सरकार ने किए कांग्रेस के खाते बंद पड़ा दबाव तो लिया यू टर्न - instathreads

सरकार ने किए कांग्रेस के खाते बंद पड़ा दबाव तो लिया यू टर्न

नमस्कार मैं एनके
सिंह दोस्तों किसानों के आंदोलन में आंसू
गैस कुछ और भी हथियार कील कांटे सब लगा के
जब सरकार फेल हो रही है तो अब कोशिश दूसरी
है अब कोशिश हो रही है कि किसी तरह पंजाब

और हरियाणा के ही किसान है मुख्य रूप से
इनको बदनाम करना शुरू कर आपको याद होगा
पिछली बार जब तीन कानून बने थे और आंदोलन
हुआ था तो उस समय इनको आतंकवादी कहा गया
आतंकवादी समर्थन से उनके पैसे से इनको
बताया गया वह बेचारे अपना चूल्हा जला के

रोटी खा रहे थे उस पर भी सरकार को तराज था
अब नया नरेट शुरू किया जा रहा है कि साहब
यह पंजाब हरियाणा की किसान तो बाकी किसान
जितने भी देश भर के हैं उनसे ज्यादा मलाई

ये खा रहे हैं एमएसपी का और यह करके
आंकड़े दिए जा रहे हैं नए नए आंकड़े दिए
जा रहे हैं एक आंकड़ा कल आया और कहा जा
रहा है कि साहब सबसे ज्यादा जो लाभ मिलता
है एमएसपी का वोह पंजाब के किसानों को

मिलता है और आंकड़े में यह बताया गया है
कि एक क्विंटल पैदा करने में पंजाब के
किसान को 832 र लगते हैं सी2 फार्मूले से
ध्यान रखिएगा ये ए2 से नहीं है सॉरी ये ए2
फार्मूले से है जो दिया जाता है और यह भी

कहा जा रहा है कि सीटू फार्मूले से भी
लीजिए तो पंजाब के किसान को जोनकी बा
सीट मतलब कंप्रिहेंसिव कॉस्ट जिसम लैंड की
लागत का इंटरेस्ट भी दिया जाए यह उसके
पीछे कंप्रिहेंसिव हो जाता है क्योंकि भाई

लैंड लगा रहे फैक्ट्री वाले को तो आप दे
देते हैं फैक्ट्री का डेप्रिसिएशन भी होता
है उनके साजो सामान का उनके मनरी का लेकिन
किसान का क्या होता है क्या आप ट्रैक्टर
का डेप्रिसिएशन इसमें चार्ज करते हैं क्या
आप जो लैंड उसकी कीमती है उस कीमत का
इंटरेस्ट चार्ज कर

इस कॉस्ट में रखते हैं तो अब कोशिश क्या
है यह चार्ट आया है और यह
चार्ट हिंदी अंग्रेजी कई अखबारों में अब
आना शुरू हो गया है कि साहब एक पंजाब के

किसान को एक क्विंटल गेहूं पैदा करने में
एट एफएल से जिस पर दिया जाता है 8 32 लागत
आती है जबकि वही पर महाराष्ट्र के को
95 लागत आती है य सिर्फ इसलिए कि कहा जाए
कि बताइए साहब कितना ऐश कर रहा है पंजाब

और हरियाणा का किसान और उसकी कीमत अगर
सीटू प ली जाए तो पंजाब का किसान
503 एक क्विंटल लागत आती है उसकी और भारत
की सरकार कितनी रहम दिल है कि दे क्या रही
है

275 मतलब कि सी फार्मूले पर भी जो 50 पर
इनकी मांग है उससे 3 पर ज्यादा दे रही है
53.5 पर दे रही है कितना बड़ा एहसान सरकार
कर रही है पंजाब के किसानों प इसी तरह
हरियाणा का दिया गया है हरियाणा का किसान

यह कहा जा रहा है कि साब ये इसका जो यील्ड
है यह करीब पर हेक्टेयर 48 क्विंटल है
मतलब कि इसकी जो लागत आती है ए2 एफएल के
फार्मूले से जिस जिसका दावा किया जाता है
कि हम दे रहे हैं ए2 एफएल प किसान सीटू

