सरकार ने G20 पर कितने पैसे खर्च किये ? | How Much Money Did The Government Spend On G20? - instathreads

सरकार ने G20 पर कितने पैसे खर्च किये ? | How Much Money Did The Government Spend On G20?

द g20 समिट है कंक्लुडेड इंडिया हैज अचीव
व्हाट एवर इट सेट आउट टू डू दिस इज रिली
बींग सेन एज अ विन फ म एंड विन फ
इंडिया आज जी 20 के प्रेसिडेंट के तौर पर
भारत पूरी दुनिया का आह्वान करता है

दोस्तों g20 समिट की कामयाबी ने दुनिया के
नक्शे पर भारत की नई पावर सेंटर के तौर पर
छाप छोड़ी है सदस्य देशों के अलावा विपक्ष
के नेता भी इस की तारीफ करते हुए कह रहे
हैं कि यह भारत की एक अहम कूटनीतिक सफलता
है अमेरिकी सरकार ने भी खुद इस समिट की

प्रशंसा की है इस योजना ने पीएम मोदी की
छवि को एक प्रभावशाली वैशक नेता के तौर पर
खड़ा कर दिया है g20 समिट के लिए सरकार ने
जो तैयारियां की थी उसमें भारत की समृद्ध
परंपराओं के अलावा आधुनिकता की चमक भी

दिखी है लेकिन कार्यक्रम खत्म होने से
पहले ही केंद्र सरकार द्वारा g20 समिट के
लिए किए गए खर्चों को लेकर वि शुरू हो गया
है वहीं अब यह दावा किया जा रहा है कि

भारत सरकार ने t20 समिट के लिए बजट में
अलॉट की गई राशि से 3 100% ज्यादा खर्च
किया है कहा जा रहा है कि सरकार ने इस
सम्मेलन में 990 करोड़ के बजाय 4100 करोड़

रपए खर्च कर दिए हैं तो आज के इस वीडियो
में हम इन्हीं दावों की जड़ से पड़ताल
करेंगे और जानेंगे g20 की तैयारियों के
लिए कितना खर्च किया गया है दुनिया के

बाकी देश g20 में कितना पैसा खर्च करते
हैं और आखिर कितना खर्चा करने से भारत को
कितना फायदा हुआ आइए जानते हैं दोस्तों ये
पहली बार था जब भारत में विश्व नेताओं के

इतने शक्तिशाली समूह की मेजबानी की है
फरवरी में केंद्र सरकार ने 2023 से 24 के
बजट में जी-20 अध्यक्ष पद के लिए 990
करोड़
अलडा अध्यक्षता के तहत इनकी थीम वसुदेव

कुटुंबकम रखी गई है जिसका अर्थ है कि
विश्व एक परिवार है राजधानी में वैश्विक
नेताओं के आने से पहले इसे दुल्हन की तरह
सजाया गया था केंद्र की आंकड़ों के

मुताबिक जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली
को सजाने में 4100 करोड़ से ज्यादा का
खर्चा हुआ है बीते दिनों की शुरुआत में
केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने g20 के
लिए शहर के सौंदर्य कर पर हुए खर्च की एक

लिस्ट शेयर की थी खर्चों को मोटे तौर पर
लगभग 12 श्रेणियों में बांटा गया था g20
की तैयारियों के सबसे मेन पार्ट्स में से
सुरक्षा थी मंत्रियों के अनुसार इस पूरे
खर्चे को दिल्ली पुलिस एमए पीडब्ल्यूडी

दिल्ली नागरिक विका एमसीडी और एनडीएमसी
डीडीए के बीच बांटा गया था सुरक्षा से
लेकर सड़क पर साइन बोर्ड लाइट्स के
मेंटेनेंस को लेकर g20 ब्रांडिंग तक और
पब्लिक एरिया से एनरोलमेंट हटाने से लेकर

फ्लाई ओवर और पुलों की पेंटिंग तक हर चीज
के लिए पैसा अलॉट किया गया था इंडियन
एक्सप्रेस के अनुसार आईटीपीओ सड़क परिवहन
और राजमार्ग मंत्रालय और मिलिट्री

इंजीनियरिंग सर्विसेस जैसी केंद्रीय
एजेंसियां और केंद्र सरकार के अधीन दिल्ली
पुलिस एनडीएफसी और डीडीए यह सभी g20 बैठक
के 98 पर खर्च के लिए जिम्मेदार थे केंद्र
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक आईटीपीओ जो

मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के
अंतर्गत आता है उसने सबसे ज्यादा यानी
लगभग 36 करोड़ खर्च किए हैं 3340 करोड़ के
साथ दिल्ली पुलिस दूसरे नंबर पर रही जिसके
बाद एनडीएमसी ने 60 करोड़ खर्च किए हैं

