मोदी का राजनैतिक अंत किसान ही करेंगे वो वक्त आ गया है मोदी की उल्टी गिनती शुरु - instathreads

मोदी का राजनैतिक अंत किसान ही करेंगे वो वक्त आ गया है मोदी की उल्टी गिनती शुरु

नमस्कार मैं मनमोहन मिश्रा एक बार फिर आप
लोगों के
बीच किसानों का मुद्दा लेकर आपके सामने
हूं
दोस्तों जैसा कि आप जानते
हैं नरेंद्र मोदी एक बार किसानों से भीड़
चुके
हैं और उस

समय जितना बड़ा दमनकारी चक्र नरेंद्र मोदी
ने किसानों पर चलाया उतनी ही मजबूती से
किसान दिल्ली के बॉर्डर पर डटे
रहे और
बड़ी तन्मयता के साथ बड़ी शांति के साथ

अपनी मांगों को लेकर मुखर रहे और डटे
रहे सारी कोशिशें सारी
साजिशें नरेंद्र मोदी की नाकाम रही यहां
तक कि किसानों पर गोली चलवा की पूरी
प्लानिंग कर चुके थे किसान आंदोलन को

बिखेरने की पूरी प्लानिंग कर चुके थे लाल
किला के मुद्दे को जब देखेंगे आप
तो लेकिन हर जगह नरेंद्र मोदी किसानों से
मात खाए फेल
रहे 13 महीनों तक किसानों को दिल्ली के
बॉर्डर पर बिठा के

रखा उन्हें आतंकवादी कहा उन्हें नक्सली
कहा उन्हें खालिस्तानी कहा उन्हें
हरियाणवी कहा उन्हें पंजाबी कहा उन्हें
उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा भाग कहा

जो कह सकते थे यहां तक कि आंदोलन जीवी कहा
जो कह सकते थे नरेंद्र मोदी जितना गिर
सकते थे उनके आंदोलन को दबाने के लिए जिस
हद तक जा सकते थे किसानों के को कुचलने के
लिए वह कोई कसर नरेंद्र मोदी ने छोड़ा

नहीं लेकिन फिर भी किसान डटे रहे शांति
पूर्वक डटे रहे और किसानों ने यह साबित कर
दिया
कि किसान ही इस देश के भगवान
है किसान ही इस देश के अन्नदाता

है किसान ही इस देश के असली मालिक
हैं किसान ही इस देश के सदियों से समृद्धि
के कारण रहे
हैं किसान नहीं तो कुछ भी नहीं उनका धैर्य
उनका संघर्ष उनकी सहन शक्ति सब परीक्षाएं

नरेंद्र मोदी लेनी ली लेकिन किसान पीछे
नहीं
हटे और यह लगता है कि नरेंद्र मोदी ने
अपने उन अनुभवों से कुछ भी नहीं सीखा खैर
जब बात मोदी की जब बात अडानी की हो तब
मोदी के दिमाग में कुछ भी नहीं घुसता मोदी

किंग कर्तव्य विमूव हो जाते हैं मोदी
शून्य हो जाते हैं जब उन्हें अडानी की
नौकरी बजानी होती है तो अडानी के पक्ष में
फैसले लेने होते तो अडानी के लिए खड़ा
होना होता है
तो ऐसा लगता

है कि पूरे भारत में अडानी के अलावा कोई
नहीं रहता या फिर कुछ गुजराती चोर और
माफिया सारे गुजरात की बात नहीं कर रहा
हूं कुछ गुजराती चोर माफिया जो नरेंद्र
मोदी के आगे पीछे घूमते हैं नरेंद्र मोदी

के मित्र हैं नरेंद्र मोदी के
लिए बैटिंग करते हैं यहां तक नरेंद्र मोदी
को पहुंचाया है उनके अलावा नरेंद्र मोदी
के दिमाग में देश का एक भी आदमी भारत में
नहीं रहता या शून्य है उनके

