बीजेपी के गुप्त चुनावी चंदे पर सुप्रीम कोर्ट की रोक! बीजेपी में माहौल गमगीन... - instathreads

बीजेपी के गुप्त चुनावी चंदे पर सुप्रीम कोर्ट की रोक! बीजेपी में माहौल गमगीन…

नमस्कार दोस्तों भारतीय लोकतंत्र के लिहाज
से आज का दिन एक ऐतिहासिक दिन है सुप्रीम
कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई
चंद्रचूड़ की अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला
सुनाया है और वह ऐतिहासिक फैसला क्या है

दोस्तों गोपनीय चुनावी चंदा जो 2018 से
वजूद में है पूर्व वित्त मंत्री अरुण
जेटली की वजह से वह गोपनीय चुनावी चंदा जो
कोई भी किसी भी पॉलिटिकल पा पाटी को दे

सकता था मगर वो गोपनीय चंदा जो सिर्फ और
सिर्फ भाजपा की जेब में जा रहा था क्योंकि
यह बात भी सामने उभर कर आई थी कि जो
गोपनीय चुनावी चंदा है उसमें से 90 फीदी

भाजपा की जेब में जा रहा था यानी कि
भारतीय जनता पार्टी की राजनीति का जो सबसे
असरदार हथियार था उसे सुप्रीम कोर्ट ने
कुंद कर दिया है सुप्रीम कोर्ट ने अपने

आदेश में कहा है कि सीक्रेट इलेक्टोरल
बंड्स यानी गोपनीय चुनावी चंदा असंवैधानिक
है अनकंस्टीट्यूशनल है मैं आपको बतलाना

चाहूंगा दोस्तों कि अपने फैसले में दरअसल
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूड़ और
जस्टिस संजीव खन्ना ने दरअसल कहा क्या
आपके स्क्रीन्स पर काले धन पर अंकुश लगाने

के उद्देश्य से सूचना के अधिकार का
उल्लंघन उचित नहीं है चुनावी बंड योजना
सूचना के अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी
का उल्लंघन है राजनीतिक दलों के द्वारा

फंडिंग की जानकारी उजागर ना करना उद्देश्य
के खिलाफ है विपरीत है चीफ जस्टिस ऑफ
इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली
पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पिछले

साल 2 नवंबर को मामले में अपना फैसला
सुरक्षित रख लिया था मामले की सुनवाई के
दौरान डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा हम सर्व
सम्मत निर्णय पर पहुंचे हैं मेरे फैसले का

समर्थन जस्टिस गवई जस्टिस पारदी वाला और
जस्टिस मनोज मिश्रा द्वारा किया गया है
इसमें दो राय है एक मेरी खुद की और दूसरी
जस्टिस संजीव खन्ना की दोनों एक ही

निष्कर्ष पर पहुंचते हैं हालांकि तर्कों
में थोड़ा अंतर है मगर आज यह बहुत जरूरी
हो जाता है कि सुप्रीम कोर्ट से यह सवाल
पूछा जाए आपने 6 साल इस योजना को पनपने

दिया भारतीय जनता पार्टी अपने खजाने भर
चुकी है क्या वाकई इससे बीजेपी को नुकसान
होगा यह बात दावे के साथ कही जा सकती है
दोस्तों कि अब भारतीय जनता पार्टी एक और ऐ

योजना लेकर आएगी जो असंवैधानिक होगी आज के
इस अदालत के आदेश में और क्या-क्या कहा
गया है दोस्तों इस पर भी गौर करने की
जरूरत है सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया
है तमाम राजनीतिक दलों को कि आपने जितने

भी इलेक्टोरल बंड्स लिए हैं कंपनियों से
व्यक्तिगत यानी इंडिविजुअल लोगों से उसे
यह वापस करें रिफंड करें यह बहुत बड़ा
आदेश है और यही नहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

से कहा गया है कि किन-किन लोगों ने खासकर
किन कंपनी ने यह सीक्रेट इलेक्टोरल चंदा
किस पॉलिटिकल पार्टी को दिया है इसे भी
सार्वजनिक किया जाए और ऐसा सुप्रीम कोर्ट

क्यों कह रही है दोस्तों इस पर भी हमें
गौर करने की जरूरत है सुप्रीम कोर्ट ने
अपने आदेश में क्या कहा इस पर गौर कीजिए

