सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट भानु प्रताप व महमूद प्राचा को क्यों मिली धमकी? देखिए वकीलों ने क्या बोला? - instathreads

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट भानु प्रताप व महमूद प्राचा को क्यों मिली धमकी? देखिए वकीलों ने क्या बोला?

हमें मारने की धमकी मिल रही है हमें मालूम
है और मुझे और महमूद परा को मारने की धमकी
है और जिस तरह से यह सब प्लान किया है
उन्होंने कि भाई मुझे
मरवाएगी आई है कि जब ये इनपुट हमें मिला
है ईवीएम हट जाए तो सरकार की पूरी ही

छुट्टी ही हो जाएगी नखल की क्या बात करें
इसके लिए ये कोई परेशान होने वाली बात
नहीं है कि हम कर रहे हैं तो हमें रोकने
रोकने के लिए हमें मार दिया जाएगा किसान

है उनको रोकने के लिए उन पर जो है आंसू
गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं रबड़ की
गोलियां चलाई जा रहे हैं एसएलआर की
गोलियां चला हमें मारने की धमकी मिल रही
है हमें मालूम है और मुझे और महमूद पराक

को मारने की धमकी है और जिस तरह से यह सब
प्लान किया है उन्होंने कि भाई मुझे
मरवाएगी
सके सरकार की औकात नहीं है कि हमें डरा
सके हमें धमका सके हमें रास्ते से हटा सके

सरकार जो सारा काम करेगी ज्यादा से ज्यादा
करेगी हमें मारेगी और सरकार के लिए खूनी
खेल खेलना कोई बड़ी बात नहीं है उसके लिए
आम बात है हत्या करना करवाना उनके लिए आम
बात है हमें इससे चिंता नहीं है जरा भी

मेरा केवल इतना ही कहना है लोगों से कि
अगर हमारी हत्या भी सरकार द्वारा करा दी
जाए जो आपस का जो भाईचारा है जो सब लोग
इकट्ठे होकर इस ईवीएम की लड़ाई को लड़ रहे

हैं ये आपस का भाईचारा खत्म नहीं होना
चाहिए सरकार के लिए यही सबसे खतरनाक
स्थिति है जिससे व घबराई हुई है अंदर तक
क्योंकि यह आंदोलन ईवीएम का हम लोगों की
वजह से गांव गांव तक गली मोहल्लों तक

घर-घर तक पहुंच चुका है और पूरे देश में
ईवीएम के खिलाफ जबरदस्त उबाल है आप
देखेंगे आज की तारीख में कितने तरफ से
कितने मीडिया हाउसेस की तरफ से लगातार ये
ईवीएम के खिलाफ आवाज उठ रही है चाहे मतलब

आप देखें करण थापर साहब ने जिनका इंटरव्यू
लिया था देशपांडे
और आप देखें कितने ही लोग 4 पीएम पर
लगातार चल रहा है आप लोग लगातार दिखा रहे

हैं इत इतनी आवाज पहले कभी नहीं उठी थी और
किसकी वजह से उठी है ये आवाज हम लोगों की
वजह से उठी है इतनी मजबूती के साथ इतनी
लाउड इतनी तेज जो आवाज है हम तो हम लोग

उसके लिए खतरा हैं राहुल गांधी की यात्रा
उनके लिए खतरा नहीं है राहुल गांधी एक
मतलब देश का द बार चक्कर काट दें धरती का
द बार चक्कर काट दें मोदी पे कोई फर्क
नहीं पड़ता फर्क इस बात से पड़ता है कि हम

ईवीएम की बात जो कर रहे हैं और हमने ईवीएम
का डेमोंस्ट्रेट दिखाकर मोदी सरकार को
पूरी तरह से इलेक्शन कमीशन को नंगा कर
दिया और बता दिया कि बेईमानी कैसे होती है
उससे खतरा है इसलिए हमको हटाना है सो हमको

