भारत को Superpower बनने से कौन रोक रहा है ? | Why India Is Still Not Becoming A Superpower? - instathreads

भारत को Superpower बनने से कौन रोक रहा है ? | Why India Is Still Not Becoming A Superpower?

क्या सच में आपने कभी सोचा है कि इंडिया
का बजट जब भी आता है तो यह सारी दुनिया के
लिए एक बहुत बड़ा डिस्कशन का मुद्दा क्यों
हो जाता है क्योंकि भले ही इंडिया एक

डेवलप कंट्री है लेकिन अमेरिका चाइना और
रशिया जैसे डेवलप देशों के बाद अगर किसी
देश की इकॉनमी का डंका पूरी दुनिया में
बचता है तो वोह है भारत व्हाट इंडिया बजट

सेज अबाउट इंडियस डिफेंस सिस्टम देखिए
2023 से 24 का बजट 50 बिलियन डॉलर का था
जो अगर इंडियन रुपीज में देखा जाए तो यह
4397 करोड़ का था और यह पिछले साल से 7.5
पर बढ़ चुका है और इसमें से डिफेंस का बजट

रखा गया था 5.94 लाख करोड़ और इसमें भारत
1.38 लाख करोड़ तो सिर्फ डिफेंस से जुड़े
लोगों की पेंशन में दे देता है और हां इस
बार का डिफेंस बजट में लास्ट ईयर के

मुकाबले 13 पर का इनक्रीस था लेकिन इन
सबके बावजूद बात यह है कि इंडिया डिफेंस
में सुपर पावर नहीं बन पाएगा और आखिर खिर
हम ऐसा क्यों कह रहे हैं तो वह भी जानना

जरूरी है क्योंकि अगर हम पाकिस्तान के
मुकाबला करते हैं तो हमें अमेरिका और चीन
को भी देखना चाहिए क्योंकि मुकाबला हमेशा
अपने से ताकतवर से ही करना चाहिए तो चलिए
जरा करते हैं दो-दो हाथ अमेरिका और चीन के

डिफेंस से और देखते हैं कौन है ज्यादा
पावरफुल डिफेंस इकॉनमी ये देखिए यह खबर
हाल ही में द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी थी
जिसमें साफ-साफ लिखा था कि इंडिया का

डिफेंस रिसर्च बजट उसे ग्लोबल पावर नहीं
बनने देगा और यह र्ट पार्लियामेंट में भी
पेश की गई थी भला ऐसा क्यों है और इसके
बाद ये अब एक मुद्दा बन गया है कि आखिर
ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि भैया लंबे समय

तक इंडिया सुपर पावर नहीं बन पाएगा
इंडियाज डिफेंस बजट वर्सेस अदर कंट्रीज
डिफेंस बजट तो इस टॉपिक पर आगे बढ़ें उससे
पहले जरा यह देखिए इस डटा में आप साफ-साफ
देख सकते हो कि इंडिया फोर्थ नंबर पर है

जो कि फिलहाल 81 बिलियन डॉलर तक पहुंचा है
और यह अपनी जीडीपी का 2.4 पर डिफेंस
सेक्टर पर इन्वेस्ट कर रहे हैं जिसकी वजह
से ये काफी देशों के मुकाबले काफी जबरदस्त

और पावरफुल है लेकिन वहीं अगर हम अमेरिका
और चीन की बात करें तो चीन के केस में ये
बजट इंडिया से तीन गुना ज्यादा है यानी
292 मिलियन डॉलर एंड यूनाइटेड स्टेट्स के
बारे में तो क्या ही कहना क्योंकि इसका

डिफेंस बजट तो ऐसा लगता है एक अलग ही
दुनिया के लिए बनाया गया है क्योंकि
अमेरिका का डिफेंस बजट चीन के बजट का भी
तीन गुना है जो भारत से 10 गुना ज्यादा है
और ये लगभग $900 बिलियन डॉलर का है हां

लेकिन एक बात तो सच है कि भैया यह देश
डेवलप देशों के लिस्ट में आते हैं जिसकी
वजह से इनके जीडीपी भी एक बहुत बड़ा रोल
प्ले करती है कि अमेरिका और चीन जैसे देश

अपने डिफेंस सिस्टम को इतनी ताकत दे पाते
हैं इंडिया इज लैकिंग बट वाई देखिए किसी
भी देश के लिए उसके डिफेंस उसकी सबसे बड़ी
ताकत होती है जो एक देश की इमेज को पावर
एंड स्ट्रेंथ के बेसिस पर मेजर करने के