सामने उस समय
भी किसानों ने तीन किसान बिल का विरोध
किया था जिसके लिए वह दिल्ली के बॉर्डर पर
डटे रहे नरेंद्र मोदी ने 13 महीने बाद 750
किसानों की शहादत के बाद जिन्हें नरेंद्र

मोदी ने संसद में श्रद्धांजलि तक नहीं
देने दी एक आम आदमी मर गया होता उसको भी
श्रद्धांजलि दी जाती है लेकिन नरेंद्र
मोदी ने वो भी नहीं होने दिया नरेंद्र

मोदी ने क्रूरता की सारी पराकाष्ठा तोड़
करके किसानों के साथ जो दो व्यवहार किया
उसके बावजूद भी जब नरेंद्र मोदी अपने सारे
हथकंडे अपने सारे ज जोर जुल्म सब कुछ

अपनाकर थक गए और उत्तर प्रदेश को का चुनाव
सामने देखते हुए नरेंद्र मोदी ने चाल
चली एक बहुत घटिया चाल सामने आए और
उन्होंने कहा कि मैं शायद समझाने में सफल
नहीं रहा या जो भी बिल मैं वापस लेता हूं

वापस लेने का नाटक किया वाप बिल वापस लिया
नहीं वहां भी देश के साथ नरेंद्र मोदी ने
धोखा
किया लेकिन जैसे नरेंद्र मोदी जब 2015 या
शो में जब लेकर आए थे भूमि अधिग्रहण बिल
अपने पहरे कार्यकाल

में
जो मैं समझता हूं डलहौजी से भी ज्यादा
खतरनाक बिल
था जिस जमीन को सरकार चाहेगी ले लेगी और
उसे किसानों से पूछने की भी जरूरत
नहीं और ना ही किसान किसी अदालत में जाकर
उसके अपने पक्ष

में न्याय की गुहार लगा पाएं इतने खतरनाक
बिल शायद डल होजी जो सबसे ज्यादा भारत की
भूमि को छीना था किसानों से उससे भी
ज्यादा खतरनाक और ड्रैकोनियन कानून

नरेंद्र मोदी लाने की कोशिश किए और
तीन-तीन बार ऑर्डिनेंस के जरिए सफल नहीं
हुए उस समय राज्यसभा में इनका बहुमत नहीं
था जो भी कारण रहा हो

पीछे हटना पड़ा फिर पूरी तैयारी के साथ तब
यह तीन बिल लेकर आए तब भी मंशा थी कि देश
के किसानों की जमीन छीन करके अडानी को दे
दी जाए किसान बिल के जरिए भी नरेंद्र मोदी
ने यही किया किसान बिल में भी ऐसे ही

प्रावधान रखे गए जिससे किसानों से उनकी
जमीने छीन ली जाए
और कॉरपोरेट फार्मिंग की शुरुआत की जाए
यानी चाय बागान या जहां कॉर्पोरेट
फार्मिंग होती है जहां किसान अपने ही

खेतों में मजदूर बनकर रह गए हैं जहां वह
अपने खेतों के लिए अपनी जमीन के लिए नहीं
लड़ते अब मजदूरी के लिए सिर्फ लड़ते हैं
पीढ़ी दर पीढ़ी वह अपने ही जमीनों पर
मजदूरी करते

हैं उसी की तर्ज पर पूरे देश में
कॉर्पोरेट फार्मिंग लागू करने के लिए
नरेंद्र मोदी ने तीन किसान बिल लाए और
कॉरपोरेट का तो नाम था अकेले एक मात्र

अडानी फार्मिंग लागू करने के लिए तीन
किसान बिल लाए थे पूरी तैयारी के साथ
उन्हें पता था कि जो करेंगे कोई रोक नहीं
पाएगा और इस बार तो वह किसानों से उनकी
जमीन छीन ही लेंगे और अनी को दे ही देंगे

इसीलिए अडानी को पहले से ही इंस्ट्रक्शन
देकर के पैसे देकर के सपोर्ट देकर के सारे
भारत के न जाने कहां कहा जगह जगह बहुत सी
जगह पर साइल बनवाए गोडाउन बनवाए जिसमें व
पूरे देश की के अनाज का भंडारण कर सके

