो बिजली गिर
गई बिल्किस ने कहा मुझे अकेला छोड़ दीजिए

मैं अपनी मरहूम बेटी सालिया के लिए दुआ
पढ़ रही हूं बिल्किस के पति याकूब रसूल ने
खबर आने के बाद कहा कि मिलने के खबर मिलने
की कुछ देर तक बिल्किस को यकीन नहीं हुआ
उसके बाद वो रोई फिर सहम कर चुप हो गई

हमें इस बारे में पता नहीं वे स्तब्ध हैं
शांति की प्रार्थना करते हैं यह उनका बयान
था 2002 में गुजरात में हिंसा हो रही थी
बिल्किस अपने परिवार के साथ अपने गांव
रणधीकपुर से भागी सारे लोग छपर वाड जिले

में शरण ले रहे थे जब 2030 लोगों के झुंड
ने उन पर हमला कर दिया इनमें से 11 वो थे
जिन पर 3 मार्च 2002 को 21 साल की बिल्किस
बानों के साथ गैंग रेप करने का आरोप लगा
और सजा हुई बिल्किस उस समय पाच महीने की

गर्भवती थी उनका अजन्मा बच्चा मारा गया आप
नारी वंदना की बात करते हैं और चुप हो
जाते हैं बिल्किस की 3 साल की बेटी समेत
परिवार के सात लोगों की हत्या हुई थी 2008
में इस मामले को ट्रायल के लिए महाराष्ट्र

भेज दिया गया एक सेशंस कोर्ट ने सभी
आरोपियों को 302 376 के तहत आजीवन कारावास
की सजा दी मई 2017 में बम्बे हाई कोर्ट ने
सजा बरकरार रखी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने
50 लाख मुआवजे का ऑर्डर दिया सजा बरकरार
रखी अप्रैल 2023 में जस्टिस नागर जस्टिस
केएम जोसेफ की बेंच इस माम मामले में

सुनवाई कर रही थी उन्होंने ऑर्डर दिया कि
केंद्र और गुजरात की सरकारें अगली सुनवाई
पर दोषियों की रिहाई की फाइल तैयार रखें
केंद्र और गुजरात सरकार ने कहा कि हम
कोर्ट के फैसले का रिव्यू फाइल करेंगे तब

जस्टिस जोसेफ भी हैरान रह गए जस्टिस जोसेफ
ने कहा कि हम देखना चाहते हैं कि क्या
राज्य सरकार ने ऑर्डर जारी करते हुए सही
सवाल पूछे थे और विवेक का प्रयोग किया था
सरकार की ओर से वकील ने कहा कि विवेक का
प्रयोग हुआ है तब कोर्ट ने कहा आप फाइल

दिखाइए हम देखना चाहते हैं कि क्या सरकार
ने कानून के दायरे में रहते हुए रिहाई के
आदेश दिए और क्या यह प्रमाणिक तरीके से
किया गया अगर आप कारण नहीं बताते हैं तो

हमें मजबूरन अपने नतीजों पर आना होगा धर्म
के आवरण का सहारा लेकर राजनेता खुद को
अवतार घोषित करवा ले करवा सकते हैं लेकिन
जिस संवैधानिक पद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी बैठे हैं उनकी पार्टी बीजेपी की

सरकार है उससे जो अपराध हुआ है उससे बचने
के लिए धर्म के किस प्रसंग का किस ग्रंथ
का सहारा लिया जाएगा क्या वाल्मीकि या
तुलसी के रामायण में ऐसा कोई भी प्रसंग
आपको मिल सकता है जहां शासन के शीर्ष पर

बैठे व्यक्ति को ऐसी घटना के लिए कोई भी
अफसोस ना होता हो जो कारवाई ना करता हो और
जो गलत को गलत ना बोल पाता हो राजस्थान के
श्रीकरणपुर में उपचुनाव हो रहे थे अपने
उम्मीदवार को ही मंत्री बनवा दिया घोषित

कर दिया आचार संगीता लागू थी इसकी परवाह
नहीं की गई उन्हें पता है कि राम मंदिर के
जश्न में डूबे भारत को अब कभी गलत नजर
आएगा ही नहीं भारत ने हमेशा हमेशा के लिए

वह नजर खो दी है जितना गलत करना है यही
सही समय है उससे भी ज्यादा गलत करते चलो
लेकिन नतीजा क्या हुआ श्री करणपुर की जनता
ने बीजेपी के उम्मीदवार को भारी मतों से

हरा दिया जिसे जीतने से पहले मंत्री बनाया
गया था आज भी प्रधानमंत्री का कोई बयान
नहीं आया वे अयोध्या पर ट्वीट कर रहे हैं
उन्हें यह अन्याय नजर नहीं आ रहा चारों

तरफ देश में मंगल गान ही नजर आ रहा है
क्या यह राम की मर्यादा का भारत हो सकता
है संवैधानिक मर्यादाओं का भारत है या
मोदी की मर्यादा का भारत है जिसके नीचे

सारी मर्यादा एं ध्वस्त होती नजर आ रही
हैं सवाल आपको करना है उससे पहले आपको तय
करना है कि सवाल करना किससे है मोदी से या
भगवान राम से मोदी सरकार जिस सुप्रीम
कोर्ट से मामले दर मामले में बचती रही एक

ऐसे फैसले की चपेट में आ गई जो मोदी उनकी
सरकार और उनकी बीजेपी की राजनीति
विचारधारा सबसे पर्दा हटा देती है उम्मीद
है आपको कुछ तो दिखा होगा कि राम नहीं आ

रहे हैं राम के नाम पर कोई और आ रहा है
अफसोस बिलकिस बानो ने आज एक बार फिर से
पर्दा हटाया है

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