मांग रहा है तो हरियाणा का किसान
988 लागत आती है एक क्विंटल ए2 एफएल पे और
अगर सीट से जोड़ा जाए तो
161 आती है इसका 50 पर होना चाहिए कितना

करीब
00 तो यह कहा जा रहा है कि साहब हम तो एट
एफएल से 130 पर ज्यादा दे रहे गुना छोड़िए
दना
छोड़िए हम तो उसका सवा गुना दे रहे हैं

मतलब ढाई गुना दे रहे हैं 13 पर ज्यादा दे
रहे हैंट एफएल से और यहां तक कि सीटू जो
मांग की जा रही उसका भी 42 पर ऑलरेडी दे
रहे

हैं यह कहा जा रहा है कि साहब और यही इसके
ठीक उलट कहा जा रहा है कि देखिए साहब
बिहार का किसान बिहार का किसान अपना 29

क्विंटल 2.52 क्विंटल पर हेक्टेयर पैदा
करता है और उसकी लागत आसे बिहार का लीजिए
बिहार वाले की लागत ए2 एफएल पे
1226 है और सीट पे

1745 है तो ये कह रहे हैं कि साहब हम तो
ए2 एफएल वाले रेट से उसको भी 85 पर दे रहे
हैं 50 तो छोड़िए 85 पर दे रहे हैं मतलब
बहुत बड़ा एहसान है कि ट एफएल प 85 दे रहे
और यहां तक कि 85 के अलावा
अगर सीटू पर लिया जाए तो ऑलरेडी उसको हम

31 32 पर दे रहे हैं यह एक बदनाम करने की
साजिश चल रही है कि साहब हमने तो ऑलरेडी
उनको एट एफएल प जो फार्मूला हम अडॉप्ट किए
हैं उस परे हम दे रहे हैं 130 पर उसकी

लागत अगर है 00 तो हम उसको तो 2275 दे रहे
हैं और यह कह के कोशिश यह की जा रही है कि
हरियाणा और पंजाब इन किसानों को बदनाम
किया जाए कि असली मलाई तो यह खा जा र
क्योंकि सबसे ज्यादा इही को इन्ही का माल

लिया जाता है पूरे उसम किटी में यह नहीं
कह रहे हैं कि अगर किसान पंजाब का 800 रप
उसकी लागत आ रही है एट एफएल के हिसाब से
या 00 रप आ रही है सीटू के हिसाब से तो यह
किसान का कमाल है कि सरकार का

कमाल अगर वो अपनी उत्पादकता बढ़ाया है तो
यह कमाल किसका है और फिर इशू यह नहीं है
कि कमाल किसका है क्या हरियाणा का पंजाब
का किसान मालामाल

है और फिर मान लीजिए आप इस तथ्य को क्यों
नहीं देख रहे हैं कि देश का जो युवा पैदा
हो रहा है उसको आप नौकरी नहीं दे रहे हैं
यह एग्रीकल्चर सेक्टर है जो कि 43 पर देश
के जो वर्केबल एज है काम करने वाले युवा

है उनको वो रोजगार दे रहा है रोजी रोटी दे
रहा है एहसान इसका मानिए जिस दिन उसकी
रोजी रोटी एग्रीकल्चर सेक्टर से बंद हो गई
उस दिन जो देश में त्राहि त्रा बचेगी जो

देश में उपद्रव होगा उसका आपको अंदाजा है
यह किसान इसके बेटे को शिक्षा नहीं मिल
रही है इसके बेटे को स्वास्थ्य नहीं मिल
रहा है इसका बेटा पैदा होता है तो ठू
स्टंटेड पैदा होता है लो वेट एडवर्थ मतलब

जो कमजोरिया होती है कुपोषण की उसका शिकार
होता है नतीजा यह उसके बाद जब आता है
दुनिया में तो उसको शिक्षा प्रॉपर नहीं
मिलती है नतीजा यह होता है कि किसान का
बेटा किसान बनता बनता अंत में वह बिलबिला

के वह नोएडा में रिक्शा चलाना शुरू कर
देता है यही वजह है कि 80 पर किसान आज
खेती छोड़ना चाहता है तो मोदी जी को इसकी
चिंता नहीं