लिए बहुत जरूरी है लेकिन भला ऐसा क्या है
कि इंडिया इन चीजों में ना सिर्फ अपने से
ऊपर जैसे चीन और अमेरिका बल्कि अपनों से
नीचे आने वाले देश जैसे ब्रिटेन फ्रांस और
जर्मनी से ज्यादा इन्वेस्ट करके भी कम

एक्सपोजर ले पा रहा है और इन सब के पीछे
जो सबसे बड़ा रीजन यह बताया जा रहा है कि
आर एनडी पर यानी रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर
भारत में सिर्फ नाम की बजटिंग की जाती है
जी हां अब आप सोच रहे होंगे कि डिफेंस पर

इतना बड़ा बजट तो लगाया फिर वो गया कहां
तो भैया आपको बताया तो था कि देश में
पेंशन पाने वालों पर ही 1.38 लाख करोड़
रपए खर्च हो जाते हैं तो इस बजट का एक
बहुत बड़ा हिस्सा तो इधर चला जाता है यूके

जर्मनी फ्रांस चीन और अमेरिका जैसे देश आज
भी डिफेंस रिसर्च पर जबरदस्त तरीके से
इन्वेस्ट करते हैं ताकि फ्यूचर में आने
वाले डिफेंस टैंक मिसाइल्स और

एयरक्राफ्ट्स बनाकर यह दुनिया भर में
एक्सपोर्ट कर सके और यह चीज इंडिया के केस
में काफी पीछे है जिसकी वजह से कई सालों
से अनदेखा किए जाने वाला सवाल अब
पार्लियामेंट्री पैनल ने खड़ा किया है कि
इंडिया का डिफेंस रिसर्च बजट कई माइनों

में में इंसफिशिएंट है हां हमने तेजस जैसे
फाइटर जेट्स को इंडिया में डेवलप किया है
लेकिन अगर आप उसको भी ब्रेक डाउन करेंगे
तो आपको पता चलेगा कि तेजस का इंजन भी
अमेरिका से ही इंपोर्ट किया गया है अब आज
इंडिया अपने डिफेंस बजट का 1 पर भी पूरी

तरह रिसर्च पर इन्वेस्ट नहीं करता जो कि
काफी हैरानी वाली बात है रिसर्च के मामले
में हम पीछे हैं और यही एक वजह बनी है कि
इस साल भारत सबसे ज्यादा हथियार इंपोर्ट
करने वाला देश बन गया अब आपके दिमाग में

सवाल उठना चाहिए कि भला एकदम पैनल को कैसे
याद आ गया भैया तो नहीं यह पहली बार नहीं
है जब पार्लियामेंट्री पैनल ने डिफेंस
रिसर्च के बजट को लेकर यह स्टेटमेंट दी हो
बल्कि पिछले साल यानी 2022 में भी इस तरह

के सवाल उठे थे और डीआरडीओ को इस बजटिंग
के अलावा अलग से एलोकेशन देने के लिए कहा
गया था और तभी यह बताया गया था कि चीन
अपने डिफेंस बजट 20 पर और अमेरिका अपने

डिफेंस बजट का 12 पर तक रिसर्च एंड
डेवलपमेंट पर स्पेंड कर देता है नाउ हाउ
कैन इंडिया ओवरकम दिस प्रॉब्लम देखिए
गवर्नमेंट क्यों डीआरडीओ को रिसर्च के लिए
बजट नहीं दे रही है यह तो हम सरकार पर

छोड़ते हैं लेकिन सबसे बड़ी बात यह भी है
कि इस देश में हर दिन एक नया बिजनेस खड़ा
हो जाता है जिसके लिए सरकार भी कई बार मदद
देती है तो अब यही वो वक्त है जब डिफेंस
फील्ड में प्राइवेट प्लेयर्स आएं और देश

के अंदर बड़ी-बड़ी रिसर्च एंड डेवलपमेंट
करके इस देश को ऐसा डिफेंस इकोसिस्टम दें
जो हमारे देश को डिफेंस में सुपर पावर
बनाने के लिए आगे ले जाए अब इसी बात को

लेकर ऐसा बताया जा रहा है कि 201 27 तक
भारत का डिफेंस बजट तकरीबन 112 बिलियन
डॉलर तक तो पहुंच जाएगा और यही आने वाले
वह साल बनेंगे जो इकॉनमी को तो बूस्ट
देंगे लेकिन इसके साथ-साथ हमारे डिफेंस