जमाखोरी कर सके और देश को लूट सके और लूट
में नरेंद्र मोदी की हिस्सेदारी तो है ही
अब तो धीरे धीरे यह भी साफ हो गया कि मोदी
मतलब अटानी अडानी मतलब मोदी यानी दोनों
मिलकर

मोडा लेकिन किसान उनकी इस चाल को समझ गए
और किसान अड़ गए पिछली बार
का युद्ध आपने देखा होगा याद होगा आपको भी
हमको भी इस देश को
भी नरेंद्र

मोदी छल करके किसानों को वापस तो भेज दिए
लेकिन किसानों की बात उन्हें ना तब माननी
थी ना अब माननी है इसके लिए उन्होंने ऐसा
कुछ भी नहीं किया जिससे किसानों की मांगे
पूरी कर सके या करें या क्योंकि करने का

इरादा ही नहीं था तो किसान एक बार इंतजार
कर करते करते
फिर दिल्ली आने का मन बना लिया ऐलान कर
दिया बातचीत हुई कोई नतीजा नहीं निकला तो
किसानों ने दिल्ली आने की घोषणा कर दी 13
फरवरी यानी कल मेरे दोस्त नरेंद्र मोदी ने

अपने उसी चिर परिचित अंदाज में कि हम
तुम्हें कुचल
देंगे लाड स्पीकर लगाकर गांव-गांव में
किसानों को धमकाया जा रहा है

तुम्हारी ट्रैक्टर जप्त कर देंगे तुम्हें
जेल भेज देंगे तुम्हें भयानक परिणाम
भुगतने पड़ेंगे वगैरह वगैरह
दिल्ली की को पूरी मिलिट्री की छावनी में

बदल दिया गया है दिल्ली के चारों तरफ फिर
वही पुराना राग पुरानी स्टाइल पुराना
तरीका कीले ठो की जा रही है बोल्डर लगाए
जा रहे हैं कंटेनर लगाए जा रहे हैं सड़क

खोदी जा रही है या शायद भारत और पाकिस्तान
या भारत और चीन का
युद्ध फीका पड़ जाए नरेंद्र मोदी की इस
तैयारी को देख कर के अब इससे लगता है कि
नरेंद्र मोदी ने मन बना लिया है इस बार तो

गोली मार ही देंगे किसानों
को इस देश के आम आदमी को इस देश के
किसानों को इस देश के नौजवानों को इस देश
के हर इंसान को यह समझना चाहिए कि मोदी के
इरा क्या है मोदी चाहते क्या

है और अपनी चाहत और अपने इरादे को पूरा
करने के लिए मोदी किस हद तक जा सकते हैं
मैंने कहा था मेरे दोस्तों कि मोदी कभी भी
इमरजेंसी लागू कर सकते हैं शायद वह वक्त आ
रहा

है दिल्ली के चारों तरफ हर सड़क पर हर
बॉर्डर पर हर जगह धारा 144 लगा दी गई
है किसानों को किसान दिल्ली ना पहुंच सके
इसके
लिए नरेंद्र मोदी ने अपनी पूरी ताकत झोक

दी है शायद अगर इतनी ही ताकत नरेंद्र मोदी
और इतनी ही निष्ठा नरेंद्र मोदी किसानों
से बातचीत करके उनके मसले सुलझाने की
कोशिश करते तो बात अलग होती लेकिन आखिर
नरेंद्र मोदी है
कौन अंग्रेजों के
नुमाइंदे अंग्रेजों की राह पर चलने वाले

अंग्रेजों जैसी खतरनाक नीतियों को लागू
करने और करवाने वाले जिसे देश शायद आज
नहीं समझ पा रहा है मेरे
दोस्त नरेंद्र मोदी पूरे देश से उनकी

जमीने छीनकर अडानी को देना चाहते
हैं अब किसान बिल लागू हो या ना
हो किसानों की बात नरेंद्र मोदी माने या
ना
माने अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री है और