हटाने के लिए मन महमूद पचा की हत्या करवाई
जाएगी तो एससी एसटी ओबीसी इस तरह के लोगों
को देकर उसका हल्ला सरकार ही मचाएगी कि
देखो इन लोगों ने महमूद पचा की हत्या की
है ताकि आपसी जो भाईचारा है वो खत्म हो और

इसी तरह से मेरी हत्या जो करवाने की
प्लानिंग है वो मुसलमानों के माध्यम से
कराने की होंगे उन्हीं के आदमी लेकिन
मुसलमानों के माध्यम से ताकि जो आपसी
भाईचारा है ये भाईचारा टूटे इससे खतरा

है आंदोलन बटेगा नहीं आंदोलन रुकेगा नहीं
आंदोलन कमजोर नहीं होगा बल्कि अब ये
आंदोलन और भी ज्यादा तेज होगा पूरी ताकत
से होगा और अगर हमारी हत्या कराई जाती है
तो इस देश की जनता जवाब देगी सरकार को

पूरी तरह से जवाब देगी आवाज तो उठाई जा
रही है लेकिन ये आवाज कानों तक क्यों नहीं
पहुंच पा रही नहीं खूब कानों तक पूच रही
है अगर कानों तक नहीं पहुंचती तो हमारी
हत्या की साजिश नहीं रची जाती कानों तक

पहुंच रही है और इतनी तेज पहुंच रही है कि
उनके कानों में बाकायदा हमारी आवाज के
नक्कारे बज रहे हैं
इसलिए उनका यह है कि भाई ये आवाज बंद हो

किसी तरह से इसलिए हमको मारने की साजिश की
जा रही है इसमें क्या शक है तो सर ये आप
कैसे कह सकते हैं कि मुसलमानों और दलितों
द्वारा जो है मारने की साजिश हमें मालूम

है पूरी प्लानिंग है हमें मालूम है हमें
तभी यह सारी बात आपके सामने क्यों आई है
आपसे पहले तो कभी नहीं आई आपके सामने तभी
आई है कि जब ये इनपुट हमें मिला है और आप
कहेंगे कि इनपुट कहां से मिला है तो बहुत

लोग हैं बीजेपी के कितने ही लोगों को
राजनीतिक हिसाब से ठिकाने मोदी ने लगाया
है साइड किया है उनकी राजनीतिक राजनीति
खत्म कर दी तो इंफॉर्मेशन आने के कई सोर्स

है अगर सरकार के पास लोग हैं तो सरकार के
विरोध में या मोदी के विरोध में उसे
निश्चित रूप से उसकी नीतियों को पसंद ना
करने वाले लोगों की भी कोई कमी नहीं है
इंफॉर्मेशन मिल जाती है मैं कहूं इसकी

कल्पना आतंकवादियों से भी कहीं
आतंकवादियों के तो यह यार
हैं सरकार आतंकवादियों की तो यार
है और सही माने में क तो सरकार ही असली
आतंकवादी

है तो यह आतंक वायों की तरह नहीं है यह तो
मैं कहूं कि बहुत ही जघन्य अपराध किसानों
के साथ में किया जा रहा है देश का संविधान
अभी जिंदा है अभी बरकरार है देश में कोर्ट
भी है

अभी किस आधार पर किस कानून के तहत किन
संवैधानिक प्रावधानों के तहत नेशनल हाईवे
पर रोका जा रहा है कीले गाड़ी जा रही
है कंक्रीट की दीवारें खड़ी की जा रही है
और बैरिकेड लगाए जा रहे हैं भाले की तरह

कीड़ें गाई जाए किस अधिकार
से किसी के बाप का राज है अकेले का क्या
जिस तरह से ये सारी चीजें हो रही है यह एक
बहुत ही जघन्य अपराध है यह क्रिमिनल एक्ट
है जो सरकार द्वारा किया जा रहा है सर

जिसकी लाठी उसी की भैस यह वाला हाल चल रहा
है इस वक्त तो अगर यही नियम लागू हो गया
और निजाम बदल गया यानी सरकार बदल गई तो
फिर जिनके हाथ में लाठी आएगी