वो यह नहीं देख रहे हैं कि बेस हमारा देश
में अगर फूड प्रोडक्शन बंद हो जाए तो आप
जरा सोचिए 140 करोड़ लोग खाएंगे कहां से
और फिर यह फूड ही है जिसकी वजह से आप केक

बनाते हैं पिज्जा बनाते हैं और फाइव स्टार
होटल्स में और बड़े-बड़े घरों में जो कजम
होता है जिस दिन से यह रुक जाएगा उस दिन
से चीजें खत्म हो जाएंगी तो किसान की

डिमांड सरकार कितना खूबसूरती से उसको बदल
रही है कि नहीं साहब यह तो कयामत हो जाएगा
जबकि हकीकत यह है कि अगर यह सारी डिमांड
बान ले तो अभी क्रिसल का कल का एक स्टडी

आया है यह क्रिसल के स्टडी है जो की हिंदू
अखबार का है और इसमें कहा गया है कि सरकार
अगर सारी मांग मांग ले और
उसको कानून बना दे और सारा उत्पादन खरीदने

की का कानून बना दे तो भी सरकार को सिर्फ
2000 करोड़ रुपए लगेंगे एक्स्ट्रा आप जरा
सोचिए क्यों सरकार यह ड्रामा कर रही है
सिर्फ 21000 करोड़ लगेंगे और किसान कितना
खुश हो जाएगा कि जो भी उत्पादन वह करेगा

वो सरकार ले लेगी सरकार लेती नहीं है
दरअसल सरकार यह नाटक जो कर रही है इसके
पीछे का हम राज बताना चाहते हैं कि
सरकार करती क्या है 23 जींसों पर एमएसपी

है 23 जींसों का मिनिमम सपोर्ट प्राइस
दिया गया है 23 में से 16 की ही खरीद होती
है बाकी किसान अपने घर के कंजन के लिए
रखता है क्योंकि वह ऐसे अनाज होते हैं जो
जानवर खाते हैं और इस तरह की चीजों के लिए

रखता है या मार्केट में उसका वो है डिमांड
है इसलिए वो नहीं बेचता तो 16 जीनस है जो
एमएसपी पर लिए जाते हैं इसमें से भी सिर्फ

आठ है जो एक्चुअली 90 पर लिए जाते
हैं सिर्फ आठ है ऐसे उत्पाद जो 90 पर
खरीदे जाते हैं बाकी 10 पर में बाकी 8 पर
आते हैं अब जरा गौर
कीजिएगा आठ है इसमें से भी गेहूं और चावल

60 पर खरीद में जाता है 60 पर जो खरीद
पूरी होती है सरकार की वो गेहूं और चावल
की होती है तो अगर आपने यूनिवर्सल दे दिया
अगर आपने कानून बना दिया तो इससे कुछ नहीं

होने जा रहा है आपको कोई घाटा नहीं लगेगा
क्योंकि आप खरीदते ही गेहूं चावल है और वो
अपने पीडीएस के लिए खरीदते हैं अपने काम

के लिए खरीदते हैं तो आपको और फिर मान
लीजिए उसने कोई और उत्पाद भोया तो आप
क्यों नहीं सोचते कि उसको मंडी में आप खुद
बेच मान लीजिए प्राइस नीचे आ रही किसान कब

बेचने जाता है एमएसपी प जब उसको मार्केट
प्राइस कम मिलती है तब वो एमएसपी पर बेचने
जाता है अब यहां पर गौर कीजिएगा दाल तो व
नहीं बेचता क्योंकि दाल हमेशा महंगा बिकता

है आपका जो एमएसपी है उससे लगभग दूने रेट
पर बिकता है दने या यूं कहिए कि 50 पर
ज्यादा रेट पर तो बिकता ही है तो दलहन के
किसान नहीं जाते हैं आमतौर प तिलहन के
नहीं जाते हैं तो यह चीजें आपको नहीं
बेचनी है हां प्राइस अगर क्रश कर तभी आपका

रोल आता है मार्केट इंटरवेंशन के कि बाजार
में आप धीरे से खड़े हो जाए मंडी में अगर
हया बदमाशी कर रहा है तो सरकार खड़ी है कि
अच्छा मैं खरीदता हूं और जैसे ही सरकार