न्यूज़ एजेंसियों के मुताबिक कंस्ट्रक्शन
और मरमत एनडीएमसी और जोन के आसपास वाले
इलाके में किया गया था इसलिए केंद्र सरकार
के विभागों ने ज्यादातर खर्च उठाए हैं
गेस्ट लिस्ट को देखते हुए सुरक्षा

व्यवस्था पर भी काफी खर्च किया गया है
आईटीपीओ की तरफ से किया गया खर्च केवल
शिखर सम्मेलन के लिए नहीं है बल्कि इसका
संबंध भारत मंडप जैसी संपत्तियों के
निर्माण से भी है मीनाक्षी लेखी के अनुसार

सबसे बड़ा खर्च ₹ 600 करोड़ का है यह 3600
करोड़ प्रगति मैदान में बनाए गए इंडिया
ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन परिसर के

निर्माण की लागत है जो कि की कुल राशि का
करीब 88 पर हिस्सा है प्रगति मैदान में
आईईसीसी यानी इंटरनेशनल एग्जिबिशन और
कन्वेंशन सेंटर परिसर के बाहर अष्टधातु

यानी आठ धातुओं से बनी 27 फीट ऊंची 18 टन
की नटराज प्रतिमा लगाई गई थी इस परिसर का
नाम बाद में आधिकारिक तौर पर भारत मंडपम
कर दिया गया यह वही जगह है जहां g20
सम्मेलन का आयोजन हुआ था भारत मंडपम एक

स्थाई इंफ्रास्ट्रक्चर है जिसका इस्तेमाल
भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों में भी
किया जाएगा हालांकि केंद्र सरकार का कहना
है कि इस स्थाई इंफ्रास्ट्रक्चर के
निर्माण में हुए खर्चे की पूरी राशि को

g20 सम्मेलन में हुए खर्चे में जोड़कर पेश
करना गलत है ध्यान देने वाली बात यह है कि
आईटीपीओ परिसर के पुनर्विकास के लिए साल
2017 में ही 2254 करोड़ का अलॉट किया गया

था साथ ही प्रगति मैदान के आसपास टनल
बनाने के लिए 800 करोड़ का बजट भी उसी साल
अलॉट किया गया था अब इसी बारे में छपी एक
खबर के मुताबिक साल 2019 में इस राशि को

बढ़ाकर करीब 000 करोड़ कर दिया गया था अगर
इन दोनों राशियों को भी जोड़ा जाए तो भारत
मंडपम और इसके आसपास के क्षेत्रों में हुए
विकास की लागत 3200 करोड़ के आंकड़े के
पार हो जाती है इसके अलावा प्रेस

इंफॉर्मेशन ब्यूरो ने 26 जुलाई की घोषणा
की थी भारत मंडपम को बनवाने में 22700
करोड़ का खर्चा हुआ है जिसमें टनल बनाने
का खर्चा भी शामिल नहीं है न्यूज़ चैनल्स
के अनुसार इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय

हवाई अड्डे से प्रगति मैदान तक की सड़कों
को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए 2
करोड़ खर्चा किया गया है इस बीच दिल्ली
सरकार के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट यानी
कि पीडब्ल्यूडी ने g20 के लिए 445 करोड़

रपए खर्च किए हैं पीडब्ल्यूडी मंत्री
अतिशी के अनुसार दिल्ली के कई सड़कों को
यूरोपीय और अमेरिकी देशों की सड़कों की
तरह फिर से डिजाइन किया गया था
पीडब्ल्यूडी ने दिल्ली को सजाने और

संवारने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र में
1.65 लाख पौधे 31 मूर्तियां 90 फौ वारे और
सजावटी लाइटें लगाई थी दिल्ली सरकार के
तहत आने वाली एमसीडी ने g20 को लगभग ₹
करोड़ और दिल्ली के वन विभाग को तकरीबन ₹1

करोड़ का भुगतान किया है जहां सेंट्रल रोड
सरफेस ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने 226
करोड़ खर्च किए वहीं दिल्ली डेवलपमेंट
अथॉरिटी ने शिखर सम्मेलन के लिए 8 करोड़
खर्च किए जुलाई में न्यूज लांडी की एक

रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने दिसंबर
2022 से अप्रैल 2023 तक g20 राष्ट्रपति पद
से संबंधित आउटडोर एडवरटाइजिंग पर 50.6
करोड़ खर्च किए हैं लेकिन g20 समिट पर किए

गए खर्चे पर विवाद शुरू हो गया विपक्षी दल
केंद्र सरकार पर g20 घोटाले की बात कर रहे
हैं आइए जानते हैं क्या है पूरा विवाद
दोस्तों केंद्र और दिल्ली की आप सरकार g20
के लिए खर्चे को लेकर आप में सामने है शहर