2024 में इस देश के दुर्भाग्य से फिर से
प्रधान मंत्री बन
गए तो किसान की एक एक इंच जमीन छीनकर
अडानी को दे
देंगे किसान खुद मजबूर हो जाएंगे अपनी

जमीने अडानी को देने के
लिए और दे देंगे यह भी मैं बता चुका हूं
कैसे मेरे दोस्त आज बिजली पर अडानी का
कब्जा है या फिर कुछ गुजराती माफियाओं का
कब्जा

होगा
कोयला पर अडानी का कब्जा है सीमेंट पर
अडानी का कब्जा है पोर्ट पर अडानी का
कब्जा है रोड पर अडानी का कब्जा
है एयरपोर्ट पर अडानी का कब्जा
है रेलवे पर अडानी का कब्जा है

ट्रांसपोर्टेशन पर अडानी का कब्जा
है उर्वरक पर अडानी का कब्जा है बीज पर
अडानी का कब्जा है आप सोच के बताइए कि
किसान खेती कैसे करेंगे जिस दिन अडानी चाह
लेंगे ना पानी मिलेगा ना संयंत्र

मिलेगा खेती करने के लिए ट्रैक्टर या और
दूसरे संयंत्र जो होते हैं ना बीज मिलेगा
ना खाद मिलेगी ना बिजली मिलेगी जब कुछ
नहीं मिलेगा तो किसान खेती कैसे करेंगे और
जब किसान खेती नहीं

करेंगे तो खाएंगे क्या जिएंगे कैसे अपने
बच्चों को कैसे पालेंग अप जरूरत कैसे पूरी
करेंगे अपनी जमीन बेचकर और जमीन खरीदेगा
कौन

अनी इस तरह से नहीं मानोगे
तो इस तरह से नरेंद्र मोदी छीन लेंगे
किसानों से उनकी जमीन और अडानी को दे
देंगे यही नरेंद्र मोदी का मकसद है यही

नरेंद्र मोदी का इरादा है यही नरेंद्र
मोदी का इरादा 20151 में था जब वो डल जीी
से भी ड्रैकोनियन कानून लेकर आए थे
अधिग्रहण बिल
और यही इरादा नरेंद्र मोदी का तब भी था जब

तीन किसान बिल लाए
थे कहने का अर्थ यह है कि
शब्दों और अक्षरों के नीचे छुपाकर
छुरा लाए
थे किसानों की पीठ में भोकने के लिए नाम

था किसानों का और काम कर रहे थे अडानी का
जिसे जिसे किसान समझ
गए और वो भी कामयाब नहीं होने दिया लेकिन
आज इतने दिनों के बाद इन इन न सालों में

नरेंद्र मोदी ने अपनी उस प्लान बी पर काम
करते रहे कि किसी भी कीमत पे आम आदमी से
उनकी जमीने छीन ली जाए और अडानी को दे दी
जाए और इसीलिए मैं बार-बार कहा इसीलिए
नरेंद्र मोदी ने सब कुछ खरीद करके गन

पॉइंट पर ई ईडी के जरिए सीबीआई के जरिए
आईटी के जरिए धमका करके सारे इंस्टिट्यूशन
सारे क्षेत्र को अडानी के हवाले
किया आज के दिन के लिए ही जो आज करने जा

रहे हैं जो आज व इरादा रखते हैं और इसीलिए
नरेंद्र मोदी किसानों से बात करने के लिए
तैयार नहीं है किसानों की बात मानने के
लिए तैयार नहीं है यह आर या पार की लड़ाई
है इस

बार इस बार
का युद्ध किसानों
से या तो देश पूरे देश के
किसान मजदूर बनकर रह जाएंगे नरेंद्र मोदी
उनकी जमीने छीन लेंगे अडानी को दे देंगे
और या

तो नरेंद्र मोदी के राजनीति का अंत हो
जाएगा और रें मैं समझता हूं नरेंद्र मोदी
के की राजनीति का अनैतिक राजनीति का
पक्षपाती राजनीति का गुजरात वादी राजनीति