खरीदने लगेगी फिर रेट ऊपर हो जाएगा तो
सरकार को एक्चुअली कुछ नहीं करना है सिर्फ
आपको खड़े हो जाना है इसी के दहशत में अ
दाम नीचे नहीं करेंगे और किसानों की

स्थिति बदल जाएगी लेकिन उसम सरकार काम
करना पड़ेगा उसम लाफा जीी से नहीं चलेगा
कि आपने बरेली के भाषण में कह दिया कि
किसानों की आय दुनी कर देंगे और पता लगा

कि 218 र उनकी आए उन पाच वर्षों में 2016
में कहा था 2022 में उनकी जो आय थी व
10218 थी जो सिर्फ 25 पर बड़ी थी और उस
दौरान जो इन्फ्लेशन था वो 50 पर से ज्यादा
हो गया था मतलब कि उसका घाटा हो गया और

किसान लगातार टे में चल रहा है क्योंकि
उसको 45 पर जो देश के युवा है उनको भी उसी
में
अकोमोडेटिंग क्योंकि इंडस्ट्री तो
ऑटोमेटिक हो रही है इंडस्ट्री तो मशीन

लाकर आती है और भारत के इतिहास में पहली
बार हुआ
कि मैन्युफैक्चरिंग
में कम लोग है कंस्ट्रक्शन में मतलब जो
ईटा गरा ोने वाले मजदूर है उनकी संख्या

बढ़ गई है मजदूरी वालों की कम हो गई है
11.9 पर जो देश का युवा है वह मैनु
फैक्चरिंग में है और कंस्ट्रक्शन में 12.3
पर है यह देश के 70 साल के इतिहास में
पहली बार हुआ है तो वो जो बेचारे किसान के
बेटे आ रहे हैं वो यहां मजदूर बनते हैं तो
बदनाम क्या किया जा रहा है कि साहब हमने

तो सीटू फार्मूले से य जो आपको दिखाया
हमने रिपोर्ट इसमें कहा गया कि पूरे देश
का औसत ले
तो सारे राज्यों का मिला के तो कॉस्ट ऑफ
प्रोडक्शन एट एफएल फार्मूले पर 8 र आ रही

है और सीटू फार्मूले पर
16 आ रही है और सरकार सीट फार्मूले का ल
37 पर दे रही है तो भैया 50 पर थी तो मांग
है उनकी 13 पर और दे दो करीब र आपको गेहूं
का बढ़ाना पड़ेगा अगर आप अभी 2275 दे रहे

हैं तो 2475 हो जाएगा लेकिन क्या वाकई
किसान इससे खुशहाल होगा नहीं उसको दबाया
कई तरह से गया है और यह बात सच है कि जब
तक किसान के बेटे को उसमें से निकाल के आप
फैक्ट्रियों में नहीं लाएंगे और
फैक्ट्रियों में लाकर उनका वेतन अच्छा

नहीं करेंगे तो निकालेंगे तो एग्रीकल्चर
पर लोन कम हो जाएगा उसका उसका पिता खेती
करेगा या बेटा एक ही करेगा बाकी भाई
इंडस्ट्रीज में चले जाएंगे या टर्श सेक्टर
होटल इंडस्ट्री में जा सकते हैं सेवा

क्षेत्र में जा सकते हैं और आप जानते हैं
कि अगर एग्रीकल्चर में वो लड़का रह गया तो
अगर वह शाम तक 00 कमाता है प्रतिदिन एक तो
प्रतिदिन कमाता भी नहीं है लेकिन अगर
कमाता है तो वही इंडस्ट्री में जब जाता है

तो 50 रप उसकी पगार हो जाती है और जब वो
सेवा क्षेत्र में जाता है तो सा स रप हो
जाती है साढ़े तीन गुने का अंतर है तो
सरकार की कोशिश किस खूबसूरती से सस्ता
लेबर मिलता रहे इसके लिए किसानों को यह एट
एफएल सीटू आप दे दीजिए सीट सारा प्रोडक्शन
ले लीजिए तब भी किसान की हालत ही सुधरेगी

क्योंकि किसान के बेटे को आपने एप्ल एप्ल
एबिलिटी के लिए जो शिक्षा चाहिए जो तकनीकी
शिक्षा चाहिए आपको दे ही नहीं रहे हैं तो
मोदी जी यह पूरा एक साजिश है जो किसानों
के खिलाफ आपने कर रखी है अब उन परे गोली