सिस्टम के लिए भी यह आने वाले साल काफी
क्रुशल साबित होने वाले हैं तो इस देश के
लिए बहुत जरूरी हो जाता है कि इस बजट के
बढ़ने के साथ-साथ वो रिसर्च पर ज्यादा
ध्यान दें क्योंकि ऐसा करने से ना केवल हम

दूसरे देशों से लेड ले सकेंगे बल्कि हम
एक्सपोर्ट भी दूसरे देशों को कर सकेंगे और
उन एक्सपोर्ट की हुई टेक्नोलॉजी के दम पर
हम एक सेल्फ रिलायंट इकॉनमी को जन्म देंगे
लेकिन अब यह भी जान लेते हैं कि भला

इंडिया इतने हथियार क्यों इंपोर्ट कर रहा
था देखिए भारत समय दुनिया भर में हथियारों
की खरीद पर सिपरी की ताजा रिपोर्ट आई है
एकदम दुनिया भर में हथियारों की खरीद पर
नजर रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था के

रिपोर्ट के अनुसार भारत अभी दुनिया का
सबसे बड़ा हथियार खरीदने वाला देश है यही
नहीं भारत रूस से हथियार खरीदने वाला भी
सबसे बड़ा देश बना हुआ है नाउ व्हाट
रिसेंट रिपोर्ट सेज अबाउट इंडियन डिफेंस

इंफ्रास्ट्रक्चर देखिए सिपरी को हम सब
जानते हैं वही स्टॉक होम इंटरनेशनल पीस
रिसर्च इंस्टिट्यूट जिसके रिपोर्ट के
अकॉर्डिंग दुनिया के कुल हथियार आयात में

भारत का हिस्सा केवल 11 पर है और साल 2018
से 22 के बीच में भारत दुनिया का सबसे
बड़ा हथियार खरीदने वाला देश बन चुका है
अब इस रिपोर्ट को अगर एनाला इसिस करेंगे

तो साफ-साफ दिख जाएगा कि रूस अभी भी भारत
का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर देश बना हुआ
है और ऐसा तब है जब साल 2018 से से 2022
के बीच में भारत के आर्म्स इंपोर्ट में
रूस का हिस्सा घटकर 45 फी ही रह गया इससे

पहले रूस का हिस्सा तकरीबन 64 फीसद तक
रहता था वहीं राफेल फाइटर जेट डील करने
वाले फ्रांस ने भारतीय हथियार बाजार में
अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है भारत ने इस

साल फ्रांस से फाइटर जट से लेकर सबमरीन तक
खरीदने की लाइन लगा दी है साल 2013 से
लेकर 2017 और साल 2018 से 2022 के बीच में
फ्रांस से हथियारों का इंपोर्ट कई माइनों
में बढ़ा है फ्रांस के पास आज भी रूस से

ज्यादा हथियारों के ऑर्डर है साल 2018 से
22 के बीच में अमेरिका रूस फ्रांस चीन और
जर्मनी दुनिया में टॉप फाइव आर्म्स
एक्सपोर्टर देश हैं और यह बात हम ऊपर भी

डिस्कस कर चुके हैं कि इसके पीछे क्या
रीजन थे यह देश अपनी रिसर्च पर अपने
डिफेंस बजट का इतना बड़ा हिस्सा खर्च करते
हैं कि यह देश के अंदर ही पावरफुल वेपन

डेवलप कर पाते हैं और एक्सपोर्ट भी कर
पाते हैं और इस पर भारत को ध्यान देना
चाहिए इस रिपोर्ट में एक खास बात यह भी
मेंशन है कि भारत ने रूस फ्रांस अमेरिका
और अन्य देशों के साथ हथियारों की खरीद को

कम कर दिया है इसकी वजह यही है कि भारत
सरकार आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा दे रही
है और देश में हथियारों को बनाने पर जोर

दे रही है यह सेल्फ रिलायंस भारत कब तक
अचीव कर पाता है अब ये एक बड़ा सवाल है अब
आइए इस रिपोर्ट में जरा दूसरे देशों के
बारे में भी देख लेते हैं अब देखिए इस

रिपोर्ट के अकॉर्डिंग एक तरफ अमेरिका और
फ्रांस के हथियारों को एक्सपोर्ट बढ़ा है
तो वहीं रूस चीन और जर्मन के एक्सपोर्ट को
गिरते हुए देखा गया है और चीन ने दुनिया
भर में 5.2 पर आर्म्स का एक्सपोर्ट किया