उन्हे क्या करना चाहिए अगर यही सारी चीजें
रही सरकार चलाने का यह तरीका नहीं है कि
जिसके हाथ में लाठी है वही करे सरकार
चलाने का तरीका है कि संविधान के अनुसार
कानून के अनुसार आप काम करें जो किसान आ

रहे हैं आपने उन किसानों के हाथ में कुछ
ऐसा देखा है कोई कोई हथियार हो कोई लाठी
हो कोई बलम हो कोई भाले हो कुछ देखा है
आपने कुछ उनकी तरफ से कोई ऐसा कोई भी इसी
तरह का कोई काम कुछ देखा है आपने कुछ नहीं

वो केवल सरकार से अपनी बात कहने आ रहे हैं
और वो भी इसलिए कि जब किसान आंदोलन
पहला खत्म हुआ था स्थगित हुआ था उस आंदोलन
के स्थगित होते समय जो समझौता हुआ था
उसमें जो मांगे थी वह सरकार ने पूरी नहीं

की और दो साल बीत गए सो जब सरकार ने मांगे
पूरी नहीं की दो साल बीतने तक भी तब
किसानों को यहां आना पड़ा यहां कोई मतलब
ऐसा है कि बहुत अच्छे रहने सहने के लिए

बहुत वो है कितना आंदोलन करना कितना अपने
आप में कठिन है 13 महीने वोह सड़क पर रहे
कितने बुरे हालात में रहे बरसात में गर्मी
में सर्दी में वह रहे यहां अपने घर परिवार
को छोड़कर रहे और अभी भी अगर ऐसा ही

उन्हें करना पड़ा तो उनका जो संघर्ष कितना
कठिन है कोई नहीं चाहता लेकिन जब सरकार
माने नहीं तो क्या व्यक्ति क्या करेगा
इसीलिए किसान बात करने आ रहे हैं और किसान

बात किसानों से बात ना करके सरकार उनके
रास्ते में जो ये सारे रोड़े अटका रही
क्या लगता है सर सरकार किसानों से डरी हुई
है इसलिए किसानों की आ सरकार का जो मुखिया
है वही अपने आप में बहुत कायर है डरा हुआ
है वह सच्चाई से उसकी टांगे कांपती हैं

सवालों से वह डरता है और किसी को कुछ देने
के हक में वह नहीं है जनता को किसान को
मजदूर को महिलाओं को एससी एसटी ओबीसी
माइनॉरिटी को इस देश की जनता को कुछ भी

देने के हक में नहीं है वो केवल और केवल
अपने यारों का घर भर रहा है जिनकी वो चौखट
को सलाम करता है बस इसलिए यह सारी चीजें
हो रही है अन्यथा होना यह चाहिए कि

किसानों को बहुत सम्मान के साथ आने देना
चाहिए और बैठ के बात करनी चाहिए अगर वाकई
में ज सबका साथ सबका विकास की बात करने
वाला प्रधानमंत्री जो है वह प्रधानमंत्री

अगर सही तरीके से काम करता और अपने इस
नारे को सही मायने में धरती पर उतारता तो
किसानों से मिलने खुद जाता बोलता बताओ
क्या सर यह बात करने का कौन सा तरीका है
कि हजारों की तादाद में ट्रैक्टर आ रहे

हैं हजारों लोग आ रहे हैं तो ये सर इस तरह
से तो बात बनी बन नहीं पाएगी क्यों नहीं
बात बनेगी क्या टांगे कापते हैं उन
ट्रैक्टरों से वो हजार ट्रैक्टर जो आ रहे

हैं उनसे डर लगता है क्या उनकी गड़गड़ाहट
से उनकी आवाज से मोदी की टांगे कांपती है
क्या क्या दिक्कत है उनसे या उसको बदहजमी

हो जाती है या उससे देख के क्या है उसको
बुखार चढ़ जाता है कि क्या बात है मतलब उन
ट्रैक्टरों के आने से इतने लोग आ रहे हैं
यह सही मायने में अगर व्यक्ति राजनीतिज्ञ