चलवा रहे हैं और सिर्फ उनकी मांग क्या है
सीट पे आप उनका सारा उत्पाद खरीद ले मैंने
आपको आकला बताया कि दरअसल आठ ही जींस
खरीदे जाते हैं और मान लीजिए कि 2300 जींस
खरीदे जाए तो वो खरीदना नहीं होता जैसे ही
आप खरीदने आएंगे मार्केट में उसकी कीमत

बढ़ जाएगी कि सरकार खड़ी है और किसान वो
जिंदा हो जाएगा क्योंकि उसको सही प्राइस
मिल जाएगा अय उसका शोषण नहीं करेंगे कि
तुम जाओगे कहां इसीलिए सरकार को यह डिमांड
की जा रही है कि आप पूरा का पूरा उसका
प्रोड्यूस करें एक्चुअली करना नहीं है

इसकी धमकी रहेगी इसका एक डर रहेगा यों में
तो वो दलहन का गेहूं का चावल का इनके रेट
नीचे नहीं
करे नीचे नहीं करेंगे तो सिंपल सी बात है
कि किसान को व मिल जाएगा लेकिन इससे किसान
की त्रासदी खत्म नहीं होगी किसान की

त्रासदी तब खत्म होगी जब स्पेशल पैकेज
देके उनके बच्चों को आप शिक्षा दे अलग
शिक्षा दे और वो शिक्षा इस तरह की हो कि
वो बाध्यता हो कि किसान के बेटे को आप जब
शिक्षा देंगे तो व क्वालिटी एजुकेशन हो

वही होगी जो कलेक्टर साहब के बेटे को
मिलती है और तब वह जाके इंडस्ट्री में काम
करने लगेगा और इंडस्ट्री में भी काम की
जरूरत होगी आज जरा आप सोचिए पंजाब का
किसान क्यों सस्ता गेहूं उजा रहा है

क्योंकि मैकेनाइजेशन कर रखा है उसने वो
उसने मशीनीकरण कर रखा है कृषि में 90 पर
मशीन से होता है लेकिन अगर य ही गलती
बिहार का किसान कर दे तो उसका बेटा
बेरोजगार हो जाएगा बेटा बेरोजगार होगा तो

जाएगा क्योंकि बाहर कहीं उसको नौकरी नहीं
है लिहाजा मैकेनाइजेशन भी आप इस देश में
नहीं कर सकते जब तक उसको कहीं बेहतर नौकरी
बेहतर पगार देकर उसको बाहर ना करे लिहाजा
आप मैकेनाइजेशन जैसे पंजाब का किसान अगर

800 रप गेहूं प्रति क्विंटल पैदा कर रहा
है और
किसान
कर याददा सही है महाराष्ट्र का किसान कर
रहा है
2735 तो कितने का अंतर पड़ा 830 832
और 2735 कितने का अंतर है तीन गुने का

अंतर महाराष्ट्र का किसान गेहूं अगर पैदा
करता है तो तीन गुना लागत उसकी ज्यादा आती
है वजह क्या है मैकेनाइजेशन कॉस्ट ऑफ लैंड
महाराष्ट्र में लैंड की कॉस्ट ज्यादा है
बिहार में भी ज्यादा है क्योंकि वहां पर

पॉपुलेशन डेंसिटी ज्यादा
है फिर इरिगेशन आपको पंजाब में सस्ता
इरिगेशन आपने नेटवर्क चलाया जब गन
रिवोल्यूशन हुआ तो पंजाब में आपने ग्रीन
रिवोल्यूशन में आपने पानी की व्यवस्था की

थी यह व्यवस्था राजस्थान में नहीं है तो
उसका कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन बढ़ जाता है
बिहार में यह सुविधा नहीं है लिहा वहा प
कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन महाराष्ट्र में तो बढ़
ही जाता है सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में

कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन है तो इसके पीछे आप
गौर से जब देखेंगे तो एक साजिश है जो
सरकारें करती रही है किसान और उनके बेटे
के साथ ताकि उनके बेटे भी नोएडा आए तो व
सस्ता लेबर के रूप में आए और साहब जब एसी
में बैठे हो तो उनके पैर दबाए यह इसकी