सुप्रीम कोर्ट कहती है पॉलिटिकल
कंट्रीब्यूटर्स गेट एक्सेस दिस एक्सेस
लीड्स टू पॉलिसी मेकिंग बिकॉज ऑफ नेक्सस
बिटवीन मनी एंड वोटिंग क्या कह रही है आप
सुप्रीम कोर्ट कि जो लोग चुनावी चंदा देते

हैं
कहने को यह सीक्रेट है मगर पॉलिटिकल
पार्टीज को पता होता है कि हमें किसने
चंदा दिया इसकी वजह से क्या होता है कि जो
सरकार नीतियां बनाती है इन धन्ना सेठों का
उन नीतियों में दखल पड़ जाता है यही नहीं

हम यह नहीं भूल सकते कि अगर कोई उद्योग
समूह पैसे देता है बड़ी तादाद में सीक्रेट
चुनावी चंदा देता है तो आप मान के चलिए
सरकारी एजेंसीज उसे परेशान नहीं नहीं

करेंगी इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी
कहा कि यह साफ तौर पर सूचना के अधिकार और
आर्टिकल 191 ए का उल्लंघन है राइट टू
इंफॉर्मेशन यानी सूचना का अधिकार और
आर्टिकल 191 ए का उल्लंघन है सुप्रीम

कोर्ट यह भी कहता है कि जब आप एक पॉलिटिकल
पार्टी को चुनावी चंदा देते हैं तो वह
पॉलिटिकल पार्टी सत्ता में आने पर आपको
फायदा पहुंचाती है क्विड प्रो क् इसका
इस्तेमाल किया गया है फाइनेंशियल सपोर्ट्स

टू पॉलिटिकल पार्टीज कैन लीड टू क्विड
प्रोक अरेंजमेंट यह बात सुप्रीम कोर्ट ने
अपने आदेश में कही है दोस्तों मैं आपको
राहुल गांधी के 2019 में दिए गए बयान की
तरफ आपका ध्यान खींचना चाहूंगा इसमें एक

आर्टिकल का जिक्र करते हुए राहुल गांधी
क्या कह रहे हैं आपके स्क्रीन्स पर
अंग्रेजी में दिया गया बयान है इसमें
राहुल गांधी कह रहे हैं इन न्यू इंडिया
ब्राइब्स एंड इलीगल कमीशंस आर कॉल्ड

इलेक्ट ल बॉन्स इसका हिंदी में अनुवाद यह
है कि नए भारत में रिश्वत और अवैध कमिशन
जो है उन्हें इलेक्टोरल बंड्स कहते हैं
यानी कि राहुल गांधी इस मुद्दे को एक अरसे
से उठा रहे हैं 2019 से उठा रहे हैं

दोस्तों आज के इस मौके को मैं चूकना भी
नहीं चाहता अपनी पीठ थपथपा के लिए क्योंकि
मुझे इस बात का गर्व है कि गिने चुने
पत्रकारों में से मैं उन पत्रकारों में से
था जो सीक्रेट इलेक्टोरल बंड के खिलाफ

आवाज उठाता रहा हूं आज से कई साल पहले
यानी कि 2018-19 में जब यह योजना आई थी तब
से मैं यह मुद्दा आपके सामने उठा रहा हूं
मैंने ही आपको बताया था कि जब अरुण जेटली
या उस वक्त मोदी सरकार यह योजना ला रही थी

तो इसका विरोध रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने
भी किया था चुनाव आयोग ने भी किया था यह
वो दौर था जब चुनाव आयोग की भी रीड थी और
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की भी रीड थी क्या
कहा था उस वक्त रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने

और आज से 5 साल पहले रिकॉर्ड किया गया था
मेरा यह शो आइए देखते हैं आपत्ति नंबर एक
इससे मनी लरिंग को बढ़ावा मिलेगा आपत्ति
नंबर दो भारतीय करेंसी पर भारतीय पैसे पर
भरोसा टूटेगा आपत्ति नंबर तीन केंद्रीय

बैंकिंग कानून के बुनियादी सिद्धांतों पर
ही खतरा आ जाएगा और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया
ने एक और बात कही थी जो उसे कहने की जरूरत
नहीं थी उसने कहा था कि इससे चुनावी
पारदर्शिता पर असर पड़ेगा यानी कि जो

हमारे चुनाव होते हैं वह ट्रांसपेरेंसी के
साथ नहीं हो सकेंगे सत्ता पक्ष के समर्थन
में पूरी प्रक्रिया हो जाएगी क्या कहा था
मैं आपको बताता हूं उन्होंने यह कहा कि