होता सो किसानों के बीच में जाता कि मैं आ
रहा हूं
सिंघु बॉर्डर पर शंभू बॉर्डर पर है ना
शंभू बॉर्डर पर इस समय जब मैं आपसे बात कर
रहा हूं 2 लाख से ज्यादा किसान वहां पर

इकट्ठे हैं सही मायने में प्रधानमंत्री को
वहां जाना चाहिए था कि मैं आ रहा हूं तो
आपके बीच में वहां बीच में बैठ के बताओ
भाई क्या बात है क्या दिक्कत है और उनकी

बातें सुनके और कहना था ठीक है ये आपकी जो
मांगे एक हफ्ते में पूरी हो जाएंगी यह है
काम करने का तरीका यह प्रधानमंत्री की
जिम्मेदारी और यह है राजनीति लेकिन

प्रधानमंत्री और उसकी सरकार और सरकार के
जो प्यादे हैं जो ख
यह तो गुंडों की तरह काम कर रहे हैं ये जो
मतलब आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं
गोलियां चलाई जा रही है एसएलआर की गोलियां

चलाई जा रही हैं यह तो गुंडों के काम है
भाई कोई कौन है वो क्या वो पाकिस्तान से
आए हुए लोग हैं क्या चाइना का हमला कर रहे
हैं हमला करने वाले लोग हैं वो नहीं है ना

अपने ही देश के किसान है वो लोग और किसान
सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनका हक
उन्हें दिया जाए देने में क्या दिक्कत
है इतनी व्यवस्था जो सारी चीजें दो-तीन
दिन से वीडियो सामने आ रही है और कितना

लंबा चल पाएगा आंदोलन नहीं आंदोलन कितना
ही लंबा चले और किसानों को भी इस बात की
उन्होंने तय कर रखी है कि आंदोलन कितना
लंबा चलेगा उन्हें नहीं मालूम हमें भी

नहीं मालूम किसी को नहीं मालूम है सरकार
जितने दिन तक लंबा चलवा चाहे चाहे तो एक
दिन में एक घंटे में खत्म हो जाए और सरकार
ना चाहे तो चलता रहेगा तो सर इस बार जो

किसान है ये किसान अपनी जितनी मांगे हैं
उन सारी मांगों को पूरी करवाए बिना पीछे
जाने वाले नहीं है और सरकार में इतनी ताकत
नहीं है कि उनको वहां रोक के रख पाए कुछ
समय की बात है आप देखना सारे जो किसान है

दिल्ली बॉर्डर पहुंचेंगे सर नाक में नकेल
कैसे कैसी जाएगी ये बताइए किसकी नाक में
नकेल मोदी की बिल्कुल सरकार की नाक में
नकेल कस जाएगी ईवीएम हट जाए तो सरकार की

पूरी छुट्टी ही हो जाएगी नकेल की क्या बात
कर रहे हो आप ईवीएम के हटते ही यह सरकार
तास के पत्तों की तरह बिखर जाएगी रेत के
ढेर की तरह साफ हो जाएगी कुछ नहीं बचना है

यह तभी तक है और इसीलिए यह जो काम कर रही
है सरकार जितनी गुंडागर्दी दिखा रही है व
इसलिए दिखा रही है कि उसे लोगों की वोटों
की जरूरत नहीं है क्योंकि वह ईवीएम के
माध्यम से मशीन के माध्यम से जितनी चाहे

वोट छाप लेती है चुरा लेती है जीत के आ
जाती है जिस दिन ये ईवीएम हट गई उस दिन
सरकार घुटनों पर आ जाएगी उस दिन किसी भी
इस तरह के एक भी संगठन की कोई मांग होगी

उसे पूरा करने से पीछे नहीं हटेगी सरकार
सर इस वक्त हलवानी में जो मामला चल रहा है
तानाशाही का उसके बारे में क्या कहना
चाहेंगे उसके बारे में यह कहना चाहूंगा कि