अब भैया चीन का नाम आया है तो इसके खास
दोस्त से भी मिल लेते हैं और ऐसा इसलिए
क्योंकि चीन से सबसे ज्यादा हथियार
पाकिस्तान ने ही खरीदे हैं इसके बाद अब एक

बात तो यह साफ हो गई कि चोर चोर मोसे रे
भाई भारत का दुश्मन पाकिस्तान ही है जो
भले ही कंगाल हो जाए उसे मंजूर है लोग
भूखे मरे वहां की सरकार को मंजूर है लेकिन

वेपंस खरीदना भैया उनके लिए सबसे ज्यादा
जरूरी है पाकिस्तान के हथियारों का
इंपोर्ट 14 पर तक जा बढ़ा है और इसके बाद
इस लिस्ट में जो तीसरे नंबर पर आता है

उनका तो क्या ही कहने वो कोई और नहीं
बल्कि यूक्रेन है अब इसे यूक्रेन की
मजबूरी कहें या पागलपन यह आप कमेंट करके
हमें जरूर बताएं बहरहाल साल 2018 से 2022
के बीच में टॉप फाइव हथियार इंपोर्टर

देशों में भारत सऊदी अरब कतर ऑस्ट्रेलिया
और चीन शामिल हैं और हैरानी की बात तो यह
है कि इन पांच देशों ने दुनिया के कुल
हथियार इंपोर्ट का 36 पर खरीद डाला है

चलिए अब आपको विस्तार से बताते हैं कि
दुनिया में कौन-कौन से देश हथियार खरीदने
में आगे हैं और क्यों हथियार खरीद के
मामले में भारत साल 1993 से अब तक नंबर एक

की पोजीशन पर बना हुआ है साल 2018 से 2022
के बीच दुनिया भर में हथियारों की कुल
खरीदारी में 11 पर की हिस्सेदारी भारत की
ही है हथियार खरीदने के मामले में दूसरे

नंबर पर सऊदी अरब तीसरे पर कतर चौथे पर
ऑस्ट्रेलिया और पांचवें नंबर पर चीन है
लेकिन इन देशों को हथियार कौन देता है इसे
भी जानना जरूरी है क्योंकि भारत के लिए तो

यह एग्जांपल है कि उसे आने वाले समय में
किस दिशा में काम करने की जरूरत है
अमेरिका रूस फ्रांस जर्मनी और चीन यह पांच
देश मिलकर पूरी दुनिया के हथियारों के

बाजार का 75 हिस्से पर कब्जा किए हुए हैं
फिलहाल नंबर एक पर अमेरिका है और नंबर दो
पर रूस लेकिन रूस इस बाजार में अमेरिका को
कड़ी टक्कर देते हुए नंबर एक को हथियाना
चाहता है लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से

उस पर इतने सैंक्शंस लग गए कि हथियार तो
छोड़िए ऑयल के लिए भी रूस को स्ट्रगल करना
पड़ा और उसके हथियारों की बिक्री भी कम हो
गई चीन ने इस रिपोर्ट में एक तरह का

बैलेंस बनाया हुआ है वो ऐसे कि बेचने और
खरीदने वाले देशों को गौर से देखें तो पता
चलता है कि चीन इकलौता ऐसा देश है भैया
जिसका नाम सबसे अधिक हथियार बेचने वाले

देश और सबसे अधिक हथियार खरीदने वाले देश
दोनों ही लिस्ट में है वो पहले दूसरे
देशों से हथियार खरीदता है और फिर उसको
रिवर्स इंजीनियर करके कुछ बेहतर बनाकर बेच

देता है यह थोड़ा मजाकिया भी लगता है
लेकिन यह सच है चीन किसी भी चीज को
मॉडिफाई करके सेम आइटम उसी देश को चिपका
देता है नाउ हु इज हुज फ्रेंड्स हथियार

बेचने के मामले में दुनिया के टॉप दो
देशों की खरीदारी की लिस्ट देखें तो
बिल्कुल अलग-अलग है रूस के हथियारों के
टॉप तीन खरीदार हैं भारत चीन अल्जीरिया

यानी रूस के हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार
भारत ही है साल 2013 से 2017 के दौरान
भारत ने सबसे ज्यादा हथियार रूस से ही
खरीदे थे और भारत ने इन 5 सालों में कुल

इंपोर्टेड हथियारों का 64 पर सिर्फ रूस से
खरीदा साल 2018 से 2022 के दौरान रूस ही
भारत के लिए हथियार का सबसे बड़ा सप्लायर
बना रहा है और जहां तक अमेरिका के