साजिश है जिसके तहत इंडस्ट्रीज को सस्ता
मिले और इंडस्ट्री में आप वैसे भी काम
नहीं दे रहे हैं से भी बैठा हुआ है तो
सरकार जो किसान की डिमांड है अगर वो मान
भी लेती है तो उसको सिर्फ 2000 करोड़ रुपए
देने होंगे और इतनी राशि तो अगर पूरा देखा

जाए तो प्रधानमंत्री की जो यात्राएं होती
है देश विदेश में उसमें उससे कम उससे
ज्यादा कॉस्ट लगती है वो भी छोड़िए 21000
एक छोटे से प्रोजेक्ट में आप दे देते हैं

तो अगर किसानों को 21000 सिर्फ आपको यह
करना है कि आपको 6 लाख करोड़ रुपए दे जो
कल की रिपोर्ट उससे बड़ा स्पष्ट कहा गया
है कि आपको एक कॉर्पस रखना पड़ेगा 6 लाख
करोड़ का कि हम पूरे देश में जहां भी आती

बदमाशी करें रेट्स को नीचे लाए हम उसी समय
खड़े हो जाए कि नहीं तो हम खरीदेंगे और आप
ताज्जुब करेंगे इससे किसानों की स्थिति
पूरी बदल जाएगी तो आपको यह मानने में
दिक्कत क्या है लेकिन सरकार इसलिए अड़ी है

कि किसानों को अगर मजबूत कर दिया तो सस्ता
लेबर नहीं मिलेगा और सस्ता लेबर नहीं
मिलेगा तो जो अडानी अंबानी की फैक्ट्रियां
है यह चलेंगी कैसे इसलिए लेबर का इतना कर
दो कि सस्ते में लेबर बिनने लगे और किसान
का बेटा लेबर ही किसान का बेटा किसान हो
या लेबर इससे ऊपर वो ना पढने पाए मुझे

लगता है कि आपको यह किसानों की जो त्रस्ती
है यह बहुत क्लियर अब समझ में आ जाएगी कि
क्यों सरकार अड़ी हुई है क्यों पंजाब और ह
के किसानों को बदनाम कर रही है और बदनाम
जो कर रही है वो तो कर ही रही है क्योंकि

सबसे ज्यादा वही लड़ रहे हैं बिहार को
किसान के किसान को अगर कुछ दे दे तो भी
समझ में आता है लेकिन व कुछ भी नहीं अगर
यह सीटू फार्मूले पे किसानों की उपज की
गारंटी ले तो कम से कम बिहार का किसान

अपना मक्का भी बेच सकता है 1800 और 000 00
लेकिन आपने एमएसपी तो दे दिया है पिछले
साल बिहार का किसान अपना मक्का 900 बेचा
है जबकि एमएसपी 000 है क्योंकि वहां
पर खरीद का कोई सिस्टम आपने नहीं बनाया

बिहार में कोई खरीद का सिस्टम नहीं है तो
यह जो फ्रॉड किया जा रहा है किसानों के
साथ इसे गौर से समझने की जरूरत है और
बदनाम करने की जो कोशिश की जा रही है कि
मालामाल है पंजाब और हरियाणा का किसान यह
कतई हकीकत नहीं है वो इनपुट कॉस्ट जो उसकी

कम हुई है उसके कारण दूसरे हैं वो
मैकेनाइजेशन से हुआ है बिहार का किसान और
महाराष्ट्र का किसान अगर नहीं कर पा रहा
है और गेहूं की कीमत अगर उसको 00 पड़ रही

है और आपका एमएसपी है तो आप समझ सकते हैं
उसका एमएसपी आप 2275 दे रहे हैं लागत
महाराष्ट्र के किसान को बिहार के किसान को
बहुत ज्यादा आ रही है तो हकीकत क्या है
किसान क्यों बेहाल है यह आपको समझने में

बहुत दिक्कत नहीं होगी और सरकार क्यों तनी
हुई है यह भी समझने में दिक्कत नहीं होगी
फिलहाल इतना ही किसी और मुद्दे पर आपसे
फिर मिलेंगे तब तक

Leave a Comment