सुप्रीम कोर्ट में हुआ चुनाव आयोग का भांडाफोड़? CJI चंद्रचूड़ ने मांगी रिपोर्ट! - instathreads

सुप्रीम कोर्ट में हुआ चुनाव आयोग का भांडाफोड़? CJI चंद्रचूड़ ने मांगी रिपोर्ट!

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकीलों ने चुनाव
आयोग की नली और ईवीएम हैकिंग को लेकर सवाल
क्या किया भरे कोर्ट रूप में सीजीआई
चंद्रचूड के ठीक सामने चुनाव आयोग की

बोलती बंद हो गई जवाब देते तक नहीं बना और
दूसरे ही पल खबर निकलकर सामने आई कि चुनाव
आयोग ने वोटर लिस्ट से
1.66 वोटर्स को हटा दिया है जी हां बड़ी
खबर निकलकर सामने आई है कि डेढ़ करोड़ से

ज्यादा वोटर्स के नाम अब वोटर लिस्ट से
हटा दिए गए हैं चौंकिए मत यह खबर है और इस
खबर ने बवाल कर दिया है तो क्या खबर है
खबर आप देखिए जनसत्ता की देखिए इसमें लिखा
है कि लोकसभा चुनाव 2024 चुनाव से पहले

ईसी ने वोटर लिस्ट से उड़ाए 1.66 करोड़
नाम सुप्रीम कोर्ट में दिया लेटेस्ट बेरा
तो जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
चल रही है सुप्रीम कोर्ट के ही सीनियर

वकीलों ने याचिका दाखिल की है कि सुनवाई
की जाए कि किस तरीके से चुनाव आयोग धान कर
रहा है किस तरीके से ईवीएम हैकिंग के सबूत
निकल कर सामने आ रहे हैं किस तरीके से

डुप्लीकेट वोटर्स के जरिए वोटिंग करवाई जा
रही है इसी बीच जब चुनाव आयोग से सवाल
किया गया तो खबर निकल कर सामने आई है कि
चुनाव आयोग ने लेटेस्ट ब्योरा सुप्रीम

कोर्ट में पेश किया है और कहना है कि हमने
तो 1.66 वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटा
दिए हैं चुनाव आयोग की तरफ से हवाला दिया
गया है कि यह वोह लोग हैं जिनकी मृत्यु हो

चुकी है या फिर कि प्रदेश में मौज मजूद
नहीं है इसलिए 20224 लोकसभा चुनाव की वोटर
लिस्ट से इनके नाम हटा दिए गए हैं अब सवाल
खड़ा होता है कि अगर नाम ही हटाने थे तो
पहले क्यों नहीं हटाए गए जहां एक तरफ

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल है सीजीआई
चंद्रचूर खुद इस मामले की सुनवाई कर रहे
हैं सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील आरोप
लगा रहे हैं कि डुप्लीकेट वोटिंग करवाई जा
रही है वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना

है कि हमने तो डेढ़ करोड़ नाम हटा दिए अब
ऐसा कुछ नहीं हो होने वाला है तो फिलहाल
डुप्लीकेट वोटिंग को लेकर कैसे फंस गया है
चुनाव आयोग मैं आपको डिटेल में बताती हूं

अगर डुप्लीकेट वोटर्स की बात की जाए तो
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का कहना है कि
डुप्लीकेट वोटर्स तैयार किए जा रहे हैं यह
लाखों की संख्या में है ये वो वोटर्स हैं
जो कि उत्तर प्रदेश में भी वोटिंग करते

हैं मध्य प्रदेश में भी वोटिंग करते हैं
राजस्थान में भी वोटिंग करते हैं और तो और
चुनाव आयोग जो फेजेस में वोटिंग कराता है
उन अलग-अलग फेसेस में जाकर यही वोटर्स कई

बार वोट करते हैं और इनकी संख्या सैकड़ा
या फिर कि हजार नहीं बल्कि लाखों की
संख्या में है और इसी के आधार पर धांधली
की जा रही है वोटों की डुप्लीकेसी की जा