के विकास और सौंदर्य कर को लेकर दोनों के
बीच क्रेडिट लेने के युद्ध छड़ गया है
दरअसल एक तरफ केंद्र सरकार इस समिट के सफल
होने का क्रेडिट ले रही है तो वहीं दूसरी

तरफ दिल्ली सरकार अलग ही राह गलाप रही है
इस विषय में आम आदमी पार्टी के अतिशी ने
पीटीआई न्यूज़ एजेंसी को बताया है कि हमने
सोचकर इसे मुद्दा नहीं बनाया है इसका

हमारे देश पर बुरा असर पड़ेगा बीजेपी और
उपराज्यपाल कह रहे हैं कि उन्होंने सब कुछ
किया है यह उनके अहंकार को दिखाता है
पलटवार करते हुए केंद्रीय सरकार ने लिस्ट
शेयर की है और पूछा है कि दिल्ली सरकार ने

927 करोड़ क्यों मांगे जबकि अकेले
पीडब्ल्यूडी का बजट 00 करोड़ से 00 करोड़
है पीटीआई के अनुसार केंद्रीय विदेश और
संस्कृति राज्य मंत्री ने कहा है कि क्या

वे दिल्ली के विकास के लिए 927 करोड़ खर्च
नहीं कर सकते थे लेकि ने दावा किया है कि
केंद्र सरकार ने दिल्ली में सड़कों के
निर्माण मरम्मत रखरखाव और सौंदर्य करण के

 

लिए 700 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं मीडिया
रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी की शुरुआत में
दिल्ली सरकार में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी
मंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र को एक
पत्र लिखकर g20 शिखर सम्मेलन के लिए विशेष

विकास परियोजनाएं शुरू करने के लिए 927
करोड़ की ग्रांट की मांग की थी वहीं इन
राशियों के जोड़ तोड़ को लेकर एक्सपर्ट्स
का कहना है कि एक स्थाई बुनियादी ढांचा को

बनाने की लागत को किसी प्रोग्राम की
मेजबानी के खर्चे के साथ नहीं जोड़ा जा
सकता क्योंकि इस इमारत का उपयोग आने वाले
कई सालों तक होगा सीनियर चार्टर्ड
अकाउंटेंट गोपाल केडिया ने बताया है कि इस

तरह की संपत्ति का इस्तेमाल भविष्य में
होने वाले प्रोग्राम में किया जा सकता है
इसीलिए इसे सिर्फ एक सम्मेलन में हुए
खर्चे में नहीं गिना जा सकता उन्होंने आगे

कहा सही मायने में इस खर्चे का असेसमेंट
इस तरह से किया जा सकता है कि अगर इसके
आयोजन के लिए भारत मंडपम को किराए पर लिया
जाता तो कितना खर्चा आता जाहिर है यह रकम
मामूली होती और कुछ करोड़ से ज्यादा नहीं

होती एक दूसरे चार्टेड अकाउंटेंट अश्विनी
तनेजा ने भी यह बात दोहराते हुए कहा है कि
सम्मेलन के खर्चे के आकलन में केवल देख
कोरेशन एडवरटाइजिंग और बिल्डिंग की साज

सज्जा करने में खर्च हुई राशियों को ही
जोड़ा जाना चाहिए इस खर्चे में स्थाई
इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में आई लागत को
जोड़ना गलत है इससे पहले केंद्रीय बजट
2023 से 24 में g20 की अध्यक्षता के लिए
990 करोड़ का प्रोविजन किया गया था अपने

बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला
सीतारमण ने कहा था कि वैश्विक चुनौतियों
के मौजूदा समय में g20 की अध्यक्षता ने
भारत को विश्व आर्थिक व्यवस्था में अपनी
भूमिका को मजबूत करने का अनूठा अवसर

प्रदान किया है वित्त मंत्री ने कहा था कि
वसुदेव कुटुंबकम की थीम के साथ भारत
वैश्विक चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ
सस्टेनेबल इकोनॉमिक डेवलपमेंट को संभव

करने के लिए एक महत्वकांक्षी जन आधारित
एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है भारत ने जी-20
सम्मेलन में पूरी ताकत और तैयारी के साथ
मेजबानी की है भारत इस सम्मेलन में ग्लोबल

साउथ के देशों के मुद्दों को उठाकर इस
पूरे क्षेत्र का नेतृत्व हासिल करना चाहता
है इस सम्मेलन में भारत और सऊदी अरब के
बीच कई महत्त्वपूर्ण करार हुए हैं इनमें

सबसे बड़ा करार सोलर पावर को लेकर है
दोनों देशों के बीच एनर्जी सेक्टर को लेकर
एक करार हुआ है इसके करार के तहत सऊदी अरब
के साथ समुद्र के नीचे से पावर ट्रांसमिशन