अगर इसका इरादा यह है कि इस इलेक्टोरल बंड
को खरीदने वाला व्यक्ति संस्था या इकाई
राजनीतिक दल में दान दे सके तो वह तो आप
डिमांड ड्राफ्ट चेक या फिर इलेक्ट्रॉनिक

और डिजिटल पेमेंट के जरिए भी कर सकते हैं
इसके लिए आपको इस बिल की जरूरत नहीं है यह
तो सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत हो सकता
है और आरबीआई ने एक और अहम बात की
उन्होंने कहा कि अगर यह बिल वजूद में आ

जाता है तो इंटरनेशनल नॉर्म्स यानी कि जो
स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था है वह
बिगड़ जाएगी आरबीआई ने सख्त हिदायत दी थी
मगर सरकार ने तो मन बना लिया था आपकी
स्क्रीन पर इस वक्त हसमुख कड़िया है राजेश

सच
उन्होंने क्या जवाब दिया आरबीआई की इस
आपत्ति पर यह भी पढ़िए वह कहते हैं मुझे
लगता है आरबीआई दान दता की पहचान को गुप्त
रखने के मकसद से लाए जा रहे प्रस्तावित

प्रीपेड बेरर इंस्ट्रूमेंट के तंत्र को
ठीक से नहीं समझ पाया है जबकि उसमें यह
सुनिश्चित किया गया है कि जो भी दान देगा
वह उस व्यक्ति के टैक्स पेड पैसे से ही

होगा तो एक तरफ तो हसम कडिया यह कह रहे
हैं कि साहब आरबीआई समझ नहीं पाया मगर बाद
में उन्होंने जो कहा वो पूरी तरह से
विरोधाभास है वो क्या कहते हैं आरबीआई की

सलाह काफी देर से आई और इकोनॉमिक बिल पहले
से ही छप चुका है इसलिए हम अपने प्रस्ताव
के साथ आगे बढ़ सकते हैं यानी कि पहले तो
आप कहते हैं आरबीआई समझ नहीं पाया बाद में
आप कहते हैं क्योंकि इनका सुझाव बहुत देर

से आया इसीलिए हम अपने इकोनॉमिक बिल में
इसको शुमार नहीं कर सकते इसका अर्थ क्या
हुआ कि आरबीआई ने जो आपत्तियां दर्ज की थी
उसको लेकर मोदी सरकार ने कोई तर्क नहीं
दिया किसी भी तरह से गंभीरता से उसे

संबोधित नहीं किया अब अरुण जेटली ने भी इस
पर जल्द हस्ताक्षर कर दिए यही नहीं
दोस्तों चुनाव आयोग ने भी इसका विरोध किया
था दोनों ने विरोध करते हुए कहा था कि

इससे जो बैलेंस है राजनीति में वह बिगड़
जाएगा याद कीजिए उस वक्त चुनाव आयोग ने
क्या कहा था यह बिल संसद में आया 1 फरवरी
को और उसके ठीक चार महीने बाद यानी मई
2017 में चुनाव आयोग ने लॉ मिनिस्ट्री को

एक खत लिखा इस खत में उन्होंने क्या लिखा
मैं आपको बताता हूं इलेक्टोरल बॉन्ड के
जरिए राजनीतिक दलों को विदेशी सोर्सेस से
संभावित अवैध चंदे को छिपाने में मदद

मिलेगी संदिग्ध चंदा दता फर्जी शेल
कंपनियां स्थापित करके राजनेताओं के पास
काला धन पहुंचा देंगे और पैसे का सही
सोर्स कभी सामने नहीं आए
दरअसल चुनाव आयोग चाहता था कि इस बिल को

वापस लिया जाए ना खाऊंगा ना खाने दूंगा और
वह इसलिए कह रहा था वापस लिया जाए क्योंकि
उसे लग रहा था कि इससे जो चुनावी
पारदर्शिता है वह खत्म हो मगर मैं आपको

बता दूं कि उस वक्त चुनाव आयोग में इस
सरकार के खास ब्यूरोक्रेट्स नहीं थे मसलन
सुनील अरोड़ा मसलन सुशील चंद्रा उस वक्त
नहीं थे उस वक्त चुनाव आयोग की जो का जो

चेहरा था वो अलग था शायद इसी वजह से चुनाव
आयोग अपनी आपत्तियां दर्ज कर रहा था मगर
मोदी सरकार ने क्या किया पूर्व वित्त
मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आरबीआई और