का माफिया वादी राजनीति का अंत किसानों के
साथ किसानों के द्वारा ही होगा और वो
युद्ध शुरू हो गया
है देखना है कि देश के आम आदमी कितना
किसानों के साथ खड़े होते हैं किसानों का

साथ देते
हैं नरेंद्र मोदी फिर एक बार अपनी बंदूकें
लेकर अपनी तोपे लेकर अपने कील और कांटे
लेकर अपने बोल्डर और फड़े लेकर कुदाल लेकर
अपनी सेना
लेकर मुकाबले के लिए तैयार है किसानों

से मेरे
दोस्त चाहे जो भी हो मैं किसान हूं और मैं
किसानों के साथ
हूं मैं उन गलो की बात नहीं
करता जो आज भी मोदी को समझ नहीं पा रहे

हैं और मोदी के साथ खड़े
हैं लेकिन मैं किसान हूं मैं एक इंसान हूं
मैं एक मजदूर हूं और मैं समझता हूं
नरेंद्र मोदी के खतरनाक इरादों को मैं
जानता हूं उनके मंसूबों को और इसलिए मैं
किसान के साथ

हूं आपको निर्णय लेना है आप किसके साथ
है दोस्तों
तब भी और अब भी मैं बार-बार यही कहता
रहा कि अगर किसान हारे तो जवान हारेगा अगर
किसान हारे तो मजदूर हारेगा अगर किसान

हारे तो यह देश हारेगा अगर किसान हारे तो
यह देश गुलाम हो
जाएगा नरेंद्र मोदी साजी से
रचें नरेंद्र मोदी षडयंत्र
करेंगे जैसा कि पहले कर चुके हैं नरेंद्र

मोदी दमन चक्र चलाएंगे नरेंद्र मोदी
गोलिया चलवा जाएंगे नरेंद्र मोदी तोपे
चलवा जाएंगे नरेंद्र मोदी जुल्म करेंगे
किसानों को कुचलने की कोशिश करेंगे
लेकिन यह आपकी जिम्मेदारी
है

आप किसके साथ खड़े होते हैं आप किसानों का
साथ देते हैं या नहीं आप राष्ट्रवादी है
या देश के गद्दार
है अगर आज भी आप नरेंद्र मोदी को समझ नहीं
पाए

तो मैं नहीं समझता इतिहास में भी कोई ऐसा
गद्दार होगा जो देश को इस तरह से धोखा
देता रहा होगा किसी अत्याचारी के साथ खड़ा
होकर बहुत कुछ नहीं उदाहरण के
लिए यह होता रहा

है और देशों में भी या जहां भी आतताई हों
ने जन्म लिया है जहां भी आतताई हों ने
अपने अत्याचार
को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश की है चाहे
हिटलर हो चाहे कोई भी हो हिटलर भी इसी तरह

से डरता था इसी तरह से वार करता था इसी
तरह से दमन करता था इसी तरह
से और हिटलर को
भी जर्मनी बर्बाद होने तक हिटलर को भी लोग
समझ नहीं पाए वहां के बाद में उसकी कीमत
चुकाए आज

ऐसा नहीं है मेरे दोस्तों कि अगर आप जानने
की कोशिश करेंगे तो आपको समझ में नहीं आ
जाएगा कि नरेंद्र मोदी कितने खतरनाक है इस
देश के

लिए और जब आपको समझ में आ
जाए तो बस इतना
करना आवाज बुलंद करना डरना मत सामने आना
मुकाबले में खड़ा होना किसानों का साथ
देना क्योंकि किन नहीं तो हम और आप भी

नहीं किसान नहीं तो यह देश
नहीं किसान नहीं तो जवान
नहीं किसान हमारे अन्नदाता
है इस देश की मान मर्यादा सम्मान ताकत
समृद्धि सब कुछ किसानों से शुरू होकर
किसानों पर खत्म होती

है दलालों से देश नहीं बनता दलालों से देश
चलता
नहीं दलाल देश के लिए कुछ नहीं करते दलाल
बस देश बेचते
हैं हो सके तो देश को बचा लो आगे
आओ किसान आंदोलन में किसानों का साथ
दो नमस्कार

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