रही है और इसी पर चुनाव आयोग के लेकर जब
याचिका दाखिल की गई तो सीजीआई चंद्रचूर से
तत्काल सुनवाई की मांग की गई और सीजीआई
चंद्रचूर सुनवाई कर भर रहे थे योरा मांगा

गया तो चुनाव आयोग ने कहा कि हमने डेढ़
करोड़ से ज्यादा वोटर्स हटा दिए हैं
फिलहाल ये डुप्लीकेट वोटर को लेकर सुप्रीम
कोर्ट के ही सीनियर वकील भानु प्रताप सिंह
ने क्या कुछ कहा है सुनवाई के दौरान क्या

कुछ हुआ है उन्होंने क्या फैक्ट पेश किए
हैं पहले आप उनका बयान सुनिए फिर इसके बाद
मैं आपको बताती हूं कि कैसे सुप्रीम कोर्ट
में ही जब सीजीआई चंद्रचूर ने डुप्लीकेट

वोटर्स को लेकर सवाल किया तो चुनाव आयोग
की बोलती बंद हो गई आप जान के हैरान होंगे
उन वोटर लिस्ट में अकेले मैं उत्तर प्रदेश
की बात बता रहा
हूं अकेले उत्तर प्रदेश में

लाख वोटर्स
डुप्लीकेट अकेले एक प्रदेश में और बाकी 28
राज्यों और आ केंद्र शासित प्रदेशों में
आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि कितने
वोटर्स डुप्लीकेट
है यह मामला सुप्रीम कोर्ट में था चीफ साब

की कोर्ट में था और इसके साथ साथ मैं कुछ
और डाटा आपके सामने
दूंगा जिससे आप जानेंगे कि इलेक्शन कमीशन
किस कद बेईमान और
निकम्मा जो जिम्मेदारी संविधान ने उसको

सौपी उस जिम्मेदारी को निभा नहीं
रहा और इतनी हेरफेर जिसकी आप कल्पना नहीं
कर सकते मैं कुछ डाटा उसके विषय में आपको
देता हूं यह तो मैंने आपको बताया
डुप्लीकेट किस तरह से डुप्लीकेट किस आधार

पर है डुप्लीकेट है चेहरे से आप पहचान लो
किसी का फोटो एक ही व्यक्ति का फोटो दो
तीन चार जग हो
सकता एक ही व्यक्ति का नाम दो तीन हो सता

इस आधार पर जो डुप्लीकेट है लाख आप कहेंगे
कैसे काम आएंगी यह जो फेज में कराता है ना
इलेक्शन कमीशन यह उसी बेईमानी में काम आते
माना हज दोज या 5000 लोगों की वोट यहां पर
है डुप्लीकेट इस में इस क में पहले फेज

में हो रहा
चुनाव अगली जो है उसम अगले फेज में चुनाव
होगा वहा भी वही वोटर फिर तीसरे में होगा
ये जो लोग हैं ये इस तरह से वोट देके काम
आते हैं अब आप कल्पना कीजिए कि जहां पे

100 वोटों से 50 वोटों से 500 हज दो चज
वोटों से हार जीत होती है वहां 71 लाख
वोटों में कितनी कंटेंस साफ हो जाएंगी तो
सुना आपने सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील

भानु प्रताप सिंह का कहना है कि 17 लाख
डुप्लीकेट वोटर्स तो सिर्फ और सिर्फ उत्तर
प्रदेश में है अगर पूरे देश की बात की जाए
तो आप हैरान हो जाएंगे उनका कहना है कि

इसको लेकर हमने याचिका दाखिल की है और इस
याचिका पर सीजीआई चंद्रचूड़ सुनवाई कर रहे
हैं लेकिन चुनाव आयोग इतना निकम्मा है कि
इसकी इससे जवाब देते नहीं बन रहा है यहीं
पर भानू प्रताप सिंह कहते हैं कि जहां पर

500000 या फिर कि 2000 वोटों से पार्टी का
जीत का अंतर होता है वहीं पर ये डुप्लीकेट
वोटर्स खेल कर देते हैं अगर 500 1000 और
2000 में खेल किया जा सकता है तो 17 लाख
अगर डुप्लीकेट वोटर्स होंगे तो आप समझ