चुनाव आयोग को लेकर बैठक बुलाई जाए और यह
बैठक हुई 19 जुलाई 2017 को उस वक्त के
वित्त सचिव एससी गर्ग ने बाद में अपनी
फाइलों में कहा कि जो तमाम अधिकारी आए थे
आरबीआई से या चुनाव आयोग से उन्हें समझा

दिया गया है इस बात पर जोर दिया गया है कि
यह योजना सबको समान अवसर देती है सभी
पॉलिटिकल पार्टीज को समान अवसर देती है और
इससे सत्ता पक्ष को फायदा नहीं होगा यानी

कि चुनाव आयोग ने जो भी आपत्ति दर्ज की थी
उसका लिखित जवाब नहीं दिया गया दोस्तों
सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक तो बता
दिया है मगर अब हमारे सामने एक अहम सवाल

है याद कीजिए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी
फैसला सुनाया था कि चुनाव आयोग की
नियुक्ति में तीन लोग होंगे प्रधानमंत्री
नेता विपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया मोदी

सरकार ने इस फैसले को पलट दिया था अब बड़ा
सवाल यह कि इसके बाद मोदी सरकार क्या करने
जा रही है क्या मोदी सरकार इसे भी पलटने
की कोई जुगत जुटाए गी कुछ करेगी यह सवाल

उठना लाजमी है क्योंकि हमने देखा है कि जब
मोदी सरकार को एक मुद्दे पर झटका लगता है
तो वह दूसरा तरीका ढूंढ लेती है उस झटके
को संबोधित कर के लिए बड़ा सवाल यह कि जब

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है तो अब
क्या करने वाली है भाजपा सरकार कांग्रेस
ने इस पर प्रतिक्रिया दी है दोस्तों अशोक
गहलोत का बयान आपके स्क्रीन पर अशोक गहलोत
क्या कह रहे हैं मैं आपको पढ़ के सुनाना

चाहता हूं इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक
ठहराने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला
ऐतिहासिक एवं स्वागत योग्य है इलेक्टोरल
बॉन्ड ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने का काम

किया इसने राजनीतिक चंदे की पारद दर्शिता
को खत्म किया और सत्ताधारी पार्टी भाजपा
को सीधे लाभ पहुंचाया मैंने बार-बार कहा
कि इलेक्टोरल बॉन्ड आजाद भारत के सबसे

बड़े घोटालों में से एक है आज सुप्रीम
कोर्ट के फैसले ने साबित कर दिया कि
इलेक्टोरल बंड एनडीए सरकार का बड़ा घोटाला
है यह फैसला देर से आया मगर देश के

लोकतंत्र को बचाने के लिए बेहद ही जरूरी
फैसला है सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद
दोस्तों आपको समझना पड़ेगा कि इस मुद्दे
पर विपक्ष क्यों नाराज है जब से सीक्रेट

चुनावी चंदा वजूद में आया है हर साल
करोड़ों रुपए भाजपा की जेब में गए वह
योजना जिसे आज सुप्रीम कोर्ट ने
असंवैधानिक बता दिया मैं आपको बतलाना

चाहता हूं कि जब से योजना वजूद में आई है
भाजपा की जेब में कितना पैसा गया है एक-एक
करके आपके स्क्रीन्स पर यह जानकारी दी है
पत्रकार अरविंद
19 में भाजपा की जेब में गया

1450 करोड़ 2020 में भाजपा की जेब में गया
2555 करोड़ 2021 में 22 करोड़ 38 लाख 2022
में 1033 करोड़ और 2023 में
1294 करोड़
रुपए और जैसा कि कुछ देर पहले मैं आपको

दिखा चुका हूं सीक्रेट इलेक्ट्रोल बंड्स
का 90 फीदी भाजपा की जेब में जाता है अब
आपको उस सवाल का जवाब मिल गया
होगा कि आसानी से विपक्ष की सरकारें कैसे

गिर जाती हैं आसानी से विपक्ष के विधायकों
को एक जगह से दूसरी जगह प्राइवेट प्लेंस
में कैसे ले जाया जाता है आसानी से यह
दुरपैं कि आप हमारी पार्टी में आइए आपको
फायदा

मिलेगा तो ये तमाम मुद्दे हैं दोस्तों
जिससे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है देर
आए दुरुस्त आए मगर बड़ा सवाल यह है
दोस्तों इस देश में निष्पक्ष चुनावों के

लिए यह फैसला बहुत जरूरी था आखिरकार
सुप्रीम कोर्ट ने इस परे फैसला सुनाया है
हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय जनता पार्टी
कोई और खुराफात के जरिए इस योजना को
दोबारा वजूद में लाने की कोशिश

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