मुसलमानों को घर से निकलना चाहिए अच्छा
अगर मुसलमान घर से नहीं निकलेंगे तो जो
आपके साथ हो रहा है आपने इससे पहले देखा
है कि मणिपुर में क्या हाल हुआ सो आपके
साथ में पहले भी कोशिश की गई थी हलवाने

में विशेषकर और अब ये हो रहा है और य
दिल्ली में भी इस तरह की चीजें की गई
लगातार आपके खिलाफ हो रहा है मुसलमानों के
तो मुसलमान घर में क्यों बैठे हैं मुसलमान

से बोलो ना मुसलमानों चाहिए दिया जाएगा तो
फिर डरते अगर बंद करने से डरते हो जेल
जाने से डरते हो तो बैठे रहो आपके घर में
गर्दन काट देंगे
वोय हो तो का को बोल लो भाई चुप करो बोल

क्यों रहे हो बंद के बैठ जाओ ना घरों में
दुबक के बैठ जाओ ना यूएपीए भी लगेगा एनएसए
भी लगेगा आप पर जो है देशद्रोह भी लगेगा
सब कुछ लगेगा झूठी एफआईआर होंगी जेलों में

बंद किया जाएगा एनकाउंटर भी होगा आपके
घरों को तोड़ा जाएगा आपकी मस्जिदों को
तोड़ा जाएगा इस सबको भी अगर आप नहीं समझते
कि इसके बाद आपको निकलना चाहिए तो का को
बोलते हो घर में बैठो आराम से संविधान और

तानाशाही ये दोनों चीजें एक साथ चल रही है
संविधान को बंद किया जा रहा है संविधान की
नहीं मानी जा रही है सरकार पूरी तरह से
दमन करने पर तुली हुई है उसका दमन बढ़ेगा
अगर लोग इसका विरोध नहीं करेंगे तो विरोध

करेंगे यह दमन रुक जाएगा नहीं करेंगे और
बढ़ेगा सर सभी आंदोलनों को अगर ऐसे रोका
गया जैसे आपने बताया कि आपके आंदोलन को
रोकने के लिए इतनी बड़ी चीज हो गई किसान

आंदोलन इतना बड़ा है उसको ऐसे रोका जा रहा
है तो कैसे लोग निकलेंगे देखिए मोदी सरकार
को यही कहो कि मोदी को सत्ता की हवस है
मैं ये शब्द बार-बार इस्तेमाल करता हूं और

सत्ता के लिए वो कुछ भी कर सकता है मोदी
अमित शाह मोदी सरकार सत्ता पाने के लिए
किसी भी हद तक जा सकते हैं उनका इतिहास
अगर आप जानेंगे तो उनका इतिहास बड़ा रक्त
रंजित इतिहास है सो इसके लिए यह कोई

परेशान होने वाली बात नहीं है कि हम कर
रहे हैं तो हमें रोकने रोकने के लिए हमें
मार दिया जाएगा किसान है उनको रोकने के
लिए उन पर जो है आंसू गैस के गोले छोड़े
जा रहे हैं रबड़ की गोलियां चलाई जा रही

है एसएलआर की गोलियां चलाई जा रही है उनके
ऊपर और कांटे उनके रास्ते में खड़े कर दिए
गए हैं लो की तरह उनकी कंक्रीट की दीवार
ये सब कुछ होगा क्योंकि उन्हें मालूम है
कि अगर यह नहीं वो करेंगे तो कैसे रोकेंगे

इनको सबको रोकेंगे वो उन्हें रोक नहीं पा
रहे हैं और इन सारी चीज से वो रोक भी नहीं
पाएंगे उनकी समझ इस समय बिल्कुल मैं मानता
हूं कि खत्म हो चुकी है अन्यथा इस सबको
रोकने के लिए उन्हें लोगों की बात सुननी

चाहिए लोगों की मांगे माननी चाहिए ताकि
देश में अमन और शांति कायम हो सके और
सरकार चल सके में बने रहने

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