सकते हैं कि किस तरीके से पूरी की पूरी एक
कंसीट ही गायब हो जाएगी तो डुप्लीकेट
वोटर्स वो वोटर होते हैं जो कि खेल बना भी
सकते हैं खेल बिगाड़ भी सकते हैं और इस पर
चुनाव आयोग को जवाब देते क्यों नहीं बन
रहा है सवाल खड़ा होता है दाल का में कुछ

काला है या फिर कि पूरी की पूरी दाल ही
काली है सोचने वाली बात है क्योंकि यह
याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहुंची है और
सीजीआई चंद्रचूर की ही खंडपीठ इसकी सुनवाई

कर रही है सीजीआई चंद्रचूर ने इसको लेकर
सवाल भी किया है क्या सवाल किया गया है
खबर आप देखिए लाइव लॉ की देखिए इसमें लिखा
है कि डुप्लीकेट वोटर प्रविष्टियां कैसे
निर्धारित की जाती हैं सुप्रीम कोर्ट में

चुनाव आयोग से पूछा तो डुप्लीकेट वोटर्स
को लेकर आप क्या कर रहे हैं जब याचिका
पहुंची सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकीलों की
तो उन्होंने पूछा कि आप क्या कर रहे हैं
बताइए इन डुप्लीकेट वोटर्स को लेकर तो

फिलहाल जवाब देते नहीं बना है चुनाव आयोग
ने याचिका का ना ही जवाब दिया है और ना ही
कुछ बोल पाया है फिलहाल क्या कुछ हुआ
सुप्रीम कोर्ट में ध्यान से सुनिए देखिए
खबर में अंदर लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने

सोमवार को मतदाता सूची से डुप्लीकेट
प्रविष्टियों को हटाने के संबंध में कुछ
विशिष्ट प्रश्नों पर भारतीय चुनाव आयोग से
जवाब मांगा है चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की
अगुवाई वाली पीठ ने ईसीआई की ओर से पेश

सरकारी वकील अमित शर्मा से दो
महत्त्वपूर्ण प्रश्न पूछे सबसे पहले ईसीआई
ये कैसे निर्धारित करता है कि कुछ
प्रविष्टियां दोहराई गई हैं तो आप कैसे
निर्धारित करते हैं कि डुप्लीकेट वोटर्स

हैं यानी कि एक आदमी दो जगह मौजूद है आगे
लिखा है कि दूसरे किसी मतदाता की मृत्यु
की जानकारी ईसीआई को कैसे मिलती है और
सबसे बड़ी बात यह होती है कि कुछ लोग मर

गए होते हैं लेकिन उनके नाम पर वोट डाले
जा रहे होते हैं यह वोटिंग कहां से होती
है सवाल नंबर एक और दूसरा यह सवाल खड़ा
होता है कि चुनाव आयोग को कैसे पता चलता
है कि वो व्यक्ति मर गया है या फिर कि
जिंदा है ये दो सवाल किए गए हैं सीजीआई

चंद्र चूर्ण की तरफ से आगे देखिए इसमें
लिखा हुआ है कि जो याचिका लगाई गई है जो
जो याचिका सीनियर वकीलों की तरफ से लगाई
गई है उसमें मीनाक्षी अरोड़ा का कहना है

कि चुनाव आयोग तो कोई सवाल का जवाब देने
के लिए तैयार ही नहीं है हमने याचिका भी
लगाई चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा लेकिन
चुनाव आयोग ने कुछ नहीं बोला मीनाक्षी

अरोड़ा ने कोर्ट में क्या कहा है सुनिए
देखिए खबर में लिखा है कि याचिकाकर्ता की
ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा
ने कहा कि मेरा मुख्य मामला यह है कि जब
मुख्य निर्वाचन अधिकारी अपने सभी जिला