हथियारों के खरीदार देशों की बात है तो
सऊदी अरब ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया इस
लिस्ट में सबसे आगे हैं लेकिन ऐसा नहीं है
कि दोस्त भारत अमेरिका से हथियार नहीं

खरीदता रूस के अलावा भारत अमेरिका इजराइल
और फ्रांस से भी हथियार खरीदता है अगर
दुनिया के तीसरे बड़े हथियार बेचने वाले
देश यानी फ्रांस की बात करें तो साल 2018
से 2022 तक कुल 11 पर हथियार एक्सपोर्ट

किए हुए हैं इतना ही नहीं फ्रांस ने साल
2013 से 2017 तक के 5 सालों के बीच पिछले
5 सालों के मुकाबले 44 फीसद ज्यादा हथियार
बेचे हैं फ्रांस से सबसे ज्यादा हथियार
इंडिया कतर और इजिप्ट ने खरीदे भारत ने

साल 2018 से 2022 के दौरान 30 फीदी हथियार
फ्रांस से खरीदे जबकि 11 फीदी अमेरिका से
फ्रांस ने इंडिया को 62 कॉम्बैट
एयरक्राफ्ट और चार सबमरीन बेची हैं और

2013 से 17 के मुकाबले साल 2018 से 22 में
फ्रांस का भारत को आर्म्स एक्सपोर्ट 489
फीदी बढ़ गया है और इस तरह बीते 5 सालों
में अमेरिका को पीछे छोड़ फ्रांस भारत का

दूसरा सबसे बड़ा हथियार विक्रेता देश बन
गया देखिए भारत जिन देशों से हथियार
खरीदता है उसमें अगर बात इजराइल की करें
तो इजराइल के आर्म्स एक्सपोर्ट में 2017

में 41 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है
डिफेंस सेक्टर में वहां पर लगातार बढ़ोतरी
दर्ज की गई है इजराइल में हथियारों की
खरीद 9.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है और

यह बात तो हम सब जानते हैं कि इजराइल एक
भरता हुआ बाजार है और उसका फ्यूचर डिफेंस
में काफी पावरफुल भी है इजराइल से तमाम
देश हथियारों की खरीद भी करते हैं जिसमें

तीन सबसे बड़े वह देश हैं और यहां भी
मोर्चा भारत ने ही संभाला हुआ है भारत में
करीब 715 मिलियन डॉलर तक के हथियार पिछले
कुछ वर्षों में खरीदे हैं वहीं दूसरे
पायदान पर वियतनाम का नाम आता है उसने

करीब 142 मिलियन डॉलर के हथियार खरीदे हैं
खैर यह तो हो गई उन देशों की बात जो
दुनिया भर के देशों को अपना हथियार बेचते
हैं और भारत भी इन देशों से भारी संख्या

में हथियार खरीदता ही है लेकिन आपको जानकर
खुशी होगी कि भारत ने भी दुनिया के कुछ
देशों को पिछले कुछ सालों में हथियार का
एक्सपोर्ट किया है चलिए आपको इसके बारे

में भी थोड़ा ब्रीफ से बता देते हैं देखिए
ऐसा नहीं है भैया कि भारत वेपन एक्सपोर्ट
मार्केट में कछुआ है हां अभी भारत का
मार्केट उतना बड़ा तो नहीं है लेकिन उसने
अब इस तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया है
हथियारों के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के

तहत भारत इस दिशा में नए कीर्तिमान की ओर
अग्रेसर है भारत ने 2021 से 22 में 000
करोड़ रपए के हथियारों का निर्यात यानी
एक्सपोर्ट किया है जिन हथियारों को
एक्सपोर्ट किया जा रहा है उनमें सबसे
ज्यादा डिमांड सुपर सनिक ब्रह्मोस मिसाइल

अग्नि और पृथ्वी मिसाइल पिनाका रॉकेट
लॉन्चर आकाश अस्त्र और नाग मिसाइल तेजस
लड़ाकू विमान ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर
और अर्जुन टैंक की है सालाना आधार पर
इसमें 54 फीसद की तेजी दर्ज की गई है

केंद्र सरकार ने 2024 तक 335000 करोड़ का
सालाना डिफेंस एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है
और आने वाले समय में इसमें और तेजी के लिए
सरकार कमर कस रही है जिसकी झलक डिफेंस बजट

में देखी जा सकती है हमें उम्मीद है कि
भारत आने वाले समय में इस मार्केट को भी
लीड करने की काबिलियत रखता है और वो यह
करके भी दिखाएगा

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