लाइन जोड़ी जाएगी इस मौके पर भारत की ओर
से स्वच्छ ऊर्जा के मामले में एक
महत्त्वपूर्ण पहल का ऐलान भी किया गया है
साथ ही भारत ने ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस

लॉन्च करने की घोषणा की है भारत के अलावा
अमेरिका और ब्राजील इस नए अलायंस के
फंडिंग मेंबर्स हैं गबल बायोफ्यूल अलायंस
के लॉन्च होने के बाद तीनों फंडिंग मेंबर

समेत अर्जेंटीना और इटली जैसे कुल 11 देश
इससे जुड़ चुके हैं इसके अलावा इस शिखर
सम्मेलन में हुई एक बड़ी घोषणा में भारत
से यूरोप तक ट्रेड रूट बनाने की घोषणा को
काफी खास माना जा रहा है भारत से यूरोप तक

जिस ट्रेड रूट को बनाने की संकल्पना पेश
की गई है वह पश्चिम एशिया से होकर गुजरेगा
और तैयार हो जाने पर चीन के मॉडर्न सिल्क
रूट की काट साबित होगा इस ट्रेड रूट का

ऐलान पूरी दुनिया के लिए काफी
महत्त्वपूर्ण
भी है इस सम्मेलन में एक महत्त्वपूर्ण चीज
हुई है g20 अब g21 बन गया है क्योंकि

अफ्रीकी यूनियन को g20 का सदस्य बनाया गया
है तो दोस्तों यह तो हुई हमारे देश भारत
यानी इंडिया की खर्च और उसके फायदे की बात
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे पहले जिन

देशों ने g20 समिट की मेजबानी की है आखिर
उन्होंने कितना खर्च किया है चलिए हम आपको
बताते हैं देखिए पिछले साल यानी 2022 में

g20 समिट का आयोजन इंडोनेशिया के बाली में
हुआ था एक अनुमान के मुताबिक इस आयोजन पर
3364 करोड़ खर्च हुए थे वहीं साल 2019 का
g20 शिखर सम्मेलन जापान में आयोजित हुआ था
एक्स पर द वर्ल्ड रैंकिंग द्वारा ट्वीट

किए गए आंकड़ों के अनुसार जापान के ओसाका
में हुए इस समिट में 320 मिलियन डॉलर या
यूं कहे कि 22660 करोड़ खर्च किए गए थे
साल 2018 का g20 शिखर सम्मेलन अर्जेंटीना
के ब्यूनस आयर्स में हुआ था मीडिया

रिपोर्ट्स के अनुसार इसका बजट बट 11.2
करोड़ डलर यानी कि करीब 931 करोड़ था साथ
ही 2017 का g20 शिखर सम्मेलन जर्मनी में

हुआ था जर्मनी की आधारिक g20 वेबसाइट के
अनुसार हैमबर्ग में हुई इस समिट पर 72.2
मिलियन यूरो यानी कि 6642 करोड़ का खर्चा
आया था साल 2016 में जी-20 शिखर सम्मेलन
का आयोजन चीन के हैंगसा में हुआ था मीडिया

रिपोर्ट के अनुसार इस समिट पर 24 अरब डॉलर
का खर्चा हुआ था ये 1.9 लाख करोड़ के
बराबर रकम है ऑस्ट्रेलिया को साल 2014 में
g20 सम्मेलन की मेजबानी मिली थी ब्रिस्बेन

में हुई इस समिट की मेजबानी में
ऑस्ट्रेलिया ने 400 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई
डॉलर खर्च किए थे साथ ही सुरक्षा के लिए
100 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खर्च किए गए
थे इस तरह कुल खर्च करीब

22653 करोड़ से ज्यादा का हुआ था रूस में
साल 2013 में g20 सम्मेलन आयोजित हुआ था
अब रूस द्वारा आयोजित 2013 के g20 सेंट
पीटर्सबर्ग शिखर सम्मेलन की लागत लगभग 2

अरब आरयू बी थी जो 170 करोड़ से अधिक रकम
है फ्रांस ने साल 2011 में g20 समिट की
मेजबानी संभाली थी और इस आयोजन में तकरीबन
8 करोड़ यूरो यानी कि करीब 7712 करोड़ से

अधिक की लागत आई थी कनाडा ने साल 2010 में
-20 सम्मेलन की मेजबानी संभाली थी और इस
समिट पर लगभग 715 मिलियन सीडी यानी करीब
4381 5 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे तो

दोस्तों हमने आज समझा कि भारत सरकार ने इस
समिट को सफल बनाने में कितना खर्च किया
साथ ही विपक्ष और केंद्र सरकार की वजह से
इस पर आमने-सामने हैं हालांकि दोस्तों

खर्चा कितना भी हुआ हो अगर इस समिट में
किए गए समझौते सफल होते हैं तो इससे भारत
को ही फायदा होगा और भारत वैश्विक मंच पर
मजबूत हो जाएगा

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