कलेक्टर अधिकारियों को प्रक्रिया पूरा
करने के लिए नोटिस जारी करते हैं वह
मृतकों और स्थानांतरित हो चुके लोगों के
नाम हटाने का उल्लेख करते हैं यानी कि जब

वोटर लिस्ट की दी जाती है तो यह बताया
जाता है कि कौन मर चुका है और कौन उस
प्रदेश में नहीं रहता है लेकिन उन्होंने
डुप्लीकेसी के बारे में बिल्कुल भी जिक्र
नहीं किया जब रिटर्न वापस आता है तो

डुप्लीकेसी का कोई जिक्र ही नहीं होता है
उन्होंने कहा कि ईसीआई ने अपने जवाबी
हलफनामे में इस मुद्दे पर जिक्र नहीं किया
है तो मर गए हैं लोग या फिर के प्रदेश से

बाहर चले गए हैं उसका जवाब तो चुनाव आयोग
दे रहा है लेकिन आखिर डुप्लीकेसी पर जवाब
क्यों नहीं दे रहा है यह सवाल किया गया है
मीनाक्षी अरोड़ा की तरफ से मीनाक्षी

अरोड़ा जो सीनियर वकीलों की तरफ से याचिका
दाखिल की गई है उसको लेकर सुनवाई में
सुप्रीम कोर्ट में शामिल थी फिलहाल
सुप्रीम कोर्ट में कोई जवाब निकलकर सामने

नहीं आया तो खंडपीठ ने निर्देशित किया है
कि जल्द से जल्द जवाब दाखिल किया जाए आगे
देखिए क्या कहा गया है खंडपीठ की तरफ से
जिसको हेड कर रहे थे सीजी चंद्र चण सुनिए

लिखा है खबर में कि इस पर ध्यान देते हुए
खंडपीठ ने ईसीआई को जिला अधिकारियों
द्वारा डाटा संग्रह में दोहराव का उल्लेख
ना करने और मृत्य स्थानांतरित या
व्यवहारिक रूप से समान प्रविष्टियों वाले

मतदाताओं के नाम की उपस्थिति के मुद्दे के
संबंध में अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने का
निर्देश दिया है तो पूरी खबर का लबो लबाब
यह है कि याचिका दाखिल की गई है आप जानते
हैं कि संविधान बचाव ट्रस्ट एक है उसकी

तरफ से याचिका लगाई गई है और ईवीएम हटाओ
और बैलेट पेपर से चुनाव कराओ की मांग की
जा रही है इसके तहत कहा गया कि जो लोग
डुप्लीकेट वोटिंग कर रहे हैं उन पर जवाब

दिया जाए जवाब पहले चुनाव आयोग से मांगा
गया चुनाव आयोग ने जवाब नहीं दिया तो यह
मामला याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट में
पहुंच गया सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो जो

वकील हैं उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तो
जवाब देने के लिए तैयार ही नहीं है और जब
यह सीजीआई चंद्रचूड़ को पता चला तो खंडपीठ
ने निर्द निर्देशित किया है कि आप जल्द से

जल्द जवाब दीजिए और बताइए कि डुप्लीकेसी
को लेकर आपने क्या किया है और आपको कैसे
पता चलता है कि डुप्लीकेट वोटिंग नहीं हो
रही है तो यह है वह पूरा मामला जिसने
सामने आते ही बवाल खड़ा कर दिया है यह है

वह पूरा मामला जब सामने आया तो चुनाव आयोग
ने तुरंत आनंद फानन में जवाब दिया है कि
हमने तो डेढ़ करोड़ वोटर्स के नाम वोटर
लिस्ट से हटा दिए हैं तो यह एक्शन क्यों

लिया गया अब क्यों लिया गया सवाल खड़ा
होता है फिलहाल चुनाव आयोग ने जिस तरीके
से डेढ़ करोड़ लोगों के नाम हटाए हैं उस
पर आप क्या सोचते हैं क्या यह वही वोटर्स
हैं जो कि डुप्लीकेट वोटर्स के तौर पर काम

कर रहे थे इस सवाल के जवाब में इस पूरी
सुनवाई पर इस खबर पर आपकी क्या राय है
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